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ध्यान के लिए सुविधाजनक आसन – स्वामी वेदभारती जी

अपने लिए सुविधाजनक आसन का चयन :

टाँगों में लचीलेपन के अभाव में सम्भव है कुछ प्रारम्भिक साधकों को सिद्धासन आरम्भ में सुविधाजनक न लगे | आप टाँगों को आर पार मोड़कर ऐसा कोई भी आसन बना सकते हैं जिससे आपके शरीर को इधर उधर झूले बिना, हिले डुले बिना स्थिर होकर बैठने में सहायता मिले, अथवा जैसा कि पहले बताया गया – आरम्भ में आप मैत्री आसन में भी बैठ सकते हैं | यहाँ पुनः इस बात को दोहराना आवश्यक हो जाता है कि जिस भी आसन में आप बैठें – सबसे पहले आपका सिर गर्दन और धड़ एक सीध में होना चाहिए जिससे आपकी रीढ़ सीढ़ी रहे, उसके बाद ही टाँगों को किसी विशेष प्रकार से रखिये |

कुछ अभ्यासियों को अगले आसनों को सीखने की इतनी शीघ्रता होती है कि भली भाँति सीखे बिना ही उन्हें लगाना आरम्भ कर देते हैं | जिसका परिणाम यह होता है कि वे उचित रूप से नहीं बैठ पाते, क्योंकि वे कन्धों को ऊपर खींचकर कूबड़ सा बना लेते हैं जिससे रीढ़ में बल पड़ जाता है | ऐसा करने का दुष्परिणाम यह होगा कि आपके शरीर जो बैठने में असुविधा होगी और आपके श्वास की प्रक्रिया में बाधा पड़ेगी | साथ ही ध्यान की प्रगाढ़ता के लिए उपयोगी ऊर्जा के भीतरी स्रोत भी इससे अवरुद्ध हो जाएँगे |

कमर की माँसपेशियों के साथ समस्याएँ :

बचपन से ही ग़लत ढंग से चलने और बैठने के स्वभाव के कारण बहुत से लोगों का बैठने के ढंग – आसन यानी PosturesPosture ही बिगड़ चुका होता है | और इस कारण रीढ़ को सहारा देने वाली माँसपेशियाँ पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पातीं और आयु में वृद्धि के साथ साथ माँसपेशियों में बल पड़ना आरम्भ हो जाता है | जिससे उनके शरीर को ही नुकसान पहुँचता है | जब आप प्रथम बार ध्यान के लिए बैठना आरम्भ करते हैं तब सम्भव है आपको लगे कि आपकी कमर की माँसपेशियाँ दुर्बल हैं और कुछ मिनट बैठने के बाद ही आप आगे की ओर झुक जाते हैं |

यदि आप दिन भर बैठने, खड़े होने और चलने के समय अपने शरीर के अंगों की स्थिति पर ध्यान देना आरम्भ कर देंगे तो बहुत शीघ्र आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं | यदि आप अपने शरीर को ढीला ढाला या झुका हुआ पाते हैं तो अपनी मुद्रा सुधारें | ऐसा करने से आपकी कमर की माँसपेशियाँ भली भाँति कार्य करना आरम्भ कर देंगी | कुछ हठ योग के आसन जैसे भुजंगासन, नौकासन, धनुरासन और बालासन भी आपकी कमर की माँसपेशियों को बल देने में सहायक होंगे, जिससे वे माँसपेशियाँ आपकी रीढ़ के स्तम्भ को सहारा दे सकें |

कुछ अभ्यासार्थी जिनका बैठने का ढंग सही नहीं होता वे प्रायः पूछते हैं कि ध्यान के समय क्या दीवार का सहारा Sitting Posturesलिया जा सकता है ? आरम्भ में मुद्रा सीधी करने के लिए के लिए आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन किसी बाहरी सहारे पर अधिक समय तक निर्भर रहना उचित नहीं होगा | आरम्भ से ही पूर्ण एकाग्रता और नियमित अभ्यास के द्वारा आसन को ठीक करने का प्रयास करें | अपने किसी मित्र से कह सकते हैं कि वह देखकर बताए कि आपका आसन उचित है अथवा नहीं | अथवा शीशे में एक ओर से देखकर स्वयं ही अनुमान लगाने का प्रयास कीजिए | यदि आपकी रीढ़ पूर्ण रूप से सीध में होगी तो अपनी कमर पर हाथ फिराने पर रीढ़ की हड्डी में उभारों पर गाँठ का अनुभव नहीं होगा |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/30/meditation-and-its-practices-23/

ध्यान के लिए आसन – स्वामी वेदभारती जी

ध्यान में बैठने के लिए आसन (Posture) :

बहुत सारे आसन हैं जिनमें आपकी रीढ़ सीढ़ी रहती है और आप आराम से सुविधाजनक स्थिति में अपनी टाँगों को किसी प्रकार से तोड़े मरोड़े बिना बैठे रह सकते हैं | वास्तव में ध्यान में हाथों अथवा पैरों पर ध्यान देने की अपेक्षा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आपकी रीढ़ सीधी हो | इस क्रम में मैत्री आसन और सुखासन के विषय में कल लिखा जा चुका है | आज स्वस्तिक और सिद्ध आसन…

स्वस्तिक आसन : जो लोग स्वस्तिकासन में सुविधापूर्वक बैठ सकते हैं उनके लिए इस आसन के कई लाभ होते हैं |स्वस्तिकासन यदि आपकी टाँगों में अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन है तो सुखासन की अपेक्षा इस आसन में लम्बे समय तक ध्यान के लिए आपका बैठना अधिक सुविधाजनक रहेगा | क्योंकि इसमें आपका आधार और अधिक विस्तृत हो जाता है | ज़मीन पर आपके शरीर का भार समान रूप से होता है और आप पहले से भी अधिक स्थिर होकर शरीर को बिना इधर उधर हिलाए डुलाए बैठे रह सकते हैं |

इस आसन में सुखासन की भाँति घुटने सामने वाले पैर पर टिके नहीं होते अपितु सीधे ज़मीन पर टिके होते हैं | इस आसन का एक लाभ यह भी है कि टखनों की हड्डियों पर दबाव कम पड़ता है |

सिद्धासन : सिद्धासन के लिए अपने ध्यान के आसन पर आराम से बैठ जाइए और बाईं टाँग को घुटने से धीरे से सिद्धासनमोड़कर बाएँ पैर को दाहिनी जँघा के पास लाइए | बाएँ पैर का तलवा दाहिनी जँघा के भीतर के भाग के सामने सपाट रखा हो | अब दाहिने घुटने को मोड़िये और दाहिने पैर को बाएँ पैर की पिंडली पर इस तरह रखिये कि दाहिने पैर का तलवा बाईं जँघा के साथ लगा हो | दाहिने पैर के बाहरी भाग को अँगुलियों को आपस में चिपकाकर बाईं जँघा और बाएँ पैर की पिंडली के बीच में रखिये | अब बाएँ पैर की अँगुलियों को दाहिनी जँघा और पिंडली के बीच में रखने के लिए धीरे से उठाइये और कुछ इस तरह रखिये कि अँगूठा दिखाई पड़े | इस तरह एक सन्तुलित और दृढ़ आसन बन जाएगा जो ध्यान में बहुत सहायक होगा | सम्भव है सिद्धासन का यह वर्णन पढ़कर आपको लगे कि यह बहुत उलझा हुआ है, किन्तु इन दिशा निर्देशों के अनुसार अभ्यास करेंगे तो यह आसन लगाना आपके लिए कठिन नहीं होगा |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/29/meditation-and-its-practices-22/

ध्यान के आसन – स्वामी वेदभारती जी

ध्यान में बैठने के लिए आसन (Posture) :

बहुत सारे आसन हैं जिनमें आपकी रीढ़ सीढ़ी रहती है और आप आराम से सुविधाजनक स्थिति में अपनी टाँगों को किसी प्रकार से तोड़े मरोड़े बिना बैठे रह सकते हैं | वास्तव में ध्यान में हाथों अथवा पैरों पर ध्यान देने की अपेक्षा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आपकी रीढ़ सीधी हो | और इस आसन में बैठने के लिए सबसे सरल आसन है

मैत्री आसन :मैत्री आसन

इस आसन में आप किसी कुर्सी अथवा बेंच पर बैठ सकते हैं | आपके पैर फर्श पर सीधे रखे हों अथवा बेंच के ऊपर सुखासन में हों | इस आसन का प्रयोग कोई भी कर सकता है | यहाँ तक कि जिनके शरीर में लचीलापन नहीं होता अथवा जिन्हें भूमि पर बैठने में कठिनाई होती है वे लोग भी इस आसन में आराम से बैठ सकते हैं | इस आसन में बैठने से ध्यान के समय आपको किसी प्रकार की असुविधा का अनुभव नहीं होगा |

सुखासन : यदि आपके शरीर में लचीलापन है तो आप एक वैकल्पिक आसन – सुखासन – में बैठना चाहेंगे | इसमें आप दोनों टाँगों को एक दूसरे के आर पार मोड़कर बैठते हैं | अर्थात एक पैर दूसरे पैर के घुटने के नीचे ज़मीन पर टिका होता है और दूसरे पैर का घुटना उस पैर पर आराम से रखा होता है | एक मोटे तह किये हुए कम्बल पर बैठिये जिससे आपके घुटनों और टखनों पर अधिक दबाव न पड़ने पाए | आपके ध्यान का आसन अर्थात जिस आसन या स्थान पर आप बैठे हैं वह स्थिर हो, किन्तु न तो अधिक कठोर हो और न ही हिलने डुलने वाला हो | यह आसन अधिक ऊँचा भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे आपके शरीर की स्थिति में व्यवधान उत्पन्न होगा |

यदि आपकी टाँगों में लचीलापन नहीं है अथवा जाँघ की माँसपेशियों में तनाव है तो आप देखेंगे कि आपके घुटने सुखासनज़मीन पर टिक नहीं पाते | इस स्थिति में कूल्हों के नीचे एक और कुशन अथवा तह किया हुआ एक और कम्बल लगा सकते हैं जिससे आपको बैठने में सहायता मिलेगी | आसन में बैठने से पहले यदि शरीर को खिंचाव देने वाले सरल से अभ्यास (Stretch Exercises) कर लिए जाएँ तो शरीर में लचीलापन बढाने में सहायता मिलती है जिससे आप और अधिक सुविधापूर्वक ध्यान के लिए बैठ सकते हैं | जिस भी आसन का आप चयन करें उसका नियमित रूप से अभ्यास कीजिए और उसे जल्दी जल्दी बदलने का प्रयास मत कीजिए | यदि आप नियमित रूप से एक ही आसन में बैठने का अभ्यास करते हैं तो हीरे धीरे वह आसन आपके लिए स्थिर और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/28/meditation-and-its-practices-21/