Category Archives: गुरु का वृश्चिक में गोचर

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मीन राशि पर सम्भावित प्रभाव

सर्वप्रथम सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति, यश और धन आदि के कारक देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को सीधे रूप से प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

गुरु आपका राश्यधिपति भी है और आपके दशम भाव का अधिपति भी है और आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपकी लग्न को, तृतीय भाव को तथा पंचम भाव को प्रभावित कर रही हैं | आपके लियेः गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लिए उत्साह और आत्म विश्वास में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के साथ ही आपकी आय में भी वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही आप अपने भाई बहनों के लिए भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं | आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकता है और इसके लिए आपको दूसरों से सहयोग भी प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आपकी आरती स्थिति में दृढ़ता के कारण आप भविष्य के लिए भी योजनाएँ बनाने में सफल हो सकते हैं | मान सम्मान में वृद्धि तथा उपहार आदि की प्राप्ति के योग भी बन रहे हैं |

आप मित्रों के साथ भ्रमण का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | किन्तु अपने खर्चों पर रोक लगाने की आवश्यकता है | बजट बनाकर नहीं चलेंगे तो किसी प्रकार की समस्या भी हो सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो मनोनुकूल नौकरी भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी मध्र्ता और प्रगाढ़ता बनी रह सकती है | आप वंश वृद्धि के लिए भी इस अवधि में सफल प्रयास कर सकते हैं |

स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | योगाभ्यास और प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तथा खान पान पर ध्यान देंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/19/jupiter-transit-in-scorpio-for-pisces/

 

 

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का कुम्भ राशि पर सम्भावित प्रभाव

आज सभी ने अन्तिम नवरात्र – रामनवमी – के अवसर पर माँ दुर्गा के नौ दिवसीय आराधन का समापन किया – सर्वप्रथम सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस वर्ष 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | हम विभिन राशियों के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात कररहे हैं | अब तक मेष राशि से मकर राशि तक के जातकों के विषय में बात कर चुके हैं | आज कुम्भ राशि के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों को संक्षेप में जानने का प्रयास करते हैं |

आपकी राशि से द्वितीयेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके द्वितीय भाव, चतुर्थ भाव और छठे भाव पर आ रही हैं | निश्चित रूप से आपके लिए कार्य की दृष्टि से और आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परुशराम करना होगा आपको, किन्तु उसके अनुकूल परिणाम भी आपको प्राप्त होंगे | आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में इस अवधि में वृद्धि होने की सम्भावना है जिसके कारण आप कार्य से सम्बन्धित कोई भी चेलेंज स्वीकार कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो आय में वृद्धि के साथ पदोन्नति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी निरन्तर उन्नति की सम्भावना प्रतीत होती है | कोई इण्डस्ट्री है आपकी तो आप अपनी कोई नई ब्रांच भी खोल सकते हैं | साथ ही अपने व्यवसाय का विस्तार करके नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने मन के अनुकूल ही कोई अच्छी नौकरी भी मिल सकती है | ऑफिस में अधिकारी वर्ग की प्रशंसा तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा तथा आपकी योजनाओं पर विचार भी किया जाएगा |

परिवार में आनन्द का वातावरण रहने की सम्भावना है | कोई माँगलिक कार्य भी इस अवधि में हो सकता है | परिवार के सदस्यों तथा मित्रों के साथ मौज मस्ती में समय व्यतीत होगा | आप अपने लिए नया ऑफिस अथवा घर भी खरीद सकते हैं | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी में Invest करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गितिविधियों की ओर आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके माध्यम से भी आपको लाभ हो सकता है | आपकी यदि किसी प्रेम सम्बन्ध में हैं तो उसमें प्रगाढ़ता इस अवधि में बढ़ सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | यदि आप योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास निरन्तर करते रहे तो आपका स्वास्थ्य भी इस अवधि में उत्तम रह सकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मकर राशि पर सम्भावित प्रभाव

आप सभी जानते हैं कि 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपकी राशि के लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है जहाँ से उनकी दृष्टियाँ आपके तीसरे भाव, पंचम भाव और सप्तम भाव पर आ रही हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी मनचाहे स्थान पर ट्रांसफर होने की भी सम्भावना है | यह स्थानान्तरण आपके लिए भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपको अपने भाई बहनों का तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग भी प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने परिश्रम का लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है और कोई मनोनुकूल नौकरी आपको प्राप्त हो सकती है | विदेश से यदि आपका कार्य सम्बद्ध है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आय के नवीन स्रोत आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक सुदृढ़ हो सकती है | किन्तु साथ ही खर्चों में भी वृद्धि की सम्भावना है | आप मित्रों के साथ सैर सपाटे और मनोरंजन में अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं |

आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है और उसकी ओर से कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | साथ ही यदि सन्तान प्राप्ति का प्रयास कर रहे हैं तो उसमें भी सफलता इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि उच्च शिक्षा के लिए कहीं एडमीशन के प्रयास में हैं उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

अविवाहित हैं और कहीं प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो इस अवधि में वह सम्बन्ध भी विवाह बन्धन में परिणत हो सकता है | प्रेम सम्बन्धों और विवाह आदि के लिए गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य तथा अन्तरंगता बनी रहने की भी सम्भावना है |

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए नियमित डॉक्टर से चेकअप तथा सन्तुलित आहार और व्यायाम आदि की आवश्यकता भी होती है इतना अवश्य स्मरण रखिये |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर के धनु मिथुन राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | लगभग एक वर्ष का गुरु का गोचर होता है | इस बार वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान 29 मार्च 2019 को अपनी स्वयं की राशि धनु में प्रविष्ट हो जाएँगे कुछ समय के लिए, जहाँ से 10 अप्रेल 2019 से वक्री होते हुए 23 अप्रेल 2019 को पुनः वृश्चिक में वापस लौट आएँगे | धनु गुरु की अपनी राशि है | अब तक मेष राशि से लेकर वृश्चिक राशि तक के जातकों पर गुरु के इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात कर चुके हैं, अब जानने का प्रयास करते हैं कि गुरु के इस गोचर के धनु राशि के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

जैसा कि ऊपर लिखा, धनु की गुरु की अपनी राशि है | अर्थात आपके राश्यधिपति होकर गुरुदेव आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहे हैं | जहाँ से इनकी दृष्टियाँ आपके चतुर्थ भाव, छठे भाव तथा अष्टम को प्रभावित कर रही हैं | यदि आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप अपना निवास भी बदलने की योजना बना सकते हैं | किसी दूसरे शहर में भी शिफ्ट हो सकते हैं | आपके माता पिता भी किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट हो सकते हैं | अचानक ही किसी ऐसे स्थान से कार्य का प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है जहाँ आप जाने नहीं चाहते | खर्चों में वृद्धि की सम्भावना प्रतीत होती है | आप कहीं भ्रमण के लिए भी जा सकते हैं और व्यर्थ की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं | साथ ही पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | परिवार में व्यर्थ के तनाव भी हो सकते हैं | किन्तु यदि आपने धैर्य और संयम से कम लिया तो किसी भी तनाव अथवा विवाद को सुलझाने में स्वयं ही सफल भी हो सकते हैं | परिवार के किसी सदस्य की ओर से किसी दुखद समाचार की प्राप्ति की सम्भावना भी है |

आपको अपने आत्मविश्वास में भी कमी का अनुभव हो सकता है | यदि नौकरी की खोज में हैं तो उसमें सम्भव है सफलता न प्राप्त हो, या फिर बहुत अधिक परिश्रम के बाद सफलता प्राप्त हो | स्पोर्ट्स से सम्बन्धित व्यक्तियों के लिए यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु इन यात्राओं एक दौरान आपको दुर्घटना आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

अविवाहित हैं तो विवाह के लिए अभी अनुकूल समय नहीं प्रतीत होता | कहीं कोई प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो उसमें भी तनाव की सम्भावना है | वैवाहिक जीवन में भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | अच्छा यही रहेगा कि आप संयम से काम लें |

स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | बहुत अधिक तनाव से बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें | अन्यथा मानसिक रूप से किसी डिप्रेशन आदि के शिकार भी हो सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का वृश्चिक राशि पर सम्भावित प्रभाव

सभी जानते हैं कि 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है |

उपरोक्त समस्त तथ्यों के आधार पर अब तक हम मेष राशि से तुला राशि के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों की बात कर चुके हैं | अब जानने का प्रयास करते हैं कि स्वयं वृश्चिक राशि के जातकों पर इस गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपके लिए द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि पर ही हो रहा है, जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके पंचम, सप्तम और नवम भावों पर आ रही हैं | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके कार्य में उन्नति के संकेत हैं | आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता के संकेत हैं | यदि पूर्व में आपको कुछ समस्याओं का सामना करना भी पडा है तो कोई बात नहीं, अब परिस्थितियाँ आपके अनुकूल होती प्रतीत होती हैं | आपकी आय में वृद्धि के संकेत हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपको अपने उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त रहेगा जिनके कारण आपके सभी कार्य सरलतापूर्वक पूर्ण होते रहने की सम्भावना प्रतीत होती है | साथ ही पदोन्नति के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं | परिवार में तथा कार्यक्षेत्र में वातावरण अनुकूल रहने की सम्भावना है | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में बहुत उत्तम रहेगी जिसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | साथ ही लेखन के द्वारा भी आपको यश और धन प्राप्त होने की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय जिन लोगों का है अथवा जो लोग ज्योतिष आदि विद्याओं के जानकार हैं अथवा जिनका व्यवसाय किसी प्रकार से वाहन आदि से सम्बन्ध रखता है तो उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी रूचि इस समय धर्म और आध्यात्म की ओर भी प्रवृत्त हो सकती है |

परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हो सकता है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | साथ ही आपकी सन्तान का भी विवाह इस गोचर के मध्य सम्भव है | आप स्वयं भी यदि अविवाहित हैं तो आपका विवाह भी इस अवधि में हो सकता है | यदि किसी के साथ Romantically Involve हैं तो वह सम्बन्ध भी विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है, तो लीवर अथवा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या इस अवधि में हो सकती है | अनियन्त्रित खान पान के कारण मोटापा भी बढ़ने की सम्भावना है | अपने खान पर ध्यान रखेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer से उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/15/jupiter-transit-in-scorpio-for-scorpio/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का तुला राशि पर सम्भावित प्रभाव

अभी 11 अक्टूबर को गुरुदेव का गोचर वृश्चिक राशि में हुआ है | विभिन्न राशियों के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा करते हुए अब तक मेष से कन्या राशि तक के जातकों की बात कर चुके हैं | आज जानने का प्रयास करते हैं कि तुला राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

तुला राशि के जातकों के लिए गुरु उनका तृतीयेश और षष्ठेश होकर उनके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपके छठे भाव पर, अष्टम भाव पर तथा दशम भाव पर रहेंगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की भी दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं आपकी पेमेण्ट रुकी हुई है अथवा किसी को उधार दिया हुआ है तो वह इस अवधि में वापस मिलने की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु ज़ल्दबाज़ी में निर्णय लेना उचित नहीं रहेगा | किसी कोर्ट केस के माध्यम से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपकी प्रतियोगी और निर्णायक क्षमताओं में वृद्धि के कारण आपके उत्साह में भी वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | आप अपने कार्य के सम्बन्ध में कोई भी चेलेंज इस अवधि में स्वीकार कर सकते हैं | विरोधी अपना सर उठा सकते हैं, किन्तु अपने बुद्धिबल से आप किसी भी विरोध को समाप्त करने में सक्षम हो सकते हैं | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में प्रभावपूर्ण रहने की सम्भावना है जिसके कारण आपकी बात का दूसरों पर प्रभाव पड़ेगा | मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

किसी प्रकार के उत्तरदायित्व में इस अवधि में वृद्धि हो सकती है | सम्भव है बीच बीच में आपको ऐसा भी लगे कि किसी कारणवश आपके कार्य में कुछ बाधा उत्पन्न हो रही है | किन्तु उसके लिए चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है | थोड़े से प्रयास से ही सारी बाधाएँ समाप्त हो सकती हैं | कार्यक्षेत्र में वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहने की सम्भावना है | आपके सहयोगी तथा आपके अधीनस्थ लोग आपके प्रस्तावों को स्वीकार करके उन्हें क्रियान्वित भी करने के प्रयास कर सकते हैं | यदि आप किसी प्रतियोगी परिक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकता है |

अविवाहित हैं तो कहीं प्रेम सम्बन्ध भी बन सकता है | किन्तु उसे विवाह में परिणत करने से पूर्व उस व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी अवश्य ले लें तथा परिवार के लोगों के साथ भी विचार विमर्श कर लें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि के लिए भी प्रयास कर सकते हैं |

अपने स्वयं के तथा अपने पिता के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | अपने खान पर ध्यान रखें अन्यथा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या लम्बे समय तक परेशान कर सकती है | साथ ही इस अवधि में कहीं से ऋण लेने से भी बचने की आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का सिंह राशि पर सम्भावित प्रभाव

कल 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | अब तक हम इस गोचर के मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क राशियों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में लिख चुके हैं | आज जानने का प्रयास करते हैं कि एक Astrologer के अनुसार सिंह राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

सिंह राशि से पंचमेश और अष्टमेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके चतुर्थ भाव से गुरु की दृष्टियाँ आपके अष्टम भाव, दशम भाव तथा बारहवें भाव पर आ रही हैं | ये गोचर आपके लिए मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपका कहीं ट्रांसफर भी सम्भव है | किन्तु हो सकता है जिस स्थान पर आपका ट्रांसफर हो वह स्थान आपके लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल न रहे | यदि आपका अपना व्यवसाय है तो व्यवसाय से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि भी हो सकती है | यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य और अपने आवश्यक Documents की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं पर पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | परिवार में कोई शुभ कार्य सम्पन्न हो सकता है उसमें भी आवश्यकता से अधिक धन का व्यय हो सकता है | साथ ही कार्य स्थल में विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | इसके लिए आपको अपना स्वयं का Temparament नियन्त्रित रखने की आवश्यकता होगी | परिवार में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहने की सम्भावना है | यदि आपक नया वाहन, नया घर अथवा ऑफिस खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | घर बनाना भी आरम्भ कर सकते हैं और सम्भावना ऐसी भी है कि इसी अवधि में आप उस घर में प्रविष्ट भी हो सकते हैं |

सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के ही साथ मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है | नौकरी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | नौकरी बदलना चाहते हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपको कोई नया पद भी प्राप्त हो सकता है, किन्तु उसके साथ ही कार्यभार में भी वृद्धि की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में भी वृद्धि की सम्भावना है |

प्रेम सम्बन्धों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | यदि अविवाहित हैं तो आपके कार्यक्षेत्र में ही आपको कोई व्यक्ति Prapose कर सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की भी सम्भावना है |

स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है – विशेष रूप से यात्राओं के दौरान | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर अधिक धन खर्च करना पड़ सकता है | 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/12/jupiter-transit-in-scorpio-for-leo/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का कर्क राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति आज ही रात्रि 8:39 के लगभग अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक के साथ साथ मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को भी प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि कर्क राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं…

कर्क राशि से षष्ठेश और भाग्येश होकर पंचम भाव में गुरु का गोचर हो रहा है जहाँ से आपके भाग्य स्थान, लाभ स्थान तथा स्वयं आपकी लग्न पर गुरु की दृष्टियाँ आ रही हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अच्छे और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ आपके सम्पर्क बन सकते हैं | यदि आपने समझदारी से काम लिया तो इन सम्बन्धों के माध्यम से आपको अपने कार्य में सहायता प्राप्त हो सकती है | आपकी प्रतियोगी क्षमता में भी वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण यदि आप नई नौकरी के लिए प्रयत्नशील हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

सम्भव है बीच बीच में कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए, विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य जब गुरु शनि के नक्षत्र अनुराधा पर होंगे | किन्तु अपनी निर्णायक क्षमता के बल पर आप उन समस्याओं का समाधान सरलता से कर सकेंगे | सम्भव है आपिस अवधि में कहीं पैसा Invest भी कर दें, जिसका आपको भविष्य में लाभ हो सकता है | आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के भी अवसर प्रतीत होते हैं |

मित्रों का सहयोग और साथ भी इस अवधि में आपको उपलब्ध रह सकता है और आप उनके साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत कर सकते हैं | आपकी रूचि इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए तथा विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान प्राप्ति के भी योग इस अवधि में हैं |

जीवन साथी के साथ सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण बने रह सकते हैं और आप सन्तान के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपना Temprament सही नहीं रखा तो किसी बात पर विवाद भी हो सकता है | जीवन साथी के साथ किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए अथवा घूमने के लिए भी जा सकते हैं |

स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या आपको परेशान कर सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | अपने खान पान पर यदि संयम रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/11/jupiter-transit-in-scorpio-for-cancer/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मिथुन राशि पर सम्भावित प्रभाव

जैसा सभी जानते हैं, देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को रात्रि 8:39 के लगभग अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | 10 अप्रेल 2019 को 22:05 के लगभग गुरु का वक्री होना आरम्भ होगा और वक्री होते हुए 23 अप्रेल की रात को पुनः वृश्चिक राशि में लौट आएँगे | 11 अगस्त को 19:42 के लगभग गुरु मार्गी हो जाएँगे और इसी अवस्था में पाँच नवम्बर तक भ्रमण करते हुए अन्त में पाँच नवम्बर को प्रातः सूर्योदय से पूर्व 05:16 के लगभग पुनः अपनी स्वयं की धनु राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | इस विषय में विस्तार से आरम्भ में ही लिखा जा चुका है | आज जानने का प्रयास करते हैं कि मिथुन राशि के जातकों के लिए इस गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं…

मिथुन राशि से सप्तमेश और दशमेश होकर गुरु का गोचर इस राशि से छठे भाव में हो रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपके कर्म स्थान, बारहवें भाव तथा धन स्थान पर आ रही हैं | एक ओर जहाँ आपके उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं वहीं आपकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार की सम्भावना है | किन्तु साथ ही अनावश्यक बातों पर पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | आप और आपके जीवन साथी दोनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप पार्टनरशिप में कार्य कर रहे हैं अथवा आरम्भ करना चाहते हैं तो आपके लिए अनुकूल समय प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो भी आपके लिए पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | किसी नई नौकरी की खोज में हैं तो वहाँ भी सफलता प्राप्त होने की समभावना है | किन्तु परिश्रम अधिक करना पड़ सकता है | साथ ही विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | इन यात्राओं के दौरान आपको कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है | किसी प्रकार का विवाद यदि किसी के साथ चल रहा हो तो उसे समय रहते आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रयास करें अन्यथा कोर्ट केस भी हो सकता है जो लम्बे समय तक आपको परेशान कर सकता है | जीवन साथी के साथ यदि किसी प्रकार का मन मुटाव है तो उसे भी शान्ति के साथ सुलझाने का प्रयास कीजिए |

विद्यार्थियों के लिए तथा प्रतियोगी परिक्षा की तैयारी में लगे लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला हो सकता है | जो लोग पॉलिटिक्स से सम्बन्ध रखते हैं उनके लिए भी भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किन्तु विरोधियों से सावधान रहने की आवश्यकता है | उनके कारण आपके सम्मान को किसी प्रकार की ठेस भी पहुँच सकती है |

स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है – विशेष रूप से विदेश यात्राओं के दौरान | साथ ही खान पान पर संयम रखने की भी आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक राशि में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मेष राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति की उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति के लिए की जाती है | किसी व्यक्ति की कुण्डली में गुरु पिता का कारक भी होता है और किसी कन्या की कुण्डली में पति के लिए भी गुरु को देखा जाता है | साथ ही माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का गुरु बली हो तो वह व्यक्ति विद्वान् होता है तथा उसे अपने ज्ञान के ही कारण यश और धन की प्राप्ति होती है | इन्हें देवगुरु की उपाधि से विभूषित किया गया है अतः इन्हें “गुरु” भी सम्बोधित किया जाता है | ये शील और धर्म के अवतार माने जाते हैं | नवग्रहों के समूह का नायक माने जाने के कारण इन्हें गणपति और गणाधिपति नामों से भी सम्बोधित किया जाता है | धनु और मीन दो राशियों तथा पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्रों का स्वामित्व गुरु के पास है | कर्क इनकी उच्च राशि तथा मकर निम्न राशि है | सूर्य, चन्द्रमा और मंगल के साथ इनकी मित्रता है, बुध तथा शुक्र शत्रु ग्रह हैं और शनि के साथ ये तटस्थ भाव में रहते हैं | गुरुदेव एक राशि पर लगभग एक वर्ष तक भ्रमण करते हैं | वक्री और अस्त आदि होने की स्थिति में कभी कभी इस अवधि में कुछ घट बढ़ भी हो सकती है | इस वर्ष 11 अक्टूबर को रात्रि 8:39 के लगभग देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | वृश्चिक राशि में अपने भ्रमण के दौरान गुरुदेव 28 अक्टूबर से अनुराधा नक्षत्र में और 27 दिसम्बर से ज्येष्ठा नक्षत्र में भ्रमण करते हुए अन्त में 29 मार्च 2019 को 20:07 के लगभग अपनी स्वयं की राशि धनु और मूल नक्षत्र में प्रविष्ट हो जाएँगे | इस बीच 16 नवम्बर से 16 दिसम्बर तक गुरु को भगवान् भास्कर का साथ भी मिलेगा और 12 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक गुरुदेव अस्त भी रहेंगे | 10 अप्रेल 2019 को 22:05 के लगभग गुरु का वक्री होना आरम्भ होगा और वक्री होते हुए 23 अप्रेल की रात को पुनः वृश्चिक राशि में लौट आएँगे | 11 अगस्त को 19:42 के लगभग गुरु मार्गी हो जाएँगे और इसी अवस्था में पाँच नवम्बर तक भ्रमण करते हुए अन्त में पाँच नवम्बर को प्रातः सूर्योदय से पूर्व 05:16 के लगभग पुनः अपनी स्वयं की धनु राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | वृश्चिक में पुनः अपनी यात्रा के दौरान गुरु का गोचर 23 अप्रेल से पुनः ज्येष्ठा नक्षत्र पर रहेगा |

वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है |

उपरोक्त समस्त तथ्यों के आधार पर आज से आरम्भ कर रहे हैं कि प्रत्येक राशि पर इस गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं… सबसे पहले, आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मेष राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपके लिए आपका भाग्येश और द्वादशेश होकर गुरु आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | सम्भव है आरम्भ में आपको अपने कार्यों में किसी प्रकार के व्यवधान का अनुभव हो जिसके कारण आपका मन भी अशान्त रह सकता है | किन्तु चिन्ता की आवश्यकता नहीं है, समस्याओं का समाधान भी स्वयं ही होता चला जाएगा |

आपका व्यय और भाग्य स्थानों का स्वामी होकर गुरु आपके अष्टम भाव से आपके व्यय भाव के साथ ही आपके धन भाव Invest को भी देख रहा है | यदि आपने कहीं पैसा किया हुआ है तो उसमें धनलाभ की सम्भावना की जा सकती है | पैसा Invest करने के लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से धनलाभ की भी सम्भावना है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी, किन्तु इसके साथ ही आपके खर्चों में भी वृद्धि की सम्भावना है |

आपके चतुर्थ भाव पर भी गुरु की दृष्टि आ रही है | आप किसी प्रॉपर्टी पर पैसा खर्च कर सकते हैं | किन्तु अभी नई प्रॉपर्टी खरीदना आपके लिए अनुकूल नहीं रहेगा | पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | साथ ही ऐसे लोगों को पहचान कर उनसे दूर रहने की आवश्यकता है जो आपके लिए किसी प्रकार भी नकारात्मक हो सकते हैं |

कुछ क्षेत्रों के लिए यह गोचर शुभ हो सकता है | जैसे यदि आप कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति की तथा सफलता प्राप्त होने की सम्भावना की जा सकती है | यदि आप अध्ययन अध्यापन का अथवा किसी प्रका की Alternative Healing जैसे होमेयोपेथी या किसी प्रकार की Counselling आदि के क्षेत्र से सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य में प्रगति की सम्भावना है |

इस अवधि में यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | यात्राएँ कार्य की दृष्टि से तो अनुकूल रह सकती हैं किन्तु स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी – विशेष रूप से 29 मार्च 2019 से 23 अप्रेल 2019 तक | इस समय में अपने पिता के भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | शेष समय में क्योंकि मित्र ग्रहों शनि और बुध के नक्षत्रों पर गुरु का गोचर रहेगा अतः परिणाम अनुकूल हो सकते हैं |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता है, और भी बहुत से सूत्रों के आधार पर कुण्डली का परीक्षण किया जाता है | अतः इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी से कुण्डली के विषय में बात करनी चाहिए…

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