Category Archives: ज्योतिष

गुरु का मकर में गोचर

आज जब सारा विश्व कोरोना वायरस के आक्रमण से जूझ रहा है ऐसे में कुछ लोगों का आग्रह कि गुरु के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों के विषय में लिखें – हमें हास्यास्पद लगा | किन्तु फिर भी, मित्रों के अनुरोध पर प्रस्तुत है गुरुदेव के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों पर एक दृष्टि |

सोमवार 29 मार्च 2020, चैत्र शुक्ल षष्ठी को 27:55 (अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग आयुष्मान योग और कौलव करण में गुरुदेव अपनी स्वयं की धनु राशि से निकल कर शनि की मकर राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | मकर राशि में इस समय शनि स्वराशि में तथा मंगल अपनी उच्च राशि में भ्रमण कर रहे हैं | गुरु इस समय उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर है | एक ओर यहाँ आकर देवगुरु बृहस्पति गुरु-चाण्डाल योग यानी राहु-केतु से मुक्त हो जाएँगे तो वहीं दूसरी ओर अपनी नीच की राशि में राश्यधिपति के साथ पहुँच जाएँगे – जिनके साथ न इनकी मित्रता है न ही शत्रुता | मकर में ही गुरु का मित्र मंगल भी गोचर कर रहा है और चार मई तक वहीं भ्रमण करेगा | मकर अंगारक मंगल की उच्च राशि है जिसके कारण मंगल की उग्रता में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है | ऐसे में सम्भव है मंगल से सम्बन्धित ज्वर, पित्त तथा रक्त विकार जैसी समस्याओं में तेज़ी आ जाए |

मकर राशि में भ्रमण करते हुए चौदह मई 2020 को रात्रि 7:47 के लगभग गुरु वक्री होना शुरू हो जाएगा और तीस जून 2020 को सूर्योदय से पूर्व पाँच इक्कीस के लगभग वापस अपनी राशि धनु में पहुँच जाएगा | तेरह सितम्बर 2020 को प्रातः 6:35 के लगभग धनु राशि में ही मार्गी होता हुआ 20 नवम्बर 2020 को दिन में 13:24 के लगभग पुनः मकर राशि में आ जाएगा | 11 जनवरी 2021 से 12 फरवरी 2021 तक गुरु अस्त भी रहेगा | मकर, धनु और पुनः मकर राशि में विचरण करने की अवधि में गुरु 29 मार्च 2020 से उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करेगा | उसके बाद वक्री चाल में 26 जुलाई को वापस पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर आ जाएगा | जहाँ से तीस अक्तूबर से पुनः उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर, सात जनवरी 2021 से श्रवण नक्षत्र पर तथा पाँच मार्च 2021 से धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 5/6 अप्रैल 2021 को अर्द्धरात्रि में 00:25 के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रविष्ट हो जाएगा |

मकर राशि के लिए गुरु तृतीयेश और द्वादशेश है | गुरु की एक राशि धनु के लिए मकर राशि द्वितीय भाव है तथा दूसरी राशि मीन के लिए मकर राशि एकादश भाव है | मकर राशि में विचरण करते हुए गुरु की दृष्टियाँ क्रमशः वृषभ राशि, कर्क राशि तथा तुला राशियों पर रहेंगी | इनमें से वृषभ राशि के लिए गुरु अष्टमेश तथा एकादशेश है, कर्क के लिए षष्ठेश तथा भाग्येश है और तुला राशि के लिए गुरु तृतीयेश तथा षष्ठेश है |

ये “शिवविंशति” अर्थात भगवान शिव के सम्वत्सरों का युग चल रहा है और इस कड़ी में अभी तक परिधावी सम्वत्सर चल रहा था, जिसके कारण वर्षा में कमी के कारण महँगाई में वृद्धि और रोगों तथा अन्य प्रकार के उपद्रवों में वृद्धि की सम्भावना की जाती है | अब 25 मार्च से नव सम्वत्सर का आरम्भ हो जाएगा, जिसका नाम होगा प्रमादी तथा अश्विनी कुमारों को इस सम्वत्सर का देवता माना गया है | आयुर्वेदाचार्य अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य तथा समस्त प्रकार के दुःख दारिद्र्य को दूर करके सुख सौभाग्य और स्वास्थ्य प्रदान करने वाले माने जाते हैं | इस वर्ष का राजा होगा बुध और मन्त्री चन्द्रमा | सूर्योदय प्रातः 6:19 पर होगा और इस समय मीन लग्न तथा लग्न में सूर्य और चन्द्र दोनों विराजमान होंगे और चन्द्रमा रेवती नक्षत्र पर होगा | इस प्रकार देखा जाए तो यह संयोग अत्यन्त शुभ रहने की सम्भावना है | यही नहीं यह संयोग आर्थिक विकास, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उन्नति, सामाजिक व्यवस्था और स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

किन्तु, जैसा कि ऊपर लिखा है, गुरुदेव 28 को अपनी नीच राशि मकर में प्रस्थान कर जाएँगे | यदि सामान्य रूप से देखें तो प्रमादी नाम के सम्वत्सर में प्रजा में आलस्य में वृद्धि तो मानी जाती है लेकिन रोग व्याधि आदि से धीरे धीरे मुक्ति भी मानी जाती है | साथ ही अभी तक गुरुदेव गुरु-चाण्डाल योग में थे और अब नीच की राशि में राश्यधिपति शनि तथा उच्च के अंगारक के साथ पहुँच जाएँगे | चार मई को मंगल यहाँ से निकल कर कुम्भ में पहुँचेगा और तीस जून से गुरु वक्री होकर धनु में जाने लगेगा | इस आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरा अप्रैल जब तक मंगल मकर में रहेगा – कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है और तीस जून से परिस्थितियों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु फिर बीस नवम्बर से पाँच अप्रैल 2021 तक गुरु वापस मकर में लौट जाएगा | उस समय हो सकता है फिर से यह बीमारी सर उठाए |

लेकिन, जैसा कि सदा कहते आए हैं, ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है | हज़ारों वर्ष पूर्व लिखे गए सूत्रों को नवीन परिस्थितियों के साथ अध्ययन करके तथा व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर ज्योतिषी कुछ फल कथन करते हैं और इन सभी फल कथनों का उद्देश्य होता है केवलमात्र मार्गदर्शन – इसे ब्रह्म वाक्य समझ कर नहीं बैठ जाना चाहिए | इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि हमें पहले से बता दिया जाता है कि जहाँ हमें पहुँचना है वहाँ के मार्ग में बहुत बड़ी खाई है और हम उसमें गिरकर चोट खा सकते हैं तो उस स्थिति में हम सँभल कर चलेंगे ताकि गिरने का भय न रहे, या यदि गिर भी जाएँ तो उतनी अधिक चोट न लग सके जितनी अचानक से गिरने में लग सकती थी | किन्तु यदि हमें उस खाई का पहले से पता ही नहीं होगा तो निश्चित रूप से हम ऐसे गिरेंगे की संभलना मुश्किल हो जाएगा | और वर्तमान में कोरोना जैसे खाई से बचने का एक ही उपाय है कि इससे घबराए बिना डॉक्टर्स के बताए दिशा निर्देशों का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए जितना सम्भव हो घरों के भीतर रहें, बार बार अपने हाथों को अच्छी तरह धोते रहें, बाज़ार से लाई दूध की थैली आदि को भी साबुन से धोने के बाद ही प्रयोग करें, सब्ज़ी लाने के बाद भी पहले उन्हें भली भाँति धोकर साफ़ कर लें उसके बाद ही उनको काम में लाएँ… इत्यादि इत्यादि…

सरकारों द्वारा लगभग सभी राज्यों को Lockdown कर दिया गया है – यानी सीमाओं को सील कर दिया गया है और जन साधारण से अपील की गई है कि बहुत ही आवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकलें | हमें स्वयं ही कड़ाई से इस Lockdown को सफल बनाने के लिए सरकार को सहयोग देना चाहिए | यदि हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थों तथा कुछ समय की समस्याओं (जो कि वास्तव में हैं नहीं – क्योंकि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बन्द नहीं की गई है) को भुलाकर इस प्रकार के दिशा निर्देशों का पालन दृढ़ संकल्प, पूर्ण मनोयोग और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करते रहे तो निश्चित रूप से हम कोरोना की इस खाई से बाहर निकल आने में सफल हो सकेंगे, और धीरे धीरे इस संक्रमण पर जन साधारण की विजय होगी और ज्योतिष वर्ग द्वारा जो सम्भावना व्यक्त की गई है कि अभी कुछ समय के लिए कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो सकती है वह सम्भावना सम्भावना बनकर ही रह जाएगी और सभी राशियों के लिए गुरु का मकर में गोचर शुभ देने वाला सिद्ध हो सकेगा…

तो संकल्प लें कि हमें कोरोना को हराना है पूर्ण साहस और समझदारी के साथ… इसी संकल्प और कामना के साथ कल से प्रारम्भ करेंगे गुरु के मकर राशि में गोचर के सभी बराह राशियों पर होने वाले सम्भावित प्रभावों की संक्षिप्त समीक्षा…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/23/jupiter-transit-in-capricorn/

 

23 मार्च से 29 मार्च तक का साप्ताहिक राशिफल

सभी के लिए 23 मार्च से 29 मार्च तक का साप्ताहिक राशिफल

इन दिनों सारा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में सभी का सारे काम रुके हुए हैं | सबसे पहली आवश्यकता है इस महामारी से मुक्ति प्राप्त करने की, न कि अपने कार्य अथवा किसी अन्य विषय में सोचने विचारने की | हम सभी आत्म संयम का परिचय दें और घर से बाहर तभी निकलें जब कोई आवश्यक कार्य हो | “सोशल डिस्टेंसिंग” यानी समाज में एक दूसरे से परस्पर यथा सम्भव दूरी बनाए रखना तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना अत्यन्त आवश्यक है | सम्भव है आपको इस अवधि में कोई नवीन प्रोजेक्ट प्राप्त हो भी जाए, लेकिन कार्य तो मनुष्य जीवन भर करता रहता है और अर्थ प्राप्ति भी जीवन भर चलती रहती है, अतः अभी यदि कोई नवीन प्रोजेक्ट प्राप्त हो भी रहे हों तो उन पर ध्यान देने की अपेक्षा उचित यही रहेगा कि आपके घरों में बैठकर इस बीमारी को फैलने से रोकने का प्रयास करें |

ज्योतिष के विद्वान इस महामारी के विषय में बहुत सी भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं, बहुत से प्राचीन ग्रन्थों के सन्दर्भ प्रस्तुत कर रहे हैं | हमारा प्रश्न केवल मात्र यही है कि जिन प्राचीन ग्रन्थों से उद्धरण प्रस्तुत किये जा रहे हैं वो समय रहते क्यों नहीं प्रस्तुत किये गए ? यदि पहले से ये सब देख लिया होता तो इस प्रकार से ये वायरस इतना अधिक भयावह रूप न ले पाता |

कुछ लोग कहेंगे कि अभी तक गुरुदेव राहु-केतु के बीच फँसे हुए थे और शनिदेव अभी कुछ समय पहले वहाँ से निकल कर अपनी स्वयं की राशि में आए हैं | यहाँ आते ही उनके प्रकोप का सामना करना पड़ा | कुछ लोग ऐसा भी बोल सकते हैं कि गुरु का प्रवेश नीच की राशि मकर में हो गया है और तीस जून तक जब तक कि वक्री होकर वापस से धनु में नहीं पहुँच जाता तब तक इस आपत्ति से मुक्ति सम्भव नहीं क्योंकि अभी अंगारक मंगल भी अपनी उच्च राशि में जाकर बल प्राप्त कर रहा है तथा गुरु और शनि के साथ युति कर रहा है, और चार मई को जब मंगल यहाँ से निकल जाएगा तब इस बीमारी में कमी आनी आरम्भ होगी, इसकी कोई औषधि उस समय तक प्राप्त हो जाएगी और तीस जून आते आते सब कुछ धीरे धीरे सामान्य होना आरम्भ हो जाएगा | धीरे धीरे इसलिए कि शनि का समय भी चल रहा है | इस प्रकार की बहुत सी सम्भावनाओं पर हमारे ज्योतिषी कार्य कर रहे हैं | किन्तु जब तक कोई परिणाम नहीं प्राप्त हो जाते तब तक सब कुछ केवल अनुमान मात्र ही हैं | वैसे भी हम सदा बोलते आए हैं कि ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है |

इसीलिए हमारा मानना है कि इस समय व्यक्तिगत राशिफल की ओर ध्यान दिए बिना और किसी भी प्रकार के अन्धविश्वास का शिकार हुए बिना मिलकर स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए कुछ समय के लिए शान्त बैठकर इस वायरस को हराने का प्रयास करें | इसे आप इस प्रकार समझिये कि कोई जहाज़ समुद्र में डूब जाता है तो क्या ये मान लिया जाए कि उस दिन सारे के सारे यात्रियों का मारक योग था ? या फिर ऐसा कि आपकी राशि के लिए ग्रहों का गोचर कार्य की दृष्टि से भी, अर्थ की दृष्टि से भी और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत अनुकूल चल रहा हो, किन्तु वायरस को फैलने से रोकने के लिए आप कहीं आ जा नहीं सकें तो ग्रहों के गोचर आपके लिए अनुकूल होते हुए भी कोई फल कैसे दे पाएँगे ?

सत्य तो यही है कि प्राकृतिक आपदाओं के समक्ष सारे राशिफल व्यर्थ हो जाते हैं | इसलिए यह समय है आत्मावलोकन का और आत्म संयम का | किसी भी वायरस के प्रकोप से भयभीत हुए बिना संयम के साथ अपने मन में इस प्रकार का संकल्प लें कि इस महामारी को दूर भगाएँगे और इस प्रकार की कल्पना करें कि विश्व इससे मुक्त हो चुका है – वास्तव में इस सामूहिक संकल्प और सामूहिक कल्पना का प्रभाव पड़ेगा | क्योंकि हमारे दृढ़ता के साथ लिए गए संकल्प और हमारी पूर्ण मनोयोग से की गई कामनाएँ और कल्पनाएँ ही मूर्त रूप लेती हैं | वैसे भी, जब लगभग सारा विश्व ही इस आपदा से जूझ रहा है तो किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत राशि और उसके सम्भावित परिणामों का कोई महत्त्व नहीं रह जाता |

चैत्र नवरात्र के साथ उत्सव का समय आरम्भ होने जा रहे हैं – 23/24 मार्च को अमावस्या है और उसके बाद 25 मार्च से साम्वत्सरिक चैत्र नवरात्रों तथा गुडी पर्व और उगडी के साथ भारतीय हिन्दू नव वर्ष प्रमादी नामक विक्रम सम्वत 2077 का आरम्भ होने जा रहा है | 25 को भगवती के शैलपुत्री रूप की, 26 को ब्रह्मचारिणी रूप की, 27 को चन्द्रघंटा रूप की, 28 को कूष्माण्डा रूप की और 29 को स्कन्दमाता रूप की उपासना की जाएगी | माँ भगवती को नमन करते हुए हम सभी मिलकर संकल्प लें कि इस महामारी को हराएँगे और पूर्ण मनोयोग से कल्पना करें कि हरा दिया है – सामूहिक स्तर पर ऐसा होगा तो माँ भगवती सभी कल्याण करेंगी और समस्त विश्व कोरोना जैसे महामारी पर विजय प्राप्त करने में सफल होगा – आज के साप्ताहिक राशिफल में केवल इतना ही…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/22/weekly-prediction-for-all-12-signs-from-23-march-to-29-march/

 

 

 

शुक्र का वृषभ में गोचर

शनिवार 28 मार्च, चैत्र शुक्ल चतुर्थी को विष्टि करण और विषकुम्भ योग में दिन में 3:38 के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपनी स्वयं की राशि वृषभ में प्रस्थान करेगा | शुक्र इस समय कृत्तिका नक्षत्र पर भ्रमण कर रहा है | वृषभ राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र आठ अप्रैल से रोहिणी नक्षत्र तथा 27 अप्रैल से मृगशिरा नक्षत्र पर भ्रमण करेगा | तेरह मई से दिन में बारह बजकर तेरह मिनट के लगभग शुक्र वक्री होना आरम्भ होगा और 28 मई को रोहिणी नक्षत्र पर वापस पहुँच जाएगा | जहाँ से 25 जून से मार्गी होता हुआ 23 जुलाई को मृगशिरा नक्षत्र पर वापस पहुँचेगा और अन्त में 1 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व पाँच बजकर ग्यारह मिनट के लगभग बुध की मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस बीच 29 मई से नौ जून तक शुक्र अस्त भी रहेगा | वृषभ राशि में विचरण करते हुए शुक्र पर निरन्तर गुरु की दृष्टि रहेगी | कुछ समय के लिए मंगल की दृष्टि भी रहेगी | एक माह के लिए सूर्य का साथ भी रहेगा | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के वृषभ में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपको तथा आपके जीवन साथी को धनलाभ के साथ अच्छे स्वादिष्ट भोजन का आनन्द भी प्राप्त होता रह सकता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की भी सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है अथवा पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति तथा उसके माध्यम से धनलाभ की सम्भावना है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो जीवन साथी की पार्टनरशिप में लाभदायक सिद्ध हो सकता है | यदि ऐसा नहीं भी है तो जीवन साथी से अपने कार्य में सहायता अवश्य लें | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तनों के संकेत प्रतीत होते हैं | मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | समस्त प्रकार के भोग विलास के साधनों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा तथा दाम्पत्य जीवन में मधुरता के भी संकेत हैं | अविवाहित जातकों की जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु भली भाँति सोच समझकर ही आगे बढ़ना उचित रहेगा | स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो विशेष रूप से महिलाओं को अपनी Gynaecologist से Regular Check-up कराते रहना चाहिए |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | आप सुख सुविधाओं पर बहुत धन इस अवधि में खर्च कर सकते हैं | साथ ही आपकी सन्तान कहीं बाहर उच्च शिक्षा के लिए भी जा सकती है | सन्तान के द्वारा भी व्यसनों में धन का अपव्यय हो सकता है | आप स्वयं भी केवल भ्रमण के लिए ही विदेश यात्रा कर सकते हैं | सन्तान तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको कुछ नया कार्य भी प्राप्त हो सकता है | साथ ही वाहन तथा प्रॉपर्टी की खरीद फ़रोख्त में भी लाभ की सम्भावना है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे जहाँ आपकी कला की प्रशंसा के साथ ही आपको आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | आपको अधिकारी वर्ग का तथा अपनी माता जी और बड़े भाई बहनों का विशेष सहयोग इस अवधि में प्राप्त रहेगा |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में राश्यधिपति के साथ ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे तथा आपके कार्य की प्रशंसा होगी | इसके अतिरिक्त यदि आप लेखक हैं, आप गीत-संगीत-नृत्य के कलाकार हैं, सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं अथवा ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय है या Cosmetic Dentist हैं तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अपने कार्य में आपको विशेष रूप से महिलाओं सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होने की सम्भावना है | परिवार में भी आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए भी समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि के योग भी प्रतीत होते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप अपनी वाणी से दूसरों को प्रभावित करने में सफल हो सकते हैं |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से अष्टम में गोचर कर रहा है | अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष, दर्शन और आध्यात्म के अध्ययन में प्रवृत्त हो सकती है | कोई शोध कार्य यदि आप कर रहे हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | महिलाओं को विशेष रूप से अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप कराने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहने के संकेत हैं | कार्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | कहीं विदेश से धनलाभ की सम्भावना है | आप जीवन साथी के साथ कहीं विदेश में निवास की योजना भी बना सकते हैं | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह भी सम्भव है | किन्तु साथ ही महिलाओं को विशेष रूप से स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या हो सकती है जिस पर पैसा खर्च हो सकता है | अतः नियमित रूप से अपनी Gynaecologist से चेकअप अवश्य कराती रहें |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपके छठे भाव में अपनी ही राशि में गोचर कर रहा है | पारिवारिक आयोजनों में अपने मामा अथवा मौसी आदि से भेंट करने के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं तथा उनके माध्यम से आपको अपने कार्य में भी लाभ मिल सकता है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है तथा उसके माध्यम से भी आपको अर्थलाभ हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | नई नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु प्रेम सम्बन्धों में अथवा वैवाहिक जीवन में यदि समझदारी से नहीं चलेंगे तो साथी के साथ मनमुटाव भी हो सकता है |

मकर : आपका योगकारक आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर अत्यधिक अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप यदि वर्तमान कार्य छोड़कर कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में  प्रेम और आनन्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं या आपका ब्यूटी पार्लर है तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका भी योगकारक शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन – जैसे बच्चे का जन्म आदि – भी हो सकता है | आप अपने घर को Renovate करा सकते हैं अथवा नया घर या वाहन आदि खरीद सकते हैं | कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सन्तोषजनक रहने की सम्भावना है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | आप यदि किसी नौकरी में हैं तो उसमें परिवर्तन की सम्भावना है | साथ ही आपके उत्साह और पराक्रम में वृद्धि की भी सम्भावना है | आप यदि हाथ के कारीगर हैं तो आपको अचानक अपने कार्य के प्रदर्शन का भी अवसर प्राप्त हो सकता है और इसके लिए आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं | साथ ही जो लोग मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्यों में अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/20/venus-transit-in-taurus-2/

सूर्य का मीन में गोचर

शनिवार 14 मार्च 2020 को दिन में 11:54 के लगभग पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए ही भगवान् भास्कर अपने शत्रु ग्रह शनि की राशि कुम्भ से निकल कर मित्र ग्रह गुरु की मीन राशि में भ्रमण करने के लिए प्रस्थान करेंगे जहाँ शनि की तीसरी दृष्टि भी सूर्य पर रहेगी | सूर्य के मीन राशि में प्रस्थान के समय चैत्र कृष्ण षष्ठी तिथि, मिथुन लग्न, गर करण और हर्षण योग रहेगा | मीन राशि में विचरण करते हुए भगवान भास्कर 17 मार्च से उत्तर भाद्रपद तथा 31 मार्च से रेवती नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तेरह अप्रैल को रात्रि आठ बजकर तेईस मिनट के लगभग मंगल की मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर पहुँच जाएँगे | सूर्य की अपनी राशि सिंह से मीन राशि अष्टम भाव में आती है तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से द्वादश भाव में आती है | मीन राशि के लिए सूर्य षष्ठेश बन जाता है | किन्तु ध्यान देने योग्य बात है कि सिंह और मीन में षडाष्टक होते हुए भी दोनों के अधिपति ग्रह सूर्य और गुरु परस्पर मित्र ग्रह हैं, अतः मतभेद हो सकते हैं, किन्तु शत्रुता नहीं हो सकती और एक दूसरे के सहायक भी दोनों ग्रह बन जाते हैं | इन्हीं समस्त तथ्यों को आधार बनाकर मीन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर होने वाले सम्भावित परिणामों पर दृष्टिपात करने का प्रयास किया गया है…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य यानी Common हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

इस बीच पन्द्रह मार्च को शीतला सप्तमी, इक्कीस मार्च को शनि प्रदोष, तेईस मार्च को सोमवती अमावस्या, पच्चीस मार्च को चैत्र नवरात्र के साथ शार्वरी नामक नवसंवत्सर और गुडी पर्व, दो अप्रैल को रामनवमी के साथ गुरुपुष्यामृत योग में नवरात्रों का विसर्जन, चार अप्रैल को चैत्र शुक्ल एकादशी, पाँच अप्रैल को प्रदोष व्रत, छह अप्रैल को महावीर जयन्ती, सात अप्रैल को हनुमान जयन्ती का उपवास, आठ अप्रैल को हनुमान जयन्ती, दस अप्रैल को गुड़ फ्राइडे, बारह अपेल को ईस्टर सन्डे, तेरह अप्रैल को बैसाखी तथा चौदह अप्रैल को असम का बिहाग बिहू और अम्बेडकर जयन्ती है, सभी को ये सभी व्रतोत्सव मंगलमय हों…

मेष : आपके लिए पंचमेश होकर सूर्य का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा प्रतियोगी क्षमता में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य में उन्नति की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही जो लोग उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहते हैं उनके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही इस यात्रा के दौरान उन्हें विदेश भ्रमण का अवसर भी प्राप्त हो सकता है | कार्य के क्षेत्र में आपके लिए परिवर्तन तथा व्यस्तताओं का समय प्रतीत होता है | सम्भव है आपका कहीं ट्रांसफर हो जाए या आप वर्तमान नौकरी को छोड़कर किसी नई नौकरी में नए स्थान पर चले जाएँ | आँखों के इन्फेक्शन की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए काफी हलचल भरा समय प्रतीत होता है |

वृषभ : सूर्य आपके लिए चतुर्थेश है और लाभ स्थान में गोचर करने जा रहा है | किसी प्रकार की सम्पत्ति का लाभ हो सकता है | आप अपने वर्तमान निवास को बेचकर कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | यदि आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय में हैं तो उसमें भी आपको लाभ हो सकता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित आवश्यक कार्यों का निबटारा भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | मित्रगणों तथा अधिकारीगणों का साथ और सहयोग दोनों इस अवधि में प्राप्त रहने की सम्भावना है | हाँ आपके बड़े भाई अथवा पिता के कारण किसी प्रकार की चिन्ता हो सकती है | राजनीति से सम्बद्द्ध लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका तृतीयेश होकर सूर्य आपके दशम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | यदि आप हाथ के कारीगर हैं, सर्जन हैं, डॉक्टर हैं या मीडिया अथवा आई टी से सम्बन्धित किसी कार्य में संलग्न हैं तो आपके लिए तो समय विशेष रूप से लाभदायक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो आपका प्रदर्शन इस अवधि में बहुत अच्छा रहने की सम्भावना है, जिसके कारण आपके अधिकारी आपसे प्रसन्न रहेंगे आपको अपने पिता तथा प्रभावशाली लोगों की ओर से प्रशंसा तथा सहयोग प्राप्त होता रहेगा, किन्तु छोटे भाई बहनों तथा अधीनस्थ कर्मचारियों के कारण परिवार में अथवा कार्यस्थल पर वातावरण तनावपूर्ण हो सकता है |

कर्क : आपके लिए आपका द्वितीयेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | जो वास्तव में भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना के साथ साथ आपके लिए यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं | ऐसा भी हो सकता है कि आप आध्यात्मिक और धार्मिक कारणों से किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए चले जाएँ अथवा अपने कार्य के सिलसिले में किसी लम्बी यात्रा पर निकल जाएँ | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | किन्तु इस अवधि में आपकी वाणी में कुछ तीखापन आ सकता है जिसके कारण आपके पिता के साथ सम्बन्धों में तनाव की स्थिति आ सकती है | अतः अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही आँखों में इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर अथवा मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है |

सिंह : आपका लग्नेश होकर सूर्य आपके अष्टम भाव में संचार करने जा रहा है | यह समय स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता | सरदर्द या माइग्रेन यदि रहता है तो उसमें वृद्धि भी हो सकती है | साथ ही शरीर में आलस्य की वृद्धि भी हो सकती है जिसके कारण आपका कार्य में मन नहीं लगेगा | साथ ही आपके कुछ गुप्त विरोधी भी इस समय मुखर हो सकते हैं अतः हर किसी के सामने अपनी योजना के विषय में न बताएँ | पहले सम्बन्धित व्यक्ति के में जाँच पड़ताल कर लें उसके बाद ही अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करें | आप कहीं भ्रमण के लिए भी जाने का मन इस अवधि में बना सकते हैं जो आपके जीवन की एकरसता को दूर करने के लिए उचित रहेगा |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके सप्तम भाव में गोचर करने जा रहा है | आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आ सकता है अतः उनके साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें | आप किसी विदेशी कम्पनी अथवा बाहर बसे हुए किसी मित्र के साथ कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं अथवा उसके निमन्त्रण पर वहाँ जाकर स्वयं कोई कार्य तलाश सकते हैं | आप अपने परिश्रम तथा ज्ञान के बल पर उपलब्ध कार्य को समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही अपने स्वयं के व्यवसाय में किसी भी नई डील को अभी कुछ समय के लिए स्थगित कर देंगे तो अच्छा रहेगा | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो वहाँ संयम से काम लेने की आवश्यकता है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपका एकादशेश होकर सूर्य आपके छठे भाव में गोचर करने वाला है | आर्थिक दृष्टि से यह समय कुछ समस्याओं से युक्त हो सकता है | धन की हानि की सम्भावना है | घर तथा ऑफिस में काम कर रहे लोगों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही नई नियुक्तियाँ करने से पूर्व सारे सम्बन्धित Documents को अच्छी तरह जाँच लें | आपको अपने बड़े भाई अथवा पिता से किसी प्रकार धनलाभ की सम्भावना है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है और उसके द्वारा भी आपको धनलाभ हो सकता है | अपने तथा अपने बड़े भाई और पिता के भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके पंचम भाव में गोचर करने जा रहा है | जीवन में कुछ बड़े परिवर्तन इस अवधि में हो सकते हैं | सम्भव है आप जिस नौकरी में हैं उसे छोड़कर कोई दूसरी नौकरी कर लें, या व्यवसाय में हैं तो वर्तमान व्यवसाय को छोड़कर अथवा उसके साथ ही कोई नया व्यवसाय भी आरम्भ कर लें | आपके जीवन साथी के लिए भी किसी नवीन व्यवसाय के आरम्भ होने की सम्भावना है | अचानक ही आपको अपनी पदोन्नति का समाचार भी प्राप्त हो सकता है अथवा परिवार में नवशिशु का आगमन हो सकता है अथवा किसी मंगलकार्य का आयोजन हो सकता है | आपकी रूचि अध्ययन में बढ़ सकती है | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही अपने व्यवहार पर नियन्त्रण नहीं रखा तो जीवन साथी के साथ भी सम्बन्धों में कड़वाहट भी आ सकती है |

धनु : सूर्य आपकी राशि के लिए भाग्येश है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर करने जा रहा है | आर्थिक दृष्टि से भी और पारिवारिक स्तर भी समय लाभदायक प्रतीत होता है | यद्यपि परिवार समाज में आपका सम्मान और प्रतिष्ठा इस अवधि में बढ़ सकती है, किन्तु आपके स्वभाव की उग्रता परिवार की शान्ति भंग कर सकती है | ध्यान प्राणायाम आदि के द्वारा आप अपने व्यवहार को नियन्त्रित कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगल कार्य की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | आप यदि कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी के व्यवसाय में भी लाभ की सम्भावना है | आपको अपने पिता की ओर से वाहन अथवा घर भी उपहारस्वरूप प्राप्त हो सकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | माता पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मकर : आपका अष्टमेश होकर सूर्य तृतीय भाव में गोचर करने वाला है | लक्ष्य के प्रति आपकी एकाग्रता में इस अवधि में और अधिक दृढ़ता आने की और उत्साह तथा मनोबल में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है जिसके कारण आपके कार्य समय पूर्ण होते रहने की सम्भावना है | आप अपनी वर्तमान नौकरी को छोड़कर कोई नई नौकरी करने का विचार भी बना सकते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं | यदि ऐसा है तो आपको उसमें सफलता प्राप्त होने की भी सम्भावना है | किन्तु छोटे भाई बहन अथवा पिता के स्वास्थ्य के विषय में चिन्ता हो सकती है | साथ ही छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार विवाद भी बड़ा रूप ले सकता है | कार्यक्षेत्र में अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ व्यर्थ की बहस की सम्भावना है | इससे बचने का एक ही उपाय है – अतः अपनी वाणी और व्यवहार पर नियन्त्रण रखना |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपके द्वितीय भाव में गोचर करने वाला है | आपके जीवन साथी के माध्यम से आपको अर्थलाभ की सम्भावना है | किन्तु आपके स्वभाव में इस समय उग्रता अधिक बढ़ी हुई है जिसके कारण परिवार की शान्ति भंग होने की सम्भावना है | अतः अपनी उग्रता पर नियन्त्रण रखें और इसके लिए ध्यान, योग तथा प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास अवश्य करें | पारिवारिक तनावों का दुष्प्रभाव आपके तथा आपके जीवन साथी के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है और आपके पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का स्वास्थ्य भी इसी कारण प्रभावित हो सकता है | अतः यथासम्भव इस प्रकार के विवादों से बचने का प्रयास करें |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करने वाला है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्व रखता है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं, कोर्ट कचहरी से सम्बन्धित किसी कार्य में हैं, स्पोर्ट्स में हैं अथवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में हैं तो आपके लिए समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना भी है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय इस अवधि में आपके पक्ष में आ सकता है | आपका जीवन साथी आपके लिए पूर्ण रूप से समर्पित है, आवश्यकता है आप अपने Temperament पर नियन्त्रण रखें | साथ ही सर में दर्द, ज्वर आदि की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्

शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्

कल फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, महाशिवरात्रि का पावन पर्व… सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ…

भोले बाबा के अभिषेक के लिए पारम्परिक रूप से कुछ विशिष्ट वस्तुओं का उपयोग किया जाता है | जिनमें प्रमुख वस्तुओं के नाम तथा उनकी उपादेयता निम्नवत है…

सुगन्धित जल : भौतिक सुख सुविधाओं की उपलब्धि के लिए जल में चन्दन आदि की सुगन्धि मिलाकर उस जल से शिवलिंग को अभिषिक्त किया जाता है |

मधु अर्थात शहद : अच्छे स्वास्थ्य तथा जीवन साथी की मंगलकामना के लिए मधु से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है |

गंगाजल : समस्त प्रकार के तनावों से मुक्तिदाता माना जाता है गंगाजल को | इसी भावना से गंगाजल द्वारा शिवलिंग को अभिसिंचित करने की प्रथा है |

गौ दुग्ध तथा गौ धृत : गाय का दूध और घी पौष्टिकता प्रदान करता है | हृष्ट पुष्ट रहने के लिए गाय के दूध और घी से शिवलिंग को स्नान कराया जाता है |

बिल्व पत्र और धतूरा : सांसारिक तापों से मुक्ति के लिए बिल्व पत्रों तथा धतूरे से शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है | ऐसी मान्यता है कि धतूरा भगवान शंकर का सबसे अधिक प्रिय पदार्थ है और बिल्व को अमर वृक्ष तथा बिल्व पत्र को अमर पत्र और बिल्व फल को अमर फल की संज्ञा दी जाती है |

किन्तु हमारी मान्यता है कि केवल जल तथा बिल्व पत्र के साथ श्रद्धा, भक्ति और पूर्ण आस्था तथा विश्वास का गंगाजल एक साथ मिलाकर उस जल से यदि शिवलिंग को अभिषिक्त किया जाए तो भोले शंकर को उससे बढ़कर और कुछ प्रिय हो ही नहीं हो सकता | और यदि कुछ भी उपलब्ध न हो, शिवालय भी कहीं बहुत दूरी पर हो, तो अपने मन से बड़ा और कौन सा शिवालय होगा और मन की श्रद्धा भक्ति तथा विश्वास से बढ़कर और कौन सा गंगाजल या अभिषेक की सामग्री होगी जो भोला भण्डारी को प्रिय होगी ? इसी श्रद्धा, भक्ति और पूर्ण आस्था तथा विश्वास के गंगाजल के साथ अपने मन के शिवालय में विराजमान भगवान शंकर के अभिषेक करें तथा मानव सेवा करते हुए शिव को प्रसन्न करें, इसी हेतु प्रस्तुत है शिव स्तुति तथा शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्…

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ||

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय ||

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ||

वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय ||

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय ।भोला भण्डारी
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय ||

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ |

शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते ||

ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…

औघड़दानी भोले बाबा सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हुए सबका कल्याण करें इसी भावना के साथ एक बार पुनः महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…

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मंगल का धनु में गोचर

आज यानी शुक्रवार सात फरवरी माघ शुक्ल चतुर्दशी को 27:52 (कल सूर्योदय से पूर्व 3:52) के लगभग गर करण और आयुष्मान योग में मंगल अपनी स्वयं की वृश्चिक राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह गुरु की धनु राशि और मूल नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | गुरुदेव जहाँ पहले से ही अपने मित्र के स्वागत के लिए विराजमान हैं | यहाँ मंगल को केतु का साथ भी मिलने के कारण मंगल और अधिक बली भी हो जाएगा | धनु राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 27 फरवरी को पूर्वाषाढ़ तथा 17 मार्च को उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 22 मार्च को दिन में दो बजकर चालीस मिनट के लगभग अपनी उच्च राशि मकर में राश्यधिपति शनि के पास प्रस्थान कर जाएगा | धनु राशि के लिए मंगल पंचमेश तथा द्वादशेश है | मंगल की राशि मेष के लिए धनु राशि भाग्य स्थान तथा वृश्चिक के लिए द्वितीय भाव है | धनु राशि में भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ मीन राशि, मिथुन राशि तथा कर्क राशियों पर रहेंगी | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के धनु राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश करना अनुचित होगा | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके राश्यधिपति और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से भाग्य स्थान में हो रहा है, जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अनुकूल कहा जा सकता है | कार्य में प्रगति के साथ ही यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु यात्राओं पर पैसा अधिक खर्च हो सकता है, अतः बजट बनाकर चलना आपके लिए हित में रहेगा | आप अपने लिए नया घर खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान निवास को ही Renovate करा सकते हैं | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | साथ ही परिवार में कोई मंगल कार्य भी सम्पन्न हो सकता है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपकी राशि के लिए षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु आप अपने व्यवहार तथा प्रयासों से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ भी हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप लम्बे समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित Advance course के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा एकादश भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | आपको कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप लम्बे समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित नहीं रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से और आर्थिक दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रुचि में वृद्धि की भी सम्भावना | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मीडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है अतः योग ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | आप स्वयं अथवा आपकी सन्तान भी विवाह करके अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कहीं दूर जा सकती है | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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शुक्र का मीन राशि में गोचर

शुक्र का मीन राशि में गोचर

रविवार 2 फरवरी, माघ शुक्ल नवमी को 26:18 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर अठारह मिनट) के लगभग बालव करण और शुक्ल योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपने परम मित्र शनि की राशि कुम्भ से निकल कर अपनी उच्च राशि मीन में प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय शुक्र पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर होगा | मीन राशि में भ्रमण करते हुए पाँच फरवरी से उत्तर भाद्रपद नक्षत्र तथा 17 फरवरी से रेवती नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में 28 फरवरी को 25:34 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर चौंतीस मिनट) के लगभग मेष राशि और अश्विन नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | शुक्र की अपनी राशि वृषभ से मीन राशि एकादश भाव तथा तुला से छठा भाव बनती है | साथ ही मीन राशि के लिए शुक्र तृतीयेश और अष्टमेश हो जाता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि शुक्र के मीन राशि में गोचर के समस्त राशियों पर सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर तो सम्भव है आपको अपने कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि हो जाए और इन यात्राओं के माध्यम से आपको धन लाभ की सम्भावना की जा सकती है | वहीं दूसरी और इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है तथा यात्राओं के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है | यदि कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो उसमें देर लग सकती है और उसके लिए प्रयास भी अधिक करना पड़ेगा | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण भी धन के व्यय होने की सम्भावना है | आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ भी आपको प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में गोचर हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | मित्रों तथा सहकर्मियों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से भी लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से कर्म स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं जिसके कारण आप अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम रहेंगे | आप कलाकार हैं, कवि हैं, डेंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं, ब्यूटीशियन हैं अथवा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं, टूर और ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय में, वक्ता हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में उन्नति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अपने सौन्दर्य को निखारने में आपकी रूचि इस अवधि में बढ़ेगी और इस कार्य में आप बहुत अधिक पैसा भी खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आपका बजट गड़बड़ा एकता है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके पराक्रम में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कुछ नया कार्य आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | कार्य तथा आय में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | आप कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा अपने वर्तमान आवास को ही Renovate करा सकते हैं | परिवार में किसी के विवाह आदि माँगलिक कार्य के कारण सम्बन्धियों तथा मित्रों के साथ आमोद प्रमोद का समय भी प्रतीत होता है | सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा अथवा देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में भी वृद्धि हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ आपके लिए कार्य में प्रगति तथा उसके माध्यम से अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना की जा सकती है, किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी के लाभ की सम्भावना की जा सकती है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी, वहीं दूसरी ओर किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी सहकर्मी की ओर से आपका विरोध भी सम्भव है, अतः आँख और कान खुले रखने की आवश्यकता है | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होने जा रहा है | आपके और आपके जीवन साथी के लिए कार्य तथा अर्थलाभ की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अनेकों अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | Cosmetic और Medicine के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी यह समय अत्यन्त लाभप्रद प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | अविवाहित हैं तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा आपका कोई सहकर्मी आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध सकते हैं | दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ होंगे | आप इस समय कार्य से सम्बन्धित नवीन चुनौतियाँ भी स्वीकार करने का साहस रखते हैं, जो आपके कार्य की दृष्टि से हित में ही रहेगा | किन्तु साथ ही उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | कोई कोर्ट केस अथवा कोई बीमारी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकती है | विशेष रूप से यदि आप महिला हैं तो आपको स्वास्थ्य की और से विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान भी अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | दाम्पत्य जीवन में कोई विवाद उत्पन्न हो सकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके पंचम भाव में होने जा रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | किन्तु आपकी सन्तान के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | किसी गम्भीर समस्या के कारण आपकी सन्तान को Hospitalize भी होना पड़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना अरहने की सम्भावना है |

धनु : आपके लिए आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | सम्भव है आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीद लें अथवा खरीदने की योजना बना लें | किन्तु ड्राइविंग के समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु साथ ही बड़े भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद कोर्ट तक भी पहुँच सकता है, अतः परिवार की किसी बुज़ुर्ग महिला की मध्यस्थता से उस विवाद को समय रहते सुलझाने का प्रयास आवश्यक है | परिवार में किसी महिला का स्वास्थ्य आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | समय रहते डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है | पोलिटिक्स से जिन लोगों का सम्बन्ध है उनके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपके लिए आपका पंचमेश और दशमेश होकर शुक्र आपके लिए योगकारक बनता है और आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | साथ ही, कार्य स्थल पर विरोधियों के स्वर भी मुखर हो सकते हैं, किन्तु आप स्वयं अपने ही बुद्धिबल से समस्त विरोधों को शान्त करने में समर्थ हो सकते हैं | हाँ भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद कोर्ट तक पहुँच सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से आपकी भेंट किसी प्रभावशाली व्यक्ति से हो सकती है और उसके कारण आपको अपने कार्य में भी लाभ प्राप्त हो सकता है तथा आपके मान सम्मान में भी वृद्धि के संकेत हैं | रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो वह भी वापस प्राप्त हो सकती है | किसी कोर्ट केस का निर्णय भी आपके पक्ष में आ सकता है |

कुम्भ : आपके लिए भी आपकी राशि से चतुर्थेश और नवमेश होकर शुक्र आपका योगकारक बनता है और आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | पराक्रम तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली है, उसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में अवश्य प्राप्त होगा, किन्तु ऐसा कुछ मत बोलिए जिसके कारण किसी विवाद में फँसने की सम्भावना हो |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ विशेष अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर आपके आकर्षक व्यक्तित्व से लोग प्रभावित होंगे और उसका लाभ आपको अपने कार्य तथा पारस्परिक सम्बन्धों में प्राप्त हो सकता है, वहीं दूसरी ओर किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है जिसके विषय में आपने ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी | अच्छा यही रहेगा इस समय ध्यान और प्राणायाम का सहारा लें ताकि आपके मन की शान्ति बनी रहे | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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