मैं औरत ही रहना चाहूँ

फरवरी २०१४ में प्रकाशित एक रचना एक मित्र के अनुरोध पर…

मैं नहीं कोई प्रस्तर प्रतिमा, देवी सम जो पूजी जाऊँ |
मैं जीव शक्ति पूर्ण सदा एक औरत ही रहना चाहूँ ||
है नहीं कामना स्वर्गलोक की, भू पर ही है घर मेरा |
मुझको न बनाओ परलौकिक, है इसी लोक आँगन मेरा ||
हों पैर धरा पर टिके हुए, तो गिरने का ना भय रहता |
और ऊँचा उठने को अपनी ही जड़ का एक सम्बल मिलता ||
मुझमें हैं अनगिन रंग भरे, हूँ राग रंग का संगम मैं |
हैं मिले मुझे वरदान प्रकृति के सारे, जिनसे गर्वित मैं ||
बलखाती नदिया के जैसी मुझमें चंचलता भरी हुई |
पर सागर सी गहराई भी मेरी रग रग में छिपी हुई ||
आँधी सा मेरा वेग, मगर मन में एक नीरवता भी है |
हो अंगों में आलस्य, मगर मुझमें एक चेतनता भी है ||
है बिजली की दाहकता भी, मलयानिल की शीतलता भी |
हो मन्द समीर बहे जैसे, ऐसी बहती जाती मैं भी ||
मस्ती का मधुघट मुझमें है, हूँ नित उछाह से भरी हुई |
मैं मुक्त गगन में पंछी के सम नित ऊँची उड़ना चाहूँ ||
मैं नहीं कोई प्रस्तर प्रतिमा, देवी सम जो पूजी जाऊँ |
मैं जीव शक्ति पूर्ण सदा एक औरत ही रहना चाहूँ ||

20150926_164118

Advertisements

Author: Astrologer DR. Purnima Sharma Katyayani

• कवियित्री, लेखिका, ज्योतिषी | ज्योतिष और योग से सम्बन्धित अनेक पुस्तकों का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद | पिछले लगभग तीस वर्षों से ज्योतिषीय फलकथन | करती आ रही हैं | कई वर्षों तक विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी साप्ताहिक भविष्य तथा अन्य ज्योतिष और वैदिक साहित्य से सम्बन्धित लेखों का सफल प्रकाशन | ज्योतिष के क्लायिन्ट्स की एक लम्बी लिस्ट | कुछ प्रसिद्ध मीडिया कम्पनीज़ के लिये भी लेखन | प्रकाशित उपन्यासों में अरावली प्रकाशन दिल्ली से देवदासियों के जीवन संघर्षों पर आधारित उपन्यास “नूपरपाश”, भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में नारियों के संघर्षमय जीवन की झलक प्रस्तुत करता भारतीय पुस्तक परिषद् दिल्ली से प्रकाशित उपन्यास “सौभाग्यवती भव” और एशिया प्रकाशन दिल्ली से स्त्री पुरुष सम्बन्धों पर आधारित उपन्यास का प्रथम भाग “बयार” विशेष रूप से जाने जाते हैं | साथ ही हिन्दी अकादमी दिल्ली के सौजन्य से अनमोल प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित “मेरी बातें” नामक काव्य संग्रह भी पाठकों द्वारा काफी पसन्द किया गया | • WOW (Well-Being of Women) India नामक रास्ट्रीय स्तर की संस्था की महासचिव के रूप में क्षेत्र की एक प्रमुख समाज सेविका | • सम्पर्क सूत्र: E-mail: katyayanpurnima@gmail.com

2 thoughts on “मैं औरत ही रहना चाहूँ”

  1. स्त्री मन की कोमल भावनाओँ का सुंदर सँप्रेषण किया है आपने अपनी इस रचना मेँ….लिखती रहिये

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s