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सूर्य का वृश्चिक में गोचर

कल मार्गशीर्ष कृष्ण पञ्चमी यानी शनिवार को 24:51 (अर्द्धरात्र्योत्तर बारह बजकर इक्यावन मिनट) के लगभग भगवान भास्कर विशाखा नक्षत्र पर रहते हुए ही कौलव करण और साध्य योग में तुला राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | अपनी इस यात्रा के दौरान आत्मा के कारक सूर्यदेव 20 नवम्बर से अनुराधा तथा 3 दिसम्बर से ज्येष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 16 दिसम्बर को दिन में 3:28 के लगभग गुरुदेव की राशि धनु और मूल नक्षत्र में प्रविष्ट हो जाएँगे | वृश्चिक राशि से सूर्य दशमेश है तथा सूर्य की अपनी राशि सिंह से वृश्चिक राशि पञ्चम भाव बनती है | इस प्रकार इन दोनों राशियों के लिए तो यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | 24 नवम्बर को मंगल भी वृश्चिक में प्रस्थान कर जाएगा |

इस बीच 19 को काल भैरव जयन्ती, 22-23 को उत्पन्ना एकादशी, 24 नवम्बर और नौ दिसम्बर को प्रदोष व्रत और ग्यारह दिसम्बर को दत्तात्रेय जयन्ती है | ये सभी पर्व आपके लिए मंगलमय हों…

अब संक्षेप में जानने का प्रयास करते हैं कि वृश्चिक राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं… किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य यानी Common हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है…

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी भी स्थिति में आपके माता पिता तथा अधिकारीवर्ग का सहयोग और समर्थन दोनों आपको प्राप्त रहेंगे | अचानक ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती हैं और आर्थिक स्थिति भी और अधिक दृढ़ हो सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में विवाह के विषय में ही विचार कर सकते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने के लिए अपने स्वभाव को नियन्त्रण में रखना होगा | आपकी सन्तान तथा आपके पिता के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण रखा तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | परिवारजनों तथा मित्रों का का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | आप सपरिवार कहीं भ्रमण के लिए जाने का कार्यक्रम भी इस अवाही में बना सकते हैं | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की आपकी तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | कोई प्रेम सम्बन्ध भी विवाह में परिणत हो सकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | सम्पत्ति विषयक कोई विवाद आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है | छोटे भाई बहनों के साथ कोई विवाद गम्भीर रूप ले सकता है | किन्तु अपने पिता की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझाने में समर्थ हो सकते हैं | कार्यस्थल में सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं में भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सूर्य की उपासना आपके लिए उचित रहेगी |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके पञ्चम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | आप अथवा आपकी सन्तान अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Short Term Advance Course भी इस अवधि में कर सकते हैं | आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी सम्भव है | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको किसी पद की प्राप्ति हो सकती है | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उनका सहयोग भी आपको उपलब्ध रहेगा |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से तथा पारिवारिक स्तर पर यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके माता पिता तथा सहकर्मियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है अथवा किसी प्रकार की Alternative Healing से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | किन्तु अपनी माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर हो रहा है | आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्रा करनी पड़ सकती है | यह भी सम्भव है कि आप सपरिवार कहीं भ्रमण के लिए चले जाएँ | छोटे भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव का अनुभव कर सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपके एकादशेश का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | आय में वृद्धि के संकेत हैं | बड़े भाई तथा पिता का सहयोग आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो अधिकारियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रह सकता है | साथ ही किसी सम्मान प्राप्ति की सम्भावना भी है | स्वस्थ रहने तथा सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए खान पान पर तथा वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली बनी हुई है, उसका प्रभाव दूसरों पर अवश्य पड़ेगा | किन्तु प्रेम सम्बन्धों के लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता है | प्रेम सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है अथवा प्रेम सम्बन्ध टूट भी सकता है | अपना व्यवहार सन्तुलित नहीं रखा तो जीवन साथी के साथ भी सम्बन्धों में दरार उत्पन्न हो सकती है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | इन यात्राओं के दौरान कुछ नवीन सम्पर्क भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है | आप अपना निवास बदल सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ स्थानान्तरण भी सम्भव है | धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए जा सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | किन्तु ड्राइविंग करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके एकादश भाव में हो रहा है | एकादश भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में अकस्मात् किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होने की सम्भावना है | किसी मित्र अथवा बड़े भाई के साथ सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु यदि समझदारी से काम लिया तो कुछ नया कार्य आरम्भ करके उसे आगे भी बढ़ा सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके सप्तमेश का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | पार्टनरशिप में जिन लोगों का कार्य है उनके लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | साथ ही पॉलिटिक्स से जो लोग सम्बन्ध रखते हैं उन लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उन्हें किसी पद की प्राप्ति भी हो सकती है | परिवार में किसी बच्चे के जन्म की भी सम्भावना इस अवधि में है | साथ ही परिवार में कुछ तनाव की भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है | माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | किसी पुराने रोग से भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है – अथवा ऐसा भी सम्भव है कि किसी रोग की पहचान होकर उसके उचित दिशा में इलाज़ का मार्ग प्रशस्त हो जाए | यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु ये यात्राएँ सम्भव है आपके लिए बहुत अधिक सुगम्य न हों |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/15/sun-transit-in-scorpio-2/

 

देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह

हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है | Astrologers तथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमें से आषाढ़ शुक्ल एकादशी को जब सूर्य मिथुन राशि में संचार करता है तब उसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | इस एकादशी को पद्मनाभा भी कहा जाता है | तथा उसके लगभग चार माह बाद सूर्य के तुला राशि में आ जाने पर आने वाली कार्तिक शुक्ल एकादशी देव प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी के नाम से जानी जाती है | मान्यता है कि इन चार महीनों में – जिन्हें चातुर्मास कीं संज्ञा दी गई है – भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन हेतु प्रस्थान कर जाते हैं | भगवान विष्णु की इस निद्रा को योग निद्रा भी कहा जाता है | इस अवधि में यज्ञोपवीत, विवाह, गृह प्रवेश आदि संस्कार वर्जित होते हैं | इस वर्ष कल यानी गुरूवार सात नवम्बर को प्रातः 9:55 पर एकादशी तिथि आरम्भ हो जाएगी, किन्तु दशमीवेधी होने के कारण एकादशी का व्रत शुक्रवार नौ नवम्बर को ही रखा जाएगा | इस दिन उदयकाल में एकादशी तिथि होगी और दिन में बारह बजकर तेईस मिनट तक रहेगी |

कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि का आरम्भ कल दिन में बारह बजकर चौबीस मिनट पर होगा और नौ तारीख को दोपहर दो बजकर अड़तीस मिनट तक रहेगी | अर्थात सूर्योदय काल में नौ तारीख को द्वादशी होने के कारण इसी दिन तुलसी विवाहतुलसी विवाह का कार्यक्रम आरम्भ हो जाएगा जो कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा यानी बारह नवम्बर को सम्पन्न होगा | नौ तारीख को ही प्रदोष का व्रत भी है | आँवला, वट वृक्ष, पीपल के वृक्ष तथा तुलसी आदि की पूजा केवल धार्मिक रीति रिवाज़ भर ही नहीं हैं अपितु इनके माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना में वृद्धि के निमित्त इन पर्वों का आयोजन वैदिक सभ्यता का प्रमुख अंग रहा है | वृक्षों की पूजा अर्चना करने के बाद अथवा तुलसी विवाह के जैसे धार्मिक व्यवहार करने के बाद वृक्षों को किसी भी प्रकार कष्ट पहुँचाने का कोई प्रयास भी नहीं कर सकेगा – मूलभूत भावना यही थी इन पर्वों के आयोजन के पीछे |

भारतीय संस्कृति में व्रतादि का विधान पूर्ण वैज्ञानिक आधार पर मौसम और प्रकृति को ध्यान में रखकर किया गया है | चातुर्मास अर्थात आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर श्रावण, भाद्रपद, आश्विन तथा कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार महीने वर्षा के माने जाते हैं | भारत कृषि प्रधान देश है इसलिए वर्षा के ये चार महीने कृषि के लिए बहुत उत्तम माने गए हैं | किसान विवाह आदि समस्त सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त रहकर इस अवधि में पूर्ण मनोयोग से कृषि कार्य कर सकता था | आवागमन के साधन भी उन दिनों इतने अच्छे नहीं थे | साथ ही चौमासे के कारण सूर्य चन्द्र से प्राप्त होने वाली ऊर्जा भी मन्द हो जाने से जीवों की पाचक अग्नि भी मन्द पड़ जाती है | अस्तु, इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए जो व्यक्ति इन चार महीनों में जहाँ होता था वहीं रहकर अध्ययन अध्यापन करते हुए आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करता था तथा खान पान पर नियन्त्रण रखता था ताकि पाचन तन्त्र उचित रूप से कार्य कर सके | और वर्षा ऋतु बीत जाते ही देव प्रबोधिनी एकादशी से समस्त कार्य पूर्ववत आरम्भ हो जाते थे |

सुप्तेत्वयिजगन्नाथ जगत्सुप्तंभवेदिदम् ।

विबुद्धेत्वयिबुध्येतजगत्सर्वचराचरम् ॥

हे जगन्नाथ ! आपके सो जाने पर यह सारा जगत सो जाता है तथा आपके जागने पर समस्त चराचर पुनः जागृत हो जाता है तथा फिर से इसके समस्त कर्म पूर्ववत आरम्भ हो जाते हैं…

इस दिन केरल में गुरुवयूर मन्दिर में इस दिन विशेष अर्चना की जाती है तथा इसे गुरुवयूर एकादशी के नाम से ही जाना जाता है | कुछ स्थानों पर इसे योगेश्वर अथवा रुक्मिणी द्वादशी भी कहा जाता है और विष्णु भगवान् के कृष्ण रूप की उपासना उनकी पटरानी रुक्मिणी देवी के साथ की जाती है | ऐसा इसलिए क्योंकि रुक्मिणी वास्तव में प्रेम-भक्ति और समर्पण का एक अद्भुत सामन्जस्य थीं | कृष्ण को देखना तो दूर उनसे मिली तक नहीं थीं, केवल उनके विषय में सुन भर रखा था और इतने से ही उनके लिए मन में प्रेम बसा लिया, और प्रेम भी इतना प्रगाढ़ कि उनके प्रति मन ही मन पूर्ण रूप से समर्पित हो गईं – पूर्ण रूप से प्रेम मिश्रित भक्ति भाव का समर्पण था यह | सम्भवतः इसीलिए कुछ स्थानों पर भगवान् श्री कृष्ण के साथ उनकी पट्टमहिषी रुक्मिणी की पूजा भी की जाती है |

कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक की पाँच तिथियाँ भीष्म पंचक के नाम से भी जानी जाती हैं | मान्यता है कि जब महाभारत युद्ध के बाद पाण्डवों की जीत हो गयी, तब श्रीकृष्ण पाण्डवों को भीष्म पितामह के पास ले गये और उनसे अनुरोध किया कि वह पाण्डवों को ज्ञान प्रदान करें | शर शैया पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतिक्षा कर रहे भीष्म ने कृष्ण के अनुरोध पर कृष्ण सहित पाण्डवों को राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया | भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक पाँच तक चलता रहा | भीष्म जब ज्ञान दे चुके तब श्रीकृष्ण ने कहा कि “आपने जिन पाँच दिनों में ज्ञान दिया है ये दिन आज से सबके लिए मंगलकारी रहेंगे तथा इन्हें ‘भीष्म पंचक’ के नाम से जाना जाएगा |” इन्हें “पंच भिखा” भी कहा जाता है |

अस्तु, देव प्रबोधिनी एकादशी तथा तुलसी विवाह के महत्त्व के समझते हुए हम सभी के मनों में प्रकृति के प्रति सम्मान के भाव में वृद्धि हो इसी भावना के साथ सभी को इन दोनों पर्वों की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/07/devotthan-ekadashi-and-tulsi-vivah/

शुक्र का वृश्चिक में गोचर

दीपावली की गहमा गहमी समाप्त हुई, अब दो नवम्बर को छठ पूजा का आयोजन होगा, जिसका आरम्भ कल कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से हो जाएगा | सभी को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस बीच सोमवार 28 अक्तूबर को प्रातःकाल आठ बजकर बत्तीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला से निकलकर मंगल की वृश्चिक राशि में प्रविष्ट हो चुका है | शुक्र के वृश्चिक राशि में प्रवेश के समय कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि, नाग करण और प्रीति योग था तथा बुध और गुरु के साथ शुक्र इस समय विशाखा नक्षत्र पर था | यहाँ से 31 से अनुराधा तथा दस नवम्बर से ज्येष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 21 नवम्बर को दिन में बारह बजकर तेईस मिनट के लगभग धनु राशि और मूल नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | शुक्र की अपनी राशि वृषभ से वृश्चिक राशि सप्तम भाव तथा तुला के लिए वृश्चिक राशि द्वितीय भाव बन जाती है | साथ ही वृश्चिक राशि के लिए शुक्र द्वादशेश और सप्तमेश बन जाता है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के वृश्चिक राशि में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | वहीं दूसरी ओर आपके कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु पैसे के लेन देन के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी | Opposite Sex की ओर इस अवधि में आपका झुकाव बढ़ सकता है | आगे बढ़ने से पूर्व पार्टनर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें | साथ ही पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके सप्तम भाव में गोचर करने जा रहा है | आपके उत्साह और मनोबल में वृद्धि के साथ ही आपका व्यक्तित्व भी इस अवधि में प्रभावशाली रहने की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं या सौन्दर्य से सम्बन्धित किसी कार्य जैसे ब्यूटी पार्लर आदि का कार्य है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | यदि किसी के साथ Romantic Relationship में हैं तो उसमें विघ्न उपस्थित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी किसी मित्र के कारण तनाव उत्पन्न होने के संकेत हैं | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के योग हैं |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | एक ओर आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा हुआ भी हो सकता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | साथ ही विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अपने वर्तमान घर को भी Renovate करा सकते हैं | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है | आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा, नौकरी अथवा कला के प्रदर्शन के लिए विदेश यात्रा भी कर सकते हैं |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ  भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | किसी महिला मित्र के माध्यम से कोई नया कार्य भी आपको प्राप्त हो सकता है और इस कार्य में आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए धनलाभ भी कर सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण रहेगा | किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ आपके छोटे भाई बहनों के लिए कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपके लिए भी कार्य में वृद्धि तथा आय में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | आपको इस अवधि में कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी प्रशंसा होगी और भविष्य में उन प्रोजेक्ट्स का लाभ आपको प्राप्त होगा | आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ भी आपको प्राप्त हो सकता है | आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्ध रखता है अथवा आप किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं या दस्तकार हैं तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार कहीं घूमने जाने की योजना भी बना सकते हैं | किन्तु साथ ही विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आप इस अवधि में अपने शारीरिक सौन्दर्य को निखारने में अधिक व्यस्त रह सकते हैं | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | Opposite Sex के प्रति आपका रुझान इस अवधि में बढ़ सकता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत भी प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं में किसी के प्रति आप आकर्षित हो सकते हैं जो विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं से एक ओर आपके कार्य में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता आने की सम्भावना है तो वहीं दूसरी ओर इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | साथ ही इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य तथा Important Documents का भी ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | वाहन आदि चलाते समय भी किसी प्रकार की दुर्घटना आदि से सावधान रहने की आवश्यकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा कार्य में वृद्धि के साथ ही धनलाभ के भी संकेत हैं | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है अथवा कोई नया प्रेम सम्बन्ध भी स्थापित हो सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में हर प्रकार से लाभ के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ स्थानान्तरण के भी संकेत हैं | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | कलाकारों को किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा जिसके कारण आपके कार्य समय पर पूर्ण होते रहेंगे | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं, अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | जिस घर में अभी निवास करते हैं उसे Renovate भी करा सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | एक ओर परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहेगा वहीं दूसरी ओर आपके कार्य में भी प्रगति की सम्भावना की जा सकती है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं | अथवा जिस घर में आप रहते हैं उसे ही Renovate और Decorate करा सकते हैं | परिवार में माँगलिक कार्यों की भी सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग बन रहे हैं | इन यात्राओं में आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | आपके छोटे भाई अथवा बहन का विवाह इस अवधि में हो सकता है | किन्तु छोटे भाई बहनों के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना के साथ एक बार पुनः छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ…

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बुध का वृश्चिक में गोचर

बुध का वृश्चिक में गोचर

आज कार्तिक कृष्ण दशमी को विष्टि करण और शुक्ल योग में रात्रि ग्यारह बजकर बयालीस मिनट लगभग पर बुध मित्र ग्रह शुक्र की तुला राशि से निकलकर मंगल की वृश्चिक राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस प्रवेश के समय बुध विशाखा नक्षत्र पर होगा | यहाँ से 29 अक्टूबर को अनुराधा नक्षत्र पर जाएगा | जहाँ से 31 अक्तूबर को वक्री होता हुआ पहली नवम्बर को पुनः विशाखा नक्षत्र पर आएगा | सात नवम्बर को वापस तुला राशि पर जाते हुए पन्द्रह नवम्बर को स्वाति नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ इक्कीस नवम्बर को मार्गी हो जाएगा | छब्बीस नवम्बर को पुनः विशाखा नक्षत्र पर आ जाएगा | पाँच दिसम्बर को पुनः वृश्चिक में आ जाएगा | सात दिसम्बर को अनुराधा नक्षत्र पर और सोलह दिसम्बर को ज्येष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में पच्चीस दिसम्बर को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर सोलह मिनट के लगभग धनु राशि और मूल नक्षत्र पर चला जाएगा | इस बीच पाँच नवम्बर से सोलह नवम्बर और सोलह दिसम्बर से बुध अस्त भी रहेगा | बुध की अपनी राशि कन्या से वृश्चिक राशि तीसरा भाव तथा मिथुन से छठा भाव बनती है | साथ ही वृश्चिक राशि के लिए बुध अष्टमेश और लाभेश बनता है | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के वृश्चिक राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | कार्य में प्रगति और सफलता की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | किन्तु भाई बहनों के साथ कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | साथ ही अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली है इसका लाभ उठाना आप पर निर्भर करता है | साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे व्यक्तियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों के दौरान आपके कुछ नवीन सम्बन्ध भी बन सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्यक्षेत्र में भी लाभ हो सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के भी योग प्रतीत होते हैं | यदि आपको जीवन साथी की तलाश है तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मिथुन : आपका योगकारक आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय यदि आपका है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | किन्तु पिता अथवा सन्तान के साथ अथवा परिवारजनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | किसी कोर्ट केस में अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना भी प्रतीत होती है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Advance Course इस अवधि में कर सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक हैं तो आपको सेमिनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी बच्चे के जन्म की अथवा किसी अन्य प्रकार के माँगलिक कार्य की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं अथवा आई टी से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में प्रगति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | यों यह गोचर कुछ इस प्रकार का है कि आपको अपने हर प्रयास में लाभ की सम्भावना की जा सकती है | जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

कन्या : आपके योगकारक का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए आर्थिक दृष्टि से और कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | किन्तु वाणी में कुछ तीखापन भी आ सकता है, जिसके कारण विशेष रूप से भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की अनबन भी हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके पिता अथवा बड़े भाई का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विदेश से यदि आपका कार्य सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विशेष रूप से अनुकूल समय प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी संकेत प्राप्त होते हैं | नौकरी में पदोन्नति के साथ ट्रांसफर के भी संकेत हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए किसी ऐसे स्थान से कार्य का प्रस्ताव आ सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ट्रांसफर की सम्भावना भी है | किन्तु कुछ लोगों को कार्य में व्यवधान का अनुभव भी हो सकता है | साथ ही गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | जोड़ों अथवा माँसपेशियों में दर्द की सम्भावना भी है अतः इस ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका योगकारक आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | किसी स्थान से कार्य का प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि तथा अर्थ लाभ के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के सहारा में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | अविवाहित हैं तो आपके किसी सहकर्मी की ओर से प्रणय निवेदन भी आपको प्राप्त हो सकता है |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य स्थल में किसी प्रकार के विरोध का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | किसी कोर्ट केस के कारण भी किसी प्रकार का मानसिक तनाव आपको अनुभव हो सकता है | इस अवधि में शान्ति पूर्वक व्यवहार करना आपके हित में रहेगा | किसी भी विवाद को बढ़ने देना भी आपके हित में नहीं रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मीन : आपके योगकारक का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | एक ओर नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है, किन्तु इसके साथ ही विरोधियों में भी वृद्धि का समय प्रतीत होता है | लेकिन आप समय पर उस विरोध को समाप्त करने में समर्थ भी हो सकते हैं | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु अकारण ही किसी बात को लेकर आप चिन्तित भी हो सकते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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सूर्य का तुला में गोचर

आज रात 25:03 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर तीन मिनट) के लगभग बालव करण और व्यातिपत योग में सूर्यदेव कन्या राशि से निकल कर तुला राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | तुला राशि आत्मकारक सूर्य की नीच राशि भी होती है | सूर्य के इस प्रस्थान के समय आश्विन कृष्ण चतुर्थी तिथि होगी तथा सूर्य चित्रा नक्षत्र पर होंगे | तुला राशि में भ्रमण करते हुए भगवान् भास्कर चौबीस अक्तूबर को स्वाति तथा सात नवम्बर को विशाखा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में सोलह नवम्बर को 25:07 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर सात मिनट) के लगभग वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | इस बीच 21 अक्तूबर को अहोई अष्टमी, 25 को धन त्रयोदशी, 26 को काली चौदस, 27 को नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन तथा महावीर परिनिर्वाण दिवस, 28 को बलि प्रतिपदा तथा गोवर्धन पूजा, 29 को भाई दूज, आठ नवम्बर को देव प्रबोधिनी एकादशी, नौ नवम्बर को शनि प्रदोष, दस और ग्यारह को बैकुण्ठ चतुर्दशी तथा बारह को कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयन्ती के पर्व हैं, सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…

तो जानने का प्रयास करते हैं कि तुला राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | विशेष रूप से दाम्पत्य जीवन में तथा प्रेम सम्बन्धों में किसी प्रकार की तनाव की सम्भावना हो सकती है | पार्टनरशिप में कोई कार्य है तो वहाँ भी कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है | अच्छा रहेगा अपने स्वभाव को ठीक रखने के लिए ध्यान का सहारा लें | सूर्य की उपासना तथा सूर्य के मन्त्र का जाप आपको बहुत सी समस्याओं से बचा सकता है | साथ ही आपकी सन्तान का स्वभाव भी कुछ उग्र हो सकता है, किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश छठे भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों अथवा पारिवारिक सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | सम्पत्ति विषयक कोई विवाद आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त होकर कार्य करेंगे तथा उसमें सफलता प्राप्ति सम्भव है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सरकारी नौकरी अथवा पॉलिटिक्स में हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके पञ्चम भाव में हो रहा है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा जिसके कारण आपको सम्मान अथवा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | नौकरी में यदि आप हैं तो आपके लिए पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु विद्यार्थियों के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता होगी | सन्तान की ओर से किसी प्रकार की चिन्ता हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर यों तो अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता तथा सहकर्मियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में लाभ की सम्भावना की जा सकती है | लेकिन माता जी के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | साथ ही जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का विवाद आपके पारिवारिक जीवन में अशान्ति का कारण भी बन सकता है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से तीसरे भाव में गोचर हो रहा है | आपकी प्रतियोगी तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के साथ ही रचनात्मकता में भी वृद्धि के संकेत हैं | कार्य में प्रगति के साथ आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी प्रकार के पुरूस्कार, सम्मान अथवा पदोन्नति की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आवश्यकता है आलस्य से मुक्ति प्राप्त करने की | साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि कार्य की अधिकता के कारण आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव न पड़ने पाए | पिता के साथ बहस आपके लिए हित में नहीं रहेगी | इसके लिए योग ध्यान आदि के अभ्यास की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपके दूसरे में हो रहा है | आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी विदेशी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर किसी ऐसे स्थान पर हो सकता है जो आपके मन के अनुकूल न हो | आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु खर्चों में भी वृद्धि हो सकती है | अतः बजट बनाकर चलना उचित रहेगा | आपको अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है अन्यथा पारस्परिक सम्बन्धों में कड़वाहट आते देर नहीं लगेगी | जब तक आपका कार्य पूर्ण न हो जाए तब तक उसे सार्वजनिक न करें | साथ ही खान पान पर भी नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | आँखों से सम्बन्धित भी कोई समस्या हो सकती है |

तुला : आपकी लग्न में ही आपके एकादशेश का गोचर आय में वृद्धि के संकेत दे रहा है | आपके लिए यह गोचर कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अपना स्वयं का कार्य है कार्य में प्रगति के साथ ही आर्थिक स्थिति में दृष्ट की भी सम्भावना की जा सकती है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ आय में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | आवश्यक है कि आप अपने स्वभाव को नियन्त्रण में रखें | प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास आपके लिए सहायक हो सकते हैं | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें | पार्टनरशिप में कोई कार्य करना चाहते हैं तो अभी उसे स्थगित कर दें |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपके द्वादश में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको किसी प्रकार की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है | दूसरी ओर यात्राओं के दौरान कुछ नवीन सम्पर्क भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है | ड्राइविंग करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | कार्य स्थल पर किसी समस्या के कारण मानसिक तनाव हो सकता है | अच्छा यही रहेगा कि इस समय सहकर्मियों अथवा अधीनस्थ लोगों के प्रस्तावों पर विचार करें | साथ ही अपनी समस्याएँ पिता के साथ डिस्कस करें और उनके सुझावों का पालन करें | व्यर्थ की भावनाओं में बहना आपके लिए उचित नहीं रहेगा |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | रुकी हुई पेमेण्ट भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है | पिता तथा बड़े भाई और मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा, किन्तु इन लोगों के साथ व्यर्थ की बहस से बचने की आवश्यकता है | किसी रोग से मुक्ति भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थयात्रा पर भी जा सकते हैं |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | एक ओर अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर कार्यक्षेत्र में किसी प्रकार के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | अपने स्वयं के व्यवसाय में उन्नति, नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | वक़ीलों और डॉक्टर्स के लिये यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी कारणवश आपको निराशा का अनुभव भी हो सकता है | गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके अपने स्वभाव एक कारण परिवार में किसी प्रकार का क्लेश भी सम्भव है, अतः इस ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : पार्टनरशिप में जिन लोगों का कार्य है उनके लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | साथ ही पॉलिटिक्स से जो लोग सम्बन्ध रखते हैं उन लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उन्हें किसी पद की प्राप्ति भी हो सकती है | लेकिन किसी महिला सहकर्मी के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | आप जीवन साथी के साथ कहीं तीर्थ यात्रा अथवा विदेश यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | धर्म कर्म सम्बन्धित कार्यों में अधिक धन व्यय हो सकता है, अतः पोंगा पंडितों के जाल से बचने की आवश्यकता है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है, किन्तु आवश्यकता से अधिक उत्साह तथा अत्यधिक आत्मविश्वास कभी कभी घातक भी हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर आपके यश और मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है, तो दूसरी ओर ऐसे लोगों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है जो आपके विरुद्ध किसी प्रकार का षड्यन्त्र करके आपके कार्य में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं | किसी कोर्ट केस के कारण भी आपको समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | नौकरी में हैं तो किसी विरोध के कारण उसमें भी समस्या उत्पन्न हो सकती है | तनाव के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | दवाओं के रिएक्शन से बचने की भी आवश्यकता है | दुर्घटना से बचने के लिए सावधानीपूर्वक ड्राइव करें | सूर्य की उपासना आपके लिए आवश्यक प्रतीत होती है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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विजयादशमी और अपराजिता देवी

विजयादशमी और अपराजिता देवी

चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

ॐ सर्वविजयेश्वरी विद्महे शक्तिः धीमहि अपराजितायै प्रचोदयात

आज तक समस्त हिन्दू समाज माँ भगवती के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी सिद्धिदात्री की उपासना में व्यस्त था | कल विजया दशमी का पर्व है | सर्वप्रथम सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ – अपराजिता देवी हम सभी के भीतर की बुराइयों को नष्ट करके उन पर अच्छाइयों को विजयी बनाएँ यही कामना है…

विजया दशमी धार्मिक पर्व होने के साथ साथ एक प्रकार का लोकोत्सव भी है | हिन्दू घरों में अपराजिता देवी की पूजा के बाद बहनें अपने भाइयों के कानों मैं नौरते रखती हैं | प्राचीन काल में यात्रा पर जाते समय अथवा किसी युद्ध पर जाते समय अपराजिता देवी की पूजा का विधान था | विजया दशमी के दिन भद्रा रहित काल में रावणदहन की लीला भी आयोजित की जाती है | भगवान राम ने नारद मुनि के कहने पर आश्विन शुक्ल पक्ष के नवरात्रों में अपने भाई लक्ष्मण के साथ नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की पूजा अर्चना करने के उपरान्त दशमी तिथि को अपने अनुष्ठान का समापन अपराजिता देवी की पूजा के साथ किया था और उसके पश्चात युद्ध के लिए प्रस्थान किया था तथा युद्ध में दुष्ट रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी | इसीलिए आश्विन शुक्ल नवमी को विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है |

अपराजिता – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है – यह देवी का ऐसा रूप है जो अपराजित है – अर्थात् जिसकी कभी पराजय न हो सके – जो सदा विजयी रहे – जिसे कभी जीता न जा सके | इसीलिए नौ दिनों तक देवी के विविध रूपों की पूजा अर्चना करने के बाद विजयादशमी यानी दशम नवरात्र को अपराजिता देवी की पूजा अर्चना के साथ नवरात्रों का पारायण होता है | वास्तव में अपराजिता माँ भगवती का ऐसा रूप है जिसमें उनके समस्त रूप और उनके गुण समाहित हैं और इस प्रकार यह रूप समन्वयन का – एकजुटता का – भी प्रतिनिधित्व करता है | जीवन में सब प्रकार के संघर्षों पर विजय प्राप्त करने हेतु देवी अपराजिता की पूजा की जाती है | मान्यता है कि देवी अपराजिता अधर्म का आचरण करने वालों का विनाश करके धर्म की रक्षा करती हैं | यही कारण है कि इस दिन शस्त्र पूजा का भी विधान है |

देवी अपराजिता सिंह पर सवार मानी जाती हैं और इनके अनेक हाथों में अनेक प्रकार के अस्त्र होते हैं जो इस तथ्य का अनुमोदन करते हैं कि किसी प्रकार की भी बुरी शक्तियाँ, किसी प्रकार का भी अनाचार, किसी प्रकार का भी अज्ञान का माँ अपराजिता नाश करने में सक्षम हैं | यद्यपि अपराजिता देवी की अर्चना से सम्बन्धित विधि विधान विस्तार में तो तन्त्र ग्रन्थों में उपलब्ध होते है – जो निश्चित रूप से देवी के उग्र भाव की उपासना की विधि है | लेकिन देवी के स्नेहशील रूप की उपासना के मन्त्र देवी पुराण और दुर्गा सप्तशती में उपलब्ध होते हैं जिनमें अपराजिता देवी के स्नेहशील मातृ रूप को भली भाँति दर्शाया गया है |

ऐसा भी माना जाता है कि देवी अपराजिता शमी वृक्ष में निवास करती हैं और इसीलिए इस दिन शमी वृक्ष की पूजा का भी विधान है |

अपने इस रूप में देवी समस्त प्रकार की नकारात्मकताओं और कठिनाइयों का विनाश करती हैं क्योंकि यही मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं |

गहराई से देखा जाए तो यह पर्व शक्ति और शक्तिमान के समन्वय का पर्व है । नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की अपराजिता देवीउपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है | नवदुर्गा के सम्मिलित स्वरूप अपराजिता देवी की कृपा से उसके मार्ग के समस्त कंटक दूर हो जाते हैं और उसके प्रत्येक प्रयास में उसे सफलता प्राप्त होती है । इसीलिए क्षत्रिय अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं,  अध्ययन अध्यापन में लगे लोग अपनी शास्त्रों की पूजा करते हैं, कलाकार अपने वाद्य यन्त्रों की पूजा करते हैं – यानी हर कोई अपने अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्ति की कामना से माँ अपराजिता देवी की पूजा अर्चना करने के साथ ही अपने उपयोग में आने वाली वस्तुओं की भी पूजा अर्चना करते हैं |

आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये ।

स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये ||

मम क्षेमारोग्यादिसिद्ध्‌यर्थं यात्रायां विजयसिद्ध्‌यर्थं |

गणपतिमातृकामार्गदेवतापराजिताशमीपूजनानि करिष्ये ।|

यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न हो इसके लिए भी यात्रा प्रारम्भ करते समय निम्न स्तुति के साथ अपराजिता देवी की उपासना की जाती है:

शृणुध्वं मुनय: सर्वे सर्वकामार्थसिद्धिदाम् ।

असिद्धसाधिनीं देवीं वैष्णवीमपराजिताम् ।।

नीलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरणोज्ज्वलाम् ।

बालेन्दुमौलिसदृशीं नयनत्रितयान्विताम् ।।

पीनोत्तुङ्गस्तनीं साध्वीं बद्धद्मासनां शिवाम् ।

अजितां चिन्येद्देवीं वैष्णवीमपराजिताम् ।।

अपराजिता देवी प्रत्येक व्यक्ति के मन में प्राणी मात्र के प्रति समता की – दया और करुणा की – एकता की – भावना का विकास करते हुए हम सबके जीवन में ऊर्जा का संचार करती हुई सभी को जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाती हुई समस्त प्रकार की नकारात्मकताओं और अज्ञान रूपी शत्रुओं का नाश करें, इसी कामना के साथ सभी को विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/10/07/vijaya-dashami-and-goddess-aparajita/

 

नवमं सिद्धिदात्री

नवमं सिद्धिदात्री

नवदुर्गा – नवम नवरात्र – देवी के सिद्धिदात्री तथा अन्नपूर्णा रूपों की उपासना

कल चैत्र शुक्ल नवमी तिथि है – चैत्र शुक्ल नवरात्र का नवम तथा अन्तिम नवरात्र – देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना – दुर्गा विसर्जन | यों तो देवी के समस्त रूप ही सिद्धिदायक हैं – यदि पूर्ण भक्ति भाव और निष्ठा पूर्वक उपासना की जाए | किन्तु जैसा कि नाम से ही ध्वनित होता है – सिद्धि अर्थात् सफलता प्रदान करने वाली – मोक्षप्रदायिनी देवी – समस्त कार्यों में सिद्धि देने वाला तथा समस्त प्रकार के ताप और गुणों से मुक्ति दिलाने वाला रूप है यह | नवरात्रों के नवम दिन जो व्यक्ति शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करता है उसे सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है तथा सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता और ब्रह्माण्ड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है |

इस रूप में चार हाथों वाली देवी कमलपुष्प पर विराजमान दिखाई देती हैं | हाथों में कमलपुष्प, गदा, चक्र और पुस्तक लिये हुए हैं | माँ सरस्वती का रूप है यह | इस रूप में देवी अज्ञान का निवारण करके ज्ञान का दान देती हैं ताकि मनुष्य को उस परमतत्व परब्रह्म का ज्ञान प्राप्त हो सके | अपने इस रूप में देवी सिद्धों, गन्धर्वों, यक्षों, राक्षसों तथा देवताओं से घिरी रहती हैं तथा समस्त देव, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, सिद्ध आदि इच्छित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए माँ सिद्धिदात्री की ही शरण में जाते हैं |

देवी पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवी की शक्तियों और महिमा का वर्णन प्राप्त होता है | इसके अतिरिक्त मार्कंडेय पुराण में भी इन शक्तियों और इनकी महिमाओं का वर्णन है | भगवान शिव ने सृष्टि के आदि में निराकार पराशक्ति की उपासना की थी जिसके फलस्वरूप उन्हें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियाँ प्राप्त हुईं | ऐसा भी माना जाता है कि शिव का आधा शरीर नर का और आधा नारी का भी इन्हीं की कृपा से प्राप्त हुआ था और वे अर्धनारीश्वर कहलाए | यद्यपि अर्धनारीश्वर का वास्तविक सार तो यही है कि समस्त जगत प्रकृति-पुरुषात्मक है – दोनों का सामान रूप से योग है |

इनकी उपासना के लिए नवार्ण मन्त्र के जाप की प्रथा है | साथ ही एक और मन्त्र से भी माँ सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है, जो इस प्रकार है:

सिद्धगन्धर्वयक्षाघै: असुरै: अमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी |

इसके अतिरक्त सिद्धिदात्री का बीज मन्त्र है “ह्रीं क्लीं ऐं सिद्ध्यै नमः” इस मन्त्र का जाप करके भी देवी की उपासना की जा सकती है |

इस रूप की अर्चना करके जो सिद्धि प्राप्त होती है वह इस तथ्य का ज्ञान कराती है कि जो कुछ भी प्राप्य है और जिसकी खोज की जानी चाहिए वह अन्तिम सत्य वही परम तत्व है जिसे परब्रह्म अथवा आत्मतत्व के नाम से जाना जाता है |

माँ सिद्धिदात्री केतु को दिशा और ऊर्जा प्रदान करने वाली मानी जाती हैं इसलिए जो Astrologer देवी के नौ रूपों को नवग्रहों का प्रतीक मानते हैं उनकी ऐसी भी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में केतु से सम्बन्धित कोई विकार हो तो इनकी उपासना से वह विकार दूर हो सकता है |

चैत्र शुक्ल नवमी को भगवती के अन्नपूर्णा रूप की उपासना भी की जाती है | माँ अन्नपूर्णा को धन वैभव तथा अन्नपूर्णासुख शान्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है | पौराणिक ग्रन्थों में माँ अन्नपूर्णा के सम्बन्ध में अनेक आख्यान उपलब्ध होते हैं | जैसे लंका पर चढ़ाई से पूर्व भगवान राम ने अपनी सेना की क्षुधा शान्त करने के लिए माँ अन्नपूर्णा की उपासना की थी | कई स्थानों पर ऐसे प्रसंग भी उपलब्ध होते हैं कि काशी में जब अन्न की भारी कमी आ गई तो भगवान शंकर ने अन्नपूर्णा देवी – जो की माता पार्वती का ही एक नाम है – से भिक्षा ग्रहण करके काशीवासियों की क्षुधा शान्त की थी |

मान्यताएँ तथा कथाएँ अनेकों हो सकती हैं, किन्तु जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है – अन्नपूर्णा देवी धन सम्पदा की देवी हैं और अन्न से बड़ा धन और कोई हो ही नहीं सकता | निम्न मन्त्र से देवी अन्नपूर्णा की उपासना की जा सकती है:

“ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरः प्राणवल्लभे |

ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती ||

सिद्धिदात्री और अन्नपूर्णा दोनों ही रूपों में माँ भगवती सभी की रक्षा करते हुए सबको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता तथा हर प्रकार की ऋद्धि सिद्धि प्रदान करें तथा सबके भण्डार धन धान्य से परिपूर्ण रखें…

ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृतशेखराम् |

कमलस्थितां चतुर्भुजां सिद्धीदात्रीं यशस्वनीम् ||

स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम् |

शखचक्रगदापदमधरां सिद्धीदात्रीं भजेम् ||

पट्टाम्बरपरिधानां मृदुहास्या नानालंकारभूषिताम् |

मंजीरहारकेयूरकिंकिणिरत्नकुण्डलमण्डिताम् ||

प्रफुल्लवदनां पल्लवाधरां कान्तकपोला पीनपयोधराम् |

कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ||

स्तोत्र पाठ

कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो |

स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोSस्तुते ||

पट्टाम्बरपरिधानां नानालंकारभूषिताम् |

नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोSस्तुते ||

परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा |

परमशक्ति परमभक्ति सिद्धिदात्री नमोSस्तुते ||

विश्वकर्त्री विश्वभर्त्री विश्वहर्त्री विश्वप्रीता |

विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोSस्तुते ||

भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी |

भवसागरतारिणी सिद्धिदात्री नमोSस्तुते ||

धर्मार्थकामप्रदायिनी महामोहविनाशिनी |

मोक्षदायिनी सिद्धिदायिनी सिद्धिदात्री नमोSस्तुते ||

अन्त में, किसी भी कार्य में सिद्धि अर्थात सफलता प्राप्त करने के लिए प्रयास स्वयं ही करना पड़ता है – चाहे कोई भौतिक लक्ष्य हो अथवा आध्यात्मिक – बिना प्रयास के कोई कार्य सिद्ध नहीं होता | माता सिद्धिदात्री भी उन्हीं के कार्य सिद्ध करती हैं जो स्वयं प्रयास करते हैं… और प्रयास करने पर ही माँ अन्नपूर्णा अन्न के भण्डार भरने में हमारी सहायता करती हैं… कहने का तात्पर्य यही है कि ईश्वर भी उसी की सहायता करता है जो कर्म में तत्पर होता है… अस्तु  हम सभी अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहें ताकि माता सिद्धिदात्री और देवी अन्नपूर्णा हमारे समस्त प्रयासों की सिद्धि में सहायक हो यही कामना है…

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