ऐसो आयो सावन

ऐसो आयो सावन, चारों और नशा सा घुलता जाए |

कौन किसे अब कुछ समझाए, जग पर मदहोशी सी छाए ||

मेघा गरज गरज घहराए, मन की वीणा झनकी जाए |

बिजुरी दमक दमक दमकाए, पग की पायल शोर मचाए ||

बन में मोर मोरनी नाचें, हिय में और उछाह भर जाए |

पपीहा पिहू की टेर लगाए, मन बौराया झूमा जाए ||

अम्बुवा की डाली पर देखो कोयल कुहुक कुहुक हुलसाए |

मतवाले मौसम में भीज भीज मन पेंग बढ़ाता जाए ||

प्रियतम सागर करे इशारा तो फिर लाज शरम अब कैसी |

सारे बन्धन तज कर नदियाँ पिया मिलन को उमड़ी जाएँ ||

झूम झूम तरु झुकें धरा पर, प्यार भरा एक चुम्बन ले लें |

धरा बावरी हरा घाघरा पहन मस्त हो थिरकी जाए ||

1 thought on “ऐसो आयो सावन

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