नक्षत्र एक विश्लेषण

नक्षत्रों का महत्त्व

समस्त बारह वैदिक मासों का आधार नक्षत्र मण्डल ही है | प्रत्येक माह को पूर्ण चन्द्र की रात्रि पूर्णिमा कहलाती है | पूर्णिमा को जो नक्षत्र पड़ता है, वैदिक महीनों का नाम उन्हीं नक्षत्रों के नाम पर होता है | अर्थात प्रत्येक पूर्णिमा का चन्द्र नक्षत्र उस माह के वैदक नाम है | जैसे, चित्रा से चैत्र माह, विशाखा से वैशाख इत्यादि | किन्तु किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व पहले हमें नक्षत्रों के विषय में विस्तार से जानना होगा |

तारों के एक समूह को नक्षत्र कहते हैं | वस्तुतः नक्षत्र एक ऐसा मापक यन्त्र यानी स्केल है जिसके द्वारा हम किसी ग्रह की एक राशि से दूसरी राशि तक पहुँचने की अवधि अर्थात यात्रा की लम्बाई नाप सकते हैं | उदाहरण के लिए हम जानना चाहते हैं कि मंगल को अपनी वर्तमान राशि से दूसरी राशि पर पहुँचने में कितना समय लगेगा | इसके लिए आवश्यक है कि हमें मंगल की वर्तमान स्थिति का पता हो कि वर्तमान में वह किस नक्षत्र के किस चरण अर्थात किस भाग पर स्थित है | और वहाँ से जिस राशि पर उसे जाना है वहाँ किस नक्षत्र का कौन सा चरण हो सकता है | इस सबका अध्ययन कर लेने के बाद हम कह सकते हैं कि मंगल ने इतने समय में इतनी दूर की यात्रा की है, इतनी दूर की यात्रा और शेष है, तो पिछली यात्रा की अवधि के आधार पर वह लगभग इतनी अवधि में शेष यात्रा पूर्ण करेगा |

इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि मान लीजिये हम कहीं जा रहे हैं | मार्ग में हम कुछ बोर्ड्स देखते हैं जिन पर उस स्थान का नाम तथा पहले और दूसरे स्थान से उसकी दूरी लिखी होती है | इसके द्वारा हमें पता लग जाता है कि अब तक हम इस स्थान पर पहुँच चुके हैं अथवा इतनी दूरी तय कर चुके हैं और अब हमें अपने गन्तव्य तक पहुँचने के लिए इतनी दूरी और तय करनी है जो हम लगभग इतने समय में पूरी कर सकते हैं | मार्ग में लगे ये बोर्ड्स स्थान विशेष तथा एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी के सूचक होते हैं | नक्षत्र इसी प्रकार के साईनबोर्ड्स हैं जिनके माध्यम से हम एक स्थान से हम किसी ग्रह की एक राशि से दूसरी राशि पर पहुँचने की दूरी और समय का अनुमान लगा सकते हैं | इस प्रकार नक्षत्र किसी ग्रह की एक राशि से दूसरी राशि के लिए यात्रा के दौरान दोनों राशियों के मध्य की दूरी तथा मार्ग के पड़ावों यानी नक्षत्रपदों का ज्ञान कराने वाले मापक यन्त्र यानी स्केल हैं | नक्षत्रों का शाब्दिक अर्थ है “आकाश में तारामण्डल के मध्य चन्द्रमा का मार्ग |”

जब हम कहीं यात्रा करते हैं तो मार्ग को लम्बाई को नापने के लिए मील अथवा किलोमीटर का प्रयोग किया जाता है | इसी प्रकार ग्रहों की पूर्व से पश्चिम तक की यात्रा में उनकी परस्पर दूरी तथा गति नापने के लिए नक्षत्रों का भी विभाजन किया गया है | हमारे खगोलशास्त्रियों यानी Astronauts ने समूचे भाचक्र अर्थात Zodiac को 27 बराबर भागों में विभक्त किया है | भाचक्र में राशिचक्र के ये सत्ताईस भाग ही नक्षत्र कहलाते हैं | प्रत्येक नक्षत्र में तारों का एक समूह होता है | नक्षत्र के ये तारे एक साथ मिलकर एक आकृति अथवा Image बनाते हैं जैसे हाथी, सर, सर्प, गाड़ी इत्यादि | खुले और साफ़ आकाश में हम इन आकृतियों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं | इन 27 नक्षत्रों से ग्रहों की स्थिति का पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है | जिस प्रकार अपनी यात्रा के दौरान मार्ग में लगे साईनबोर्ड्स से हमें पता चल जाता है कि हम अमुक समय अमुक स्थान पर पहुँच रहे हैं और यात्रा के आरम्भ से इतने मील या किलोमीटर तक की दूरी तक आ चुके हैं | उसी प्रकार एक ज्योतिषी अथवा खगोल वैज्ञानिक नक्षत्रों की सहायता से आसानी से यह बता सकता है कि अमुक ग्रह अमुक समय इतनी डिग्री पर अमुक नक्षत्र में होगा, या अबसे पूर्व एक विशेष समय पर यह ग्रह इतनी डिग्री में इस नक्षत्र पर था | प्रत्येक नक्षत्र की अवधि 13 डिग्री 20 मिनट की होती है तथा प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभक्त होता है | ये चारों भाग नक्षत्र के चरण अथवा पद कहलाते हैं | प्रत्येक पद तीन डिग्री बीस मिनट का होता है | अब, क्योंकि प्रत्येक राशि तीस डिग्री की होती है इसलिए हर राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं – अर्था दो नक्षत्र पूरे और तीसरे नक्षत्र का चौथाई भाग यानी एक पद | इस प्रकार चार राशियों में नौ नक्षत्र पूरे आ जाते हैं और इस प्रकार 27 नक्षत्र बारह राशियों में बराबर विभक्त हो जाते हैं |

क्योंकि हर नक्षत्र कुछ तारों का एक समूह होता है इसलिए प्रत्येक नक्षत्र का नाम उस नक्षत्र में सम्मिलित तारकदल में सबसे अधिक प्रकाशित तारे के नाम पर होता है | उदाहरण के लिए चित्रा नक्षत्र में सम्मिलित तारकसमूह में सबसे अधिक प्रकाशित तारा है चित्रा इसलिए इस नक्षत्र का नाम चित्रा रखा गया |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/08/03/constellation-nakshatras-6/

Advertisements

1 thought on “नक्षत्र एक विश्लेषण

  1. Pingback: नक्षत्र एक विश्लेषण – katyayani.purnimakatyayan

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s