Monthly Archives: August 2019

via भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी

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भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी

भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी

कल रविवार को भाद्रपद शुक्ल द्वितीया यानी हरतालिका तीज का व्रत है | उसके बाद सोमवार से श्री गणेश चतुर्थी से गणपति की उपासना का दशदिवसीय पर्व आरम्भ हो जाएगा | मंगलवार को भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी – जो कि ऋषि पंचमी के नाम से जानी जाती है | और मंगलवार से ही दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का दशदिवसीय पर्यूषण पर्व – जिसे साम्वत्सरिक पर्व भी कहा जाता है – आरम्भ हो रहा है | सर्वप्रथम सभी को इन पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

जहाँ तक ऋषि पञ्चमी का प्रश्न है तो यह पर्व न होकर एक उपवास है जो सप्तर्षियों को समर्पित होता है | आरम्भ में सभी वर्णों का पुरुष समुदाय यह उपवास करता था, किन्तु अब अधिकाँश में महिलाएँ ही इस उपवास को रखती हैं | इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर सातों ऋषियों की प्रतिमाओं को पञ्चामृत से स्नान कराया जाता है | उसके बाद उन्हें चन्दन कपूर आदि सुगन्धित द्रव्यों का लेप करके पुष्प-धूप-दीप-वस्त्र-यज्ञोपवीत-नैवेद्य इत्यादि समर्पित करके अर्घ्य प्रदान किया जाता है | अर्घ्य प्रदान करने के लिए मन्त्र है:

कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषय: स्मृता:
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा ||

अर्थात काश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ इन सातों ऋषियों को हम अर्घ्य प्रदान करते हैं, ये सदा हम पर प्रसन्न रहें |

इस व्रत में केवल शाक-कन्द-मूल-फल आदि का भोजन करने का विधान है | मान्यता है कि सात वर्ष तक निरन्तर जो व्यक्ति इस व्रत का पालन करता है उसे समस्त प्रकार का सुख सौभाग्य प्राप्त होता है | सप्तम वर्ष में इस व्रत का उद्यापन किया जाता है जिसमें सात ब्राह्मणों को आमन्त्रित करके उन्हें यथाशक्ति दान दक्षिणा आदि भेंट करके भोजन कराके विदा किया जाता है |

भाद्रपद कृष्ण द्वादशी को श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय के पजूसन पर्व का आरम्भ हुआ था | पजूसन पर्व समाप्त होते ही दूसरे दिन से भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से दिगम्बरों के दशदिवसीय पर्यूषण पर्व का आरम्भ हो जाता है, जो मंगलवार यानी तीन सितम्बर से आरम्भ हो रहा है तथा भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा (अनन्त चतुर्दशी) को सम्पन्न होगा | कुछ लोग चतुर्थी से भी सम्वत्सरी का आरम्भ मानते हैं – जो एक दिन पहले यानी सोमवार से आरम्भ हो जाएगा | इस पर्व का आध्यात्मिक महत्त्व इसके लौकिक महत्त्व से कहीं अधिक गहन है | जिस प्रकार नवरात्र पर्व संयम और आत्मशुद्धि का पर्व होता है, उसी भाँति पर्यूषण पर्व भी – जिसका विशेष अंग है दशलक्षणव्रत – संयम और आत्मशुद्धि के त्यौहार हैं | नवरात्र और दशलाक्षण दोनों में ही त्याग, तप, उपवास, परिष्कार, संकल्प, स्वाध्याय और आराधना पर बल दिया जाता है । यदि उपवास न भी हो तो भी यथासम्भव तामसिक भोजन तथा कृत्यों से दूर रहने का प्रयास किया जाता है | भारत के अन्य दर्शनों की भाँति जैन दर्शन का भी अन्तिम लक्ष्य सत्यशोधन करके उसी परमानन्द की उपलब्धि करना है | और इसे ही तत्वज्ञान कहा जाता है |

जैन धर्म के अन्तिम तीर्थंकर महावीर के आचार विचार का सीधा और स्पष्ट प्रतिबिम्ब मुख्यतया आचारांगसूत्र में देखने को मिलता है जिसमें साध्य, समता या सम पर ही पूर्णतया भार दिया गया है | सम्यग्दृष्टिमूलक और सम्यग्दृष्टिपोषक जो जो आचार विचार हैं वे सब सामयिक रूप से जैन परम्परा में पाए जाते हैं | गृहस्थ और त्यागी सभी के लिये छह आवश्यक कर्म बताए गए हैं | जिनमें मुख्य “सामाइय” (जिस प्रकार सन्ध्या वन्दन ब्राह्मण परम्परा का आवश्यक अंग है उसी प्रकार जैन परम्परा में सामाइय हैं) हैं | त्यागी हो या गृहस्थ, वह जब भी अपने अपने अधिकार के अनुसार धार्मिक जीवन को स्वीकार करता है तभी उसे यह प्रतिज्ञा करनी पड़ती है “करोमि भन्ते सामाइयम् |” जिसका अर्थ है कि मैं समता अर्थात् समभाव की प्रतिज्ञा करता हूँ | मैं पापव्यापार अथवा सावद्ययोग का यथाशक्ति त्याग करता हूँ | साम्यदृष्टि जैन परम्परा के आचार विचार दोनों ही में है | और समस्त आचार विचार का केन्द्र है अहिंसा | अहिंसा पर प्रायः सभी पन्थ बल देते हैं | किन्तु जैन परम्परा में अहिंसा तत्व पर जितना अधिक बल दिया गया है और इसे जितना व्यापक बनाया गया है उतना बल और उतनी व्यापकता अन्य परम्पराओं में सम्भवतः नहीं है | मनुष्य, पशु पक्षी, कीट पतंग आदि जीवित प्राणी ही नहीं, वनस्पति, पार्थिव-जलीय आदि सूक्ष्मातिसूक्ष्म जन्तुओं तक की हिंसा से आत्मौपम्य की भावना द्वारा निवृत्त होने को कहा गया है | आत्मौपम्य की भावना अर्थात् समस्त प्राणियों की आत्मा को अपनी ही आत्मा मानना | इस प्रकार विचार में जिस साम्य दृष्टि पर बल दिया गया है वही इस पर्यूषण पर्व का आधार है | और इस प्रकार सम्यग्दृष्टि के पालन द्वारा आत्मा को मिथ्यात्व, विषय व कषाय से मुक्त करने का प्रयास किया जाता है |

पर्यूषण पर्व की अट्ठाई में बीच में साम्वत्सरिक पर्व आता है जो पर्यूषण का ही नही वरन् जैन धर्म का भी प्राण है | इस पर्यूषण-पर्वदिन साम्वत्सरिक प्रतिक्रमण किया जाता है जिसके द्वारा वर्ष भर में किए गए पापों का प्रायश्चित्त करते हैं | साम्वत्सरिक प्रतिक्रमण के बीच में ही सभी चौरासी लाख जीव योनी से क्षमा याचना की जाती है | यह क्षमा याचना सभी जीवों से वैर भाव मिटा कर मैत्री करने के लिए होती है | क्योंकि इस पर्व में दश लक्षणों का पालन किया जाता है | ये दश लक्षण हैं – क्षमा, विनम्रता, माया का विनाश, निर्मलता, सत्य अर्थात आत्मसत्य का ज्ञान – और यह तभी सम्भव है जबकि व्यक्ति मितभाषी हो तथा स्थिर मन वाला हो, संयम – इच्छाओं और भावनाओं पर नियन्त्रण, तप – मन में सभी प्रकार की इच्छाओं का अभाव हो जाने पर ध्यान की स्थिति को प्राप्त करना, त्याग – किसी पर भी अधिकार की भावना का त्याग, परिग्रह का निवारण और ब्रह्मचर्य – आत्मस्थ होना – केवल अपने भीतर स्थित होकर ही स्वयं को नियन्त्रित किया जा सकता है अन्यथा तो आत्मा इच्छाओं के अधीन रहती है – का पालन किया जाता है तथा क्षमायाचना और क्षमादान दिया जाता है |

सच्चा सुख और सच्ची शान्ति प्राप्त करने के लिये, सामाजिक स्वास्थ्य के लिये तथा स्वयम् को जागृत और विवेकी बनाने के लिये एकमात्र उपाय यही है कि व्यक्ति अपनी जीवन प्रवृत्ति का सूक्ष्मता से अवलोकन करे | और जहाँ कहीं, किसी के साथ, किसी प्रकार भी की हुई भूल के लिये – चाहे वह छोटी से छोटी ही क्यों न हो – नम्रतापूर्वक क्षमायाचना करे और दूसरे को उसकी पहाड़ सी भूल के लिये भी क्षमादान दे | इस पर्व पर इसीलिये क्षमायाचना और क्षमादान का क्रम चलता है | जिसके लिये सभी जैन मतावलम्बी संकल्प लेते हैं “खम्मामि सव्व जीवेषु सव्वे जीवा खमन्तु में, मित्ति में सव्व भू ए सू वैरम् मज्झणम् केण वि |” अर्थात् समस्त जीवों को मैं क्षमा करता हूँ और  सब जीव मुझे क्षमा करे | सब जीवों के साथ मेरा मैत्री भाव रहे, किसी के साथ भी वैर-भाव नही रहे | आत्मा तभी शुद्ध रह सकती है जब वह अपने से बाहर हस्तक्षेप न करे और न ही किसी बाहरी तत्व से विचलित हो | क्षमा-भाव इसका मूलमन्त्र है | यह केवल जैन परम्परा तक ही नहीं वरन् समाजव्यापी क्षमापना में सन्निहित है | मन को स्वच्छ उदार एवं विवेकी बनाकर समाज के संगठन की दिशा में इससे बड़ा और क्या प्रयत्न हो सकता है |

अस्तु, समस्त चराचर से क्षमायाचना सहित सभी को ऋषि पञ्चमी और पर्यूषण पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…….

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/31/bhadrapada-shukla-panchami/

 

बुध का सिंह में गोचर

बुध का सिंह में गोचर

सर्वप्रथम सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

सोमवार 26 अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण एकादशी को बव करण और सिद्धि योग में दिन में दो बजकर सात मिनट के लगभग बुध अपने शत्रु ग्रह चन्द्रमा की कर्क राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर गोचर कर जाएगा जहाँ दो मित्र ग्रहों सूर्य तथा शुक्र तथा मंगल भी विराजमान है | बुध इस समय अस्त भी है | सिंह राशि में भ्रमण करते हुए बुध दो सितम्बर को पूर्वा फाल्गुनी तथा नौ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में ग्यारह सितम्बर को सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व पाँच बजे के लगभग अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण और उच्च राशि कन्या में प्रविष्ट हो जाएगा | सिंह राशि बुश की मिथुन राशि से तीसरा भाव तथा कन्या से बारहवाँ भाव बनता है तथा सिंह राशि के जातकों के लिए बुध द्वितीयेश और लाभेश हो जाता है | अपनी इस पूरी यात्रा में बुध अस्त ही रहेगा | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं बुध के सिंह राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यह गोचर आपकी प्रतियोगी क्षमता में वृद्धि कर रहा है साथ ही आपकी निर्णायक क्षमता में भी स्पष्टता में वृद्धि के संकेत हैं | आप जो भी कार्य करेंगे सोच समझ कर करेंगे | अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Short term advance course करने का प्रयास भी आप कर सकते हैं | ऐसा करना आपके कार्य की दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है किन्तु उनके साथ आपका किसी प्रकार का प्रॉपर्टी विषयक विवाद भी सम्भव है | आपकी सन्तान यदि कहीं बाहर है तो वह वापस लौट सकती है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | परिवार में तथा कार्यस्थल पर सौहार्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है जिसके कारण आप शान्त तथा उत्साहित मन से अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकेंगे | किन्तु परिवार में बुजुर्गों से बहस आपके हित में नहीं रहेगी | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद इस अवधि में सम्भव है | किन्तु परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझाने में सफल हो सकते हैं | परिवार के अन्य व्यक्तियों का  तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | कोई पुरूस्कार भी आपको प्राप्त हो सकता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु वाणी में कुछ तीखापन भी आ सकता है, जिसके कारण विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की अनबन भी हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | इन यात्राओं के कारण एक ओर जहाँ आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण धनलाभ की भी सम्भावना है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | पिता, बड़े भाई, अधिकारियों तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके दिशानिर्देशों का पालन करेंगे तो आपके कार्य में निरन्तर प्रगति की सम्भावना है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं और धनलाभ कर सकते हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | यदि आपकी वाणी में तीखापन आ रहा है तो उसमें सुधार की आवश्यकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपका कार्य यदि किसी भी प्रकार से विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश में रहने वाले किसी पुरुष मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं | साथ ही आपके पिता का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त होते रहने की सम्भावना है जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ किसी दूर के शहर अथवा विदेश में ट्रांसफर भी हो सकता है | व्यवसाय में पैसा Invest करना पड़ सकता है किन्तु उसके दूरगामी परिणाम लाभदायक हो सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है अथवा किसी दूर के शहर से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग बन रहे हैं जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं | विदेश में निवास कर रहे किसी मित्र के निमन्त्रण पर भी आप वहाँ जा सकते हैं और उसके माध्यम से आपको कार्य का लाभ हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं दूर ट्रांसफर भी हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप किसी धार्मिक कार्य में धन भी व्यय कर सकते हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश दशम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आय की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के संकेत हैं | यदि नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी नौकरी का प्रस्ताव आ सकता है जहाँ पहले मना हो चुकी हो | आपकी वर्तमान परिस्थितियों में इस कार्य को स्वीकार कर लेना आपके हित में रहेगा | बॉस के साथ अकारण ही किसी प्रकार की बहस भारी पड़ सकती है आतः शान्त रहने का प्रयास करें | बड़े भाई अथवा पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही किसी प्रकार का पुरूस्कार अथवा सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | आप अपने जीवन साथी के साथ कहीं भ्रमण अथवा तीर्थ यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय है किन्तु इसके साथ ही विरोधियों में भी वृद्धि का समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में न आने के कारण अथवा देरी के कारण आप चिन्तित हो सकते हैं | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | कार्य आपके अनुकूल न होने के कारण मानसिक तनाव के कारण अनेक समस्याएँ आपको हो सकती हैं | अच्छा यही रहेगा कि इस समय कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय न लें | यदि कहीं यात्रा के लिए जाने का विचार हो तो अभी कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित रहेगा |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | वहीं दूसरी ओर आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आप अनुभव कर सकते हैं | आप स्वयं शान्त रहकर अपने जीवन साथी को भी शान्त करने का प्रयास कर सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई कोर्ट केस भी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | साथ ही जीवन साथी और परिवार के लोगों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/24/mercury-transit-in-leo/