शुभ दीपावली

प्रिय मित्रों, व्यक्तिगत व्यस्तताओं के चलते बहुत दिन अपने ब्लॉग और “चेहरों की क़िताब” से दूरी रही, लेकिन प्रकाश पर्व ने कुछ लिखने को विवश कर दिया | आप सभी को इस उल्लासपर्व की झिलमिल झिलमिल करती शुभकामनाएँ…

एक एक दीपक से सारे जग के आओ दीप जलाएँ
जिनकी झिलमिल आभा में ये चाँद सितारें भू पर आएँ |
साज सजें ऐसे जिन पर सब मिलकर दीपक राग सजाएँ
और धरा आकाश गले मिल मस्त मगन मन नृत्य दिखाएँ ||
जन जन का जीवन आलोकित करने हित हम नेह बढ़ाएँ
और बाती को थोड़ा उकसा कर दीपक की जोत बढ़ाएँ |
भेद भाव और व्यंग्य बाण सब दीपशिखा की भेंट चढ़ाएँ
और सद्भावों की आभा फिर जग के कण कण में फैलाएँ ||
देखो चन्द्रकिरण देती है जग को नवयुग का अभिनन्दन
इसी अकौकिक आभा का आओ हम सब कर लें आलिंगन ||
दीपमालिका का प्रकाश जन जन की राहों में फैलाएँ
भागे दूर अँधेरा और सबके मन स्वर्ण कमल खिल जाएँ ||

दीपावली का यह पर्व सभी के लिये मंगलमय हो… पूर्णिमा

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