Monthly Archives: December 2019

कोस कोस पर बदले पानी

वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ

कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी

भारत में विभिन्न प्रान्तों व समुदायों के नववर्ष

आज 2019 का अन्तिम दिन है – दिसम्बर माह का अन्तिम दिवस… और कल वर्ष 2020 का प्रथम दिवस – पहली जनवरी – जिसे लगभग हर जगह नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है | सबसे पहले तो सभी को कल से आरम्भ होने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ…

कल शाम को हमारे पास किन्हीं परिचिता का फोन आया “डॉ साहब, आप तो हिन्दू रीत रिवाज़ों और संस्कारों के विषय में लिखती हैं, एक अच्छी ज्योतिषी हैं, आप भी ये अंग्रेजों का नया साल मनाने लगीं…?” पहले तो कुछ समझ नहीं आया, फिर उन्होंने ही बात स्पष्ट की “आप पिछले दो दिनों से WOW India की वेबसाइट पर नए साल की शुभकामनाएँ पोस्ट कर रही हैं | अरे हम हिन्दुओं का नया साल नहीं है ये…”

उन्हें कुछ भी समझाना हमारे बस की बात नहीं थी | लेकिन फिर भी, पहली जनवरी को नववर्ष कहे जाने का विरोध करने वालों को इतना अवश्य बताना चाहेंगे कि भारत एक ऐसा विशाल देश है जहाँ अनगिनती संस्कृतियाँ सहस्राब्दियों से परस्पर मिलजुल कर निवास करती आ रही हैं कि संसार का कोई अन्य देश इसकी “सर्वधर्मसमन्वयात्मक” संस्कृति की बराबरी नहीं कर सकता | जहाँ हर कोस पर जल का स्वाद बदला हुआ मिलता हो और हर चार कोस पर बानी यानी बोली बदली हुई मिलती हो वहाँ पर्व और त्यौहारों में विविधता पाया जाना कोई असामान्य बात नहीं है | यहाँ स्थान स्थान पर नदियों के ऐसे संगम उपलब्ध होते हैं जो दूर से अलग अलग रंगों में अकेली बहती चली आती हैं, लेकिन एक संगम स्थल पर आकर एकरंग हो जाती हैं | ऐसे में विभिन्न हिन्दू संस्कृतियों में अलग अलग तिथियों से नववर्ष का आरम्भ माना जाना कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि अन्ततोगत्वा सब हैं तो “हिन्दुस्तानी” या “भारतीय” ही | उनका कैलेण्डर भी एक दूसरे से अलग हो सकता है जो उस स्थान विशेष के मौसमों तथा वहाँ की कृषि व्यवस्था के आधार पर बनाया जाता है | कुछ सौर कैलेण्डर को मानते हैं तो कुछ चान्द्र कैलेण्डर को | किन्तु यह भी सत्य है कि अधिकाँश हिन्दुओं का नववर्ष मार्च और अप्रैल से आरम्भ होता है | प्रस्तुत है सन 2020 में अलग अलग नववर्ष की एक लिस्ट…

पहली जनवरी : अधिकाँश हिन्दू ही क्या लगभग पूरा देश पहली जनवरी को नववर्ष का आरम्भ मानकर शान्ति और सुख समृद्धि की प्रार्थना ईश्वर से करता है |

पोंगल : 15 जनवरी यानी मकर संक्रान्ति का पर्व तमिलनाडु का नववर्ष |

कर्नाटक, तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश का उगडी या युगादि, महाराष्ट्र का गुडी पर्व और लगभग समस्त उत्तर भारत का शार्वरी नामक नव सम्वत्सर विक्रम संवत 2077 : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 25 मार्च को, इन क्षेत्रों में इसी दिन युग का आरम्भ माना जाता है और नववर्ष का स्वागत किया जाता है | चैत्र माह की प्रतिपदा को ये पर्व मनाए जाते हैं | चन्द्रमा पर आधारित होने के कारण हर वर्ष इनकी तारीखें बदलती रहती हैं | इसके एक दिन बाद आता है चैती चाँद : 26 मार्च – सिन्धी समाज का नववर्ष का आरम्भ जो चैत्र शुक्ल द्वितीया से आरम्भ माना जाता है | चन्द्र आधारित होने के कारण इसकी भी तारीखें हर वर्ष बदल जाती हैं | भारत सरकार द्वारा मान्य शालिवाहन शक संवत 1942 भी इस दिन से आरम्भ हो जाएगा |

तमिल कैलेण्डर का वर्ष का प्रथम दिन पुथंडू या पुथुरूषम, ,मलयालम का नववर्ष का प्रथम दिन विषु और महा विशुभ संक्रान्ति उड़ीसा – ये सभी 14 अप्रैल को हैं | बैसाखी 13 अप्रैल को है | सौर कैलेण्डर होने के कारण ये पर्व नव वर्ष के आरम्भ के रूप में हर वर्ष तेरह या चौदह अप्रैल को ही मनाए जाते हैं |

नब बर्ष या पोइला बैसाख बंगाल, बोहाग बिहू असम तथा मैथिली और नेपाली नववर्ष का आरम्भ पन्द्रह अप्रैल को होगा | बंगाल के कैलेण्डर के अनुसार सन 1425 का आरम्भ होगा | सौर कैलेण्डर होने के कारण हर वर्ष 14 या 15 अप्रैल से ही इन नव वर्षों का आरम्भ होता है |

गुजरात में सोलह नवम्बर से नववर्ष का आरम्भ होगा तथा इसे भी शेष उत्तर भारत की ही भाँति विक्रम सम्वत के नाम से जाना जाता है |

इस प्रकार पूरे भारतवर्ष में विभिन्न “हिन्दू” संस्कृतियों के वहाँ की अपनी मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के आरम्भ माने जाते हैं और वे सब लोग अपने अपने नव नववर्ष के आगमन का स्वागत पूरे हर्षोल्लास के साथ करते हैं – जो उन्हें करना भी चाहिए | ऐसे में इन सभी नववर्ष के प्रथम दिवस के पर्वों के साथ साथ यदि पहली जनवरी को पूरा देश एकजुट होकर उल्लासमय वातावरण में नववर्ष का स्वागत करना चाहता है तो इसमें कौन सी बुराई है या कौन सा हिन्दुत्व ख़तरे में पड़ जाएगा ? हम स्वयं चैत्र प्रतिपदा को नवरात्रों की घट स्थापना के साथ अपने नव सम्वत्सर का स्वागत करते हैं | लेकिन इसके साथ ही यदि सबके साथ मिलकर पहली जनवरी को नववर्ष मनाया जाए तो क्या उल्लास… उमंग… उछाह… में वृद्धि नहीं होगी…? वो भी भारत जैसे उत्सवप्रिय देश में… सोचियेगा ज़रूर इस विषय में…

एक बार पुनः आने वाले वर्ष के लिए अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… हम सभी गत वर्ष की मीठी यादों को मन में रखकर वर्ष 2019 को विदा करें और वर्ष 2020 में स्वस्थ-समृद्ध और सुखी रहते हुए नवीन संकल्पों के साथ आगे बढ़ें और अपने लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर रहें…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/31/good-wishes-for-the-year-2020/

 

वर्ष 2020 में पंचकों की सूची

वर्ष 2020 में पंचकों की सूची

वर्ष 2020 में प्रथम पंचक सोमवार 30 दिसम्बर 2019 प्रातः 9:36 से आरम्भ होकर शनिवार 4 जनवरी 2020 प्रातः 10:06 तक रहेंगे | आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं वर्ष 2020 में आने वाले पंचकों की एक तालिका | किन्तु तालिका प्रस्तुत करने से पूर्व आइये जानते हैं कि पंचक वास्तव में होते क्या हैं |

पंचकों का निर्णय Astrologers चन्द्रमा की स्थिति से करते हैं | घनिष्ठा से रेवती तक पाँच नक्षत्र पंचक समूह में आते हैं | अर्थात घनिष्ठा के तृतीय चरण से लेकर रेवती का अन्तिम चरण तक अर्थात धनिष्ठा का तृतीय चरण, शतभिषज, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में जब चन्द्रमा होता है तब यह स्थिति नक्षत्र पंचक – पाँच विशिष्ट नक्षत्रों का समूह – कहलाती है | इनमें दो नक्षत्र – पूर्वा भाद्रपद और रेवती – सात्विक नक्षत्र हैं, तथा शेष तीन – शतभिषज धनिष्ठा और उत्तरभाद्रपद – तामसी नक्षत्र हैं | इन पाँचों नक्षत्रों में चन्द्रमा क्रमशः कुम्भ और मीन राशियों पर भ्रमण करता है | अर्थात चन्द्रमा के मेष राशि में आ जाने पर पंचक समाप्त हो जाते हैं | इस प्रकार वर्ष भर में कई बार पंचकों का समय आता है |

पंचकों को प्रायः किसी भी शुभ कार्य के लिए अशुभ माना गया है | इस अवधि में बच्चे का नामकरण तो नितान्त ही वर्जित है | ऐसी भी मान्यता है कि पंचक काल में शव का दाह संस्कार नहीं करना चाहिए अन्यथा परिवार के लिए शुभ नहीं होता |

पंचकों के अलग अलग वार के अनुसार अलग अलग फल होते हैं | जैसे सोमवार को यदि पंचकों का आरम्भ हो तो उन्हें राज पंचक कहा जाता है जो शुभ माना जाता है | इसका अर्थ यह हुआ कि इस अवधि में कोई शुभ कार्य भी किया जा सकता है | इसके अतिरिक्त कुछ पंचकों को रोग पंचक माना जाता है तो कुछ को चोर पंचक और कुछ को अग्नि पंचक | नाम से ही स्पष्ट है कि मान्यता के अनुसार इन पंचकों में रोग, आग लगने अथवा चोरी आदि का भय हो सकता है | जैसे धनिष्ठा नक्षत्र में कोई कार्य आरम्भ करने से अग्नि का भय हो सकता है, शतभिषज में क्लेश का भय, पूर्वाभाद्रपद रोगकारक, उत्तर भाद्रपद में दण्ड का भय तथा रेवती नक्षत्र में कोई कार्य आरम्भ करने पर धनहानि का भय माना जाता है |

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कार्यों की भी मनाही पंचकों के दौरान होती है – जैसे दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए | लेकिन आज के प्रतियोगिता के युग में यदि किसी व्यक्ति का नौकरी के लिए इन्टरव्यू उसी दिन हो और उसे दक्षिण दिशा की ही यात्रा करनी पड़ जाए तो वह कैसे इस नियम का पालन कर सकता है ? यदि पंचकों के भय से वह इन्टरव्यू देने नहीं जाएगा तो जो कार्य उसे मिलने की सम्भावना हो सकती थी वह कार्य उसके हाथ से निकल कर किसी और को मिल सकता है |

ऐसी भी मान्यता है कि इस अवधि में किया कोई भी कार्य पाँचगुना फल देता है | इस स्थिति में तो इस अवधि में किये गए शुभ कार्यों का फल भी पाँच गुना प्राप्त होना चाहिए – केवल अशुभ कार्यों का ही फल पाँच गुणा क्यों हो ? सम्भवतः इसी विचार के चलते कुछ लोगों ने ऐसा विचार किया कि पंचक केवल अशुभ ही नहीं होते, शुभ भी हो सकते हैं | इसीलिए पंचकों में सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य करना अच्छा माना जाता है | पंचक के अन्तर्गत आने वाले तीन नक्षत्र – पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती – में से कोई यदि रविवार को आए तो वह बहुत शुभ योग तथा कार्य में सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है |

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हमारी ऐसी मान्यता है कि ज्योतिष के प्राचीन सूत्रों को – प्राचीन मान्यताओं को – आज की परिस्थितियों के अनुकूल उन पर शोध कार्य करके यदि संशोधित नहीं किया जाएगा तो उनका वास्तविक लाभ उठाने से हम वंचित रह सकते हैं | वैसे भी ज्योतिष के आधार पर कुण्डली का फल कथन करते समय भी देश-काल-व्यक्ति का ध्यान रखना आवश्यक होता है | तो फिर विशिष्ट शुभाशुभ कालों पर भी इन सब बातों पर विचार करना चाहिए | साथ ही हर बात का उपाय होता है | किसी भी प्रकार के अन्धविश्वास से भयभीत होने की अपेक्षा अपने कर्म पर बल देना चाहिए |

तो, अपने कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए हम सभी का जीवन मंगलमय रहे और सब सुखी रहें… इसी भावना के साथ प्रस्तुत है वर्ष 2020 में आने वाले पंचकों की एक तालिका…

  • सोमवार 30 दिसम्बर प्रातः 9:36 से आरम्भ होकर शनिवार 4 जनवरी प्रातः 10:06 तक
  • रविवार 26 जनवरी सायं 5:40 से आरम्भ होकर शुक्रवार 31 जनवरी सायं 6:10 तक
  • रविवार 23 फरवरी प्रातः 29 (22 फरवरी अर्द्धरात्रि) से आरम्भ होकर शुक्रवार 28 फरवरी रात्रि 1.18 (अर्द्धरात्र्योत्तर) तक
  • शनिवार 21 मार्च प्रातः 21 से आरम्भ होकर गुरूवार 26 मार्च प्रातः 7:17 तक
  • शुक्रवार 17 अप्रैल दिन में 12:18 से आरम्भ होकर बुधवार 22 अप्रैल दोपहर 1:18 तक
  • गुरूवार 14 मई रात्रि 7:22 से आरम्भ होकर मंगलवार 19 मई रात्रि 7:54 तक
  • गुरूवार 11 जून सूर्योदय से पूर्व 3:42 से आरम्भ होकर मंगलवार 16 जून सूर्योदय से पूर्व 3:18 तक
  • बुधवार 8 जुलाई दिन में 12:31 से आरम्भ होकर सोमवार 13 जुलाई प्रातः 11:14 तक
  • मंगलवार 4 अगस्त रात्रि 8:47 से आरम्भ होकर रविवार 9 अगस्त को रात्रि 7:07 तक
  • मंगलवार 1 सितम्बर सूर्योदय से पूर्व 3:48 से आरम्भ होकर रविवार 6 सितम्बर सूर्योदय से पूर्व (5 सितम्बर अर्द्धरात्र्योत्तर) 2:22 तक
  • सोमवार 28 सितम्बर प्रातः 9:41 से आरम्भ होकर शनिवार 3 अक्टूबर प्रातः 8:51 तक
  • रविवार 25 अक्तूबर रात्रि 3:27 से आरम्भ होकर शुक्रवार 30 अक्तूबर दोपहर 2:57 तक
  • शनिवार 21 नवम्बर रात्रि 10:26 से आरम्भ होकर गुरूवार 26 नवम्बर रात्रि 9:21 तक
  • शनिवार 19 दिसम्बर प्रातः 7:17 से आरम्भ होकर गुरूवार 24 दिसम्बर सूर्योदय से पूर्व ­4:33 तक

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/30/a-list-of-panchak-in-2020/

 

खीज – डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा का लेख – गिरगिट की तरह रंग बदलते राजनेताओं पर एक व्यंग्य… कि किस तरह जब तक पद का नशा रहता तो सब कुछ भूल जाते हैं और जब नशा हिरन होता है तब हिस्से आती है सिर्फ एक बेचारगी…

खीज – दिनेश डॉक्टर

सामने झक्क सफेद कलफदार कुर्ते पायजामें नेता जी बैठे थे । इंडिया किंग्स की सिगरेट की डब्बी सामने मेज पर पड़ी थी । शाम का वक्त था । स्कॉच की बोतल आधी हो चुकी थी । वो बोल रहे थे और मैं सुन रहा था । वो कह रहे थे कि उन्हें देश के लिए बहुत काम करना है । युवा पीढ़ी को नई दिशा देनी है । कौमी एकता मज़बूत करनी है । धर्म और जातिवाद के ज़हर से समाज को मुक्त करना है । मोहब्बत और भाईचारे की एक नई क्रांति का सूत्रपात करना है । और ऐसा कुछ करना है कि आने वाली कई पीढियां उन्हें याद रक्खें । क्योंकि जगह भी उनकी थी और शराब भी तो मैं पूरे उत्साह से उनका हौसला बढ़ाता रहा… पढने के लिए क्लिक करें:

https://shabd.in/post/111492/-7223922