Category Archives: कर्क

सूर्य का कर्क में गोचर

सूर्य का कर्क में गोचर – कर्क संक्रान्ति

आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है, सर्वप्रथम गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ…

आज खण्डग्रास चन्द्रग्रहण भी है | जैसा कि हम अपने पूर्व के लेखों में भी लिखते आए हैं कि सूर्य ग्रहण और चन्द्रग्रहण बहुत ही आकर्षक खगोलीय घटनाएँ हैं अतः इनसे भयभीत हुए बिना इनके सौन्दर्य की सराहना करने की आवश्यकता है | किन्तु फिर भी जो लोग ग्रहण के वेध को मानते हैं उनके लिए आज रात्रि 25:32 (अर्द्ध रात्र्योत्तर एक बजकर बत्तीस मिनट) पर ग्रहण का स्पर्श काल होगा और 28:30 (कल सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व यानी चार बजकर तीस मिनट) पर मोक्ष काल होगा |

लगभग उसी समय यानी कल सूर्योदय से एक घंटा पूर्व चार बजकर चौंतीस मिनट के लगभग सूर्यदेव बुध की मिथुन राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे, जहाँ मंगल और बुध पहले से ही विराजमान हैं | कर्क राशि में आने पर राहू-केतु के प्रभाव से सूर्य को मुक्ति भी प्राप्त होगी | मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है | अपनी इस यात्रा के आरम्भ में सूर्य अभी पुनर्वसु नक्षत्र पर है, जहाँ से 20 जुलाई को पुष्य तथा 3 अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 अगस्त को दोपहर एक बजकर दो मिनट के लगभग अपनी स्वयं की राशि सिंह में तथा मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएंगे | कर्क राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से बारहवाँ भाव है और सूर्य की उच्च राशि मेष से चतुर्थ भाव है |

कर्क संक्रान्ति का महत्त्व मकर संक्रान्ति के समान ही होता है | कल से भगवान भास्कर दक्षिण दिशा की अपनी यात्रा आरम्भ कर देंगे और छह माह बाद मकर संक्रान्ति पर पुनः उत्तर दिशा की यात्रा आरम्भ कर देंगे | कर्क संक्रान्ति को श्रावण संक्रान्ति अथवा सावन संक्रान्ति भी कहा जाता है | कल सूर्य के कर्क में संक्रमण के समय श्रावण कृष्ण प्रतिपदा तिथि, बालव करण और विषकुम्भ योग होगा | कर्क संक्रान्ति से दिन की अवधि घटती जाती है और रात्रि की अवधि में वृद्धि होती जाती है | शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात माना गया है | इसी कारण वैदिक काल से ही उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है | चातुर्मास अथवा चौमासा और श्राद्ध पक्ष भी इसी अवधि में आते हैं | संक्रान्ति काल में सूर्य, भगवान् विष्णु तथा शिव की पूजा अर्चना का विशेष महत्त्व माना जाता है |

तो जानने का प्रयास करते हैं कर्क राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में उत्सव, मंगल कार्य आदि की सम्भावना है | आपके कार्य में प्रगति की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | ये गोचर आपके तथा आपकी सन्तान दोनों के ही लिए अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु परिवार में – विशेष रूप से सन्तान अथवा पिता के साथ – किसी प्रकार का व्यर्थ का विवाद भी सम्भव है | इससे बचने के लिए अपने Temperament में सुधार की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | एक ओर कहाँ आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को अपने कार्य अथवा स्वयं की योग्यता को लेकर सन्देह भी हो सकता है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है, किन्तु पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझा सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर दूसरे भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | तनाव के कारण आपको माइग्रेन आदि की समस्या भी सम्भव है | साथ ही आपको अपनी वाणी और खान पान पर भी संयम रखने की आवश्यकता है |

कर्क : द्वितीयेश का गोचर लग्न में हो रहा है | मित्र ग्रह की राशि है किन्तु अशुभ प्रभाव में भी है | एक ओर जहाँ कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर अपने तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी हुई है जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपको कहीं बाहर से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | किन्तु आपको अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु सन्तान अथवा पिता के साथ ब्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है |

तुला : आपका एकादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | अपने स्वयं के व्यवसाय में भी वृद्धि की सम्भावना है | मित्रों का सहयोग इस अवधि में उपलब्ध रहेगा | किन्तु परिवार के सदस्यों, पिता अथवा सहकर्मियों के साथ अपना व्यवहार यदि विनम्र नहीं रखा तो व्यर्थ का विवाद उत्पन्न हो सकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग हैं | कार्य में अप्रत्याशित लाभ की भी सम्भावना है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका भाग्येश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | किन्तु अकारण ही मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है | गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है | रहस्य विद्यायों जैसे ज्योतिष आदि तथा धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि भी इस अवधि में हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका अष्टमेश सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | मिश्रित फलों की सम्भावना है | पार्टनरशिप में कोई कार्य है तो उसमें किसी ग़लतफ़हमी के कारण व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | साथ ही किसी अप्रत्याशित स्रोत से कार्य में लाभ की भी सम्भावना है | अपना तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए यह गोचर उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | दाम्पत्य जीवन अथवा प्रेम सम्बन्धों में तनाव के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी कोर्ट केस के कारण भी तनाव हो सकता है | सन्तान अथवा छोटे भाई बहनों के साथ भी कोई विवाद बड़ा रूप ले सकता है | अच्छा यही रहेगा इस समय किसी बहस में न पड़कर शान्तिपूर्वक समय आनुकूल होने की प्रतीक्षा करें |

मीन : षष्ठेश का पंचम भाव में गोचर है | एक ओर आपके आत्मविश्वास में वृद्धि तथा नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | वहीं दूसरी ओर सन्तान अथवा परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ अकारण ही बहस भी हो सकती है | यदि आप पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद प्राप्त होने की सम्भावना है | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/07/16/sun-transit-in-cancer-2019/

 

मंगल का कर्क में गोचर

मंगल का कर्क में गोचर

आज आषाढ़ कृष्ण षष्ठी को रात्रि ग्यारह बजकर बाईस मिनट के लगभग मंगल अपने शत्रु गृह बुध की मिथुन राशि से निकल कर राशि कर्क में प्रस्थान कर जाएगा – जहाँ कल ही बुध का भी गोचर हुआ है | इस प्रस्थान के समय गर करण और प्रीति योग होगा तथा मंगल इस समय पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा | बुध वहाँ पहले ही पहुँच चुका है और सारा समय वहीं रहने वाला है | कर्क राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 28 जून को पुष्य नक्षत्र तथा 19 जुलाई को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में नौ अगस्त को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर अड़तालीस मिनट के लगभग अपने मित्र गृह सूर्य की सिंह राशि तथा मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच बारह जुलाई से मंगल अस्त भी जो जाएगा | कर्क राशि में संचार करते हुए मंगल की दृष्टियाँ तुला, मकर तथा कुम्भ राशियों पर रहेंगी | इस प्रकार कर्क राशि के साथ ही ये तीनों राशियाँ इस गोचर से अधिक प्रभावित हो सकती हैं | ध्यान देने योग्य बात है कि कर्क राशि जहाँ मंगल के लिए नीच की राशि है वहीं कर्क राशि का अधिपति चन्द्रमा इसका मित्र ग्रह है, तथा कर्क राशि के लिए मंगल पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक है | मेष राशि के लिए कर्क राशि चतुर्थ भाव तथा वृश्चिक के लिए अष्टम भाव है | साथ ही मेष तथा वृश्चिक राशियों का इस ग्रह को अधिपतित्व प्राप्त है जो एक दूसरे से षडाष्टक में हैं, किन्तु ऊर्जा और साहस तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए वास्तव में अनुकूल स्थिति है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा लाभ स्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल तो प्रतीत होता है किन्तु साथ ही विरोधियों की संख्या में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का तनाव भी सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/22/mars-transit-in-cancer/

 

बुध का कर्क में गोचर

बुध का कर्क में गोचर

कल यानी शुक्रवार, 21 जून, आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी को बव करण और वैधृति योग में 26:27 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर सत्ताईस मिनट) के लगभग बुध अपनी स्वयं की राशि मिथुन को छोड़कर चन्द्रमा की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | इस प्रस्थान के समय बुध पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा तथा गुरु की दृष्टि भी उस पर रहेगी | यहाँ रहते हुए 24 जून को पुष्य नक्षत्र पर जाएगा और 23 जुलाई को वक्री बुध पुनः पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा | नौ अगस्त को मार्गी बुध पुनः पुष्य नक्षत्र पर जाएगा | उन्नीस अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 26 अगस्त को दोपहर दो बजकर आठ मिनट के लगभग सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच आठ जुलाई से एक अगस्त तक बुध वक्री रहेगा और चौदह जुलाई से 29 जुलाई तक अस्त भी रहेगा | कर्क राशि बुध की अपनी राशि मिथुन से दूसरा भाव तथा कन्या से ग्यारहवाँ भाव है तथा कर्क राशि के लिए बुध द्वादशेश और तृतीयेश हो जाता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं बुध के कर्क राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर आपकी प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण आप नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं, तो दूसरी ओर पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु आप अपने बुद्धिबल से सभी समस्याओं का समाधान कर पाने में सक्षम हो सकते हैं | यदि आप किसी नौकरी में है या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे हैं तो आपके लिए ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपके भाई बहनों तथा आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप नौकरी में हैं, लेखक हैं अथवा मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं अथवा दस्तकार हैं तो आपके लिए भाग्यवर्द्धक गोचर प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | आपकी वाणी तथा लेखन प्रतिभा में निखार के साथ ही आपके कार्यों की सराहना भी होगी | परिवार का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में तथा लेखकों और वक्ताओं को धनलाभ की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | अकारण ही स्वभाव में चिडचिडापन भी आ सकता है | उससे बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें | भाई बहनों का सहयोग आपको प्राप्त होता रह सकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपका कार्य यदि कहीं विदेशों से या किसी दूसरे शहर से सम्बन्धित है अथवा मीडिया या किसी प्रकार की हीलिंग विधा से सम्बन्धित है तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | किन्तु ध्यान रहे, धन लाभ के साथ साथ धन के अपव्यय की भी सम्भावनाएँ हैं | बजट बनाकर चलना आपके हित में रहेगा | जिस किसी भी कारण से आपको मानसिक तनाव हो सकता है उस स्थिति से बचने का प्रयास करें |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | बुद्धिजीवियों, मीडियाकर्मियों, डॉक्टर वैद्य, कॉमर्स अथवा मैनेजमेंट के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए ये गोचर बहुत अनुकूल प्रतीत होता है | सहकर्मियों तथा परिवार के लोगों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कोई नया प्रोजेक्ट आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगलकार्य – जैसे किसी बच्चे का जन्म अथवा सन्तान का विवाह आदि की भी सम्भावना है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त शुभफलदायी प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग हैं | इन यात्राओं से आपके व्यवसाय में भी लाभ हो सकता है | आप तीर्थाटन के लिए भी जा सकते हैं | नौकरी में हैं तो वर्तमान नौकरी छोड़कर किसी दूसरी जगह भी नौकरी कर सकते हैं | आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भायावर्द्धक समय प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान अथवा कार्य से लाभ हो सकता है जिसके विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा अथवा जिसकी आशा आप त्याग चुके होंगे | वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | थोड़ा संघर्ष तो करना पड़ेगा, किन्तु अन्त में आपके कार्य में उन्नति के भी संकेत हैं | धार्मिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से अष्टम  भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | जीवन साथी के साथ किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है | प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो इससे बच सकते हैं |  किसी कोर्ट केस के अनुकूल दिशा में आगे बढ़ने की सम्भावना है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | इन्टरव्यू आदि के तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | परिवारजनों के साथ किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | विवाद कोर्ट तक न पहुँचने पाए इसके लिए अच्छा यही रहेगा कि पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को आपस में ही सुलझा लें |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर छठे भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोहों के लिए ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ परिवार के लोगों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | जीवन साथी के साथ भी सम्बन्ध मधुर बने रह सकते हैं | विद्यार्थियों तथा इन्टरव्यू की तैयारी कर रहे लोगों के लिए गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों को अपने कार्य के लिए कोई पुरूस्कार अथवा सम्मान भी प्राप्त हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/20/mercury-transit-in-cancer-2/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का कर्क राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति आज ही रात्रि 8:39 के लगभग अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक के साथ साथ मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को भी प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि कर्क राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं…

कर्क राशि से षष्ठेश और भाग्येश होकर पंचम भाव में गुरु का गोचर हो रहा है जहाँ से आपके भाग्य स्थान, लाभ स्थान तथा स्वयं आपकी लग्न पर गुरु की दृष्टियाँ आ रही हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अच्छे और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ आपके सम्पर्क बन सकते हैं | यदि आपने समझदारी से काम लिया तो इन सम्बन्धों के माध्यम से आपको अपने कार्य में सहायता प्राप्त हो सकती है | आपकी प्रतियोगी क्षमता में भी वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण यदि आप नई नौकरी के लिए प्रयत्नशील हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

सम्भव है बीच बीच में कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए, विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य जब गुरु शनि के नक्षत्र अनुराधा पर होंगे | किन्तु अपनी निर्णायक क्षमता के बल पर आप उन समस्याओं का समाधान सरलता से कर सकेंगे | सम्भव है आपिस अवधि में कहीं पैसा Invest भी कर दें, जिसका आपको भविष्य में लाभ हो सकता है | आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के भी अवसर प्रतीत होते हैं |

मित्रों का सहयोग और साथ भी इस अवधि में आपको उपलब्ध रह सकता है और आप उनके साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत कर सकते हैं | आपकी रूचि इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए तथा विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान प्राप्ति के भी योग इस अवधि में हैं |

जीवन साथी के साथ सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण बने रह सकते हैं और आप सन्तान के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपना Temprament सही नहीं रखा तो किसी बात पर विवाद भी हो सकता है | जीवन साथी के साथ किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए अथवा घूमने के लिए भी जा सकते हैं |

स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या आपको परेशान कर सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | अपने खान पान पर यदि संयम रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/11/jupiter-transit-in-scorpio-for-cancer/