Category Archives: उत्तरायण

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ

सूर्य के उत्तरायण गमन के पर्व मकर संक्रान्ति की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस शुभावसर पर प्रस्तुत है महाभारत के वनपर्व अध्याय तीन से उद्धृत सूर्य अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्…

धौम्य उवाच
सूर्योSर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: |
गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ||
पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वायुश्च परायणम् |
सोमो बृहस्पति: शुक्रो बुधो अंगारक एव च ||
इन्द्रो विवस्वान् दीप्तांशु: शुचि: शौरि: शनैश्चर: |
ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वै वरुणो यम: ||
वैद्युतो जाठरश्चाग्नि रैन्धनस्तेजसां पति: |
धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदांगो वेदवाहन: ||
कृतं त्रेता द्वापरश्च कलि: सर्वमलाश्रय: |
कला काष्ठा मुहूर्त्ताश्च क्षपा यामस्तथा क्षण: ||
संवत्सरकरोऽश्वत्थ: कालचक्रो विभावसु: |
पुरुष: शाश्वतो योगी व्यक्ताव्यक्त: सनातन: ||
कालाध्यक्ष: प्रजाध्यक्षो विश्वकर्मा तमोनुद: |
वरुण: सागरोंSशश्च जीमूतो जीवनोSरिहा ||
भूताश्रयो भूतपति: सर्वलोकनमस्कृत: |
स्रष्टा संवर्तको वह्नि: सर्वस्यादिरलोलुप: ||
अनन्त: कपिलो भानु: कामद: सर्वतोमुख: |
जयो विशालो वरद: सर्वधातुनिषेचिता ||
मन:सुपर्णो भूतादि: शीघ्रग: प्राणधारक: |
धन्वन्तरिर्धूमकेतुरादिदेवो दिते: सुत: ||
द्वादशात्मारविन्दाक्ष: पिता माता पितामह: |
स्वर्गद्वारं प्रजाद्वारं मोक्षद्वारं त्रिविष्टपम् ||
देहकर्ता प्रशान्तात्मा विश्वात्मा विश्वतोमुख: |
चराचरात्मा सूक्ष्मात्मा मैत्रेय: करुणान्वित: ||

सूर्य, अर्यमा, भग, त्वष्टा, पूषा (पोषक), अर्क, सविता, रवि, गभस्तिमान (किरणों से युक्त), अज (अजन्मा), काल (काल अथवा समय), मृत्यु (अवसान), धाता (धारण करने वाला), प्रभाकर (प्रकाश उत्पन्न करने वाला), पृथ्वी, आप: (जल), तेज, ख (आकाश), वायु, परायण (आश्रयदाता), सोम, बृहस्पति, शुक्र, बुध, अंगारक (मंगल), इन्द्र, विवस्वान्, दीप्तांशु (दीप्त अर्थात प्रकाशित अंशु अर्थात किरणों से युक्त), शुचि (पवित्र), सौरि (सूर्यपुत्र मनु), शनैश्चर, ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र (त्रिदेव) स्कन्द (कार्तिकेय), वैश्रवण (कुबेर), यम (संयमित अथवा सन्तुलित करने वाले), वैद्युताग्नि, जाठराग्नि, ऐन्धनाग्नि (विद्युत, जठर और ईंधन तीनों प्रकार की अग्नियाँ), तेज:पति, धर्मध्वज, वेदकर्ता, वेदांग, वेदवाहन (जिनके द्वारा वेदों की रचना हुई, जो वेदों के अंग भी हैं और वेदों के वाहक भी), कृत (सत्ययुग), त्रेता, द्वापर, सर्वामराश्रय कलि, कला, काष्ठा मुहूर्तरूप समय, क्षपा (रात्रि), याम (प्रहर), क्षण, संवत्सरकर, अश्वत्थ, कालचक्र प्रवर्तक विभावसु, शाश्वतपुरुष, योगी, व्यक्ताव्यक्त (जोई व्यक्त अर्थात प्रत्यक्ष भी है और अव्यक्त अर्थात अप्रत्यक्ष भी), सनातन, कालाध्यक्ष, प्रजाध्यक्ष, विश्वकर्मा, तमोनुद (अंधकार को भगाने वाले), वरुण, सागर, अंशु, जीमूत (मेघ), जीवन, अरिहा (शत्रुओं का नाश करने वाले), भूताश्रय, भूतपति, सर्वलोकनमस्कृत, स्रष्टा, संवर्तक, वह्नि, सर्वादि, अलोलुप (निर्लोभ), अनन्त, कपिल, भानु, कामद, सर्वतोमुख, जय, विशाल, वरद, सर्वभूतनिषेवित, मन:सुपर्ण, भूतादि, शीघ्रग (शीघ्र चलने वाले), प्राणधारण, धन्वन्तरि, धूमकेतु, आदिदेव, अदितिपुत्र, द्वादशात्मा (बारह स्वरूपों वाले – द्वादश आदित्य), अरविन्दाक्ष, पिता-माता-पितामह, स्वर्गद्वार-प्रजाद्वार, मोक्षद्वार, देहकर्ता, प्रशान्तात्मा, विश्वात्मा, विश्वतोमुख, चराचरात्मा, सूक्ष्मात्मा, मैत्रेय, करुणान्वित (दयालु) |

ये सूर्य के 108 नाम महाभारत के वनपर्व में उपलब्ध होते हैं जो सूर्योपनिषद के इस वाक्य की पुष्टि करते हैं कि सूर्य ही आत्मा है “आदित्यात् ज्योतिर्जायते | आदित्याद्देवा जायन्ते | आदित्याद्वेदा जायन्ते | असावादित्यो ब्रह्म |” अर्थात आदित्य से प्रकाश उत्पन्न होता है, आदित्य से ही समस्त देवता उत्पन्न हुए हैं, आदित्य ही वेदों का भी कारक है और इस प्रकार आदित्य ही ब्रह्म है |

सबको प्रकाश, ऊर्जा, जीवन तथा नैरोग्य प्रदान करने वाले भगवान भास्कर सभी के जीवन में नैरोग्य तथा ऊर्जा का प्रकाश प्रसारित करें इसी कामना के साथ सभी को मकर संक्रान्ति की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/15/makar-sankranti-2019/

 

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सूर्य का मकर राशि में संक्रमण

पौष शुक्ल अष्टमी, सोमवार 14 जनवरी 2019 को सायं सात बजकर बावन मिनट के लगभग उत्तराषाढ़ नक्षत्र में रहते हुए राहू केतु के मध्य बव करण और सिद्ध योग में भगवान भास्कर मित्र ग्रह गुरु की धनु राशि से निकलकर शत्रु गृह शनि की मकर राशि में संचार करेंगे | जिसे “मकर संक्रान्ति” के नाम से जाना जाता है | पुण्यकाल मंगलवार 15 जनवरी को सूर्योदय के समय सवा सात बजे से होगा | इसी दिन सूर्य का उत्तरायण गमन आरम्भ हो जाता है | सभी को सूर्यदेव के उत्तरायण प्रस्थान की हार्दिक शुभकामनाएँ | भगवान सूर्य बुधवार 13 फरवरी 2019 तक मकर राशि में निवास करके आगे कुम्भ राशि में प्रस्थान करेंगे | जैसा कि हम सभी जानते हैं, सूर्य समस्त चराचर में प्रकाश, ऊर्जा तथा प्राणों का संचार करने वाला आत्मतत्व है – प्राण तत्व है – शक्ति है | साथ ही, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य पिता तथा पूर्वजों का भी प्रतिनिधित्व करता है | मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्यदेव क्रमशः उत्तराषाढ़, श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्रों पर विचरण करेंगे | उत्तराषाढ़ राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी ध्रुव अर्थात स्थिर नक्षत्र है तथा इसकी नाड़ी कफ है | श्रवण की नाड़ी भी कफ है और यह भी राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी किन्तु चर नक्षत्र है | धनिष्ठा ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है किन्तु इसकी नाड़ी पित्त है तथा यह तामसी प्रवृत्ति का और चर नक्षत्र है |

यों देखा जाए तो सूर्य की अपनी राशि सिंह है और मेष राशि में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है | अब इस दृष्टि से यदि देखें तो मकर राशिगत सूर्य अपनी उच्च राशि से दशम भाव  में तथा अपनी राशि सिंह से छठे भाव  में गोचर करता है | माना मकर राशि का अधिपति ग्रह शनि सूर्य का शत्रु ग्रह है, किन्तु सूर्य भी दुर्बल ग्रह तो है नहीं | साथ ही मकर और कुम्भ राशियाँ सूर्य के अपने पुत्र शनि की राशियाँ हैं | अतः सूर्य का यह गोचर जातक को किसी भी विपरीत परिस्थिति से लड़कर आगे बढ़ने में सहायता ही करेगा | जातक के जीवन में इस समय समस्याएँ आ सकती हैं किन्तु अपने बुद्धिबल से तथा अपने पिता की सहायता से वह इन समस्याओं से मुक्ति भी प्राप्त करने में सक्षम हो सकता है | तो, इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्य के विभिन्न राशियों के जातकों के लिए क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं :-

मेष : मेष राशि के लिए सूर्य पंचमेश होकर दशम भाव में गोचर कर रहा है | दशम भाव व्यवसाय का / नौकरी का भाव होता है | पंचमेश का दशम भाव में गोचर निश्चित रूप से इस भाव को बली बना रहा है | आपके कार्य में प्रगति के साथ साथ सामाजिक स्तर पर भी आपके सम्मान में वृद्धि की सम्भावना है | क्योंकि दशम भाव पंचम से छठा भाव हो जाता है इसलिए सम्भव है कार्यक्षेत्र में आपको किसी प्रकार के विरोध अथवा नकारात्मकता का भी सामना करना पड़ जाए | 24 जनवरी के बाद से स्थितियों में सुधार की सम्भावना है | आपकी बुद्धि और दृढ़ इच्छाशक्ति आपको विरोधियों को परास्त करने में सहायक होंगे और आप स्वयं अपने लिए आगे बढ़ने का मार्ग निकाल सकेंगे | प्रातः सूर्य को अर्घ्य समर्पित करना आपके हित में रहेगा |

वृषभ : आपका चतुर्थेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपना लक्ष्य अधिक निकट प्रतीत होगा और आपमें उस तक पहुँचने का उत्साह भी बढ़ेगा | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किसी भी महत्त्वपूर्ण विषय में निर्णय लेने से पूर्व उसके हर पक्ष पर भली भाँति निर्णय करेंगे तो सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं | यदि कहीं आपका पैसा अटका हुआ है और आप उसे भूल गए हैं तो अचानक ही आपको उस धन की प्राप्ति हो सकती है | आप कोई नई प्रॉपर्टी भी ख़रीद सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए सूर्य का मकर राशि में संचार बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | पित्त सम्बन्धी अथवा जोड़ों में दर्द या ज्वर आदि की समस्याएँ हो सकती हैं | जो कुछ भी करें भली भाँति सोच विचार कर करें | कुछ छिपे हुए विरोधी इस अवधि में मुखर हो सकते हैं जिनके कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | छोटे भाई बहनों के साथ किसी विवाद में भी फँस सकते हैं | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस हो सकती है | किन्तु सन्तान की शिक्षा के विषय में कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

कर्क : आपके लिए सूर्य द्वितीयेश होकर सप्तम भाव में गोचर कर रहा है जो दूसरे भाव से छठा भाव हो जाता है | अर्थात अपने से छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है | आपके तथा आपके जीवन साथी के सम्बन्धों में किसी प्रकार का अहम् आड़े आ सकता है | पार्टनरशिप में कार्य कर रहे हैं तो वहाँ भी आपके अपने चिडचिडेपन के कारण किसी प्रकार की बहस हो सकती है | आपके जीवन साथी अथवा परिवार में किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किन्तु इसके साथ साथ आपके व्यवसाय में प्रगति की भी सम्भावनाएँ हैं | सम्भव है कोई नया प्रोजेक्ट भी आपको प्राप्त हो जाए | राजनीति में हैं तो आपको कोई पदभार भी सौंपा जा सकता है |

सिंह : आपकी लग्न का स्वामी होकर सूर्य छठे भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं | अतः यदि हल्का सा भी बुख़ार अथवा सरदर्द आदि हो तो तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लें | आपके स्वभाव में कुछ अधिक तेज़ी आ सकती है | साथ ही व्यावसायिक रूप से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप पहले से कहीं अधिक प्रयत्नशील हो सकते हैं जिस कारण से अपना कार्य समय पूर्ण कर पाने में भी सफल हो सकते हैं | कोई कोर्ट केस भी चिन्ता का विषय हो सकता है | स्पोर्ट्स में हैं तो सावधानीपूर्वक खेलें अन्यथा किसी दुर्घटना के भी शिकार होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा शिक्षा की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उच्च शिक्षा के लिए अथवा किसी अन्य कार्य के लिए आप कहीं विदेश के लिए भी प्रस्थान कर सकते हैं अथवा उसके लिए तैयारी कर सकते हैं | ऐसा करना आपके हित में रहेगा तथा नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो अपने अधिकारियों के साथ आपके सम्बन्धों में घनिष्ठता आ सकती है | सन्तान की शिक्षा में समस्या आ सकती है | यदि सन्तान विदेश में कहीं है तो घर भी वापस आ सकती है जो उसके हित में होगा |

तुला : एकादशेश होकर सूर्य आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर आपके अनुकूल प्रतीत होता है | हाँ आपके स्वभाव में चिडचिडापन बढ़ सकता है जिसके कारण पारिवारिक और व्यावसायिक स्तरों पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अतः अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए प्राणायाम तथा ध्यान आदि का सहारा लें तो अच्छा रहेगा | अपने किसी अधिकारी के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | घर को रेनोवेट करा सकते हैं |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके आत्मविश्वास में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य स्थल में साथियों के साथ अथवा छोटे भाई बहनों के साथ व्यर्थ की बहस भी हो सकती है जो मानसिक तनाव का कारण बन सकती है | आपके किसी कार्य के पूर्ण होने की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आप कोई नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं जो आपके लिए आर्थिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है |

धनु : नवमेश होकर सूर्य आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | यद्यपि यह नवम भाव से छठा भाव बनता है, किन्तु फिर भी धनु राशि के लिए सूर्य का ये गोचर आर्थिक रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किसी सरकारी तन्त्र से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना है | यदि सरकारी नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना को जा सकती है | अपना व्यवहार दूसरों के साथ उचित रखेंगे तो सम्बन्धों में कड़वाहट से बच सकते हैं | आँखों में किसी प्रकार की समस्या हो सकती है | डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें |

मकर : अष्टमेश होकर सूर्य आपकी लग्न में गोचर कर रहा है | आपको हल्के ज्वर, पित्त अथवा सरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | यदि आपने अपने व्यवहार को सही नहीं रखा तो सम्बन्धों में कटुता का भी सामना करना पड़ सकता है | आपके अपने अहम् के कारण जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में कड़वाहट आ सकती है | आपका कोई पुराना रहस्य भी इस अवधि में सामने आ सकता है जो आपके हित में नहीं होगा |

कुम्भ : सप्तमेश का द्वादश भाव में गोचर हो रहा है | सम्भव है आपको इस पूरी अवधि में लम्बी यात्राएँ करनी पड़ जाएँ | सम्भव है जीवन साथी के साथ विदेश यात्रा की योजना आप बना लें जो न केवल आपके लिए आमोद प्रमोद का साधन होगी बल्कि वापस लौटने पर आप स्वयं में एक नवीन स्फूर्ति का भी अनुभव करेंगे | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उस पार्टनरशिप के टूटने की सम्भावना है | यदि कोई प्रेमप्रसंग चल रहा है तो उसमें भी अलगाव हो सकता है | जीवन साथी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मीन : सूर्य का मकर राशि में गोचर आपके उत्साह में तथा कार्यक्षमता में वृद्धि का सूचक है जिसके कारण आपके कार्य में प्रगति तथा आपके यश में वृद्धि की सम्भावना है और अर्थलाभ की भी सम्भावना है | यह गोचर आपको अन्तर्मुखी भी बना सकता है तथा स्वार्थी भी | आपकी भेंट किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जो बहुत अधिक प्रभावशाली होगा और भविष्य में उसके द्वारा आपको लाभ भी हो सकता है | आपके विरोधी शान्त होंगे और यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी अनुकूल परिणाम की आशा की जा सकती है | ज्वर अथवा सरदर्द सम्बन्धी समस्याओं से आप परेशान हो सकते हैं |

जैसा कि ऊपर लिखा, मकर राशि में भ्रमण करते हुए भगवान भास्कर निरन्तर ऊर्ध्वमुखी नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे, और लगभग 25 दिन कफ प्रकृति के नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे | इसका सामान्य अर्थ यह होता है कि जन साधारण में कफ की प्रधानता रह सकती है तथा अधिकाँश लोग प्रगति के पथ पर अग्रसर रह सकते हैं | वैसे भी सूर्य का उत्तरायण प्रस्थान वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से बहुत उत्तम माना जाता है | अतः सूर्य या किसी भी अन्य ग्रह के किसी विशिष्ट राशि में संचार के क्या फल हो सकते हैं इसका विस्तृत अध्ययन तो एक Astrologer व्यक्ति विशेष की कुण्डली समग्र अध्ययन करने के बाद ही बता सकता है | यहाँ तो केवल सामान्य परिणामों के विषय में ही लिखा जा सकता है |

अन्त में, सभी आदित्यगण हम सबके हृदयों से अज्ञान का अन्धकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रसारित करें, हम सबके विचारों में सकारात्मकता का संचार करें और हमारी रचनाधर्मिता में वृद्धि करते हुए हम सबको सुखी, स्वस्थ तथा ऊर्ध्वमुखी अर्थात प्रगतिशील बनाए रखें…

ॐ घृणिः सूर्य आदित्य नमः ॐ

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/14/sun-transit-in-capricorn/

 

मकर संक्रान्ति

ॐ घृणि: सूर्य आदित्य नम: ॐ

आज रात्रि सात बजकर पावन मिनट के लगभग भगवान भास्कर गुरुदेव की धनु राशि से निकल कर महाराज शनि की मकर राशि में गमन करेंगे और इसके साथ उत्तर दिशा की ओर उनका प्रस्थान आरम्भ हो जाएगा | और कल यानी 15 जनवरी – मकर संक्रान्ति को सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का पर्व मनाया जाएगा | पुण्यकाल कल प्रातः सूर्योदय के समय यानी सात बजकर पन्द्रह मिनट से आरम्भ होकर सूर्यास्त यानी सायं पाँच बजकर पैतालीस मिनट तक रहेगा | साथ ही इस वर्ष मकर संक्रान्ति से ही प्रयागराज में अर्द्धकुम्भ का मेला भी आरम्भ होने जा रहा है | संक्रान्ति शब्द का अर्थ है संक्रमण करना – प्रस्थान करना | इस प्रकार किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि पर गोचर अथवा संक्रमण संक्रान्ति ही होता है | किन्तु सूर्य का संक्रमण सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है | नवग्रहों में सूर्य को राजा माना जाता है तथा सप्ताह के दिन रविवार का स्वामी रवि अर्थात सूर्य को ही माना जाता है | सूर्य का शाब्दिक अर्थ है सबका प्रेरक, सबको प्रकाश देने वाला, सबका प्रवर्तक होने के कारण सबका कल्याण करने वाला | यजुर्वेद में सूर्य को “चक्षो सूर्योSजायत” कहकर सूर्य को ईश्वर का नेत्र माना गया है | सूर्य केवल स्थूल प्रकाश का ही संचार नहीं करता, अपितु सूक्ष्म अदृश्य चेतना का भी संचार करता है | यही कारण है कि सूर्योदय के साथ ही समस्त जड़ चेतन जगत में चेतनात्मक हलचल बढ़ जाती है | इसीलिए ऋग्वेद में आदित्यमण्डल के मध्य में स्थित सूर्य को सबका प्रेरक, अन्तर्यामी तथा परमात्मस्वरूप माना गया है – सूर्यो आत्मा जगतस्य…”

वेद उपनिषद आदि में सूर्य के महत्त्व के सम्बन्ध में अनेकों उक्तियाँ उपलब्ध होती हैं | जैसे सूर्योपनिषद का एक मन्त्र है “आदित्यात् ज्योतिर्जायते | आदित्याद्देवा जायन्ते | आदित्याद्वेदा जायन्ते | असावादित्यो ब्रह्म |” अर्थात आदित्य से प्रकाश उत्पन्न होता है, आदित्य से ही समस्त देवता उत्पन्न हुए हैं, आदित्य ही वेदों का भी कारक है और इस प्रकार आदित्य ही ब्रह्म है | अथर्ववेद के अनुसार “संध्यानो देवः सविता साविशदमृतानि |” अर्थात् सविता देव में अमृत तत्वों का भण्डार निहित है | तथा “तेजोमयोSमृतमयः पुरुषः |” अर्थात् यह परम पुरुष सविता तेज का भण्डार और अमृतमय है | इत्यादि इत्यादि

छान्दोग्योपनिषद् में सूर्य को प्रणव माना गया है | ब्रह्मवैवर्तपुराण में सूर्य को परमात्मा कहा गया है | गायत्री मन्त्र में तो है ही भगवान् सविता की महिमा का वर्णन – सूर्य का एक नाम सविता भी है – सविता सर्वस्य प्रसविता – सबकी सृष्टि करने वाला – यही त्रिदेव के रूप में जगत की रचना, पालन तथा संहार का कारण है | आत्मा का कारक, प्राणों का कारक, जीवनी शक्ति का – ऊर्जा का कारक सूर्य ही माना जाता है | यही कारण है कि सूर्य की संक्रान्ति का सबसे अधिक महत्त्व माना जाता है | सूर्योपासना से न केवल ऊर्जा, प्रकाश, आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य आदि की उपलब्धि होती है बल्कि एक साधक के लिए साधना का मार्ग भी प्रशस्त होता है |

सूर्य को एक राशि से दूसरी राशि पर जाने में पूरा एक वर्ष का समय लगता है – और यही अवधि सौर मास कहलाती है | वर्ष भर में कुल बारह संक्रान्तियाँ होती हैं | आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, उडीसा, पंजाब और गुजरात में संक्रान्ति के दिन ही मास का आरम्भ होता है | जबकि बंगाल और असम में संक्रान्ति के दिन महीने का अन्त माना जाता है | यों तो सूर्य की प्रत्येक संक्रान्ति महत्त्वपूर्ण होती है, किन्तु मेष, कर्क, धनु और मकर की संक्रान्तियाँ विशेष महत्त्व की मानी जाती हैं | इनमें भी मकर और कर्क की संक्रान्तियाँ विशिष्ट महत्त्व रखती हैं – क्योंकि इन दोनों ही संक्रान्तियों में ऋतु परिवर्तन होता है | कर्क की संक्रान्ति से सूर्य का दक्षिण की ओर गमन आरम्भ माना जाता है जिसे दक्षिणायन कहा जाता है और मकर संक्रान्ति से सूर्य का उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान आरम्भ हो जाता है – जिसे उत्तरायण कहा जाता है | मकर संक्रान्ति से शीत का प्रकोप धीरे धीरे कम होना आरम्भ हो जाता है और जन साधारण तथा समूची प्रकृति सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उल्लसित हो नृत्य करना आरम्भ कर देती है | पृथिवी को सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में मिलना आरम्भ हो जाता है जिसके कारण दिन की अवधि भी बढ़ जाती है और शीत के कारण आलस्य को प्राप्त हुई समूची प्रकृति पुनः कर्मरत हो जाती है | इसलिए इस पर्व को अन्धकार से प्रकाश की ओर गमन करने का पर्व तथा प्रगति का पर्व भी कहा जाता है |

अस्तु, सभी को मकर संक्रान्ति, पोंगल, लोहड़ी तथा माघ बिहू की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है वर्ष 2019 के लिए बारह संक्रान्तियों की सूची…सूर्य संक्रान्ति

मंगलवार, 15 जनवरी       मकर संक्रान्ति       सूर्य का मकर राशि में गोचर

बुधवार, 13 फरवरी         कुम्भ संक्रान्ति      सूर्य का कुम्भ राशि में गोचर

शुक्रवार, 15 मार्च          मीन संक्रान्ति       सूर्य का मीन राशि में गोचर

रविवार, 14 अप्रेल          मेष संक्रान्ति        सूर्य का मेष राशि में गोचर

बुधवार, 15 मई           वृषभ संक्रान्ति       सूर्य का वृषभ राशि में गोचर

शनिवार, 15 जून          मिथुन संक्रान्ति      सूर्य का मिथुन राशि में गोचर

मंगलवार, 16 जुलाई        कर्क संक्रान्ति       सूर्य का कर्क राशि में गोचर

शनिवार, 17 अगस्त        सिंह संक्रान्ति       सूर्य का सिंह राशि में गोचर

मंगलवार, 17 सितम्बर     कन्या संक्रान्ति      सूर्य का कन्या राशि में गोचर

शुक्रवार, 18 अक्टूबर       तुला संक्रान्ति       सूर्य का तुला राशि में गोचर

रविवार, 17 नवम्बर        वृश्चिक संक्रान्ति     सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर

सोमवार, 16 दिसम्बर       धनु संक्रान्ति        सूर्य का धनु राशि में गोचर

भगवान भास्कर का प्रत्येक राशि में संक्रमण समस्त चराचर प्रकृति को ऊर्जा प्रदान करते हुए जन साधारण के जीवन को ज्ञान, सुख-समृद्धि, उल्लास तथा स्नेह की ऊर्जा से परिपूर्ण करे…

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