Category Archives: ज्योतिष

सूर्य का कन्या में गोचर

सूर्य का कन्या में गोचर

कल यानी 17 सितम्बर, आश्विन कृष्ण तृतीया को दोपहर एक बजकर तीन मिनट के लगभग विष्टि करण और ध्रुव योग में सूर्यदेव अपनी स्वयं की राशि सिंह से निकल कर कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | अपने इस गोचर के समय सूर्य उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर होंगे, जहाँ से 27 सितम्बर को हस्त नक्षत्र और ग्यारह अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 अक्टूबर को अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर तीन मिनट के लगभग तुला राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | सूर्यदेव जिस भी राशि में जाते हैं, कुछ समय के लिए शुक्र और बुध का साथ उन्हें प्राप्त होता ही है | कन्या राशि में भी यही स्थिति रहेगी |

इस बीच 26 सितम्बर और ग्यारह अक्तूबर को प्रदोष व्रत होंगे | 28 सितम्बर को महालया के साथ श्राद्ध पक्ष पूर्ण होकर 29 सितम्बर आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापना के साथ नौ दिन के शारदीय नवरात्र आरम्भ हो जाएँगे – सात अक्तूबर को महा नवमी को प्रतिमा विसर्जन के साथ जो सम्पन्न हो जाएँगे | आठ अक्तूबर को विजयादशमी, तेरह अक्तूबर को शरद् पूर्णिमा और कार्तिक स्नानारम्भ, चौदह अक्तूबर को कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा के साथ कार्तिक मास का आरम्भ तथा 17 अक्तूबर को करक चतुर्थी यानी करवा चौथ के पावन और उल्लासमय पर्व रहेंगे | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ |

अब संक्षिप्त में जानने का प्रयास करते हैं सिंह राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता, अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके उत्साह तथा प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि का समय प्रतीत होता है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकेंगे | किसी प्रकार का कोई लीगल केस यदि चल रहा है तो उसमें अनुकूल परिणाम की अपेक्षा की जा सकती है | साथ ही परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके कारण आपके आत्मबल में भी वृद्धि होगी | अपने तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा अथवा किसी Professional Course के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आय के नवीन अवसरों के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों अथवा पारिवारिक सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान का स्वभाव भी उग्र हो सकता है किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | परिवार में मंगल कार्यों का आयोजन हो सकता है | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर यों तो अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु आपका अपना स्वभाव इस अवधि में कुछ उग्र हो सकता है | यदि आपको ऐसा प्रतीत होता है तो ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास कीजिए | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता तथा भाई बहनों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | आपकी रूचि इस समय धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से दूसरे भाव में गोचर हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | आपकी वाणी इस अवधि में अधिक प्रभावशाली बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य होना चाहिए | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी प्रकार के पुरूस्कार, सम्मान अथवा पदोन्नति की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपकी राशि में हो रहा है | आप यदि कहीं दूर के शहर अथवा विदेश में कार्य करते हैं तो इस अवधि में आप वापस लौटने का मन बना सकते हैं | किन्तु आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी विदेशी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर किसी ऐसे स्थान पर हो सकता है जो आपके मन के अनुकूल न हो | किन्तु कार्य की दृष्टि से यह ट्रांसफर आपके हित में रहेगा | आपके अथवा आपके जीवन साथी के स्वभाव में इस अवधि में उत्तेजना में कुछ वृद्धि की भी सम्भावना है | अपने और जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपकी राशि से बारहवें भाव में एकादशेश सूर्य का गोचर एक ओर आय में वृद्धि के संकेत दे रहा है तो वहीं दूसरी ओर खर्चों में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि के भी योग प्रतीत होते हैं | ये यात्राएँ आपके लिए भाग्यवर्द्धक भी सिद्ध हो सकती हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का मतभेद भी हो सकता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | बड़े भाई, पिता तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आपके लिए कार्य तथा आय के नवीन स्रोत इस अवधि में उपस्थित हो सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है, किन्तु उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | एक ओर अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर कार्यक्षेत्र में किसी प्रकार के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | वक़ीलों और डॉक्टर्स के लिये यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | परिवार में किसी धार्मिक कार्य का आयोजन भी सम्भव है | किसी कारणवश आपको निराशा का अनुभव भी हो सकता है और इस कारण से आपकी स्वयं की रूचि भी धार्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है |

कुम्भ : आपके लिये यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो अपने पार्टनर के साथ आपका किसी बात पर विवाद हो सकता है जिसका विपरीत प्रभाव आपके कार्य पर पड़ सकता है | दाम्पत्य जीवन में भी कुछ अनबन हो सकती है | अच्छा यही रहेगा कि अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखें | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही यदि आप एक विद्यार्थी हैं तो आपके लिए भी अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | जीवन साथी अथवा व्यावसायिक पार्टनर एक साथ किसी प्रकार का विवाद उग्र रूप ले सकता है | परिवार के लोगों के साथ भी किसी प्रकार की बहस सम्भव है | तनाव के कारण आपके तथा आपके जीवन साथी के सर में दर्द, उच्च रक्त चाप जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि कार्य से कुछ समय निकाल कर कहीं घूमने चले जाएँ |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/09/16/sun-transit-in-virgo-2/

 

 

Advertisements

श्रद्धा और भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्व

श्रद्धा और भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्व

कल यानी बारह सितम्बर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी – क्षमावाणी – अपने द्वारा जाने अनजाने किये गए छोटे से अपराध के लिए भी हृदय से क्षमायाचना तथा दूसरे के पहाड़ से अपराध को भी हृदय से क्षमा कर देना – के साथ जैन मतावलम्बियों के दशलाक्षण पर्व का समापन हुआ | वास्तव में कितनी उदात्त भावना है क्षमावाणी पर्व के आचरण के पीछे | पहले दश दिनों तक सभी जैन मतावलम्बी दश लक्षणों का पालन करते हुए पूर्ण रूप से मन की शुद्धि का प्रयास करते हैं और अन्त में “खम्मामि सव्व जीवेषु सव्वे जीवा खमन्तु में, मित्ति मे सव्व भू ए वैरम् मज्झणम् केण वि” अर्थात “समस्त जीवों की किसी भी भूल के लिए हम हृदय से क्षमा करें, और अपनी समस्त ज्ञाताज्ञात त्रुटियों के लिए हम हृदय से क्षमायाचना करते हैं – समस्त जीव हमें क्षमादान दें, समस्त जीवों के साथ हमारा मैत्री का भाव रहे और किसी के साथ भी वैर न रहे” इस संकल्प के साथ अपनी समस्त ज्ञाताज्ञात भूलों के लिए प्राणीमात्र से क्षमा याचना करते हुए जीवमात्र के प्रति क्षमाशील होने का भी प्रयास करते हैं, जो अहिंसा का प्रथम सोपान है | यदि हम सभी अपने जीवन वास्तव में इस तथ्य को अपना लें तो किसी प्रकार के ईर्ष्या द्वेष लालच मोह अथवा किसी प्रकार के अपराध के लिए या किसी प्रकार की हिंसा के लिए स्थान ही नहीं रह जाएगा |

कल अनन्त चतुर्दशी का पावन पर्व भी था | इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्त सूत्र बांधा जाता है | मान्यता है कि जब पाण्डव जुए में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी के व्रत का पालन करने का सुझाव दिया था | धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनन्त सूत्र धारण किया | और इस व्रत के प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए |

मान्यताएँ जितनी भी हो और जैसी भी हों, सबकी अन्तर्निहित भावना जीवमात्र के प्रति सम्मान व्यक्त करने और सबके कल्याण की ही है | और यही भावना श्राद्धकर्म में भी परिलक्षित होती है | आज प्रौष्ठपदी पूर्णिमा है – दिवंगत पूर्वजों के स्मरण का पर्व श्राद्ध पर्व आज ही से आरम्भ हो रहा है | आज सूर्योदय काल में चतुर्दशी तिथि थी, किन्तु सात बजकर पैंतीस मिनट के लगभग विष्टि करण और धृति योग में पूर्णिमा तिथि का आगमन हो गया जो कल प्रातः दस बजकर तीन मिनट तक रहेगी | इसलिए पूर्णिमा का श्राद्ध आज ही होगा | आज दिन में दो बजकर 54 मिनट के लगभग भगवान भास्कर भी उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर चले जाएँगे | यों तो आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से 15 दिन के पितृ पक्ष का आरम्भ माना जाता है | जिनके प्रियजन पूर्णिमा को ब्रह्मलीन हुए हैं उनका श्राद्ध कुछ लोग अमावस्या के दिन करते हैं | लेकिन जो लोग पूर्णिमा को ही उनका श्राद्ध करना चाहते हैं उनके लिए श्राद्ध पक्ष आरम्भ होने से एक दिन पूर्व अर्थात भाद्रपद पूर्णिमा को भी करने का विधान है |

कल से कृष्ण प्रतिपदा के साथ आश्विन मास का भी आरम्भ हो जाएगा | कल से लेकर पितृ विसर्जनी अमावस्या यानी आश्विन मास की अमावस्या तक समस्त हिन्दू समुदाय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा सुमन समर्पित करेगा | अर्थात वैदिक मान्यता के अनुसार वर्ष का पूरा एक पक्ष ही पितृगणों के लिये समर्पित कर दिया गया है | जिसमें विधि विधान पूर्वक श्राद्धकर्म किया जाता है | शास्त्रों के अनुसार श्राद्धकर्म करने का अधिकारी कौन है, विधान क्या है आदि चर्चा में हम नहीं पड़ना चाहते, इस कार्य के लिये पण्डित पुरोहित हैं | पण्डित लोगों का तो कहना है और शास्त्रों में भी लिखा हुआ है कि श्राद्ध कर्म पुत्र द्वारा किया जाना चाहिये | प्राचीन काल में पुत्र की कामना ही इसलिये की जाती थी कि अन्य अनेक बातों के साथ साथ वह श्राद्ध कर्म द्वारा माता पिता को मुक्ति प्रदान कराने वाला माना जाता था “पुमान् तारयतीति पुत्र:” | लेकिन जिन लोगों के पुत्र नहीं हैं उनकी क्या मुक्ति नहीं होगी, या उनके समस्त कर्म नहीं किये जाएँगे ? हमारे कोई भाई नहीं है, माँ का स्वर्गवास अब से दस वर्ष पूर्व जब हुआ तो पिताजी भी उस समय तक गोलोक सिधार चुके थे | हमने अपनी माँ को मुखाग्नि भी दी और अब उनका तथा अपने पिता का दोनों का ही श्राद्ध भी पूर्ण श्रद्धा के साथ हम ही करते हैं | तो इस बहस में हम नहीं पड़ना चाहते | हम तो बात कर रहे हैं इस श्राद्ध पर्व की मूलभूत भावना श्रद्धा की – जो भारतीय संस्कृति की नींव में है |

भारतीय संस्कृति अत्यन्त प्राचीन है तथा आचार मूलक है | किसी भी राष्ट्र की संस्कृति की पहचान वहाँ के लोगों के आचरण से होती है | और भारतीय संस्कृति की तो नींव ही सदाचरण, सद्विचार, योग व भक्तिपरक उपासना, पुनर्जन्म में विश्वास तथा देव और पितृ लोकों में आस्था आदि पर आधारित है जिसका अन्तिम लक्ष्य है मोक्ष प्राप्ति अर्थात आत्म तत्व का ज्ञान | पितृगणों के प्रति श्राद्ध कर्म भी इसी प्रकार के सदाचरणों में से एक है | ब्रह्म पुराण में कहा गया है “देशे काले च पात्रे च श्राद्धया विधिना चयेत | पितृनुद्दश्य विप्रेभ्यो दत्रं श्राद्धमुद्राहृतम ||” – देश काल तथा पात्र के अनुसार श्रद्धा तथा विधि विधान पूर्वक पितरों को समर्पित करके दान देना श्राद्ध कहलाता है | स्कन्द पुराण के अनुसार देवता और पितृ तो इतने उदारमना होते हैं कि दूर बैठे हुए भी रस गंध मात्र से ही तृप्त हो जाते हैं | जिस प्रकार गौ शाला में माँ से बिछड़ा बछड़ा किसी न किसी प्रकार अपनी माँ को ढूँढ़ ही लेता है उसी प्रकार मन्त्रों द्वारा आहूत द्रव्य को पितृगण ढूँढ ही लेते हैं | इसी प्रकार याज्ञवल्क्य स्मृति में लिखा है कि पितृगण श्राद्ध से तृप्त होकर आयु, सन्तान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, राज्य एवं सभी प्रकार के सुख प्रदान करते हैं “आयु: प्रजां धनं विद्यां स्वर्गं मोक्षं सुखानी च, प्रयच्छन्ति तथा राज्यं प्रीता नृणां पितां महा: |” (याज्ञ. स्मृति: 1/270)

वास्तव में श्राद्ध प्रतीक है पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का | हिन्दू मान्यता के अनुसार प्रत्येक शुभ कर्म के आरम्भ में माता पिता तथा पूर्वजों को प्रणाम करना चाहिये | यद्यपि अपने पूर्वजों को कोई विस्मृत नहीं कर सकता, किन्तु फिर भी दैनिक जीवन में अनेक समस्याओं और व्यस्तताओं के चलते इस कार्य में भूल हो सकती है | इसीलिये हमारे ऋषि मुनियों ने वर्ष में पूरा एक पक्ष ही इस निमित्त रखा हुआ है |

इस प्रकार श्रद्धावान होना चारित्रिक उत्थान का, ज्ञान प्राप्ति का तथा एक सुदृढ़ नींव वाले पारिवारिक और सामाजिक ढाँचे का एक प्रमुख सोपान है | फिर पितृजनों के प्रति श्रद्धायुत होकर दान करने से तो निश्चित रूप से अपार शान्ति का अनुभव होता है तथा शास्त्रों की मान्यता के अनुसार लोक परलोक संवर जाता है | इसीलिए श्राद्धपक्ष का इतना महत्व हिन्दू मान्यता में है | भारतीय संस्कृति एवं समाज में अपने पूर्वजों और दिवंगत माता पिता का इस श्राद्ध पक्ष में श्रद्धा पूर्वक स्मरण करके श्रद्धापूर्वक दानादि के द्वारा उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किये जाते हैं | इस अवसर पर दिये गए पिण्डदान का भी अपना विशेष महत्व होता है | श्राद्ध कर्म में पके चावल, दूध और तिल के मिश्रण से पिण्ड बनाकर उसे दान करते हैं | पिण्ड का अर्थ है शरीर | यह एक पारम्परिक मान्यता है कि हर पीढ़ी में मनुष्य में अपने मातृकुल तथा पितृकुल के गुणसूत्र अर्थात वैज्ञानिक रूप से कहें तो जीन्स उपस्थित रहते हैं | इस प्रकार यह पिण्डदान का प्रतीकात्मक अनुष्ठान उनकी तृप्ति के लिये होता है जिन लोगों के गुणसूत्र श्राद्ध करने वाले की अपनी देह में विद्यमान होते हैं |

प्रस्तुत है श्राद्ध की तिथियाँ…

शुक्रवार 13 सितंबर पूर्णिमा का श्राद्ध

शनिवार 14 सितंबर प्रतिपदा का श्राद्ध (उदया तिथि पूर्णिमा) – तर्पण कार्य दस बजकर चार मिनट के बाद

रविवार 15 सितंबर द्वितीया का श्राद्ध – (उदया तिथि प्रतिपदा) – दिन में बारह बजकर चौबीस मिनट तक प्रतिपदा उसके बाद द्वितीया, अतः तर्पण कार्य बारह बजकर चौबीस मिनट के बाद | जो लोग उदया तिथि मानते हैं वे इससे पूर्व प्रतिपदा का श्राद्ध कर सकते हैं |

सोमवार 16 सितंबर – द्वितीया का श्राद्ध – तृतीया का आगमन दिन में दो बजकर पैंतीस मिनट के बाद | अतः तृतीया का श्राद्ध 17 सितंबर को |

मंगलवार 17 सितंबर तृतीया का श्राद्ध |

बुधवार 18 सितंबर चतुर्थी का श्राद्ध |

गुरुवार 19 सितंबर पंचमी का श्राद्ध |

शुक्रवार 20 सितंबर षष्ठी का श्राद्ध |

शनिवार 21 सितंबर सप्तमी का श्राद्ध |

रविवार 22 सितंबर अष्टमी का श्राद्ध |

सोमवार 23 सितंबर नवमी का श्राद्ध |

मंगलवार 24 सितंबर दशमी का श्राद्ध |

बुधवार 25 सितंबर एकादशी का श्राद्ध |

गुरुवार 26 सितंबर द्वादशी / त्रयोदशी का श्राद्ध |

शुक्रवार 27 सितंबर चतुर्दशी का श्राद्ध |

शनिवार 28 सितंबर अमावस्या का श्राद्ध – पितृ विसर्जन – महालया |

तो आइये श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा-सुमन समर्पित करें…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/09/13/festival-of-reverence-and-devotion/

 

 

 

 

श्री कृष्ण जन्म महोत्सव

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

कल और परसों पूरा देश जन साधारण को कर्म, ज्ञान, भक्ति, आत्मा आदि की व्याख्या समझाने वाले युग प्रवर्तक परम पुरुष भगवान् श्री कृष्ण का 5246वाँ जन्मदिन मनाने जा रहा है | कल स्मार्तों (गृहस्थ लोग, जो श्रुति स्मृतियों में विश्वास रखते हैं तथा पञ्चदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश और माँ पार्वती की उपासना करते हैं) का व्रत है और परसों वैष्णवों (विष्णु के उपासक तथा गृहस्थ धर्म से यथासम्भव दूरी बनाकर चलने वाला सम्प्रदाय) का | नन्दोत्सव भी 24 को ही है | अष्टमी तिथि का आरम्भ कल प्रातः आठ बजकर दस मिनट पर होगा और परसों प्रातः आठ बजकर बत्तीस मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी | अष्टमी तिथि में कल 27:48 यानी अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर अड़तालीस मिनट के लगभग कौलव करण और व्याघात योग में चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र पर गमन करेगा तथा 25 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर चौदह मिनट तक चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र पर ही रहेगा | अतः कल यानी 23 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रहेगा ताकि रोहिणी नक्षत्र में उसका समापन किया जा सके | जो लोग केवल दिन का व्रत रखते हैं वे उदया तिथि में 24 अगस्त को कर सकते हैं और उसी दिन रात्रि में व्रत का पारायण भी कर देंगे | 25 अगस्त को आठ बजकर दस मिनट तक नवमी तिथि है, अतः नवमी की पूजा अपनी सुविधानुसार 24 और 25 किसी भी दिन की जा सकती है, किन्तु उदया तिथि मानने वालों को 25 अगस्त को ही करनी होगी |

कृष्ण बनना वास्तव में बहुत कठिन है | क्योंकि कृष्ण, एक ऐसा व्यक्तित्व जो अव्यक्त होते हुए भी व्यक्त ब्रह्म है, जो मूलतः नर और नारायण दोनों है, जो स्वयंभू हैं | द्युलोक जिनका मस्तक है, आकाश नाभि, पृथिवी चरण, अश्विनीकुमार नासिका, सूर्य चन्द्र तथा समस्त देवता जिनकी विभिन्न देहयष्टियाँ हैं | जो प्रलयकाल के अन्त में ब्रह्मस्वरूप में प्रकट हुए तथा सृष्टि का विस्तार किया | ऐसे परम पुरुष भगवान् श्री कृष्ण का जन्म दिवस कल सारा देश मनाने जा रहा है |

देश भर में श्री कृष्ण के अनेक रूपों की उपासना की जाती है | जैसे जगन्नाथपुरी में भगवान् जगन्नाथ के रूप में समस्त जगत यानी संसार के नाथ यानी स्वामी हैं | केरल के गुरुवयूर में बालरूप में विद्यमान हैं, उडुपी में भी हाथ में मक्खन लिए हुए बालक के रूप में प्रतिष्ठित हैं – जो प्रतीक है इस तथ्य का यदि मनुष्य का मन नन्द के माखन चोर लला के समान निश्छल और मधुर रहेगा तो संसार में केवल प्रेम ही प्रेम प्रसारित होगा | विश्व प्रसिद्ध बाँके बिहारी मन्दिर में हाथ में वंशी थामे नृत्य की मुद्रा में तिरछे खड़े हैं और सन्देश दे रहे हैं कि जन मानस में परस्पर एक दूसरे के प्रति और समस्त जड़ चेतन के प्रति सद्भावना, प्रेम तथा सहयोग का भाव होगा तो विश्व में अशान्ति का कोई कारण ही नहीं होगा और जन जन का मन प्रेम की मस्ती में नृत्य कर उठेगा |

राजस्थान के प्रसिद्ध नाथद्वारा में श्रीनाथ जी के रूप में हाथ पर गोवर्धन पर्वत उठाए मानों घोषणा कर रहे हैं कि प्रकृति से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, अपितु आवश्यकता है प्रकृति को हानि पहुँचाए बिना उसके साथ प्रेम और आत्मीयता का सम्बन्ध स्थापित करने की – तब प्रकृति भी प्रतिदान स्वरूप न केवल हमारी सुरक्षा करेगी अपितु हमारा समुचित भरण पोषण भी करेगी |

इसी तरह से गुजरात में श्री कृष्ण रणछोड़ के रूप में उपस्थित हैं | जरासंध के साथ युद्ध के समय कृष्ण युद्धभूमि से भाग आए | सबने समझा पीठ दिखाकर भागे हैं, किन्तु पूर्ण रूप से योजना बनाकर फिर से युद्ध के लिए वापस लौटे | रणछोड़ का चरित्र भी वास्तव में सन्देश देता है कि किसी भी कार्य को यदि सुनियोजित विधि से किया जाएगा तो सफलता निश्चित है, साथ ही ये भी कि यदि कभी असफलता का सामना हो भी जाए तो उससे घबराकर पलायन नहीं कर जाना चाहिए अपितु स्वयं को उस परीक्षा के लिए पुनः पूर्ण रूप से तैयार करके आगे बढ़ना चाहिए |

कहीं एक स्थान पर – सम्भवतः चेन्नई में – भगवान् कृष्ण मूँछों के साथ दिखाई देते हैं | मूँछें प्रतीक हैं पुरुषत्व का – और भगवान् कृष्ण का तो जन्म ही इसी कारण हुआ था कि उन्हें पृथिवी से अधर्म और अत्याचार का अन्त करके धर्म और सदाचार की पुनर्स्थापना करनी थी – और इस कार्य के लिए पूर्ण पौरुष की आवश्यकता थी |

इस प्रकार अनेक स्थानों पर भगवान् श्री कृष्ण की अनेकों रूपों में पूजा अर्चना की जाती है, किन्तु उन सभी रूपों का सन्देश केवल यही है कि समस्त जड़ चेतन के प्रति दया, करुणा, प्रेम और सहृदयता का भाव रखते हुए परस्पर सहयोग करते हुए सुनियोजित रीति से यदि कार्य किया जाएगा तो न केवल विश्व में शान्ति और आनन्द का वातावरण विद्यमान रहेगा अपितु मनुष्य को अपने लक्ष्य की प्राप्ति में भी सफलता प्राप्त होगी | और उस सबसे भी अधिक ये कि जब व्यक्ति अपने समस्त भावों का अभाव करके भक्ति की पराकाष्ठा पर पहुँच जाता है तब वह अपने ईश्वर – अपने ब्रह्म – अपनी आत्मा – के साथ एकरूप हो जाता है – कोई भेद दोनों में नहीं रह जाता – और यही है वास्तविक मोक्ष…

अस्तु, भगवान् श्री कृष्ण के महान चरित्र से प्रेरणा लेते हुए हम सभी नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते हुए नि:स्वार्थ प्रेम, सद्भावना और सहयोग के मार्ग पर अग्रसर रहे तथा प्रकृति की रक्षा का संकल्प अपने मन में धारण करें… इसी कामना के साथ सभी को समस्त कलाओं से युक्त परम पुरुष भगवान् श्री कृष्ण के जन्म महोत्सव – श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हारिक बधाई और अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/22/shree-krishna-janmashtami-4/

सूर्य का सिंह में गोचर

सूर्य का सिंह में गोचर

कल भाद्रपद कृष्ण द्वितीया यानी 17 अगस्त को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग गर करण और अतिगण्ड योग में सूर्यदेव अपने मित्र ग्रह चन्द्र की कर्क राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि सिंह और मघा नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएँगे | यहाँ भ्रमण करते हुए 31 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और चौदह सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 सितम्बर को दिन में एक बजकर तीन मिनट के लगभग बुध की कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | शुक्र और बुध का तो अधिकाँश में सूर्य को साथ मिलता ही है, मंगल भी इस पूरी यात्रा में सूर्य के साथ सिंह राशि में ही रहेगा | सिंह सूर्य की मूल त्रिकोण राशि भी है | और जब कोई ग्रह अपनी मूल त्रिकोण राशि अथवा अपनी उच्च राशि में आता है तो वह बली माना जाता है |

इस बीच भगवान् श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव श्री कृष्ण जन्माष्टमी भी है – 23 अगस्त को स्मार्तों की और 24 अगस्त को वैष्णवों की | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी यानी 27 अगस्त से श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय का पञ्चमी पक्ष का पर्यूषण पर्व भी आरम्भ होने जा रहा है, और उसके समाप्त होते ही दूसरे दिन यानी 3 सितम्बर भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से दिगम्बरों के दशदिवसीय साम्वत्सरिक पर्व पजूसन पर्व का भी आरम्भ हो जाएगा जो कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा यानी अनंतचतुर्दशी को संपन्न होगा | पहली सितम्बर को हरतालिका तीज, दो सितम्बर को गणेश चतुर्थी, तीन सितम्बर को ऋषिपञ्चमी, दस सितम्बर को वामन जयंती और तेरह प्रौष्ठपदी पूर्णिमा को पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ ही दिवंगतों के प्रति श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष भी आरम्भ हो जाएगा | इस प्रकार भगवान् भास्कर के सिंह राशि में प्रस्थान के साथ ही इतने सारे व्रत उपवास तथा पर्वों का आरम्भ होने जा रहा है, जिनके लिए सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…  

अब जानने का प्रयास करते हैं सिंह राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

 

मेष : आपकी राशि से पंचमेश पंचम भाव में ही गोचर कर रहा है | यदि आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा अथवा किसी Professional Course के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | आय के नवीन अवसरों के साथ ही मन सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आपके साथ Romantically involve हो सकते हैं जो धीरे धीरे विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | आपकी सन्तान का स्वभाव भी उग्र हो सकता है किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपको अपनी माता का सुख प्राप्त होगा वहीं दूसरी ओर आपके पिता के लिए किसी प्रकार के शारीरिक कष्ट की सम्भावना भी हो सकती है | आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा अपने स्वयं के व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | जो कार्य अब तक रुके हुए थे उनके भी पूर्ण होने की सम्भावना है | परिवार में मंगल कार्यों का आयोजन हो सकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर तृतीय भाव में ही हो रहा है | आपके लिए मान सम्मान और यश में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | साथ ही आपके उत्साह में भी इस अवधि में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर द्वितीय भाव में ही हो रहा है | आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि के योग हैं | परिवार में तथा कार्य स्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण रहने की सम्भावना है | किन्तु इसके साथ ही आपका स्वभाव भी उग्र हो सकता है | साथ ही नेत्रों से सम्बन्धित कोई समस्या, किसी प्रकार की फोड़े फुंसी आदि की समस्या अथवा मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन या उच्च रक्तचाप की समस्या भी हो सकती है | इस सबसे बचने के लिए खान पान पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | ध्यान और प्राणायम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी ही राशि में गोचर विशेष रूप से लाभप्रद प्रतीत होता है | आपकी ऊर्जा में वृद्धि तथा व्यक्तित्व में ओज के ही साथ आपके कार्य में भी प्रगति की सम्भावना है | आपके व्यक्तित्व का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा और इस कारण आपके मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो बड़े भाई का सहयोग भी प्राप्त रह सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपने क्रोध को नियन्त्रण में रखना होगा | आपको अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपके द्वादश भाव में ही हो रहा है | यदि आपका कार्य कहीं विदेशों से सम्बद्ध है तो कार्य में प्रगति तथा विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | ननिहाल के पक्ष से किसी प्रकार का मनमुटाव सम्भव है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो इस अवधि में उसका निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | आपके लिए एक ओर जहाँ किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर नेत्र सम्बन्धी विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं |

तुला : आपकी राशि से एकादश भाव में सूर्य का गोचर आय में वृद्धि की ओर तथा नौकरी में पदोन्नति की ओर संकेत करता है | आपका अपना कार्य है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का मतभेद भी हो सकता है | आप कोई नया वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं | आपके अपने स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | छात्रों के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर दशम भाव में ही हो रहा है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | आपके लिए कार्य तथा आय के नवीन स्रोत इस अवधि में उपस्थित हो सकते हैं | परिवार में किसी प्रकार के मंगल कार्य की भी सम्भावना है | किन्तु आपको अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही यदि आप गर्भवती महिला हैं और डिलीवरी निकट है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है | किसी रोग से मुक्ति भी इस अवधि में संभव है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश अष्टम भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके कार्य में आपके स्वयं के अथवा आपके पिता या परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य के कारण विघ्न उपस्थित हो सकता है | अचानक ही आपके विरोधियों के भी स्वर मुखर हो सकते हैं | आपको स्वयं को ज्वर, मानसिक तनाव के कारण माइग्रेन, उच्च रक्तचाप अथवा नेत्र विकार अथवा गुप्तांगों से सम्बंधित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु खान पान पर ध्यान देंगे और अपने स्वभाव को संयमित रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं |

कुम्भ : आपके लियेः गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति की सम्भावना है | किन्तु आपके बिजनेस पार्टनर का स्वभाव इस अवधि में कुछ उग्र हो सकता है | साथ ही दाम्पत्य जीवन में जीवन साथी का सहयोग और साथ तो प्राप्त रहेगा किन्तु उसके स्वभाव की उग्रता के कारण आपको मानसिक तनाव हो सकता | अच्छा यही रहेगा कि अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखें | दूर पास की यात्राओं के योग भी बन रहे हैं |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर छठे भाव में ही हो रहा है | एक ओर आपके विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर आपके उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने विरोधियों पर स्वयं ही विजय प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | किसी प्रकार का कोई लीगल केस का भी सामना करना पड़ सकता है | किन्तु साथ ही परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके कारण आपके आत्मबल में भी वृद्धि होगी | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपके ननिहाल के पक्ष के साथ या तो मनमुटाव हो सकता है अथवा किसी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | आपकी अपनी भी किसी प्रकार की सर्जरी इस अवधि में संभव है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/16/sun-transit-in-leo-2/

 

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्रवार सोलह अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को तैतिल करण और अतिगण्ड योग में रात्रि आठ बजकर चालीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र प्रस्थान होगा | यद्यपि इस दिन सूर्योदय काल में प्रतिपदा तिथि है किन्तु शुक्र के गोचर के समय द्वितीया तिथि रहेगी | शुक्र इस समय अस्त चल रहा है | शिंह राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र 28 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा आठ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ अन्त में नौ सितम्बर को 25:42 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर बयालीस मिनट) के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपनी इस पूरी यात्रा के दौरान शुक्र अस्त ही रहेगा |

इस बीच पन्द्रह अगस्त को स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के साथ ही परस्पर भाईचारे और सद्भावना के प्रतीक रक्षा बंधन का उल्लासमय पर्व भी है | 18 अगस्त को कजरी तीज, 21 अगस्त को बलराम जयंती, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जयंती का पर्व जन्माष्टमी, एक सितम्बर को हरतालिका तीज, दो को गणेश चतुर्थी और तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी जैसे कुछ विशेष पर्व भी हैं | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ…

मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | सिंह राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से चतुर्थ भाव और तुला से एकादश भाव बनता है, तथा सिंह राशि के लिए शुक्र तृतीयेश और दशमेश है | इन्हीं समस्त तथ्यों एक आद्धार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | हाथ के कारीगरों और सर्जन आदि के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी रोग से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/13/venus-transit-in-leo-2/

मंगल का सिंह में गोचर

मंगल का सिंह में गोचर

कल शुक्रवार नौ अगस्त यानी श्रावण शुक्ल नवमी को सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व चार बजकर सैंतालीस मिनट के लगभग मंगल अपने एक मित्र चन्द्र की कर्क राशि से निकल कर दूसरे मित्र ग्रह सूर्य की राशि सिंह में और मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा तथा अस्त होगा और 22 अक्टूबर तक अस्त ही रहेगा | इस प्रस्थान के समय कौलव करण और ब्रह्म योग होगा | सिंह राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 30 अगस्त से पूर्वा फाल्गुनी तथा 21 सितम्बर से उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 25 सितम्बर को प्रातः छह बजकर तैंतीस मिनट के लगभग शत्रु ग्रह बुध की राशि कन्या में प्रस्थान कर जाएगा |

इस बीच 15 अगस्त को हमारा राष्ट्रीय पर्व स्वतन्त्रता दिवस, रक्षा बन्धन, गायत्री जयन्ती तथा श्रावण पूर्णिमा के उल्लासमय पर्व है, 18 अगस्त को कजरी तीज, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी, पहली सितम्बर को हरतालिका तीज है, तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी, छह सितम्बर को राधाष्टमी, बारह सितम्बर को अनन्त चतुर्दशी के पावन पर्वों के साथ ही तेरह सितम्बर को प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से पूर्णिमा के श्राद्ध से श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष भी आरम्भ हो जाएगा | अतः सर्वप्रथम सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

सिंह राशि में संचार करते हुए मंगल की दृष्टियाँ अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक तथा कुम्भ और मीन राशियों पर रहेंगी | इस प्रकार सिंह राशि के साथ ही ये तीनों राशियाँ भी इस गोचर से अधिक प्रभावित हो सकती हैं | सिंह राशि के लिए मंगल चतुर्थेश और नवमेश होकर योगकारक भी है | मंगल की एक राशि मेष से सिंह राशि पञ्चम भाव तथा वृश्चिक से दशम भाव बनती है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके राश्यधिपति और अष्टमेश का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित Advanve course के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा एकादश भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित नहीं रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है अतः योग ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल तो प्रतीत होता है किन्तु साथ ही विरोधियों की संख्या में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/08/mars-transit-in-leo/

 

नक्षत्र एक विश्लेषण

प्रत्येक नक्षत्र के अनुसार जातक की चारित्रिक विशेषताएँ तथा उसका व्यक्तित्व

हम बात कर रहे हैं अश्विनी नक्षत्र के विषय में | इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है, बड़ी और चमकदार आँखें होती हैं और चौड़ा मस्तक होता है | स्वास्थ्य सामान्यतः अच्छा रहता है | साहित्य और अस्न्गीत में सी जातक की रूचि हो सकती है | शुद्ध हृदय इस जातक की वाणी मधुर होती है | यह जातक विद्वान्, स्थिर प्रकृति, अपने कार्यों में कुशल, विश्वसनीय तथा अपने परिवार में सम्मानित व्यक्ति होता है | आत्मसम्मान की भावना उसमें कूट कूट कर भरी होती है और जब दूसरे उसका सम्मान करते हैं तो उसे बहुत अच्छा लगता है | आर्थिक रूप से सम्भव हो मध्यम स्तर का हो, किन्तु दयालु तथा दानादि करने वाला होता है और धार्मिक प्रकृति का होता है | छोटी से छोटी बातों को बारीकी से देखना इसका स्वभाव होता है और दूसरों की छोटी से छोटी भूल की ओर इशारा करने में इसे संकोच नहीं होता | यह जातक आज्ञाकारी, सत्यवादी, अपने अधीनस्थ लोगों की तथा परिवार के लोगों की देखभाल करने वाला, अच्छे स्वभाव का, कार्य को समय पर पूर्ण करने वाला तथा वेद शास्त्रों का ज्ञाता भी हो सकता है |

यदि जातक की कुण्डली में यह नक्षत्र अशुभ प्रभाव में होगा तो जातक अहंकारी हो सकता है तथा अकारण ही घूमते रहने में इसकी रूचि हो सकती है | अशुभ प्रभाव में होने पर जातक दूसरों को धोखा भी दे सकता है तथा आर्थिक रूप से दूसरों पर आश्रित भी रह सकता है | विवाहित व्यक्तियों के साथ सम्बन्ध बनाना ऐसे जातक अक स्वभाव हो सकता है | गठिया बुखार, शरीर में दर्द अथवा स्मृतिहीनता जैसी समस्या से ग्रस्त हो सकता है |

इस नक्षत्र का प्रथम चरण “तस्करांश” कहलाता है, दूसरा चरण “भोग्यांश”, कहलाता है, तीसरा चरण “विलक्षणान्श” और चतुर्थ चरण “धर्मांश” कहलाता है | प्रथम तीन चरणों में उत्पन्न जातक प्रायः अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि से होते हैं और साहसी, धनी, उत्तम भोजन करने वाले, पढ़े लिखे होते हैं किन्तु अकारण ही बेचैन रहते हैं और Restless होते हैं तथा सदा लड़ने को तत्पर रहते हैं | जीवन में समस्त सुखों का उपभोग करते हैं | Highly sexy हो सकते हैं और दूसरों के जीवन साथी के साथ इनके सम्बन्ध हो सकते हैं | चतुर्थ पाद में जन्म लेने वाले जातक प्रायः ईश्वरभक्त होते हैं और धनी तथा दयालु होते हैं |

अधोमुखी यह नक्षत्र तमोगुण प्रधान नक्षत्र है तथा नक्षत्र पुरुष की दाहिनी जँघा में इसका निवास माना गया है | वैदिक पञ्चांग के अनुसार यह नक्षत्र अश्विनी माह का प्रमुख नक्षत्र है – जो सितम्बर-अक्टूबर के मध्य आता है | मेष राशि में 13 डिग्री बीस मिनट तक इसका विस्तार होता है | इस नक्षत्र से सम्बन्धित वस्तुएँ हैं अश्व, उत्तम वस्त्राभूषण, वाहन तथा लोहे और स्टील से निर्मित अन्य वस्तुएँ |

औषधि ग्रहण करने के लिए तथा स्वास्थ्य में सुधार सम्बन्धी कार्य आरम्भ करने के लिए यह नक्षत्र अत्यन्त अनुकूल माना जाता है | इसके अतिरिक्त यात्रा आरम्भ करने के लिए, कृषिकर्म आरम्भ करने के लिए, बच्चे को प्रथम बार विद्यालय भेजने के लिए, गृहनिर्माण आरम्भ करने और गृहप्रवेश के लिए तथा अन्य भी सभी प्रकार के शुभ कार्यों का आरम्भ करने के लिए यह नक्षत्र शुभ माना जाता है | हाथी और घोड़ों की ख़रीद फ़रोख्त के लिए तथा नए वाहन में प्रथम बार यात्रा करने के लिए और नवीन वस्त्राभूषण धारण करने के लिए भी यह नक्षत्र अनुकूल माना गया है | किन्तु विवाह से सम्बन्धित कार्यों के लिए यह नक्षत्र शुभ नहीं माना जाता |

यदि यह नक्षत्र अशुभ प्रभाव में हो तो उस अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए घोड़ों के सहित रथ दान करने का अथवा पितृ कर्म करने का सुझाव दिया जाता है | इस युग में रथ घोड़े आदि दान करना सम्भव नहीं अतः ज्योतिषी घोड़े सहित रथ की मूर्ति दान करने का सुझाव देते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/07/20/constellation-nakshatras-49/