सूर्य का मकर राशि में संक्रमण

पौष शुक्ल अष्टमी, सोमवार 14 जनवरी 2019 को सायं सात बजकर बावन मिनट के लगभग उत्तराषाढ़ नक्षत्र में रहते हुए राहू केतु के मध्य बव करण और सिद्ध योग में भगवान भास्कर मित्र ग्रह गुरु की धनु राशि से निकलकर शत्रु गृह शनि की मकर राशि में संचार करेंगे | जिसे “मकर संक्रान्ति” के नाम से जाना जाता है | पुण्यकाल मंगलवार 15 जनवरी को सूर्योदय के समय सवा सात बजे से होगा | इसी दिन सूर्य का उत्तरायण गमन आरम्भ हो जाता है | सभी को सूर्यदेव के उत्तरायण प्रस्थान की हार्दिक शुभकामनाएँ | भगवान सूर्य बुधवार 13 फरवरी 2019 तक मकर राशि में निवास करके आगे कुम्भ राशि में प्रस्थान करेंगे | जैसा कि हम सभी जानते हैं, सूर्य समस्त चराचर में प्रकाश, ऊर्जा तथा प्राणों का संचार करने वाला आत्मतत्व है – प्राण तत्व है – शक्ति है | साथ ही, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य पिता तथा पूर्वजों का भी प्रतिनिधित्व करता है | मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्यदेव क्रमशः उत्तराषाढ़, श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्रों पर विचरण करेंगे | उत्तराषाढ़ राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी ध्रुव अर्थात स्थिर नक्षत्र है तथा इसकी नाड़ी कफ है | श्रवण की नाड़ी भी कफ है और यह भी राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी किन्तु चर नक्षत्र है | धनिष्ठा ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है किन्तु इसकी नाड़ी पित्त है तथा यह तामसी प्रवृत्ति का और चर नक्षत्र है |

यों देखा जाए तो सूर्य की अपनी राशि सिंह है और मेष राशि में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है | अब इस दृष्टि से यदि देखें तो मकर राशिगत सूर्य अपनी उच्च राशि से दशम भाव  में तथा अपनी राशि सिंह से छठे भाव  में गोचर करता है | माना मकर राशि का अधिपति ग्रह शनि सूर्य का शत्रु ग्रह है, किन्तु सूर्य भी दुर्बल ग्रह तो है नहीं | साथ ही मकर और कुम्भ राशियाँ सूर्य के अपने पुत्र शनि की राशियाँ हैं | अतः सूर्य का यह गोचर जातक को किसी भी विपरीत परिस्थिति से लड़कर आगे बढ़ने में सहायता ही करेगा | जातक के जीवन में इस समय समस्याएँ आ सकती हैं किन्तु अपने बुद्धिबल से तथा अपने पिता की सहायता से वह इन समस्याओं से मुक्ति भी प्राप्त करने में सक्षम हो सकता है | तो, इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्य के विभिन्न राशियों के जातकों के लिए क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं :-

मेष : मेष राशि के लिए सूर्य पंचमेश होकर दशम भाव में गोचर कर रहा है | दशम भाव व्यवसाय का / नौकरी का भाव होता है | पंचमेश का दशम भाव में गोचर निश्चित रूप से इस भाव को बली बना रहा है | आपके कार्य में प्रगति के साथ साथ सामाजिक स्तर पर भी आपके सम्मान में वृद्धि की सम्भावना है | क्योंकि दशम भाव पंचम से छठा भाव हो जाता है इसलिए सम्भव है कार्यक्षेत्र में आपको किसी प्रकार के विरोध अथवा नकारात्मकता का भी सामना करना पड़ जाए | 24 जनवरी के बाद से स्थितियों में सुधार की सम्भावना है | आपकी बुद्धि और दृढ़ इच्छाशक्ति आपको विरोधियों को परास्त करने में सहायक होंगे और आप स्वयं अपने लिए आगे बढ़ने का मार्ग निकाल सकेंगे | प्रातः सूर्य को अर्घ्य समर्पित करना आपके हित में रहेगा |

वृषभ : आपका चतुर्थेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपना लक्ष्य अधिक निकट प्रतीत होगा और आपमें उस तक पहुँचने का उत्साह भी बढ़ेगा | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किसी भी महत्त्वपूर्ण विषय में निर्णय लेने से पूर्व उसके हर पक्ष पर भली भाँति निर्णय करेंगे तो सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं | यदि कहीं आपका पैसा अटका हुआ है और आप उसे भूल गए हैं तो अचानक ही आपको उस धन की प्राप्ति हो सकती है | आप कोई नई प्रॉपर्टी भी ख़रीद सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए सूर्य का मकर राशि में संचार बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | पित्त सम्बन्धी अथवा जोड़ों में दर्द या ज्वर आदि की समस्याएँ हो सकती हैं | जो कुछ भी करें भली भाँति सोच विचार कर करें | कुछ छिपे हुए विरोधी इस अवधि में मुखर हो सकते हैं जिनके कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | छोटे भाई बहनों के साथ किसी विवाद में भी फँस सकते हैं | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस हो सकती है | किन्तु सन्तान की शिक्षा के विषय में कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

कर्क : आपके लिए सूर्य द्वितीयेश होकर सप्तम भाव में गोचर कर रहा है जो दूसरे भाव से छठा भाव हो जाता है | अर्थात अपने से छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है | आपके तथा आपके जीवन साथी के सम्बन्धों में किसी प्रकार का अहम् आड़े आ सकता है | पार्टनरशिप में कार्य कर रहे हैं तो वहाँ भी आपके अपने चिडचिडेपन के कारण किसी प्रकार की बहस हो सकती है | आपके जीवन साथी अथवा परिवार में किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किन्तु इसके साथ साथ आपके व्यवसाय में प्रगति की भी सम्भावनाएँ हैं | सम्भव है कोई नया प्रोजेक्ट भी आपको प्राप्त हो जाए | राजनीति में हैं तो आपको कोई पदभार भी सौंपा जा सकता है |

सिंह : आपकी लग्न का स्वामी होकर सूर्य छठे भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं | अतः यदि हल्का सा भी बुख़ार अथवा सरदर्द आदि हो तो तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लें | आपके स्वभाव में कुछ अधिक तेज़ी आ सकती है | साथ ही व्यावसायिक रूप से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप पहले से कहीं अधिक प्रयत्नशील हो सकते हैं जिस कारण से अपना कार्य समय पूर्ण कर पाने में भी सफल हो सकते हैं | कोई कोर्ट केस भी चिन्ता का विषय हो सकता है | स्पोर्ट्स में हैं तो सावधानीपूर्वक खेलें अन्यथा किसी दुर्घटना के भी शिकार होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा शिक्षा की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उच्च शिक्षा के लिए अथवा किसी अन्य कार्य के लिए आप कहीं विदेश के लिए भी प्रस्थान कर सकते हैं अथवा उसके लिए तैयारी कर सकते हैं | ऐसा करना आपके हित में रहेगा तथा नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो अपने अधिकारियों के साथ आपके सम्बन्धों में घनिष्ठता आ सकती है | सन्तान की शिक्षा में समस्या आ सकती है | यदि सन्तान विदेश में कहीं है तो घर भी वापस आ सकती है जो उसके हित में होगा |

तुला : एकादशेश होकर सूर्य आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर आपके अनुकूल प्रतीत होता है | हाँ आपके स्वभाव में चिडचिडापन बढ़ सकता है जिसके कारण पारिवारिक और व्यावसायिक स्तरों पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अतः अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए प्राणायाम तथा ध्यान आदि का सहारा लें तो अच्छा रहेगा | अपने किसी अधिकारी के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | घर को रेनोवेट करा सकते हैं |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके आत्मविश्वास में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य स्थल में साथियों के साथ अथवा छोटे भाई बहनों के साथ व्यर्थ की बहस भी हो सकती है जो मानसिक तनाव का कारण बन सकती है | आपके किसी कार्य के पूर्ण होने की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आप कोई नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं जो आपके लिए आर्थिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है |

धनु : नवमेश होकर सूर्य आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | यद्यपि यह नवम भाव से छठा भाव बनता है, किन्तु फिर भी धनु राशि के लिए सूर्य का ये गोचर आर्थिक रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किसी सरकारी तन्त्र से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना है | यदि सरकारी नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना को जा सकती है | अपना व्यवहार दूसरों के साथ उचित रखेंगे तो सम्बन्धों में कड़वाहट से बच सकते हैं | आँखों में किसी प्रकार की समस्या हो सकती है | डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें |

मकर : अष्टमेश होकर सूर्य आपकी लग्न में गोचर कर रहा है | आपको हल्के ज्वर, पित्त अथवा सरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | यदि आपने अपने व्यवहार को सही नहीं रखा तो सम्बन्धों में कटुता का भी सामना करना पड़ सकता है | आपके अपने अहम् के कारण जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में कड़वाहट आ सकती है | आपका कोई पुराना रहस्य भी इस अवधि में सामने आ सकता है जो आपके हित में नहीं होगा |

कुम्भ : सप्तमेश का द्वादश भाव में गोचर हो रहा है | सम्भव है आपको इस पूरी अवधि में लम्बी यात्राएँ करनी पड़ जाएँ | सम्भव है जीवन साथी के साथ विदेश यात्रा की योजना आप बना लें जो न केवल आपके लिए आमोद प्रमोद का साधन होगी बल्कि वापस लौटने पर आप स्वयं में एक नवीन स्फूर्ति का भी अनुभव करेंगे | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उस पार्टनरशिप के टूटने की सम्भावना है | यदि कोई प्रेमप्रसंग चल रहा है तो उसमें भी अलगाव हो सकता है | जीवन साथी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मीन : सूर्य का मकर राशि में गोचर आपके उत्साह में तथा कार्यक्षमता में वृद्धि का सूचक है जिसके कारण आपके कार्य में प्रगति तथा आपके यश में वृद्धि की सम्भावना है और अर्थलाभ की भी सम्भावना है | यह गोचर आपको अन्तर्मुखी भी बना सकता है तथा स्वार्थी भी | आपकी भेंट किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जो बहुत अधिक प्रभावशाली होगा और भविष्य में उसके द्वारा आपको लाभ भी हो सकता है | आपके विरोधी शान्त होंगे और यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी अनुकूल परिणाम की आशा की जा सकती है | ज्वर अथवा सरदर्द सम्बन्धी समस्याओं से आप परेशान हो सकते हैं |

जैसा कि ऊपर लिखा, मकर राशि में भ्रमण करते हुए भगवान भास्कर निरन्तर ऊर्ध्वमुखी नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे, और लगभग 25 दिन कफ प्रकृति के नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे | इसका सामान्य अर्थ यह होता है कि जन साधारण में कफ की प्रधानता रह सकती है तथा अधिकाँश लोग प्रगति के पथ पर अग्रसर रह सकते हैं | वैसे भी सूर्य का उत्तरायण प्रस्थान वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से बहुत उत्तम माना जाता है | अतः सूर्य या किसी भी अन्य ग्रह के किसी विशिष्ट राशि में संचार के क्या फल हो सकते हैं इसका विस्तृत अध्ययन तो एक Astrologer व्यक्ति विशेष की कुण्डली समग्र अध्ययन करने के बाद ही बता सकता है | यहाँ तो केवल सामान्य परिणामों के विषय में ही लिखा जा सकता है |

अन्त में, सभी आदित्यगण हम सबके हृदयों से अज्ञान का अन्धकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रसारित करें, हम सबके विचारों में सकारात्मकता का संचार करें और हमारी रचनाधर्मिता में वृद्धि करते हुए हम सबको सुखी, स्वस्थ तथा ऊर्ध्वमुखी अर्थात प्रगतिशील बनाए रखें…

ॐ घृणिः सूर्य आदित्य नमः ॐ

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/14/sun-transit-in-capricorn/

 

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शुक्र का वृश्चिक में गोचर

सर्वप्रथम सभी को नववर्ष 2019 की हार्दिक शुभकामनाएँ | आज मंगलवार एक जनवरी को प्रातः नौ बजकर पचास मिनट पर बुध का गोचर धनु राशि में हुआ है, और आज ही रात्रि आठ बजकर तैतालीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला से निकलकर मंगल की वृश्चिक राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | शुक्र के वृश्चिक राशि में प्रवेश के समय पौष कृष्ण एकादशी तिथि, बालव करण और धृति योग होगा तथा शुक्र इस समय विशाखा नक्षत्र में रहेगा | यहाँ 29 जनवरी तक निवास करने के पश्चात 29 जनवरी को ही धनु राशि में प्रस्थान कर जाएगा | वृश्चिक राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र का भ्रमण पाँच जनवरी से अनुराधा नक्षत्र में तथा 17 जनवरी से ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के कन्या राशि में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | वहीं दूसरी ओर आपके कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु पैसे के लेन देन के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी | Opposite Sex की ओर इस अवधि में आपका झुकाव बढ़ सकता है | आगे बढ़ने से पूर्व पार्टनर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें | साथ ही पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके सप्तम भाव में गोचर करने जा रहा है | आपके उत्साह और मनोबल में वृद्धि के साथ ही आपका व्यक्तित्व भी इस अवधि में प्रभावशाली रहने की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं या सौन्दर्य से सम्बन्धित किसी कार्य जैसे ब्यूटी पार्लर आदि का कार्य है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | यदि किसी के साथ Romantic Relationship में हैं तो उसमें विघ्न उपस्थित हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी किसी मित्र के कारण तनाव उत्पन्न होने के संकेत हैं | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के योग हैं |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | एक ओर आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा हुआ भी हो सकता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | साथ ही विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अपने वर्तमान घर को भी Renovate करा सकते हैं | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है | आप अथवा आपकी सन्तान उच्च शिक्षा, नौकरी अथवा कला के प्रदर्शन के लिए विदेश यात्रा भी कर सकते हैं |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ  भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | किसी महिला मित्र के माध्यम से कोई नया कार्य भी आपको प्राप्त हो सकता है और इस कार्य में आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए धनलाभ भी कर सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण रहेगा | किसी कन्या का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ आपके छोटे भाई बहनों के लिए कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपके लिए भी कार्य में वृद्धि तथा आय में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | आपको इस अवधि में कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी प्रशंसा होगी और भविष्य में उन प्रोजेक्ट्स का लाभ आपको प्राप्त होगा | आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ भी आपको प्राप्त हो सकता है | आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्ध रखता है अथवा आप किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं या दस्तकार हैं तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार कहीं घूमने जाने की योजना भी बना सकते हैं | किन्तु साथ ही विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आप इस अवधि में अपने शारीरिक सौन्दर्य को निखारने में अधिक व्यस्त रह सकते हैं | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | Opposite Sex के प्रति आपका रुझान इस अवधि में बढ़ सकता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत भी प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं में किसी के प्रति आप आकर्षित हो सकते हैं जो विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं से एक ओर आपके कार्य में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता आने की सम्भावना है तो वहीं दूसरी ओर इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है | साथ ही इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य तथा Important Documents का भी ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | वाहन आदि चलाते समय भी किसी प्रकार की दुर्घटना आदिद से सावधान रहने की आवश्यकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा कार्य में वृद्धि के साथ ही धनलाभ के भी संकेत हैं | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य तथा आय में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है अथवा कोई नया प्रेम सम्बन्ध भी स्थापित हो सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में हर प्रकार से लाभ के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ स्थानान्तरण के भी संकेत हैं | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | कलाकारों को किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा जिसके कारण आपके कार्य समय पर पूर्ण होते रहेंगे | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं, अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | जिस घर में अभी निवास करते हैं उसे Renovate भी करा सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | एक ओर परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहेगा वहीं दूसरी ओर आपके कार्य में भी प्रगति की सम्भावना की जा सकती है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं | अथवा जिस घर में आप रहते हैं उसे ही Renovate और Decorate करा सकते हैं | परिवार में माँगलिक कार्यों की भी सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग बन रहे हैं | इन यात्राओं में आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | आपके छोटे भाई अथवा बहन का विवाह इस अवधि में हो सकता है | किन्तु छोटे भाई बहनों के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास आवश्यक है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना के साथ एक बार पुनः नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/01/venus-transits-scorpio/

सूर्य का धनु में गोचर

रविवार, 16 दिसम्बर, मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी को प्रातः नौ बजकर दस मिनट के लगभग भगवान भास्कर बालव करण और व्यातिपत योग में अपने मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि से निकल कर दूसरे मित्र गृह गुरु की धनु राशि और मूल नक्षत्र में प्रविष्ट हो जाएँगे जहाँ शनिदेव पहले से ही विराजमान हैं | यहाँ लगभग एक माह तक भ्रमण करने के पश्चात 14 जनवरी को रात्रि 07:51 के लगभग मकर राशि में केतु के साथ पहुँच जाएँगे | अपनी इस यात्रा के दौरान सूर्यदेव 29 दिसम्बर से पूर्वाषाढ़ तथा 11 जनवरी से उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करेंगे | धनु राशि से सूर्य भाग्येश भी है तथा अपनी स्वयं की राशि सिंह से पंचम भाव और अपनी उच्च की राशि मेष से भाग्य स्थान में सूर्य का गोचर रहेगा | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर संक्षेप में जानने का प्रयास करते हैं कि वृश्चिक राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने पिता का सहयोग और समर्थन इस अवधि में निरन्तर उपलब्ध रहेगा | आप अपने व्यवसाय से सम्बन्धित कोई Advance Course भी इस अवधि में कर सकते हैं | कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती हैं | आपकी सन्तान तथा आपके पिता के लिओये भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | इसके साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर आपका रुझान बढ़ सकता है | समाज में मान प्रतिष्ठा तथा किसी प्रकार पुरूस्कार आदि प्राप्त होने की भी सम्भावना है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में अचानक ही किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो सकता है | किन्तु अपने पिता के सहयोग से आप उस तनाव को दूर करने में भी समर्थ हो सकते हैं | अपने पिता का सहयोग आपकी प्राप्त रहेगा किन्तु गुप्त शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | परिवार में बच्चे के जन्म की ही समभावना इस अवधि में है जिसके कारण परिवार में आनन्द का वातावरण बन सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | साथ ही ड्राइविंग के समय आपको सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का तनाव सम्भव है | कार्यस्थल में सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किसी घनिष्ठ मित्र के साथ भी कोई समस्या हो सकती है जिसके निराकरण में आप व्यस्त रह सकते हैं | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं में भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सूर्य की उपासना आपके लिए उचित रहेगी |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है, जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी सम्भव है | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको किसी पद की प्राप्ति हो सकती है | वहीं दूसरी ओर आपके अपने Temperament के कारण आपके शत्रुओं में भी वृद्धि हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पिता का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा किन्तु पिता के साथ अकारण बहस आपके हित में नहीं रहेगी |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से पञ्चम भाव में गोचर हो रहा है | कार्य की दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से तथा पारिवारिक स्तर पर यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा तथा आप अपनी सन्तान के किसी कार्य में व्यस्त रह सकते हैं अथवा आपके पिता को आपके किसी कार्य में व्यस्त रहना पड़ सकता है | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है अथवा किसी प्रकार की Alternative Healing से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर हो रहा है | आपके लिए कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | ये यात्राएँ आपके लिए अनुकूल फल देने वाली सिद्ध हो सकती हैं | तथा इनके कारण आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | परिवार का कोई अन्य सदस्य भी कहीं भ्रमण के लिए जा सकता है अथवा आप भी सपरिवार कहीं भ्रमण के लिए जा सकते हैं | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आप इस अवधि में अपना निवास अथवा कार्यालय भी बदल सकते हैं |

तुला : आपके एकादशेश का गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | आय में वृद्धि के संकेत हैं | भाई बहनों का सहयोग आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो अधिकारियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रह सकता है | साथ ही किसी सम्मान प्राप्ति की सम्भावना भी है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपके द्द्वितीय भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थलाभ कर सकते हैं | बड़े भाई तथा अधिकारीगणों का सहयोग आपकोई उपलब्ध रहेगा जिसके कारण आपके कार्य समय पर पूर्ण होते रह सकते हैं | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली बनी हुई है, उसका प्रभाव दूसरों पर अवश्य पड़ेगा | आपके पिता अथवा बड़े भाई के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य में उन्नति तथा उसके कारण अर्थलाभ की समभावना प्रतीत होती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही कुछ नवीन सम्पर्क भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है है | धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए जा सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | प्रेम सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | एक ओर यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है तो वहीं दूसरी ओर इन यात्राओं के दौरान आपको दुर्घटनाओं आदि के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु यदि समझदारी से काम लिया तो कुछ नया कार्य आरम्भ करके उसे आगे भी बढ़ा सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | गर्भवती महिला हैं और डिलीवरी निकट है तो आपको विशेष रूप से अपनी चिकित्सक के सम्पर्क में रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके सप्तमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | पार्टनरशिप में जिन लोगों का कार्य है उनके लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | साथ ही आपको अपने बड़े भाई अथवा अधिकारियों का सहयोग भी इस अवधि में उपलब्ध रह सकता है | साथ ही पॉलिटिक्स से जो लोग सम्बन्ध रखते हैं उन लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उन्हें किसी पद की प्राप्ति भी हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आपके बड़े भाई का भी विवाह इस अवधि में सम्पन्न हो सकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है तो वहीं कार्य स्थल पर किसी प्रकार का तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | किन्तु आप स्वयं ही अपनी बुद्धि से उस तनाव को दूर भी कर सकते हैं | प्रतियोगी परिक्षा की तैयारी जो लोग कर रहे हैं उनके लिए यह गोचर अधिक भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | किन्तु साथ ही अपनी माता जी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/12/14/sun-transit-in-sagittarius/

 

सूर्य का वृश्चिक में गोचर

आज कार्तिक शुक्ल नवमी को 18:32 के लगभग भगवान भास्कर विशाखा नक्षत्र पर रहते हुए ही बालव करण और व्याघात योग में तुला राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे, जहाँ पहले से भ्रमण कर रहे उनके मित्र देवगुरु बृहस्पति उनका स्वागत करेंगे | साथ ही इस पूरी यात्रा में सोमसुत बुध भी साथ रहेंगे | यहाँ 16 दिसम्बर को लगभग प्रातः नौ बजकर आठ मिनट तक भ्रमण करने के पश्चात गुरुदेव की ही राशि धनु और मूल नक्षत्र में प्रविष्ट हो जाएँगे | अपनी इस यात्रा के दौरान सूर्यदेव 20 नवम्बर से अनुराधा तथा 03 दिसम्बर से ज्येष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करेंगे | वृश्चिक राशि से सूर्य दशमेश है, गुरु द्वितीयेश तथा पंचमेश और बुध अष्टमेश तथा लाभेश है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर संक्षेप में जानने का प्रयास करते हैं कि वृश्चिक राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपकी राशि से पंचमेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | अकारण ही आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है जो सम्बन्धों के लिए उचित नहीं होगा, अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी भी स्थिति में आपके माता पिता का सहयोग और समर्थन दोनों आपको प्राप्त रहेंगे | साथ ही नौकरी में हैं तो आपके अधिकारीगणों का सहयोग भी आपको प्राप्त रह सकता है | अचानक ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती हैं और आर्थिक स्थिति भी और अधिक दृढ़ हो सकती है | आपकी सन्तान तथा आपके पिता के लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपने अपने Temperament पर नियन्त्रण रखा तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | परिवारजनों तथा मित्रों का का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | आप सपरिवार कहीं भ्रमण के लिए जाने का कार्यक्रम भी इस अवाही में बना सकते हैं | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की आपकी तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | सम्पत्ति विषयक कोई विवाद आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है | छोटे भाई बहनों के साथ कोई विवाद गंभीर रूप ले सकता है | किन्तु अपने पिता की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझाने में समर्थ हो सकते हैं | कार्यस्थल में सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही यात्राओं में भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सूर्य की उपासना आपके लिए उचित रहेगी |

कर्क : आपकी राशि से द्वितीयेश का गोचर आपके पञ्चम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके उत्साह में वृद्धि की सम्भावना है | जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकते हैं | आप अथवा आपकी सन्तान अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Short Term Advance Course भी इस अवधि में कर सकते हैं | आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी सम्भव है | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको किसी पद की प्राप्ति हो सकती है | आपके भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उनका सहयोग भी आपको उपलब्ध रहेगा |

सिंह : आपके लिए आपके राश्यधिपति का अपनी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से तथा पारिवारिक स्तर पर यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके माता पिता तथा सहकर्मियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | आपका यदि स्वयं का व्यवसाय है अथवा मीडिया या आई टी से आपका कोई सम्बन्ध है अथवा किसी प्रकार की Alternative Healing से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं तो आपके लिए उन्नति का समय प्रतीत होता है | आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | किन्तु अपनी माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपके लिए आपके द्वादशेश का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर हो रहा है | आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | किसी पुराने मित्र से भी इस अवधि में भेंट हो सकती है और उसके माध्यम से भी आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्रा करनी पड़ सकती है | यह भी सम्भव है कि आप सपरिवार कहीं भ्रमण के लिए चले जाएँ | छोटे भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव का अनुभव कर सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपके एकादशेश का गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्य के सिलसिले में किसी मित्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हो सकती है | आय में वृद्धि के संकेत हैं | बड़े भाई तथा पिता का सहयोग आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो अधिकारियों का सहयोग भी आपको प्राप्त रह सकता है | साथ ही किसी सम्मान प्राप्ति की सम्भावना भी है | स्वस्थ रहने तथा सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए खान पान पर तथा वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको इस अवधि में प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली बनी हुई है, उसका प्रभाव दूसरों पर अवश्य पड़ेगा | किन्तु प्रेम सम्बन्धों के लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता है | प्रेम सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है अथवा प्रेम सम्बन्ध टूट भी सकता है | अपना व्यवहार सन्तुलित नहीं रखा तो जीवन साथी के साथ भी सम्बन्धों में दरार उत्पन्न हो सकती है |

धनु : आपकी राशि के लिए आपका भाग्येश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | इन यात्राओं के दौरान कुछ नवीन सम्पर्क भी स्थापित हो सकते हैं जिनके कारण आपको अपने कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है | आप अपना निवास बदल सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ स्थानान्तरण भी सम्भव है | धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए जा सकते हैं | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | किन्तु ड्राइविंग करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

मकर : आपकी राशि से अष्टमेश का गोचर आपके एकादश भाव में हो रहा है | एकादश भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में अकस्मात् किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होने की सम्भावना है | किसी मित्र अथवा बड़े भाई के साथ सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु यदि समझदारी से काम लिया तो कुछ नया कार्य आरम्भ करके उसे आगे भी बढ़ा सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके सप्तमेश का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | पार्टनरशिप में जिन लोगों का कार्य है उनके लिए यह गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | साथ ही पॉलिटिक्स से जो लोग सम्बन्ध रखते हैं उन लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उन्हें किसी पद की प्राप्ति भी हो सकती है | परिवार में किसी बच्चे के जन्म की भी सम्भावना इस अवधि में है | साथ ही परिवार में कुछ तनाव की भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है | माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | किसी पुराने रोग से भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है – अथवा ऐसा भी सम्भव है कि किसी रोग की पहचान होकर उसके उचित दिशा में इलाज़ का मार्ग प्रशस्त हो जाए | यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है | किन्तु ये यात्राएँ सम्भव है आपके लिए बहुत अधिक सुगम्य न हों |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/16/sun-transit-in-scorpio/

 

मंगल का कुम्भ में गोचर

सर्वप्रथम सभी को दीपमालिका के प्रकाश पर्व की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… सभी का जीवन सुख-समृद्धि-सौभाग्य-स्नेह तथा ज्ञान के आलोक से आलोकित रहे यही कामना है…

कल मंगलवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रातः आठ बजकर बाईस मिनट के लगभग धनिष्ठा नक्षत्र, विष्टि करण और प्रीति योग में भूमिसुत मंगल का गोचर शनि की कुम्भ राशि पर होगा | जहाँ 23 दिसम्बर तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपने मित्र गुरु की मीन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 17 नवम्बर को शतभिषज नक्षत्र तथा 8 दिसम्बर को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर मंगल का गोचर होगा | कुम्भ राशि से मंगल की दृष्टियाँ वृषभ, सिंह तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अर्थात कुम्भ, वृषभ, सिंह तथा कन्या राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के कुम्भ राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है, किन्तु पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी तथा छोटे भिया बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से सम्बद्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

 

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी कार्य में आप व्यवधान का भी अनुभव कर सकते हैं | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकती है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पद पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की आपकी खोज भी पूर्ण हो सकती है | सम्भव है आपके किसी सहकर्मी अथवा किसी रिश्तेदार की ओर से आपको विवाह का प्रस्ताव प्राप्त हो जाए |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | किन्तु यदि आप नौकरी में हैं तो अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कोर्ट केस से आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए तो आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्व का प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी कार्य का प्रस्ताव आपको प्राप्त हो सकता है जहाँ की आशा ही आप छोड़ चुके हैं | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी तथा छोटे भाई बहनों के साथ के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें | साथ ही धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की समभावना है – किन्तु धूर्त पोंगा पण्डितों के जाल में न फँसें इसके लिए सावधान रहने की आवश्यकता है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/05/mars-transit-in-aquarius/

 

बुध का वृश्चिक में गोचर

कल यानी 26 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण तृतीया, वणिज करण, व्यातिपत योग और विशाखा नक्षत्र में 20:44 के लगभग बुध का प्रवेश वृश्चिक राशि में हो जाएगा | जहाँ पहली जनवरी को 09:50 तक भ्रमण करने के पश्चात गुरु की धनु राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | यहाँ भ्रमण करते हुए 29 अक्टूबर को अनुराधा, 10 नवम्बर को ज्येष्ठा, 17 नबम्बर से वक्री होते हुए 22 नबम्बर को पुनः अनुराधा, 5 दिसम्बर को पुनः विशाखा, 7 दिसम्बर से पुनः मार्गी होते हुए 8 दिसम्बर को अनुराधा और अन्त में 22 दिसम्बर को ज्येष्ठा नक्षत्र पर चला जाएगा | इनमें ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी भी बुध स्वयं ही है | इस मध्य 22 नवम्बर से 3 दिसम्बर तक बुध अस्त भी रहेगा | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के वृश्चिक राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए एक और उत्साह में वृद्धि के योग हैं, आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्द्द्धि के योग प्रतीत होते हैं, वहीं पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना भी इस अवधि में करना पड़ सकता है – विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ | जिसका विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है | प्रयास करें बात कोर्ट तक न पहुँचने पाए | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी ऐसे स्रोत से धनलाभ की संभावना है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक और आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है तो वहीं दूसरी और पारिवारिक स्तर पर किसी प्रकार के विवाद से भी इनकार नहीं किया जा सकता | किन्तु एक योगकारक दूसरे योगकारक के साथ गोचर कर रहा है इसलिए आप अपने बुद्धिबल से किसी भी विवाद को सुलझाने में समर्थ भी हो सकते हैं | स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप कहीं विदेश अथवा कीड़ी दूर के शहर जाकर अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Advance Course इस अवधि में कर सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी प्रकार के माँगलिक कार्य की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आपकी सन्तान भी अपने कार्य अथवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश प्रस्थान कर सकती है | किन्तु यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपको अपने कार्य में बड़े भाई अथवा माता-पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्द्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपकी वाणी बहुत प्रभावशाली है और उसका प्रभाव दूसरों पर होता है, जिसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध का गोचर आपकी लग्न से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | आपके पिता अथवा बड़े भाई का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आपकी लेखन प्रतिभा में निखार इस अवधि में आने की सम्भावना है जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है | आपके लेखन के कारण आपको समाज में प्रतिष्ठा, मन सम्मान तथा किसी प्रकार के पुरूस्कार की भी उपलब्धि की सम्भावना भी है | साथ ही आप अपने छोटे भाई बहनों की भी किसी प्रकार की सहायता कर सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | साथ ही यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति के साथ ट्रांसफर के भी संकेत हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना प्रतीत होती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही विरोधियों की और से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | नौकरी में हैं तो बॉस से पंगा आपके हित में नहीं होगा अतः अपने स्वभाव को संयमित रखने की आवश्यकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि तथा अर्थ लाभ के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के अथवा आपके जीवन साथी के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | अविवाहित हैं तो आपके किसी सहकर्मी की ओर से प्रणय निवेदन भी आपको प्राप्त हो सकता है | किन्तु विवाह में अभी देर लग सकती है |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य स्थल में किसी प्रकार के विरोध का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | किसी कोर्ट केस के कारण भी किसी प्रकार का मानसिक तनाव आपको अनुभव हो सकता है | इस अवधि में शान्ति पूर्वक व्यवहार करना आपके हित में रहेगा | किसी भी विवाद को बढ़ने देना भी आपके हित में नहीं रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | वंश वृद्धि का विचार भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/25/mercury-transit-in-scorpio/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मीन राशि पर सम्भावित प्रभाव

सर्वप्रथम सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति, यश और धन आदि के कारक देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को सीधे रूप से प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

गुरु आपका राश्यधिपति भी है और आपके दशम भाव का अधिपति भी है और आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपकी लग्न को, तृतीय भाव को तथा पंचम भाव को प्रभावित कर रही हैं | आपके लियेः गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लिए उत्साह और आत्म विश्वास में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के साथ ही आपकी आय में भी वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही आप अपने भाई बहनों के लिए भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं | आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकता है और इसके लिए आपको दूसरों से सहयोग भी प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आपकी आरती स्थिति में दृढ़ता के कारण आप भविष्य के लिए भी योजनाएँ बनाने में सफल हो सकते हैं | मान सम्मान में वृद्धि तथा उपहार आदि की प्राप्ति के योग भी बन रहे हैं |

आप मित्रों के साथ भ्रमण का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | किन्तु अपने खर्चों पर रोक लगाने की आवश्यकता है | बजट बनाकर नहीं चलेंगे तो किसी प्रकार की समस्या भी हो सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो मनोनुकूल नौकरी भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी मध्र्ता और प्रगाढ़ता बनी रह सकती है | आप वंश वृद्धि के लिए भी इस अवधि में सफल प्रयास कर सकते हैं |

स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | योगाभ्यास और प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तथा खान पान पर ध्यान देंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/19/jupiter-transit-in-scorpio-for-pisces/