Category Archives: दीपावली

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

प्रिय मित्रों, प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ | दीपमालिका में प्रज्वलित प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण आपके जीवन में सुख, समृद्धि, स्नेह और सौभाग्य की स्वर्णिम आभा प्रसारित करे…. दिवाली पर्व है प्रकाश का – केवल दीयों का प्रकाश नहीं, मानव हृदय आलोकित हो जिससे ऐसे स्नेहरस में पगे दीप को प्रज्वलित करने का पर्व है यह… तो आइये परम्परा का अनुसरण करते हुए गणेश-लक्ष्मी के आह्वाहन के साथ ही दीप प्रज्वलित करें आशा का – ताकि हरेक मन से निराशा का अन्धकार दूर हो… दीप प्रज्वलित करें प्रेम का, अपनेपन का – ताकि नफरत और क्रोध का तमस कहीं जा तिरोहित हो….

है प्रकाश का पर्व, धरा पर जगमग जगमग दीप जलाएँ |

और दीप की स्वर्ण ज्योति से हर घर आँगन को नहलाएँ ||

हरेक नयन में स्वप्न ख़ुशी का, और कंठ में राग दीप का |

नयी रोशनी लेकर आये अरुणोदय हर नयी भोर का ||

नए सुरों से सजे दिवाली, और स्नेह में पगे दिवाली |

दीन हीन सबके जीवन में स्नेहसरस हो जगे दिवाली ||

माटी के ये दीप, व्यर्थ है इनको यों दाहकता देना |

आओ मिलकर इनमें पहले स्नेह बढ़ाएँ, फिर दहकाएँ ||

दीन हीन और निर्बल जितने भी प्राणी हैं इस धरती पर |

उन सबके जीवन में स्नेहपगी बाती की लौ उकसाएँ ||

होती है दीवाली भू पर, जगर मगर दीपक जलते हैं |

जैसे इस नीले अम्बर में झिलमिल तारकदल खिलते हैं ||

ऐसे ही आओ हम मिलकर भू पर आशादीप जलाएँ |

मावस की इस कलुष निशा को, पूनम सी धवलित कर जाएँ ||

लक्ष्मी पूजन

नरक चतुर्दशी

नरक चतुर्दशी / रूप चतुर्दशी

पाँच पर्वों की श्रृंखला “दीपावली” की दूसरी कड़ी है नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली अथवा रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है और प्रायः यह लक्ष्मी पूजन से पहले दिन मनाया जाता है | किन्तु यदि सूर्योदय में चतुर्दशी तिथि हो और उसी दिन अपराह्न में अमावस्या तिथि हो तो नरक चतुर्दशी लक्ष्मी पूजन के दिन ही ब्रह्म मुहूर्त में मनाया जाता है | जैसे कि इस वर्ष कल दोपहर तक त्रयोदशी तिथि है और उसके बाद दिन में 3:49 के लगभग चतुर्दशी तिथि आएगी जो अगले दिन बारह बजकर तीस मिनट तक रहेगी | इस प्रकार सूर्योदय में चतुर्दशी तिथि 27 अक्तूबर यानी रविवार को है तथा चन्द्रदर्शन प्रातः 5:16 के लगभग है | सूर्योदय 6:29 पर है, इसलिए अभ्यंग स्नान इसी अवधि में किया जाएगा – कुल अवधि एक घंटा तेरह मिनट |

नरक चतुर्दशी विषय में कई पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं | जिनमें सबसे प्रसिद्ध तो यही है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके उसके बन्दीगृह से सोलह हज़ार एक सौ कन्याओं को मुक्त कराके उन्हें सम्मान प्रदान किया था | इसी उपलक्ष्य में दीपमालिका भी प्रकाशित की जाती है |

एक कथा कुछ इस प्रकार भी है कि यमदूत असमय ही पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा रन्तिदेव को लेने पहुँच गए | कारण पूछने पर यमदूतों ने बताया कि एक बार अनजाने में एक ब्राह्मण उनके द्वार से भूखा लौट गया था | अनजाने में किये गए इस पापकर्म के कारण ही उनको असमय ही नरक जाना पड़ रहा है | राजा रन्तिदेव ने यमदूतों से एक वर्ष का समय माँगा और उस एक वर्ष में घोर तप करके कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को पारायण के रूप में ब्रह्मभोज कराके अपने पाप से मुक्ति प्राप्त की | माना जाता है कि तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है |

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर यमराज के लिए तर्पण किया जाता है और सायंकाल दीप प्रज्वलित किये जाते हैं | माना जाता है कि विधि विधान से पूजा करने वालों को सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और अन्त में वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं |

हमारे विचार से “स्वर्ग” हमारा अपना स्वच्छ मन ही है – हमारी अपनी अन्तरात्मा | और सभी प्रकार की नकारात्मकताएँ ही वो सर्वविध पाप हैं जिनसे मुक्ति प्राप्त करने की बात बार बार की जाती है | जब हम पूजा पाठ या जप ध्यान इत्यादि कोई सकारात्मक कर्म करते हैं तो हमारे भीतर की सारी नकारात्मकताएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं और हमें उनसे मुक्ति प्राप्त होकर हमारे भीतर सकारात्मकता विद्यमान हो जाती है – जिसके कारण फिर किसी भी प्रकार के ईर्ष्या द्वेष क्रोध मोह अथवा नैराश्य आदि के लिए वहाँ कोई स्थान नहीं रह जाता – और हमारी अन्तरात्मा अथवा हमारा अपना मन स्वर्ग की भाँति निर्मल और उत्साहित हो जाता है और तब जीवन में निरन्तर हर क्षेत्र में हम प्रगतिपथ पर अग्रसर होते जाते हैं |

जब हमारा मन स्वच्छ और निर्मल होगा, किसी प्रकार की नकारात्मकता, आलस्य इत्यादि के लिए वहाँ कोई स्थान नहीं रहेगा तो हमारा शरीर भी स्वस्थ रहेगा और हम निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेंगे – जिसका तेज – जिसकी चमक हमारे पूरे व्यक्तित्व में निश्चित रूप से एक निखार ले आएगी – ऐसा निखार जैसा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के द्वारा सम्भव नहीं… यही है वास्तव में रूप चतुर्दशी का भी महत्त्व… और यही है वास्तविक अर्थों में समस्त प्रकार के पापों से मुक्ति प्राप्त करना…

हम सभी अपने भीतर के नकारात्मकता रूपी पाप से मुक्त होकर सकारात्मक और रचनात्मक विचारों को अपने मन में स्थान देकर आगे बढ़ते रहें यही हम सबके लिए हमारी कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/10/25/narak-chaturdashi-roop-chaturdashi/

 

लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

जैसा कि सभी जानते हैं कि दीपावली बुराई, असत्य, अज्ञान, निराशा, निरुत्साह, क्रोध, घृणा तथा अन्य भी अनेक प्रकार के दुर्भावों रूपी अन्धकार पर सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा तथा अन्य अनेकों सद्भावों रूपी प्रकाश की विजय का पर्व है और इस दीपमालिका के प्रमुख दीप हैं सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा, उत्साह, प्रेम, स्नेह आदि सद्भाव | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को दीपावली के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है | लक्ष्मी पूजा एक विशेष मुहूर्त में की जाती है | सर्वसाधारण के लिए प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए | प्रदोष काल सूर्यास्त से कुछ समय पूर्व आरम्भ होता है और लगभग दो घंटा चौबीस मिनट तक रहता है | इस वर्ष अमावस्या तिथि का आगमन 26 अक्तूबर को 24:54 अर्द्धरात्र्योत्तर बारह बजकर पचपन मिनट पर हो जाएगा और 27 तारीख को रात्रि सात बजकर 38 मिनट तक अमावस्या रहेगी | पञ्चांग की गणना के अनुसार प्रदोष काल में सायं 6:42 से रात्रि 08:14 तक वृषभ लग्न रहेगी अतः यही लग्न सर्व साधारण के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त मुहूर्त है | इसके अतिरिक्त व्यापारी वर्ग जो दिन में अपने व्यावसायिक स्थानों पर लक्ष्मी पूजन करना चाहते हैं उनके लिए पूजन के लिए उपयुक्त समय दोपहर 2:18 से 3:30 के बीच होगा | इस समय कुम्भ लग्न होगी |

कुछ तान्त्रिक विधि से लक्ष्मी पूजन करने वाले लोग तथा कर्मकाण्ड में अत्यन्त दक्ष लोगों की मान्यता है कि महानिशीथ काल में लक्ष्मी पूजा की जानी चाहिए | अर्द्धरात्र्योत्तर 12:41 से तीन बजकर बारह मिनट तक स्थिर लग्न सिंह है, और एक बजकर बारह मिनट से तीन बजकर बारह मिनट तक निशीथ काल की पूजा का मुहूर्त है | किन्तु प्रायः जन साधारण के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न में ही लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त माना जाता है – यानी सायं 6:42 से रात्रि 08:14 के मध्य | साथ ही, लक्ष्मी पूजन में स्थिर लग्न का विशेष ध्यान रखना होता है और वृषभ, सिंह तथा कुम्भ तीनों स्थिर लग्न हैं |

27 को दिन में 3:46 से 28 को दिन में 1:30 तक चन्द्रमा स्वाति नक्षत्र में है और उसके बाद विशाखा नक्षत्र में चला जाएगा तथा दिन भर प्रीति योग रहेगा | तुला राशि में सूर्य, चन्द्र और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है जो अत्यन्त शुभ माना जाता है |

दीपावली पर्व प्रकाश का पर्व है | माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे और इस अवसर पर प्रज्वलित दीपमालिका के प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण सभी का जीवन सुख-शान्ति-उल्लास-प्रेम-सौभाग्य-स्नेह और ज्ञान के आलोक से आलोकित करे… इसी कामना के साथ सभी को एक बार पुनः दीपावली की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/10/24/auspicious-time-for-lakshmi-pujan/

प्यार भरे कुछ दीप जलाओ

प्यार भरे कुछ दीप जलाओ

दीपमालिका का प्रकाशमय पर्व बस आने ही वाला है… कल करवाचौथ के साथ उसका आरम्भ तो हो ही जाएगा… यों तो श्रद्धापर्व का श्राद्ध पक्ष बीतते ही नवरात्रों के साथ त्यौहारों की मस्ती और भागमभाग शुरू हो जाती है… तो आइये हम सभी स्नेहपगी बाती के प्रकाश से युक्त मन के दीप प्रज्वलित करते हुए मतवाले गीतों से कण कण को पुलकित करते हुए स्वागत करें प्रकाशोत्सव का…

माटी के ये दीप जलाने से क्या होगा

जला सको तो प्यार भरे कुछ दीप जलाओ |

वीराने में फूल खिलाने से क्या होगा

खिला सको तो हर घर में कुछ पुष्प खिलाओ ||

माटी का दीपक तो क्षणभँगुर होता है

किन्तु प्रेम का दीपक अजर अमर होता है |

स्नेहरहित बाती उकसाने से क्या होगा

बढ़ा सको तो पहले उसमें स्नेह बढ़ाओ ||

वीराने में खिला पुष्प किसने देखा है

मन के आँगन में हर पल मेला रहता है |

बिना खाद पौधा लगवाने से क्या होगा

मिला सको तो प्रेम प्रीत की खाद मिलाओ ||

टूटे तारों की वीणा से कब निकला है

कजरी बिरहा या फिर मेघ मल्हार निराला |

इन टूटे तारों को छूने से क्या होगा

जुड़ा सको तो झनकाते कुछ तार जुड़ाओ ||

किसी कथा से कोई उपन्यास बनता है

लेकिन कौन उसे कब पूरा सुन पाता है |

कोरा एक निबन्ध बनाने से क्या होगा

सुना सको तो मतवाले कुछ गीत सुनाओ ||

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

प्रिय मित्रों, सभी को दीपावली के उल्लासपर्व की झिलमिल झिलमिल करती अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… दीपमालिका के अवसर पर प्रज्वलित प्रत्येक दीप की हर किरण किरण सभी के जीवन को अपना स्नेह प्रदान करे और सभी का जीवन सुख-सौभाग्य-प्रेम के उल्लासमय आलोक से आलोकित रहे…कात्यायनी

आज धरा पर दीवाली है, जगर मगर दीपक जलते हैं |

जैसे इस नीले अम्बर में झिलमिल तारकदल खिलते हैं ||

एक एक दीपक से सारे जग के आओ दीप जलाएँ

जिनकी झिलमिल आभा में ये चाँद सितारें भू पर आएँ |

साज सजें ऐसे जिन पर सब मिलकर दीपक राग सजाएँ

और धरा आकाश गले मिल मस्त मगन मन नृत्य दिखाएँ ||

जन जन का जीवन आलोकित करने हित हम नेह बढ़ाएँ

और बाती को थोड़ा उकसा कर दीपक की जोत बढ़ाएँ |

भेद भाव और व्यंग्य बाण सब दीपशिखा की भेंट चढ़ाएँ

और सद्भावों की आभा फिर जग के कण कण में फैलाएँ ||

देखो चन्द्रकिरण देती है जग को नवयुग का अभिनन्दन

इसी अकौकिक आभा का आओ हम सब कर लें आलिंगन |

दीपमालिका का प्रकाश जन जन की राहों में फैलाएँ

भागे दूर अँधेरा और सबके मन स्वर्ण कमल खिल जाएँ ||

दीपों के रूप में धरा पर उतर आए तारों से झिलमिलाती दीपमालिका सभी के लिए मंगलमय हो… पूर्णिमा

लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

जैसा कि सभी जानते हैं कि दीपावली बुराई, असत्य, अज्ञान, निराशा, निरुत्साह, क्रोध, घृणा तथा अन्य भी अनेक प्रकार के दुर्भावों रूपी अन्धकार पर सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा तथा अन्य अनेकों सद्भावों रूपी प्रकाश की विजय का पर्व है और इस दीपमालिका के प्रमुख दीप हैं सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा, उत्साह, प्रेम, स्नेह आदि सद्भाव | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को दीपावली के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस दिन लक्ष्मी पूजा का विधान है | लक्ष्मी पूजा एक विशेष मुहूर्त में की जाती है और इसके विषय में कई मतान्तर हैं | कुछ लोगों का मानना है कि प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए | प्रदोष काल सूर्यास्त से कुछ समय पूर्व आरम्भ होता है और लगभग दो घन्टे चौबीस मिनट तक रहता है | कुछ तान्त्रिक विधि से लक्ष्मी पूजन करने वाले लोग तथा कर्मकाण्ड में अत्यन्त दक्ष लोगों की मान्यता है कि महानिशीथ काल में लक्ष्मी पूजा की जानी चाहिए | लेकिन जन साधारण के लिए प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का उपयुक्त समय है | इसमें भी स्थिर लग्न का ध्यान रखने की सलाह गुणीजन देते हैं |

आज रात्रि 10:27 से अमावस्या तिथि आ जाएगी, किन्तु उदया तिथि कल यानी 7 नवम्बर को ही होगी | इस दिन रात्रि 09:32 तक अमावस्या है और उसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा लग जाएगी | इसलिए उससे पूर्व ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा | सामान्यतः प्रदोष काल और वृषभ लग्न लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त मुहूर्त होता है | पञ्चांग की गणना के अनुसार सायं 6 बजे से रात्रि 07:54 तक प्रदोष काल में वृषभ लग्न रहेगी अतः यही लग्न सर्व साधारण के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त मुहूर्त है | इस वर्ष सायं सात बजकर छत्तीस मिनट तक चन्द्रमा स्वाति नक्षत्र में है और उसके बाद विशाखा नक्षत्र में चला जाएगा | साथ ही इस वर्ष तुला राशि में सूर्य, चन्द्र और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है जो अत्यन्त शुभ माना जाता है | इसके अतिरिक्त आयुष्मान योग और सौभाग्य योग भी बन रहे हैं | ये दोनों योग भी अपने नामों के ही अनुसार फल देने वाले योग हैं | बहुत से व्यापारी लोग निशीथ काल में लक्ष्मी पूजा करना चाहते हैं उनके लिए 20:11 से 22:51 तक निशीथ काल रहेगा | कुछ तान्त्रिक विधि से उपासना करने वाले लोग महानिशीथ काल और सिंह काल में पूजा करते हैं | महानिशीथ काल 23:14 से 24:06 तक रहेगा और सिंह काल (लग्न) 24:30 से 26:46 तक | किन्तु प्रायः जन साधारण के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न में ही लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त है – यानी सायं 6 बजे से रात्रि 07:54 के मध्य |

दीपावली पर्व प्रकाश का पर्व है | माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे और इस अवसर पर प्रज्वलित दीपमालिका के प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण सभी का जीवन सुख-शान्ति-उल्लास-प्रेम-सौभाग्य-स्नेह और ज्ञान के आलोक से आलोकित करे… इसी कामना के साथ सभी को एक बार पुनः दीपावली की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

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दीपावली

पाँच पर्वों की श्रृंखला दीपावली

प्रकाश पर्व दीपावली समूचे भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है | शारदीय नवरात्र आरम्भ होते ही दीपावली की भी तैयारियाँ जोर शोर से आरम्भ हो जाती हैं | इस पर्व को इतना अधिक महत्त्व यों ही नहीं दिया गया है | वास्तव में पाँच पर्वों की एक श्रृंखला है दीपावली का पर्व – और ये पाँच पर्व हैं: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज | इस वर्ष बुधवार 7 नवम्बर को दीपमालिका प्रज्वलित करने के साथ ही लक्ष्मी पूजन भी होगा | इसके दो दिन पूर्व और दो दिन बाद तक ये पाँचों पर्व हो जाते हैं |

मुहूर्त का यदि विचार करें तो कल यानी सोमवार पाँच नवम्बर को त्रयोदशी तिथि है – इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी धन त्रयोदशी – जिसे धनतेरस कहा जाता है – मनाई जाएगी | जिसे आयुर्वेद के जनक देवताओं के वैद्य महर्षि धन्वन्तरी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | और जैसा कि इसके नाम से ही विदित है – इस दिन स्वर्णाभूषण तथा घर दुकान आदि के लिए नया सामान लाने की प्रथा है, तथा सायंकाल नियम-संयम के देवता यम के लिए दीप प्रज्वलित किये जाते हैं |

मंगलवार को नरक चतुर्दशी, इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है | इसके विषय में कई पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं | जिनमें सबसे प्रसिद्ध तो यही है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके उसके बन्दीगृह से सोलह हज़ार एक सौ कन्याओं को मुक्त कराके उन्हें सम्मान प्रदान किया था | इसी उपलक्ष्य में दीपमालिका भी प्रकाशित की जाती है | एक कथा कुछ इस प्रकार भी है कि यमदूत असमय ही पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा रन्तिदेव को लेने पहुँच गए | कारण पूछने पर यमदूतों ने बताया कि एक बार अनजाने में एक ब्राहमण उनके द्वार से भूखा लौट गया था | अनजाने में किये गए इस पापकर्म के कारण ही उनको असमय ही नरक जाना पड़ रहा है | राजा रन्तिदेव ने यमदूतों से एक वर्ष का समय माँगा और उस एक वर्ष में घोर तप करके कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को पारायण के रूप में ब्रह्मभोज कराके अपने पाप से मुक्ति प्राप्त की | माना जाता है कि तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है |

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर यमराज के लिए तर्पण किया जाता है और सायंकाल दीप प्रज्वलित किये जाते हैं | माना जाता है कि विधि विधान से पूजा करने वालों को सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और अन्त में वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं | बंगाल में इस दिन काली पूजा की जाती है |

बुधवार 7 नवम्बर को तीसरी कड़ी मुख्य पर्व – लक्ष्मी पूजन, चतुर्थ कड़ी गुरूवार 8 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट – जिसका भगवान श्री कृष्ण ने किया था | और पंचम तथा अन्तिम कड़ी है भाई दूज – यम द्वितीया | इस प्रकार भाई दूज के साथ पाँच पर्वों की इस श्रृंखला दीपावली का समापन होता है |

कथाएँ जितनी भी हों, इतना तो निश्चित है कि दीपावली प्रकाश का उल्लासमय पर्व है और उसके पहले आने वाले धनतेरस और नरक चतुर्दशी से आरम्भ होकर इसके बाद आने वाले गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक इस पर्व का उलास छाया रहता है…

सभी के जीवन से अज्ञान, दुर्भाग्य इत्यादि का अन्धकार दूर होकर सभी का जीवन ज्ञान, सौभाग्य, सुख, सम्पत्ति के आलोक से आलोकित हो इसी कामना के साथ सभी को धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की पाँच पर्वों की श्रृंखला दीपमालिकोत्सव की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

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