नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।
ऊँ शान्ति: शान्ति: शान्ति:

सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े… भारतीय जीवन दर्शन की इसी उदात्त भावना के साथ पूर्ण हर्ष और उल्लास से वर्ष 2018 को विदा करते हुए आइये स्वागत करें वर्ष 2019 का… सभी को नववर्ष की हर्ष भरी – उल्लास भरी – मधु हास भरी – प्रेम और विश्वास भरी – राग और अनुराग भरी – हार्दिक शुभकामनाएँ…

आशायुत ये भोर सुहानी, करती हर मन को आह्लादित |

द्विविधा के सब जाल काटती, करती हर मन को आशान्वित ||

मस्त हवा के साथ बैठकर सूरज से कुछ बातें कर लें |

नए और एक दिन का आओ उत्साहों से स्वागत कर लें ||

मीठी यादें मन में रखकर बीते कल को करें विदा अब |

आशाओं के पुष्प खिलाकर नए वर्ष को गले लगायें ||

मतवाली हो शाम सभी की और मस्ती में भरा दिवस हो |

खुशियों की पायल झनकाती भोर सुहानी नाच रही हो ||

हर्ष भरा, उल्लास भरा, मधुहास भरा हो जीवन सबका |

और प्रेम विश्वास भरा, अनुराग भरा हो ह्रदय सभी का ||

मन के कोने कोने में हो गीत स्नेह का बजे सदा ही |

हर मन की ता धिन मृदंग पर नया प्रात मस्ती में झूमे…………

बुध का धनु में गोचर

नव वर्ष 2019 के प्रथम दिवस अर्थात एक जनवरी को पौष कृष्ण एकादशी को बव करण, धृति योग और विशाखा नक्षत्र में 09:50 के लगभग बुध का प्रवेश सूर्य और शनि के साथ गुरु की धनु राशि और मूल नक्षत्र में हो जाएगा | सर्वप्रथम सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ… धनु राशि में बुध का गोचर सभी के लिए भाग्यवर्द्धक रहे…

धनु राशि में बुध बीस जनवरी को रात्रि नौ बजकर छह मिनट तक भ्रमण करने के पश्चात शनि की मकर राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | धनु राशि पर भ्रमण करते हुए 10 जनवरी को पूर्वाषाढ़ और 18 जनवरी को उत्तराषाढ़ नक्षत्र में प्रविष्ट हो जाएगा | इस बीच 6 जनवरी से बुध अस्त भी रहेगा | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के धनु राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | आपके नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके लिए एक और उत्साह में वृद्धि के योग हैं, आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं, वहीं पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना भी इस अवधि में करना पड़ सकता है – विशेष रूप से सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है, अन्यथा इसका विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में प्रेम और सौहार्द का तथा आनन्द का वातावरण विद्यमान रहने की सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवद्धि में कहीं आपका विवाह सम्बन्ध भी निश्चित हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में माधुर्य बना रह सकता है | आप अपने लिए नया घर खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन के कारण परिवार में उत्साह तथा मंगलकार्यों का वातावरण बना रह सकता है जिसके कारण बहुत से सम्बन्धियों और मित्रों के साथ मिलना हो सकता है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | किन्तु साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध का गोचर आपकी लग्न से चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपको अपने कार्य में अपने पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्द्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में भी वृद्धि की सम्भावना है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | साथ ही आप अपने छोटे भाई बहनों की भी किसी प्रकार की सहायता कर सकते हैं | आपका कार्य यदि किसी प्रकार विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग हैं | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने Important Documents को सम्भाल कर रखने की आवश्यकता होगी | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं, प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | किन्तु इसके साथ ही गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से लाभ की भी सम्भावना है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | लोग आपके कार्यों की प्रशंसा करेंगे और अपने कार्य के लिए आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो अपने किसी सहकर्मी के साथ विवाह बन्धन में भी बंध सकते हैं | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | तीर्थ स्थलों की यात्रा पर भी जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | साथ ही धार्मिक गतिविधियों के लिए धन भी खर्च कर सकते हैं | ऐसा करते समय पोंगा पण्डितों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | आपकी सन्तान अथवा आप स्वयं किसी विषय में अध्ययन का प्रयास भी कर सकते हैं | किसी वसीयत के माध्यम से अथवा किसी अप्रत्याशित स्रोत से भी आपको लाभ हो सकता है | किन्तु वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | वंश वृद्धि का विचार भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें, इसी कामना के साथ एक बार पुनः नववर्ष 2019 की हार्दिक शुभकामनाएँ…

पूरा पढने के लिए क्लिक करें: https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/12/29/mercury-transit-in-sagittarius/

 

एकादशी व्रत 2019

आने वाले तीन दिन बाद सन् 2018 को विदा करके सन् 2019 में विश्व प्रवेश करेगा | नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है वर्ष 2019 में आने वाले हिन्दू पर्व और त्योहारों की तिथियाँ… सबसे पहले एकादशी…

हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्त्व है | पद्मपुराण के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एकादशी व्रत का आदेश दिया था और इस व्रत का माहात्म्य बताया था | प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | किस एकादशी के व्रत का क्या महत्त्व है तथा किस प्रकार इस व्रत को करना चाहिए इस सबके विषय में विशेष रूप से पद्मपुराण में विस्तार से उल्लेख मिलता है | यदि दो दिन एकादशी तिथि हो तो स्मार्त (गृहस्थ) लोग पहले दिन व्रत रख कर उसी दिन पारायण कर सकते हैं, किन्तु वैष्णवों के लिए एकादशी का पारायण दूसरे दिन द्वादशी तिथि में ही करने की प्रथा है | हाँ, यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त होकर त्रयोदशी तिथि आ रही हो तो पहले दिन ही उन्हें भी पारायण करने का विधान है | सभी जानते हैं कि एकादशी को भगवान् विष्णु के साथ त्रिदेवों की पूजा अर्चना की जाती है | यों तो सभी एकादशी महत्त्वपूर्ण होती हैं, किन्तु कुछ एकादशी जैसे षटतिला, निर्जला, देवशयनी, देवोत्थान, तथा मोक्षदा एकादशी का व्रत वे लोग भी करते हैं जो अन्य किसी एकादशी का व्रत नहीं करते | इन सभी एकादशी के विषय में हम समय समय पर लिखते रहे हैं | आज प्रस्तुत है सन् 2019 के लिए एकादशी की तारीखों की एक तालिका – उनके नामों तथा जिस हिन्दी माह में वे आती हैं उनके नाम सहित…

मंगलवार     01 जनवरी   पौष कृष्ण सफला एकादशी

गुरूवार       17 जनवरी   पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी

गुरूवार       31 जनवरी   माघ कृष्ण षटतिला एकादशी

शनिवार      16 फरवरी    माघ शुक्ल जया एकादशी

शनिवार      02 मार्च     फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी

रविवार       17 मार्च     फाल्गुन शुक्ल आमलकी एकादशी

रविवार       31 मार्च     चैत्र कृष्ण पापमोचिनी एकादशी स्मार्त

सोमवार      01 अप्रेल     चैत्र कृष्ण पापमोचिनी एकादशी

सोमवार      15 अप्रेल     चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी स्मार्त

मंगलवार     16 अप्रेल     चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी

मंगलवार    30 अप्रेल     वैशाख कृष्ण वरूथिनी एकादशी

बुधवार       15 मई      वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी

गुरूवार       30 मई      ज्येष्ठ कृष्ण अपरा एकादशी

गुरूवार       13 जून      ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला / भीम एकादशी

शनिवार      29 जून      आषाढ़ कृष्ण योगिनी एकादशी

शुक्रवार      12 जुलाई    आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी

रविवार       28 जुलाई    श्रावण कृष्ण कामिका एकादशी

रविवार       11 अगस्त   श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी

सोमवार      26 अगस्त   भाद्रपद कृष्ण अजा एकादशी

मंगलवार     27 अगस्त   भाद्रपद कृष्ण अजा एकादशी

सोमवार      09 सितम्बर भाद्रपद शुक्ल परिवर्तिनी एकादशी

बुधवार       25 सितम्बर आश्विन कृष्ण इन्दिरा एकादशी

बुधवार       09 अक्टूबर   आश्विन शुक्ल पापाकुंशा एकादशी

गुरूवार       24 अक्टूबर   कार्तिक कृष्ण रमा एकादशी

शुक्रवार      08 नवम्बर   कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी

शुक्रवार      22 नवम्बर   मार्गशीर्ष कृष्ण उत्पन्ना एकादशी स्मार्त

शनिवार      23 नवम्बर   मार्गशीर्ष कृष्ण उत्पन्न एकादशी

रविवार       08 दिसम्बर मार्गशीर्ष शुक्ल मोक्षदा एकादशी

रविवार       22 दिसम्बर मार्गशीर्ष कृष्ण सफला एकादशी

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/12/28/ekadashi-vrat-2019/