मेरी बातें

हर नाता मतलब का नाता

जग में हर एक नाता है मतलब का नाता
इसीलिये पंछी को ये जग नहीं सुहाता ||
जगवालों ने सोने का पिंजरा बनवाया, और पकड़ कर पंछी को उसमें बैठाया
उसके पंख काटकर पिंजरा बन्द कर दिया, और बहुत सा दाना पानी उसमें भरवाया |
पर पंछी था उसमें बैठा रोता रहता
क्योंकि उसको जग का मायाजाल न भाता ||
स्वर्णकार के कौशल का था रूप अनूठा, वह मणिमण्डित अद्वितीय सोने का पिंजरा
उसमें पड़ा हुआ दाना हीरा मोती था, एक जौहरी ही जिसका मोल बता सकता था |
पर पंछी का पेट न हीरा मोती भरता
उससे था वह अपने जीवन का भय खाता ||
पिंजरे में गुमसुम बैठा वह सोच में डूबा, आता जाता हर प्राणी उसको तड़पाता
खेल खेल में कोई उसके पंख नोचता, और कोई ऊँगली से उसकी चोंच पकड़ता |
पर उसके आँसू पर कोई ध्यान न देता
बस हर कोई उससे अपना मन बहलाता ||
एक दिन यों ही उसने अपने पंख जो देखे, बढ़े हुए थे फिर से वे पहले के जैसे
फिर से उड़ जाने की मन में आस लिये वह, लगा टकटकी द्वार किनारे वह जा बैठा |
फिर से पंख काटने हित था द्वार खुला जब
अवसर देख उड़ा पंछी फिर पेंग बढ़ाता ||
पल भर को सब हाथों को मलते ही रह गए, पुनः पकड़ने हित फिर उसके पीछे भागे
कभी पुकारा झूठी देकर प्रेम दुहाई, और कभी एक भद्दी सी गाली भी दे दी |
पर पंछी ऊँचा ही ऊँचा उड़ता जाता
जग से शिक्षा पा फिर उसके हाथ न आता ||

गंगाजल खुद हव्य बन गया

कैसी अनबुझ प्यास है देखो, गागर है प्यासी की प्यासी |
तृप्तिमन्त्र भी काम न आए, गंगाजल खुद हव्य बन गया ||
मैंने अपने घर की क्यारी में एक नेहवृक्ष लगवाया
और प्यार के ही जल से था मैंने उसको खुद ही सींचा |
पर मौसम ने करी दुश्मनी, नन्हा प्रेमवृक्ष झुलसाया
तृप्तिमन्त्र भी काम न आए, गंगाजल खुद हव्य बन गया ||
बहते आँसू के संग देखो उम्र यहाँ है ढलती जाती
और अतृप्त कामना देखो घोर भँवर में डूबी जाती |
है पूनम की रजनी लेकिन घाम जेठ का है गरमाया
तृप्तिमन्त्र भी काम न आए, गंगाजल खुद हव्य बन गया ||
जिसने मन का मोती लूटा, सीपी का दुःख वह क्या जाने
जिसका है अस्तित्व मिट गया, कैसे सँभलूँ, वह क्या जाने |
कुछ तो भूल समर्पण में थी यौवन को जो शाप लगाया
तृप्तिमन्त्र भी काम न आए, गंगाजल खुद हव्य बन गया ||
भटक रहा मन कबसे बादल के समान सूने अम्बर में
और सदा मरता व्यक्तित्व मौन हो, जग के कोलाहल में |
झूठा स्नेहदान देकर यह कौन आज छल करने आया
तृप्तिमन्त्र भी काम न आए, गंगाजल खुद हव्य बन गया ||

2 thoughts on “मेरी बातें

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