अभिजित मुहूर्त

पञ्चांग के अन्तर्गत हमने पञ्चांग के पाँचों अंगों पर चर्चा के साथ ही राहुकाल, यमगंड और गुलिका पर भी बात की | अब बात करते हैं अभिजित मुहूर्त की | अभिजित नक्षत्र का काल अभिजित मुहूर्त कहलाता है | इसका देवता ब्रह्मा को माना जाता है और किसी भी कार्य के लिए इसे शुभ माना जाता है | अभिजित शब्द का अर्थ ही है जो सदा विजयी रहे – जिसे जीता न जा सके – जिसे हराया न जा सके | अतः यह तो निश्चित ही है कि इस मुहूर्त में किया गया कार्य शुभ फलदायी होगा तथा उसके पूर्ण होने की सम्भावना भी प्रबल होगी |

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