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सूर्य का कन्या में गोचर

सूर्य का कन्या में गोचर

कल यानी 17 सितम्बर, आश्विन कृष्ण तृतीया को दोपहर एक बजकर तीन मिनट के लगभग विष्टि करण और ध्रुव योग में सूर्यदेव अपनी स्वयं की राशि सिंह से निकल कर कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | अपने इस गोचर के समय सूर्य उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर होंगे, जहाँ से 27 सितम्बर को हस्त नक्षत्र और ग्यारह अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 अक्टूबर को अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर तीन मिनट के लगभग तुला राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | सूर्यदेव जिस भी राशि में जाते हैं, कुछ समय के लिए शुक्र और बुध का साथ उन्हें प्राप्त होता ही है | कन्या राशि में भी यही स्थिति रहेगी |

इस बीच 26 सितम्बर और ग्यारह अक्तूबर को प्रदोष व्रत होंगे | 28 सितम्बर को महालया के साथ श्राद्ध पक्ष पूर्ण होकर 29 सितम्बर आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापना के साथ नौ दिन के शारदीय नवरात्र आरम्भ हो जाएँगे – सात अक्तूबर को महा नवमी को प्रतिमा विसर्जन के साथ जो सम्पन्न हो जाएँगे | आठ अक्तूबर को विजयादशमी, तेरह अक्तूबर को शरद् पूर्णिमा और कार्तिक स्नानारम्भ, चौदह अक्तूबर को कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा के साथ कार्तिक मास का आरम्भ तथा 17 अक्तूबर को करक चतुर्थी यानी करवा चौथ के पावन और उल्लासमय पर्व रहेंगे | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ |

अब संक्षिप्त में जानने का प्रयास करते हैं सिंह राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता, अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके उत्साह तथा प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि का समय प्रतीत होता है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकेंगे | किसी प्रकार का कोई लीगल केस यदि चल रहा है तो उसमें अनुकूल परिणाम की अपेक्षा की जा सकती है | साथ ही परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके कारण आपके आत्मबल में भी वृद्धि होगी | अपने तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा अथवा किसी Professional Course के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आय के नवीन अवसरों के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों अथवा पारिवारिक सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान का स्वभाव भी उग्र हो सकता है किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | परिवार में मंगल कार्यों का आयोजन हो सकता है | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर यों तो अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु आपका अपना स्वभाव इस अवधि में कुछ उग्र हो सकता है | यदि आपको ऐसा प्रतीत होता है तो ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास कीजिए | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता तथा भाई बहनों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | आपकी रूचि इस समय धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से दूसरे भाव में गोचर हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | आपकी वाणी इस अवधि में अधिक प्रभावशाली बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य होना चाहिए | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी प्रकार के पुरूस्कार, सम्मान अथवा पदोन्नति की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपकी राशि में हो रहा है | आप यदि कहीं दूर के शहर अथवा विदेश में कार्य करते हैं तो इस अवधि में आप वापस लौटने का मन बना सकते हैं | किन्तु आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी विदेशी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर किसी ऐसे स्थान पर हो सकता है जो आपके मन के अनुकूल न हो | किन्तु कार्य की दृष्टि से यह ट्रांसफर आपके हित में रहेगा | आपके अथवा आपके जीवन साथी के स्वभाव में इस अवधि में उत्तेजना में कुछ वृद्धि की भी सम्भावना है | अपने और जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपकी राशि से बारहवें भाव में एकादशेश सूर्य का गोचर एक ओर आय में वृद्धि के संकेत दे रहा है तो वहीं दूसरी ओर खर्चों में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि के भी योग प्रतीत होते हैं | ये यात्राएँ आपके लिए भाग्यवर्द्धक भी सिद्ध हो सकती हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का मतभेद भी हो सकता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | बड़े भाई, पिता तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आपके लिए कार्य तथा आय के नवीन स्रोत इस अवधि में उपस्थित हो सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है, किन्तु उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | एक ओर अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर कार्यक्षेत्र में किसी प्रकार के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | वक़ीलों और डॉक्टर्स के लिये यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | परिवार में किसी धार्मिक कार्य का आयोजन भी सम्भव है | किसी कारणवश आपको निराशा का अनुभव भी हो सकता है और इस कारण से आपकी स्वयं की रूचि भी धार्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है |

कुम्भ : आपके लिये यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो अपने पार्टनर के साथ आपका किसी बात पर विवाद हो सकता है जिसका विपरीत प्रभाव आपके कार्य पर पड़ सकता है | दाम्पत्य जीवन में भी कुछ अनबन हो सकती है | अच्छा यही रहेगा कि अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखें | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही यदि आप एक विद्यार्थी हैं तो आपके लिए भी अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | जीवन साथी अथवा व्यावसायिक पार्टनर एक साथ किसी प्रकार का विवाद उग्र रूप ले सकता है | परिवार के लोगों के साथ भी किसी प्रकार की बहस सम्भव है | तनाव के कारण आपके तथा आपके जीवन साथी के सर में दर्द, उच्च रक्त चाप जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि कार्य से कुछ समय निकाल कर कहीं घूमने चले जाएँ |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/09/16/sun-transit-in-virgo-2/

 

 

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शुक्र का कन्या में गोचर

शुक्र का कन्या में गोचर

मंगलवार नौ सितम्बर भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को 25:41 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर इकतालीस मिनट के लगभग) बव करण और शोभन योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि से निकल कर मित्र ग्रह बुध की कन्या राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस प्रस्थान के समय शुक्र उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर होगा तथा अस्त होगा | यहाँ से 18 सितम्बर को हस्त नक्षत्र और 28 सितम्बर को चित्रा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए चार अक्टूबर को सूर्योदय से पूर्व पाँच बजकर चौदह मिनट के लगभग अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण राशि तुला में प्रवेश कर जाएगा | इस बीच बीस सितम्बर से शुक्र मार्गी भी हो जाएगा | कन्या राशि शुक्र की राशि वृषभ से पञ्चम तथा तुला से बारहवाँ भाव बनती है और कन्या राशि के लिए शुक्र द्वितीयेश तथा भाग्येश हो जाता है | उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य, हस्त का नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा तथा चित्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के जातकों लिए शुक्र के कन्या राशि में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके छठे भाव में गोचर करने जा रहा है | एक ओर आपके उत्साह और मनोबल में वृद्धि के संकेत हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा प्रतीत होता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | पार्टनरशिप में कोई व्यवसाय है तो उसमें व्यवधान उत्पन्न हो सकता है | प्रेम सम्बन्धों और वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की दरार के संकेत हैं | किन्तु यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | आपके कार्य को एक नई पहचान मिलने की संभावना है जिसके कारण आपकी आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता की संभावना की जा सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | इस समय आप अपने व्यक्तित्व को निखारने की ओर अधिक ध्यान दे सकते हैं, जो आपके कार्य की दृष्टि भी तथा व्यक्तिगत संबंधों की दृष्टि से भी उचित ही रहेगा | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता | साथ ही यदि आपका प्रॉपर्टी से सम्बंधित कोई व्यवसाय है तो अभी उसमें पैसा Invest करना आपके लिए उचित नहीं रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे  भाव में हो रहा है | आपके मित्रों तथा सम्बन्धियों में वृद्धि के योग हैं | भाई बहनों तथा सहकर्मियों के साथ सम्बन्धों में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आपकी किसी बहन का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | प्रॉपर्टी अथवा वाहन से सम्बंधित कोई व्यवसाय यदि आपका है अथवा आप कलाकार हैं तो आपके लिए यह अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नई प्रॉपर्टी अथवा वाहन अपने स्वयं के लिए भी आप खरीद सकते हैं | किसी महिला मित्र के माध्याम से धन प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं | प्रॉपर्टी अथवा वाहनों की खरीद फरोख्त में लाभ की सम्भावना है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं | सहकर्मियों का तथा माता पिता का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | सामाजिक गतिविद्धियों में वृद्धि के साथ ही नवीन सम्बन्ध भी स्थापित हो सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं जहाँ आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | आप अपने व्यक्तित्व को निखारने में इस अवधि में अधिक ध्यान दे सकते हैं जो आपके लिए कार्य की दृष्टि से उचित ही रहेगा | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व ऐसा है कि लोग स्वयं ही आपकी ओर आकर्षित हो जाते हैं | प्रेम संबंधों में दृढ़ता के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भी आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | लम्बी विदेश यात्राओं के योग हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की तथा दुर्घटना आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपके मान सम्मान की हानि होने की सम्भावना है | महिलाओं को विशेष रूप से अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अथवा कोई सर्जरी भी इस अवधि में हो सकती है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के साथ ही आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के भी संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ कहीं देशाटन के लिए भी जा सकते हैं | आपको अपने मित्रों तथा बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं | यदि किसी प्रेम सम्बन्ध में हैं तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | दाम्पत्य जीवन में अन्तरंगता के संकेत हैं |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से दशम भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु साथ ही विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी बात पर भाई बहनों अथवा बॉस के साथ कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है | अपने आचरण से थोड़ा Diplomatic होने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | पैसे के लेन देन के समय सावधान रहें |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में हर प्रकार से लाभ के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ स्थानान्तरण के भी संकेत हैं | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | कलाकारों को किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | परिवार में धार्मिक अथवा माँगलिक कार्यों के आयोजनों की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी संकेत हैं | लम्बी दूरी की यात्राओं के भी योग हैं |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में अप्रत्याशित रूप से किसी विवाद के उत्पन्न होने की सम्भावना है | किन्तु साथ ही भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | आपको किसी वसीयत के माध्यम से प्रॉपर्टी अथवा वाहन का लाभ भी हो सकता है | यदि आप स्वयं कोई प्रॉपर्टी अथवा वाहन खरीदना चाहते हैं तो इस विचार को अभी कुछ समय के लिए स्थगित करना ही हित में होगा | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | मन की भावनाओं पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारान आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्यक्षेत्र में आपको कठिन परिश्रम करना पड़ सकता है | अपने, भाई बहनों के तथा जीवन सतही के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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बुध का सिंह में गोचर

बुध का सिंह में गोचर

सर्वप्रथम सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

सोमवार 26 अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण एकादशी को बव करण और सिद्धि योग में दिन में दो बजकर सात मिनट के लगभग बुध अपने शत्रु ग्रह चन्द्रमा की कर्क राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर गोचर कर जाएगा जहाँ दो मित्र ग्रहों सूर्य तथा शुक्र तथा मंगल भी विराजमान है | बुध इस समय अस्त भी है | सिंह राशि में भ्रमण करते हुए बुध दो सितम्बर को पूर्वा फाल्गुनी तथा नौ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में ग्यारह सितम्बर को सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व पाँच बजे के लगभग अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण और उच्च राशि कन्या में प्रविष्ट हो जाएगा | सिंह राशि बुश की मिथुन राशि से तीसरा भाव तथा कन्या से बारहवाँ भाव बनता है तथा सिंह राशि के जातकों के लिए बुध द्वितीयेश और लाभेश हो जाता है | अपनी इस पूरी यात्रा में बुध अस्त ही रहेगा | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं बुध के सिंह राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यह गोचर आपकी प्रतियोगी क्षमता में वृद्धि कर रहा है साथ ही आपकी निर्णायक क्षमता में भी स्पष्टता में वृद्धि के संकेत हैं | आप जो भी कार्य करेंगे सोच समझ कर करेंगे | अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Short term advance course करने का प्रयास भी आप कर सकते हैं | ऐसा करना आपके कार्य की दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है किन्तु उनके साथ आपका किसी प्रकार का प्रॉपर्टी विषयक विवाद भी सम्भव है | आपकी सन्तान यदि कहीं बाहर है तो वह वापस लौट सकती है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | परिवार में तथा कार्यस्थल पर सौहार्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है जिसके कारण आप शान्त तथा उत्साहित मन से अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकेंगे | किन्तु परिवार में बुजुर्गों से बहस आपके हित में नहीं रहेगी | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद इस अवधि में सम्भव है | किन्तु परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझाने में सफल हो सकते हैं | परिवार के अन्य व्यक्तियों का  तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | कोई पुरूस्कार भी आपको प्राप्त हो सकता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु वाणी में कुछ तीखापन भी आ सकता है, जिसके कारण विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की अनबन भी हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | इन यात्राओं के कारण एक ओर जहाँ आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण धनलाभ की भी सम्भावना है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | पिता, बड़े भाई, अधिकारियों तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके दिशानिर्देशों का पालन करेंगे तो आपके कार्य में निरन्तर प्रगति की सम्भावना है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं और धनलाभ कर सकते हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | यदि आपकी वाणी में तीखापन आ रहा है तो उसमें सुधार की आवश्यकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपका कार्य यदि किसी भी प्रकार से विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश में रहने वाले किसी पुरुष मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं | साथ ही आपके पिता का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त होते रहने की सम्भावना है जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ किसी दूर के शहर अथवा विदेश में ट्रांसफर भी हो सकता है | व्यवसाय में पैसा Invest करना पड़ सकता है किन्तु उसके दूरगामी परिणाम लाभदायक हो सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है अथवा किसी दूर के शहर से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग बन रहे हैं जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं | विदेश में निवास कर रहे किसी मित्र के निमन्त्रण पर भी आप वहाँ जा सकते हैं और उसके माध्यम से आपको कार्य का लाभ हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं दूर ट्रांसफर भी हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप किसी धार्मिक कार्य में धन भी व्यय कर सकते हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश दशम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आय की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के संकेत हैं | यदि नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी नौकरी का प्रस्ताव आ सकता है जहाँ पहले मना हो चुकी हो | आपकी वर्तमान परिस्थितियों में इस कार्य को स्वीकार कर लेना आपके हित में रहेगा | बॉस के साथ अकारण ही किसी प्रकार की बहस भारी पड़ सकती है आतः शान्त रहने का प्रयास करें | बड़े भाई अथवा पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही किसी प्रकार का पुरूस्कार अथवा सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | आप अपने जीवन साथी के साथ कहीं भ्रमण अथवा तीर्थ यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय है किन्तु इसके साथ ही विरोधियों में भी वृद्धि का समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में न आने के कारण अथवा देरी के कारण आप चिन्तित हो सकते हैं | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | कार्य आपके अनुकूल न होने के कारण मानसिक तनाव के कारण अनेक समस्याएँ आपको हो सकती हैं | अच्छा यही रहेगा कि इस समय कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय न लें | यदि कहीं यात्रा के लिए जाने का विचार हो तो अभी कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित रहेगा |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | वहीं दूसरी ओर आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आप अनुभव कर सकते हैं | आप स्वयं शान्त रहकर अपने जीवन साथी को भी शान्त करने का प्रयास कर सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई कोर्ट केस भी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | साथ ही जीवन साथी और परिवार के लोगों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/24/mercury-transit-in-leo/

 

सूर्य का सिंह में गोचर

सूर्य का सिंह में गोचर

कल भाद्रपद कृष्ण द्वितीया यानी 17 अगस्त को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग गर करण और अतिगण्ड योग में सूर्यदेव अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि सिंह और मघा नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएँगे | यहाँ भ्रमण करते हुए 31 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और चौदह सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 सितम्बर को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग बुध की कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | शुक्र और बुध का तो अधिकाँश में सूर्य को साथ मिलता ही है, मंगल भी इस पूरी यात्रा में सूर्य के साथ सिंह राशि में ही रहेगा | सिंह सूर्य की मूल त्रिकोण राशि भी है | और जब कोई ग्रह अपनी मूल त्रिकोण राशि अथवा अपनी उच्च राशि में आता है तो वह बली माना जाता है |

इस बीच भगवान् श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव श्री कृष्ण जन्माष्टमी भी है – 23 अगस्त को स्मार्तों की और 24 अगस्त को वैष्णवों की | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी यानी 27 अगस्त से श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय का पञ्चमी पक्ष का पर्यूषण पर्व भी आरम्भ होने जा रहा है, और उसके समाप्त होते ही दूसरे दिन यानी 3 सितम्बर भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से दिगम्बरों के दशदिवसीय साम्वत्सरिक पर्व पजूसन पर्व का भी आरम्भ हो जाएगा जो कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा यानी अनंतचतुर्दशी को संपन्न होगा | पहली सितम्बर को हरतालिका तीज, दो सितम्बर को गणेश चतुर्थी, तीन सितम्बर को ऋषिपञ्चमी, दस सितम्बर को वामन जयंती और तेरह प्रौष्ठपदी पूर्णिमा को पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ ही दिवंगतों के प्रति श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष भी आरम्भ हो जाएगा | इस प्रकार भगवान् भास्कर के सिंह राशि में प्रस्थान के साथ ही इतने सारे व्रत उपवास तथा पर्वों का आरम्भ होने जा रहा है, जिनके लिए सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…  

अब जानने का प्रयास करते हैं सिंह राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

 

मेष : आपकी राशि से पंचमेश पंचम भाव में ही गोचर कर रहा है | यदि आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा अथवा किसी Professional Course के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आय के नवीन अवसरों के साथ ही मन सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आपके साथ Romantically involve हो सकते हैं जो धीरे धीरे विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान का स्वभाव भी उग्र हो सकता है किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपको अपनी माता का सुख प्राप्त होगा वहीं दूसरी ओर आपके पिता के लिए किसी प्रकार के शारीरिक कष्ट की सम्भावना भी हो सकती है | आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा अपने स्वयं के व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | जो कार्य अब तक रुके हुए थे उनके भी पूर्ण होने की सम्भावना है | परिवार में मंगल कार्यों का आयोजन हो सकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर तृतीय भाव में ही हो रहा है | आपके लिए मान सम्मान और यश में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | साथ ही आपके उत्साह में भी इस अवधि में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर द्वितीय भाव में ही हो रहा है | आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि के योग हैं | परिवार में तथा कार्य स्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण रहने की सम्भावना है | किन्तु इसके साथ ही आपका स्वभाव भी उग्र हो सकता है | साथ ही नेत्रों से सम्बन्धित कोई समस्या, किसी प्रकार की फोड़े फुंसी आदि की समस्या अथवा मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन या उच्च रक्तचाप की समस्या भी हो सकती है | इस सबसे बचने के लिए खान पान पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | ध्यान और प्राणायम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी ही राशि में गोचर विशेष रूप से लाभप्रद प्रतीत होता है | आपकी ऊर्जा में वृद्धि तथा व्यक्तित्व में ओज के ही साथ आपके कार्य में भी प्रगति की सम्भावना है | आपके व्यक्तित्व का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा और इस कारण आपके मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो बड़े भाई का सहयोग भी प्राप्त रह सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपने क्रोध को नियन्त्रण में रखना होगा | आपको अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपके द्वादश भाव में ही हो रहा है | यदि आपका कार्य कहीं विदेशों से सम्बद्ध है तो कार्य में प्रगति तथा विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | ननिहाल के पक्ष से किसी प्रकार का मनमुटाव सम्भव है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो इस अवधि में उसका निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | आपके लिए एक ओर जहाँ किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर नेत्र सम्बन्धी विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं |

तुला : आपकी राशि से एकादश भाव में सूर्य का गोचर आय में वृद्धि की ओर तथा नौकरी में पदोन्नति की ओर संकेत करता है | आपका अपना कार्य है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का मतभेद भी हो सकता है | आप कोई नया वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं | आपके अपने स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | छात्रों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर दशम भाव में ही हो रहा है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | आपके लिए कार्य तथा आय के नवीन स्रोत इस अवधि में उपस्थित हो सकते हैं | परिवार में किसी प्रकार के मंगल कार्य की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही यदि आप गर्भवती महिला हैं और डिलीवरी निकट है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है | किसी रोग से मुक्ति भी इस अवधि में संभव है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश अष्टम भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके कार्य में आपके स्वयं के अथवा आपके पिता या परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य के कारण विघ्न उपस्थित हो सकता है | अचानक ही आपके विरोधियों के भी स्वर मुखर हो सकते हैं | आपको स्वयं को ज्वर, मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन, उच्च रक्तचाप अथवा नेत्र विकार अथवा गुप्तांगों से सम्बंधित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु खान पान पर ध्यान देंगे और अपने स्वभाव को संयमित रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

कुम्भ : आपके लियेः गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति की सम्भावना है | किन्तु आपके बिजनेस पार्टनर का स्वभाव इस अवधि में कुछ उग्र हो सकता है | साथ ही दाम्पत्य जीवन में जीवन साथी का सहयोग और साथ तो प्राप्त रहेगा किन्तु उसके स्वभाव की उग्रता के कारण आपको मानसिक तनाव हो सकता | अच्छा यही रहेगा कि अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखें | दूर पास की यात्राओं के योग भी बन रहे हैं |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर छठे भाव में ही हो रहा है | एक ओर आपके विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर आपके उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने विरोधियों पर स्वयं ही विजय प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | किसी प्रकार का कोई लीगल केस का भी सामना करना पड़ सकता है | किन्तु साथ ही परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके कारण आपके आत्मबल में भी वृद्धि होगी | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपके ननिहाल के पक्ष के साथ या तो मनमुटाव हो सकता है अथवा किसी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | आपकी अपनी भी किसी प्रकार की सर्जरी इस अवधि में संभव है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्रवार सोलह अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को तैतिल करण और अतिगण्ड योग में रात्रि आठ बजकर चालीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र प्रस्थान होगा | यद्यपि इस दिन सूर्योदय काल में प्रतिपदा तिथि है किन्तु शुक्र के गोचर के समय द्वितीया तिथि रहेगी | शुक्र इस समय अस्त चल रहा है | शिंह राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र 28 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा आठ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ अन्त में नौ सितम्बर को 25:42 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर बयालीस मिनट) के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपनी इस पूरी यात्रा के दौरान शुक्र अस्त ही रहेगा |

इस बीच पन्द्रह अगस्त को स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के साथ ही परस्पर भाईचारे और सद्भावना के प्रतीक रक्षा बंधन का उल्लासमय पर्व भी है | 18 अगस्त को कजरी तीज, 21 अगस्त को बलराम जयंती, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जयंती का पर्व जन्माष्टमी, एक सितम्बर को हरतालिका तीज, दो को गणेश चतुर्थी और तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी जैसे कुछ विशेष पर्व भी हैं | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ…

मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | सिंह राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से चतुर्थ भाव और तुला से एकादश भाव बनता है, तथा सिंह राशि के लिए शुक्र तृतीयेश और दशमेश है | इन्हीं समस्त तथ्यों एक आद्धार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | हाथ के कारीगरों और सर्जन आदि के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी रोग से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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मंगल का सिंह में गोचर

मंगल का सिंह में गोचर

कल शुक्रवार नौ अगस्त यानी श्रावण शुक्ल नवमी को सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व चार बजकर सैंतालीस मिनट के लगभग मंगल अपने एक मित्र चन्द्र की कर्क राशि से निकल कर दूसरे मित्र ग्रह सूर्य की राशि सिंह में और मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा तथा अस्त होगा और 22 अक्टूबर तक अस्त ही रहेगा | इस प्रस्थान के समय कौलव करण और ब्रह्म योग होगा | सिंह राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 30 अगस्त से पूर्वा फाल्गुनी तथा 21 सितम्बर से उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 25 सितम्बर को प्रातः छह बजकर तैंतीस मिनट के लगभग शत्रु ग्रह बुध की राशि कन्या में प्रस्थान कर जाएगा |

इस बीच 15 अगस्त को हमारा राष्ट्रीय पर्व स्वतन्त्रता दिवस, रक्षा बन्धन, गायत्री जयन्ती तथा श्रावण पूर्णिमा के उल्लासमय पर्व है, 18 अगस्त को कजरी तीज, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी, पहली सितम्बर को हरतालिका तीज है, तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी, छह सितम्बर को राधाष्टमी, बारह सितम्बर को अनन्त चतुर्दशी के पावन पर्वों के साथ ही तेरह सितम्बर को प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से पूर्णिमा के श्राद्ध से श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष भी आरम्भ हो जाएगा | अतः सर्वप्रथम सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

सिंह राशि में संचार करते हुए मंगल की दृष्टियाँ अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक तथा कुम्भ और मीन राशियों पर रहेंगी | इस प्रकार सिंह राशि के साथ ही ये तीनों राशियाँ भी इस गोचर से अधिक प्रभावित हो सकती हैं | सिंह राशि के लिए मंगल चतुर्थेश और नवमेश होकर योगकारक भी है | मंगल की एक राशि मेष से सिंह राशि पञ्चम भाव तथा वृश्चिक से दशम भाव बनती है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके राश्यधिपति और अष्टमेश का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित Advanve course के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा एकादश भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित नहीं रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है अतः योग ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल तो प्रतीत होता है किन्तु साथ ही विरोधियों की संख्या में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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सूर्य का कर्क में गोचर

सूर्य का कर्क में गोचर – कर्क संक्रान्ति

आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है, सर्वप्रथम गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ…

आज खण्डग्रास चन्द्रग्रहण भी है | जैसा कि हम अपने पूर्व के लेखों में भी लिखते आए हैं कि सूर्य ग्रहण और चन्द्रग्रहण बहुत ही आकर्षक खगोलीय घटनाएँ हैं अतः इनसे भयभीत हुए बिना इनके सौन्दर्य की सराहना करने की आवश्यकता है | किन्तु फिर भी जो लोग ग्रहण के वेध को मानते हैं उनके लिए आज रात्रि 25:32 (अर्द्ध रात्र्योत्तर एक बजकर बत्तीस मिनट) पर ग्रहण का स्पर्श काल होगा और 28:30 (कल सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व यानी चार बजकर तीस मिनट) पर मोक्ष काल होगा |

लगभग उसी समय यानी कल सूर्योदय से एक घंटा पूर्व चार बजकर चौंतीस मिनट के लगभग सूर्यदेव बुध की मिथुन राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे, जहाँ मंगल और बुध पहले से ही विराजमान हैं | कर्क राशि में आने पर राहू-केतु के प्रभाव से सूर्य को मुक्ति भी प्राप्त होगी | मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है | अपनी इस यात्रा के आरम्भ में सूर्य अभी पुनर्वसु नक्षत्र पर है, जहाँ से 20 जुलाई को पुष्य तथा 3 अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 अगस्त को दोपहर एक बजकर दो मिनट के लगभग अपनी स्वयं की राशि सिंह में तथा मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएंगे | कर्क राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से बारहवाँ भाव है और सूर्य की उच्च राशि मेष से चतुर्थ भाव है |

कर्क संक्रान्ति का महत्त्व मकर संक्रान्ति के समान ही होता है | कल से भगवान भास्कर दक्षिण दिशा की अपनी यात्रा आरम्भ कर देंगे और छह माह बाद मकर संक्रान्ति पर पुनः उत्तर दिशा की यात्रा आरम्भ कर देंगे | कर्क संक्रान्ति को श्रावण संक्रान्ति अथवा सावन संक्रान्ति भी कहा जाता है | कल सूर्य के कर्क में संक्रमण के समय श्रावण कृष्ण प्रतिपदा तिथि, बालव करण और विषकुम्भ योग होगा | कर्क संक्रान्ति से दिन की अवधि घटती जाती है और रात्रि की अवधि में वृद्धि होती जाती है | शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात माना गया है | इसी कारण वैदिक काल से ही उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है | चातुर्मास अथवा चौमासा और श्राद्ध पक्ष भी इसी अवधि में आते हैं | संक्रान्ति काल में सूर्य, भगवान् विष्णु तथा शिव की पूजा अर्चना का विशेष महत्त्व माना जाता है |

तो जानने का प्रयास करते हैं कर्क राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में उत्सव, मंगल कार्य आदि की सम्भावना है | आपके कार्य में प्रगति की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | ये गोचर आपके तथा आपकी सन्तान दोनों के ही लिए अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु परिवार में – विशेष रूप से सन्तान अथवा पिता के साथ – किसी प्रकार का व्यर्थ का विवाद भी सम्भव है | इससे बचने के लिए अपने Temperament में सुधार की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | एक ओर कहाँ आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को अपने कार्य अथवा स्वयं की योग्यता को लेकर सन्देह भी हो सकता है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है, किन्तु पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझा सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर दूसरे भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | तनाव के कारण आपको माइग्रेन आदि की समस्या भी सम्भव है | साथ ही आपको अपनी वाणी और खान पान पर भी संयम रखने की आवश्यकता है |

कर्क : द्वितीयेश का गोचर लग्न में हो रहा है | मित्र ग्रह की राशि है किन्तु अशुभ प्रभाव में भी है | एक ओर जहाँ कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर अपने तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी हुई है जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपको कहीं बाहर से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | किन्तु आपको अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु सन्तान अथवा पिता के साथ ब्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है |

तुला : आपका एकादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | अपने स्वयं के व्यवसाय में भी वृद्धि की सम्भावना है | मित्रों का सहयोग इस अवधि में उपलब्ध रहेगा | किन्तु परिवार के सदस्यों, पिता अथवा सहकर्मियों के साथ अपना व्यवहार यदि विनम्र नहीं रखा तो व्यर्थ का विवाद उत्पन्न हो सकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग हैं | कार्य में अप्रत्याशित लाभ की भी सम्भावना है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका भाग्येश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | किन्तु अकारण ही मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है | गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है | रहस्य विद्यायों जैसे ज्योतिष आदि तथा धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि भी इस अवधि में हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका अष्टमेश सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | मिश्रित फलों की सम्भावना है | पार्टनरशिप में कोई कार्य है तो उसमें किसी ग़लतफ़हमी के कारण व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | साथ ही किसी अप्रत्याशित स्रोत से कार्य में लाभ की भी सम्भावना है | अपना तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए यह गोचर उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | दाम्पत्य जीवन अथवा प्रेम सम्बन्धों में तनाव के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी कोर्ट केस के कारण भी तनाव हो सकता है | सन्तान अथवा छोटे भाई बहनों के साथ भी कोई विवाद बड़ा रूप ले सकता है | अच्छा यही रहेगा इस समय किसी बहस में न पड़कर शान्तिपूर्वक समय आनुकूल होने की प्रतीक्षा करें |

मीन : षष्ठेश का पंचम भाव में गोचर है | एक ओर आपके आत्मविश्वास में वृद्धि तथा नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | वहीं दूसरी ओर सन्तान अथवा परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ अकारण ही बहस भी हो सकती है | यदि आप पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद प्राप्त होने की सम्भावना है | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/07/16/sun-transit-in-cancer-2019/