आसन को सुविधाजनक बनाना – स्वामी वेदभारती जी

ध्यान के आसन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के कुछ सुझाव :

अभी तक हम ध्यान के लिए उपयुक्त आसनों के विषय में चर्चा कर चुके हैं | अब आगे, एक अनुकूल आसन का चयन तो हमने कर लिया, लेकिन यदि उसे और अधिक सुविधाजनक बनाना हो तो उसके लिए क्या करना चाहिए…

यदि आप तह किये हुए कम्बल को ज़मीन पर गद्दे की भाँति रखकर उस पर बैठते हैं तो आपके लिए ज़मीन पर बैठना सरल हो जाएगा | या फिर एक मोटा कुशन अथवा तकिया कूल्हों के नीचे रख सकते हैं जिससे कि शरीर का वह भाग भूमि से तीन चार इंच ऊपर उठ जाए | इस विधि से कूल्हों को उठाने से कूल्हों के जोड़ों ध्यान का आसनऔर घुटनों पर दबाव कम हो जाता है | इस विधि से आसन में बैठने पर आप आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन का अनुभव करेंगे | कूल्हों के नीचे मोटा कुशन रखने से आप अपनी रीढ़ को भी सीधा रख सकते हैं | जिस आसन पर आप बैठे हों वह स्थिर हो लेकिन कठोर न हो, न ही इधर उधर हिलने डुलने वाला हो | आसन इतना ऊँचा भी न हो कि आपके शरीर की स्थिति में बाधक हो |

जैसे जैसे आपके शरीर में लचीलापन आता जाएगा और बैठने में आपको सुविधा का अनुभव होने लगेगा आप पतले कुशन अथवा सीधे ज़मीन पर बैठकर भी ध्यान के अभ्यास कर सकेंगे | आसन जैसा भी हो इतना ध्यान रहे कि आपका मेरुदण्ड सीधा रहे और उसमें बल न पड़ने पाए | अन्यथा आपको आसन लगाने में असुविधा होगी | आरम्भ में मोटे कुशन के बिना रीढ़ को सीधा रखना कठिन होता है | अपने आसन में अभ्यस्त होने के लिए धैर्य रखिये | आप देखेंगे कि धीरे धीरे आपका शरीर लचीला होता जा रहा है और तब आप लम्बी अवधि के लिए भी ध्यान के लिए सुविधापूर्वक बैठ सकते हैं |

शरीर को खींचने (Stretch) के अभ्यास और हठयोग के आसनों से भी आपके शरीर में लचीलापन लाने में सहायता मिलेगी और आप ध्यान में बैठने में सुविधा का अनुभव करने लगेंगे |

ध्यान लेटकर क्यों नहीं करना चाहिए :

कुछ विशेष कारणों से आपको लेटकर ध्यान करने की सलाह नहीं दी जाती है | जिनमें सबसे प्रमुख कारण ध्यान के लिए आसनहै कि इस स्थिति में आपको बार बार नींद आ सकती है और आपके लिए चैतन्य स्थिति में बने रहना कठिन हो सकता है | निश्चित रूप से, यदि आपमें आलस्य है अथवा आप सो रहे हैं तो इस स्थिति में आप ध्यान लगा ही नहीं सकते |

एक और विशेष कारण ये है कि जब ध्यान की स्थिति में गहनता आती है उस समय आवश्यक हो जाता है कि आपका मेरुदण्ड यानी रीढ़ सीधी रहे, क्योंकि इससे एक विशेष प्रकार की ऊर्जा को शरीर में ऊपर की ओर प्रवाहित होने में सहायता मिलती है |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/16/meditation-and-its-practices-26/

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