Monthly Archives: July 2019

via Weekly Horoscope

नक्षत्र एक विश्लेषण

प्रत्येक नक्षत्र के अनुसार जातक की चारित्रिक विशेषताएँ तथा उसका व्यक्तित्व

हम बात कर रहे हैं अश्विनी नक्षत्र के विषय में | इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है, बड़ी और चमकदार आँखें होती हैं और चौड़ा मस्तक होता है | स्वास्थ्य सामान्यतः अच्छा रहता है | साहित्य और अस्न्गीत में सी जातक की रूचि हो सकती है | शुद्ध हृदय इस जातक की वाणी मधुर होती है | यह जातक विद्वान्, स्थिर प्रकृति, अपने कार्यों में कुशल, विश्वसनीय तथा अपने परिवार में सम्मानित व्यक्ति होता है | आत्मसम्मान की भावना उसमें कूट कूट कर भरी होती है और जब दूसरे उसका सम्मान करते हैं तो उसे बहुत अच्छा लगता है | आर्थिक रूप से सम्भव हो मध्यम स्तर का हो, किन्तु दयालु तथा दानादि करने वाला होता है और धार्मिक प्रकृति का होता है | छोटी से छोटी बातों को बारीकी से देखना इसका स्वभाव होता है और दूसरों की छोटी से छोटी भूल की ओर इशारा करने में इसे संकोच नहीं होता | यह जातक आज्ञाकारी, सत्यवादी, अपने अधीनस्थ लोगों की तथा परिवार के लोगों की देखभाल करने वाला, अच्छे स्वभाव का, कार्य को समय पर पूर्ण करने वाला तथा वेद शास्त्रों का ज्ञाता भी हो सकता है |

यदि जातक की कुण्डली में यह नक्षत्र अशुभ प्रभाव में होगा तो जातक अहंकारी हो सकता है तथा अकारण ही घूमते रहने में इसकी रूचि हो सकती है | अशुभ प्रभाव में होने पर जातक दूसरों को धोखा भी दे सकता है तथा आर्थिक रूप से दूसरों पर आश्रित भी रह सकता है | विवाहित व्यक्तियों के साथ सम्बन्ध बनाना ऐसे जातक अक स्वभाव हो सकता है | गठिया बुखार, शरीर में दर्द अथवा स्मृतिहीनता जैसी समस्या से ग्रस्त हो सकता है |

इस नक्षत्र का प्रथम चरण “तस्करांश” कहलाता है, दूसरा चरण “भोग्यांश”, कहलाता है, तीसरा चरण “विलक्षणान्श” और चतुर्थ चरण “धर्मांश” कहलाता है | प्रथम तीन चरणों में उत्पन्न जातक प्रायः अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि से होते हैं और साहसी, धनी, उत्तम भोजन करने वाले, पढ़े लिखे होते हैं किन्तु अकारण ही बेचैन रहते हैं और Restless होते हैं तथा सदा लड़ने को तत्पर रहते हैं | जीवन में समस्त सुखों का उपभोग करते हैं | Highly sexy हो सकते हैं और दूसरों के जीवन साथी के साथ इनके सम्बन्ध हो सकते हैं | चतुर्थ पाद में जन्म लेने वाले जातक प्रायः ईश्वरभक्त होते हैं और धनी तथा दयालु होते हैं |

अधोमुखी यह नक्षत्र तमोगुण प्रधान नक्षत्र है तथा नक्षत्र पुरुष की दाहिनी जँघा में इसका निवास माना गया है | वैदिक पञ्चांग के अनुसार यह नक्षत्र अश्विनी माह का प्रमुख नक्षत्र है – जो सितम्बर-अक्टूबर के मध्य आता है | मेष राशि में 13 डिग्री बीस मिनट तक इसका विस्तार होता है | इस नक्षत्र से सम्बन्धित वस्तुएँ हैं अश्व, उत्तम वस्त्राभूषण, वाहन तथा लोहे और स्टील से निर्मित अन्य वस्तुएँ |

औषधि ग्रहण करने के लिए तथा स्वास्थ्य में सुधार सम्बन्धी कार्य आरम्भ करने के लिए यह नक्षत्र अत्यन्त अनुकूल माना जाता है | इसके अतिरिक्त यात्रा आरम्भ करने के लिए, कृषिकर्म आरम्भ करने के लिए, बच्चे को प्रथम बार विद्यालय भेजने के लिए, गृहनिर्माण आरम्भ करने और गृहप्रवेश के लिए तथा अन्य भी सभी प्रकार के शुभ कार्यों का आरम्भ करने के लिए यह नक्षत्र शुभ माना जाता है | हाथी और घोड़ों की ख़रीद फ़रोख्त के लिए तथा नए वाहन में प्रथम बार यात्रा करने के लिए और नवीन वस्त्राभूषण धारण करने के लिए भी यह नक्षत्र अनुकूल माना गया है | किन्तु विवाह से सम्बन्धित कार्यों के लिए यह नक्षत्र शुभ नहीं माना जाता |

यदि यह नक्षत्र अशुभ प्रभाव में हो तो उस अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए घोड़ों के सहित रथ दान करने का अथवा पितृ कर्म करने का सुझाव दिया जाता है | इस युग में रथ घोड़े आदि दान करना सम्भव नहीं अतः ज्योतिषी घोड़े सहित रथ की मूर्ति दान करने का सुझाव देते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/07/20/constellation-nakshatras-49/

नक्षत्र एक विश्लेषण

प्रत्येक नक्षत्र के अनुसार जातक की चारित्रिक विशेषताएँ तथा उसका व्यक्तित्व

पिछले अध्यायों में हम प्रत्येक नक्षत्र के नाम की व्युत्पत्ति और उसके अर्थ, नक्षत्रों के आधार वैदिक महीनों के विभाजन, नक्षत्रों के देवता, अधिपति ग्रह आदि विषयों पर चर्चा करने के साथ ही इस विषय पर भी प्रकाश डाल चुके हैं कि किस राशि में किस नक्षत्र का कितने अंशों तक प्रसार होता है | साथ ही नक्षत्रों के गुण (सत्व, रज, तमस), उनके लिंग, जाति अथवा वर्ण, नाड़ी, योनी, गण, वश्य तथा प्रत्येक नक्षत्र के तत्वों पर भी संक्षेप में चर्चा कर चुके हैं | अब इस अध्याय से इन्हीं समस्त विषयों पर विस्तार से बात करने का प्रयास करेंगे |

इस अध्याय से हमारा प्रयास होगा यह बताने का कि इन समस्त नक्षत्रों के देवताओं, अधिपति ग्रहों, गुणों, लिंग, नाड़ी, योनी, गण, वश्य, जाति तथा तत्वों आदि को यदि ध्यान में रखकर किसी कुण्डली का निरीक्षण परीक्षण किया जाए तो जातक विशेष की Personality और उसका गुण स्वभाव किस प्रकार का हो सकता है | क्योंकि जैसा कि सदा लिखते आए हैं कि किसी एक ही आधार पर किसी जातक के गुण स्वभाव तथा व्यक्तित्व का ज्ञान करना अर्थ का अनर्थ भी कर सकता है | इस प्रक्रिया में कुण्डली का समग्र अध्ययन करने की आवश्यकता होती है | साथ ही प्रत्येक नक्षत्र से सम्बन्धित पदार्थों और वस्तुओं के विषय में बात करेंगे | नक्षत्रों के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए Remedies पर चर्चा करेंगे कि किस नक्षत्र के लिए क्या उपाय किया जाना चाहिए | तो आज सबसे पहले प्रथम नक्षत्र अश्विनी को लेते हैं:

अश्विनी :

सदैव सेवाभ्युदितो विनीतः सत्यान्वितः प्राप्तसमस्तसम्पत् |

योषाविभूषात्मजभूरितोष: स्यादश्विनी जन्मनि मानवस्य ||

अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न जातक देखने में आकर्षक, भाग्यशाली, चतुर, आभूषणप्रिय, Opposite Sex के लोगों द्वारा प्रेम किया जाने वाला, बहादुर, बुद्धिमान तथा दृढ़ इच्छाशक्ति से युक्त होता है | वैज्ञानिक अथवा डॉक्टर हो सकता है | अपने Subordinates तथा सहकर्मियों के द्वारा सम्मान का पात्र हो सकता है तथा सरकारी तन्त्रों से उसे लाभ प्राप्त हो सकता है |

राशिचक्र के इस प्रथम नक्षत्र का अर्थ है अश्वारोही यानी घुड़सवार | पौराणिक कथाओं में अश्विनी का विवरण एक अप्सरा के रूप में उपलब्ध होता है | उसे विश्वकर्मा की पुत्री तथा सूर्य की पत्नी के रूप में जाना जाता है | ऐसे विवरण उपलब्ध होते हैं कि जब अश्विनी अपने पति का तेज सहन नहीं कर सकी तो उसने छाया (शनि की माता) को अपने पति की सेवा के लिए नियुक्त किया और अपनी पहचान छिपाने के लिए वन में जाकर अश्वि – घोड़ी – का रूप बनाकर रहने लगी | अश्विनी का दूसरा नाम संज्ञा भी है | जब छाया ने सूर्य को सारी बातें बताईं तो तो वे भी वन में चले गए और अश्व के रूप में अपनी पत्नी के साथ रहना आरम्भ कर दिया | यही अप्सरा अश्विनी दोनों अश्विनी कुमारों की माता मानी जाती है | ऐसी भी मान्यताएँ हैं कि सूर्य का वीर्य इतना बलशाली था कि माँ अश्विनी उसे अपने गर्भ में धारण नहीं कर सकीं और उन्होंने उसे अपने दोनों नासारन्ध्रों में धारण कर लिया (पौराणिक कथाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए) | जुडवाँ अश्विनी कुमार देवों के चिकित्सक माने जाते हैं |

इस नक्षत्र के अन्य नाम तथा अर्थ हैं नासत्य – जो सत्य न हो, दस्त्रा – असभ्य, आक्रामक, विनाशकारी, गधा, दो की संख्या, चोर, शीत ऋतु, अश्वियुक् – घुड़सवार, तुरग – वाजि – अश्व – हय आदि अश्व के पर्यायवाची |

इस नक्षत्र का प्रतीक है घोड़े का सर – क्योंकि इस नक्षत्र में तीन तारे अश्व के सर की आकृति बनाते हुए होते हैं | दोनों अश्विनी कुमार इस नक्षत्र के देवता हैं जिनकी प्रसिद्धि एक सैनिक, अश्वारोही तथा चिकित्सक के रूप में है | इस नक्षत्र का स्वामी है केतु तथा अधिपति ग्रह है मंगल | लघु संज्ञा वाला यह नक्षत्र वैश्य वर्ग, देव गण, आदि नाड़ी, अश्व योनि तथा चतुष्पद वश्य के अन्तर्गत आता है | पुरुष प्रकृति का यह नक्षत्र वायु तत्व प्रधान है तथा इसका वर्ण यानी रंग रक्त के समान लाल माना जाता है |

इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक अश्वारोही हो सकता है, अश्वों की देखभाल करने वाला हो सकता है, अश्वों की चोरी करने वाला हो सकता है अथवा अश्वों से सम्बन्धित व्यवसाय से उसे अर्थलाभ हो सकता है | वह एक सैनिक भी हो सकता है अथवा रोगों के निदान की अद्भुत सामर्थ्य से युक्त एक अच्छा चिकित्सक भी हो सकता है | वह सेना का कोई अधिकारी भी हो सकता है और कोई सेवक भी हो सकता है | कारागार में किसी पद पर उसकी नियुक्ति हो सकती है अथवा कोर्ट या पुलिस विभाग में कार्यरत हो सकता है | प्रायः ऐसा देखा गया है कि जिस जातक के ग्रह इस नक्षत्र में अनुकूल स्थिति में स्थित होते हैं वह एक सफल चिकित्सक होता है |

इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक ट्रांसपोर्ट अथवा Travel Agencies से सम्बन्धित किसी विभाग में भी कार्यरत हो सकता है | किसी आधिकारिक पद पर आसीन हो सकता है | कन्या और कुम्भ लग्नों के लिए इन राशियों से तीसरे भाव का स्वामी तथा भाई बहनों (Siblings) का कारक मंगल यदि इस नक्षत्र में विद्यमान हो तो जातक के जुड़वाँ भाई बहन हो सकते हैं | यदि पितृकारक या सूर्य अथवा गुरु अथवा नवमेश या दशमेश इस नक्षत्र में विद्यमान हो तो जातक के पिता के Twin Siblings हो सकते हैं |

शेष आगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/07/19/constellation-nakshatras-48/

सूर्य का कर्क में गोचर

सूर्य का कर्क में गोचर – कर्क संक्रान्ति

आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है, सर्वप्रथम गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ…

आज खण्डग्रास चन्द्रग्रहण भी है | जैसा कि हम अपने पूर्व के लेखों में भी लिखते आए हैं कि सूर्य ग्रहण और चन्द्रग्रहण बहुत ही आकर्षक खगोलीय घटनाएँ हैं अतः इनसे भयभीत हुए बिना इनके सौन्दर्य की सराहना करने की आवश्यकता है | किन्तु फिर भी जो लोग ग्रहण के वेध को मानते हैं उनके लिए आज रात्रि 25:32 (अर्द्ध रात्र्योत्तर एक बजकर बत्तीस मिनट) पर ग्रहण का स्पर्श काल होगा और 28:30 (कल सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व यानी चार बजकर तीस मिनट) पर मोक्ष काल होगा |

लगभग उसी समय यानी कल सूर्योदय से एक घंटा पूर्व चार बजकर चौंतीस मिनट के लगभग सूर्यदेव बुध की मिथुन राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे, जहाँ मंगल और बुध पहले से ही विराजमान हैं | कर्क राशि में आने पर राहू-केतु के प्रभाव से सूर्य को मुक्ति भी प्राप्त होगी | मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है | अपनी इस यात्रा के आरम्भ में सूर्य अभी पुनर्वसु नक्षत्र पर है, जहाँ से 20 जुलाई को पुष्य तथा 3 अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 अगस्त को दोपहर एक बजकर दो मिनट के लगभग अपनी स्वयं की राशि सिंह में तथा मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएंगे | कर्क राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से बारहवाँ भाव है और सूर्य की उच्च राशि मेष से चतुर्थ भाव है |

कर्क संक्रान्ति का महत्त्व मकर संक्रान्ति के समान ही होता है | कल से भगवान भास्कर दक्षिण दिशा की अपनी यात्रा आरम्भ कर देंगे और छह माह बाद मकर संक्रान्ति पर पुनः उत्तर दिशा की यात्रा आरम्भ कर देंगे | कर्क संक्रान्ति को श्रावण संक्रान्ति अथवा सावन संक्रान्ति भी कहा जाता है | कल सूर्य के कर्क में संक्रमण के समय श्रावण कृष्ण प्रतिपदा तिथि, बालव करण और विषकुम्भ योग होगा | कर्क संक्रान्ति से दिन की अवधि घटती जाती है और रात्रि की अवधि में वृद्धि होती जाती है | शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात माना गया है | इसी कारण वैदिक काल से ही उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है | चातुर्मास अथवा चौमासा और श्राद्ध पक्ष भी इसी अवधि में आते हैं | संक्रान्ति काल में सूर्य, भगवान् विष्णु तथा शिव की पूजा अर्चना का विशेष महत्त्व माना जाता है |

तो जानने का प्रयास करते हैं कर्क राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में उत्सव, मंगल कार्य आदि की सम्भावना है | आपके कार्य में प्रगति की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | ये गोचर आपके तथा आपकी सन्तान दोनों के ही लिए अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु परिवार में – विशेष रूप से सन्तान अथवा पिता के साथ – किसी प्रकार का व्यर्थ का विवाद भी सम्भव है | इससे बचने के लिए अपने Temperament में सुधार की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | एक ओर कहाँ आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को अपने कार्य अथवा स्वयं की योग्यता को लेकर सन्देह भी हो सकता है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है, किन्तु पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझा सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर दूसरे भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | तनाव के कारण आपको माइग्रेन आदि की समस्या भी सम्भव है | साथ ही आपको अपनी वाणी और खान पान पर भी संयम रखने की आवश्यकता है |

कर्क : द्वितीयेश का गोचर लग्न में हो रहा है | मित्र ग्रह की राशि है किन्तु अशुभ प्रभाव में भी है | एक ओर जहाँ कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर अपने तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी हुई है जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपको कहीं बाहर से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | किन्तु आपको अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु सन्तान अथवा पिता के साथ ब्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है |

तुला : आपका एकादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | अपने स्वयं के व्यवसाय में भी वृद्धि की सम्भावना है | मित्रों का सहयोग इस अवधि में उपलब्ध रहेगा | किन्तु परिवार के सदस्यों, पिता अथवा सहकर्मियों के साथ अपना व्यवहार यदि विनम्र नहीं रखा तो व्यर्थ का विवाद उत्पन्न हो सकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग हैं | कार्य में अप्रत्याशित लाभ की भी सम्भावना है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका भाग्येश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | किन्तु अकारण ही मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है | गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है | रहस्य विद्यायों जैसे ज्योतिष आदि तथा धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि भी इस अवधि में हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका अष्टमेश सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | मिश्रित फलों की सम्भावना है | पार्टनरशिप में कोई कार्य है तो उसमें किसी ग़लतफ़हमी के कारण व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | साथ ही किसी अप्रत्याशित स्रोत से कार्य में लाभ की भी सम्भावना है | अपना तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए यह गोचर उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | दाम्पत्य जीवन अथवा प्रेम सम्बन्धों में तनाव के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी कोर्ट केस के कारण भी तनाव हो सकता है | सन्तान अथवा छोटे भाई बहनों के साथ भी कोई विवाद बड़ा रूप ले सकता है | अच्छा यही रहेगा इस समय किसी बहस में न पड़कर शान्तिपूर्वक समय आनुकूल होने की प्रतीक्षा करें |

मीन : षष्ठेश का पंचम भाव में गोचर है | एक ओर आपके आत्मविश्वास में वृद्धि तथा नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | वहीं दूसरी ओर सन्तान अथवा परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ अकारण ही बहस भी हो सकती है | यदि आप पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद प्राप्त होने की सम्भावना है | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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