नक्षत्र – एक विश्लेषण

नक्षत्रों की योनियाँ

पिछले लेख में हमने नक्षत्रों की नाड़ियों पर बात की थी | सारे 27 नक्षत्र आद्या, मध्या और अन्त्या इन तीन नाड़ियों में विभक्त होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में नौ नक्षत्र होते हैं | नाड़ियों के साथ साथ योनियों में भी नक्षत्रों का वर्गीकरण होता है | प्रत्येक नक्षत्र एक विशेष योनि से सम्बन्ध रखता है अथवा एक विशेष योनि का प्रतिनिधित्व करता है | योनि शब्द का चिर परिचत अर्थ है गर्भाशय, उत्पत्ति का कारक तथा जन्म का वास्तविक स्थान | इसके अतिरिक्त किसी वर्ग विशेष या मनुष्यों की किसी विशिष्ट प्रजाति के लिए भी योनि शब्द का प्रयोग होता है | विवाह के लिए कुण्डली मिलान करते समय अष्टकूट गुणों का मिलान करते हुए नाड़ी दोष की ही भाँती योनि भी मिलाकर देखी जाती हैं | वर वधू दोनों की योनि या तो एक होनी चाहियें या फिर एक दूसरे के लिए अनुकूल होनी चाहियें | इसका कारण यह है कि योनि से मनुष्य के स्वभाव का भी कुछ भान हो जाता है | इसलिए माना जाता है कि अनुकूल या एक ही योनि रहने पर दोनों पक्षों के मध्य अनुकूलता बनी रह सकती है, वहीं यदि एक दूसरे से शत्रु योनि होगी तो परस्पर क्लेश रह सकता है | इस सबके पीछे मान्यता यही है कि संसार का प्रत्येक जीव किसी न किसी योनि से सम्बन्ध रखता है | किन्तु इस सबके विषय में विस्तार से चर्चा “विवाह” प्रकरण में करेंगे | अभी तो नक्षत्रों का योनियों में वर्गीकरण…

जैसा कि ऊपर लिख चुके हैं, ज्योतिषीय गणना के आधार पर 14 योनियों में अभिजित सहित 28 नक्षत्रों को विभाजित किया गया है, जो निम्नवत है:

अश्व योनि : अश्व अर्थात घोड़ा | भगवान सूर्य के रथ में साथ घोड़े लगे होने के कारण अश्व शब्द सात के अंक का भी पर्यायवाची माना जाता है | अश्विनी और शतभिषज नक्षत्र इस योनि के अन्तर्गत आते हैं |

गज योनि : गज अर्थात हाथी | किसी वस्तु की लम्बाई की माप | आठ के अंक का भी पर्यायवाची गज को माना जाता है | साथ ही एक राक्षस का नाम भी गज है जिसका वध भगवान शिव ने किया था | इस योनि के अन्तर्गत भरणी और रेवती नक्षत्र आते हैं |

मेष योनि : मेष अर्थात भेड़ | इस योनि के अन्तर्गत पुष्य और कृत्तिका नक्षत्रों को रखा गया है |

सर्प योनि : सर्प अर्थात साँप, धीरे धीरे सरकने वाला, बहता हुआ, आगे बढ़ता हुआ, लहराता हुआ, टेढ़ा मेढ़ा बलखाता हुआ आदि अर्थों में सर्प शब्द का प्रयोग होता है | वृक्ष को भी सर्प कहा जाता है | प्राचीन काल की एक जनजाति भी सर्प कहलाती थी | रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र इस योनि के अन्तर्गत आते हैं |

श्वान योनि : कुत्ते को श्वान कहा जाता है | मूल और आर्द्रा नक्षत्र इस योनि का प्रतिनिधित्व करते हैं |

मार्जार योनि : मार्जार अर्थात बिल्ली | आश्लेषा और पुनर्वसु नक्षत्र इस योनि में आते हैं |

मूषक योनि : मूषक – चूहा | चोर के लिए भी मूषक शब्द का प्रयोग किया जाता है | इस योनि के अन्तर्गत मघा और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र आते हैं |

गौ योनि : गौ – गाय | गौ शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत हैं | समस्त पशुओं के लिए भी गौ शब्द का प्रयोग किया जाता है | आकाश में चमकते तारकदल को भी गौ कहा जाता है | इसके अतिरिक्त आकाश, इन्द्र का विद्युत्पाश, आकाश में चमकती बिजली, प्रकाश की किरण, हीरा पत्थर, स्वर्गलोक, बाण आदि के लिए भी गौ शब्द का प्रयोग किया जाता है | वाणी और शब्दों को भी गौ कहते हैं | माता के लिए गौ शब्द का प्रयोग सर्वविदित ही है | दिक्सूचक यन्त्र यानी Compass के लिए भी गौ कहा जाता है | जल तथा आँखों के लिए भी यह शब्द प्रयुक्त होता है | उत्तर फाल्गुनी और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र इस योनि में रखे गए हैं |

महिष योनि : महिष अर्थात भैंस या भैंसा | महिष यानी भैंसे को धर्म तथा सन्तुलन के प्रतीक यमराज का वाहन भी माना जाता है | अत्यन्त धनाढ्य नरेश – जो कि बहुत से नरेशों का स्वामी हो – को भी महिष कहा जाता है | महिष एक आदरसूचक शब्द भी है जो किसी भी अपने से बड़े व्यक्ति अथवा सम्माननीय व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होता है | एक राक्षस का नाम भी महिष था जिसका संहार माँ दुर्गा ने किया था | महिष योनि में स्वाति और हस्त नक्षत्रों को रखा गया है |

व्याघ्र : व्याघ्र यानी सिंह | आदरसूचक शब्द भी है व्याघ्र, जो सर्वोत्तम अथवा सबसे अधिक सम्माननीय व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है | परिवार अथवा समाज अथवा राष्ट्र का मुखिया भी व्याघ्र कहलाता है | लाल रंग का अरण्डी का पौधा यानी Castor Oil Plant भी व्याघ्र कहलाता है | विशाखा और चित्रा नक्षत्र इस योनि में आते हैं |

मृग योनि : सामान्य रूप से किसी भी पशु के लिए मृग शब्द का प्रयोह किया जाता है, किन्तु विशेष रूप से हिरण को मृग कहा जाता है | जंगली जानवर और चन्द्रमा पर दीख पड़ने वाले काले धब्बे के लिए भी मृग शब्द का प्रयोग किया जाता है | अनुसरण करना, प्रयास करना, खोज करना, शिकार करना, परीक्षण करना आदि अर्थों में भी मृग शब्द का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है | एक विशेष प्रकार के हाथी को भी मृग कहा जाता है | व्यक्तियों का एक विशिष्ट वर्ग तथा एक प्राचीनकालीन जनजाति भी मृग कहलाती है | ज्येष्ठा और अनुराधा नक्षत्र इस योनि के अन्तर्गत आते हैं |

वानर योनि : नाम से ही स्पष्ट है – बन्दर | बन्दरों से सम्बन्धित समस्त प्रजातियाँ जैसे भालू, Chimpanzee, रीछ आदि भी वानर ही कहलाते हैं | रक्त-श्वेत पुष्पों से युक्त लोध्र वृक्ष को भी वनार की संज्ञा दी जाती है | पूर्वाषाढ़ और श्रवण नक्षत्रों को इस योनि के अन्तर्गत रखा गया है |

नकुल योनि : नकुल यानी नेवला | पुत्र के लिए तथा छोटे व्यक्ति या भाई के लिए भी नकुल शब्द का प्रयोग किया जाता है | इस योनि के अन्तर्गत आने वाले नक्षत्रों के नाम हैं उत्तराषाढ़ और अभिजित |

सिंह योनि : सर्वविदित अर्थ है – शेर | हिंसा शब्द से सिंह शब्द निरूपित हुआ है – जिसका अर्थ ही है किसी को मारना | इसके अतिरिक्त सबसे उत्तम वस्तु या व्यक्ति आदि के लिए तथा समाज के विशिष्ट रूप से सम्मानित वर्ग के लिए भी सिंह शब्द का प्रयोग होता है | पूर्वा भाद्रपद और धनिष्ठा नक्षत्र इस योनि में आते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/21/constellation-nakshatras-42/

 

Advertisements

नक्षत्र – एक विश्लेषण

नक्षत्रों की नाड़ियाँ

पिछले लेख में हमने बात की प्रत्येक नक्षत्र की संज्ञाओं और उनके आधार पर जातक के अनुमानित कर्तव्य कर्मों की | नक्षत्रों का विभाजन नाड़ी, योनि और तत्वों के आधार पर किया गया है | तो आज “नाड़ियों” पर संक्षिप्त चर्चा…

प्रत्येक नक्षत्र की अपनी एक नाड़ी होती है – या यों कह सकते हैं कि प्रत्येक नक्षत्र एक विशेष नाड़ी के अन्तर्गत आता है | ये नाड़ियाँ वास्तव में मानव शरीर के विशिष्ट प्रकार की प्रकृति यानी Constitution का प्रतिनिधित्व करती हैं | इन नाड़ियों का अध्ययन करके यह समझने का प्रयास किया जाता है कि जिस जातक की कुण्डली का हम निरीक्षण कर रहे हैं उस जातक की प्रकृति कफप्रधान यानी Phlegmatic है, या पित्त यानी Bile प्रधान है या वात यानी Air प्रधान है | जो लोग Medical Astrology करते हैं उनके लिए विशेष रूप से इन नाड़ियों का ज्ञान होना आवश्यक है क्योंकि इनके द्वारा रोगी की प्रकृति को समझकर उसके अनुसार उसके रोग का उपचार करने में सहायता प्राप्त होती है |

समय का एक भाग भी नाड़ी कहलाता है | भाचक्र की मध्य की खगोलीय रेखा यानी Celestial Equator भी नाड़ी कहलाती है | इसके अतिरिक्त गुलिका तथा सूर्य की किरण को भी नाड़ी कहा जाता है | मनुष्य के शरीर की नब्ज़ भी नाड़ी कहलाती है – जिसे हाथ से पकड़कर वैद्य रोगी के रोग की पहचान करता है | विवाह के समय दो व्यक्तियों की कुण्डली का मिलान करते हुए यदि नाड़ी दोष पाया जाता है तो या तो ज्योतिषी वहाँ विवाह की सलाह ही नहीं देते, और यदि देते भी हैं तो उसके लिए कुछ उपचार आदि भी बताते हैं | माना जाता है कि नाड़ी दोष में यदि विवाह कर दिया जाए – अर्थात दो व्यक्तियों की एक नाड़ी होने पर यदि विवाह कर दिया जाए – तो सन्तान के लिए हानिकारक होता है | किन्तु आज जब Medical Science इतनी तरक्क़ी कर चुकी है तो ऐसे में इन दोषों का कोई महत्त्व हमारे विचार से नहीं रह जाता | फिर भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा “विवाह” प्रकरण में…

नाड़ी मुख्यतया तीन होती हैं, जिनमें 27 नक्षत्रों का विभाजन किया गया है | अर्थात प्रत्येक नाड़ी के अन्तर्गत नौ नक्षत्र आते हैं | जो निम्नवत हैं –

आद्या नाड़ी – शरीर की वात प्रकृति या वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करती है | वात दोष से सम्बन्धित समस्याओं जैसे गठिया, आमवात, स्नायुतन्त्र से सम्बन्धित समस्या इत्यादि का ज्ञान इस नाड़ी से होता है | अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठ, मूल, शतभिषज और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र आद्या नाड़ी के अन्तर्गत आते हैं |

मध्या नाड़ी – पित्त प्रकृति अर्थात शरीर में अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है तथा पित्त दोष से सम्बन्धित समस्याओं का ज्ञान इस नाड़ी से होता है | भरणी, मृगशिर, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़, धनिष्ठा तथा उत्तर भाद्रपद नक्षत्र इस नाड़ी के अन्तर्गत आते हैं |

अन्त्या नाड़ी – यह नाड़ी मनुष्य के शरीर में कफ और जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है | कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़, श्रावण और रेवती नक्षत्र अन्त्या नाड़ी के अन्तर्गत आते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/20/constellation-nakshatras-41/

 

शुक्र का मेष राशि में गोचर

शुक्र का मेष राशि में गोचर

कल शुक्रवार, वैशाख शुक्ल षष्ठी को रात्रि सात बजकर छह मिनट के लगभग तैतिल करण और गण्ड योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | मेष राशि में भ्रमण करते हुए 21 मई को भरणी और पहली जून को कृत्तिका नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में चार जून को अपनी स्वयं की वृषभ राशि में चला जाएगा | वृषभ राशि से मेष राशि बारहवाँ भाव तथा शुक्र की दूसरी राशि तुला – जो कि शुक्र के लिए मूल त्रिकोण भी है – से मेष राशि सप्तम भाव है | जानने का प्रयास करते हैं कि शुक्र के मेष राशि में गोचर के समस्त राशियों पर सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है जहाँ आपकी राशि से तृतीयेश, पंचमेश तथा षष्ठेश का साथ उसे प्राप्त हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके आकर्षक व्यक्तित्व तथा वाणी से लोग प्रभावित होंगे और उसका लाभ आपको अपने कार्य तथा पारस्परिक सम्बन्धों में प्राप्त हो सकता है | आर्थिक स्थिति में इस अवधि में दृढ़ता की सम्भावना प्रतीत होती है | Alternative Healing अथवा रहस्य विद्याओं में आपकी रूचि बढ़ सकती है | किसी मनोनुकूल व्यक्ति से आपका सम्पर्क इस अवधि में हो सकता है जिसके साथ आप Romantically यदि कहीं Involve हो सकते हैं और यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | जीवन साथी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपकी राशि से द्वितीयेश, चतुर्थेश और पंचमेश भी वहीं गोचर कर रहे हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर तो सम्भव है आपको अपने कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि हो जाए और इन यात्राओं के माध्यम से आपको धन लाभ की सम्भावना की जा सकती है | वहीं दूसरी और इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | यदि कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो उसकी प्राप्ति इस अवधि में हो सकती है | आपका रूचि किसी प्रकार की रहस्य विद्याओं अथवा Alternative Healing की ओर बढ़ सकती है, जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है | अपनी वाणी पर संयम रखने की भी आवश्यकता है | परिवार में आनन्दपूर्ण वातावरण बना रहने की सम्भावना है | अपने तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है, जहाँ आपका योगकारक बुध तथा तृतीयेश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित छोटी छोटी विदेश यात्राओं की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | मित्रों तथा सहकर्मियों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है, किन्तु सम्भव है आपको घर से कहीं दूर जाना पड़े |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके द्वितीयेश तथा तृतीयेश और द्वादशेश के साथ आपकी राशि से कर्म स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं जिसके कारण आप अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम रहेंगे | आप कलाकार हैं, कवि हैं, डेंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं, ब्यूटीशियन हैं अथवा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं, टूर और ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय में, वक्ता हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में उन्नति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | सम्भव है आप अपने वर्तमान निवास को ही Renovate करा लें | परिवार में किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है, जहाँ आपका राश्यधिपति, द्वितीयेश तथा लाभेश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके पराक्रम में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कुछ नया कार्य आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं, यह कार्य आपको बहुत समय तक व्यस्त रख सकता है | कार्य तथा आय में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | सम्बन्धियों तथा मित्रों के साथ आमोद प्रमोद का समय भी प्रतीत होता है | सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा अथवा देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में भी वृद्धि हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में आपके द्वितीयेश, नवमेश तथा द्वादशेश के साथ हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ आपके लिए कार्य में प्रगति तथा उसके माध्यम से अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना की जा सकती है, किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी के लाभ की सम्भावना की जा सकती है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी, वहीं दूसरी ओर किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी सहकर्मी की ओर से आपका विरोध भी सम्भव है, अतः आँख और कान खुले रखने की आवश्यकता है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली बनी रहेगी, अपने कार्य में इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में भाग्येश, लाभेश तथा द्वादशेश के साथ होने जा रहा है | आपके और आपके जीवन साथी के लिए कार्य तथा अर्थलाभ की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अनेकों अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | Cosmetic और Medicine के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी यह समय अत्यन्त लाभप्रद प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | अविवाहित हैं तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा आपका कोई सहकर्मी आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध सकते हैं | किन्तु साथ ही प्रेम सम्बन्धों में तथा दाम्पत्य जीवन में तनाव की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है जहाँ आपका अष्टमेश, दशमेश और एकादशेश पहले ही पहुँचे हुए हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ होंगे | आप इस समय कार्य से सम्बन्धित नवीन चुनौतियाँ भी स्वीकार करने का साहस रखते हैं, जो आपके कार्य की दृष्टि से हित में ही रहेगा | किन्तु साथ ही उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | कोई कोर्ट केस अथवा कोई बीमारी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकती है | विशेष रूप से यदि आप महिला हैं तो आपको स्वास्थ्य की और से विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान भी अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | दाम्पत्य जीवन में कोई विवाद उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपके लिए आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में योगकारक बुध तथा भाग्येश के साथ होने जा रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है अथवा उसके कार्य में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी कराय की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उसके लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | किसी गम्भीर समस्या के कारण आपकी सन्तान को Hospitalize भी होना पड़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मकर : आपके लिए आपका पंचमेश और दशमेश होकर शुक्र आपके लिए योगकारक बनता है और आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर रहा है जहाँ आपका षष्ठेश, अष्टमेश और भाग्येश पहले से ही विद्यमान हैं | आपके लिए कार्य की तथा आर्थिक दृष्टि से निश्चित रूप से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सम्भव है आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीद लें अथवा खरीदने की योजना बना लें | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो आपके साथ कार्य कर रहे किसी व्यक्ति की ओर से प्रणय निवेदन प्राप्त हो सकता है जो विवाह में परिणत हो सकता है | पॉलिटिक्स से जिन लोगों का सम्बन्ध है उनके लिए, कलाकारों के लिए तथा प्रॉपर्टी अथवा टूर एण्ड ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय जिन लोगों का है उनके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | किसी प्रकार के कोर्ट केस में भी कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है |

कुम्भ : आपके लिए भी आपकी राशि से चतुर्थेश और नवमेश होकर शुक्र आपका योगकारक बनता है और आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है, जहाँ आपका पंचमेश, सप्तमेश और अष्टमेश पहले से ही गोचर कर रहे हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से आपकी भेंट किसी प्रभावशाली व्यक्ति से हो सकती है और उसके कारण आपको अपने कार्य में भी लाभ प्राप्त हो सकता है तथा आपके मान सम्मान में भी वृद्धि के संकेत हैं | रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो वह भी वापस प्राप्त हो सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है तथा आप सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में आपके चतुर्थेश, षष्ठेश और सप्तमेश के साथ गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | पराक्रम तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | किन्तु ऐसा कुछ मत बोलिए जिसके कारण किसी विवाद में फँसने की सम्भावना हो |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/09/venus-transit-in-aries/

 

बुध का मेष राशि में गोचर

बुध का मेष राशि में संक्रमण 2019

शुक्रवार तीन मई वैशाख कृष्ण चतुर्दशी को सायं पाँच बजकर तीन मिनट के लगभग शकुनि करण और प्रीति योग में बुध मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | मेष राशि पर भ्रमण करते हुए बुध 11 मई को भरणी नक्षत्र तथा 17 मई को कृत्तिका नक्षत्र पर भ्रमण करेगा, और अन्त में कृत्तिका नक्षत्र पर ही भ्रमण करते हुए 18 मई को रात्रि ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट के लगभग अपने मित्र गृह शुक्र की वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच नौ मई से बुध अस्त भी रहेगा | बुध की अपनी राशि मिथुन से मेष राशि एकादश भाव तथा कन्या से अष्टम भाव बन जाती है | जबकि मेष राशि के लिए बुध तृतीयेश और षष्ठेश है | मेष राशि पर भ्रमण करते हुए बुध की दृष्टि अपने मित्र ग्रह शुक्र की तुला राशि पर रहेगी और तुला राशि के लिए बुध नवमेश तथा द्वादशेश है | अस्तु, इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए सभी राशियों पर बुध के मेष राशि में होने वाले गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात करते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपके लिए बुध तीसरे और छठे भावों का स्वामी होकर लग्न में गोचर कर रहा है | आपके लिए इसका मिश्रित फल हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के साथ आपके सम्बन्धों में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो सकता है | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | हाथ के कारीगरों को, कलाकारों को, डॉक्टर वैद्यों को, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को, स्पोर्ट्स से सम्बद्ध लोगों को लाभ होने की सम्भावना है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य की और से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों और माँसपेशियों में अकडन या दर्द का अनुभव इस अवधि में हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति होकर आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो भी आपको बाहर से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा सकती है | आप भी उच्च शिक्षा के लिए अथवा संगोष्ठियों आदि में भाग लेने के लिए विदेश अथवा किसी अन्य शहरों की यात्राएँ कर सकते हैं | किन्तु जिस तरह आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना है उसी प्रकार आपके खर्च भी बढ़ सकते हैं, अतः बजट बनाकर चलेंगे तो इस स्थिति से बच सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए बुध लग्नेश और चतुर्थेश होकर योगकारक है | आपकी लग्न से यह लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से यह भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | पहले से रुके हुए कार्य बन सकते हैं | व्यापार में उन्नति तथा नौकरी में हैं पदोन्नति के साथ साथ किसी प्रकार के पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | बड़े भाई, मित्रों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग इस अवधि में आपको प्राप्त होता रहेगा | परिवार में आनन्द का वातावरण रहने की सम्भावना है | आप नया घर भी खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान आवास को ही Renovate करा सकते हैं |

कर्क : कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध आपकी लग्न से कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | आरम्भ में कार्य में व्यवधान भी उपस्थित हो सकते हैं, किन्तु अन्त में अपनी बुद्धि के बल पर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकने में समर्थ हो सकते हैं | कार्य के सिलसिले में आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा | कफ से सम्बन्धित अथवा जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | आपके भाई बहनों के लिए भाग्योदय का समय प्रतीत होता है |

सिंह : आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | आपकी वाणी तथा लेखन का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा और आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | आपके पिता तथा मित्रों का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त होता रहेगा |

कन्या : आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ आपके कार्य में बाधक बन सकती हैं अतः अपने खान पर नियन्त्रण रखने तथा नियमित व्यायाम करने की आवश्यकता है | सहकर्मियों का तथा मित्रों का साथ आपको उपलब्ध रहेगा जिसके कारण आपका उत्साहवर्धन होगा | अचानक ही आपको कोई नया कार्य भी प्राप्त हो सकता है जो आपको लम्बे समय तक व्यस्त रख सकता है तथा कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि हो सकती है |

तुला : आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश है तथा आपके राश्यधिपति शुक्र का मित्र ग्रह होकर आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपका जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका किसी दूसरे शहर अथवा विदेश में निवास करते हैं तो इस अवधि में उनकी घर वापसी भी सम्भव है | साथ ही अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी रूचि धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है | सामाजिक मान प्रतिष्ठा में वृद्धि की भी सम्भावना है |

वृश्चिक : आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके छठे भाव में गोचर करने जा रहा है | एक ओर जहाँ आपके स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता, वहीं दूसरी ओर यदि किसी प्रकार का कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना तथा उसके द्वारा आपको लाभ की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आर्थिक दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द और पित्त तथा ज्वर आदि की समस्याओं से बचने के लिए उचित व्यायाम तथा खान पान पर ध्यान देने की आवश्यकता है |

धनु : धनु राशि के लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा इस समय आपकी लग्न से पंचम भाव में गोचर करने वाला है | एक ओर आपकी निर्णायक क्षमता में वृद्धि की सम्भावना है, जिसके कारण आपके व्यवसाय में प्रगति होगी | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना है | नए प्रोजेक्ट्स मिलने के कारण आप बहुत अधिक व्यस्त हो सकते हैं | वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं |

मकर : बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आरम्भ में कुछ समय तक परिवार में किसी प्रकार के तनाव का सामना करना पड़ सकता है | हो सकता है परिवार में कोई प्रॉपर्टी से सम्बन्धित विवाद इस समय उग्र हो जाए | किन्तु धीरे धीरे स्थितियाँ सामान्य हो सकती हैं | आपकी माता जी के स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता | मानसिक तनावों के कारण सम्भव है आपकी रूचि धार्मिक कार्यों में बढ़ जाए | आपको पेट से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है अतः खान पान पर ध्यान देना आवश्यक है |

कुम्भ :  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके पराक्रम में वृद्धि की सम्भावना है | अचानक ही आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभदायक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई उत्साहवर्द्धक समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | किन्तु अपने छोटे भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ कोई भी बहस बड़ा रूप लेकर कोर्ट तक पहुँच सकती है, अतः इस स्थिति से बचने का प्रयास करें |

मीन : आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपको तथा आपके जीवन साथी को कार्य के सिलसिले में दूर पास की यात्राओं में वृद्धि हो सकती है | इन यात्राओं में आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है | आप सपरिवार भ्रमण के लिए भी जा सकते हैं | सम्भव है आप किसी दूसरे शहर में अथवा कहीं विदेश में निवास की ही योजना बना लें | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/02/mercury-transit-in-aries/

 

गुरु का धनु में गोचर

ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, पिता, गुरु, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख आदि के कारक बृहस्पति ने 11 अक्टूबर 2018 को वृश्चिक राशि में प्रस्थान किया था | गुरु एक ही राशि में लगभग एक वर्ष तो विश्राम करते ही हैं, किन्तु वक्री अथवा मार्गी होने के कारण इस अवधि में कुछ अन्तर भी आ जाता है | इस बार भी ऐसा ही हो रहा है | लगभग साढ़े पाँच माह वृश्चिक में भ्रमण करने के बाद गुरुदेव कल शुक्रवार चैत्र कृष्ण नवमी यानी 29 मार्च को रात्रि आठ बजकर सात मिनट के लगभग गर करण और शिव योग में अपनी स्वयं की राशि धनु तथा मूल नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएँगे लगभग एक माह के लिए | इस बीच 10 अप्रेल से वक्री होता हुआ गुरु 23 अप्रेल को पुनः वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र पर पहुँच जाएगा | यहाँ लगभग साढ़े छह माह भ्रमण करने के बाद पाँच नवम्बर को पुनः वापस धनु राशि और मूल नक्षत्र में आ जाएगा |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका नवमेश और द्वादशेश होकर गुरु आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | यह समय आपके कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | कार्यक्षेत्र में तथा समाज में मान सम्मान के संकेत हैं | इस लगभग एक माह के समय में आप अपने समस्त रुके हुए कार्य भी पूर्ण कर सकते हैं | परिवार में विवाह अथवा किसी शिशु के जन्म के कारण नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | कुछ मनोरंजक यात्राओं के अथवा तीर्थ यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रुझान बढ़ सकता है | यदि आप किसी प्रकार की रहस्य विद्याओं के ज्ञाता हैं, कोई शोध कार्य कर रहे हैं, किसी प्रकार की Alternative Healing Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका अष्टमेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | पैसे के लेन देन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है | आप यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि किसी कारणवश करना भी पड़ जाए तो बहुत सोच विचार के बाद ही आगे बढें | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान भी सम्भव है | किसी से नई नई मित्रता हुई है तो उस पर विश्वास करना आपके हित में नहीं रहेगा | नौकरी में हैं तो बॉस से किसी प्रकार की बहस आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है | किन्तु साथ ही किसी अप्रत्याशित स्थान अथवा माध्यम से आपके लिए अर्थलाभ की भी सम्भावना है | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : गुरु आपका योगकारक ग्रह है और आपकी राशि से सप्तम भाव में विचरण कर रहा है | यदि आपका कार्य पार्टनरशिप में है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य के अनेक नवीन अवसर आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं – यदि आपने समझदारी से निर्णय लिया तो बहुत समय तक आप इन कार्यों में व्यस्त रहते हुए धनलाभ कर सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही कार्यस्थल पर भी वातावरण अनुकूल बना रहेगा | परिवार में भी सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहेगा, किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए गुरु षष्ठेश तथा भाग्येश है और आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु आपके पराक्रम और निर्णायक क्षमता में वृद्धि का समय होने के कारण आप अपने विरोधियों को परास्त करने में भी सक्षम हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस अथवा स्वास्थ्य के कारण मानसिक तनाव की भी सम्भावना है | स्वास्थ्य अथवा लीगल समस्याओं के कारण पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का प्रयास करें | कार्य से सम्बन्धित दूर पास की यात्राओं के भी संकेत हैं, किन्तु सम्भव है इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए | अपने साथ अथवा अपने घर या ऑफिस में कार्य कर रहे लोगों पर ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | अन्धविश्वास हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं अथवा नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

सिंह : आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर गुरु आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही नवीन सम्पर्क भी बनेंगे जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | ज्ञान में वृद्धि के साथ ही दार्शनिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में भी आपका रुझान बढ़ सकता है | सम्भव है आप बहुत दिनों से कोई नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना बना रहे हों, इस एक माह की अवधि में आप इस योजना को क्रियान्वित भी कर सकते हैं | परिवार में किसी शिशु के जन्म की भी सम्भावना है | आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए भी किसी अच्छे संस्थान में एडमीशन ले सकते हैं | किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस अथवा उसके प्रति सन्देह के स्वभाव की आपको त्यागना होगा | अविवाहित हैं इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

कन्या : आपके लिए गुरु योगकारक ग्रह है तथा आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | शनि तथा केतु-राहु के प्रभाव के कारण इस अवधि में आपको मिश्रित फल प्राप्त होने की सम्भावना है | एक ओर आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन खरीद सकते हैं | कार्य का जहाँ तक प्रश्न है तो आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनसे आपको बहुत समय तक अर्थलाभ भी होता रह सकता है | वहीं दूसरी ओर परिवार में – विशेष रूप से अपनी माता जी अथवा किसी बुज़ुर्ग महिला के कारण अथवा कार्य स्थल पर किसी प्रकार के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों या जिनसे आप सहमत न हों उनसे एक दूरी बनाकर रहें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

तुला : आपका तृतीयेश और षष्ठेश होकर गुरु का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर बहुत अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | छोटी छोटी यात्राओं की सम्भावना है | ये यात्राएँ आपके कष्टकारी भी सिद्ध हो सकती हैं | यदि आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | इस अवधि में आप अपना निवास स्थान भी बदल सकते हैं अथवा नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर भी सम्भव है | किन्तु जहाँ भी आप शिफ्ट करें सम्भव है वह स्थान आपके लिए अनुकूल न सिद्ध हो | छोटे भाई बहनों के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | समय रहते यदि यह विवाद नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | हाँ यदि आप किसी नौकरी की तलाश में हैं वह तलाश आपकी पूर्ण हो सकती है | यह नौकरी भी सम्भव है आपके मन के अनुकूल न मिले | लेकिन इस समय इस Job को Accept करना ही आपके लिए उचित रहेगा |

वृश्चिक : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | इस लगभग एक माह की अवधि में परिवार में किसी मांगलिक कार्य के सम्पन्न होने की सम्भावना है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | कार्य की कुछ नवीन Opportunities इस अवधि में आपके समक्ष प्रतुत हो सकती हैं, इस अवधि में यदि आप उन्हें स्वीकार कर लेते हैं तो बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो वह भी पूर्ण होकर प्रकाशन के लिए जा सकता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए भी यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का प्रदर्शन प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा रहने की सम्भावना है | यदि आप अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य बने रहने की सम्भावना है | आपको अपनी वाणी और Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका राश्यधिपति और चतुर्थेश होकर गुरु आपके लिए योगकारक ग्रह है और आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए आत्मविश्वास में वृद्धि तथा कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा नौकरी में हैं तो उसमें पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | इस अवधि में आप कुछ नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं | यह कार्य आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत हैं तो उसमें भी आशानुरूप सफलता की सम्भावना की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी मधुरता बनी रहेगी | किन्तु, ध्यान रहे, आपके स्वभाव में क्रोध में वृद्धि हो सकती जो सम्बन्धों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है – अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पॉलिटिक्स से सम्बन्धित लोगों के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही खर्च भी अधिक होने की सम्भावना है | छोटे भाई बहनों के साथ विवाद के कारण भी धन का अपव्यय सम्भव है | अच्छा यही रहेगा इस समय अपने मन की शान्ति बनाए रखने के लिए बहुत सी अप्रिय बातों पर ध्यान ही न दें | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई ऐसा कोर्ट केस भी इस अवधि में खुल सकता है जो बहुत समय से आपको लगता है बन्द पड़ा था | साथ ही किसी पुरानी बीमारी के भी फिर से उभर आने की सम्भावना है | अच्छा यही रहेगा कि समय पर अपना पूरा चेकअप कराएं और डॉक्टर के दिशा निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें | परिवार में अकारण ही क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | यदि ऐसा होता है तो किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को समय पर सुलझाने का प्रयास करें |

कुम्भ : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से लाभ स्थान में होने जा रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | व्यवसाय में उन्नति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की सम्भावना भी है | आपको अपने पिताम बड़े भाई तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त रहेगा जिसके कारण आप अपने समस्त कार्य सुचारू रूप से करने में समर्थ हो सकेंगे | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह समय अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कुछ समय से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है तो इस अवधि में उसमें भी सुधार की सम्भावना की जा सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु इसके साथ ही आपको अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की भी आवश्यकता है | साथ ही अकारण ही बॉस से पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

मीन : आपके लिए योगकारक गुरु का गोचर आपके कर्म स्थान में हो रहा है | निश्चित रूप से बड़ा भाग्यशाली समय प्रतीत होता है | इस अवधि में आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के साथ ही अर्थलाभ की सम्भावना भी है | नौकरी में हैं तो उसमें सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कार्य क्षेत्र में यद्यपि कुछ विरोध के स्वर मुखर हो सकते हैं, किन्तु आप अपने बुद्धिबल से स्वयं ही उस विरोध को शान्त करने में समर्थ हो सकते हैं | आप नया घर खरीद कर उसमें शिफ्ट हो सकते हैं | किन्तु यदि कहीं पैसा Invest करना हो भली भाँती सोच समझकर ही आगे बढें | घर परिवार में सुख शान्ति का वातावरण बना रह सकता है | मित्रों तथा परिवारजनों के साथ आमोद प्रमोद में समय ब्यतीत हो सकता है | परुवार में किसी का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किसी पुराने रोग से मुक्ति की सम्भावना है, किन्तु साथ ही कोई अन्य नवीन समस्या भी स्वास्थ्य के सम्बन्ध में उत्पन्न हो सकती है | अपने खान पान पर नियन्त्रण तथा जीवन शैली में बदलाव आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर तथा उनके मार्गी, वक्री अथवा अतिगामी होने का क्रम तो अपने नियत समय पर चलता ही रहेगा | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/03/28/jupiter-transit-in-sagittarius/

 

 

नक्षत्र – एक विश्लेषण

नक्षत्रों के तारकसमूह, देवता, स्वामी ग्रह, संज्ञा तथा विभिन्न राशियों में उनका प्रस्तार 

पिछले लेख में बात कर रहे थे कि 27 नक्षत्रों में प्रत्येक नक्षत्र में कितने तारे (Stars) होते हैं, प्रत्येक नक्षत्र के देवता (Deity) तथा स्वामी अथवा अधिपति ग्रह (Lordship) कौन हैं कौन हैं, प्रत्येक नक्षत्र को क्या संज्ञा दी गई है | नक्षत्रों की संज्ञा से उनकी प्रकृति का भी कुछ अनुमान हो जाता है | साथ ही यह भी बताने का प्रयास कर रहे थे कि विभिन्न राशियों में कितने अंशों तक किस नक्षत्र का प्रस्तार होता है | इस क्रम में अश्विनी नक्षत्र से लेकर आश्लेषा नक्षत्रों के विषय में हम बात कर चुके हैं | आज उससे आगे…

मघा : इस नक्षत्र में भी पाँच तारे होते हैं | इसका देवता भग को तथा स्वामी ग्रह सूर्य को माना जाता है | इसकी संज्ञा उग्र है और सिंह राशि के आरम्भ से लेकर 13°20’ अंशों तक इसका विस्तार होता है |

पूर्वा फाल्गुनी : इस नक्षत्र में दो तारे होते हैं | इसका देवता है अर्यमा तथा शुक्र इसका अधिपति ग्रह है | इसकी संज्ञा भी उग्र है और इसका प्रस्तार सिंह राशि में 13°20’ से लेकर 26°40’ अंशों तक होता है |

उत्तर फाल्गुनी : इस नक्षत्र में भी दो ही तारे होते हैं | इसका देवता रवि (सूर्य का ही एक रूप) को माना गया है तथा सूर्य को इसका स्वामित्व प्राप्त है | ध्रुव संज्ञक यह नक्षत्र सिंह राशि में 26°40’ से लेकर 30° अंशों तक तथा कन्या में शून्य से दस अंशों तक रहता है |

हस्त : पाँच तारों से युक्त इस नक्षत्र के देवता त्वष्टा को तथा अधिपति ग्रह चन्द्र को माना गया है | लघु प्रकृति के इस नक्षत्र का विस्तार कन्या राशि में दस अंशों से लेकर 23°20’ अंशों तक रहता है |

चित्रा : इस नक्षत्र में चित्रा नाम का केवल एक ही तारा होता है | इसका देवता वायु को माना गया है और मंगल को इसका स्वामित्व प्राप्त है | मृदु संज्ञा वाले इस नक्षत्र का प्रस्तार कन्या राशि में 23°20’ से लेकर 30° अंशों तक तथा तुला राशि में आरम्भ से लेकर 6°40’ अंशों तक रहता है |

स्वाति : इस नक्षत्र में भी एक ही तारा होता है | इन्द्राग्नि को इसका देवता तथा राहु को इसका अधिपति ग्रह माना गया है | इसकी संज्ञा चर है तथा तुला राशि में इसका विस्तार 6°40’ से लेकर बीस अंशों तक होता है |

विशाखा : इस नक्षत्र में चार तारे होते हैं | इसका देवता मित्र है तथा अधिपति ग्रह है गुरु | मृदुतीक्ष्ण संज्ञा वाला यह नक्षत्र तुला राशि में 6°40’ से लेकर 20°30’ अंशों तक रहता है और वृश्चिक राशि में आरम्भ से लेकर 3°20 अंशों तक रहता है |

अनुराधा : इस नक्षत्र में तीन तारे होते हैं | इसका देवता है इन्द्र तथा अधिपति ग्रह है शनि | मृदु संज्ञा वाला यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में 3°20’ अंश से लेकर 16°40’ अंशों तक विस्तार पाता है |

ज्येष्ठा : इस नक्षत्र में भी तीन ही तारे होते हैं | नैऋति इसका देवता माना जाता है तथा बुध को इसका अधिपतित्व प्राप्त है | तीक्ष्ण संज्ञा वाले इस नक्षत्र का प्रस्तार वृश्चिक राशि में 16°40’ से लेकर अन्त तक यानी तीस अंशों तक रहता है |

मूल : इस नक्षत्र में 11 तारे एक मूल यानी वृक्ष की जड़ के रूप में विद्यमान होते हैं | इसका देवता है जल तथा अधिपति ग्रह है केतु | इसकी संज्ञा है तीक्ष्ण तथा धनु राशि में आरम्भ से लेकर 13°20’ अंशों तक इसका प्रस्तार होता है |

पूर्वाषाढ़ : इसमें चार तारे होते हैं | इसके देवता हैं विश्वेदेव तथा अधिपति ग्रह है शुक्र | इसकी संज्ञा है उग्र तथा यह धनु राशि में 13°20’ से 26°40’ तक विद्यमान रहता है |

उत्तराषाढ़ : इसमें भी चार तारे होते हैं | ब्रह्मा इसके देवता हैं तथा सूर्य इसका अधिपति ग्रह है | ध्रुव संज्ञा वाला यह नक्षत्र धनु राशि में 26°40’ अंशों से लेकर राशि के अन्त तक और उसके बाद मकर राशि के आरम्भ से लेकर दस अंशों तक रहता है |

श्रवण : इसमें तीन तारे होते हैं | विष्णु इसके देवता हैं तथा चन्द्रमा इसका अधिपति ग्रह है | चर संज्ञक यह नक्षत्र मकर राशि में दस अंशों से लेकर 23°20’ अंशों तक विस्तार पाता है |

धनिष्ठा : इस नक्षत्र में चार तारे होते हैं | वसु इसके देवता तथा मंगल इसका अधिपति ग्रह है | इसकी संज्ञा भी चर है तथा मकर राशि में 23°20’ अंशों से लेकर राशि के अन्त तक और कुम्भ राशि में आरम्भ से लेकर 6°40’ अंशों तक वियमान रहता है |

शतभिषज : नाम से ही स्पष्ट है – इस नक्षत्र में सबसे अधिक सौ तारे विद्यमान होते हैं | वरुण को इसका देवता माना गया है तथा राहु को इसका स्वामित्व प्राप्त है | इसकी संज्ञा भी चर है और कुम्भ राशि में इसका प्रस्तार 6°40’ अंश से लेकर बीस अंशों तक रहता है |

पूर्वा भाद्रपद : इस नक्षत्र में दो तारे होते हैं | अजापद को इसका देवता माना जाता है तथा गुरु इसका स्वामी ग्रह माना जाता है | इसकी संज्ञा उग्र है तथा इसका प्रस्तार कुम्भ राशि में बीस अंशों से लेकर राशि के अन्त तक और मीन राशि में उसके आरम्भ से लेकर 3°20’ अंशों तक रहता है |

उत्तर भाद्रपद : इस नक्षत्र में पाँच तारे होते हैं | अहिर्बुन्ध्य इसका देवता है और शनि इसका स्वामी ग्रह है | इसकी संज्ञा है ध्रुव तथा मीन राशि में इसका विस्तार 3°20’ अंश से लेकर 16°40’ अंशों तक रहता है |

रेवती : बतीस तारों के समूह से युक्त इस नक्षत्र का देवता पूषा को माना गया है तथा बुध को इसका स्वामित्व प्राप्त है | इसकी संज्ञा है मृदु और मीन राशि में 16°40’ अंशों से लेकर राशि के अन्त तक यह विद्यमान रहता है |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/02/13/constellation-nakshatras-38/

सूर्य का कुम्भ राशि में संक्रमण

बुधवार 13 फरवरी माघ शुक्ल अष्टमी को प्रातः आठ बजकर 49 मिनट के लगभग बव करण और ब्रह्म योग में सूर्यदेव मकर राशि में अपना भ्रमण पूर्ण करके कुम्भ राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | जहाँ वे शुक्रवार 15 मार्च को प्रातः 5:40 तक विचरण करने के बाद मीन राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | अपनी इस यात्रा के दौरान भगवान भास्कर 19 फरवरी तक धनिष्ठा नक्षत्र पर, उसके बाद 5 मार्च तक शतभिषज पर और अन्त में पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर भ्रमण करेंगे | इस यात्रा के दौरान सूर्य पर निरन्तर अपने राश्यधिपति शनि की दृष्टि रहेगी | सूर्य का गोचर इस समय सूर्य की अपनी उच्च राशि मेष से ग्यारहवें भाव में हो रहा है – जो मेष राशि के लिए लाभ स्थान है, तथा अपनी राशि सिंह से सप्तम भाव में गोचर करेंगे | इन दोनों राशियों के जातको के लिए निश्चित रूप से यह अवधि शुभ फल देने वाली कही जा सकती है | आइये जानने का प्रयास करते हैं सूर्य के कुम्भ में गोचर के सभी राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : जैसा ऊपर ही लिखा है, मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर शुभ फलदायी प्रतीत होता है | मेष सूर्य की उच्च राशि है और कुम्भ राशि वहाँ से ग्यारहवें भाव में आती है | ग्यारहवाँ भाव लाभ का भाव कहलाता है | इस अवधि में आपको इस प्रकार के लाभ हो सकते हैं जिनके लिए आप बहुत समय से प्रतीक्षारत थे | आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी आर्थिक स्थति भी पहले से मज़बूत हो सकती है | आपके मित्र, अधिकारीगण आपके अनुकूल रहेंगे तथा उनका सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा | आपकी पदोन्नति भी हो सकती है और किसी प्रकार का सम्मान, पुरूस्कार आदि भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | सिंह आपका पंचम भाव है सन्तान के विवाह के लिए चिन्तित हैं तो इस अवधि में उस चिन्ता से भी मुक्ति प्राप्त हो सकती है | साथ ही धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | आपके पिता के लिए भी यह गोचर भाग्यशाली प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका चतुर्थेश होकर सूर्य आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | सूर्य के इस गोचर के दौरान वृषभ राशि के जातकों के पारिवारिक जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं | आप जिस घर में हैं उसे बेचकर कोई नया घर ख़रीद सकते हैं | यदि आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय में तो उसमें भी आपके लिए लाभ की आशा की जा सकती है | आपके जीवन साथी के लिए भी यह समय आर्थिक दृष्टि से अनुकूल प्रतीत होता है | विदेशों से भी धनलाभ की आशा की जा सकती है | हाँ स्वास्थ्य की दृष्टि से सावधान रहने की आवश्यकता है | पेट अथवा लिवर आदि से सम्बन्धित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : मिथुन राशि के जातकों के लिए भी सूर्य का यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आपके लिए आपका तृतीयेश होकर सूर्य भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो इस दौरान आपकी योजनाओं का लाभ आपको प्राप्त हो सकता है | साथ ही धार्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | किन्तु अष्टमेश शनि के प्रभाव को भी नकारा नहीं जा सकता | आपको कुछ गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने के लिए अपनी आँखें और कान खुले रखकर कार्य करना होगा | कोई ऐसा व्यक्ति आपके साथ धोखा कर सकता है जिस पर आप बहुत अधिक विश्वास रखते हैं | इसके अतिरिक्त पिता के साथ भी किसी प्रकार का मतभेद हो सकता है अथवा पिता का स्वास्थ्य आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | छोटे भाई बहनों के लिए समय अनुकूल प्रतीत होता है | सम्भव है इस अवधि में आपके छोटे भाई बहनों में सी किसी का विवाह सम्बन्ध भी पक्का हो जाए |

कर्क : आपके लिए सिंह द्वितीय भाव है और वहाँ का स्वामी होकर सूर्य अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लये यह गोचर उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके लिए किसी प्रकार की आर्थिक हानि होने की सम्भावना प्रतीत होती है | इस स्थिति में आपके जीवन साथी के पिता की ओर से आपको सहायता प्राप्त हो सकती है | साथ ही परिवार में किसी प्रकार का विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपकी मानसिक शान्ति भंग हो सकती है | परिवार का कोई बुज़ुर्ग व्यक्ति आपके विरुद्ध हो सकता है और उसे मनाने के लिए आपको कोई ऐसा कार्य करना पड़ सकता है जिसके कारण आपके सम्मान को ठेस पहुँच सकती है | अकारण ही यात्रा करनी पड़ सकती है | खान पान में सावधानी नहीं रखेंगे तो स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है | किन्तु इस सब बातों से घबराने की आवश्यकता नहीं है | अपने विचार सकारात्मक रखेंगे और भगवान भास्कर को प्रतिदिन अर्घ्य समर्पित करेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

सिंह : आपके लिए लग्न का अधिपति होकर सूर्य आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | लाभदायक समय प्रतीत होता है | इस अवधि में आर्थिक लाभ की सम्भावना प्रतीत होती है | रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | कोई नया कार्य भी आप आरम्भ कर सकते हैं जो भविष्य में आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | आपके सम्मान में वृद्धि तथा कुछ पुरूस्कार आदि प्राप्त होने की भी सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो कोई ऐसा व्यक्ति आपको मिल सकता है जिसके साथ आप जीवन व्यतीत करने का निश्चय कर लेंगे और आपका विवाह सम्बन्ध पक्का हो सकता है | किन्तु साथ ही यदि विवाहित हैं तो दामपत्य जीवन में आपके बढे हुए क्रोध के कारण तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है | साथ ही आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य भी चिन्ता का विषय हो सकता है | यदि पार्टनरशिप में कोई कार्य करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं है, अतः उस विचार को कुछ समय के लिए स्थगित करना ही हित में होगा | अपने स्वभाव की उग्रता पर नियन्त्रण रखने के लिए नित्य सूर्य को अर्घ्य प्रदान करें तथा ध्यान और प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास करें |

कन्या : आपका द्वादशेश होकर सूर्य आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके विरोधियों के लिए समय प्रतिकूल जान पड़ता है | सूर्य के प्रभाव से आप अपने विरोधियों पर भारी पड़ सकते हैं | यदि किसी प्रकार का कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी प्रगति की अथवा अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना की जा सकती है | किसी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं अथवा नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना है | स्पोर्ट्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | इस अवधि में आप अपने लक्ष्य को बड़ी सहजता से प्राप्त कर सकते हैं | विदेश यात्राओं में आपको लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है तथा कुछ नए सम्बन्ध भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको निरन्तर नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त होते रह सकते हैं और उनसे आपकी आर्थिक स्थिति भी निरन्तर दृढ़ होती रह सकती है | स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी प्रकार के इन्फेक्शन अथवा ज्वर आदि से पीड़ित हो सकते हैं |

तुला : आपका एकादशेश होकर सूर्य आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त लाभकारी तथा अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना है | आपकी पदोन्नति के भी अवसर प्रतीत होते हैं जिसके कारण आपको आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा | आपके अधिकारी गण आपसे प्रसन्न रहेंगे | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | आप अपनी बुद्धि तथा उचित दिशा में किये गए प्रयासों के बल से अपने लक्ष्य को इस अवधि में प्राप्त कर सकते हैं | किन्तु छात्रों के लिए समय अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | उन्हें सफलता प्राप्ति के लिए परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | आपके उग्र स्वभाव के कारण आपके दाम्पत्य जीवन में तनाव हो सकता है अतः अपने स्वभाव के प्रति सावधान रहें | किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध है तो वहाँ भी सम्बन्धों में कटुता उत्पन्न हो सकती है | ध्यान रहे अकारण ही सन्देह सम्बन्धों में दरार उत्पन्न करता है | आपकी सन्तान की शिक्षा आदि के लिए एक ओर जहाँ लाभ का समय प्रतीत  होता है वहीं उसके स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए सूर्य दशमेश होकर चतुर्थ भाव में प्रवेश कर रहा है | कार्य क्षेत्र में आपके लिए अनुकूलता का समय प्रतीत होता है | आपके प्रोजेक्ट्स समय पर पूर्ण होते रहने की सम्भावना है जिनके कारण आपका यश में भी वृद्धि की सम्भावना है | अपने सहकर्मियों का साथ आपको प्राप्त होता रहेगा | साथ ही ऐसा भी हो सकता है कि आपको कई लोगों सलाह देने वाले मिल जाएँ और उनके कारण आपके मन में असमंजस अथवा द्विविधा की स्थिति बन जाए | अतः बहत अधिक लोगों से अपने काम के विषय में सलाह न करें | आप कोई नया घर भी ख़रीद सकते हैं अथवा इसी घर को रेनोवेट भी करा सकते हैं | किन्तु इस सबमें मानसिक तनाव में भी वृद्धि हो सकती है | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बन्धित लोगों के लिए लाभदायक समय प्रतीत होता है | आपके जीवन साथी के लिए भी आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो सकता है | साथ ही अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका नवमेश होकर सूर्य आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आप जो भी कार्य इस अवधि में करेंगे भली भाँती सोच समझ कर ही करेंगे क्योंकि आपकी निर्णय क्षमता में स्पष्टता की सम्भावना है | सामाजिक स्तर पर आपके सम्मान में वृद्धि की सम्भावना है | आप दूर पास की यात्राओं पर भी भ्रमण हेतु जा सकते हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों के प्रति भी आपकी रूचि बढ़ेगी | आपके किसी भाई अथवा बहन का विवाह सम्बन्ध भी इस अवधि में पक्का हो सकता है | किन्तु भाई बहनों के स्वास्थ्य के लिए समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता |

मकर : आपका अष्टमेश आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से धनलाभ हो सकता है जिसके विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा | आपमें से कुछ जातकों को पैतृक सम्पत्ति का लाभ भी हो सकता है | दर्शन शास्त्र, आत्म चिन्तन तथा आध्यात्मिकता की दिशा में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आपके कार्य में प्रगति की सम्भावना है | लेकिन यदि आपने अपनी वाणी पर संयम नहीं रखा तो आपके व्यावसायिक और पारिवारिक दोनों स्तरों पर आपको नुकसान पहुँच सकता है | अतः संयमित भाषा का प्रयोग करें | यदि परिवार मीब किसी के साथ कुछ अत्भेद हो जाए तो परिबार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति से उस विषय पर राय लेकर उस विवाद को सुलझाने का प्रयास कीजिए | पित्त, सरदर्द जैसी समस्याओं से बचने के लिए खान पान भी सन्तुलित रखने की आवश्यकता है | किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य भी चिन्ता का विषय हो सकता है |

कुम्भ : आपके लिए तो आपका सप्तमेश लग्न में गोचर कर रहा है | कार्यस्थल में आपका प्रदर्शन सन्तोषजनक रहेगा जिसके कारण आपके पदोन्नति की भी आशा की जा सकती है | राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | सम्भव है कोई नया पदभार भी आपको सौंप दिया जाए जिसके कारण आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती है | सामाजिक रूप से आप काफ़ी सक्रिय तथा प्रभावशाली बने रह सकते हैं | ऐसा करना आपके कार्य के लिए भी अच्छा रहेगा और इसके दूरगामी अनुकूल परिणाम भी प्राप्त होने की सम्भावना है | प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वहाँ भी सम्बन्धों में अन्तरंगता बढ़ सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी सम्बन्धों में मधुरता की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु इस गोचर के कारण आपके क्रोध में वृद्धि भी हो सकती है जिसके कारण सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | अतः अपने अकारण क्रोध पर संयम रखने के लिए ध्यान प्राणायाम आदि का अभ्यास अवश्य करते रहें और सूर्य को अर्घ्य प्रदान करते रहें | सरदर्द, ज्वर अथवा किसी प्रकार के इन्फेक्शन के कारण आपका स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है अतः इस ओर से सावधान रहें |

मीन : सूर्य आपकी राशि के लिए षष्ठेश होकर द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | जो लोग किसी नौकरी में हैं, विशेष रूप से सरकारी नौकरी में – उनके लिए समय विशेष रूप से अनुकूल जान पड़ता है | कोई शुभ समाचार भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | पदोन्नति के साथ कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | सम्भव है लम्बे समय तक विदेश में प्रवास करना पड़ जाए | आप किहीं बैंक आदि से किसी आवश्यक कार्य के लों लेने पर विचार कर सकते हैं | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | सम्भव है किसी कोर्ट केस का फैसला भी आपके पक्ष में ही हो जाए | आपको अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही यात्रा आदि के समय अपने Documents को भी सम्भाल कर रखने की आवश्यकता | यात्राओं में अपने भी स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/02/12/sun-transit-in-aquarius/