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शुक्र का मिथुन में गोचर

शुक्र का मिथुन में गोचर 

आज यानी 28 जून को 25:34 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर चौंतीस मिनट) के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपनी स्वयं की राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह बुध की मिथुन राशि में प्रस्थान करेगा | इस प्रस्थान के समय आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि, बालव करण और धृति योग होगा तथा शुक्र इस समय मृगशिरा नक्षत्र में होगा और सूर्य, शनि तथा राहू-केतु के प्रभाव में रहेगा | इनमें शनि और शुक्र एक दूसरे के लिए योगकारक ग्रह हैं तथा सूर्य के साथ इसकी शत्रुता है | मिथुन राशि में संचार करते हुए चार जुलाई को आर्द्रा नक्षत्र तथा पन्द्रह जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तेईस जुलाई को मध्यरात्रि बारह बजकर पचास मिनट के लगभग अपने शत्रु ग्रह चन्द्रमा की कर्क राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | मिथुन राशि में संचार की इस अवधि में शुक्र नौ जुलाई को अस्त भी हो जाएगा | मिथुन राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से दूसरा भाव तथा तुला से नवम भाव बनता है | अतः इन दोनों राशियों के लिए तो यह गोचर अनुकूल ही प्रतीत होता है | इन्हीं सब आधारों पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के मिथुन में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है जहाँ आपका पंचमेश पहले से विराजमान है | आपकी बुद्धि इस अवधि में तीव्र रहेगी तथा आपकी लेखन क्षमता में इस अवधि में निखार आने की सम्भावना है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली रहेगी और आपके लेखन तथा आपकी वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो आप Romantically किसी के साथ Involve हो सकते हैं जो आपके लिए अनुकूल हो सकता है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है | धार्मिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आपकी वाणी का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा अतः इस समय का लाभ उठाएँ | किन्तु साथ ही जो भी बोलेन सोच समझ कर ही बोलें | किसी की निन्दा अथवा बिना माँगे किसी को सलाह देना आपके लिए घातक भी सिद्ध हो सकता है | परिवार में किसी माँगलिक कार्य के संपन्न होने की सम्भावना के साथ ही पारिवारिक क्लेश की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही खान पान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है | विशेष रूप से महिलाओं को अपनी Gynaecologist से Regular Check-up कराते रहना चाहिए |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके तृतीयेश के साथ आपकी राशि में ही हो रहा है | आप स्वयं अथवा आपकी सन्तान कहीं बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जा सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उनका सहयोग भी आपको उपलब्ध रहेगा, किन्तु उनके साथ किसी भी विवाद से बचने की आवश्यकता है | सन्तान के साथ सम्बन्धों में मधुरता बनी रहने की सम्भावना है | आप अपने बनाव श्रृंगार की ओर पहले से अधिक ध्यान देना आरम्भ कर सकते हैं | सन्तान तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपको किसी प्रकार के तनाव के कारण माइग्रेन अथवा गर्मी या पित्त से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | यदि आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्धित है तो किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आप अपना वर्तमान निवास बेचकर नया घर खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे जहाँ आपकी कला की प्रशंसा के साथ ही आपको आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में आपके राश्यधिपति के साथ ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, गीत-संगीत-नृत्य के कलाकार हैं अथवा किसी प्रकार की Alternative healing therapy से आपका सम्बन्ध है या आप मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे तथा आपके कार्य की प्रशंसा होगी | सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं अथवा ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय है या Cosmetic Dentist हैं तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अपने कार्य में आपको सहकर्मियों तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | आवश्यकता है अपनी अन्तर्मुखी प्रवृत्ति तथा आलस्य का त्याग करके Active हो जाने की | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते है | किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | इसके अतिरिक्त विरोधियों को भी पहचान कर उनसे दूरी बनाकर चलने की आवश्यकता है | आपकी रूचि धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है, किन्तु पोंगा पण्डितों को पहचान कर उनसे बचने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | गर्भवती महिलओं को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अन्य ग्रहों की युति और दृष्टियाँ भी इस प्रकार की हैं कि आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | विशेष रूप से आपको अपने तथा अपने जीवां साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर अप्रत्याशित व्यय की भी सम्भावना है | अतः नियमित रूप से चेकअप कराने तथा खान पान के प्रति सजग रहने की स्स्वश्यकता है | इसके अतिरिक्त यात्राओं के योग हैं, किन्तु यदि इन यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकते हैं तो आपके लिए उचित रहेगा | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | Drive करते समय सावधान रहें |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपके सप्तम भाव में अपनी ही राशि में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है तथा उसके माध्यम से भी आपको अर्थलाभ भी हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | आपके जीवन साथी के लिए भी कार्य में लाभ की सम्भावना है | मित्रों, जीवन साथी तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | किन्तु जीवन साथी का Temperament किसी कारणवश अनियन्त्रित हो सकता है | अतः किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना से बचने के लिए आपके लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखना आवश्यक है |

मकर : आपका योगकारक आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं | एक ओर जहाँ आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर अत्यधिक अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप यदि वर्तमान कार्य छोड़कर कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने स्टाफ में नई नियुक्तियाँ भी कर सकते हैं | किन्तु सम्बन्धित व्यक्तियों के Documents की अच्छी तरह जाँच पड़ताल अवश्य कर लें | सहकर्मियों के साथ कुछ उपहार आदि का आदान प्रदान भी इस अवधि में सम्भव है |

कुम्भ : आपका भी योगकारक शुक्र आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान के लिए अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता होगी | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन – जैसे बच्चे का जन्म आदि – भी हो सकता है | आप नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान निवास को ही Renovate करा सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके लिए पारिवारिक दृष्टि से यह गोचर बहुत अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | किन्तु अपनी माता जी अथवा परिवार किसी बड़ी महिला सदस्य की मध्यस्थता से आप वह विवाद सुलझा सकते हैं | यदि नया घर अथवा वाहन खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | साथ ही परिवार के लोगों का – विशेष रूप से अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/28/venus-transit-in-gemini/

 

नक्षत्र एक विश्लेषण

नक्षत्रों के गुण

हमने अपने पिछले अध्यायों में नक्षत्रों की नाड़ी, योनि, गण, वश्य और तत्वों के विषय में बात की | नक्षत्रों का विभाजन तीन गुणों – सत्व, रजस और तमस – के आधार पर भी किया जाता है | इन तीनों ही गुणों की आध्यात्मिक तथा दार्शनिक दृष्टि से चर्चा तो इतनी विषद हो जाती है कि जिसका कभी अन्त ही सम्भव नहीं | आज के अध्याय में हम इन गुणों के आधार पर नक्षत्रों के वर्गीकरण के विषय में बात करेंगे |

सभी जानते हैं कि समूची प्रकृति में सत्व, रजस और तमस ये तीनों ही गुण पाए जाते हैं | सृष्टि की रचना प्रक्रिया, सृष्टि का पालन पोषण संवर्धन तथा सृष्टि का संहार आदि जितनी भी प्रत्यक्ष क्रियाएँ हैं वे इन तीन गुणों के माध्यम से ही संचालित होती हैं – इसीलिए प्रकृति को त्रिगुणात्मिका कहा जाता है | जब समूची प्रकृति इन त्रिगुणों से मुक्त नहीं हो सकती तो फिर साधारण मानव की तो बात ही क्या है | ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि क्योंकि प्रत्येक मनुष्य किसी नक्षत्र में जन्म लेता है तो उस नक्षत्र में जो भी गुण इन तीनों गुणों में से होगा उसका प्रभाव मनुष्य पर निश्चित रूप से पड़ेगा तथा उसी के अनुसार उसका गुण और स्वभाव भी विकसित होगा | यहाँ तक कि इन गुणों के ही कारण कई बार अशुभ नक्षत्रों के भी शुभ फल देखे जा सकते हैं और कई बार शुभ नक्षत्रों के भी अशुभ परिणाम दृष्टिगत होते हैं | वास्तव में ये त्रिगुण मनुष्य के स्वभाव अथवा चरित्र की तीन परतें यानी Layers हैं, समय समय पर कभी कोई गुण प्रधान हो जाता है तो कभी कोई, किन्तु मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता |

सत्त्व गुण : सत – जिसका अर्थ होता है मूलभूत घटक – Essence – से सत्व शब्द बना है | यानी किसी व्यक्ति का जो स्वाभाविक चरित्र होता है वह सत्व गुण के अन्तर्गत आता है | सत्व अर्थात जिसकी सत्ता हो, जो विद्यमान हो, जिसका भाव हो अथवा जो सत्य हो | सत्य क्या होता है ? प्रत्यक्ष को सत्य की संज्ञा दी जाती है | इसके अतिरिक्त सम्पूर्णता, समग्रता, प्रकृति, मनुष्य के जन्मजात गुण – जो अच्छे भी हो सकते हैं और बुरे भी, जीवन, आत्मा, इच्छा शक्ति, श्वास, जीवनी शक्ति, समानता, चेतना, मन, इन्द्रिय, धन सम्पत्ति, अच्छाई, वास्तविकता, निश्चितता, साहस और बल आदि अर्थों में सत्व शब्द का ग्रहण किया जाता है | देवताओं को सत्व गुणों से युक्त माना जाता है | नक्षत्रों में पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद, आश्लेषा, ज्येष्ठा एवं रेवती ये छ: नक्षत्र सत्व गुण सम्पन्न नक्षत्र कहलाते हैं |

रजस गुण : रजस अर्थात राजाओं के समान – अर्थात मानवमात्र में जो राजाओं के सामान विशेषताएँ होती हैं वे रजस गुण के अन्तर्गत आती हैं | रज – जिसका शाब्दिक अर्थ होता है धूल – से रजस बना है | इस प्रकार किसी भी प्रकार का Powder भी रज ही कहलाता है | इत्र, Perfumes, सूर्य की किरण का एक कण, कोई भी छोटा सा कण यानी Small Particle, बादल, वर्षा, खेती के लिए जोती जा चुकी भूमि, इदासी, अन्धकार, Passion, अभिलाषा, उत्साह, मनोभाव, सभी भौतिक पदार्थों के वे मौलिक गुण अथवा अवयव जिनके कारण समस्त जगत के समस्त प्राणी क्रियाशील रहते हैं | सभी मनुष्यों में यह गुण विद्यमान होता है | लक्ष्य प्राप्ति के लिए इस गुण का होना अत्यन्त आवश्यक है | समस्त प्रकृति में जगत की उत्पत्ति का मूल कारक रज – जिसे Menstrual Discharge कहा जाता है – का प्रतिनिधित्व भी यही गुण करता है | इसके अभाव में संसार की उत्पत्ति ही सम्भव नहीं | कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़, रोहिणी, हस्त, श्रवण, भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ ये नौ नक्षत्र रजस गुण के अन्तर्गत आते है |

तमस : तमस अर्थात अन्धकार | इसका सबसे बड़ा प्रतीक है कायिक, वाचिक अथवा मानसिक किसी भी प्रकार की क्रूरता | मानसिक अन्धकार यानी अज्ञानता क एलिए इस शब्द का प्रयोग प्रायः किया जाता है | इसके अतिरिक्त किसी को धोखा देना, किसी प्रकार का भ्रम की स्थिति होना, दुःख और कष्ट, किसी प्रकार की व्याधि अर्थात रोग, विचारों में स्पष्टता का अभाव, किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति, भय, क्रोध, किसी प्रकार का दुष्कर्म, घुटन अथवा Uneasiness का अनुभव होना आदि अर्थों में तमस शब्द का प्रयोग किया जाता है | इच्छाओं के आधीन होने के लिए भी इस शब्द का प्रयोग करते हैं | लोकाचार में राक्षसों को तमस वृत्ति का माना जाता है | अश्विनी, मघा, मूल, आर्द्रा, स्वाति, शतभिषज, मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा, पुष्य, अनुराधा और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र इस गुण का प्रतिनिधित्व करते हैं |

किसी व्यक्ति के गुण और स्वभाव के विषय में ज्योतिषीय दृष्टिकोण से केवल इन गुणों के ही आधार पर फलकथन उचित नहीं होगा | नक्षत्रों के अन्य अवयवों को भी समग्र रूप से ध्यान में रखकर कुछ कहा जाना चाहिए |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/25/constellation-nakshatras-46/

मंगल का कर्क में गोचर

मंगल का कर्क में गोचर

आज आषाढ़ कृष्ण षष्ठी को रात्रि ग्यारह बजकर बाईस मिनट के लगभग मंगल अपने शत्रु गृह बुध की मिथुन राशि से निकल कर राशि कर्क में प्रस्थान कर जाएगा – जहाँ कल ही बुध का भी गोचर हुआ है | इस प्रस्थान के समय गर करण और प्रीति योग होगा तथा मंगल इस समय पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा | बुध वहाँ पहले ही पहुँच चुका है और सारा समय वहीं रहने वाला है | कर्क राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 28 जून को पुष्य नक्षत्र तथा 19 जुलाई को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में नौ अगस्त को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर अड़तालीस मिनट के लगभग अपने मित्र गृह सूर्य की सिंह राशि तथा मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच बारह जुलाई से मंगल अस्त भी जो जाएगा | कर्क राशि में संचार करते हुए मंगल की दृष्टियाँ तुला, मकर तथा कुम्भ राशियों पर रहेंगी | इस प्रकार कर्क राशि के साथ ही ये तीनों राशियाँ इस गोचर से अधिक प्रभावित हो सकती हैं | ध्यान देने योग्य बात है कि कर्क राशि जहाँ मंगल के लिए नीच की राशि है वहीं कर्क राशि का अधिपति चन्द्रमा इसका मित्र ग्रह है, तथा कर्क राशि के लिए मंगल पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक है | मेष राशि के लिए कर्क राशि चतुर्थ भाव तथा वृश्चिक के लिए अष्टम भाव है | साथ ही मेष तथा वृश्चिक राशियों का इस ग्रह को अधिपतित्व प्राप्त है जो एक दूसरे से षडाष्टक में हैं, किन्तु ऊर्जा और साहस तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए वास्तव में अनुकूल स्थिति है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा लाभ स्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल तो प्रतीत होता है किन्तु साथ ही विरोधियों की संख्या में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का तनाव भी सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/22/mars-transit-in-cancer/

 

बुध का कर्क में गोचर

बुध का कर्क में गोचर

कल यानी शुक्रवार, 21 जून, आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी को बव करण और वैधृति योग में 26:27 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर सत्ताईस मिनट) के लगभग बुध अपनी स्वयं की राशि मिथुन को छोड़कर चन्द्रमा की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | इस प्रस्थान के समय बुध पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा तथा गुरु की दृष्टि भी उस पर रहेगी | यहाँ रहते हुए 24 जून को पुष्य नक्षत्र पर जाएगा और 23 जुलाई को वक्री बुध पुनः पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा | नौ अगस्त को मार्गी बुध पुनः पुष्य नक्षत्र पर जाएगा | उन्नीस अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 26 अगस्त को दोपहर दो बजकर आठ मिनट के लगभग सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच आठ जुलाई से एक अगस्त तक बुध वक्री रहेगा और चौदह जुलाई से 29 जुलाई तक अस्त भी रहेगा | कर्क राशि बुध की अपनी राशि मिथुन से दूसरा भाव तथा कन्या से ग्यारहवाँ भाव है तथा कर्क राशि के लिए बुध द्वादशेश और तृतीयेश हो जाता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं बुध के कर्क राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर आपकी प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण आप नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं, तो दूसरी ओर पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु आप अपने बुद्धिबल से सभी समस्याओं का समाधान कर पाने में सक्षम हो सकते हैं | यदि आप किसी नौकरी में है या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे हैं तो आपके लिए ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपके भाई बहनों तथा आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप नौकरी में हैं, लेखक हैं अथवा मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं अथवा दस्तकार हैं तो आपके लिए भाग्यवर्द्धक गोचर प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | आपकी वाणी तथा लेखन प्रतिभा में निखार के साथ ही आपके कार्यों की सराहना भी होगी | परिवार का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में तथा लेखकों और वक्ताओं को धनलाभ की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | अकारण ही स्वभाव में चिडचिडापन भी आ सकता है | उससे बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें | भाई बहनों का सहयोग आपको प्राप्त होता रह सकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपका कार्य यदि कहीं विदेशों से या किसी दूसरे शहर से सम्बन्धित है अथवा मीडिया या किसी प्रकार की हीलिंग विधा से सम्बन्धित है तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | किन्तु ध्यान रहे, धन लाभ के साथ साथ धन के अपव्यय की भी सम्भावनाएँ हैं | बजट बनाकर चलना आपके हित में रहेगा | जिस किसी भी कारण से आपको मानसिक तनाव हो सकता है उस स्थिति से बचने का प्रयास करें |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | बुद्धिजीवियों, मीडियाकर्मियों, डॉक्टर वैद्य, कॉमर्स अथवा मैनेजमेंट के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए ये गोचर बहुत अनुकूल प्रतीत होता है | सहकर्मियों तथा परिवार के लोगों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कोई नया प्रोजेक्ट आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगलकार्य – जैसे किसी बच्चे का जन्म अथवा सन्तान का विवाह आदि की भी सम्भावना है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त शुभफलदायी प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग हैं | इन यात्राओं से आपके व्यवसाय में भी लाभ हो सकता है | आप तीर्थाटन के लिए भी जा सकते हैं | नौकरी में हैं तो वर्तमान नौकरी छोड़कर किसी दूसरी जगह भी नौकरी कर सकते हैं | आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भायावर्द्धक समय प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान अथवा कार्य से लाभ हो सकता है जिसके विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा अथवा जिसकी आशा आप त्याग चुके होंगे | वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | थोड़ा संघर्ष तो करना पड़ेगा, किन्तु अन्त में आपके कार्य में उन्नति के भी संकेत हैं | धार्मिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से अष्टम  भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | जीवन साथी के साथ किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है | प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो इससे बच सकते हैं |  किसी कोर्ट केस के अनुकूल दिशा में आगे बढ़ने की सम्भावना है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | इन्टरव्यू आदि के तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | परिवारजनों के साथ किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | विवाद कोर्ट तक न पहुँचने पाए इसके लिए अच्छा यही रहेगा कि पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को आपस में ही सुलझा लें |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर छठे भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोहों के लिए ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ परिवार के लोगों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | जीवन साथी के साथ भी सम्बन्ध मधुर बने रह सकते हैं | विद्यार्थियों तथा इन्टरव्यू की तैयारी कर रहे लोगों के लिए गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों को अपने कार्य के लिए कोई पुरूस्कार अथवा सम्मान भी प्राप्त हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/20/mercury-transit-in-cancer-2/