Monthly Archives: August 2016

मन का बिरवा

आज सुबह से अच्छी खासी बारिश हो रही है – मुरझाई प्रकृति में मानों नए प्राण मिल गए हों – बादलों का गम्भीर गर्जन मानों मृदंग की थाप… कोयल की पंचम के संग सुर मिलाते पपीहे की पियू पियू……

स्रोत: मन का बिरवा

मन का बिरवा

आज सुबह से अच्छी खासी बारिश हो रही है – मुरझाई प्रकृति में मानों नए प्राण मिल गए हों – बादलों का गम्भीर गर्जन मानों मृदंग की थाप… कोयल की पंचम के संग सुर मिलाते पपीहे की पियू पियू… पवन देव से मिल कर मतवाली हो चुकी बूँदों का मधुरिम गान… और इस सबको देख कर मस्त हुई दामिनी का मादक नृत्य… कौन पत्थरदिल होगा जिसके मन का बिरवा ऐसे शराबी मौसम में झूम न उठेगा…

कजरारी बरसात जो आई, मन का बिरवा नाच उठा |

बूँदों के संग सतरंगी सपनों में वह तो झूम उठा ||

सिहर सिहर पुरवैया चलती, धरती सारी लहराती |

वन में मोर मोरनी नाचें, कोयलिया गाना गाती ||

आसमान भी सात रंग की सुर संगम सुन झूम उठा |

बूँदों के संग सतरंगी सपनों में वह तो झूम उठा ||

आज मेघ पर चढ़ी जवानी, बौराया सा फिरता है |

किन्तु पपीहा तृप्त हुआ ना, ये कैसा पागलपन है ||

मस्त बिजुरिया की तड़पन को लख कर वह भी हूक उठा |

बूँदों के संग सतरंगी सपनों में वह तो झूम उठा ||

जिस पपिहे की प्यास बुझा पाया ना कोई भी बादल

अरी दामिनी, मधु की गागर से तू उसकी प्यास बुझा ||

घन की ताधिन धिन मृदंग पर पात पात है झूम उठा |

बूँदों के संग सतरंगी सपनों में वह तो झूम उठा ||

6

 

प्रेम का लक्ष्य

प्रेम पहुँचता है अपनी पूर्णता पर जब दो व्यक्ति लाँघ जाते हैं सारी सीमाएँ और खो जाते हैं एक दूसरे में मिला देते हैं अपना अपना अस्तित्व सदा के लिए एक दूजे में रोप देते हैं बीज नि:स्वार्थ मासूम प्रेम …

स्रोत: प्रेम का लक्ष्य

प्रेम का लक्ष्य

प्रेम पहुँचता है अपनी पूर्णता पर

जब दो व्यक्ति

लाँघ जाते हैं सारी सीमाएँ

और खो जाते हैं एक दूसरे में

मिला देते हैं अपना अपना अस्तित्व

सदा के लिए एक दूजे में

रोप देते हैं बीज

नि:स्वार्थ मासूम प्रेम से युक्त नई सृष्टि का

जहाँ हो जाती हैं

दोनों की भावनाएँ और सम्वेदनाएँ एकरूप

जहाँ न भाव होता है न अभाव

होती है बस पूर्णता

लिए हुए अपार विस्तार

कि पूर्ण होने के बाद भी

सब कुछ रहे रिक्त / शून्य

नहीं रहता जहाँ भाव द्वैत का

तब बन जाता है प्रेम

भक्ति और ध्यान

जो ले जाते हैं व्यक्ति को

मार्ग पर उसके चरम लक्ष्य के

लक्ष्य ?

समस्त जड़ चेतन में समभाव रखते हुए

सांसारिक सुखों से ऊपर उठकर

संस्कारों का ऋण चुकाकर

मोक्ष की प्राप्ति का……

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