गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर के धनु मिथुन राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | लगभग एक वर्ष का गुरु का गोचर होता है | इस बार वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान 29 मार्च 2019 को अपनी स्वयं की राशि धनु में प्रविष्ट हो जाएँगे कुछ समय के लिए, जहाँ से 10 अप्रेल 2019 से वक्री होते हुए 23 अप्रेल 2019 को पुनः वृश्चिक में वापस लौट आएँगे | धनु गुरु की अपनी राशि है | अब तक मेष राशि से लेकर वृश्चिक राशि तक के जातकों पर गुरु के इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात कर चुके हैं, अब जानने का प्रयास करते हैं कि गुरु के इस गोचर के धनु राशि के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

जैसा कि ऊपर लिखा, धनु की गुरु की अपनी राशि है | अर्थात आपके राश्यधिपति होकर गुरुदेव आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहे हैं | जहाँ से इनकी दृष्टियाँ आपके चतुर्थ भाव, छठे भाव तथा अष्टम को प्रभावित कर रही हैं | यदि आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप अपना निवास भी बदलने की योजना बना सकते हैं | किसी दूसरे शहर में भी शिफ्ट हो सकते हैं | आपके माता पिता भी किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट हो सकते हैं | अचानक ही किसी ऐसे स्थान से कार्य का प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है जहाँ आप जाने नहीं चाहते | खर्चों में वृद्धि की सम्भावना प्रतीत होती है | आप कहीं भ्रमण के लिए भी जा सकते हैं और व्यर्थ की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं | साथ ही पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | परिवार में व्यर्थ के तनाव भी हो सकते हैं | किन्तु यदि आपने धैर्य और संयम से कम लिया तो किसी भी तनाव अथवा विवाद को सुलझाने में स्वयं ही सफल भी हो सकते हैं | परिवार के किसी सदस्य की ओर से किसी दुखद समाचार की प्राप्ति की सम्भावना भी है |

आपको अपने आत्मविश्वास में भी कमी का अनुभव हो सकता है | यदि नौकरी की खोज में हैं तो उसमें सम्भव है सफलता न प्राप्त हो, या फिर बहुत अधिक परिश्रम के बाद सफलता प्राप्त हो | स्पोर्ट्स से सम्बन्धित व्यक्तियों के लिए यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु इन यात्राओं एक दौरान आपको दुर्घटना आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

अविवाहित हैं तो विवाह के लिए अभी अनुकूल समय नहीं प्रतीत होता | कहीं कोई प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो उसमें भी तनाव की सम्भावना है | वैवाहिक जीवन में भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | अच्छा यही रहेगा कि आप संयम से काम लें |

स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | बहुत अधिक तनाव से बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें | अन्यथा मानसिक रूप से किसी डिप्रेशन आदि के शिकार भी हो सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/16/jupiter-transit-in-scorpio-for-sagittarius/

 

 

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1 thought on “गुरु का वृश्चिक में गोचर

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