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चैत्र नवरात्र 2020

चैत्र नवरात्र 2020 की तिथियाँ

बुधवार 25 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापना तथा माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ ही चैत्र नवरात्र या वासन्तिक नवरात्र या साम्वत्सरिक नवरात्र के रूप में माँ भवानी के नवरूपों की पूजा अर्चना आरम्भ हो जाएगी और इसी के साथ आरम्भ हो जाएगा “प्रमादी” नाम का विक्रम सम्वत 2077 तथा “शार्वरी” नाम का शालिवाहन शक सम्वत 1942 | सभी को भारतीय वैदिक नववर्ष की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

यों प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 24 मार्च को दिन में 2:59 के लगभग हो जाएगा और पच्चीस मार्च को दिन में पाँच बजकर अट्ठाईस मिनट तक रहेगी | 24 मार्च को सूर्योदय में प्रतिपदा तिथि नहीं होने के कारण घट स्थापना अगले दिन यानी 25 मार्च को की जाएगी | इस दिन सूर्योदय प्रातः छह बजकर उन्नीस मिनट पर है | इस समय सूर्य मीन राशि तथा उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर और चन्द्रमा मीन राशि तथा रेवती नक्षत्र पर होगा | बव करण और ब्रह्म योग होगा | शनि स्वराशिगत मकर में उच्च के मंगल के साथ रहेगा | प्रातः 6:19 से 7:17 घट स्थापना का मुहूर्त विद्वान् पण्डित लोगों ने बताया है | बुधवार होने के कारण इस दिन अभिजित नक्षत्र नहीं है, इसलिए इस नक्षत्र का लाभ उठाकर देर से घट स्थापना नहीं की जा सकती | किन्तु साथ ही व्यक्तिगत रूप से घट स्थापना का मुहूर्त जानने के लिए अपने Astrologer से अपनी कुण्डली के अनुसार मुहूर्त ज्ञात करना होगा | गुरूवार दो अप्रेल को कन्या पूजन के साथ ही विसर्जन हो जाएगा | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व और उगडी या युगादि की हार्दिक शुभकामनाएँ…

नवरात्रि के महत्त्व के विषय में विशिष्ट विवरण मार्कंडेय पुराण, वामन पुराण, वाराह पुराण, शिव पुराण, स्कन्द पुराण और देवी भागवत आदि पुराणों में उपलब्ध होता है | इन पुराणों में देवी दुर्गा के द्वारा महिषासुर के मर्दन का उल्लेख उपलब्ध होता है | महिषासुर मर्दन की इस कथा को “दुर्गा सप्तशती” के रूप में देवी माहात्मय के नाम से जाना जाता है | नवरात्रि के दिनों में इसी माहात्मय का पाठ किया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है | जिसमें 537 चरणों में सप्तशत यानी 700 मन्त्रों के द्वारा देवी के माहात्मय का जाप किया जाता है | इसमें देवी के तीन मुख्य रूपों – काली अर्थात बल, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा के द्वारा देवी के तीन चरित्रों – मधुकैटभ वध, महिषासुर वध तथा शुम्भ निशुम्भ वध का वर्णन किया जाता है | इस वर्ष नवरात्रों की तिथियाँ इस प्रकार हैं…

बुधवार 25 मार्च     चैत्र शुक्ल प्रतिपदा   देवी के शैलपुत्री रूप की उपासना

कलश स्थापना

गुरूवार 26 मार्च     चैत्र शुक्ल द्वितीया   देवी के ब्रह्मचारिणी रूप की उपासना

शुक्रवार 27 मार्च     चैत्र शुक्ल तृतीया    देवी के चन्द्रघंटा रूप की उपासना

शनिवार 28 मार्च    चैत्र शुक्ल चतुर्थी     देवी के कूष्माण्डा रूप की उपासना

रविवार 29 मार्च     चैत्र शुक्ल पञ्चमी    देवी के स्कन्दमाता रूप की उपासना

सोमवार 30 मार्च    चैत्र शुक्ल षष्ठी     देवी के कात्यायनी रूप की उपासना

मंगलवार 31 मार्च   चैत्र शुक्ल सप्तमी    देवी के कालरात्रि रूप की उपासना

बुधवार 1 अप्रेल     चैत्र शुक्ल अष्टमी    देवी के महागौरी रूप की उपासना

गुरूवार 2 अप्रेल     चैत्र शुक्ल नवमी     देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना

राम जन्म महोत्सव – राम नवमी

माँ भगवती सभी का कल्याण करें… सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व, उगडी या युगादि तथा नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/19/dates-for-chaitra-navratri-2020/

 

नक्षत्र – एक विश्लेषण

नक्षत्रों के आधार पर हिन्दी महीनों का विभाजन और उनके वैदिक नाम:-

ज्योतिष में मुहूर्त गणना, प्रश्न तथा अन्य भी आवश्यक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले पञ्चांग के आवश्यक अंग नक्षत्रों के नामों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ तथा पर्यायवाची शब्दों के विषय में हम पहले बहुत कुछ लिख चुके हैं | अब आरम्भ करते हैं कि किस प्रकार हिन्दी महीनों का विभाजन नक्षत्रों के आधार पर हुआ तथा उन हिन्दी महीनों के वैदिक नाम क्या हैं |

हम यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रत्येक हिन्दी माह में दो दो नक्षत्र होते हैं | केवल आश्विन, भाद्रपद और फाल्गुन ही ऐसे महीने हैं जिनमें प्रत्येक में तीन तीन नक्षत्र आते हैं | यहाँ हम प्रत्येक हिन्दी माह का वैदिक नाम प्रस्तुत कर रहे हैं… आज चैत्र और वैशाख माह…

चैत्र : चैत्र माह में दो नक्षत्र आते हैं – चित्रा और स्वाति तथा चित्रा नक्षत्र प्रधान होने के कारण इस माह का नाम चैत्र चैत्र नवरात्रपड़ा | इस माह का वैदिक नाम है मधु – स्पष्ट रूप से सभी जानते हैं कि मधु शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है मीठा, sophisticated, pleasant, tasteful. पुष्पों के पराग को भी मधु कहा जाता है | शहद अर्थात Honey को भी मधु कहते हैं | एक प्रकार का सोमरस मधु कहलाता है | अमृत के लिए मधु शब्द का प्रयोग हमारे साहित्यकार प्रायः करते हैं | दूध के लिए मधु शब्द का प्रयोग होता है | इसके साथ ही एक राक्षस का नाम भी मधु था, माँ भगवती की सहायता से भगवान विष्णु ने जिसका वध किया था | इसीलिए भगवान विष्णु का एक नाम भी माधव है | भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने भी मधु नाम के एक राक्षस का वध किया था जो लवणासुर का पुत्र था | ऐसी भी मान्यता है कि वर्तमान मथुरा शहर का नाम मथुरा (मधुरा) उस दैत्य के नाम पर पड़ा जो मथुरा के चारों ओर प्रसारित मधु नामक वन में रहा करता था | माना जाता है कि जो व्यक्ति इस माह में दिन में एक समय भोजन ग्रहण करता है तथा अनुशासित और संयमित जीवन व्यतीत करता है उसे हर प्रकार की सुख समृद्धि प्राप्त होती है | चैत्र नवरात्रों में एक समय भोजन ग्रहण करने तथा व्रत आदि का अनुष्ठान करने के पीछे भी सम्भवतः यह भी एक लोकमान्यता रही होगी |

वैशाख : इस माह में भी दो नक्षत्र होते हैं – विशाखा और अनुराधा तथा विशाखा नक्षत्र प्रमुख होने के कारण इसका बैसाखीनाम वैशाख पड़ा | इसका वैदिक नाम है माधव | इस माह में वसन्त ऋतु भी आती है | क्योंकि यह माह चैत्र अर्थात मधु के बाद आता है इसलिए भी इसे माधव कहा जाता है | वसन्त ऋतु को प्रेम तथा सौन्दर्य के देवता कामदेव का परम मित्र माना जाता है | माधव अर्थात मधु के समान मधुर | नींबू के रंग – Lemon Colour – को भी माधव कहा जाता है | मधु दैत्य के पुत्र का नाम, भगवान कृष्ण का नाम, इन्द्र तथा परशुराम का भी नाम माधव उपलब्ध होता है | मधु से बनी सुरा को भी माधव कहा जाता है | चैत्र माह के ही समान इस माह के विषय में भी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस माह में अनुशासित और संयमित जीवन व्यतीत करता है वह सब प्रकार की सुख समृद्धि प्राप्त करता है |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/04/constellation-nakshatras-31/