शब्द अमरता पा जाते हैं

astrologerkatyayani

शब्द अमरता पा जाते हैं

शब्दों का अस्तित्व यही, पल भर में व्यर्थ वो हो जाते हैं
किन्तु मौन की भाषा को सब युगों युगों तक दोहराते हैं |
पल भर को एक कथा सुनाकर शब्द राह अपनी चल देते
किन्तु मौन में जड़े शब्द निज छाप अमिट पड़वा जाते हैं ||
शब्दों से कोलाहल बढ़ता, नित नवीन कोई घटना घटती
और विचित्र कोई अर्थ बताकर इतिहासों में गुम हो रहती |
किन्तु मौन के अर्थ अनेकों, शान्त हृदय से समझे जाते
और नया एक काव्य रचाकर अजर अमर वो हो जाते हैं ||
शब्दों का क्या, होठों पर आते ही बासी हो जाते हैं
और पकड़ ले अगर लेखनी, मूक चित्र तब बन जाते हैं |
किन्तु मौन की अथक साधना में है देखो कितनी क्षमता
भाव होठ तक आते आते अमृत ही बरसा जाते हैं ||
बिना मौन का साधन करके शब्द अगर होठों पर आते
अर्थहीन, बलहीन…

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2 thoughts on “शब्द अमरता पा जाते हैं

  1. कल्पवृक्ष

    बहुत सुंदर व्याख्या किया है आपने शब्दों का…हाँ शब्द ही तो है जो पन्नो पर सज जाते है हृदय में बस जातें है..👌

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