आज होली है

कैसा मतवाला दिन आया

कैसा मतवाला दिन आया, रंग अबीर गुलालों वाला |
तन तो डूब गया रंगों में, पर मन को किसने रंग डाला ||१||
डाली डाली में थिरकन है, फूल फूल भी महक रहा है |
रंगों की चादर को ओढ़े पत्ता पत्ता चहक रहा है ||
गोरी के नयनों में अमृत का रंग किसने है भर डाला ||२||
आज धरा का वासंती आँचल रंगों में भीग रहा है |
दूध धुले गालों पर चांदी का रंग देखो चमक रहा है ||
किसको देखा, जो लज्जा से लाल हुआ मुख भोला भाला ||३||
कहती है धरती रंगों की एक प्यारी मदभरी कहानी |
ऐसे में बोलो फिर नभ से कैसे ना होगी नादानी ||
रंगों को छलकाकर किसने अद्भुत आज रास रच डाला ||४||
हर घर आँगन शोर मचा है, जग ये सारा रंग रचा है |
गोरी के कजरारे नयनों में मस्ती का रंग भरा है ||
मस्ती के मधुघट को देखो किसने आज रिक्त कर डाला ||५||

मनभावन त्यौहार

आज कौन इस पार, कौन उस पार है
राग रंग में रंगा मिलन का मनभावन त्यौहार है ||१||
कण कण है रंगीन नए रंग घोलता,
पात पात है मस्त पवन संग डोलता |
लहर लहर लहराता देखो कितना निर्मल नीर है
थिरक रही चांदनी गगन में, कौन कहो गंभीर है ?
वासंती धरती भी करती आज सरस मनुहार है
राग रंग में रंगा मिलन का मनभावन त्यौहार है ||२||
हरीतिमा भू पर भिखरी है, चटख रही है कली कली,
गूँज धमार और होली की गूँज रही है गली गली |
चेहरे चेहरे पर मुस्कानें, उर उर में उल्लास है
पग पग में नूतन नर्तन है, कैसा अद्भुत रास है ||
छाया है मधुमास चतुर्दिक, आज बसंत बहार है
राग रंग में रंगा मिलन का मनभावन त्यौहार है ||३||
आज अधूरा गीत न कोई रह जाए,
चुभने वाली बात न कोई कह जाए |
मिल कर बिछड़े आज न देखो जन कोई
जुडकर टूटे आज न देखो सपन कोई ||
देखो आज धूल ने भी तो किया हार सिंगार है
राग रंग में रंगा मिलन का मनभावन त्यौहार है ||४||

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