पञ्चांग – राहुकाल

प्रत्येक दिन का एक भाग राहुकाल माना जाता है | दिनमान को आठ भागों में विभक्त करके राहुकाल की गणना की जाती है | क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग अलग स्थानों पर अलग अलग होता है इसलिए राहुकाल का समय और अवधि भी हर स्थान पर अलग हो सकते हैं | प्रायः इसका समय डेढ़ घंटे का रहता है जो दिनमान की अवधि के अनुसार कम अथवा अधिक भी हो सकता है | इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरम्भ करने की सलाह Vedic Astrologer नहीं देते |

अन्त में, शुभाशुभ मुहूर्त से भी ऊपर व्यक्ति का अपना कर्म होता है | व्यक्ति में सामर्थ्य और सकारात्मकता है तथा कार्य करने का उत्साह है तो वह अशुभ मुहूर्त को भी अनुकूल बना सकता है | कोई भी Good Astrologer अशुभ मुहूर्त का भय न दिखाकर उचित मार्गदर्शन ही करता है |

अस्तु, हम सभी कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करें…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2017/12/22/%e0%a4%aa%e0%a4%9e%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2/

 

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