ऐसी होरी की न कौनो उपमा जहान में

मित्रों, होली का हुडदंग शुरू हो चुका है | यों रंग खेलने की होली १७ मार्च को है, पर बच्चों ने तो कई दिन पहले से ही आते जातों पर रंग फेंकना शुरू कर दिया था | और सदा से ही रंग की एकादशी के साथ ही बड़े भी एक दूजे को रंगने लग जाते हैं | तो होली के इस रंगारंग पर्व की रंग और मस्ती भरी ढेर सारी शुभकामनाएँ… “एडवांस” में…

ऐसी खेले होरी, कान्हा करे बरजोरी
कैसो निपट अनारी, मोरी बैयाँ दी मरोर है |
रंग डारो अबीर गुलाल भर मुठिया में
टेसू रंग भर छोड़े वो तो पिचकारी है ||
रंग डारे कान्हा, सारी चुनरी भिगाय देत
रंग भीगी चोली वाके तन से लिपट जात |
भीगी सारी, भीगी चोली, अब कहाँ जाए गोरी
कान्हा अब बाँकी चितवन से निहारे है ||
मन में उमंग भरी गोरी मुसकात देखो
ऊपर से मुँह भर भर देत गारी है |
धरती गगन हुए आज लाल लाल देखो
ऐसो चहुँदिसि आज उड़त गुलाल है ||
छेड़ करत कान्हा, गोरी मुख चूम लेत
मन में लजात गोरी, अँखियाँ तरेर देत |
काफी और फाग गाए, मन में हुलास भर
ऐसी होरी की न कौनो उपमा जहान में ||

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