Author Archives: Astrologer DR. Purnima Sharma Katyayani

About Astrologer DR. Purnima Sharma Katyayani

How you felt cheated and taken for a ride when you visited a street-smart charlatan behind glossy dress and beads, posing as astrologer, healer or swami. His or her recommendation of expensive stones, tabeez and similar tricks in the name of yagya, havans and pooja left you more confused. Not only you lost your hard-earned money but also felt deprecated. Today when the market is full of greedy and manipulative practitioners of Astrology, who brazenly cheat innocent and gullible people for immoral gains, Dr Purnima Sharma is an honest, highly educated, most experienced and scholarly Vedic Astrologer with credibility. Dr. Purnima Sharma is giving Jyotish consultations for over 30 years now. For many years she wrote Jyotish predictions for different prestigious national newspapers and earned acclaims and appreciations from the readers. Dr. Purnima Sharma has a huge list of highly satisfied Jyotish clients and her predictions are admired for spiritual toning and perfect mantra recommendations to remove hurdles, bring prosperity and success in career.

मिराबेल पैलेस का महिला वायलिन बैंड – दिनेश डॉक्टर

डॉ  दिनेश  शर्मा  के  यात्रा  संस्मरण,   जिनमें  समूची  यात्रा  के  शब्दचित्र  उकेरे  हुए  हैं…

मिराबेल पैलेस का महिला वायलन बैंड – दिनेश डॉक्टर

पहाड़ी से नीचे उतर कर पैलेस के परिसर से वापस बस स्टैंड पर आकर पच्चीस नम्बर की बस पकड़ कर साल्जबर्ग शहर के सेंटर में उतर गया | सुबह का मुफ्त का नाश्ता कभी का पच चुका था और अच्छी खासी भूख लग आयी थी | पश्चिमी देशों में रेस्तरांओं में खाना खाना आपके टूरिस्टिक बजट को अच्छा खासा हल्का कर सकता है | ऐसे में किसी साफ सुथरी जगह से स्ट्रीट फूड खरीद लें | पानी की वही छोटी से बोतल किसी रेस्तरा में दो यूरो यानी कि एक सौ साठ रुपये की मिलेगी और यदि आप किसी फ़ूड स्टोर में गए तो सिर्फ तीस पैंतीस सेंट यानी बीस या पच्चीस रुपये की | टूरिज्म करते वक़्त मै कंजूसी की हद तक खासा किफायती हो जाता हूँ | उसकी वजह है कि ज्यादा पैसा में देखने वाले स्थानों के टिकटों, यात्रा भाड़े, किसी विशेष प्रोग्राम जैसे ओपेरा या संगीत की बड़ी प्रस्तुति पर व्यय करने के लिए बचाता रहता हूँ | ऐसे कार्यक्रमों की टिकटें कई बार बहुत महंगी भी हो सकती हैं | एक व्यक्ति की एंट्री टिकट सौ यूरो यानी सात हजार पांच सौ रुपये कोई बड़ी बात नही|

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कन्या और तुला राशि के जातकों के लिए शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के सिंह राशि के जातकों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा की थी, आज कन्या और तुला राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है…

कन्या राशि : आपके लिए पंचमेश तथा षष्ठेश होकर शनि का गोचर आपके पञ्चम भाव में ही हो रहा है जहाँ से आपके सप्तम भाव, एकादश भाव तथा द्वितीय भाव पर इसकी दृष्टियाँ हैं | इस गोचर के साथ ही पिछले ढाई वर्षों से चली आ रही ढैया भी समाप्त होने जा रही है – जिसने सम्भव है आपको हिला कर रख दिया होगा | लेकिन अब धीरे धीरे परिस्थितियों के सामान्य होने की सम्भावना की जा सकती है | यदि आपने कोई कोर्स बीच में छोड़ दिया है तो दोबारा से आप उसे आरम्भ कर सकते हैं और आपको उसमें सफलता भी प्राप्त होगी | आपकी गम्भीरता में वृद्धि होगी और आप कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय इस अवधि में ले सकते हैं | किन्तु यदि वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए मई 2020 से सितम्बर 2020 तक का समय अनुकूल नहीं रहेगा |

पञ्चम भाव से सन्तान का विचार किया जाता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है |कन्या आपकी सन्तान का हर क्षेत्र में प्रदर्शन उत्तम रहने की सम्भावना है | सन्तान की ओर से सन्तोष और सुख दोनों ही प्राप्त होने की सम्भावना है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु आपके लिए ससुराल अथवा ननसाल पक्ष के साथ सम्बन्धों में कुछ दरार उत्पन्न हो सकती है | विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र छात्राओं के लिए शनि का यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | विद्यार्थियों को उनके मनपसन्द विद्यालयों में एडमीशन भी मिल सकता है |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो मिश्रित फलों की सम्भावना की जा सकती है | एक ओर किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति प्राप्त हो सकती है, तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई नवीन समस्या भी उत्पन्न हो सकती है | नियमित चेकअप तथा खान पान में नियन्त्रण के साथ ही योग व्यायाम और ध्यान प्राणायाम का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध कहीं निश्चित हो सकता है अथवा प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो सकता है, किन्तु विवाह में शीघ्रता उचित नहीं रहेगी | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ ईमानदार तथा सहृदय रहने की आवश्यकता है, अन्यथा सम्बन्धों में दरार पड़ते देर नहीं लगेगी |

तुला राशि : आपके लिए चतुर्थेश और पंचमेश होकर शनि योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है जहाँ से आपके छठे भाव, दशम भाव तथा आपकी लग्न पर इसकी दृष्टि रहेगी | एक ओर तो आपके लिए यह शुभ संकेत है, किन्तु दूसरी ओर आपकी शनि की ढाई साल की ढैया भी आरम्भ हो रही है – जो चिन्ता का विषय हो सकती है – विशेष रूप से मई 2020 से सितम्बर 2020 के मध्य – जब शनि वक्री होगा | उस समय आपको अपने स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता होगी | साथ ही आपका अहम आपके बनाते बनाते कार्यों में आड़े आ सकता है, अतः इस ओर से भी सावधान रहकर अपने व्यवहार को सन्तुलित रखने की आवश्यकता होगी | शनि के वक्री होने पर माता जी के साथ भी विवाद सम्भव है | यदि ऐसा लगे तो अच्छा यही रहेगा कि आप इतने समय के लिए दूरी बना लें ताकि विवाद अधिक बढ़ने न पाए |

इस अवधि में आपके समक्ष व्यापार के अनेक नवीन अवसर उपस्थित हो सकते हैं | किन्तु यदि किसी प्रोजेक्ट में तुलापैसा Invest करना हो सोच समझकर तथा सम्बन्धित कार्यों के जानकारों से अच्छी तरह सलाह मशविरा करके है आगे बढें | किसी के कहने मात्र से पैसा कहीं Invest न करें | कार्य से सम्बन्धित छोटी छोटी विदेश यात्राओं के भी अवसर उपलब्ध हो सकते हैं | आप नया घर अथवा वाहन अथवा दोनों ही खरीद सकते हैं और ये आपके लिए शुभ भी रह सकते हैं | कोर्ट कचहरी के मामलों से बचने की आवश्यकता है |

स्वास्थ्य का जहाँ प्रश्न है तो यों सामान्य रूप से स्वास्थ्य ठीक ही रहने की सम्भावना है | किन्तु इसके लिए आपको आलस्य का त्याग करके व्यायाम और योग का अभ्यास करते रहना होगा | साथ ही किसी भी प्रकार की ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करें जिनके कारण आपको मानसिक तनाव हो सकता है | अपनी माता जी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता होगी |

अनुकूल जीवन साथी की खोज में हैं तो वह खोज इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सम्भव है किसी सहकर्मी अथवा किसी निकट के सम्बन्ध में ही आपका विवाह सम्पन्न हो जाए | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ व्यर्थ के विवाद बचने का प्रयास करें | साथ ही जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे वृश्चिक राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/15/saturn-transit-in-capricorn-7/

संक्रान्ति 2020 और मकर संक्रान्ति

ॐ घृणि: सूर्य आदित्य नम: ॐ

माघ कृष्ण पञ्चमी यानी पन्द्रह जनवरी को सूर्योदय से पूर्व दो बजकर नौ मिनट (चौदह जनवरी को अर्द्धरात्र्योत्तर) के लगभग भगवान भास्कर गुरुदेव की धनु राशि से निकल कर महाराज शनि की मकर राशि में गमन करेंगे और इसके साथ उत्तर दिशा की ओर उनका प्रस्थान आरम्भ हो जाएगा | पुण्यकाल प्रातः सूर्योदय के समय यानी सात बजकर पन्द्रह मिनट से आरम्भ होकर सूर्यास्त यानी सायं पौने छह बजे तक रहेगा | संक्रान्ति शब्द का अर्थ है संक्रमण करना – प्रस्थान करना | इस प्रकार किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि पर गोचर अथवा संक्रमण संक्रान्ति ही होता है | किन्तु सूर्य का संक्रमण सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है | नवग्रहों में सूर्य को राजा माना जाता है तथा सप्ताह के दिन रविवार का स्वामी रवि अर्थात सूर्य को ही माना जाता है | सूर्य का शाब्दिक अर्थ है सबका प्रेरक, सबको प्रकाश देने वाला, सबका प्रवर्तक होने के कारण सबका कल्याण करने वाला | यजुर्वेद में सूर्य को “चक्षो सूर्योSजायत” कहकर सूर्य को ईश्वर का नेत्र माना गया है | सूर्य केवल स्थूल प्रकाश का ही संचार नहीं करता, अपितु सूक्ष्म अदृश्य चेतना का भी संचार करता है | यही कारण है कि सूर्योदय के साथ ही समस्त जड़ चेतन जगत में चेतनात्मक हलचल बढ़ जाती है | इसीलिए ऋग्वेद में आदित्यमण्डल के मध्य में स्थित सूर्य को सबका प्रेरक, अन्तर्यामी तथा परमात्मस्वरूप माना गया है – सूर्यो आत्मा जगतस्य…”

वेद उपनिषद आदि में सूर्य के महत्त्व के सम्बन्ध में अनेकों उक्तियाँ उपलब्ध होती हैं | जैसे सूर्योपनिषद का एक मन्त्र है “आदित्यात् ज्योतिर्जायते | आदित्याद्देवा जायन्ते | आदित्याद्वेदा जायन्ते | असावादित्यो ब्रह्म |” अर्थात आदित्य से प्रकाश उत्पन्न होता है, आदित्य से ही समस्त देवता उत्पन्न हुए हैं, आदित्य ही वेदों का भी कारक है और इस प्रकार आदित्य ही ब्रह्म है | अथर्ववेद के अनुसार “संध्यानो देवः सविता साविशदमृतानि |” अर्थात् सविता देव में अमृत तत्वों का भण्डार निहित है | तथा “तेजोमयोSमृतमयः पुरुषः |” अर्थात् यह परम पुरुष सविता तेज का भण्डार और अमृतमय है | इत्यादि इत्यादि

छान्दोग्योपनिषद् में सूर्य को प्रणव माना गया है | ब्रह्मवैवर्तपुराण में सूर्य को परमात्मा कहा गया है | गायत्री मन्त्र में तो है ही भगवान् सविता की महिमा का वर्णन – सूर्य का एक नाम सविता भी है – सविता सर्वस्य प्रसविता – सबकी सृष्टि करने वाला – यही त्रिदेव के रूप में जगत की रचना, पालन तथा संहार का कारण है | आत्मा का कारक, प्राणों का कारक, जीवनी शक्ति का – ऊर्जा का कारक सूर्य ही माना जाता है | यही कारण है कि सूर्य की संक्रान्ति का सबसे अधिक महत्त्व माना जाता है | सूर्योपासना से न केवल ऊर्जा, प्रकाश, आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य आदि की उपलब्धि होती है बल्कि एक साधक के लिए साधना का मार्ग भी प्रशस्त होता है |

सूर्य को एक राशि से दूसरी राशि पर जाने में पूरा एक वर्ष का समय लगता है – और यही अवधि सौर मास कहलाती है | वर्ष भर में कुल बारह संक्रान्तियाँ होती हैं | आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, उडीसा, पंजाब और गुजरात में संक्रान्ति के दिन ही मास का आरम्भ होता है | जबकि बंगाल और असम में संक्रान्ति के दिन महीने का अन्त माना जाता है | यों तो सूर्य की प्रत्येक संक्रान्ति महत्त्वपूर्ण होती है, किन्तु मेष, कर्क, धनु और मकर की संक्रान्तियाँ विशेष महत्त्व की मानी जाती हैं | इनमें भी मकर और कर्क की संक्रान्तियाँ विशिष्ट महत्त्व रखती हैं – क्योंकि इन दोनों ही संक्रान्तियों में ऋतु परिवर्तन होता है | कर्क की संक्रान्ति से सूर्य का दक्षिण की ओर गमन आरम्भ हो जाता है जिसे दक्षिणायन कहा जाता है और मकर संक्रान्ति से सूर्य का उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान आरम्भ हो जाता है – जिसे उत्तरायण कहा जाता है | मकर संक्रान्ति से शीत का प्रकोप धीरे धीरे कम होना आरम्भ हो जाता है और जन साधारण तथा समूची प्रकृति सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उल्लसित हो नृत्य करना आरम्भ कर देती है | पृथिवी को सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में मिलना आरम्भ हो जाता है जिसके कारण दिन की अवधि भी बढ़ जाती है और शीत के कारण आलस्य को प्राप्त हुई समूची प्रकृति पुनः कर्मरत हो जाती है | इसलिए इस पर्व को अन्धकार से प्रकाश की ओर गमन करने का पर्व तथा प्रगति का पर्व भी कहा जाता है |

कुछ लोग इसे बसन्त के आगमन के तौर पर भी देखते हैं, जिसका मतलब होता है फसलों की कटाई और पेड़-पौधों के पल्लवित होने की शुरूआत | इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को विभिन्न नामों से मनाया जाता है |

इस वर्ष मकर संक्रान्ति पर कुछ विशेष योग भी बन रहे हैं – जैसे गुरु और मंगल स्वराशिगत हैं, साथ ही शोभन योग तथा बुधादित्य योग है | ये सभी योग बहुत शुभ माने जाते हैं |

अस्तु, सभी को मकर संक्रान्ति, पोंगल, लोहड़ी तथा माघ बिहू की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है वर्ष 2020 के लिए बारह संक्रान्तियों की सूची… उनके पुण्यकाल सहित…

बुधवार, 15 जनवरी    माघ कृष्ण पञ्चमी / मकर संक्रान्ति                          सूर्य का मकर राशि में गोचर सूर्योदय से पूर्व 2:09 पर, पुण्यकाल प्रातः सवा सात बजे से सायं पौने छह बजे तक |

गुरुवार, 13 फरवरी    फाल्गुन कृष्ण पञ्चमी / कुम्भ संक्रान्ति                      सूर्य का कुम्भ राशि में गोचर अपराह्न 3:04 पर, पुण्यकाल प्रातः 9:22 से सायं 3:18 तक |

शनिवार, 14 मार्च     चैत्र कृष्ण षष्ठी / मीन संक्रान्ति

सूर्य का मीन राशि में गोचर प्रातः 11:54 पर, पुण्यकाल प्रातः 11:54 से सायं 6:29 तह |

सोमवार, 13 अप्रैल    वैशाख कृष्ण षष्ठी / मेष संक्रान्ति

सूर्य का मेष राशि में गोचर रात्रि 8:24 पर, पुण्यकाल दिन में 12:21 से सायं 6:45 तक

गुरुवार, 14 मई       ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी / वृषभ संक्रान्ति

सूर्य का वृषभ राशि में गोचर सायं 5:16 पर | पुण्यकाल प्रातः 10:19 से सायं 5:33 तक

रविवार, 14 जून       आषाढ़ कृष्ण नवमी / मिथुन संक्रान्ति

सूर्य का मिथुन राशि में गोचर रात्रि 11:54 पर | पुण्यकाल प्रातः 5:22 से सायं 7:20 तक

गुरुवार, 16 जुलाई     श्रावण कृष्ण एकादशी / कर्क संक्रान्ति

सूर्य का कर्क राशि में गोचर प्रातः 10:47 पर | पुण्यकाल प्रातः 5:33 से प्रातः 11:03 तक

रविवार, 16 अगस्त    भाद्रपद कृष्ण द्वादशी / सिंह संक्रान्ति

सूर्य का सिंह राशि में गोचर सायं 7:11 पर | पुण्यकाल दिन में 12:25 से सायं 6:59 तक

बुधवार, 16 सितंबर    आश्विन (प्रथम) कृष्ण चतुर्दशी / कन्या संक्रान्ति

सूर्य का कन्या राशि में गोचर सायं 7:08 पर | पुण्यकाल दिन में सवा बारह बजे से सायं 6:24 तक

शनिवार, 17 अक्टूबर   आश्विन (द्वितीय) शुक्ल प्रतिपदा / तुला संक्रान्ति

सूर्य का तुला राशि में गोचर प्रातः 7:05 पर | पुण्यकाल प्रातः 6:23 से दिन में ग्यारह बजकर दस मिनट तक

सोमवार, 16 नवंबर    कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा/द्वितीया / वृश्चिक संक्रान्ति

सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर प्रातः 6:54 पर | पुण्यकाल प्रातः 6:44 से सात बजकर दस मिनट तक केवल छब्बीस मिनट के लिए

मंगलवार, 15 दिसंबर   मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा / धनु संक्रान्ति

सूर्य का धनु राशि में गोचर रात्रि 9:32 पर | पुण्यकाल दिन में 12:16 से सायं 5:26 तक

भगवान भास्कर का प्रत्येक राशि में संक्रमण समस्त चराचर प्रकृति को ऊर्जा प्रदान करते हुए जन साधारण के जीवन को ज्ञान, सुख-समृद्धि, उल्लास तथा स्नेह की ऊर्जा से परिपूर्ण करे…

पोंगल

माघ बिहू

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/14/makar-sankranti/