ढेर सारा प्यार बिटिया…

तू मेरे साँसों की सरगम, मन वीणा की तू ही रागिनी |

तुझसे ही जीवन में खुशियों की बजती है मधुर रागिनी ||

तुझको पाकर धन्य हुई मैं, पूर्ण हुई और तृप्त हुई मैं |

तुझमें अपना रूप देखकर सदा ख़ुशी से मस्त हुई मैं ||

तेरी मुस्कानों से ही तो जीवन उजियाला है मेरा |

और तेरी साँसों से हर पल घर ये महकाता है मेरा ||

तू ही मेरे दिल की धड़कन, आँखों का काजल भी तू ही |

सपने में देखा था जिसको ऐसी मेरी गुड़िया तू ही ||

तुझसे ही होली है मेरी, और दिवाली भी तुझसे ही |

सारी पूजा और अर्चना मेरी सजती है तुझसे ही ||

ओ मेरी नन्ही सी गुड़िया आज हो गई तनिक बड़ी तू |

तुझ पर मुझको गर्व सदा है, आगे बढ़ती रहे सदा तू ||

प्यारी बिटिया, जब तुम बच्ची थीं तो तुम्हें पालने का सुख असीम था | आज बड़ी होकर तुम बन गई हो अपनी माँ और बाबा दोनों की हमराह | हम दोनों को सदा तुम पर गर्व है बेटी | तुम्हारे कारण सदा हमारा मान बढ़ा है | तुम सदा ऐसी ही नेक इन्सान बनी रहो जो सदा सबका हित सोचती है, तुम्हारे सारे सपने सच हों, जीवन की सारी खुशियाँ तुम्हारी झोली में हों, और तुम सदा अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ती जाओ, बस ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं… कल तुम एक और नए साल में प्रवेश करोगी… तुम्हारे जन्मदिवस पर ढेर सारा प्यार भरा आशीर्वाद बिटिया…

 

शुभ प्रभात

सरल और सुखी जीवन के लिए आवश्यक है हम अकारण ही प्रसन्न रहना सीख जाएँ, सदा व्यस्त रहने का प्रयास करें, भयहीन रहें, स्वयं पर और स्वयं की योग्यताओं पर विश्वास रखते हुए बड़े स्वप्न देखें और अपनी कल्पनाओं को – अपने स्वप्नों को – सत्य करने के लिए प्रयासरत रहें, अपनी भावनाओं को खुलकर अभिव्यक्त करना सीखें, हर जड़ चेतन के साथ निस्वार्थ भाव से प्रेम का व्यवहार करें, सहृदय और क्षमाशील बनें, और इन सबसे भी बढ़कर वर्तमान में जीना सीखें | और ये सब हमें सिखा सकता है एक छोटा बच्चा |

कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हम शान्त और प्रसन्न भाव से अपने ही भीतर के बच्चे के साथ क्रीड़ा आरम्भ कर दें तो न केवल शान्ति और प्रसन्नता के साथ सरलता से जीवनयापन कर सकते हैं अपितु जीवन में बहुत महान कार्य भी कर सकते हैं | क्योंकि हम अपने भीतर के बच्चे को भूल जाते हैं इसीलिए दुखी और अशान्त रहते हैं | तो आइये अपने भीतर के इस सोए हुए बालक को जगाएँ और उससे शिक्षा लेकर आगे बढें… जीवन सरल हो जाएगा…

बच्चा