दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

प्रिय मित्रों, सभी को दीपावली के उल्लासपर्व की झिलमिल झिलमिल करती अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… दीपमालिका के अवसर पर प्रज्वलित प्रत्येक दीप की हर किरण किरण सभी के जीवन को अपना स्नेह प्रदान करे और सभी का जीवन सुख-सौभाग्य-प्रेम के उल्लासमय आलोक से आलोकित रहे…कात्यायनी

आज धरा पर दीवाली है, जगर मगर दीपक जलते हैं |

जैसे इस नीले अम्बर में झिलमिल तारकदल खिलते हैं ||

एक एक दीपक से सारे जग के आओ दीप जलाएँ

जिनकी झिलमिल आभा में ये चाँद सितारें भू पर आएँ |

साज सजें ऐसे जिन पर सब मिलकर दीपक राग सजाएँ

और धरा आकाश गले मिल मस्त मगन मन नृत्य दिखाएँ ||

जन जन का जीवन आलोकित करने हित हम नेह बढ़ाएँ

और बाती को थोड़ा उकसा कर दीपक की जोत बढ़ाएँ |

भेद भाव और व्यंग्य बाण सब दीपशिखा की भेंट चढ़ाएँ

और सद्भावों की आभा फिर जग के कण कण में फैलाएँ ||

देखो चन्द्रकिरण देती है जग को नवयुग का अभिनन्दन

इसी अकौकिक आभा का आओ हम सब कर लें आलिंगन |

दीपमालिका का प्रकाश जन जन की राहों में फैलाएँ

भागे दूर अँधेरा और सबके मन स्वर्ण कमल खिल जाएँ ||

दीपों के रूप में धरा पर उतर आए तारों से झिलमिलाती दीपमालिका सभी के लिए मंगलमय हो… पूर्णिमा

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लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

जैसा कि सभी जानते हैं कि दीपावली बुराई, असत्य, अज्ञान, निराशा, निरुत्साह, क्रोध, घृणा तथा अन्य भी अनेक प्रकार के दुर्भावों रूपी अन्धकार पर सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा तथा अन्य अनेकों सद्भावों रूपी प्रकाश की विजय का पर्व है और इस दीपमालिका के प्रमुख दीप हैं सत्कर्म, सत्य, ज्ञान, आशा, उत्साह, प्रेम, स्नेह आदि सद्भाव | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को दीपावली के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस दिन लक्ष्मी पूजा का विधान है | लक्ष्मी पूजा एक विशेष मुहूर्त में की जाती है और इसके विषय में कई मतान्तर हैं | कुछ लोगों का मानना है कि प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए | प्रदोष काल सूर्यास्त से कुछ समय पूर्व आरम्भ होता है और लगभग दो घन्टे चौबीस मिनट तक रहता है | कुछ तान्त्रिक विधि से लक्ष्मी पूजन करने वाले लोग तथा कर्मकाण्ड में अत्यन्त दक्ष लोगों की मान्यता है कि महानिशीथ काल में लक्ष्मी पूजा की जानी चाहिए | लेकिन जन साधारण के लिए प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का उपयुक्त समय है | इसमें भी स्थिर लग्न का ध्यान रखने की सलाह गुणीजन देते हैं |

आज रात्रि 10:27 से अमावस्या तिथि आ जाएगी, किन्तु उदया तिथि कल यानी 7 नवम्बर को ही होगी | इस दिन रात्रि 09:32 तक अमावस्या है और उसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा लग जाएगी | इसलिए उससे पूर्व ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा | सामान्यतः प्रदोष काल और वृषभ लग्न लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त मुहूर्त होता है | पञ्चांग की गणना के अनुसार सायं 6 बजे से रात्रि 07:54 तक प्रदोष काल में वृषभ लग्न रहेगी अतः यही लग्न सर्व साधारण के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त मुहूर्त है | इस वर्ष सायं सात बजकर छत्तीस मिनट तक चन्द्रमा स्वाति नक्षत्र में है और उसके बाद विशाखा नक्षत्र में चला जाएगा | साथ ही इस वर्ष तुला राशि में सूर्य, चन्द्र और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है जो अत्यन्त शुभ माना जाता है | इसके अतिरिक्त आयुष्मान योग और सौभाग्य योग भी बन रहे हैं | ये दोनों योग भी अपने नामों के ही अनुसार फल देने वाले योग हैं | बहुत से व्यापारी लोग निशीथ काल में लक्ष्मी पूजा करना चाहते हैं उनके लिए 20:11 से 22:51 तक निशीथ काल रहेगा | कुछ तान्त्रिक विधि से उपासना करने वाले लोग महानिशीथ काल और सिंह काल में पूजा करते हैं | महानिशीथ काल 23:14 से 24:06 तक रहेगा और सिंह काल (लग्न) 24:30 से 26:46 तक | किन्तु प्रायः जन साधारण के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न में ही लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त है – यानी सायं 6 बजे से रात्रि 07:54 के मध्य |

दीपावली पर्व प्रकाश का पर्व है | माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे और इस अवसर पर प्रज्वलित दीपमालिका के प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण सभी का जीवन सुख-शान्ति-उल्लास-प्रेम-सौभाग्य-स्नेह और ज्ञान के आलोक से आलोकित करे… इसी कामना के साथ सभी को एक बार पुनः दीपावली की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/06/muhurta-for-lakshami-poojan/

 

दीपावली

पाँच पर्वों की श्रृंखला दीपावली

प्रकाश पर्व दीपावली समूचे भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है | शारदीय नवरात्र आरम्भ होते ही दीपावली की भी तैयारियाँ जोर शोर से आरम्भ हो जाती हैं | इस पर्व को इतना अधिक महत्त्व यों ही नहीं दिया गया है | वास्तव में पाँच पर्वों की एक श्रृंखला है दीपावली का पर्व – और ये पाँच पर्व हैं: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज | इस वर्ष बुधवार 7 नवम्बर को दीपमालिका प्रज्वलित करने के साथ ही लक्ष्मी पूजन भी होगा | इसके दो दिन पूर्व और दो दिन बाद तक ये पाँचों पर्व हो जाते हैं |

मुहूर्त का यदि विचार करें तो कल यानी सोमवार पाँच नवम्बर को त्रयोदशी तिथि है – इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी धन त्रयोदशी – जिसे धनतेरस कहा जाता है – मनाई जाएगी | जिसे आयुर्वेद के जनक देवताओं के वैद्य महर्षि धन्वन्तरी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | और जैसा कि इसके नाम से ही विदित है – इस दिन स्वर्णाभूषण तथा घर दुकान आदि के लिए नया सामान लाने की प्रथा है, तथा सायंकाल नियम-संयम के देवता यम के लिए दीप प्रज्वलित किये जाते हैं |

मंगलवार को नरक चतुर्दशी, इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है | इसके विषय में कई पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं | जिनमें सबसे प्रसिद्ध तो यही है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके उसके बन्दीगृह से सोलह हज़ार एक सौ कन्याओं को मुक्त कराके उन्हें सम्मान प्रदान किया था | इसी उपलक्ष्य में दीपमालिका भी प्रकाशित की जाती है | एक कथा कुछ इस प्रकार भी है कि यमदूत असमय ही पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा रन्तिदेव को लेने पहुँच गए | कारण पूछने पर यमदूतों ने बताया कि एक बार अनजाने में एक ब्राहमण उनके द्वार से भूखा लौट गया था | अनजाने में किये गए इस पापकर्म के कारण ही उनको असमय ही नरक जाना पड़ रहा है | राजा रन्तिदेव ने यमदूतों से एक वर्ष का समय माँगा और उस एक वर्ष में घोर तप करके कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को पारायण के रूप में ब्रह्मभोज कराके अपने पाप से मुक्ति प्राप्त की | माना जाता है कि तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है |

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर यमराज के लिए तर्पण किया जाता है और सायंकाल दीप प्रज्वलित किये जाते हैं | माना जाता है कि विधि विधान से पूजा करने वालों को सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और अन्त में वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं | बंगाल में इस दिन काली पूजा की जाती है |

बुधवार 7 नवम्बर को तीसरी कड़ी मुख्य पर्व – लक्ष्मी पूजन, चतुर्थ कड़ी गुरूवार 8 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट – जिसका भगवान श्री कृष्ण ने किया था | और पंचम तथा अन्तिम कड़ी है भाई दूज – यम द्वितीया | इस प्रकार भाई दूज के साथ पाँच पर्वों की इस श्रृंखला दीपावली का समापन होता है |

कथाएँ जितनी भी हों, इतना तो निश्चित है कि दीपावली प्रकाश का उल्लासमय पर्व है और उसके पहले आने वाले धनतेरस और नरक चतुर्दशी से आरम्भ होकर इसके बाद आने वाले गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक इस पर्व का उलास छाया रहता है…

सभी के जीवन से अज्ञान, दुर्भाग्य इत्यादि का अन्धकार दूर होकर सभी का जीवन ज्ञान, सौभाग्य, सुख, सम्पत्ति के आलोक से आलोकित हो इसी कामना के साथ सभी को धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की पाँच पर्वों की श्रृंखला दीपमालिकोत्सव की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/04/deepawali/

 

ज़रा सोचिये…

पहले बेटी की शादी, फिर उसकी पहली करवाचौथ और उसके बाद पहली दिवाली – सबसे फ्री होते होते आज भाई दूज का दिन आ गया | सभी “बहनों-भाइयों” को भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएँ |

इस दीपावली पर हम कसौली चले गए थे | वैसे हर दीपावली से दो दिन पहले दिल्ली से बाहर जाना ही अच्छा समझते हैं | दिल्ली में तो वायु और ध्वनि प्रदूषण का जो हाल हर दीपावली पर होता है वो बर्दाश्त का बाहर होता है | इस बार तो न केवल हमने, बल्कि बहुत लोगों ने निवेदन भी किया था कि कृपा करके प्रदूषण फैलाने वाली और आपके स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने वाली इस तरह की आतिशबाज़ी न करें, फिर भी पता नहीं क्यों लोग इस ओर जागरूक नहीं होते | ज़रा सोचिये जिन घरों में कोई अस्थमा के मरीज़ होंगे या किसी अन्य प्रकार की साँस की बीमारी किसी व्यक्ति को होगी वो बेचारे कहाँ जाएँगे ? उनकी हालत क्या और अधिक ख़राब नहीं हो जाएगी ? दीपावली प्रदूषण का पर्व तो नहीं है ? माँ लक्ष्मी और गणेश इस प्रदूषण से प्रसन्न होने के बजाए क्रोधित अवश्य हो जाते होंगे | अरे भाई, शान्ति के साथ लक्ष्मी-गणेश का आह्वाहन किया जाए, परिचितों को शुभकामनाएँ दी जाएँ, सबके मुँह मीठे कराए जाएँ, दीपों की माला बनाकर ऐसा प्रकाश प्रसारित किया जाए कि न केवल अमावस की रात – जो ऐसी कालरात्रि भी मानी जाती है कि इस दिन किया गया हर अनुष्ठान सिद्ध होता है – पूर्णिमा की रात सी उजली हो जाए, बल्कि ऐसी स्वर्णिम आभा कण कण में प्रसारित की जाए कि अज्ञान, भय, निराशा, क्रोध, घृणा जैसे समस्त अन्धकार तिरोहित हो जाएँ और हम सबके मन ज्ञान, उत्साह, आशा, करुणा और स्नेह जैसे मधुर भावों के प्रकाश से प्रकाशित हो जाएँ |

बहरहाल, भाई दूज की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएँ सभी को – भाई बहन के प्रेम को और अधिक घनिष्ठ बनाते भाई दूज और रक्षा बन्धन जैसे मधुर पर्व पूर्ण उत्साह के साथ केवल भारत में ही मनाए जाते हैं | क्यों न इस वर्ष सभी बहनें अपने भाइयों का टीका करके उनके साथ ये वचन लें कि अगले वर्ष से मिल जुल कर दीपावली के अवसर पर देश में प्रदूषण के स्थान पर परस्पर भाईचारे-स्नेह-सद्भाव का प्रकाश प्रसारित करेंगे…

इसी के साथ, ३० अक्टूबर २०१६ यानी दीपावली के दिन कसौली में होटल के कमरे की बालकनी से सूर्योदय से पूर्व के कुछ दृश्य…

और अब, पर्वत श्रृंखलाओं की ओट से धीरे धीरे उदित होते भगवानभास्कर…

दीपावली और पर्यावरण

प्रिय मित्रों, आगामी 30 तारीख़ को प्रकाश का पर्व है, तो सर्व प्रथम तो सभी मित्रों को पाँच दिन पहले से ही प्रकाश पर्व दीपावली के मंगलमय त्यौहार पर हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाएँ | दीपमालिका में प्रज्वलित प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण आपके जीवन में सुख, समृद्धि, स्नेह और सौभाग्य की स्वर्णिम आभा प्रसारित करे…. दिवाली पर्व है प्रकाश का – केवल दीयों का प्रकाश नहीं, मानव ह्रदय आलोकित हो जिससे ऐसे स्नेहरस में पगे दीप को प्रज्वलित करने का पर्व है यह… तो परम्परा का अनुसरण करते हुए गणेश-लक्ष्मी के आह्वाहन के साथ ही हम सब मिलकर दीप प्रज्वलित करेंगे आशा का – ताकि हरेक मन से निराशा का अन्धकार दूर हो… दीप प्रज्वलित करेंगे प्रेम का, अपनेपन का – ताकि नफरत और क्रोध का तमस कहीं जा तिरोहित हो….

अब एक निवेदन, मित्रों, इस बार की दीपावली कुछ विशेष है । हमारे प्रधान मन्त्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी ने भी आग्रह किया है कि हम सब सीमा पर तैनात अपनी फौज और सुरक्षाबलों को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए उन्हें दीपावली की शुभकामनाएँ भेजना न भूले । मेरा भी आप सब मित्रों से यही निवेदन है ।

कुछ बरसों से दीपावली पर पटाखों के धुंए और शोर से हवा और ध्वनि का प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि घरों के भीतर सब दरवाजे खिड़कियाँ बन्द करने के बाद भी धुआँ घुस ही आता है । हम सबके स्वास्थ्य के लिए यह बहुत नुकसान देने वाली स्थिति है । आइये इस बार इसे बदलें । इस बार संकल्प लें और बच्चों को भी प्रेरणा दें कि सरसों के तेल वाले मिट्टी के दिए जला कर ही हम दीपावली की अमा निशा को पूनम सी ज्योतित करेंगे और धुआँ उगलने वाली इस आतिशबाज़ी के धमाकों को जितना सम्भव होगा कम करेंगे। चीन में बने पटाखे और आतिशबाज़ी तो वास्तव में वातावरण में ज़हर घोल कर कई गुना प्रदूषण बढ़ा देती है जो फेफड़ों में और सांस की नली में सूजन पैदा करती है । तो आइये इस बार हम सब मिलकर एक नयी मिसाल पैदा करें और प्रदूषण मुक्त दीपावली मना कर अपनी सोसायटी, नगर और देश की आबोहवा को साफ़ रखें और ध्वनि प्रदूषण को कम से कम ।

शुभकामनाओं सहित, निवेदक:-

है प्रकाश का पर्व, धरा पर जगमग जगमग दीप जलाएँ |

और दीप की स्वर्ण ज्योति से हर घर आँगन को नहलाएँ ||

हरेक नयन में स्वप्न ख़ुशी का, और कंठ में राग दीप का |

नयी रोशनी लेकर आये अरुणोदय हर नयी भोर का ||

नए सुरों से सजे दिवाली, और स्नेह में पगे दिवाली |

दीन हीन सबके जीवन में स्नेहसरस हो जगे दिवाली ||

स्नेह बिना ये दीप व्यर्थ हैं, यदि इनमें ना हो दाहकता |

आओं मिलकर इनमें पहले स्नेह बढ़ाएं, फिर दहकाएँ ||

दीन हीन और निर्बल जितने भी प्राणी हैं इस धरती पर

उन सबके जीवन में स्नेहपगी बाती की लौ उकसाएँ ||

होती है दीवाली भू पर, जगर मगर दीपक जलते हैं |

जैसे इस नीले अम्बर में झिलमिल तारकदल खिलते हैं ||

ऐसे ही आओ हम मिलकर भू पर आशादीप जलाएँ |

मावस की ये कलुष निशा भी, पूनम सी ज्योतित हो जाये ||

एक बार पुनः प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ…