अर्थों को सार्थकता दे दें

katyayani.purnimakatyayan

शब्दों के उदास होने पर अर्थ स्वयं पगला जाते हैं |

आओ शब्दों को बहला दें, अर्थों को सार्थकता दे दें ||

दिल का दीपक यदि जल जाए, जीवन भर प्रकाश फैलाए

और दिये की जलती लौ में दर्द कहीं फिर नज़र न आए |

स्नेह तनिक सा बढ़ जाए तो दर्द कहीं पर छिप जाते हैं

आओ बाती को उकसा दें, प्रेममयी आभा फैला दें ||

शूलमध्य कुछ पुष्प खिलें तो उपवन का यौवन बढ़ जाए

और अनगिनत मस्त तितलियाँ उसके आस पास मंडराएँ |

होकर उनसे आकर्षित, कुछ भ्रमर वहाँ फिर आ जाते हैं

आओ उनका मिलन करा दें, स्नेह का कुछ सौरभ महका दें ||

बहते आँसू से लिख डाली जिसने अपनेपन की गीता

कैसे कह सकते हो उसको, वह है अपनेपन से रीता ?

होता है पीड़ित जब मन, कुछ गीत अधर पर आ जाते हैं

आओ, जिनको ढूँढा है, उन गीतों को भी कुछ चहका…

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Author: Astrologer Katyayani - Your Astro Life Coach

• कवियित्री, लेखिका, ज्योतिषी | ज्योतिष और योग से सम्बन्धित अनेक पुस्तकों का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद | कुछ प्रसिद्ध मीडिया कम्पनीज़ के लिये भी लेखन | प्रकाशित उपन्यासों में अरावली प्रकाशन दिल्ली से देवदासियों के जीवन संघर्षों पर आधारित उपन्यास “नूपरपाश”, भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में नारियों के संघर्षमय जीवन की झलक प्रस्तुत करता भारतीय पुस्तक परिषद् दिल्ली से प्रकाशित उपन्यास “सौभाग्यवती भव” और एशिया प्रकाशन दिल्ली से स्त्री पुरुष सम्बन्धों पर आधारित उपन्यास का प्रथम भाग “बयार” विशेष रूप से जाने जाते हैं | साथ ही हिन्दी अकादमी दिल्ली के सौजन्य से अनमोल प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित “मेरी बातें” नामक काव्य संग्रह भी पाठकों द्वारा काफी पसन्द किया गया | • WOW (Well-Being of Women) India नामक रास्ट्रीय स्तर की संस्था की महासचिव के रूप में क्षेत्र की एक प्रमुख समाज सेविका | • सम्पर्क सूत्र: E-mail: katyayanpurnima@gmail.com

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