Author Archives: Astrologer DR. Purnima Sharma Katyayani

About Astrologer DR. Purnima Sharma Katyayani

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via Weekly Horoscope

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सूर्य का सिंह में गोचर

सूर्य का सिंह में गोचर

कल भाद्रपद कृष्ण द्वितीया यानी 17 अगस्त को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग गर करण और अतिगण्ड योग में सूर्यदेव अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि सिंह और मघा नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएँगे | यहाँ भ्रमण करते हुए 31 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और चौदह सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 सितम्बर को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग बुध की कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | शुक्र और बुध का तो अधिकाँश में सूर्य को साथ मिलता ही है, मंगल भी इस पूरी यात्रा में सूर्य के साथ सिंह राशि में ही रहेगा | सिंह सूर्य की मूल त्रिकोण राशि भी है | और जब कोई ग्रह अपनी मूल त्रिकोण राशि अथवा अपनी उच्च राशि में आता है तो वह बली माना जाता है |

इस बीच भगवान् श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव श्री कृष्ण जन्माष्टमी भी है – 23 अगस्त को स्मार्तों की और 24 अगस्त को वैष्णवों की | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी यानी 27 अगस्त से श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय का पञ्चमी पक्ष का पर्यूषण पर्व भी आरम्भ होने जा रहा है, और उसके समाप्त होते ही दूसरे दिन यानी 3 सितम्बर भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से दिगम्बरों के दशदिवसीय साम्वत्सरिक पर्व पजूसन पर्व का भी आरम्भ हो जाएगा जो कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा यानी अनंतचतुर्दशी को संपन्न होगा | पहली सितम्बर को हरतालिका तीज, दो सितम्बर को गणेश चतुर्थी, तीन सितम्बर को ऋषिपञ्चमी, दस सितम्बर को वामन जयंती और तेरह प्रौष्ठपदी पूर्णिमा को पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ ही दिवंगतों के प्रति श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष भी आरम्भ हो जाएगा | इस प्रकार भगवान् भास्कर के सिंह राशि में प्रस्थान के साथ ही इतने सारे व्रत उपवास तथा पर्वों का आरम्भ होने जा रहा है, जिनके लिए सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…  

अब जानने का प्रयास करते हैं सिंह राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

 

मेष : आपकी राशि से पंचमेश पंचम भाव में ही गोचर कर रहा है | यदि आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा अथवा किसी Professional Course के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आय के नवीन अवसरों के साथ ही मन सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आपके साथ Romantically involve हो सकते हैं जो धीरे धीरे विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान का स्वभाव भी उग्र हो सकता है किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपको अपनी माता का सुख प्राप्त होगा वहीं दूसरी ओर आपके पिता के लिए किसी प्रकार के शारीरिक कष्ट की सम्भावना भी हो सकती है | आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा अपने स्वयं के व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | जो कार्य अब तक रुके हुए थे उनके भी पूर्ण होने की सम्भावना है | परिवार में मंगल कार्यों का आयोजन हो सकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर तृतीय भाव में ही हो रहा है | आपके लिए मान सम्मान और यश में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | साथ ही आपके उत्साह में भी इस अवधि में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर द्वितीय भाव में ही हो रहा है | आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि के योग हैं | परिवार में तथा कार्य स्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण रहने की सम्भावना है | किन्तु इसके साथ ही आपका स्वभाव भी उग्र हो सकता है | साथ ही नेत्रों से सम्बन्धित कोई समस्या, किसी प्रकार की फोड़े फुंसी आदि की समस्या अथवा मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन या उच्च रक्तचाप की समस्या भी हो सकती है | इस सबसे बचने के लिए खान पान पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | ध्यान और प्राणायम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी ही राशि में गोचर विशेष रूप से लाभप्रद प्रतीत होता है | आपकी ऊर्जा में वृद्धि तथा व्यक्तित्व में ओज के ही साथ आपके कार्य में भी प्रगति की सम्भावना है | आपके व्यक्तित्व का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा और इस कारण आपके मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो बड़े भाई का सहयोग भी प्राप्त रह सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपने क्रोध को नियन्त्रण में रखना होगा | आपको अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपके द्वादश भाव में ही हो रहा है | यदि आपका कार्य कहीं विदेशों से सम्बद्ध है तो कार्य में प्रगति तथा विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | ननिहाल के पक्ष से किसी प्रकार का मनमुटाव सम्भव है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो इस अवधि में उसका निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | आपके लिए एक ओर जहाँ किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर नेत्र सम्बन्धी विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं |

तुला : आपकी राशि से एकादश भाव में सूर्य का गोचर आय में वृद्धि की ओर तथा नौकरी में पदोन्नति की ओर संकेत करता है | आपका अपना कार्य है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का मतभेद भी हो सकता है | आप कोई नया वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं | आपके अपने स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | छात्रों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर दशम भाव में ही हो रहा है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | आपके लिए कार्य तथा आय के नवीन स्रोत इस अवधि में उपस्थित हो सकते हैं | परिवार में किसी प्रकार के मंगल कार्य की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही यदि आप गर्भवती महिला हैं और डिलीवरी निकट है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है | किसी रोग से मुक्ति भी इस अवधि में संभव है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश अष्टम भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके कार्य में आपके स्वयं के अथवा आपके पिता या परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य के कारण विघ्न उपस्थित हो सकता है | अचानक ही आपके विरोधियों के भी स्वर मुखर हो सकते हैं | आपको स्वयं को ज्वर, मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन, उच्च रक्तचाप अथवा नेत्र विकार अथवा गुप्तांगों से सम्बंधित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु खान पान पर ध्यान देंगे और अपने स्वभाव को संयमित रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

कुम्भ : आपके लियेः गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति की सम्भावना है | किन्तु आपके बिजनेस पार्टनर का स्वभाव इस अवधि में कुछ उग्र हो सकता है | साथ ही दाम्पत्य जीवन में जीवन साथी का सहयोग और साथ तो प्राप्त रहेगा किन्तु उसके स्वभाव की उग्रता के कारण आपको मानसिक तनाव हो सकता | अच्छा यही रहेगा कि अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखें | दूर पास की यात्राओं के योग भी बन रहे हैं |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर छठे भाव में ही हो रहा है | एक ओर आपके विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर आपके उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने विरोधियों पर स्वयं ही विजय प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | किसी प्रकार का कोई लीगल केस का भी सामना करना पड़ सकता है | किन्तु साथ ही परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके कारण आपके आत्मबल में भी वृद्धि होगी | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपके ननिहाल के पक्ष के साथ या तो मनमुटाव हो सकता है अथवा किसी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | आपकी अपनी भी किसी प्रकार की सर्जरी इस अवधि में संभव है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/16/sun-transit-in-leo-2/

 

स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन

स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बन्धन

अभी बारह अगस्त को भाईचारे के प्रतीक ईद का त्यौहार सारे देश ने हर्षोल्लास के साथ मनाया, और अब कल समूचे देश के लिए एक और बहुत ही उत्साह का दिन है | कल एक ओर पन्द्रह अगस्त को सारा देश आज़ादी की तिहत्तरवीं सालगिरह मनाएगा तो कल ही भाई बहन के पावन प्रेम का प्रतीक रक्षा बन्धन का उल्लासमय पर्व भी है यानी श्रावण पूर्णिमा – जिसे समूचे देश में अलग अलग नामों से मनाया जाता है – कहीं नारिकेल पूर्णिमा के नाम से तो कहीं अन्वाधान के नाम से | कल गायत्री जयन्ती, भगवान् विष्णु के अवतार हयग्रीव जयन्ती जैसे पर्व भी हैं और कल यजुर्वेदीय उपाकर्म का दिन भी है | मान्यता है कि हयग्रीव ने वेदों की पुनर्स्थापना की थी | सर्वप्रथम सभी को इन सभी पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इष्टि और अन्वाधान हिन्दू परम्परा में बहुत महत्त्व रखते हैं | श्रावण कृष्ण अमावस्या को इष्टि का दिन होता है और इस दिन विशेष रूप से वैष्णव सम्प्रदाय के लोग दिन भर उपवास रखकर यज्ञ का आयोजन करते हैं | उसके बाद श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को अन्वाधान अर्थात अग्निहोत्र कर लेने के पश्चात् अग्नि को प्रज्वलित रखने के लिए ईंधन डालने का कार्य करते हैं | और ये कार्य केवल श्रावण माह में ही नहीं होते अपितु प्रत्येक माह की अमावस्या को इष्टि और पूर्णिमा को अन्वाधान की प्रक्रिया का पालन किया जाता है |

उपाकर्म अर्थात आरम्भ | इस दिन शिष्य गुरु के सान्निध्य में विधि विधान पूर्वक नवीन यज्ञोपवीत धारण करके वेदाध्ययन आरम्भ करता था | वैदिक परम्पराओं का पालन जो लोग करते हैं आज भी वहाँ उपाकर्म का विशेष महत्त्व है | यजुर्वेदीय शाखा में श्रावण पूर्णिमा को उपाकर्म सम्पन्न किया जाता है और ऋग्वेदीय शाखा में श्रावण में उस दिन उपाकर्म संपन्न किया जाता है जिस दिन श्रावण माह में श्रवण नक्षत्र होता है | इस प्रकार संभव कुछ दिनों का अन्तर हो जाए, किन्तु भावना एक ही है | तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश प्रदेश में भी उपाकर्म का उतना ही महत्त्व है, तमिलनाडु में इस अवनिअट्टम कहा जाता है और आंध्र में थालाई अवनिअट्टम |

पूर्णिमा तिथि का आरम्भ आज दोपहर बाद तीन बजकर पैंतालीस मिनट के लगभग हो चुका है और कल सायं लगभग छह बजे तक रहेगी | कल सूर्योदय पाँच बजकर पचास मिनट पर होगा अतः रक्षा बन्धन का शुभ मुहूर्त भी इसी समय से आरम्भ होगा और सामान्यतः पूरा दिन भाइयों की कलाइयों पर बहनें राखी बाँधेंगी |

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ||

जिस रक्षासूत्र से महाशक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था उसी सूत्र से हम तुम्हें बाँधते हैं – हे रक्षासूत्र तुम अडिग रहना और रक्षा के अपने संकल्प से कभी विचलित न होना – रक्षासूत्र बाँधते समय इस भावना से संकल्प लिया जाता है | और ये रक्षा केवल भाई बहनों के पारस्परिक स्नेह तक ही सीमित नहीं है, प्राचीन काल में जब युद्धों का युग था तो वीर सेनानियों की पत्नियाँ भी युद्ध के मैदान में जाते अपने भाइयों के साथ ही अपने पतियों की कलाइयों पर भी इसी भावना के साथ रक्षासूत्र निबद्ध करती थीं कि युद्धक्षेत्र में गया वीर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करके सकुशल घर वापस लौटे | गुरु शिष्य द्वारा एक दूसरे को रक्षासूत्र बाँधने की प्रथा भी अनादि काल से चली आ रही है | इसके पीछे भावना यही है कि शिष्य ने जो ज्ञान प्राप्त किया है वह अपने भावी जीवन में उसका समुचित ढंग से प्रयोग करे ताकि वह अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने गुरु की गरिमा की रक्षा करने में भी सफल हो | इसी परम्परा के अनुरूप आज भी धार्मिक विधि विधान से पूर्व पुरोहित यजमान को और यजमान पुरोहित को रक्षासूत्र बाँधता है | इस प्रकार दोनों एक दूसरे के सम्मान की रक्षा करने के लिये परस्पर एक दूसरे को अपने बन्धन में बाँधते हैं | भारत जैसे बहुधर्म सम्प्रदाय वाले देश में धार्मिक और साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए विभिन्न सम्प्रदायों के लोग परस्पर एक दूसरे को रक्षासूत्र बाँधते हैं |

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में जन जागरण के लिए भी इस पर्व का आश्रय लिया अगया अता और श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बंग-भंग का विरोध करते हुए इसे बंगाल निवासियों के लिए पारस्परिक भाईचारे और एकता का पर्व बना दिया था |

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण, श्रीमद्भागवत, भविष्यपूरण, महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथों से इस पर्व की अतिप्राचीनता के विषय में ज्ञान होता है | इष्टि, अन्वाधान, उपाकर्म ये सभी बहुत गहन परम्पराएँ हैं और साधारण बुद्धि वाला मुझ जैसा व्यक्ति इनकी समुचित व्याख्या सम्भवतः न कर पाए | अस्तु, रक्षा बंधन के इस उल्लासमय पर्व के अवसर पर इनकी व्याख्या अथवा रक्षा बन्धन की पौराणिक व्याख्या न करके केवल इतना ही कहना चाहेंगे कि रक्षा बन्धन का पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता अथवा एकसूत्रता का पर्याय है | क्या ही अच्छा हो यदि हम प्रकृति के साथ भी इसी एकसूत्रता की डोर में बंधने के लिए हरे भरे वृक्षों की कलाइयों पर रक्षा का ये बलशाली सूत्र आबद्ध कर दें… सभी को रक्षा बन्धन के इस महान पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ… इस कामना के साथ कि हम सब एकसूत्रता की डोर में सदा इसी प्रकार आबद्ध रहे और एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने देश और प्रकृति की सुरक्षा और सेवा में सदा तत्पर रहे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/14/independence-day-and-raksha-bandhan/

 

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्रवार सोलह अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को तैतिल करण और अतिगण्ड योग में रात्रि आठ बजकर चालीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र प्रस्थान होगा | यद्यपि इस दिन सूर्योदय काल में प्रतिपदा तिथि है किन्तु शुक्र के गोचर के समय द्वितीया तिथि रहेगी | शुक्र इस समय अस्त चल रहा है | शिंह राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र 28 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा आठ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ अन्त में नौ सितम्बर को 25:42 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर बयालीस मिनट) के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपनी इस पूरी यात्रा के दौरान शुक्र अस्त ही रहेगा |

इस बीच पन्द्रह अगस्त को स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के साथ ही परस्पर भाईचारे और सद्भावना के प्रतीक रक्षा बंधन का उल्लासमय पर्व भी है | 18 अगस्त को कजरी तीज, 21 अगस्त को बलराम जयंती, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जयंती का पर्व जन्माष्टमी, एक सितम्बर को हरतालिका तीज, दो को गणेश चतुर्थी और तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी जैसे कुछ विशेष पर्व भी हैं | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ…

मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | सिंह राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से चतुर्थ भाव और तुला से एकादश भाव बनता है, तथा सिंह राशि के लिए शुक्र तृतीयेश और दशमेश है | इन्हीं समस्त तथ्यों एक आद्धार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | हाथ के कारीगरों और सर्जन आदि के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी रोग से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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