Monthly Archives: January 2019

नक्षत्र – एक विश्लेषण

नक्षत्रों के आधार पर हिन्दी महीनों का विभाजन और उनके वैदिक नाम:-

ज्योतिष में मुहूर्त गणना, प्रश्न तथा अन्य भी आवश्यक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले पञ्चांग के आवश्यक अंग नक्षत्रों के नामों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ तथा पर्यायवाची शब्दों के विषय में हम पहले बहुत कुछ लिख चुके हैं | अब हम चर्चा कर रहे हैं कि किस प्रकार हिन्दी महीनों का विभाजन नक्षत्रों के आधार पर हुआ तथा उन हिन्दी महीनों के वैदिक नाम क्या हैं | इस क्रम में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह के विषय में पूर्व में लिख चुके हैं, आज मृगशिर और पौष माह…

मृगशिर : इस माह में मृगशिर और आर्द्रा नक्षत्र आते हैं, किन्तु इस माह की पूर्णिमा मृगशिर नक्षत्र से युक्त होती है इसलिए इस माह का नाम मृगशिर पड़ा | इसका वैदिक नाम है “सह” जिसका शाब्दिक अर्थ होता है एक साथ (Together)- एक साथ रहना – एक साथ चलना – इस शब्द को एकता का प्रतीक भी माना जा सकता है | इसके अतिरिक्त वर्तमान के लिए तथा किसी को भेंट इत्यादि देने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है | स्वस्थ रहना, सहन करना, सन्तुष्ट रहना, प्रसन्न रहना और प्रसन्न करना, स्थाई, कष्ट प्राप्त करना, धैर्य रखना, शक्ति, साहस, किसी के द्वारा अनुगमन किया जाना, विजय प्राप्त करना आदि अर्थों में भी साहित्यकार इस शब्द का प्रयोग करते रहे हैं | भगवान् शिव का एक नाम मृगशिर भी है | नवम्बर और दिसम्बर की कड़ाके की ठण्ड इसी माह में पड़ती है इस प्रकार धैर्य तथा सहनशीलता आदि अर्थों में इस शब्द का प्रयोग उपयुक्त ही प्रतीत होता है | श्रीमद्भागवत में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” अर्थात् समस्त महिनों में मार्गशीर्ष मेरा ही स्वरूप है मासानां मार्गशीर्षोऽहम् ऋतूनां कुसुमाकरः” – श्रीमद्भगवद्गीता 10/35

पौष : इस माह में पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्रों का उदय होता है, किन्तु इस महा की पूर्णिमा को पुष्य नक्षत्र होने के कारण इसका नाम पौष पड़ा | इसका वैदिक नाम है “सहस्य” – क्योंकि यह माह सह माह के बाद आता है | सहस्य का एक अर्थ वर्षा ऋतु भी होता है और इसी कारण से सर्दियों की वर्षा की ऋतु भी इस माह को कहा जाता है | “सह” माह के समान ही इस शब्द के भी अर्थ सहनशीलता, शक्ति, तेज, विजय आदि होते हैं | साथ ही जल के लिए भी इस शब्द का प्रयोग किया जाता है |

मान्यता है कि भग नाम के सूर्य की इस माह में उपासना करने से समस्त प्रकार के सौभाग्य की प्राप्ति होती है | इस माह में हेमन्त ऋतु होने के कारण ठण्ड का प्रकोप भी अधिक होता है, सम्भवतः इसीलिए इस माह में सूर्योपासना पर बल दिया जाता रहा है | इसी कारण से इस माह में रात को स्थान स्थान पर जन साधारण आग जलाकर हाथ सेंकते दिखाई दे जाते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/30/constellation-nakshatras-35/

शुक्र का धनु में गोचर

आज रात्रि 11:29 के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र वृश्चिक राशि से निकल कर धनु राशि और मूल नक्षत्र में प्रस्थान करेगा | शुक्र के धनु राशि में प्रवेश के समय माघ कृष्ण दशमी तिथि (आज सूर्योदय के समय नवमी थी, किन्तु शुक्र के गोचर के समय दशमी तिथि रहेगी), वणिज करण और वृद्धि योग होगा | यहाँ 24 फरवरी तक भ्रमण करने के पश्चात अपने परम मित्र शनि की मकर राशि में प्रस्थान कर जाएगा | धनु राशि में निवास करते हुए शुक्र क्रमशः दस फरवरी को पूर्वाषाढ़ तथा 22 फरवरी को उत्तराषाढ़ नक्षत्रों पर भ्रमण करेगा | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के धनु राशि में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | एक ओर परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहेगा वहीं दूसरी ओर आपके कार्य में भी प्रगति के साथ साथ अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी वाणी इस समय बहुत प्रभावशाली बनी हुई है जिसका लाभ अपक्प जीवन के हर क्षेत्र में होने की सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है अथवा कोई प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो सकता है, जो आपके मन के अनुकूल होगा तथा जो समय आने पर विवाह सम्बन्ध में भी परिवर्तित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | Opposite Sex की ओर इस अवधि में आपका झुकाव बढ़ सकता है | आगे बढ़ने से पूर्व पार्टनर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें | साथ ही पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होने जा रहा है | आपकी निर्णायक क्षमता, उत्साह और मनोबल में वृद्धि के साथ ही आपका व्यक्तित्व भी इस अवधि में प्रभावशाली रहने की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के लिए यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | इन यात्राओं में कार्य के साथ साथ आपको कुछ आकर्षक स्थलों के भ्रमण का अवसर भी प्राप्त हो सकता है | सम्भव है इन यात्राओं के दौरान आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जिसकी ओर आपका झुकाव हो जाए और आप उसके साथ विवाह सम्बन्ध में बंधना चाहें, किन्तु उसके विषय में सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही आगे बढ़ना उचित रहेगा | जल्दबाज़ी में कोई निर्णय न लें |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | एक ओर आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा हुआ भी हो सकता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | यदि नौकरी में हैं तो विशेष रूप से महिला अधिकारी से पंगा आपके हित में नहीं होगा | यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | साथ ही विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | परिवार में किसी प्रकार के तनाव की आशंका भी की जा सकती है | इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में होने जा रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है | आपके कार्यों के कारण आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | आपके भिया बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | आपको इस अवधि में कोई ऐसा कार्य आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रहकर अर्थलाभ कर सकते हैं | आप कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण रहेगा | किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | साथ ही यदि राजनीति से आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर जहाँ भाई बहनों के साथ किसी कारण से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है वहीं आपके दाम्पत्य जीवन में भी किसी प्रकार का तनाव सम्भव है | जिन लोगों पर आप बहुत अधिक विश्वास रखते हैं उन्हीं की ओर से आपको किसी प्रकार का विश्वासघात भी सम्भव है | अतः अच्छा यही रहेगा कि अपनी योजनाओं के विषय में किसी से इस अवधि में बात न करें | तनाव के कारण आपके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार कहीं घूमने जाने की योजना भी बना सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आप इस अवधि में अपने शारीरिक सौन्दर्य को निखारने में अधिक व्यस्त रह सकते हैं | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | Opposite Sex के प्रति आपका रुझान इस अवधि में बढ़ सकता है | आपके कार्य में प्रगति के साथ ही अर्थलाभ की सम्भावना भी है | अधिकारीगणों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किन्तु अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं होगा | राजनीति से यदि आप सम्बद्ध हैं तो आपके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि योग, व्यायाम, प्राणायाम और ध्यान का निरन्तर अभ्यास करते रहे तो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उच्च शिक्षा, कला के प्रदर्शन अथवा अन्य किसी कार्य के निमित्त विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं से आपके कार्य तथा मान सम्मान में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता आने की सम्भावना है | इन यात्राओं के करान आपके कुछ नए मित्र भी बन सकते हैं | साथ ही इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य तथा Important Documents का भी ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा कार्य में वृद्धि के साथ ही धनलाभ के भी संकेत हैं | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है अथवा कोई नया प्रेम सम्बन्ध भी स्थापित हो सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | जहाँ तक आपके कार्य का प्रश्न है तो आपको अपने सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | कुछ ऐसे लोगों का विरोध भी झेलना पड़ सकता है जिनकी ओर से आपको अनुकूलता की सम्भावना होगी | छोटे भाई बहनों के साथ तथा परिवार की महिला सदस्यों के साथ भी किसी प्रकार का विवाद इस अवधि में सम्भव है | विशेष रूप से यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई विवाद है तो उसे आपसी विचार विमर्श से ही सुलझाने में ही समझदारी है, अन्यथा यदि बात कोर्ट तक पहुँच गई तो समस्या हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/29/venus-transit-in-sagittarius/

 

 

कहानी दिवस और निशा की

हर भोर उषा की किरणों के साथ

शुरू होती है कोई एक नवीन कहानी…

हर नवीन दिवस के गर्भ में

छिपे होते हैं न जाने कितने अनोखे रहस्य

जो अनावृत होने लगते हैं चढ़ने के साथ दिन के…

दिवस आता है अपने पूर्ण उठान पर

तब होता है भान

दिवस के अप्रतिम दिव्य सौन्दर्य का…

सौन्दर्य ऐसा, जो करता है नृत्य / रविकरों की मतवाली लय पर

अकेला, सन्तुष्ट होता स्वयं के ही नृत्य से

मोहित होता स्वयं के ही सौन्दर्य और यौवन पर

देता हुआ संदेसा

कि जीवन नहीं है कोई बोझ

वरन है एक उत्सव

प्रकाश का, गीत का, संगीत का, नृत्य का और उत्साह का…

दिन ढलने के साथ

नीचे उतरती आती है सन्ध्या सुन्दरी

तो चल देता है दिवस / साधना के लिए मौन की

ताकि सुन सके जगत

सन्ध्या सुन्दरी का मदिर राग…

और बन सके साक्षी एक ऐसी बावरी निशा का

जो यौवन के मद में चूर हो करती है नृत्य

पहनकर झिलमिलाते तारकों का मोहक परिधान

चन्द्रिका के मधुहासयुक्त सरस विहाग की धुन पर…

थक जाएँगी जब दोनों सखियाँ

तो गाती हुई राग भैरवी / आएगी भोर सुहानी

और छिपा लेगी उन्हें कुछ पल विश्राम करने के लिए

अपने अरुणिम आँचल की छाँव में…

फिर भेजेगी सँदेसा चुपके से / दिवस प्रियतम को

कि अवसर है, आओ, और दिखाओ अपना मादक नृत्य

सूर्य की रजत किरणों के साथ

ऐसी है ये कहानी / दिवस और निशा की

जो देती है संदेसा / कि हो जाए बन्द यदि कोई एक द्वार

या जीवन संघर्षों के साथ नृत्य करते / थक जाएँ यदि पाँव

मत बैठो होकर निराश

त्याग कर चिन्ता बढ़ते जाओ आगे / देखो चारों ओर

खुला मिलेगा कोई द्वार निश्चित ही

जो पहुँचाएगा तुम्हें अपने लक्ष्य तक

निर्बाध… निरवरोध…

उसी तरह जैसे ढलते ही दिवस के / ठुमकती आती है सन्ध्या साँवरी

अपनी सखी निशा बावरी के साथ

और थक जाने पर दोनों के

भोर भेज देती है निमन्त्रण दिवस प्रियतम को

भरने को जगती में उत्साह

यही तो क्रम है सृष्टि का… शाश्वत… चिरन्तन…