बयार

मर्द शायद डरते हैं कि अगर औरतों ने भी आसमान को छू लिया तो उनकी पुरुष प्रधान सत्ता का क्या होगा | यों बड़ों के संसार में चिड़ियों का होना ना होना कोई अर्थ नहीं रखता, पर बच्चों के लिये रखता है | चिड़िया अपनी नियति के साथ प्रसन्न रह सकती है, उदास होना उसे नहीं आता, उस स्थिति में भी जबकि उसे पता होता है कि बाज घात लगाए बैठा है | वो हर स्थिति में बस अपनी स्वच्छन्द उड़ान को गति और स्वच्छन्द गान को लय देती रहती है | हम उसका घोसला उजाड़ सकते हैं, उसके पैर बाँध बच्चों के लिये खिलौना बना सकते हैं, उसके पंख काट पिंजरे में क़ैद कर सकते हैं, फिर भी वो हमारे आगे हाथ नहीं जोड़ती, हमारे पाँव नहीं पड़ती, हमसे दया की भीख नहीं माँगती | औरत की भी तो यही स्थिति है | पाँव उसके पाताल में गहरे पैठे होते हैं तो हाथ आकाश की ऊंचाइयों को छू रहे होते हैं | अपनी उँगलियों की पोरों में वो चाँद सितारों के साथ आँख मिचौली खेल रही होती है | यही कारण है कि उसकी ओर ललचाई दृष्टि से देखने वाला पुरुष उसे अपनी मिलकियत समझ सहेजना चाहता है | वह वृक्ष के मूल की भाँति सदैव ज़मीन से जुड़ी होती है | पानी की भाँति तरल होती है | पाताल के सामान गहरी होती है तो पर्वत सी ऊँची भी होती है | सम्पूर्ण पृथिवी नारीरूपा है और हर नारी पृथिवीरूपा, जो तरह तरह के शारीरिक और मानसिक बोझ ढोकर भी टूटती नहीं, दरकती नहीं | निरन्तर ऊर्जा से ओत प्रोत, कभी अमृत कलश ले देव दानवों के भाग्य का निर्माण करती है तो कभी अनसूया की भाँति तीनों देवों की माता भी बन जाती है |
बयार – प्रकाशक एशिया पब्लिशर्स, ए ३६, चेतक अपार्टमेंट्स, सेक्टर ९, रोहिणी, दिल्ली-८५

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s