आओ भरकर रख दें पानी

जेठ की गर्मी, तपा महीना, अंग अंग से बहे पसीना |

घाम घमकता, ताप धधकता, मुश्किल कैसा हुआ है जीना ||

ताप कृत्तिका से लेकर अब चढ़ा रोहिणी पर है सूरज |

आग उगलता, नहीं पिघलता, सबका मुश्किल हुआ है जीना ||

कोल्ड ड्रिंक का बोल है बाला, ठण्डाई का खेल निराला |

भल्ले दही नहीं, गोल गप्पों का ठण्डा पानी पीना ||

ताल तलैया सूख चुकी हैं, हरियाली हम काट चुके हैं |

गोरैया अब नहीं फुदकती, भूल चुकी है खाना पीना ||

आँगन में अब पेड़ लगाएँ, लगे हुए जो, उन्हें बचाएँ |

गोरैया को पास बुलाएँ, देकर उसको ठण्डा पानी ||

तेज़ है गर्मी, पेड़ तले अब आओ भरकर रख दें पानी |

प्यासे पंछी की हमकों है मिल जुल कर अब प्यास बुझानी ||

गोरैया को पास बुलाएँ 2

 

 

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