मंगल का कुम्भ में गोचर

सर्वप्रथम सभी को दीपमालिका के प्रकाश पर्व की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… सभी का जीवन सुख-समृद्धि-सौभाग्य-स्नेह तथा ज्ञान के आलोक से आलोकित रहे यही कामना है…

कल मंगलवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रातः आठ बजकर बाईस मिनट के लगभग धनिष्ठा नक्षत्र, विष्टि करण और प्रीति योग में भूमिसुत मंगल का गोचर शनि की कुम्भ राशि पर होगा | जहाँ 23 दिसम्बर तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपने मित्र गुरु की मीन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 17 नवम्बर को शतभिषज नक्षत्र तथा 8 दिसम्बर को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर मंगल का गोचर होगा | कुम्भ राशि से मंगल की दृष्टियाँ वृषभ, सिंह तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अर्थात कुम्भ, वृषभ, सिंह तथा कन्या राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के कुम्भ राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है, किन्तु पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी तथा छोटे भिया बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से सम्बद्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

 

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी कार्य में आप व्यवधान का भी अनुभव कर सकते हैं | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकती है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पद पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की आपकी खोज भी पूर्ण हो सकती है | सम्भव है आपके किसी सहकर्मी अथवा किसी रिश्तेदार की ओर से आपको विवाह का प्रस्ताव प्राप्त हो जाए |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | किन्तु यदि आप नौकरी में हैं तो अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कोर्ट केस से आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए तो आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्व का प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी कार्य का प्रस्ताव आपको प्राप्त हो सकता है जहाँ की आशा ही आप छोड़ चुके हैं | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी तथा छोटे भाई बहनों के साथ के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें | साथ ही धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की समभावना है – किन्तु धूर्त पोंगा पण्डितों के जाल में न फँसें इसके लिए सावधान रहने की आवश्यकता है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/05/mars-transit-in-aquarius/

 

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बुध का वृश्चिक में गोचर

कल यानी 26 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण तृतीया, वणिज करण, व्यातिपत योग और विशाखा नक्षत्र में 20:44 के लगभग बुध का प्रवेश वृश्चिक राशि में हो जाएगा | जहाँ पहली जनवरी को 09:50 तक भ्रमण करने के पश्चात गुरु की धनु राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | यहाँ भ्रमण करते हुए 29 अक्टूबर को अनुराधा, 10 नवम्बर को ज्येष्ठा, 17 नबम्बर से वक्री होते हुए 22 नबम्बर को पुनः अनुराधा, 5 दिसम्बर को पुनः विशाखा, 7 दिसम्बर से पुनः मार्गी होते हुए 8 दिसम्बर को अनुराधा और अन्त में 22 दिसम्बर को ज्येष्ठा नक्षत्र पर चला जाएगा | इनमें ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी भी बुध स्वयं ही है | इस मध्य 22 नवम्बर से 3 दिसम्बर तक बुध अस्त भी रहेगा | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के वृश्चिक राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए एक और उत्साह में वृद्धि के योग हैं, आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्द्द्धि के योग प्रतीत होते हैं, वहीं पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना भी इस अवधि में करना पड़ सकता है – विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ | जिसका विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है | प्रयास करें बात कोर्ट तक न पहुँचने पाए | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी ऐसे स्रोत से धनलाभ की संभावना है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक और आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है तो वहीं दूसरी और पारिवारिक स्तर पर किसी प्रकार के विवाद से भी इनकार नहीं किया जा सकता | किन्तु एक योगकारक दूसरे योगकारक के साथ गोचर कर रहा है इसलिए आप अपने बुद्धिबल से किसी भी विवाद को सुलझाने में समर्थ भी हो सकते हैं | स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप कहीं विदेश अथवा कीड़ी दूर के शहर जाकर अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Advance Course इस अवधि में कर सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी प्रकार के माँगलिक कार्य की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आपकी सन्तान भी अपने कार्य अथवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश प्रस्थान कर सकती है | किन्तु यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपको अपने कार्य में बड़े भाई अथवा माता-पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्द्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपकी वाणी बहुत प्रभावशाली है और उसका प्रभाव दूसरों पर होता है, जिसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध का गोचर आपकी लग्न से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | आपके पिता अथवा बड़े भाई का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आपकी लेखन प्रतिभा में निखार इस अवधि में आने की सम्भावना है जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है | आपके लेखन के कारण आपको समाज में प्रतिष्ठा, मन सम्मान तथा किसी प्रकार के पुरूस्कार की भी उपलब्धि की सम्भावना भी है | साथ ही आप अपने छोटे भाई बहनों की भी किसी प्रकार की सहायता कर सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | साथ ही यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए यह गोचर विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति के साथ ट्रांसफर के भी संकेत हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना प्रतीत होती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही विरोधियों की और से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | नौकरी में हैं तो बॉस से पंगा आपके हित में नहीं होगा अतः अपने स्वभाव को संयमित रखने की आवश्यकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राओं में वृद्धि तथा अर्थ लाभ के भी संकेत हैं | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के अथवा आपके जीवन साथी के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | अविवाहित हैं तो आपके किसी सहकर्मी की ओर से प्रणय निवेदन भी आपको प्राप्त हो सकता है | किन्तु विवाह में अभी देर लग सकती है |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | कार्य स्थल में किसी प्रकार के विरोध का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | किसी कोर्ट केस के कारण भी किसी प्रकार का मानसिक तनाव आपको अनुभव हो सकता है | इस अवधि में शान्ति पूर्वक व्यवहार करना आपके हित में रहेगा | किसी भी विवाद को बढ़ने देना भी आपके हित में नहीं रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | किन्तु परिवार के लोगों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | वंश वृद्धि का विचार भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/25/mercury-transit-in-scorpio/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मीन राशि पर सम्भावित प्रभाव

सर्वप्रथम सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति, यश और धन आदि के कारक देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को सीधे रूप से प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

गुरु आपका राश्यधिपति भी है और आपके दशम भाव का अधिपति भी है और आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपकी लग्न को, तृतीय भाव को तथा पंचम भाव को प्रभावित कर रही हैं | आपके लियेः गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लिए उत्साह और आत्म विश्वास में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के साथ ही आपकी आय में भी वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही आप अपने भाई बहनों के लिए भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं | आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकता है और इसके लिए आपको दूसरों से सहयोग भी प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आपकी आरती स्थिति में दृढ़ता के कारण आप भविष्य के लिए भी योजनाएँ बनाने में सफल हो सकते हैं | मान सम्मान में वृद्धि तथा उपहार आदि की प्राप्ति के योग भी बन रहे हैं |

आप मित्रों के साथ भ्रमण का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | किन्तु अपने खर्चों पर रोक लगाने की आवश्यकता है | बजट बनाकर नहीं चलेंगे तो किसी प्रकार की समस्या भी हो सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो मनोनुकूल नौकरी भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी मध्र्ता और प्रगाढ़ता बनी रह सकती है | आप वंश वृद्धि के लिए भी इस अवधि में सफल प्रयास कर सकते हैं |

स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | योगाभ्यास और प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तथा खान पान पर ध्यान देंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/19/jupiter-transit-in-scorpio-for-pisces/

 

 

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का कुम्भ राशि पर सम्भावित प्रभाव

आज सभी ने अन्तिम नवरात्र – रामनवमी – के अवसर पर माँ दुर्गा के नौ दिवसीय आराधन का समापन किया – सर्वप्रथम सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस वर्ष 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | हम विभिन राशियों के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात कररहे हैं | अब तक मेष राशि से मकर राशि तक के जातकों के विषय में बात कर चुके हैं | आज कुम्भ राशि के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों को संक्षेप में जानने का प्रयास करते हैं |

आपकी राशि से द्वितीयेश और एकादशेश होकर गुरु का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके द्वितीय भाव, चतुर्थ भाव और छठे भाव पर आ रही हैं | निश्चित रूप से आपके लिए कार्य की दृष्टि से और आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परुशराम करना होगा आपको, किन्तु उसके अनुकूल परिणाम भी आपको प्राप्त होंगे | आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में इस अवधि में वृद्धि होने की सम्भावना है जिसके कारण आप कार्य से सम्बन्धित कोई भी चेलेंज स्वीकार कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो आय में वृद्धि के साथ पदोन्नति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी निरन्तर उन्नति की सम्भावना प्रतीत होती है | कोई इण्डस्ट्री है आपकी तो आप अपनी कोई नई ब्रांच भी खोल सकते हैं | साथ ही अपने व्यवसाय का विस्तार करके नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने मन के अनुकूल ही कोई अच्छी नौकरी भी मिल सकती है | ऑफिस में अधिकारी वर्ग की प्रशंसा तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा तथा आपकी योजनाओं पर विचार भी किया जाएगा |

परिवार में आनन्द का वातावरण रहने की सम्भावना है | कोई माँगलिक कार्य भी इस अवधि में हो सकता है | परिवार के सदस्यों तथा मित्रों के साथ मौज मस्ती में समय व्यतीत होगा | आप अपने लिए नया ऑफिस अथवा घर भी खरीद सकते हैं | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी में Invest करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गितिविधियों की ओर आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके माध्यम से भी आपको लाभ हो सकता है | आपकी यदि किसी प्रेम सम्बन्ध में हैं तो उसमें प्रगाढ़ता इस अवधि में बढ़ सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | आप इस अवधि में वंश वृद्धि के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | यदि आप योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास निरन्तर करते रहे तो आपका स्वास्थ्य भी इस अवधि में उत्तम रह सकता है |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/18/jupiter-transit-in-scorpio-for-aquarius/

 

 

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मकर राशि पर सम्भावित प्रभाव

आप सभी जानते हैं कि 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपकी राशि के लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है जहाँ से उनकी दृष्टियाँ आपके तीसरे भाव, पंचम भाव और सप्तम भाव पर आ रही हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी मनचाहे स्थान पर ट्रांसफर होने की भी सम्भावना है | यह स्थानान्तरण आपके लिए भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपको अपने भाई बहनों का तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग भी प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने परिश्रम का लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है और कोई मनोनुकूल नौकरी आपको प्राप्त हो सकती है | विदेश से यदि आपका कार्य सम्बद्ध है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आय के नवीन स्रोत आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक सुदृढ़ हो सकती है | किन्तु साथ ही खर्चों में भी वृद्धि की सम्भावना है | आप मित्रों के साथ सैर सपाटे और मनोरंजन में अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं |

आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है और उसकी ओर से कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | साथ ही यदि सन्तान प्राप्ति का प्रयास कर रहे हैं तो उसमें भी सफलता इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि उच्च शिक्षा के लिए कहीं एडमीशन के प्रयास में हैं उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

अविवाहित हैं और कहीं प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो इस अवधि में वह सम्बन्ध भी विवाह बन्धन में परिणत हो सकता है | प्रेम सम्बन्धों और विवाह आदि के लिए गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य तथा अन्तरंगता बनी रहने की भी सम्भावना है |

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए नियमित डॉक्टर से चेकअप तथा सन्तुलित आहार और व्यायाम आदि की आवश्यकता भी होती है इतना अवश्य स्मरण रखिये |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/17/jupiter-transit-in-scorpio-for-capricorn/

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का वृश्चिक राशि पर सम्भावित प्रभाव

सभी जानते हैं कि 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है |

उपरोक्त समस्त तथ्यों के आधार पर अब तक हम मेष राशि से तुला राशि के जातकों पर इस गोचर के सम्भावित प्रभावों की बात कर चुके हैं | अब जानने का प्रयास करते हैं कि स्वयं वृश्चिक राशि के जातकों पर इस गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपके लिए द्वितीयेश और पंचमेश होकर गुरु का गोचर आपकी राशि पर ही हो रहा है, जहाँ से उसकी दृष्टियाँ आपके पंचम, सप्तम और नवम भावों पर आ रही हैं | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके कार्य में उन्नति के संकेत हैं | आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता के संकेत हैं | यदि पूर्व में आपको कुछ समस्याओं का सामना करना भी पडा है तो कोई बात नहीं, अब परिस्थितियाँ आपके अनुकूल होती प्रतीत होती हैं | आपकी आय में वृद्धि के संकेत हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपको अपने उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त रहेगा जिनके कारण आपके सभी कार्य सरलतापूर्वक पूर्ण होते रहने की सम्भावना प्रतीत होती है | साथ ही पदोन्नति के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं | परिवार में तथा कार्यक्षेत्र में वातावरण अनुकूल रहने की सम्भावना है | आपकी वक्तव्यता इस अवधि में बहुत उत्तम रहेगी जिसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | साथ ही लेखन के द्वारा भी आपको यश और धन प्राप्त होने की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय जिन लोगों का है अथवा जो लोग ज्योतिष आदि विद्याओं के जानकार हैं अथवा जिनका व्यवसाय किसी प्रकार से वाहन आदि से सम्बन्ध रखता है तो उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी रूचि इस समय धर्म और आध्यात्म की ओर भी प्रवृत्त हो सकती है |

परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हो सकता है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | साथ ही आपकी सन्तान का भी विवाह इस गोचर के मध्य सम्भव है | आप स्वयं भी यदि अविवाहित हैं तो आपका विवाह भी इस अवधि में हो सकता है | यदि किसी के साथ Romantically Involve हैं तो वह सम्बन्ध भी विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है, तो लीवर अथवा पेट से सम्बन्धित कोई समस्या इस अवधि में हो सकती है | अनियन्त्रित खान पान के कारण मोटापा भी बढ़ने की सम्भावना है | अपने खान पर ध्यान रखेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer से उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/15/jupiter-transit-in-scorpio-for-scorpio/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का कर्क राशि पर सम्भावित प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति आज ही रात्रि 8:39 के लगभग अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान करेंगे | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक के साथ साथ मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को भी प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि कर्क राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं…

कर्क राशि से षष्ठेश और भाग्येश होकर पंचम भाव में गुरु का गोचर हो रहा है जहाँ से आपके भाग्य स्थान, लाभ स्थान तथा स्वयं आपकी लग्न पर गुरु की दृष्टियाँ आ रही हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अच्छे और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ आपके सम्पर्क बन सकते हैं | यदि आपने समझदारी से काम लिया तो इन सम्बन्धों के माध्यम से आपको अपने कार्य में सहायता प्राप्त हो सकती है | आपकी प्रतियोगी क्षमता में भी वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण यदि आप नई नौकरी के लिए प्रयत्नशील हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

सम्भव है बीच बीच में कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ जाए, विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य जब गुरु शनि के नक्षत्र अनुराधा पर होंगे | किन्तु अपनी निर्णायक क्षमता के बल पर आप उन समस्याओं का समाधान सरलता से कर सकेंगे | सम्भव है आपिस अवधि में कहीं पैसा Invest भी कर दें, जिसका आपको भविष्य में लाभ हो सकता है | आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के भी अवसर प्रतीत होते हैं |

मित्रों का सहयोग और साथ भी इस अवधि में आपको उपलब्ध रह सकता है और आप उनके साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत कर सकते हैं | आपकी रूचि इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए तथा विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान प्राप्ति के भी योग इस अवधि में हैं |

जीवन साथी के साथ सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण बने रह सकते हैं और आप सन्तान के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपना Temprament सही नहीं रखा तो किसी बात पर विवाद भी हो सकता है | जीवन साथी के साथ किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए अथवा घूमने के लिए भी जा सकते हैं |

स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | पेट से सम्बन्धित कोई समस्या आपको परेशान कर सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | अपने खान पान पर यदि संयम रखेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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