Category Archives: धनु

मंगल का धनु में गोचर

आज यानी शुक्रवार सात फरवरी माघ शुक्ल चतुर्दशी को 27:52 (कल सूर्योदय से पूर्व 3:52) के लगभग गर करण और आयुष्मान योग में मंगल अपनी स्वयं की वृश्चिक राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह गुरु की धनु राशि और मूल नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | गुरुदेव जहाँ पहले से ही अपने मित्र के स्वागत के लिए विराजमान हैं | यहाँ मंगल को केतु का साथ भी मिलने के कारण मंगल और अधिक बली भी हो जाएगा | धनु राशि में भ्रमण करते हुए मंगल 27 फरवरी को पूर्वाषाढ़ तथा 17 मार्च को उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 22 मार्च को दिन में दो बजकर चालीस मिनट के लगभग अपनी उच्च राशि मकर में राश्यधिपति शनि के पास प्रस्थान कर जाएगा | धनु राशि के लिए मंगल पंचमेश तथा द्वादशेश है | मंगल की राशि मेष के लिए धनु राशि भाग्य स्थान तथा वृश्चिक के लिए द्वितीय भाव है | धनु राशि में भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ मीन राशि, मिथुन राशि तथा कर्क राशियों पर रहेंगी | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं मंगल के धनु राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश करना अनुचित होगा | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके राश्यधिपति और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से भाग्य स्थान में हो रहा है, जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अनुकूल कहा जा सकता है | कार्य में प्रगति के साथ ही यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु यात्राओं पर पैसा अधिक खर्च हो सकता है, अतः बजट बनाकर चलना आपके लिए हित में रहेगा | आप अपने लिए नया घर खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान निवास को ही Renovate करा सकते हैं | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | साथ ही परिवार में कोई मंगल कार्य भी सम्पन्न हो सकता है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपकी राशि के लिए षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु आप अपने व्यवहार तथा प्रयासों से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ भी हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर योगकारक बन जाता है तथा इसका गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप लम्बे समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित Advance course के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा एकादश भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | आपको कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप लम्बे समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | यदि आपने अपने व्यवहार को नियन्त्रित नहीं रखा तो पारिवारिक स्तर पर वातावरण तनावपूर्ण रह सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सहकर्मियों से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से और आर्थिक दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रुचि में वृद्धि की भी सम्भावना | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है और आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की सम्भावना है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मीडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है अतः योग ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | आप स्वयं अथवा आपकी सन्तान भी विवाह करके अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कहीं दूर जा सकती है | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसकी ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु सन्तान के साथ बहस सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | किन्तु ऐसे मित्रों तथा सम्बन्धियों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की आवश्यकता होगी जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | परिवार में कार्यस्थल पर किसी भी बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/02/07/mars-transit-in-sagittarius/

 

वृश्चिक व धनु राशि के जातकों के लिए शनि का मकर में गोचर

माघ मास की अमावस्या को यानी शुक्रवार 24 जनवरी 2020 को दिन में नौ बजकर अट्ठावन मिनट के लगभग अनुशासन और न्याय का कारक माना जाने वाला ग्रह शनि तीन वर्षों से भी कुछ अधिक समय गुरु की धनु राशि में व्यतीत करके चतुष्पद करण और वज्र योग में उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर रहते हुए ही अपनी स्वयं की राशि मकर में प्रविष्ट हो जाएगा | यहाँ विचरण करते हुए शनि 22 जनवरी 2021 को श्रवण नक्षत्र तथा 18 फरवरी 2022 को धनिष्ठा नक्षत्रों पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 जनवरी 2023 को सायं छह बजकर चार मिनट के लगभग अपनी स्वयं की दूसरी राशि कुम्भ – जो शनि की मूल त्रिकोण राशि भी है – में प्रस्थान कर जाएगा | उत्तराषाढ़ नक्षत्र के स्वामी सूर्य, श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्र तथा धनिष्ठा के अधिपति मंगल इन तीनों के साथ शनि की शत्रुता है | इस बीच ग्यारह मई 2020 से 29 सितम्बर 2020 तक शनि वक्री भी रहेगा | सामान्यतः शनि के वक्री होने पर व्यापार में मन्दी, राजनीतिक दलों में मतभेद, जन साधारण में अशान्ति तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और आँधी तूफ़ान आदि की सम्भावनाएँ अधिक रहती हैं | 7 जनवरी 2021 से दस फरवरी 2021 तक शनि अस्त भी रहेगा | इन्हीं सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अगले लेख में जानने का प्रयास करेंगे शनि के मकर राशि में गोचर के समस्त बारह राशियों के जातकों पर क्या प्रभाव सम्भव हैं…

आज वृश्चिक और धनु राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

वृश्चिक राशि : आपके लिए आपका तृतीयेश और चतुर्थेश होकर शनि का गोचर आपके तीसरे भाव में ही रहा है, जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके पञ्चम भाव, नवम भाव तथा बारहवें भावों पर रहेंगी | सबसे पहले तो आपके लिए राहत की बात है कि शनि के इस गोचर के साथ ही आपकी साढ़ेसाती भी समाप्त हो जाएगी | लेकिन उसके कारण जो उथल पुथल आपके जीवन में रही है उससे उबरने में थोड़ा समय लगेगा इसलिए एक एक पग सँभल कर चलने की आवश्यकता होगी | छोटे भाई बहनों का स्वभाव इस अवधि में उग्र हो सकता है, अतः उनसे यथासम्भव दूरी बनाकर रखना ही उचित रहेगा | आपके शरीर में आलस्य की अधिकता रह सकती है इसलिए सम्भव है आप अपने कार्य बाद के लिए टालने की सोचें | लेकिन ऐसा करना आपके हित में नहीं रहेगा |

नया कार्य आरम्भ करने के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आर्थिक स्थिति सामान्य बनी रहेगी और कार्य में तथा व्यक्तिगत जीवन में आर्थिक स्थिति के कारण कोई व्यवधान उत्पन्न होने की सम्भावना नहीं है | किसी मित्र की सहायता से आप अपने रुके हुए कार्य फिर से आरम्भ कर सकते हैं, किन्तु उस मित्र के साथ पार्टनरशिप में कार्य वृश्चिकआपके लिए लाभदायक नहीं रहेगा | यदि कोई कोर्स आपने बीच में छोड़ दिया है तो उसे भी फिर से आरम्भ करके उसमें सफलता प्राप्त कर सकते हैं | पराक्रम में वृद्धि के संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में भी वृद्धि के संकेत हैं |

अपने स्वयं के, अपनी सन्तान के तथा अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | नियमित चेकअप कराते हुए डॉक्टर के दिशानिर्देशों का पालन करते रहेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं | ड्राइविंग के समय दुर्घटना आदि की ओर से तथा यात्राओं में स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

कोई मित्रता का सम्बन्ध प्रेम सम्बन्ध में परिणत हो सकता है किन्तु उसके विवाह में परिणत होने में समय लग सकता है | दाम्पत्य जीवन में सामंजस्य बना रहने की सम्भावना प्रतीत होती है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि की दिशा में भी प्रयास कर सकते हैं |

धनु राशि : अभी तक शनि का गोचर आपकी राशि में ही चल रहा था, लेकिन अब आपकी राशि से द्वितीयेश तथा तृतीयेश होकर शनि का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके चतुर्थ भाव, अष्टम भाव तथा ग्यारहवें भावों पर रहेंगी | द्वितीय भाव से वाणी तथा धन का विचार किया जाता है | अभी तक आपके लिए साढ़ेसाती का दूसरा भाग चल रहा था | अब तीसरा और अन्तिम भाग आरम्भ हो जाएगा, जो हमारे विचार से आर्थिक दृष्टि से अनुकूल जाना चाहिए | अब तक जितना भी कष्ट साढ़ेसाती के कारण आपको हुआ है, सम्भव है अब उसमें कमी आनी आरम्भ हो जाए | आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके कार्यों में आपको अपने परिवार का सहयोग उपलब्ध रहेगा | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कार्य में विशेष रूप से लाभ की सम्भावना की जा सकती है | अपने स्वयं के लिए भी आप नया घर अथवा वाहन इस अवधि में खरीद सकते हैं |

व्यवसाय में उन्नति तथा नौकरी में पदोन्नति के संकेत प्रतीत होते हैं, किन्तु इसके लिए आपको परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना कही जा सकती है | यह समय आपके लिए बहुत अधिक व्यस्तताओं से भरा हो सकता है, किन्तु कार्याधिक्य के कारण अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देना आपके लिए उचित नहीं रहेगा | परिवार में कोई मंगलकार्य भी सम्पन्न हो सकता है | साढ़ेसाती का यह अन्तिम चरण जाते जाते आपका भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता जाएगा | परिश्रम और संघर्ष रहेंगे, किन्तु उनके परिणाम आशाजनक रहेंगे | छोटी छोटी विदेश यात्राओं के अवसर भी प्रतीत होते हैं, लेकिन इन यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | शनि स्तोत्र अथवा शनि कवच आदि का जाप करेंगे तो आपके लिए लाभदायक रहेगा |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो खान पान पर ध्यान नहीं दिया, योग व्यायाम आदि का अभ्यास नहीं किया तो आपके धनुलिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं | आपके माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | किसी भी ऐसी परिस्थिति से बचने का प्रयास करें जिसके कारण मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है |

अविवाहित हैं तो अभी विवाह में देर हो सकती है | यदि किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध हैं तो उस व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करने का प्रयास करें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन पूर्ववत ही रहने की सम्भावना है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे मकर राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/20/saturn-transit-in-capricorn-8/

बुध का धनु में गोचर

वर्ष 2020 का अन्तिम सप्ताह – दो महत्त्वपूर्ण गोचर – मंगल का अपनी राशि वृश्चिक में गोचर और बुध का धनु में गोचर जहाँ राश्यधिपति गुरु, शनि, केतु और सूर्यदेव पहले से विराजमान हैं | यहाँ हम बात कर रहे हैं बुध के गोचर की | जी हाँ, कल पौष अमावस्या यानी पच्चीस दिसम्बर को अपराह्न 3:46 के लगभग चतुष्पद करण और गण्ड योग में बुध वृश्चिक राशि से धनु राशि में मूल नक्षत्र पर गोचर करेगा | यहाँ विचरण करते हुए बुध 3 जनवरी को पूर्वाषाढ़ और 11 जनवरी को उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तेरह जनवरी को प्रातः 11:35 के लगभग मकर राशि में प्रस्थान कर जाएगा | धनु राशि अपनी इस सम्पूर्ण यात्रा बुध अस्त ही रहेगा | कल क्रिसमस भी है, तो सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के धनु राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | आपके नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके लिए एक और उत्साह में वृद्धि के योग हैं, आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं, वहीं पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना भी इस अवधि में करना पड़ सकता है – विशेष रूप से सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है, अन्यथा इसका विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश होकर बुध आपका योगकारक बनता है और आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है जहाँ आपका दूसरा योगकारक भी विद्यमान है | परिवार में प्रेम और सौहार्द का तथा आनन्द का वातावरण विद्यमान रहने की सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में कहीं आपका विवाह सम्बन्ध भी निश्चित हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी आवश्यक है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में माधुर्य बना रह सकता है | आप अपने लिए नया घर खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन के कारण परिवार में उत्साह तथा मंगलकार्यों का वातावरण बना रह सकता है जिसके कारण बहुत से सम्बन्धियों और मित्रों के साथ मिलना हो सकता है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | किन्तु साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है | आप इस समय विवाह के लिए भी मन बना सकते हैं | किन्तु आगे बढ़ने से पूर्व सम्बन्धित व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक बन जाता है तथा इस समय आपकी लग्न से चतुर्थ भाव में दूसरे योगकारक के साथ गोचर कर रहा है | आपको अपने कार्य में अपने पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में भी वृद्धि की सम्भावना है | पारिवारिक स्तर पर कुछ तनाव की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | साथ ही आप अपने छोटे भाई बहनों की भी किसी प्रकार की सहायता कर सकते हैं | आपका कार्य यदि किसी प्रकार विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग हैं | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने Important Documents को सम्भाल कर रखने की आवश्यकता होगी | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं, प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | किन्तु इसके साथ ही गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से लाभ की भी सम्भावना है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश होने के कारण आपके लिए योगकारक बनता हुआ बुध दूसरे योगकारक के साथ आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | लोग आपके कार्यों की प्रशंसा करेंगे और अपने कार्य के लिए आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो अपने किसी सहकर्मी के साथ विवाह बन्धन में भी बंध सकते हैं | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | तीर्थ स्थलों की यात्रा पर भी जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | साथ ही धार्मिक गतिविधियों के लिए धन भी खर्च कर सकते हैं | ऐसा करते समय पोंगा पण्डितों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | आपकी सन्तान अथवा आप स्वयं किसी विषय में अध्ययन का प्रयास भी कर सकते हैं | किसी वसीयत के माध्यम से अथवा किसी अप्रत्याशित स्रोत से भी आपको लाभ हो सकता है | किन्तु वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक है तथा इस समय इसका गोचर आपके दशम भाव में दूसरे योगकारक के साथ हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | वंश वृद्धि का विचार भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/24/mercury-transit-in-sagittarius-2/

 

सूर्य का धनु राशि में गोचर

सोमवार 16 दिसम्बर यानी पौष कृष्ण पञ्चमी को कौलव करण और वैधृति योग में दिन में 3:28 के लगभग पर सूर्य का संक्रमण धनु राशि में और मूल नक्षत्र पर हो जाएगा | धनु राशि में भ्रमण करते हुए भगवान भास्कर 29 दिसम्बर को पूर्वाषाढ़ और ग्यारह जनवरी को उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में चौदह जनवरी को अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर नौ मिनट के लगभग मकर राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | धनु राशि में भ्रमण करते हुए सूर्यदेव को निरन्तर शनि और गुरु के साथ ही केतु का भी साथ मिलेगा, जिनमें गुरु सूर्य का मित्र ग्रह है तो शनि और केतु शत्रु ग्रह | इस बीच 26 दिसम्बर को वलयाकार सूर्य ग्रहण भी है | सूर्य की अपनी राशि सिंह के लिए धनु राशि पञ्चम भाव है तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से नवम भाव है | इसी प्रकार धनु राशि के लिए सूर्य नवमेश है | साधारण तौर पर हम कह सकते हैं कि मेष, धनु और सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर अनुकूल रह सकता है | जानने का प्रयास करते हैं सूर्य के धनु राशि में गोचर के सभी राशियों के जातकों पर सम्भावित प्रभाव क्या हो सकते हैं…

इस बीच पन्द्रह दिसम्बर को संकट चतुर्थी, 21 को भगवान पार्श्वनाथ जयन्ती, 22 को सफला एकादशी, 23 को सोम प्रदोष, 6 जनवरी को पौष शुक्ल एकादशी, 8 को प्रदोष व्रत और 10 को पौष पूर्णिमा है – सभी को इन सभी पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | साथ ही, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : मेष राशि सूर्य की मित्र राशि है और यहाँ आकर सूर्य उच्च का हो जाता है | मेष राशि के लिए सूर्य पंचमेश होकर नवम भाव में राश्यधिपति के साथ ही गोचर कर रहा है | जो न केवल अपने लिए बल्कि आपकी सन्तान और पिता के लिए भी भाग्यवर्द्धक है | आपको किसी प्रकार के सम्मान आदि के लिए भी प्रस्तावित किया जा सकता है अथवा आपकी पदोन्नति हो सकती है | परिवार में कोई शुभ कार्य हो सकता है | किसी प्रकार का पूजा अनुष्ठान आदि का आयोजन किया जा सकता है | आप सपरिवार तीर्थयात्रा पर जाने का प्लान भी बना सकते हैं | आप उच्च शिक्षा के लिए भी अग्रसर हो सकते हैं | अविवाहित हैं तो विवाह बन्धन में बंध सकते हैं | किन्तु सम्बन्धित व्यक्ति की भली भाँति जाँच पड़ताल अवश्य करा लें |

वृषभ : वृषभ राशि से धनु राशि अष्टम भाव में आ जाती है और सूर्य चतुर्थेश होकर धनु में अष्टम भाव में गोचर कर रहा है जहाँ चतुर्थेश के साथ ही योगकारक शनि भी विद्यमान है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल तो प्रतीत होता है, किन्तु पारिवारिक स्तर पर अचानक ही कुछ ऐसी घटनाएँ घट सकती हैं जिनके प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं | कार्य स्थल पर भी किसी प्रकार के विरोध का सामना अचानक ही करना पड़ सकता है | अपनी जीवन शैली में सुधार करेंगे और अपने आचरण को शुद्ध रखेंगे तो किसी भी प्रतिकूल समस्या से बच सकते हैं | ध्यान प्राणायाम आदि में आपकी रुचि बढ़ सकती है | अपने तथा अपने माता पिता के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है | आदित्य हृदय स्तोत्र अथवा गायत्री मन्त्र का जाप आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है |

मिथुन : आपके लिए तृतीयेश होकर सूर्य धनु राशि में सप्तम भाव में योगकारक गुरु तथा अष्टमेश और नवमेश शनि के साथ गोचर कर रहा है | राहु-केतु के मध्य है | इस गोचर को बहुत अधिक अनुकूल नहीं कहा जा सकता | विशेष रूप से जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का मतभेद हो सकता है | यदि पार्टनरशिप में कार्य कर रहे हैं तो वहाँ भी सम्बन्धों में किसी प्रकार का वैमनस्य उत्पन्न हो सकता है | आप ज़रा सी बात पर भड़क सकते हैं, जो सम्बन्धों के लिए हानिकारक होगा | इस सबसे बचना है तो आपको अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखना होगा | आपके लिए भी आदित्य हृदय स्तोत्र अथवा गायत्री मन्त्र का जाप करना उचित रहेगा |

कर्क : कर्क राशि के लिए सूर्य द्वितीयेश होकर धनु राशि में छठे भाव में षष्ठेश तथा सप्तमेश और अष्टमेश के साथ गोचर कर रहा है | इस गोचर को एक बहुत शक्तिशाली गोचर के रूप में देखा जाता है | आपके जितने भी छिपे हुए अथवा प्रत्यक्ष विरोधी अथवा शत्रु हैं उन सबके लिए समस्या उत्पन्न हो सकती है | अपने विरोधियों पर आपको विजय प्राप्त हो सकती है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसकी भी समाप्ति होकर अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकता है | आपकी वाणी ओज पूर्ण रहेगी तथा उसका प्रभाव दूसरों पर होगा | स्वास्थ्य के लिए पित्त से सम्बन्धित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है इसलिए अपने खान पान की आदत में सुधार करना आवश्यक है | साथ ही किसी को इस समय उधार न दें | किसी document पर sign करने से पूर्व अच्छी तरह उसका अध्ययन अवश्य कर लें | ध्यान रहे, किसी भी समस्या से बचने के लिए सबसे अच्छा उपाय होता है सोच समझकर आगे बढ़ना |

सिंह : आपके लिए सूर्य आपका लग्नेश होकर धनु राशि में राश्यधिपति और षष्ठेश तथा सप्तमेश के साथ पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यह गोचर आपके लिए आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से अनुकूल प्रतीत होता है | अध्ययन के लिए, उच्च शिक्षा के लिए समय अनुकूल है | जो लोग मन्त्र आदि को सिद्ध करना चाहते हैं अथवा ध्यान अध्यात्म आदि के मार्ग पर अग्रसर हैं उनके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल है | किन्तु गर्भवती महिलाओं को किसी भी समस्या से बचने के लिए निश्चित समय पर डॉक्टर से जाँच कराना और डॉक्टर के दिए निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन की सलाह अवश्य दी जाएगी | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है | वैवाहिक जीवन में सम्भव है कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ जाए | अविवाहित हैं तो कोई प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद आगे बढें | प्रातः आदित्य हृदय स्तोत्र के साथ सूर्य देव का अभिषेक आपके लिए उत्तम रहेगा |

कन्या : आपके लिए सूर्य आपकी लग्न से द्वादशेश होकर धनु राशि में आपके चतुर्थ भाव में चतुर्थेश तथा पंचमेश और षष्ठेश के साथ गोचर कर रहा है | इस प्रकार के गोचर से संकेत मिलता है कि यदि आप कहीं यात्रा पर गए हुए हैं तो किसी पारिवारिक कार्य के लिए घर वापस लौट सकते हैं | परिवार में किसी प्रकार के तनाव से बचने के लिए आपको अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना होगा | आर्थिक दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | प्रॉपर्टी को बेचने के लिए समय अनुकूल प्रतीत होता है किन्तु खरीदने में अधिक धन का व्यय हो सकता है | लीवर से सम्बन्धित किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है | ड्राइविंग करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यदि माता पिता वृद्ध हैं तो उनके स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उसके जीवन में यदि कोई समस्या है तो उसका भी समाधान इस अवधि में सम्भव है | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस से बचने की आवश्यकता है |प्रातः उठकर सूर्य को जल देना तथा योग ध्यान आदि के अभ्यास आपके लिए अनुकूल रहेगा |

तुला : तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादशेश हो जाता है | एकादशेश होकर धनु राशि में तृतीय भाव में गोचर कर रहा है तृतीयेश तथा योगकारक शनि के साथ | आपके भाई बहनों को आपसे अर्थ लाभ की सम्भावना है | साथ ही मित्रों और अधिकारी वर्ग का सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा | कुछ नए मित्र भी बन सकते हैं जो आपके लिए कुछ नए प्रोजेक्ट्स लेकर आएँगे जिनके कारण आपको अर्थलाभ की भी सम्भावना है | यदि आपकी कुण्डली में अन्य अनुकूलताएँ इस समय हो रही हैं तो आप इन नए प्रोजेक्ट्स के साथ आगे बढ़ सकते हैं | कार्याधिक्य के कारण आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, अतः बीच बीच में कार्य से अवकाश लेने की भी आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की बहस से बचें अन्यथा विवाद लम्बा खिंच सकता है |

वृश्चिक : वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य उनके दशम भाव का स्वामी है | दशमेश सूर्य धनु राशि में द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है जो कार्य की दृष्टि से तथा अर्थ लाभ की दृष्टि अनुकूल है और आपका भविष्य भी आर्थिक रूप से सुरक्षित होने का समय प्रतीत होता है | कार्यक्षेत्र में अनुकूलता बनी रहने की सम्भावना है | किन्तु शनि और राहु-केतु की उपस्थिति के कारण आपके मन में अपने परिवार और कार्य को लेकर कुछ द्विविधाएँ हो सकती हैं | सूर्यदेव की उपासना तथा ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास इन द्विविधाओं से बचने के उपाय हैं | आपकी वाणी इस समय विशेष रूप से ओजपूर्ण रहेगी जिसका आपको लाभ तथा यश भी प्राप्त होगा | आँखों से सम्बन्धित किसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है |

धनु : आपके लिए सूर्य आपका भाग्येश होकर लग्न में लग्नेश और द्वितीयेश के साथ गोचर कर रहा है जो भाग्यवर्द्धक है | आवश्यकता है अपनी योग्यताओं और सम्भावनाओं पर भली भाँति पुनर्विचार करके उनका समय पर सदुपयोग करने की | आप कभी कभी अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को लेकर आशंकित हो जाते हैं | अपने विचारों और कर्म से नैराश्य का भाव त्याग कर आशावादी बनिए | समय का लाभ उठाइये क्योंकि समय हाथ से निकल जाए तो फिर वापस नहीं आता | सरकारी स्तर पर, उच्चाधिकारियों से तथा पिता की ओर से अनुकूल सहयोग प्राप्त हो सकता है | धन और यश में वृद्धि का समय है | विवाहित हैं तो जीवन साथी का Temperament कुछ उग्र हो सकता है, आवश्यकता है आप अपना Temperament शान्त रखें और शान्ति के साथ अपनी बात जीवन साथी को समझाने का प्रयास करें | स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ सावधान रहने की आवश्यकता है | मानसिक तनाव से बचने के लिए प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करें |

मकर : आपके लिए सूर्य अष्टमेश होकर द्वादश भाव में गोचर कर रहा है जहाँ द्वादशेश और लग्नेश भी विद्यमान हैं | आपका लग्नाधिपति शनि है जो अष्टमेश सूर्य का शत्रु भी है | यह गोचर आपके लिए शुभ नहीं कहा जा सकता | आपको विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | कोई भी ऐसा कार्य मत कीजिये जिसके कारण आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की सम्भावना हो | साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धी अथवा पारिवारिक समस्याओं के कारण धन भी अधिक खर्च हो सकता है | अपनी गतिविधियों का निरीक्षण करके स्वयं को एक बेहतर इन्सान बनाने का प्रयास कीजिए | आपको किसी ऐसे स्थान की यात्रा करनी पड़ सकती है जहाँ जाने की आपकी इच्छा न हो और वहाँ जाकर आपका स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है | गायत्री मन्त्र का जाप आपके लिए उत्तम उपाय है |

कुम्भ : मकर राशि की ही भाँति कुम्भ राशि का स्वामी भी शनि है | सूर्य आपका सप्तमेश होकर आपके एकादश भाव में गोचर कर रहा है | शनि यद्यपि सूर्य का शत्रु ग्रह है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि आपको अपने जीवन साथी के द्वारा अथवा आपके जीवन साथी को अर्थ लाभ भी हो सकता है | आपके व्यवसाय में भी वृद्धि हो सकती है | यदि किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति की भी सम्भावना है | अपने मित्रों के साथ मधुर व्यवहार रखेंगे तथा बॉस का सम्मान करेंगे तो उनसे व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत स्तर पर अनुकूलता प्राप्त हो सकती है | जीवन साथी की खोज इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

मीन : मीन राशि वालों के लिए सूर्य षष्ठेश होकर दशम भाव अर्थात profession के भाव में गोचर कर रहा है | बहुत अच्छी स्थिति में गोचर कर रहा है | जितनी भी नकारात्मकता अथवा निराशा आपके विचारों अथवा कार्य के प्रति है वह सब इस अवधि में समाप्त हो सकती है | अधिकारी वर्ग की ओर से लाभ की भी सम्भावना है | आपकी सभी योजनाएँ पूर्ण हो सकती हैं अथवा उनमें अनुकूल दिशा में प्रगति हो सकती है | नौकरी की तलाश में हैं अथवा कोई नया व्यवसाय आरम्भ करना चाहते हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो या तो उससे मुक्ति प्राप्त हो सकती है अथवा उसके अनुकूल दिशा में आगे बढ़ने की सम्भावना है | किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उस दिशा में भी सफलता प्राप्त करने की सम्भावना की जा सकती है |

अन्त में, सदा की भाँति इतना अवश्य कहेंगे कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/14/sun-transit-in-sagittarius-2/

 

शुक्र का धनु में गोचर

शुक्र का धनु राशि में गोचर

मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी (सूर्योदय काल में नवमी तिथि है किन्तु 11:29 पर दशमी तिथि लग जाएगी) यानी कल दिन में बारह बजकर तेईस मिनट के लगभग वणिज करण और वैधृति योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र वृश्चिक राशि से निकल कर धनु राशि और मूल नक्षत्र में प्रस्थान करेगा | यहाँ भ्रमण करते हुए दो दिसम्बर को पूर्वाषाढ़ और तेरह दिसम्बर को उत्तराषाढ़ नक्षत्रों पर विचरण करते हुए अन्त में पन्द्रह दिसम्बर को सायंकाल 5:59 के लगभग अपने मित्र ग्रह शनि की मकर राशि में प्रस्थान कर जाएगा | पूर्वाषाढ़ नक्षत्र का स्वामित्व भी शुक्र को ही प्राप्त है | इस समय धनु राशि में गुरु, केतु और शनि का गोचर भी चल रहा है | धनु राशि के लिए शुक्र षष्ठेश और एकादशेश बनता है तथा शुक्र की वृषभ राशि से धनु राशि अष्टम भाव और तुला से तृतीय भाव बनती है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के धनु राशि में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | एक ओर परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहेगा वहीं दूसरी ओर आपके कार्य में भी प्रगति के साथ साथ अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी वाणी इस समय बहुत प्रभावशाली बनी हुई है जिसका लाभ आपको जीवन के हर क्षेत्र में प्राप्त होने की सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है अथवा कोई प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो सकता है, जो आपके मन के अनुकूल होगा तथा जो समय आने पर विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित व्यक्ति के विषय में पूरी तरह जाँच पड़ताल करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे तो आपके हित में रहेगा | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | Opposite Sex की ओर इस अवधि में आपका झुकाव बढ़ सकता है | आगे बढ़ने से पूर्व पार्टनर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें | साथ ही पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होने जा रहा है | आपकी निर्णायक क्षमता, उत्साह और मनोबल में वृद्धि के साथ ही आपका व्यक्तित्व भी इस अवधि में प्रभावशाली रहने की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के लिए यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | इन यात्राओं में कार्य के साथ साथ आपको कुछ आकर्षक स्थलों के भ्रमण का अवसर भी प्राप्त हो सकता है | सम्भव है इन यात्राओं के दौरान आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जिसकी ओर आपका झुकाव हो जाए और आप उसके साथ विवाह सम्बन्ध में बंधना चाहें, किन्तु उसके विषय में सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही आगे बढ़ना उचित रहेगा | जल्दबाज़ी में कोई निर्णय न लें |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | एक ओर आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा हुआ भी हो सकता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | यदि नौकरी में हैं तो विशेष रूप से महिला अधिकारी से पंगा आपके हित में नहीं होगा | यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | साथ ही विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | परिवार में किसी प्रकार के तनाव की आशंका भी की जा सकती है | इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में होने जा रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है | आपके कार्यों के कारण आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | इस अवधि में यदि आप अविवाहित हैं तो आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं आपके मनोनुकूल व्यक्ति के साथ निश्चित हो सकता है | किन्तु आगे बढ़ने से पूर्व सम्बन्धित के विषय में भली भाँति जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | आपको इस अवधि में कोई ऐसा कार्य आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रहकर अर्थलाभ कर सकते हैं | आप कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | किन्तु इस योजना को अभी कुछ समय के टालना ही उचित रहेगा | परिवार में आनन्द का वातावरण रहेगा | किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | साथ ही यदि राजनीति से आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर जहाँ भाई बहनों के साथ किसी कारण से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है वहीं आपके दाम्पत्य जीवन में भी किसी प्रकार का तनाव सम्भव है | जिन लोगों पर आप बहुत अधिक विश्वास रखते हैं उन्हीं की ओर से आपको किसी प्रकार का विश्वासघात भी सम्भव है | अतः अच्छा यही रहेगा कि अपनी योजनाओं के विषय में किसी से इस अवधि में बात न करें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो सम्भव है आपकी आशा के अनुकूल प्रगति उसमें न हो, किन्तु चिन्ता की आवश्यकता नहीं है | धीरे धीरे समय अनुकूल भी हो सकता है | तनाव के कारण आपके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | किन्तु साथ ही खर्चों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है, अन्यथा आपका बजट गड़बड़ा सकता है | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार कहीं घूमने जाने की योजना भी बना सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आप इस अवधि में अपने शारीरिक सौन्दर्य को निखारने में अधिक व्यस्त रह सकते हैं | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | Opposite Sex के प्रति आपका रुझान इस अवधि में बढ़ सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आपके कार्य में प्रगति के साथ ही अर्थलाभ की सम्भावना भी है | अधिकारीगणों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किन्तु अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं होगा | राजनीति से यदि आप सम्बद्ध हैं तो आपके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि योग, व्यायाम, प्राणायाम और ध्यान का निरन्तर अभ्यास करते रहे तो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उच्च शिक्षा, कला के प्रदर्शन अथवा अन्य किसी कार्य के निमित्त विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं से आपके कार्य तथा मान सम्मान में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता आने की सम्भावना है | इन यात्राओं के करान आपके कुछ नए मित्र भी बन सकते हैं | साथ ही इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य तथा Important Documents का भी ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें | विशेष रूप से यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपको डॉक्टर के दिशा निर्देशों पर चलने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा कार्य में वृद्धि के साथ ही धनलाभ के भी संकेत हैं | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है अथवा कोई नया प्रेम सम्बन्ध भी स्थापित हो सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | जहाँ तक आपके कार्य का प्रश्न है तो आपको अपने सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | कुछ ऐसे लोगों का विरोध भी झेलना पड़ सकता है जिनकी ओर से आपको अनुकूलता की सम्भावना होगी | छोटे भाई बहनों के साथ तथा परिवार की महिला सदस्यों के साथ भी किसी प्रकार का विवाद इस अवधि में सम्भव है | विशेष रूप से यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई विवाद है तो उसे आपसी विचार विमर्श से ही सुलझाने में ही समझदारी है, अन्यथा यदि बात कोर्ट तक पहुँच गई तो समस्या हो सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/20/venus-transit-in-sagittarius-2/

 

गुरु का धनु में गोचर

देवगुरु बृहस्पति की उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति के लिए की जाती है | किसी व्यक्ति की कुण्डली में गुरु पिता का कारक भी होता है और किसी कन्या की कुण्डली में पति के लिए भी गुरु को देखा जाता है | साथ ही माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का गुरु बली हो तो वह व्यक्ति विद्वान् होता है तथा उसे अपने ज्ञान के ही कारण यश और धन की प्राप्ति होती है | इन्हें देवगुरु की उपाधि से विभूषित किया गया है अतः इन्हें “गुरु” भी सम्बोधित किया जाता है | ये शील और धर्म के अवतार माने जाते हैं | नवग्रहों के समूह का नायक माने जाने के कारण इन्हें गणपति और गणाधिपति नामों से भी सम्बोधित किया जाता है | धनु और मीन दो राशियों तथा पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्रों का स्वामित्व गुरु के पास है | कर्क इनकी उच्च राशि तथा मकर निम्न राशि है | सूर्य, चन्द्रमा और मंगल के साथ इनकी मित्रता है, बुध तथा शुक्र शत्रु ग्रह हैं और शनि के साथ ये तटस्थ भाव में रहते हैं | गुरुदेव एक राशि पर लगभग एक वर्ष तक भ्रमण करते हैं | वक्री और अस्त आदि होने की स्थिति में कभी कभी इस अवधि में कुछ घट बढ़ भी हो सकती है | इस वर्ष 29 मार्च 2019 को 20:07 के लगभग गुरु ने अपने मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि से निकल कर अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण राशि धनु और मूल नक्षत्र में प्रवेश किया था | इस बीच 10 अप्रेल 2019 को 22:05 के लगभग गुरु का वक्री होना आरम्भ किया था और वक्री होते हुए 23 अप्रेल की रात को पुनः वृश्चिक राशि में वापस आ गए थे | 11 अगस्त को 19:42 के लगभग गुरु मार्गी हो गए थे और इसी अवस्था में पाँच नवम्बर तक भ्रमण करते हुए अन्त में कार्तिक शुक्ल नवमी यानी पाँच नवम्बर को बालव करण और गण्ड योग में प्रातः सूर्योदय से पूर्व 05:17 के लगभग पुनः अपनी स्वयं की धनु राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे |

धनु राशि में विचरण करते हुए 4 जनवरी 2020 को पूर्वाषाढ़ और आठ मार्च को उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 29 मार्च को 27:55 (30 मार्च को सूर्योदय से लगभग सवा दो घंटा पूर्व तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग शनि की मकर राशि में प्रस्थान कर जाएँगे जो गुरु की नीच राशि है | गुरु इस समय राहु-केतु के मध्य तथा अपने मित्र ग्रह शनि के साथ होंगे | 21 नवम्बर से 15 दिसम्बर तक शुक्र, 26 दिसम्बर से तेरह जनवरी तक बुध तथा सोलह दिसम्बर से पन्द्रह जनवरी तक सूर्य का साथ भी गुरु को प्राप्त होगा |

धनु राशि में विचरण करते हुए गुरुदेव की दृष्टियाँ क्रमशः मेष, मिथुन तथा सिंह राशियों पर रहेंगी | मेष राशि के लिए गुरु भाग्येश तथा द्वादशेश है, मिथुन के लिए सप्तमेश और दशमेश होकर योगकारक तथा सिंह के लिए पंचमेश और अष्टमेश है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं गुरु के धनु राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका नवमेश और द्वादशेश होकर गुरु आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है जहाँ से आपकी राशि, तृतीय भाव तथा पंचम स्थानों पर गुरु की दृष्टियाँ हैं | यह समय आपके कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | कोई ऐसा नवीन Contract आप इस अवधि में Sign कर सकते हैं जिसके कारण आप दीर्घकाल तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | कार्यक्षेत्र में तथा समाज में मान सम्मान के संकेत हैं | इस अवधि में आप अपने समस्त रुके हुए कार्य भी पूर्ण कर सकते हैं तथा आपकी आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता प्रतीत होती है, किन्तु आपको अपने खर्चों पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता होगी | परिवार में विवाह अथवा किसी शिशु के जन्म के कारण नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | कुछ मनोरंजक यात्राओं के अथवा तीर्थ यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रुझान बढ़ सकता है | यदि आप किसी प्रकार की रहस्य विद्याओं के ज्ञाता हैं, कोई शोध कार्य कर रहे हैं, किसी प्रकार की Alternative Healing Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में अनुकूल जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | कोई प्रेम सम्बन्ध भी विवाह में परिणत हो सकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका अष्टमेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके बारहवें भाव, दूसरे भाव तथा चतुर्थ भावों पर गुरु की दृष्टियाँ हैं | पैसे के लेन देन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है | आप यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि किसी कारणवश करना भी पड़ जाए तो बहुत सोच विचार के बाद ही आगे बढें | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी किसी प्रकार का व्यवधान भी सम्भव है | किसी से नई नई मित्रता हुई है तो उस पर विश्वास करना आपके हित में नहीं रहेगा | नौकरी में हैं तो बॉस से किसी प्रकार की बहस आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है | आपका किसी ऐसे स्थान पर ट्रांसफर भी हो सकता है जो आपके मन के अनुकूल न हो | पारिवारिक क्लेश से बचने की आवश्यकता है | किन्तु साथ ही किसी अप्रत्याशित स्थान अथवा माध्यम से आपके लिए अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किसी ऐसे स्थान से भी आपके लिए नौकरी का प्रस्ताव आ सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी अथवा आशा ही छोड़ दी होगी | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : गुरु आपका योगकारक ग्रह है और आपकी राशि से सप्तम भाव में विचरण कर रहा है जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके लाभ स्थान, राशि तथा तीसरे भाव पर हैं | आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका कार्य पार्टनरशिप में है तब तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य के अनेक नवीन अवसर आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं – यदि आपने समझदारी से निर्णय लिया तो बहुत समय तक आप इन कार्यों में व्यस्त रहते हुए धनलाभ कर सकते हैं | कार्य में प्रगति के साथ ही अर्थ लाभ की भी सम्भावना की जा सकती है | आपको अपने भाई के माध्यम से भी अर्थलाभ की सम्भावना है | किन्तु आपको अपने Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही कार्यस्थल पर भी वातावरण अनुकूल बना रहेगा | परिवार में भी सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहेगा, किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है साथ ही सम्बन्धों में ईमानदारी भी रखने की आवश्यकता होगी | अन्यथा सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न होते देर नहीं लगेगी |

कर्क : आपके लिए गुरु षष्ठेश तथा भाग्येश है और आपके छठे भाव में ही गोचर कर रहा है जहाँ से आपके कर्म स्थान, बारहवें भाव तथा धन स्थानों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु आपके पराक्रम और निर्णायक क्षमता में वृद्धि का समय होने के कारण आप अपने विरोधियों को परास्त करने में भी सक्षम हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस अथवा स्वास्थ्य के कारण मानसिक तनाव की भी सम्भावना है | स्वास्थ्य अथवा लीगल समस्याओं के कारण पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का प्रयास करें | कार्य से सम्बन्धित दूर पास की यात्राओं के भी संकेत हैं, किन्तु सम्भव है इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए | अपने साथ अथवा अपने घर या ऑफिस में कार्य कर रहे लोगों पर ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | अन्धविश्वास हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं अथवा नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

सिंह : आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर गुरु आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके भाग्य स्थान, लाभ स्थान तथा लग्न पर हैं | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि पहले से कुछ समस्याएँ कार्य अथवा परिवार से सम्बन्धित चल भी रही हैं तो उनके समाधान की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही नवीन सम्पर्क भी बनेंगे जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आप अपनी बुद्धिमत्ता के कारण हर किसी के आकर्षण का केन्द्र बने रहेंगे अतः इस अवसर का लाभ उठाने में ही समझदारी है | ज्ञान में वृद्धि के साथ ही दार्शनिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में भी आपका रुझान बढ़ सकता है | सम्भव है आप बहुत दिनों से कोई नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना बना रहे हों, इस एक माह की अवधि में आप इस योजना को क्रियान्वित भी कर सकते हैं | परिवार में किसी शिशु के जन्म की भी सम्भावना है | आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए भी किसी अच्छे संस्थान में एडमीशन ले सकते हैं | आपका अधिकाँश समय सन्तान से सम्बन्धित कार्यों में व्यस्त रह सकता है | किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस अथवा उसके प्रति सन्देह के स्वभाव की आपको त्यागना होगा | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

कन्या : आपके लिए गुरु योगकारक ग्रह है तथा आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है तथा वहाँ से आपके अष्टम भाव, दशम भाव और बारहवें भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | शनि तथा केतु-राहु के प्रभाव के कारण इस अवधि में आपको मिश्रित फल प्राप्त होने की सम्भावना है | एक ओर आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन खरीद सकते हैं | कार्य का जहाँ तक प्रश्न है तो यदि आपने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना लिया तो आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनसे आपको बहुत समय तक अर्थलाभ भी होता रह सकता है | कार्य से सम्बन्धित अथवा केवल भ्रमण के लिए ही यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना भी है | इन यात्राओं का उपयोग भी आप अपने कार्य के निमित्त कर सकते हैं | वहीं दूसरी ओर परिवार में – विशेष रूप से अपनी माता जी अथवा किसी बुज़ुर्ग महिला के कारण अथवा कार्य स्थल पर किसी प्रकार के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों या जिनसे आप सहमत न हों उनसे एक दूरी बनाकर रहें | विवाहित हैं तो जीवन साथी के प्रति ईमानदार बने रहेंगे तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

तुला : आपका तृतीयेश और षष्ठेश होकर गुरु का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके सप्तम भाव, नवम भाव तथा लाभ स्थानों पर आ रही हैं | आपके लिए यह गोचर बहुत अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | छोटी छोटी यात्राओं की सम्भावना है | ये यात्राएँ आपके कष्टकारी भी सिद्ध हो सकती हैं | यदि आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | आपका कोई मित्र अथवा भाई भी आपके लिए तनाव का कारण बन सकता है | इस अवधि में आप अपना निवास स्थान भी बदल सकते हैं अथवा नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर भी सम्भव है | किन्तु जहाँ भी आप शिफ्ट करें सम्भव है वह स्थान आपके लिए अनुकूल न सिद्ध हो | छोटे भाई बहनों के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | समय रहते यदि यह विवाद नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | हाँ यदि आप किसी नौकरी की तलाश में हैं वह तलाश आपकी पूर्ण हो सकती है | यह नौकरी भी सम्भव है आपके मन के अनुकूल न मिले | लेकिन इस समय इस Job को Accept करना ही आपके लिए उचित रहेगा | कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | Opposite Sex की ओर आपका झुकाव हो सकता है, लेकिन सोच समझकर ही आगे बढ़ना उचित रहेगा |

वृश्चिक : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है और वहाँ से आपके छठे भाव, अष्टम भाव तथा दशम भावों को देख रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य की कुछ नवीन Opportunities इस अवधि में आपके समक्ष प्रस्तुत हो सकती हैं, इस अवधि में यदि आप उन्हें स्वीकार कर लेते हैं तो बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो वह भी पूर्ण होकर प्रकाशन के लिए जा सकता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए भी यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में किसी मांगलिक कार्य के सम्पन्न होने की सम्भावना है, सम्भव है आपकी सन्तान का विवाह इस अवधि में सम्पन्न हो जाए | आपकी सन्तान का प्रदर्शन प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा रहने की सम्भावना है | यदि आप अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य बने रहने की सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपको अपनी वाणी और Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है – विशेष रूप से खान पान के सम्बन्ध में |

धनु : आपका राश्यधिपति और चतुर्थेश होकर गुरु आपके लिए योगकारक ग्रह है और आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है तथा वहाँ से आपके पञ्चम भाव, सप्तम भाव और नवम भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए आत्मविश्वास में वृद्धि तथा कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा नौकरी में हैं तो उसमें पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कुछ नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं | यह कार्य आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत हैं तो उसमें भी आशानुरूप सफलता की सम्भावना की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी मधुरता बनी रहेगी | किन्तु, ध्यान रहे, आपके क्रोध में वृद्धि हो सकती है जो सम्बन्धों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है – अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पॉलिटिक्स से सम्बन्धित लोगों के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान के लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | सन्तान यदि विवाह योग्य है तो उसका विवाह भी इस अवधि में सम्भव है, किन्तु उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके चतुर्थ भाव, छठे भाव तथा अष्टम भावों पर हैं | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही खर्च भी अधिक होने की सम्भावना है | साथ ही इन यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य तथा चोरी आदि की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | छोटे भाई बहनों के साथ विवाद के कारण भी धन का अपव्यय सम्भव है | अच्छा यही रहेगा इस समय अपने मन की शान्ति बनाए रखने के लिए बहुत सी अप्रिय बातों पर ध्यान ही न दें | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई ऐसा कोर्ट केस भी इस अवधि में खुल सकता है जो बहुत समय से आपको लगता है बन्द पड़ा था | साथ ही किसी पुरानी बीमारी के भी फिर से उभर आने की सम्भावना है | अच्छा यही रहेगा कि समय पर अपना पूरा चेकअप कराएं और डॉक्टर के दिशा निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें | परिवार में अकारण ही क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | यदि ऐसा होता है तो किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को समय पर सुलझाने का प्रयास करें अन्यथा विवाद लम्बा खिंच सकता है |

कुम्भ : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से लाभ स्थान में होने जा रहा है और वहाँ से आपके तीसरे भाव, पञ्चम भाव तथा सप्तम भावों को देख रहा है | आपके लिए कार्य तथा आर्थिक लाभ की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | व्यवसाय में उन्नति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की सम्भावना भी है | आपको अपने पिता, बड़े भाई तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त रहेगा जिसके कारण आप अपने समस्त कार्य सुचारु रूप से करने में समर्थ हो सकेंगे | किन्तु इन लोगों के साथ व्यर्थ की बहस किसी विवाद को जन्म दे सकती है जो आपके हित में नहीं रहेगा | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु सम्बन्धित Documents का भली भाँति अध्ययन अवश्य कर लें | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु इसके साथ ही आपको अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की भी आवश्यकता है | जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहेंगे तो दाम्पत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी | अविवाहित हैं तो इस अवधि  में विवाह की सम्भावना भी की जा सकती है | यदि कुछ समय से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है तो इस अवधि में उसमें भी सुधार की सम्भावना की जा सकती है |

मीन : आपके लिए योगकारक गुरु का गोचर आपके कर्म स्थान में हो रहा है और वहाँ से आपके दूसरे भाव, चतुर्थ भाव तथा छठे भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | निश्चित रूप से बड़ा भाग्यशाली समय प्रतीत होता है | इस अवधि में आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के साथ ही अर्थलाभ की सम्भावना भी है | नौकरी में हैं तो उसमें सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कार्य क्षेत्र में यद्यपि कुछ विरोध के स्वर मुखर हो सकते हैं, किन्तु इस समय आपके उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपकी निर्णायक क्षमता में भी स्पष्टता बनी हुई है जिसके कारण आप अपने बुद्धिबल से स्वयं ही उस विरोध को शान्त करने में समर्थ हो सकते हैं | आप नया घर खरीद कर उसमें शिफ्ट हो सकते हैं | किन्तु सम्बन्धित Documents का अच्छी तरह निरीक्षण अवश्य कर लें | साथ ही यदि कहीं पैसा Invest करना हो भली भाँति सोच समझकर ही आगे बढें | यदि आपका Temperament सही रहा तो घर परिवार में सुख शान्ति का वातावरण बना रह सकता है | मित्रों तथा परिवारजनों के साथ आमोद प्रमोद में समय व्यतीत हो सकता है | परिवार में किसी का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किसी पुराने रोग से मुक्ति की सम्भावना है, किन्तु साथ ही कोई अन्य नवीन समस्या भी स्वास्थ्य के सम्बन्ध में उत्पन्न हो सकती है | अपने खान पान पर नियन्त्रण तथा जीवन शैली में बदलाव आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर तथा उनके मार्गी, वक्री अथवा अतिगामी होने का क्रम तो अपने नियत समय पर चलता ही रहेगा | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/11/03/jupiter-transit-in-sagittarius-2/

 

गुरु का धनु में गोचर

ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, पिता, गुरु, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख आदि के कारक बृहस्पति ने 11 अक्टूबर 2018 को वृश्चिक राशि में प्रस्थान किया था | गुरु एक ही राशि में लगभग एक वर्ष तो विश्राम करते ही हैं, किन्तु वक्री अथवा मार्गी होने के कारण इस अवधि में कुछ अन्तर भी आ जाता है | इस बार भी ऐसा ही हो रहा है | लगभग साढ़े पाँच माह वृश्चिक में भ्रमण करने के बाद गुरुदेव कल शुक्रवार चैत्र कृष्ण नवमी यानी 29 मार्च को रात्रि आठ बजकर सात मिनट के लगभग गर करण और शिव योग में अपनी स्वयं की राशि धनु तथा मूल नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएँगे लगभग एक माह के लिए | इस बीच 10 अप्रेल से वक्री होता हुआ गुरु 23 अप्रेल को पुनः वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र पर पहुँच जाएगा | यहाँ लगभग साढ़े छह माह भ्रमण करने के बाद पाँच नवम्बर को पुनः वापस धनु राशि और मूल नक्षत्र में आ जाएगा |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका नवमेश और द्वादशेश होकर गुरु आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | यह समय आपके कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | कार्यक्षेत्र में तथा समाज में मान सम्मान के संकेत हैं | इस लगभग एक माह के समय में आप अपने समस्त रुके हुए कार्य भी पूर्ण कर सकते हैं | परिवार में विवाह अथवा किसी शिशु के जन्म के कारण नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | कुछ मनोरंजक यात्राओं के अथवा तीर्थ यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रुझान बढ़ सकता है | यदि आप किसी प्रकार की रहस्य विद्याओं के ज्ञाता हैं, कोई शोध कार्य कर रहे हैं, किसी प्रकार की Alternative Healing Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका अष्टमेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | पैसे के लेन देन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है | आप यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि किसी कारणवश करना भी पड़ जाए तो बहुत सोच विचार के बाद ही आगे बढें | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान भी सम्भव है | किसी से नई नई मित्रता हुई है तो उस पर विश्वास करना आपके हित में नहीं रहेगा | नौकरी में हैं तो बॉस से किसी प्रकार की बहस आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है | किन्तु साथ ही किसी अप्रत्याशित स्थान अथवा माध्यम से आपके लिए अर्थलाभ की भी सम्भावना है | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : गुरु आपका योगकारक ग्रह है और आपकी राशि से सप्तम भाव में विचरण कर रहा है | यदि आपका कार्य पार्टनरशिप में है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य के अनेक नवीन अवसर आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं – यदि आपने समझदारी से निर्णय लिया तो बहुत समय तक आप इन कार्यों में व्यस्त रहते हुए धनलाभ कर सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही कार्यस्थल पर भी वातावरण अनुकूल बना रहेगा | परिवार में भी सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहेगा, किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए गुरु षष्ठेश तथा भाग्येश है और आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विरोधियों में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु आपके पराक्रम और निर्णायक क्षमता में वृद्धि का समय होने के कारण आप अपने विरोधियों को परास्त करने में भी सक्षम हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस अथवा स्वास्थ्य के कारण मानसिक तनाव की भी सम्भावना है | स्वास्थ्य अथवा लीगल समस्याओं के कारण पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का प्रयास करें | कार्य से सम्बन्धित दूर पास की यात्राओं के भी संकेत हैं, किन्तु सम्भव है इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए | अपने साथ अथवा अपने घर या ऑफिस में कार्य कर रहे लोगों पर ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | अन्धविश्वास हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं अथवा नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

सिंह : आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर गुरु आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही नवीन सम्पर्क भी बनेंगे जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | ज्ञान में वृद्धि के साथ ही दार्शनिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में भी आपका रुझान बढ़ सकता है | सम्भव है आप बहुत दिनों से कोई नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना बना रहे हों, इस एक माह की अवधि में आप इस योजना को क्रियान्वित भी कर सकते हैं | परिवार में किसी शिशु के जन्म की भी सम्भावना है | आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए भी किसी अच्छे संस्थान में एडमीशन ले सकते हैं | किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस अथवा उसके प्रति सन्देह के स्वभाव की आपको त्यागना होगा | अविवाहित हैं इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

कन्या : आपके लिए गुरु योगकारक ग्रह है तथा आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | शनि तथा केतु-राहु के प्रभाव के कारण इस अवधि में आपको मिश्रित फल प्राप्त होने की सम्भावना है | एक ओर आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन खरीद सकते हैं | कार्य का जहाँ तक प्रश्न है तो आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनसे आपको बहुत समय तक अर्थलाभ भी होता रह सकता है | वहीं दूसरी ओर परिवार में – विशेष रूप से अपनी माता जी अथवा किसी बुज़ुर्ग महिला के कारण अथवा कार्य स्थल पर किसी प्रकार के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों या जिनसे आप सहमत न हों उनसे एक दूरी बनाकर रहें | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

तुला : आपका तृतीयेश और षष्ठेश होकर गुरु का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर बहुत अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | छोटी छोटी यात्राओं की सम्भावना है | ये यात्राएँ आपके कष्टकारी भी सिद्ध हो सकती हैं | यदि आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | इस अवधि में आप अपना निवास स्थान भी बदल सकते हैं अथवा नौकरी में हैं तो आपका ट्रांसफर भी सम्भव है | किन्तु जहाँ भी आप शिफ्ट करें सम्भव है वह स्थान आपके लिए अनुकूल न सिद्ध हो | छोटे भाई बहनों के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | समय रहते यदि यह विवाद नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | हाँ यदि आप किसी नौकरी की तलाश में हैं वह तलाश आपकी पूर्ण हो सकती है | यह नौकरी भी सम्भव है आपके मन के अनुकूल न मिले | लेकिन इस समय इस Job को Accept करना ही आपके लिए उचित रहेगा |

वृश्चिक : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | इस लगभग एक माह की अवधि में परिवार में किसी मांगलिक कार्य के सम्पन्न होने की सम्भावना है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | कार्य की कुछ नवीन Opportunities इस अवधि में आपके समक्ष प्रतुत हो सकती हैं, इस अवधि में यदि आप उन्हें स्वीकार कर लेते हैं तो बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो वह भी पूर्ण होकर प्रकाशन के लिए जा सकता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए भी यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का प्रदर्शन प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा रहने की सम्भावना है | यदि आप अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य बने रहने की सम्भावना है | आपको अपनी वाणी और Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका राश्यधिपति और चतुर्थेश होकर गुरु आपके लिए योगकारक ग्रह है और आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए आत्मविश्वास में वृद्धि तथा कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा नौकरी में हैं तो उसमें पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | इस अवधि में आप कुछ नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं | यह कार्य आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत हैं तो उसमें भी आशानुरूप सफलता की सम्भावना की जा सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी मधुरता बनी रहेगी | किन्तु, ध्यान रहे, आपके स्वभाव में क्रोध में वृद्धि हो सकती जो सम्बन्धों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है – अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पॉलिटिक्स से सम्बन्धित लोगों के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मकर : आपका द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही खर्च भी अधिक होने की सम्भावना है | छोटे भाई बहनों के साथ विवाद के कारण भी धन का अपव्यय सम्भव है | अच्छा यही रहेगा इस समय अपने मन की शान्ति बनाए रखने के लिए बहुत सी अप्रिय बातों पर ध्यान ही न दें | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई ऐसा कोर्ट केस भी इस अवधि में खुल सकता है जो बहुत समय से आपको लगता है बन्द पड़ा था | साथ ही किसी पुरानी बीमारी के भी फिर से उभर आने की सम्भावना है | अच्छा यही रहेगा कि समय पर अपना पूरा चेकअप कराएं और डॉक्टर के दिशा निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें | परिवार में अकारण ही क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | यदि ऐसा होता है तो किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को समय पर सुलझाने का प्रयास करें |

कुम्भ : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि से लाभ स्थान में होने जा रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | व्यवसाय में उन्नति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की सम्भावना भी है | आपको अपने पिताम बड़े भाई तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त रहेगा जिसके कारण आप अपने समस्त कार्य सुचारू रूप से करने में समर्थ हो सकेंगे | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह समय अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कुछ समय से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है तो इस अवधि में उसमें भी सुधार की सम्भावना की जा सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु इसके साथ ही आपको अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की भी आवश्यकता है | साथ ही अकारण ही बॉस से पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

मीन : आपके लिए योगकारक गुरु का गोचर आपके कर्म स्थान में हो रहा है | निश्चित रूप से बड़ा भाग्यशाली समय प्रतीत होता है | इस अवधि में आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के साथ ही अर्थलाभ की सम्भावना भी है | नौकरी में हैं तो उसमें सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कार्य क्षेत्र में यद्यपि कुछ विरोध के स्वर मुखर हो सकते हैं, किन्तु आप अपने बुद्धिबल से स्वयं ही उस विरोध को शान्त करने में समर्थ हो सकते हैं | आप नया घर खरीद कर उसमें शिफ्ट हो सकते हैं | किन्तु यदि कहीं पैसा Invest करना हो भली भाँती सोच समझकर ही आगे बढें | घर परिवार में सुख शान्ति का वातावरण बना रह सकता है | मित्रों तथा परिवारजनों के साथ आमोद प्रमोद में समय ब्यतीत हो सकता है | परुवार में किसी का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किसी पुराने रोग से मुक्ति की सम्भावना है, किन्तु साथ ही कोई अन्य नवीन समस्या भी स्वास्थ्य के सम्बन्ध में उत्पन्न हो सकती है | अपने खान पान पर नियन्त्रण तथा जीवन शैली में बदलाव आपके लिए अत्यन्त आवश्यक है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर तथा उनके मार्गी, वक्री अथवा अतिगामी होने का क्रम तो अपने नियत समय पर चलता ही रहेगा | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/03/28/jupiter-transit-in-sagittarius/