आषाढ़ गुप्त नवरात्र

कल आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ीय गुप्त नवरात्रों का भी आरम्भ हो रहा है | देश के लगभग सभी प्रान्तों में वर्ष में दो बार माँ भगवती की उपासना के लिए नौ दिनों तक नवरात्रों का अयोजन किया जाता है – एक चैत्र माह में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल नवमी तक – जिन्हें वासन्तिक अथवा साम्वत्सरिक नवरात्र कहा जाता है | दूसरे शरद ऋतु में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन शुक्ल नवमी तक चलते हैं – जिन्हें शारदीय नवरात्र कहा जाता है | किन्तु इनके अतिरिक्त भी वर्ष में दो बार नवरात्रों का आयोजन किया जाता है – आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ शुक्ल नवमी तक तथा माघ शुक्ल प्रतिपदा से माघ शुक्ल नवमी तक | इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है – आषाढ़ीय गुप्त नवरात्र और माघ गुप्त नवरात्र | इन नवरात्रों में भी साम्वत्सरिक और शारदीय नवरात्रों की ही भाँति माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है |

गुप्त नवरात्रों का तान्त्रिक उपासकों के लिए विशेष महत्त्व है | तान्त्रिक लोग इन दिनों विशेष सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए शुक्ल दशमी तक दश महाविद्याओं की गुप्त रूप से उपासना करते हैं | सम्भवतः इसीलिए इन्हें “गुप्त नवरात्र” कहा जाता है, और सम्भवतः इसीलिए इस समय पूजा अर्चना की इतनी धूम और चहल पहल नहीं होती | गुप्त नवरात्रों के विषय में विस्तृत विवरण तथा कथाएँ विशेष रूप से देवी भागवत महापुराण में उपलब्ध होती हैं |

इस वर्ष कल यानी 13 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रों का आरम्भ हो रहा है और 21 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल नवमी को इनका समापन हो जाएगा | कल सूर्योदय काल से लेकर 08:17 तक आषाढ़ अमावस्या है और उसके बाद आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा आ जाएगी, जो अगले दिन यानी 14 जुलाई को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर बत्तीस मिनट तक रहेगी | इस प्रकार प्रतिपदा का क्षय भी हो रहा है, किन्तु घट स्थापना कल ही होगी और इसके लिए शुभ मुहूर्त है सिंह लग्न में प्रातः 08:17 से 10:31 तक | यदि इस समय घट स्थापना नहीं की जा सकती है तो फिर अभिजित मुहूर्त में 11:59 से 12:54 के मध्य घट स्थापना कर लेनी चाहिए | पूरा लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें…

गुप्त नवरात्रों में माँ भगवती सभी की मनोकामना पूर्ण करें…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/07/12/aashaadha-gupta-navratri/

 

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