बिल्वपत्रं शिवार्पणम्

रात निशीथ काल में सभी शिवभक्तों ने भगवान शिव का अभिषेक किया आज दिन में भी मन्दिरों में भगवान शंकर के अभिषेक के लिए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था | Vedic Astrologers तथा पण्डितों के अनुसार इस अवसर पर गंगाजल, चन्दन, गाय का दूध और घी तथा मधुमिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है और बिल्वपत्रों से उनका शृंगार किया जाता है | बिल्ववृक्ष अर्थात बेल के वृक्ष को अमर वृक्ष, बिल्व फल को अमर फल तथा बिल्व पत्र को अमर पत्र की संज्ञा भी दी जाती है | औषधीय रूप में समूचा बिल्ववृक्ष विशेष महत्त्व रखता है तथा शीतलता प्रदान करने वाला माना जाता है | मान्यता है कि समुद्र मन्थन के समय जब भगवान महादेव ने हलाहल का पान कर लिया था उस समय गंगाजल, दूध, दूध, घी मधु तथा बिल्वपत्रों आदि के द्वारा उनका विष का ताप दूर करने का प्रयास किया गया था | बिल्वपत्र को समस्त प्रकार के तापों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है |

एक बिल्वपत्र में तीन पत्तियाँ परस्पर जुड़ी हुई होती हैं और उन्हें भगवान शिव को समर्पित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि पत्तियों में किसी प्रकार का कोई छिद्र आदि न हो तथा कोई पत्ती टूटी हुई न हो | बिल्वपत्र को उल्टा करके चढ़ाते हैं – अर्थात उसका चिकना भाग शिवलिंग पर रखते हैं | साथ ही बिल्वपत्र के साथ जलधारा भी निरन्तर प्रवाहित रहनी चाहिए – बिना जल के बिल्वपत्र अर्पित नहीं किये जाते | ऐसी भी मान्यता है कि यदि नूतन बिल्वपत्र न मिलें तो पहले से अर्पित किये गए बिल्वपत्रों को भी बार बार धोकर भोले बाबा को अर्पित किया जा सकता है…

अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन: ।

शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित् ।।

धार्मिक मान्यता ऐसी भी है कि बिल्ववृक्ष की मूल में भगवान शंकर का वास होता है और जो बिल्व के मूल में लिंगरूपी महादेव की पूजा अर्चना करता है वह व्यक्ति पुण्य का भागी होता है…

बिल्वमूले महादेवं लिंगरूपिणमव्ययम् ।

य: पूजयति पुण्यात्मा स शिवं प्राप्नुयाद् ॥

भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करते समय “श्री बिल्वाष्टकम्” के निम्न मन्त्र का जाप किया जाता है…

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् |

त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||

तीन दल अर्थात पत्रों से युक्त, सत्व रज तम रूपी त्रिगुणस्वरूप, तीन काल और तीनों लोक रूपी तीन नेत्रों से युक्त, तीन आयुध स्वरूप तथा तीनों जन्मों के पापों का संहार करने वाला बिल्वपत्र हम शिव को समर्पित करते हैं |

हमारे द्वारा श्रद्धा भक्तिपूर्वक अर्पित किया गया बिल्वपत्र भगवान शिव स्वीकार करें, इसी कामना के साथ व्रत का पारायण करते हुए प्रस्तुत है “बिल्वाष्टकम्”…

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्

जन्मपापसंहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् |

त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च ह्याच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः
शिवपूजां करिष्यामि बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||

अखण्ड बिल्व पात्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे

शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एक बिल्वं शिवार्पणम् |

शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत्

सोमयज्ञ महापुण्यं एक बिल्वं शिवार्पणम् ||

दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च

कोटि कन्या महादानं एक बिल्वं शिवार्पणम् |

लक्ष्म्यास्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्

बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एक बिल्वं शिवार्पणम् ||

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्

अघोरपापसंहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् |

काशीक्षेत्रनिवासं च कालभैरव दर्शनम्

प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम् ||

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे

अग्रतः शिवरूपाय एक बिल्वं शिवार्पणम् |

बिल्वाष्टमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ

सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात् ||

ॐ नमः शिवाय…

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