संस्कार – जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म – जातकर्म संस्कार – पिछले लेखों में हमने चर्चा की गर्भ से पूर्व तथा गर्भ की स्थिति में किये जाने वाले संस्कारों की | शिशु के जन्म के समय तथा उसके बाद बाल्यावस्था में भी कुछ संस्कार सम्पन्न किये जाते हैं | यों तो व्यक्ति के संस्कारित होने की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है | कभी पारम्परिक रूप से उसके पुनर्जन्म की यात्रा तक बहुत से संस्कार किये जाते हैं | तो कभी वह परिवार तथा समाज के मध्य रहकर देश-काल-परिस्थितियों के संसर्ग में आकर बहुत कुछ सीखता है – स्वयं को उस व्यवस्था के अनुकूल बनाने के लिए स्वयं ही प्रयास करता रहता है – स्वयं को देश-काल-परिस्थिति के अनुसार संस्कारित करता रहता है | अतः यहाँ हम सभी संस्कारों की बात नहीं करेंगे | यहाँ हम केवल जन्म के समय तक किये जाने वाले संस्कारों की बात करेंगे | क्योंकि इन सभी संस्कारों का उद्देश्य था माता पिता को यह समझाना कि किस प्रकार की शारीरिक और मानसिक अवस्था में गर्भ धारण करना उचित रहता है | साथ ही गर्भिणी की समुचित देख भाल भी इन संस्कारों का एक उद्देश्य था – ताकि वह स्वयं मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हुए अपने गर्भस्थ शिशु के साथ वार्तालाप करते हुए उसे संस्कारित बना सके – उसे स्नेह और विश्वास का पाथेय प्रदान कर सके – ताकि जब वह स्वस्थ और संस्कारित शिशु गर्भ से बाहर आए तो सांसारिक जीवन में उसी आशा, स्नेह और विश्वास के साथ सबके साथ मिलकर आगे बढ़ सके जो उसे उसकी माता ने गर्भ की अवस्था में प्रदान किया है | और अन्त में सुखपूर्वक एक स्वस्थ शिशु का जन्म |

शिशु के विश्व प्रवेश पर उसके ओजमय अभिनन्दन के लिए जातकर्म संस्कार करने की प्रथा थी और आज भी कुछ पारम्परिक (Traditional) परिवारों में यह संस्कार किया जाता है | इसका सबसे प्रमुख कारण तो था कि प्रसव के लिए ऐसे स्थान को तैयार करना जो शुद्ध एवं समशीतोष्ण हो – अर्थात Normal Temperature उस स्थान का हो ताकि गर्भ से बाहर आते ही शिशु शुद्ध एवं समशीतोष्ण वातावरण में श्वास ले सके | इसलिए पहले उस स्थान को साफ़ किया जाता है जहाँ प्रसव किया जाना है | बच्चे का जन्म हो जाने के बाद नाल काटकर बच्चे को तथा माता को मन्त्रोच्चारपूर्वक स्नान कराया जाता है | उसके बाद दोनों को नवीन वस्त्र पहनाकर बच्चे के मुँह में माता के स्तन लगाए जाते हैं | उसके बाद पिता बालक को शहद चटाता है ताकि बालक स्वस्थ रहे | इस समय पिता अक्षत तथा सरसों के दानों से होम भी करता है | अर्थात् जन्म होने से पहले और बाद में घर की सफ़ाई, माँ तथा बालक का स्नान, नाल काटना तथा पहला दूध पिलाना आदि सभी क्रियाएँ जातकर्म संस्कार के अंग हैं | इन सबका उद्देश्य है बालक की शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक उन्नति |

इस संस्कार के समय जितने भी विधि विधान किये जाते हैं, आज के युग में उनका पालन करना वास्तव में बहुत कठिन कार्य है | इसका एक कारण यह भी है कि आज सभी बच्चों का जन्म अस्पतालों में कुशल डॉक्टर्स के निर्देशन में होता है – जो वास्तव में सराहनीय है | किन्तु जिन परिवारों में संस्कारों का पालन किया जाता है वहाँ माँ और बच्चे के अस्पताल से घर वापस आने पर कुछ क्रियाओं को छोड़कर शेष क्रियाएँ उसी प्रकार की जाती हैं |

ऐसी मान्यता है कि जन्म के समय इस संस्कार के करने से शिशु बड़ा होकर तेजस्वी तथा विद्वान बनता है | गर्भ के समस्त दोषों को दूर करने के लिये भी जातकर्म की व्यवस्था है | स्वर्णशलाका से बालक को मधु चटाने से स्मरण शक्ति तीव्र होती है तथा उसमें बल की वृद्धि होती है | मधुपान कराने से बालक के वात पित्त कफ़ आदि त्रिदोषों का शमन होता है | यदि बालक ने गर्भ में माता के माध्यम से कुछ दूषित भोजन भी कर लिया है तो मधु एवं घी के मिश्रण को चटाने से वो दोष भी दूर हो जाता है |

इसी प्रकार और बहुत से उपाय इस निमित्त हैं जिनका एक ओर सम्भवतः आयुर्वेदिक महत्व रहा होगा वहीं दूसरी ओर लोकमान्य महत्व तो है ही | वैद्य डॉक्टर जिन दिनों कम होते थे या नहीं होते थे उस समय इन संस्कारों का वास्तव में न केवल बहुत महत्व रहा होगा बल्कि इनसे लाभ भी अवश्य होता होगा | उस समय जबकि नर्सिंग होम भी नहीं थे, दाई घर पर आकर ही प्रसवकार्य कराती थी, प्रसव के स्थान की सफ़ाई, गर्भिणी के कष्ट को कम करने आदि के लिये इसी प्रकार की घरेलू औषधियाँ प्रयुक्त की जाती थीं | सम्भवतः आज भी यदि इन सब बातों पर ध्यान दिया जाए तो काफ़ी हद तक प्रसव के समय आपरेशन से बचा जा सकता है |

………………………क्रमश:

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/07/10/samskaras-11/

1 thought on “संस्कार – जन्म से पुनर्जन्म

  1. Pingback: संस्कार – जन्म से पुनर्जन्म – katyayani.purnimakatyayan

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s