Category Archives: गोचर

सूर्य का मिथुन में गोचर

सूर्य का मिथुन में गोचर

आज सायं पाँच बजकर उन्तालीस मिनट के लगभग भगवान भास्कर अपने शत्रु गृह शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर बुध की मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे, जहाँ उनके लिए विचित्र परिस्थिति बनी हुई है | एक ओर उनका मित्र ग्रह मंगल वहाँ गोचर कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर एक शत्रु ग्रह राहु का गोचर भी वहाँ चल रहा है | साथ ही शनि और केतु इन दो शत्रु ग्रहों की दृष्टियाँ भी मिथुन राशि पर हैं | मिथुन राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से एकादश और सूर्य की उच्च राशि मेष से तीसरे भाव में आती है | आत्मा का कारक सूर्य इस समय मृगशिर नक्षत्र पर हैं, तथा यहाँ से 22 जून को आर्द्रा, 6 जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्रों पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 जुलाई को सूर्योदय से कुछ पूर्व 4:34 के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के समय गर करण और सिद्ध नक्षत्र होगा | पृथिवी तत्त्व युक्त मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है तथा यह समानान्तर चलने वाला पित्त प्रकृति का धैर्यवान नक्षत्र है | आर्द्रा ऊर्ध्वमुखी तीक्ष्ण और वात प्रकृति का जल तत्त्व युक्त स्त्री नक्षत्र है तथा राहु इसका देवता है | पुनर्वसु सहनशील तथा रचनाधर्मिता युक्त समानान्तर चलने वाला वात प्रकृति का सात्विक चर पुरुष नक्षत्र है और इसका देवता है गुरु | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि मिथुन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके तथा आपके भाई बहनों के लिए कार्य में उन्नति के योग हैं | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | किसी घनिष्ठ मित्र अथवा भाई बहनों के सहयोग से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | किन्तु आलस्य का त्याग करके अधिक श्रम तथा प्रयास करने की आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद की सम्भावना को भी नकारा नहीं जा सकता | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है | प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में लाभ की आशा की जा सकती है | यदि आप अपने लिए नई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपका वह सपना भी पूर्ण हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित Documents का भली भाँती निरीक्षण आवश्यक है | साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि के भी संकेत हैं | किन्तु माइग्रेन, ज्वर, पित्त आदि से सम्बन्धित समस्याएँ हो सकती हैं अतः गर्मी से बचने का प्रयास करें और अधिक मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करें |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपकी लग्न में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | साथ ही यदि आपने अपने Temperament को नियन्त्रण में नहीं रखा तो वैवाहिक जीवन में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है |

कर्क : आपके द्वितीयेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपको कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है – विशेष रूप से आँखों के इन्फेक्शन के प्रति सावधान रहें | खर्च में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः बजट बनाकर चलेंगे तो आपके लिए हित में रहेगा | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है, वास्तव में आपके कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छे संकेत प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | कोई नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | विदेश में निवास कर रहे आपके मित्रों की ओर से आपको सहयोग प्राप्त हो सकता है | किन्तु अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता होगी |

तुला : आपका एकादशेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से भाग्योन्नति का समय प्रतीत होता है | सुख समृद्धि में वृद्धि के संकेत हैं | जिन जातकों का कार्य विदेश से किसी प्रकार सम्बद्ध है उनके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी संकेत हैं | अतः अवसर का लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या चल रही है तो उससे भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक दृष्टि से तो समय अनुकूल है किन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से समय उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | गुप्त शत्रुओं के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य समस्याओं तथा विरोधियों के कारण आप अपने मनोबल में भी कमी का अनुभव कर सकते हैं |

धनु : आपका भाग्येश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | जो लोग पॉलिटिक्स से जुड़े हैं उनके लिए भी समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों के लिए समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के उग्र स्वभाव के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अपने व्यवहार को सन्तुलित रखने के लिए प्राणायाम और ध्यान का सहारा लीजिये |

मकर : आपका अष्टमेश छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर विदेश यात्राओं के योग हैं तो वहीं दूसरी ओर कार्य की दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप इस समय अपने प्रतियोगियों को परास्त करने में सक्षम हैं इसलिए अवसर का लाभ उठाकर अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर होना ही उचित रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी इस अवधि में ठीक हो जाने की सम्भावना है |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए सूर्य का यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | व्यावसायिक रूप से आपके कार्य में तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश भी जा सकती है और यदि नौकरी की तलाश में है तो वह भी पूर्ण हो सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

मीन : षष्ठेश का चतुर्थ भाव में गोचर है | आप अथवा आपका जीवन साथी यदि नया वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो अभी उस विचार को स्थगित करना ही उचित रहेगा | साथ ही परिवार में किसी प्रकार का मनमुटाव भी हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद भी प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/15/sun-transit-in-gemini/

 

 

Advertisements

शुक्र का वृषभ में गोचर

शुक्र का वृषभ में गोचर

आज वट सावित्री सोमवती अमावस्या है | कल यानी दो जून को सायं चार बजकर उनतालीस मिनट पर अमावस्या तिथि का आगमन हुआ है जो आज दोपहर तीन बजकर इकत्तीस मिनट तक अमावस्या रहेगी | अतः सामान्य रूप से व्रत के पारायण का समय भी इसी समय तक है | जो भी महिलाएँ इस व्रत का पालन करती हैं सर्वप्रथम उन सभी को वट सावित्री अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ…

आज ज्येष्ठ शुक्ल अमावस्या को पौराणिक मान्यताओं एक अनुसार यम नियम तथा पाप पुण्य का विधान करने वाले सूर्यपुत्र शनिदेव की जयन्ती भी मनाई जा रही है | इसके अतिरिक्त आज सूर्य और चन्द्र एक साथ वृषभ राशि में रोहिणी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं | सोमवार को यदि इस प्रकार का योग हो तो वह सर्वार्थसिद्धि योग कहलाता है | साथ ही उच्च राशि में स्थित चन्द्र और सूर्य का गुरु के साथ सम सप्तक तथा चन्द्र और गुरु का गज केसरी योग भी बन रहा है | Astrologers के अनुसार ये सभी योग अपने नामों के अनुरूप ही अत्यन्त शुभ फल देने वाले माने जाते हैं |

कल यानी चार जून से गंगा दशहरा के दशदिवसीय पावन पर्व का भी आरम्भ हो रहा है | पञ्चमी तिथि का क्षय होने के कारण इस वर्ष गंगा दशहरा पर्व का समापन नौ दिनों में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी यानी 12 जून को मुख्य स्नान के साथ होगा | अस्तु, सभी को इस पावन पर्व की भी हार्दिक शुभकामनाएँ… इस भावना के साथ कि गंगा के अमृततुल्य शीतल, निर्मल तथा मधुर जल की ही भाँती हम सबके मनों भी शीतल, निर्मल तथा मधुर भावों की गंगा सतत प्रवाहित रहे…

कल मंगलवार चार जून यानी ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को बव करण और शूल योग में प्रातः ग्यारह बजकर इक्कीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपनी अपनी स्वयं की राशि वृषभ में प्रस्थान करेगा जहाँ इसके समक्ष यानी वृश्चिक राशि में वक्री गुरु का गोचर चल रहा है | इस समय शुक्र कृत्तिका नक्षत्र पर है | वृषभ राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र 12 जून को रोहिणी नक्षत्र तथा 23 जून को मृगशिरा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 29 जून को 25:34 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर चौंतीस मिनट) के लगभग मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के वृषभ में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपको तथा आपके जीवन साथी को धनलाभ के साथ अच्छे स्वादिष्ट भोजन का आनन्द भी प्राप्त होता रह सकता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की भी सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है अथवा पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति तथा उसके माध्यम से धनलाभ की सम्भावना है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो जीवन साथी की पार्टनरशिप में लाभदायक सिद्ध हो सकता है | यदि ऐसा नहीं भी है तो जीवन साथी से अपने कार्य में सहायता अवश्य लें | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तनों के संकेत प्रतीत होते हैं | मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | समस्त प्रकार के भोग विलास के साधनों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा तथा दाम्पत्य जीवन में मधुरता के भी संकेत हैं | अविवाहित जातकों की जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु भली भाँति सोच समझकर ही आगे बढ़ना उचित रहेगा | स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो विशेष रूप से महिलाओं को अपनी Gynaecologist से Regular Check-up कराते रहना चाहिए |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | आप सुख सुविधाओं पर बहुत धन इस अवधि में खर्च कर सकते हैं | साथ ही आपकी सन्तान कहीं बाहर उच्च शिक्षा के लिए भी जा सकती है | सन्तान के द्वारा भी व्यसनों में धन का अपव्यय हो सकता है | आप स्वयं भी केवल भ्रमण के लिए ही विदेश यात्रा कर सकते हैं | सन्तान तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको कुछ नया कार्य भी प्राप्त हो सकता है | साथ ही वाहन तथा प्रॉपर्टी की खरीद फ़रोख्त में भी लाभ की सम्भावना है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे जहाँ आपकी कला की प्रशंसा के साथ ही आपको आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | आपको अधिकारी वर्ग का तथा अपनी माता जी और बड़े भाई बहनों का विशेष सहयोग इस अवधि में प्राप्त रहेगा |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में राश्यधिपति के साथ ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे तथा आपके कार्य की प्रशंसा होगी | इसके अतिरिक्त यदि आप लेखक हैं, आप गीत-संगीत-नृत्य के कलाकार हैं, सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं अथवा ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय है या Cosmetic Dentist हैं तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अपने कार्य में आपको विशेष रूप से महिलाओं सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होने की सम्भावना है | परिवार में भी आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए भी समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि के योग भी प्रतीत होते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप अपनी वाणी से दूसरों को प्रभावित करने में सफल हो सकते हैं |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से अष्टम में गोचर कर रहा है | अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष, दर्शन और आध्यात्म के अध्ययन में प्रवृत्त हो सकती है | कोई शोध कार्य यदि आप कर रहे हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | महिलाओं को विशेष रूप से अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप कराने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहने के संकेत हैं | कार्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | कहीं विदेश से धनलाभ की सम्भावना है | आप जीवन साथी के साथ कहीं विदेश में निवास की योजना भी बना सकते हैं | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह भी सम्भव है | किन्तु साथ ही महिलाओं को विशेष रूप से स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या हो सकती है जिस पर पैसा खर्च हो सकता है | अतः नियमित रूप से अपनी Gynaecologist से चेकअप अवश्य कराती रहें |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपके छठे भाव में अपनी ही राशि में गोचर कर रहा है | पारिवारिक आयोजनों में अपने मामा अथवा मौसी आदि से भेंट करने के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं तथा उनके माध्यम से आपको अपने कार्य में भी लाभ मिल सकता है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है तथा उसके माध्यम से भी आपको अर्थलाभ हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | नई नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु प्रेम सम्बन्धों में अथवा वैवाहिक जीवन में यदि समझदारी से नहीं चलेंगे तो साथी के साथ मनमुटाव भी हो सकता है |

मकर : आपका योगकारक आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर अत्यधिक अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप यदि वर्तमान कार्य छोड़कर कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में  प्रेम और आनन्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं या आपका ब्यूटी पार्लर है तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका भी योगकारक शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन – जैसे बच्चे का जन्म आदि – भी हो सकता है | आप अपने घर को Renovate करा सकते हैं अथवा नया घर या वाहन आदि खरीद सकते हैं | कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सन्तोषजनक रहने की सम्भावना है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | आप यदि किसी नौकरी में हैं तो उसमें परिवर्तन की सम्भावना है | साथ ही आपके उत्साह और पराक्रम में वृद्धि की भी सम्भावना है | आप यदि हाथ के कारीगर हैं तो आपको अचानक अपने कार्य के प्रदर्शन का भी अवसर प्राप्त हो सकता है और इसके लिए आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं | साथ ही जो लोग मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्यों में अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/03/venus-transit-in-taurus/

 

बुध का मिथुन में गोचर

बुध का मिथुन में गोचर

कल शनिवार रविवार यानी ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी अर्थात 1 जून को 24:17 (मध्यरात्रि में 12:17) के लगभग विष्टि करण और अतिगण्ड योग में बुध अपने मित्र शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि मिथुन में प्रविष्ट होगा | मिथुन राशि में प्रवेश के समय बुध मृगशिरा नक्षत्र में होगा तथा कुछ समय के लिए अस्त भी होगा, किन्तु दो जून को रात्रि नौ बजकर एक मिनट के लगभग बुधोदय हो जाएगा | यहाँ भ्रमण करते हुए पाँच जून को आर्द्रा नक्षत्र और तेरह जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में इक्कीस जून को 26:27 (अर्धरात्र्योत्तर 2:27) के लगभग बुध कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | जैसा कि ऊपर लिखा, मिथुन बुध की स्वराशि है तथा बुध की उच्च राशि और मूल त्रिकोण राशि कन्या से मिथुन राशि दशम भाव यानी कर्म स्थान बनता है | ध्यान देने योग्य बात यह है कि मंगल और राहु यहाँ पहले से गोचर कर रहे हैं | बुध की अपनी राशि मिथुन से मंगल षष्ठेश और एकादशेश है तथा बुध की उच्च राशि कन्या से मंगल तृतीयेश और अष्टमेश है | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष – आपके लिए तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध का गोचर आपके तृतीय भाव में अपनी ही राशि में हो रहा है | आपके लिए पहले से कहीं अधिक Competitive हो सकते हैं तथा आपकी निर्णायक क्षमता और उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही ऐसे मित्रों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की भी आवश्यकता है जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | सम्भावना कुछ ऐसी भी प्रतीत होती है कि आवश्यकता होने पर भाई बहनों का सहयोग प्राप्त हो सकता है | यद्यपि कुछ विवाद भी सम्भव है, किन्तु अन्त में परिणाम आपके पक्ष में ही होगा | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ – आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपके दूसरे भाव में ही हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से अनुकूलता होने के साथ ही आपकी वक्तव्यता तथा आपके लेखन में निखार इस अवधि में आ सकता है जिसके कारण आपसे लोग प्रभावित भी होंगे | आपके व्यवहार में उदारता, कोमलता एवं सौम्यता दिखाई देगी जिसका प्रभाव आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर निश्चित ही पड़ेगा | आपकी सन्तान के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन – आपके लिए बुध योगकारक होकर अपनी ही राशि में लग्न में गोचर कर रहा है | परिवार में मंगलकार्यों का आयोजन हो सकता है | परिवार में परस्पर सौहार्द का वातावरण रहेगा और समय आमोद प्रमोद में व्यतीत होगा | सामाजिक गतिविधियों में भी वृद्धि की भी सम्भावना है | परिवारजनों का सहयोग आपको अपने कार्य में उपलब्ध होता रहेगा | साथ ही आप अपने लिए कोई नई प्रॉपर्टी भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क – कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध का गोचर आपके बारहवें भाव में ही हो रहा है | भाई बहनों का सहयोग भी अपने कार्य में आपको प्राप्त रहने की सम्भावना है | कार्य के सिलसिले में आपको तथा आपके भाई बहनों को दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने तथा अपने भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा | साथ ही आप अपने कार्य में पैसा भी Invest कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको भविष्य में अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह – आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके एकादश में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | बड़े भाई तथा पिता का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आप परिवार के साथ कहीं यात्रा आदि के लिए भी जा सकते हैं |

कन्या – आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग हैं | समाज में आपका मान-सम्मान तथा प्रभाव में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त होते रह सकते हैं और आप लम्बे समय तक उनमें व्यस्त रह सकते हैं तथा उनके माध्यम से धनलाभ कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपने कण और आँख खुले नहीं रखे तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा भाई ही आपके कार्य में विघ्न का कारण बन सकता है |

तुला – आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | लम्बी विदेश यात्राओं के संकेत प्रतीत होते हैं | साथ ही यदि आपका कार्य किसी रूप में विदेशों से सम्बन्धित है तो उसमें उन्नति की भी सम्भावनाएँ हैं | इसके अतिरिक्त धर्म तथा आध्यात्मिकता की ओर आपकी रूचि बढ़ सकती है | आप किसी धार्मिक संस्था अथवा अस्पताल आदि के लिए धन दान भी करने की योजना बना सकते हैं | किन्तु पोंगा पण्डितों को पहचान कर उनसे बचने की आवश्यकता है अन्यथा बहुत सा धन अनावश्यक ही खर्च हो सकता है |

वृश्चिक – आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कहीं से आकस्मिक लाभ की सम्भावना है | व्यावसायिक रूप से भी अप्रत्याशित सफलता की सम्भावना है | किसी सीनियर के रिटायर होने के कारण आपको उस स्थान पर पदोन्नत भी किया जा सकता है | किन्तु बॉस के साथ पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वभाव में नकारात्मकता आपके व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु – आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आप तथा आपके जीवन साथी के लिए व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों और मीडियाकर्मियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार भी आपको प्राप्त हो सकता है |

मकर – बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल परिणाम की सम्भावना की जा सकती है | साथ ही बहुत समय से चली आ रही जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द के इलाज़ का भी पता इस अवधि में लग सकता है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए समय अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है किन्तु उन्हें परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा, किन्तु पारिवारिक क्लेश के कारण मानसिक तनाव सम्भव है |

कुम्भ –  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | किसी प्रकार की अप्रत्याशित घटना की सम्भावना की जा सकती है | कार्यस्थल पर वातावरण अनुकूल बना रह सकता है | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु इसके साथ ही सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का भी प्रयास आवश्यक है |

मीन – आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप कोई नया घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | आपको अपने परिवारजनों का तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता रहेगा तथा परिवार में सौहार्द का वातावरण रहने की सम्भावना है, किन्तु आपको अपनी वाणी और Temperament को संयम में रखने की आवश्यकता है | परिवार में माँगलिक कार्यों की भी सम्भावना प्रतीत होती है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/31/mercury-transit-in-gemini-2019/

 

बुध का वृषभ में गोचर

बुध का वृषभ में गोचर

शनिवार 18 मई यानी वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को रात्रि 11:35 के लगभग बव करण और परिघ योग में बुध मेष राशि से वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | कल ही भगवान बुद्ध का जन्म दिवस बुद्ध पूर्णिमा भी है | साथ ही कल यानी बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ 1वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को ही महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी तिथि को बुद्ध का महानिर्वाण भी हुआ | इस कारण बौद्धधर्म के अनुनायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है | इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर देवगुरु बृहस्पति और आत्मा के कारक सूर्य का परस्पर सम-सप्तक योग भी बन रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यन्त शुभ माना जाता है | तो सर्वप्रथम सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ, इस आशा और विश्वास के साथ कि हम सभी बुद्ध के आदर्शों को अपने जीवन दर्शन में आत्मसात करने का प्रयास करें…

बुध इस समय कृत्तिका नक्षत्र पर है तथा अस्त है | यहाँ से 23 मई को बुध रोहिणी नक्षत्र और 29 मई को मृगशिरा नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ पहली जून को 24:17 (एक और दो जून की मध्यरात्रि में बारह बजकर सत्रह मिनट) के लगभग मिथुन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस पूरी अवधि में बुध अस्त ही रहेगा | दो जून को मिथुन में पहुँचने के बाद रात्रि नौ बजे के लगभग बुधोदय होगा | अपनी स्वयं की एक राशि मिथुन से वृषभ राशि बारहवाँ भाव है तथा बुध की अपनी दूसरी राशि – जो कि बुध की उच्च तथा मूल त्रिकोण राशि भी है – से वृषभ राशि नवम भाव है | अतः सामान्य रूप से कह सकते हैं कि कन्या राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मकर राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके लिए तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है | आपकी सम्वाद शैली इस अवधि में प्रभावशाली रहेगी, किन्तु थोड़ा Diplomatic होने की आवश्यकता है | सत्य बोलें, किन्तु कड़वा न बोलें | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | जो कार्य रुका हुआ था वह पुनः आगे बढ़ सकता है और उसके कारण आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता आएगी | भाई बहनों के साथ कुछ विवाद सम्भव है, किन्तु अपने बुद्धिबल से आप उस विवाद का स्वयं ही समाधान भी करने में सक्षम हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | आपके व्यवहार में उदारता, कोमलता एवं सौम्यता दिखाई देगी जिसका प्रभाव आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर निश्चित ही पड़ेगा | आपकी सम्वाद तथा लेखन शैली इस अवधि में प्रभावशाली रहेगी तथा इसके कारण आपको अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवद्धि में जीवन साथी की खोज भी पूरी हो सकती है, किन्तु विवाह में अभी समय लग सकता है | सन्तान के लिए समय अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपके लिए बुध लग्नेश और चतुर्थेश होकर योगकारक है तथा आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके अपने लिए और परिवार के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं वहीं दूसरी ओर इस अवधि में आप विदेश यात्रा के लिए भी जा सकते हैं अथवा अपना निवास बदलने की योजना बना सकते हैं | किसी कारणवश मानसिक तनाव हो सकता है | योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो इस समस्या से बच सकते हैं |

कर्क : कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका व्यवसाय किसी रूप में विदेश से सम्बद्ध है तब तो आपके लिए विशेष रूप से लाभ की सम्भावना है | भाई बहनों का सहयोग भी अपने कार्य में आपको प्राप्त रहने की सम्भावना है | मित्रों के साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत हो सकता है | कार्य के सिलसिले में आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा |

सिंह : आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | अपनी आकाँक्षाओं की पूर्ति में आपको अपने पिता का सहयोग भी प्राप्त होता रहेगा |

कन्या : आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग हैं | समाज में आपका मान-सम्मान तथा प्रभाव में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो आप वर्तमान नौकरी छोडकर कोई अन्य नौकरी भी कर सकते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो कार्य के सिलसिले में लम्बी विदेश यात्राओं के भी योग बन रहे हैं जहाँ आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं |

तुला : आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश है तथा आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | अचानक ही धन हानि की सम्भावना है | या हो सकता है कि आप कोई रहस्य जानने के प्रयास में अपने व्यक्तिगत अथवा व्यावसायिक जीवन को स्वयं ही कोई हानि पहुँचा लें | अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | रहस्य को रहस्य ही रहने दें | विदेश यात्राओं के योग हैं किन्तु ये यात्राएँ सम्भव है आशा के अनुकूल न सिद्ध हों, अतः इन्हें कुछ समय के लिए स्थगित करना ही हित में रहेगा | स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | यदि पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो लाभ की सम्भावना है | किन्तु आपके स्वभाव में नकारात्मकता आपके व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है | साथ ही किसी ग़लतफ़हमी के कारण जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है | अच्छा यही रहेगा कि कार्य से अवकाश लेकर कुछ समय के लिए कहीं भ्रमण के लिए चले जाएँ | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु : आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का तनाव भी इस अवधि में सम्भव है | कार्य क्षेत्र में आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा जिसके फलस्वरूप नौकरी में पदोन्नति अथवा अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है |

मकर : बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपकी राशि से पञ्चम भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं | आप जो भी निर्णय इस अवधि में लेंगे सोच विचार कर ही लेंगे जिसके कारण आपके कार्य भी समय पर पूर्ण होने की सम्भावना है | आप उच्च शिक्षा के लिए अथवा कोई नया कोर्स करने के लिए किसी अन्य स्थान पर जा सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | प्रेम सम्बन्धों में भी सुधार की सम्भावना है | धार्मिक कार्यों में भी आपकी रूचि बढ़ सकती है |

कुम्भ :  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है अथवा नौकरी का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आप आशा छोड़ चुके होंगे | किन्तु परिवार में किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | साथ ही आपको अपनी माता जी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | स्वयं भी ड्राइविंग में सावधान रहने की आवश्यकता है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जो लोग कर रहे हैं उन्हें कठिन परिश्रम की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप स्वयं भी कोई नया घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | आपको अपने परिवारजनों का तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना के साथ एक बार पुनः सबको बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/17/mercury-transit-in-taurus/

 

सूर्य का वृषभ में गोचर

सूर्य का वृषभ में गोचर 

कल, यानी बुधवार 15 मई 2019 को प्रातः ग्यारह बजकर एक मिनट के लगभग आत्मा के कारक भगवान भास्कर ने अपने मित्र मंगल की राशि मेष से निकल कर अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि वृषभ में प्रस्थान करेंगे | यद्यपि कल सूर्योदय के समय वैशाख शुक्ल एकादशी है, किन्तु सूर्य के वृषभ राशि में प्रस्थान के समय द्वादशी तिथि, बव करण तथा वज्र योग होगा तथा सूर्यदेव कृत्तिका नक्षत्र पर होंगे | वृषभ राशि सूर्य की अपनी सिंह राशि से दशम भाव है तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से द्वितीय भाव है | अपनी इस यात्रा के दौरान भगवान भास्कर 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में तथा आठ जून को मृगशिरा नक्षत्रों पर संचार करते हुए शनिवार 15 जून को सायं 5:39 के लगभग मिथुन राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | सूर्यदेव की इस यात्रा के दौरान निरन्तर गुरुदेव की दृष्टि इन पर रहेगी जिसके कारण सम सप्तक राजयोग भी बन रहा है | देवगुरु बृहस्पति और आत्मा का कारक सूर्य जब परस्पर सप्तम भाव में हों तो यह योग बनता है जो अत्यन्त शुभ माना जाता है |

साथ ही 18 मई को रात्रि ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट के लगभग बुध का प्रस्थान वृषभ में हो जाएगा जो दो जून तक वहीं विचरण करेगा | उसके बाद चार जून को प्रातः ग्यारह बजकर इक्कीस मिनट के लगभग शुक्र वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | वृषभ राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से दशम भाव तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से दूसरा भाव है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि समस्त राशियों के जातको पर वृषभ राशि में सूर्य के संक्रमण के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से द्वितीय भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आर्थिक स्तर में दृढ़ता आने के संकेत हैं | कार्य में उन्नति तथा धन सम्पत्ति में वृद्धि के योग हैं | पिता अथवा / तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त रहेगा | साथ ही आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त होगा | अविवाहित हैं तो अनुकूल जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सम्बन्धों में माधुर्य बनाए रखने के लिए आपको अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी तो राशि में ही आपके चतुर्थेश का गोचर हो रहा है | यदि आप अपने लिए नई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपका वह सपना पूर्ण हो सकता है | किन्तु इस कार्य के लिए कहीं से भी लोन लेना उचित नहीं होगा | आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रहा सकता है | कार्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल ही प्रतीत होता है | किन्तु माइग्रेन, ज्वर, पित्त आदि से सम्बन्धित समस्याएँ हो सकती हैं, अतः गर्मी से बचने का प्रयास करें और अधिक मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करें | अधिक मिर्च मसाले वाले भोजन से परहेज़ करें |

मिथुन : आपका तृतीयेश आपके द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए समय उतना अधिक उत्साहवर्द्धक नहीं प्रतीत होता | एक ओर जहाँ यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर यह आवश्यक नहीं कि यात्राओं से आपको लाभ हो ही जाए | साथ ही यात्राओं पर पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है – विशेष रूप से आँखों के इन्फेक्शन के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उनके साथ आपके सम्बन्धों में भी माधुर्य बना रहने की सम्भावना है |

कर्क : आपका द्वितीयेश आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है, वास्तव में आपके कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छे संकेत प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | वर्तमान कार्य के साथ ही कोई अन्य प्रकार का नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है |

सिंह : आपका राश्यधिपति आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति, अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी उन्नति तथा नए क्लायिन्ट्स बनने की सम्भावना है | आत्मविश्वास में वृद्धि का समय है | आपके कार्य की प्रशंसा होगी तथा धनलाभ भी होने की सम्भावना है | कार्यक्षेत्र में आपके उत्तम प्रदर्शन के लिए आपको किसी पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | माता पिता तथा परिवार के अन्य लोगों के साथ साथ सहकर्मियों का भी सहयोग प्राप्त होता रहेगा |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से भाग्योन्नति का समय प्रतीत होता है | सुख समृद्धि में वृद्धि के संकेत हैं | जिन जातकों का कार्य विदेश से किसी प्रकार सम्बद्ध है उनके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी संकेत हैं | अतः आलस्य का त्याग करके अवसर का लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या चल रही है तो उससे भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है | साथ ही आप सपरिवार किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

तुला : आपका एकादशेश अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक दृष्टि से तो समय अनुकूल है किन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से समय उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | गुप्त शत्रुओं के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | अपने बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | स्वास्थ्य समस्याओं तथा विरोधियों के कारण आप अपने मनोबल में भी कमी का अनुभव कर सकते हैं | किन्तु कार्यस्थल पर आपको अपने सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त रहेगा जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से आपके कार्य में लाभ की सम्भावना है | किसी पैतृक सम्पत्ति के लाभ की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | जो लोग पॉलिटिक्स से जुड़े हैं उनके लिए भी समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

धनु : आपका भाग्येश छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर विदेश यात्राओं के योग हैं तो वहीं दूसरी ओर कार्य की दृष्टि से भी समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सम्भव है आपको अपने कार्य में किसी प्रकार के व्यवधान का अनुभव हो, किन्तु आप अपने बुद्धिबल से उस व्यवधान को दूर कर सकते हैं | आप इस समय अपने प्रतियोगियों को परास्त करने में सक्षम हैं इसलिए अवसर का लाभ उठाकर अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर होना ही उचित रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी इस अवधि में ठीक हो जाने की सम्भावना है |

मकर : आपका अष्टमेश आपके पञ्चम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए सूर्य का यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | व्यावसायिक रूप से आपके कार्य में तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश भी जा सकती है और यदि नौकरी की तलाश में है तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | साथ ही सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों के लिए हानिकारक भी हो सकती है |

कुम्भ : आपकी राशि से सप्तमेश का आपके चतुर्थ भाव में गोचर है | आप अथवा आपका जीवन साथी यदि नया वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो इस अवधि में आपका वह सपना सत्य हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के संकेत भी हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद भी प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

मीन : आपके षष्ठेश आपके तृतीय भाव में गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | छोटे भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना है | पराक्रम में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने विरोधियों को परास्त करने में समर्थ हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस का परिणाम भी आपके पक्ष में आ सकता है | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | साथ ही यदि आप हाथ के कारीगर हैं अथवा Engineer, Architect, Doctor हैं अथवा मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/14/sun-transit-in-taurus/

 

शुक्र का मेष राशि में गोचर

शुक्र का मेष राशि में गोचर

कल शुक्रवार, वैशाख शुक्ल षष्ठी को रात्रि सात बजकर छह मिनट के लगभग तैतिल करण और गण्ड योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | मेष राशि में भ्रमण करते हुए 21 मई को भरणी और पहली जून को कृत्तिका नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में चार जून को अपनी स्वयं की वृषभ राशि में चला जाएगा | वृषभ राशि से मेष राशि बारहवाँ भाव तथा शुक्र की दूसरी राशि तुला – जो कि शुक्र के लिए मूल त्रिकोण भी है – से मेष राशि सप्तम भाव है | जानने का प्रयास करते हैं कि शुक्र के मेष राशि में गोचर के समस्त राशियों पर सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है जहाँ आपकी राशि से तृतीयेश, पंचमेश तथा षष्ठेश का साथ उसे प्राप्त हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके आकर्षक व्यक्तित्व तथा वाणी से लोग प्रभावित होंगे और उसका लाभ आपको अपने कार्य तथा पारस्परिक सम्बन्धों में प्राप्त हो सकता है | आर्थिक स्थिति में इस अवधि में दृढ़ता की सम्भावना प्रतीत होती है | Alternative Healing अथवा रहस्य विद्याओं में आपकी रूचि बढ़ सकती है | किसी मनोनुकूल व्यक्ति से आपका सम्पर्क इस अवधि में हो सकता है जिसके साथ आप Romantically यदि कहीं Involve हो सकते हैं और यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | जीवन साथी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपकी राशि से द्वितीयेश, चतुर्थेश और पंचमेश भी वहीं गोचर कर रहे हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर तो सम्भव है आपको अपने कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि हो जाए और इन यात्राओं के माध्यम से आपको धन लाभ की सम्भावना की जा सकती है | वहीं दूसरी और इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | यदि कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो उसकी प्राप्ति इस अवधि में हो सकती है | आपका रूचि किसी प्रकार की रहस्य विद्याओं अथवा Alternative Healing की ओर बढ़ सकती है, जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है | अपनी वाणी पर संयम रखने की भी आवश्यकता है | परिवार में आनन्दपूर्ण वातावरण बना रहने की सम्भावना है | अपने तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है, जहाँ आपका योगकारक बुध तथा तृतीयेश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित छोटी छोटी विदेश यात्राओं की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | मित्रों तथा सहकर्मियों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है, किन्तु सम्भव है आपको घर से कहीं दूर जाना पड़े |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके द्वितीयेश तथा तृतीयेश और द्वादशेश के साथ आपकी राशि से कर्म स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं जिसके कारण आप अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम रहेंगे | आप कलाकार हैं, कवि हैं, डेंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं, ब्यूटीशियन हैं अथवा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं, टूर और ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय में, वक्ता हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में उन्नति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | सम्भव है आप अपने वर्तमान निवास को ही Renovate करा लें | परिवार में किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है, जहाँ आपका राश्यधिपति, द्वितीयेश तथा लाभेश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके पराक्रम में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कुछ नया कार्य आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं, यह कार्य आपको बहुत समय तक व्यस्त रख सकता है | कार्य तथा आय में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | सम्बन्धियों तथा मित्रों के साथ आमोद प्रमोद का समय भी प्रतीत होता है | सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा अथवा देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में भी वृद्धि हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में आपके द्वितीयेश, नवमेश तथा द्वादशेश के साथ हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ आपके लिए कार्य में प्रगति तथा उसके माध्यम से अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना की जा सकती है, किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी के लाभ की सम्भावना की जा सकती है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी, वहीं दूसरी ओर किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी सहकर्मी की ओर से आपका विरोध भी सम्भव है, अतः आँख और कान खुले रखने की आवश्यकता है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली बनी रहेगी, अपने कार्य में इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में भाग्येश, लाभेश तथा द्वादशेश के साथ होने जा रहा है | आपके और आपके जीवन साथी के लिए कार्य तथा अर्थलाभ की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अनेकों अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | Cosmetic और Medicine के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी यह समय अत्यन्त लाभप्रद प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | अविवाहित हैं तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा आपका कोई सहकर्मी आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध सकते हैं | किन्तु साथ ही प्रेम सम्बन्धों में तथा दाम्पत्य जीवन में तनाव की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है जहाँ आपका अष्टमेश, दशमेश और एकादशेश पहले ही पहुँचे हुए हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ होंगे | आप इस समय कार्य से सम्बन्धित नवीन चुनौतियाँ भी स्वीकार करने का साहस रखते हैं, जो आपके कार्य की दृष्टि से हित में ही रहेगा | किन्तु साथ ही उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | कोई कोर्ट केस अथवा कोई बीमारी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकती है | विशेष रूप से यदि आप महिला हैं तो आपको स्वास्थ्य की और से विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान भी अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | दाम्पत्य जीवन में कोई विवाद उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपके लिए आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में योगकारक बुध तथा भाग्येश के साथ होने जा रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है अथवा उसके कार्य में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी कराय की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उसके लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | किसी गम्भीर समस्या के कारण आपकी सन्तान को Hospitalize भी होना पड़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मकर : आपके लिए आपका पंचमेश और दशमेश होकर शुक्र आपके लिए योगकारक बनता है और आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर रहा है जहाँ आपका षष्ठेश, अष्टमेश और भाग्येश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए कार्य की तथा आर्थिक दृष्टि से निश्चित रूप से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सम्भव है आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीद लें अथवा खरीदने की योजना बना लें | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो आपके साथ कार्य कर रहे किसी व्यक्ति की ओर से प्रणय निवेदन प्राप्त हो सकता है जो विवाह में परिणत हो सकता है | पॉलिटिक्स से जिन लोगों का सम्बन्ध है उनके लिए, कलाकारों के लिए तथा प्रॉपर्टी अथवा टूर एण्ड ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय जिन लोगों का है उनके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | किसी प्रकार के कोर्ट केस में भी कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है |

कुम्भ : आपके लिए भी आपकी राशि से चतुर्थेश और नवमेश होकर शुक्र आपका योगकारक बनता है और आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है, जहाँ आपका पंचमेश, सप्तमेश और अष्टमेश पहले से ही गोचर कर रहे हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से आपकी भेंट किसी प्रभावशाली व्यक्ति से हो सकती है और उसके कारण आपको अपने कार्य में भी लाभ प्राप्त हो सकता है तथा आपके मान सम्मान में भी वृद्धि के संकेत हैं | रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो वह भी वापस प्राप्त हो सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है तथा आप सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में आपके चतुर्थेश, षष्ठेश और सप्तमेश के साथ गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | पराक्रम तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | किन्तु ऐसा कुछ मत बोलिए जिसके कारण किसी विवाद में फँसने की सम्भावना हो |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/09/venus-transit-in-aries/

 

मंगल का मिथुन में गोचर

मंगल का मिथुन राशि में गोचर

मंगलवार सात मई यानी वैशाख शुक्ल तृतीया है – यानी अक्षय तृतीया | जिसे भगवान् विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | सर्वप्रथम सभी को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

कल प्रातः 6:53 के लगभग तैतिल करण और अतिगण्ड योग में मंगल वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में राहु के साथ प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय मंगल मृगशिर नक्षत्र पर होगा | अपने इस गोचर के दौरान 17 मई को आर्द्रा नक्षत्र पर और सात जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में बाईस जून को रात्रि ग्यारह बजकर बाईस मिनट के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मिथुन राशि पर भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ कन्या राशि पर, धनु राशि पर तथा मकर राशि पर रहेंगी | मिथुन राशि से कन्या और धनु क्रमशः चतुर्थ व सप्तम भाव हैं और मकर राशि अष्टम भाव है | जबकि मंगल की अपनी राशि मेष से मिथुन तृतीय भाव और वृश्चिक से अष्टम भाव है | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है तथा आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की समभावना है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए अभी समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर आपकी कुण्डली के बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | आपकी सन्तान या तो किसी नए घर में निवास के लिए जा सकती है अथवा किसी अन्य शहर में बसने का मन बना सकती है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ तथा माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | हालाँकि कार्यस्थल पर किसी प्रकार का विरोध भी सम्भव है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का तनाव भी सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा लाभ स्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | पारिवारिक स्तर पर वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा किन्तु किसी घनिष्ठ मित्र के साथ किसी प्रकार का मनमुटाव इस अवधि में सम्भव है | साथ ही, यदि नौकरी में हैं अथवा पार्टनरशिप में कोई व्यवसाय है तो अधिकारीवर्ग से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों उन पर किसी प्रकार का दबाव डालने का प्रयास न करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना से सभी को एक बार पुनः अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/06/mars-transit-in-gemini/