मेरी बातें

मिल कर बह लें साथ साथ ||

आओ जी लें साथ साथ, कुछ कह लें सुन लें साथ साथ |
हम दोनों सागर की दो लहरें, मिल कर बह लें साथ साथ ||
माना हम थे अनजान, मगर अब बने एक पथ के राही
एकाकीपन का भार चलो अब हल्का कर दें हम राही |
कुछ पल हैं हँसने के, इनको हम मिलकर जी लें साथ साथ
हम दोनों सागर की दो लहरें, मिल कर बह लें साथ साथ ||
उल्लासों की सारी निधियाँ आओ लय कर लें अपने में
और मधुर प्यार से करुणा की कुछ बूँदें भर लें अपने में |
स्नेहों के चुम्बन से एक दूजे को हम रंग लें साथ साथ
हम दोनों सागर की दो लहरें, मिल कर बह लें साथ साथ ||
जग के उपवन में जितनी ये वासन्ती शोभा फैल रही
पतझर के आते ही प्रियतम सारी सुषमा मुरझाएगी |
मुरझाना शाश्वत है, तो क्यों ना मिलकर खिल लें साथ साथ
हम दोनों सागर की दो लहरें, मिल कर बह लें साथ साथ ||

मनुहार

मनचाहे इठलाती रजनी में मीठी मनुहार करूँ |
तुम्हें रिझाने हित सगरी रैना पायल झनकार करूँ ||
है मुखर बहुत मेरी पायल, विरही मन भी सुन थिरक उठे |
तुम भी थिरको संग मेरे और मैं संयम से लयकार करूँ ||
चन्द्रकिरण संग तुम आए ऊषा के संग फिर जाओगे |
तुम रुक जाओ इसीलिये तो ऊषा का सत्कार करूँ ||
रजनी चंदा को रोक रही मलयानिल का लेकर सौरभ |
मैं भी अंगों में मलय गंध भर सारी रात विहार करूँ ||
अनुराग बिना तुम क्या जानो जीवन का घोर विराग भला |
बस यही तुम्हें समझाने हित मैं ता थेई थेई ततकार करूँ ||

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