सूर्य का तुला में गोचर

सूर्य का तुला में गोचर

आज आश्विन शुक्ल अष्टमी/नवमी – शारदीय नवरात्र का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण दिन – जब सन्धि पूजा की जाती है | दिन में जिस समय भी महाष्टमी और महानवमी का मिलन होता है उस समय यह पूजा सम्पन्न की जाती है | आज 12:49 तक अष्टमी तिथि है और उसके बाद नवमी तिथि आ जाएगी | इस प्रकार यशी काल सन्धि काल है | इस समय से लगभग 24 मिनट पूर्व और 24 मिनट बाद यानी लगभग दो गाढ़ी का मुहूर्त होता है सन्धि पूजा के लिए समर्पित | मान्यता है कि इसी समय चामुण्डा ने चण्ड और मुण्ड का वध किया था | साथ ही आज सरस्वती पूजा का भी अन्तिम दिन है | सर्वप्रथम सभी को महाष्टमी और महा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

आज तुला संक्रान्ति भी है | आज 18:44 के लगभग नवमी तिथि में सूर्यदेव चित्रा नक्षत्र में रहते हुए ही बालव करण और धृति योग में कन्या राशि से निकल कर तुला राशि में प्रस्थान करेंगे | जहाँ 16 नवम्बर को लगभग 18:32 तक भ्रमण करने के पश्चात वृश्चिक राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | सूर्यदेव जिस भी राशि में जाते हैं, कुछ समय के लिए शुक्र और बुध का साथ उन्हें प्राप्त होता ही है | तुला राशि में भी यही स्थिति रहेगी | ध्यान देने योग्य बात है कि तुला राशि सूर्य की नीच की राशि है | अपनी इस यात्रा के दौरान सूर्यदेव 24 अक्टूबर से स्वाति तथा 06 नवम्बर से विशाखा नक्षत्र में भ्रमण करेंगे | तो जानने का प्रयास करते हैं कि तुला राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | विशेष रूप से दाम्पत्य जीवन में तथा प्रेम सम्बन्धों में किसी प्रकार की तनाव की सम्भावना हो सकती है | सूर्य की उपासना तथा सूर्य के मन्त्र का जाप आपको बहुत सी समस्याओं से बचा सकता है | साथ ही आपकी सन्तान का स्वभाव भी कुछ उग्र हो सकता है, किन्तु उसका सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश छठे भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण नहीं रखा तो प्रेम सम्बन्धों अथवा पारिवारिक सम्बन्धों में दरार की भी सम्भावना है | सम्पत्ति विषयक कोई विवाद आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं में भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सूर्य की उपासना आपके लिए उचित रहेगी |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके पञ्चम भाव में हो रहा है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर यों तो अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके अपने स्वभाव के कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण उनके कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है | साथ ही आपके साथ भी भाई बहनों का किसी प्रकार का मतभेद इस अवधि में हो सकता है |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता तथा सहकर्मियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना भी बना सकते हैं |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से तीसरे भाव में गोचर हो रहा है | आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी प्रकार के पुरूस्कार, सम्मान अथवा पदोन्नति की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | छोटे भाई बहनों के साथ समय अच्छा व्यतीत होने की सम्भावना है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपके दूसरे में हो रहा है | आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी विदेशी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर किसी ऐसे स्थान पर हो सकता है जो आपके मन के अनुकूल न हो | आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु खर्चों में भी वृद्धि हो सकती है | अतः बजट बनाकर चलना उचित रहेगा | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : आपकी लग्न में ही आपके एकादशेश का गोचर आय में वृद्धि के संकेत दे रहा है | आपके लिए यह गोचर कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है, किन्तु साथ ही किसी घनिष्ठ मित्र अथवा बड़े भाई के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | आवश्यक है कि आप अपने स्वभाव को नियन्त्रण में रखें | प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास आपके लिए सहायक हो सकते हैं |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपके द्वादश में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको किसी प्रकार की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है | दूसरी ओर यात्राओं के दौरान कुछ नवीन सम्पर्क भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है | ड्राइविंग करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए वास्तव में यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आपके लिए पराक्रम और मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | किसी प्रकार का अवार्ड या सम्मान आदि भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि बढ़ सकती है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | एक ओर अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर कार्यक्षेत्र में किसी प्रकार के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है | वक़ीलों और डॉक्टर्स के लिये यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी कारणवश आपको निराशा का अनुभव भी हो सकता है | गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : पार्टनरशिप में जिन लोगों का कार्य है उनके लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | साथ ही पॉलिटिक्स से जो लोग सम्बन्ध रखते हैं उन लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उन्हें किसी पद की प्राप्ति भी हो सकती है | लेकिन किसी महिला सहकर्मी के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | आप जीवन साथी के साथ कहीं तीर्थ यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | किसी कोर्ट केस के कारण भी आपको समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | नौकरी में हैं तो किसी विरोध के कारण उसमें भी समस्या उत्पन्न हो सकती है | तनाव के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | सूर्य की उपासना आपके लिए आवश्यक प्रतीत होती है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/17/sun-transit-in-libra/

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का तुला राशि पर सम्भावित प्रभाव

अभी 11 अक्टूबर को गुरुदेव का गोचर वृश्चिक राशि में हुआ है | विभिन्न राशियों के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा करते हुए अब तक मेष से कन्या राशि तक के जातकों की बात कर चुके हैं | आज जानने का प्रयास करते हैं कि तुला राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

तुला राशि के जातकों के लिए गुरु उनका तृतीयेश और षष्ठेश होकर उनके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपके छठे भाव पर, अष्टम भाव पर तथा दशम भाव पर रहेंगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की भी दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं आपकी पेमेण्ट रुकी हुई है अथवा किसी को उधार दिया हुआ है तो वह इस अवधि में वापस मिलने की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु ज़ल्दबाज़ी में निर्णय लेना उचित नहीं रहेगा | किसी कोर्ट केस के माध्यम से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपकी प्रतियोगी और निर्णायक क्षमताओं में वृद्धि के कारण आपके उत्साह में भी वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | आप अपने कार्य के सम्बन्ध में कोई भी चेलेंज इस अवधि में स्वीकार कर सकते हैं | विरोधी अपना सर उठा सकते हैं, किन्तु अपने बुद्धिबल से आप किसी भी विरोध को समाप्त करने में सक्षम हो सकते हैं | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में प्रभावपूर्ण रहने की सम्भावना है जिसके कारण आपकी बात का दूसरों पर प्रभाव पड़ेगा | मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

किसी प्रकार के उत्तरदायित्व में इस अवधि में वृद्धि हो सकती है | सम्भव है बीच बीच में आपको ऐसा भी लगे कि किसी कारणवश आपके कार्य में कुछ बाधा उत्पन्न हो रही है | किन्तु उसके लिए चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है | थोड़े से प्रयास से ही सारी बाधाएँ समाप्त हो सकती हैं | कार्यक्षेत्र में वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहने की सम्भावना है | आपके सहयोगी तथा आपके अधीनस्थ लोग आपके प्रस्तावों को स्वीकार करके उन्हें क्रियान्वित भी करने के प्रयास कर सकते हैं | यदि आप किसी प्रतियोगी परिक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकता है |

अविवाहित हैं तो कहीं प्रेम सम्बन्ध भी बन सकता है | किन्तु उसे विवाह में परिणत करने से पूर्व उस व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी अवश्य ले लें तथा परिवार के लोगों के साथ भी विचार विमर्श कर लें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि के लिए भी प्रयास कर सकते हैं |

अपने स्वयं के तथा अपने पिता के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | अपने खान पर ध्यान रखें अन्यथा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या लम्बे समय तक परेशान कर सकती है | साथ ही इस अवधि में कहीं से ऋण लेने से भी बचने की आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/14/jupiter-transit-in-scorpio-for-libra/

 

 

 

 

बुध का तुला में गोचर

कल यानी 6 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण द्वादशी, तैतिल करण और शुभ योग में दोपहर 12:42 के लगभग पर बुध अपनी स्वयं की उच्च राशि कन्या से निकल कर मित्र ग्रह शुक्र की तुला राशि में प्रविष्ट होगा | इस प्रवेश के समय बुध चित्रा नक्षत्र में होगा | यहाँ कुछ समय बुध को गुरु और शुक्र का साथ भी मिलेगा | यहाँ से 26 अक्टूबर को 20:44 के लगभग बुध का प्रवेश वृश्चिक राशि में हो जाएगा | इस बीच 10 अक्टूबर को स्वाति नक्षत्र पर तथा 19 अक्टूबर को विशाखा नक्षत्र पर गोचर करेगा | 11 अक्टूबर को बुध मार्गी भी हो जाएगा | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के तुला राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के योग बन रहे हैं | इन गतिविधियों के दौरान आपके कुछ नवीन सम्बन्ध भी बन सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्यक्षेत्र में भी लाभ हो सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के भी योग प्रतीत होते हैं | आपके छोटे भाई बहन यदि अध्ययनरत हैं तो उनके लिए भी ये गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | यदि आपको जीवन साथी की तलाश है तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु पिता अथवा सन्तान के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | किसी कोर्ट केस में अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना भी प्रतीत होती है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Advance Course इस अवधि में कर सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी बच्चे के जन्म की अथवा किसी अन्य प्रकार के माँगलिक कार्य की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | आपका कोई मित्र भी विदेश से वापस आकर आपके कार्य में आपकी सहायता कर सकता है | किन्तु पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता होगी | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु उनके साथ आपका किसी बात पर विवाद भी सम्भव है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए आर्थिक दृष्टि से और कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | किन्तु वाणी में कुछ तीखापन भी आ सकता है, जिसके कारण विशेष रूप से भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की अनबन भी हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके पिता अथवा बड़े भाई का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त रहेगा |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी लग्न से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | साथ ही यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति के साथ ट्रांसफर के भी संकेत हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है अथवा किसी दूर के शहर से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग बन रहे हैं जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं दूर ट्रांसफर भी हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप किसी धार्मिक कार्य में धन भी व्यय कर सकते हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | किसी स्थान से कार्य का प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि तथा अर्थ लाभ के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के सहारा में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | अविवाहित हैं तो आपके किसी सहकर्मी की ओर से प्रणय निवेदन भी आपको प्राप्त हो सकता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य स्थल में किसी प्रकार के विरोध का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | किसी कोर्ट केस के कारण भी किसी प्रकार का मानसिक तनाव आपको अनुभव हो सकता है | इस अवधि में शान्ति पूर्वक व्यवहार करना आपके हित में रहेगा | किसी भी विवाद को बढ़ने देना भी आपके हित में नहीं रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर नवम भाव में हो रहा है | एक ओर नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है, किन्तु इसके साथ ही विरोधियों में भी वृद्धि का समय प्रतीत होता है | लेकिन आप समय पर उस विरोध को समाप्त करने में समर्थ भी हो सकते हैं | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु अकारण ही किसी बात को लेकर आप चिन्तित भी हो सकते हैं | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई कोर्ट केस भी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | साथ ही जीवन साथी और परिवार के लोगों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/05/mercury-transit-in-libra/