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बुध का कर्क में गोचर

बुध का कर्क में गोचर

कल यानी शुक्रवार, 21 जून, आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी को बव करण और वैधृति योग में 26:27 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर सत्ताईस मिनट) के लगभग बुध अपनी स्वयं की राशि मिथुन को छोड़कर चन्द्रमा की कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | इस प्रस्थान के समय बुध पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा तथा गुरु की दृष्टि भी उस पर रहेगी | यहाँ रहते हुए 24 जून को पुष्य नक्षत्र पर जाएगा और 23 जुलाई को वक्री बुध पुनः पुनर्वसु नक्षत्र पर होगा | नौ अगस्त को मार्गी बुध पुनः पुष्य नक्षत्र पर जाएगा | उन्नीस अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 26 अगस्त को दोपहर दो बजकर आठ मिनट के लगभग सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच आठ जुलाई से एक अगस्त तक बुध वक्री रहेगा और चौदह जुलाई से 29 जुलाई तक अस्त भी रहेगा | कर्क राशि बुध की अपनी राशि मिथुन से दूसरा भाव तथा कन्या से ग्यारहवाँ भाव है तथा कर्क राशि के लिए बुध द्वादशेश और तृतीयेश हो जाता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं बुध के कर्क राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर आपकी प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि की सम्भावना है जिसके कारण आप नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं, तो दूसरी ओर पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | किन्तु आप अपने बुद्धिबल से सभी समस्याओं का समाधान कर पाने में सक्षम हो सकते हैं | यदि आप किसी नौकरी में है या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे हैं तो आपके लिए ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | आपके भाई बहनों तथा आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप नौकरी में हैं, लेखक हैं अथवा मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं अथवा दस्तकार हैं तो आपके लिए भाग्यवर्द्धक गोचर प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | आपकी वाणी तथा लेखन प्रतिभा में निखार के साथ ही आपके कार्यों की सराहना भी होगी | परिवार का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में तथा लेखकों और वक्ताओं को धनलाभ की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि में ही गोचर कर रहा है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | अकारण ही स्वभाव में चिडचिडापन भी आ सकता है | उससे बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें | भाई बहनों का सहयोग आपको प्राप्त होता रह सकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपका कार्य यदि कहीं विदेशों से या किसी दूसरे शहर से सम्बन्धित है अथवा मीडिया या किसी प्रकार की हीलिंग विधा से सम्बन्धित है तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | किन्तु ध्यान रहे, धन लाभ के साथ साथ धन के अपव्यय की भी सम्भावनाएँ हैं | बजट बनाकर चलना आपके हित में रहेगा | जिस किसी भी कारण से आपको मानसिक तनाव हो सकता है उस स्थिति से बचने का प्रयास करें |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | बुद्धिजीवियों, मीडियाकर्मियों, डॉक्टर वैद्य, कॉमर्स अथवा मैनेजमेंट के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए ये गोचर बहुत अनुकूल प्रतीत होता है | सहकर्मियों तथा परिवार के लोगों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कोई नया प्रोजेक्ट आपको प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगलकार्य – जैसे किसी बच्चे का जन्म अथवा सन्तान का विवाह आदि की भी सम्भावना है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त शुभफलदायी प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग हैं | इन यात्राओं से आपके व्यवसाय में भी लाभ हो सकता है | आप तीर्थाटन के लिए भी जा सकते हैं | नौकरी में हैं तो वर्तमान नौकरी छोड़कर किसी दूसरी जगह भी नौकरी कर सकते हैं | आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से भायावर्द्धक समय प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान अथवा कार्य से लाभ हो सकता है जिसके विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा अथवा जिसकी आशा आप त्याग चुके होंगे | वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | थोड़ा संघर्ष तो करना पड़ेगा, किन्तु अन्त में आपके कार्य में उन्नति के भी संकेत हैं | धार्मिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के भी संकेत हैं |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से अष्टम  भाव में गोचर कर रहा है | आपके कार्य में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | जीवन साथी के साथ किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता है | प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो इससे बच सकते हैं |  किसी कोर्ट केस के अनुकूल दिशा में आगे बढ़ने की सम्भावना है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | इन्टरव्यू आदि के तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त हो सकती है | किन्तु परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | शत्रुओं की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | परिवारजनों के साथ किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | विवाद कोर्ट तक न पहुँचने पाए इसके लिए अच्छा यही रहेगा कि पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से उस विवाद को आपस में ही सुलझा लें |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर छठे भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोहों के लिए ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | एक ओर जहाँ परिवार के लोगों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है वहीं दूसरी ओर सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | जीवन साथी के साथ भी सम्बन्ध मधुर बने रह सकते हैं | विद्यार्थियों तथा इन्टरव्यू की तैयारी कर रहे लोगों के लिए गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों को अपने कार्य के लिए कोई पुरूस्कार अथवा सम्मान भी प्राप्त हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/20/mercury-transit-in-cancer-2/

 

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बुध का मिथुन में गोचर

बुध का मिथुन में गोचर

कल शनिवार रविवार यानी ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी अर्थात 1 जून को 24:17 (मध्यरात्रि में 12:17) के लगभग विष्टि करण और अतिगण्ड योग में बुध अपने मित्र शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि मिथुन में प्रविष्ट होगा | मिथुन राशि में प्रवेश के समय बुध मृगशिरा नक्षत्र में होगा तथा कुछ समय के लिए अस्त भी होगा, किन्तु दो जून को रात्रि नौ बजकर एक मिनट के लगभग बुधोदय हो जाएगा | यहाँ भ्रमण करते हुए पाँच जून को आर्द्रा नक्षत्र और तेरह जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में इक्कीस जून को 26:27 (अर्धरात्र्योत्तर 2:27) के लगभग बुध कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | जैसा कि ऊपर लिखा, मिथुन बुध की स्वराशि है तथा बुध की उच्च राशि और मूल त्रिकोण राशि कन्या से मिथुन राशि दशम भाव यानी कर्म स्थान बनता है | ध्यान देने योग्य बात यह है कि मंगल और राहु यहाँ पहले से गोचर कर रहे हैं | बुध की अपनी राशि मिथुन से मंगल षष्ठेश और एकादशेश है तथा बुध की उच्च राशि कन्या से मंगल तृतीयेश और अष्टमेश है | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष – आपके लिए तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध का गोचर आपके तृतीय भाव में अपनी ही राशि में हो रहा है | आपके लिए पहले से कहीं अधिक Competitive हो सकते हैं तथा आपकी निर्णायक क्षमता और उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही ऐसे मित्रों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की भी आवश्यकता है जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | सम्भावना कुछ ऐसी भी प्रतीत होती है कि आवश्यकता होने पर भाई बहनों का सहयोग प्राप्त हो सकता है | यद्यपि कुछ विवाद भी सम्भव है, किन्तु अन्त में परिणाम आपके पक्ष में ही होगा | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ – आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपके दूसरे भाव में ही हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से अनुकूलता होने के साथ ही आपकी वक्तव्यता तथा आपके लेखन में निखार इस अवधि में आ सकता है जिसके कारण आपसे लोग प्रभावित भी होंगे | आपके व्यवहार में उदारता, कोमलता एवं सौम्यता दिखाई देगी जिसका प्रभाव आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर निश्चित ही पड़ेगा | आपकी सन्तान के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन – आपके लिए बुध योगकारक होकर अपनी ही राशि में लग्न में गोचर कर रहा है | परिवार में मंगलकार्यों का आयोजन हो सकता है | परिवार में परस्पर सौहार्द का वातावरण रहेगा और समय आमोद प्रमोद में व्यतीत होगा | सामाजिक गतिविधियों में भी वृद्धि की भी सम्भावना है | परिवारजनों का सहयोग आपको अपने कार्य में उपलब्ध होता रहेगा | साथ ही आप अपने लिए कोई नई प्रॉपर्टी भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क – कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध का गोचर आपके बारहवें भाव में ही हो रहा है | भाई बहनों का सहयोग भी अपने कार्य में आपको प्राप्त रहने की सम्भावना है | कार्य के सिलसिले में आपको तथा आपके भाई बहनों को दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने तथा अपने भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा | साथ ही आप अपने कार्य में पैसा भी Invest कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको भविष्य में अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह – आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके एकादश में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | बड़े भाई तथा पिता का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आप परिवार के साथ कहीं यात्रा आदि के लिए भी जा सकते हैं |

कन्या – आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग हैं | समाज में आपका मान-सम्मान तथा प्रभाव में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त होते रह सकते हैं और आप लम्बे समय तक उनमें व्यस्त रह सकते हैं तथा उनके माध्यम से धनलाभ कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपने कण और आँख खुले नहीं रखे तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा भाई ही आपके कार्य में विघ्न का कारण बन सकता है |

तुला – आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | लम्बी विदेश यात्राओं के संकेत प्रतीत होते हैं | साथ ही यदि आपका कार्य किसी रूप में विदेशों से सम्बन्धित है तो उसमें उन्नति की भी सम्भावनाएँ हैं | इसके अतिरिक्त धर्म तथा आध्यात्मिकता की ओर आपकी रूचि बढ़ सकती है | आप किसी धार्मिक संस्था अथवा अस्पताल आदि के लिए धन दान भी करने की योजना बना सकते हैं | किन्तु पोंगा पण्डितों को पहचान कर उनसे बचने की आवश्यकता है अन्यथा बहुत सा धन अनावश्यक ही खर्च हो सकता है |

वृश्चिक – आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कहीं से आकस्मिक लाभ की सम्भावना है | व्यावसायिक रूप से भी अप्रत्याशित सफलता की सम्भावना है | किसी सीनियर के रिटायर होने के कारण आपको उस स्थान पर पदोन्नत भी किया जा सकता है | किन्तु बॉस के साथ पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वभाव में नकारात्मकता आपके व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु – आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आप तथा आपके जीवन साथी के लिए व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों और मीडियाकर्मियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार भी आपको प्राप्त हो सकता है |

मकर – बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल परिणाम की सम्भावना की जा सकती है | साथ ही बहुत समय से चली आ रही जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द के इलाज़ का भी पता इस अवधि में लग सकता है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए समय अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है किन्तु उन्हें परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा, किन्तु पारिवारिक क्लेश के कारण मानसिक तनाव सम्भव है |

कुम्भ –  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | किसी प्रकार की अप्रत्याशित घटना की सम्भावना की जा सकती है | कार्यस्थल पर वातावरण अनुकूल बना रह सकता है | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु इसके साथ ही सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का भी प्रयास आवश्यक है |

मीन – आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप कोई नया घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | आपको अपने परिवारजनों का तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता रहेगा तथा परिवार में सौहार्द का वातावरण रहने की सम्भावना है, किन्तु आपको अपनी वाणी और Temperament को संयम में रखने की आवश्यकता है | परिवार में माँगलिक कार्यों की भी सम्भावना प्रतीत होती है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/31/mercury-transit-in-gemini-2019/

 

बुध का वृषभ में गोचर

बुध का वृषभ में गोचर

शनिवार 18 मई यानी वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को रात्रि 11:35 के लगभग बव करण और परिघ योग में बुध मेष राशि से वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | कल ही भगवान बुद्ध का जन्म दिवस बुद्ध पूर्णिमा भी है | साथ ही कल यानी बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ 1वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को ही महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी तिथि को बुद्ध का महानिर्वाण भी हुआ | इस कारण बौद्धधर्म के अनुनायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है | इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर देवगुरु बृहस्पति और आत्मा के कारक सूर्य का परस्पर सम-सप्तक योग भी बन रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यन्त शुभ माना जाता है | तो सर्वप्रथम सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ, इस आशा और विश्वास के साथ कि हम सभी बुद्ध के आदर्शों को अपने जीवन दर्शन में आत्मसात करने का प्रयास करें…

बुध इस समय कृत्तिका नक्षत्र पर है तथा अस्त है | यहाँ से 23 मई को बुध रोहिणी नक्षत्र और 29 मई को मृगशिरा नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ पहली जून को 24:17 (एक और दो जून की मध्यरात्रि में बारह बजकर सत्रह मिनट) के लगभग मिथुन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस पूरी अवधि में बुध अस्त ही रहेगा | दो जून को मिथुन में पहुँचने के बाद रात्रि नौ बजे के लगभग बुधोदय होगा | अपनी स्वयं की एक राशि मिथुन से वृषभ राशि बारहवाँ भाव है तथा बुध की अपनी दूसरी राशि – जो कि बुध की उच्च तथा मूल त्रिकोण राशि भी है – से वृषभ राशि नवम भाव है | अतः सामान्य रूप से कह सकते हैं कि कन्या राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मकर राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके लिए तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है | आपकी सम्वाद शैली इस अवधि में प्रभावशाली रहेगी, किन्तु थोड़ा Diplomatic होने की आवश्यकता है | सत्य बोलें, किन्तु कड़वा न बोलें | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | जो कार्य रुका हुआ था वह पुनः आगे बढ़ सकता है और उसके कारण आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता आएगी | भाई बहनों के साथ कुछ विवाद सम्भव है, किन्तु अपने बुद्धिबल से आप उस विवाद का स्वयं ही समाधान भी करने में सक्षम हो सकते हैं | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | आपके व्यवहार में उदारता, कोमलता एवं सौम्यता दिखाई देगी जिसका प्रभाव आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर निश्चित ही पड़ेगा | आपकी सम्वाद तथा लेखन शैली इस अवधि में प्रभावशाली रहेगी तथा इसके कारण आपको अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवद्धि में जीवन साथी की खोज भी पूरी हो सकती है, किन्तु विवाह में अभी समय लग सकता है | सन्तान के लिए समय अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपके लिए बुध लग्नेश और चतुर्थेश होकर योगकारक है तथा आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके अपने लिए और परिवार के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं वहीं दूसरी ओर इस अवधि में आप विदेश यात्रा के लिए भी जा सकते हैं अथवा अपना निवास बदलने की योजना बना सकते हैं | किसी कारणवश मानसिक तनाव हो सकता है | योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो इस समस्या से बच सकते हैं |

कर्क : कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका व्यवसाय किसी रूप में विदेश से सम्बद्ध है तब तो आपके लिए विशेष रूप से लाभ की सम्भावना है | भाई बहनों का सहयोग भी अपने कार्य में आपको प्राप्त रहने की सम्भावना है | मित्रों के साथ आमोद प्रमोद में भी समय व्यतीत हो सकता है | कार्य के सिलसिले में आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा |

सिंह : आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | अपनी आकाँक्षाओं की पूर्ति में आपको अपने पिता का सहयोग भी प्राप्त होता रहेगा |

कन्या : आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग हैं | समाज में आपका मान-सम्मान तथा प्रभाव में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो आप वर्तमान नौकरी छोडकर कोई अन्य नौकरी भी कर सकते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो कार्य के सिलसिले में लम्बी विदेश यात्राओं के भी योग बन रहे हैं जहाँ आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं |

तुला : आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश है तथा आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | अचानक ही धन हानि की सम्भावना है | या हो सकता है कि आप कोई रहस्य जानने के प्रयास में अपने व्यक्तिगत अथवा व्यावसायिक जीवन को स्वयं ही कोई हानि पहुँचा लें | अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | रहस्य को रहस्य ही रहने दें | विदेश यात्राओं के योग हैं किन्तु ये यात्राएँ सम्भव है आशा के अनुकूल न सिद्ध हों, अतः इन्हें कुछ समय के लिए स्थगित करना ही हित में रहेगा | स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | यदि पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो लाभ की सम्भावना है | किन्तु आपके स्वभाव में नकारात्मकता आपके व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है | साथ ही किसी ग़लतफ़हमी के कारण जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है | अच्छा यही रहेगा कि कार्य से अवकाश लेकर कुछ समय के लिए कहीं भ्रमण के लिए चले जाएँ | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु : आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही जीवन साथी के साथ किसी प्रकार का तनाव भी इस अवधि में सम्भव है | कार्य क्षेत्र में आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा जिसके फलस्वरूप नौकरी में पदोन्नति अथवा अपना व्यवसाय है तो उसमें भी प्रगति की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है |

मकर : बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपकी राशि से पञ्चम भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा आत्मविश्वास में वृद्धि के संकेत हैं | आप जो भी निर्णय इस अवधि में लेंगे सोच विचार कर ही लेंगे जिसके कारण आपके कार्य भी समय पर पूर्ण होने की सम्भावना है | आप उच्च शिक्षा के लिए अथवा कोई नया कोर्स करने के लिए किसी अन्य स्थान पर जा सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | प्रेम सम्बन्धों में भी सुधार की सम्भावना है | धार्मिक कार्यों में भी आपकी रूचि बढ़ सकती है |

कुम्भ :  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान से लाभ हो सकता है अथवा नौकरी का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आप आशा छोड़ चुके होंगे | किन्तु परिवार में किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | साथ ही आपको अपनी माता जी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | स्वयं भी ड्राइविंग में सावधान रहने की आवश्यकता है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जो लोग कर रहे हैं उन्हें कठिन परिश्रम की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप स्वयं भी कोई नया घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | आपको अपने परिवारजनों का तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना के साथ एक बार पुनः सबको बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/17/mercury-transit-in-taurus/

 

बुध का मेष राशि में गोचर

बुध का मेष राशि में संक्रमण 2019

शुक्रवार तीन मई वैशाख कृष्ण चतुर्दशी को सायं पाँच बजकर तीन मिनट के लगभग शकुनि करण और प्रीति योग में बुध मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | मेष राशि पर भ्रमण करते हुए बुध 11 मई को भरणी नक्षत्र तथा 17 मई को कृत्तिका नक्षत्र पर भ्रमण करेगा, और अन्त में कृत्तिका नक्षत्र पर ही भ्रमण करते हुए 18 मई को रात्रि ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट के लगभग अपने मित्र गृह शुक्र की वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच नौ मई से बुध अस्त भी रहेगा | बुध की अपनी राशि मिथुन से मेष राशि एकादश भाव तथा कन्या से अष्टम भाव बन जाती है | जबकि मेष राशि के लिए बुध तृतीयेश और षष्ठेश है | मेष राशि पर भ्रमण करते हुए बुध की दृष्टि अपने मित्र ग्रह शुक्र की तुला राशि पर रहेगी और तुला राशि के लिए बुध नवमेश तथा द्वादशेश है | अस्तु, इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए सभी राशियों पर बुध के मेष राशि में होने वाले गोचर के सम्भावित प्रभावों के विषय में बात करते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपके लिए बुध तीसरे और छठे भावों का स्वामी होकर लग्न में गोचर कर रहा है | आपके लिए इसका मिश्रित फल हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के साथ आपके सम्बन्धों में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो सकता है | किन्तु आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | हाथ के कारीगरों को, कलाकारों को, डॉक्टर वैद्यों को, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को, स्पोर्ट्स से सम्बद्ध लोगों को लाभ होने की सम्भावना है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य की और से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों और माँसपेशियों में अकडन या दर्द का अनुभव इस अवधि में हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति होकर आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो भी आपको बाहर से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा सकती है | आप भी उच्च शिक्षा के लिए अथवा संगोष्ठियों आदि में भाग लेने के लिए विदेश अथवा किसी अन्य शहरों की यात्राएँ कर सकते हैं | किन्तु जिस तरह आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना है उसी प्रकार आपके खर्च भी बढ़ सकते हैं, अतः बजट बनाकर चलेंगे तो इस स्थिति से बच सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए बुध लग्नेश और चतुर्थेश होकर योगकारक है | आपकी लग्न से यह लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से यह भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | पहले से रुके हुए कार्य बन सकते हैं | व्यापार में उन्नति तथा नौकरी में हैं पदोन्नति के साथ साथ किसी प्रकार के पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | बड़े भाई, मित्रों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग इस अवधि में आपको प्राप्त होता रहेगा | परिवार में आनन्द का वातावरण रहने की सम्भावना है | आप नया घर भी खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान आवास को ही Renovate करा सकते हैं |

कर्क : कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध आपकी लग्न से कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | आरम्भ में कार्य में व्यवधान भी उपस्थित हो सकते हैं, किन्तु अन्त में अपनी बुद्धि के बल पर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकने में समर्थ हो सकते हैं | कार्य के सिलसिले में आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा | कफ से सम्बन्धित अथवा जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | आपके भाई बहनों के लिए भाग्योदय का समय प्रतीत होता है |

सिंह : आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | आपकी वाणी तथा लेखन का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा और आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | आपके पिता तथा मित्रों का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त होता रहेगा |

कन्या : आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ आपके कार्य में बाधक बन सकती हैं अतः अपने खान पर नियन्त्रण रखने तथा नियमित व्यायाम करने की आवश्यकता है | सहकर्मियों का तथा मित्रों का साथ आपको उपलब्ध रहेगा जिसके कारण आपका उत्साहवर्धन होगा | अचानक ही आपको कोई नया कार्य भी प्राप्त हो सकता है जो आपको लम्बे समय तक व्यस्त रख सकता है तथा कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि हो सकती है |

तुला : आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश है तथा आपके राश्यधिपति शुक्र का मित्र ग्रह होकर आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपका जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका किसी दूसरे शहर अथवा विदेश में निवास करते हैं तो इस अवधि में उनकी घर वापसी भी सम्भव है | साथ ही अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी रूचि धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है | सामाजिक मान प्रतिष्ठा में वृद्धि की भी सम्भावना है |

वृश्चिक : आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके छठे भाव में गोचर करने जा रहा है | एक ओर जहाँ आपके स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता, वहीं दूसरी ओर यदि किसी प्रकार का कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना तथा उसके द्वारा आपको लाभ की भी सम्भावना प्रतीत होती है | आर्थिक दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द और पित्त तथा ज्वर आदि की समस्याओं से बचने के लिए उचित व्यायाम तथा खान पान पर ध्यान देने की आवश्यकता है |

धनु : धनु राशि के लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा इस समय आपकी लग्न से पंचम भाव में गोचर करने वाला है | एक ओर आपकी निर्णायक क्षमता में वृद्धि की सम्भावना है, जिसके कारण आपके व्यवसाय में प्रगति होगी | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना है | नए प्रोजेक्ट्स मिलने के कारण आप बहुत अधिक व्यस्त हो सकते हैं | वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं |

मकर : बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आरम्भ में कुछ समय तक परिवार में किसी प्रकार के तनाव का सामना करना पड़ सकता है | हो सकता है परिवार में कोई प्रॉपर्टी से सम्बन्धित विवाद इस समय उग्र हो जाए | किन्तु धीरे धीरे स्थितियाँ सामान्य हो सकती हैं | आपकी माता जी के स्वास्थ्य के लिए भी यह गोचर कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता | मानसिक तनावों के कारण सम्भव है आपकी रूचि धार्मिक कार्यों में बढ़ जाए | आपको पेट से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है अतः खान पान पर ध्यान देना आवश्यक है |

कुम्भ :  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके पराक्रम में वृद्धि की सम्भावना है | अचानक ही आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभदायक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई उत्साहवर्द्धक समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | किन्तु अपने छोटे भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ कोई भी बहस बड़ा रूप लेकर कोर्ट तक पहुँच सकती है, अतः इस स्थिति से बचने का प्रयास करें |

मीन : आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपको तथा आपके जीवन साथी को कार्य के सिलसिले में दूर पास की यात्राओं में वृद्धि हो सकती है | इन यात्राओं में आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है | आप सपरिवार भ्रमण के लिए भी जा सकते हैं | सम्भव है आप किसी दूसरे शहर में अथवा कहीं विदेश में निवास की ही योजना बना लें | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/02/mercury-transit-in-aries/

 

वक्री बुध मीन राशि में

पाँच मार्च को 23:49 पर बुध वक्री हो चुका है | वक्री होता हुआ बुध 15 मार्च को प्रातः नौ बजे के लगभग कुम्भ में वापस लौट जाएगा | 28 मार्च से 19:30 के लगभग मार्गी होना आरम्भ होगा और 12 अप्रेल को प्रातः चार बजकर चौबीस मिनट के लगभग मीन में पहुँच जाएगा | जहाँ 3 मई को 17:03 तक विचरण करने के बाद अन्त में मेष राशि में प्रस्थान कर जाएगा | कल यानी आठ मार्च से इक्कीस मार्च तक बुध अस्त भी रहेगा | बुध के मीन राशि में गोचर के फल पूर्व में लिख चुके हैं | बुध ज्ञान विज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान, गणित, सांख्यिकी, व्यापार, आज की स्थिति में कम्प्यूटर विज्ञान इत्यादि का कारक माना जाता है | Astrologers की मान्यता है कि बुध यदि वक्री हो तो जीवन में नकारात्मक प्रभाव होते हैं | किन्तु हमारे विचार से गोचर में किसी भी ग्रह के वक्री होने से केवल नकारात्मक प्रभाव ही नहीं होने चाहियें | अपितु ग्रह के वक्री होने पर जो उसके प्रभाव हैं उनमें और अधिक वृद्धि हो जानी चाहिए – फिर चाहे वह नकारात्मक हों या सकारात्मक – क्योंकि वक्री होने पर गह के चेष्टाबल में वृद्धि हो जाती है |

बुध सूर्य के सबसे अधिक निकट है अतः बहुत शीघ्र ही वक्री हो जाता है, बहुत शीघ्र मार्गी हो जाता है, बहुत शीघ्र अतिगामी भी हो जाता है | वक्री होने पर बुध के दोनों ही प्रभाव हो सकते हैं – शुभ भी और अशुभ भी | शुभ ग्रहों के प्रभाव में आएगा या किसी शुभ भाव में जाएगा तो जातक की बुद्धि, वाणी, संचार क्षमता – Communication skills, निर्णायक क्षमता, लेखन, व्यापार इत्यादि में कौशल तथा प्रगति परिलक्षित होगा | अशुभ ग्रह के प्रभाव अथवा भाव में आएगा तो इसके विपरीत फल हो सकते हैं |

हाँ, यहाँ हम कह सकते हैं कि बुध क्योंकि अपनी नीच राशि में भ्रमण कर रहा है तो इस स्थिति में सम्भव है उतने अच्छे प्रभाव बुध के न परिलक्षित हों | तो आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि में बुध के वक्री होने पर जन साधारण के लिए क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध आपकी राशि से बारहवें भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | जिसके कारण आप स्वयं ही अपने विरोधियों को परास्त करने में समर्थ हो सकेंगे तथा आपके कार्य समय पर और सुचारू रूप से सम्पन्न हो सकेंगे | साथ ही आपके जीवन में कोई ऐसा महत्त्वपूर्ण परिवर्तन भी हो सकता है जो आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है | कार्य में प्रगति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है |

वृषभ : आपके लिए द्वितीयेश और पंचमेश होकर आपके लाभ स्थान में बुध वक्री हो रहा है | एक ओर आपके लिए आय में प्रगति के संयोग प्रतीत होते हैं वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत सम्बन्धों में किसी प्रकार की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है | अपने स्वभाव और वाणी को नियन्त्रण में रखेंगे तो इन समस्याओं से बच सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए आपका योगकारक होकर बुध आपके दशम भाव में वक्री हो रहा है | आपको पैतृक संपत्ति के लाभ होने की सम्भावना है | कार्य में प्रगति के साथ ही कार्यस्थल पर तथा परिवार में सहयोग और सौहार्द का वातावरण भी बना रह सकता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कर्क : आपका तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध आपके आपके नवम भाव में वक्री हो रहा है | जो लोग हाथ के कारीगर हैं अथवा डॉक्टर वैद्य इत्यादि हैं या वैज्ञानिक हैं तो आपके लिए आपके कार्य में उन्नति तथा सफलता की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु साथ ही भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का मन मुटाव भी सम्भव है | इस अवधि में यात्राएँ आपके लिए सम्भव है अनुकूल न सिद्ध हों |

सिंह : आपके लिए आपका द्वितीयेश और लाभेश होकर बुध आपके अष्टम भाव में वक्री हो रहा है | यदि कहीं पैसा Invest किया हुआ है तो उसके माध्यम से आपको लाभ होना आरम्भ हो सकता है | किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति से सम्पर्क हूँ सकता है जो धीरे धीरे प्रगाढ़ मित्रता में परिवर्तित हो सकता है जिसके कारण आपको अपने कार्य में लाभ भी प्राप्त हो सकता है | सम्भव है आपको कुछ विरोध का आभास हो, किन्तु इसके कारण चिन्ता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप स्वयं ही अपने बुद्धिबल से इस विरोध को शान्त करने में सक्षम हो सकते हैं |

कन्या : आपके लिए आपका योगकारक होकर आपके सप्तम भाव में बुध वक्री हो रहा है | आपके व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना की जा सकती है | किसी मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपको अर्थलाभ के साथ ही आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती हैं | साथ ही आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कुछ कार्यों का निबटारा भी इस अवधि में कर सकते हैं | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

तुला : आपका नवमेश और द्वादशेश होकर बुध आपकी राशि से छठे भाव में वक्री हो रहा है | एक ओजहान आपके लिए मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं, धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत हैं, यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं, वहीं दूसरी ओर आपके मन में किसी प्रकार की निराशा और असुरक्षा की भावना भी बलवती हो सकती है | आवश्यकता है ध्यान का नियमित अभ्यास करने की | साथ यात्राओं के दौरान अपने Important Documents और सामान की सुरक्षा की भी आवश्यकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की सम्भावना की जा सकती है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका अष्टमेश और एकादशेश होकर बुध आपके पंचम भाव में वक्री हो रहा है | यद्यपि कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक लाभ की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | शरीर में थकान, नींद में अभाव आदि का अनुभव इस अवधि में हो सकता है | अकस्मात् ही कहीं से अच्छा या बुरा कोई ऐसा समाचार भी प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आपके जीवन की दिशा ही बदल सकती है |

धनु : आपके लिए योगकारक होकर बुध आपके चतुर्थ भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | सहकर्मियों तथा जीवन साथी का सहयोग और समर्थन निरन्तर आपको प्राप्त होता रहेगा जिसके कारण आपके कार्य भी भली भाँती सम्पन्न होते रहेंगे | मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु परिवार के मध्य से किसी प्रकार के विरोध अथवा तनाव की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | ऐसी स्थिति में आवश्यकता है आप अपना स्वभाव में सकारात्मकता और शान्ति बनाए रखें |

मकर : आपका षष्ठेश और नवमेश होकर बुध आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | धार्मिक कार्यों में आपकी रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | इस अवधि में आप तीर्थयात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण आपकी दिनचर्या में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है | डॉक्टर के दिशानिर्देशों का पालन अवश्य करें | भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें |

कुम्भ : आपके लिए आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से दूसरे भाव में वक्री हो रहा है | आप अपने बौद्धिक कौशल से कार्य में सफलता था धनार्जन करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं | हाँ, अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | आपका झुकाव धार्मिक, आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकता है | किन्तु यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो या तो बही कुछ समय के लिए इस विचार को स्थगित कर दें, अथवा बहुत सोच समझकर आगे बढ़ें | आँख में किसी प्रकार का इन्फेक्शन भी सम्भव है | विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मीन : आपका योगकारक आपकी लग्न में ही वक्री हो रहा है | एक ओर कार्य की दृष्टि से आपके लिए यह समय अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में नया घर भुई खरीद सकते हैं | प्रॉपर्टी विषयक समस्याओं का निदान इस अवधि में सम्भव है | किन्तु साथ ही यह भी सम्भव है कि आप जल्दबाज़ी में कोई निर्णय ले सकते हैं जो आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है | अतः जो भी कार्य करें भली भाँति सोच समझकर करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर तथा उनके मार्गी, वक्री अथवा अतिगामी होने का क्रम तो अपने नियत समय पर चलता ही रहेगा | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/03/07/retrograde-mercury-in-pisces/

 

 

बुध का मीन में गोचर

आज सोमवार 25 फरवरी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को प्रातः आठ बजकर 53 मिनट के लगभग विष्टि करण और ध्रुव योग में बुध ने मीन राशि में प्रवेश किया है | बुध इस समय पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर है | 28 फरवरी को यह उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर चला जाएगा | उसके बाद 15 मार्च को वक्री होकर पुनः पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और कुम्भ राशि में आ जाएगा | यहाँ 12 अप्रेल तक भ्रमण करने के बाद फिर से मार्गी होकर मीन राशि में गोचर करेगा | मीन राशि में भ्रमण करते हुए 15 अप्रेल को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और 25 अप्रेल को रेवती नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तीन मई को सायं पाँच बजकर तीन मिनट एक लगभग मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच आठ मार्च से 21 मार्च तक बुध अस्त भी रहेगा | मीन राशि के लिए बुध सप्तमेश और दशमेश होकर योगकारक भी बन जाता है | बुध की अपनी उच्च राशि कन्या से मीन राशि सप्तम भाव है तथा मिथुन से दशम भाव है | साथ ही वर्तमान में वृश्चिक राशि से बुध की राशियों के लिए और मीन राशि के लिए योगकारक गुरु की पञ्चम दृष्टि भी बुध को प्राप्त हो रही है | निश्चित रूप से मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियों के लिए बुध का यह गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है | तो जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मीन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य के सिलसिले में अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | लेखकों के लिए, बैंकिंग अथवा कॉमर्स के क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वाले लोगों के लिए तथा दस्तकारों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | कुछ ऐसे नवीन कार्य भी आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली तथा प्रखर बनी रहेगी, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में भी प्राप्त होगा | अधिकारी वर्ग तथा पिता और बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए भी यह गोचर अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश होकर बुध आपके लिए योगकारक है और दूसरे योगकारक गुरु की मीन राशि में आपकी राशि से कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | आपका अपना कार्य है तो उसमें भी प्रगति की समभावना है | परिवार के लोगों का तथा कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं अथवा अपने स्टाफ में नवीन नियुक्तियाँ करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | परिवार में किसी सदस्य का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | कार्य के सिलसिले में अथवा दस्तकार हैं तो किसी प्रदर्शनी आदि के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | इन यात्राओं से आपके कार्य में आपको लाभ होगा किन्तु यात्राओं की अधिकता के कारण आप कुछ शारीरिक थकान का भी अनुभव कर सकते हैं – विशेष रूप से जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | बीच बीच में कुछ योग के अभ्यास करते रहेंगे तो इस समस्या से बचे रह सकते हैं | तीर्थयात्रा आदि का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | परिवार में भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर आपके लिए कार्य में वृद्धि, पदोन्नति तथा प्रचुर अर्थलाभ की सम्भावना है तो वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके घनिष्ठ मित्रों की ओर से ही अकारण ही आपके लिए कुछ अनिष्ट हो सकता है, अतः अपने कान और आँख खुले रखने की आवश्यकता है | अपने पिता की सलाह पर चलेंगे तो आपके हित में रहेगा | आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली बनी रहेगी, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त होगा | रुकी हुई पेमेण्ट भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक बन जाता है और आपके दूसरे योगकारक ग्रह गुरु की राशि मीन में आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य की अधिकता होने के साथ ही आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | पार्टनरशिप में कोई कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | बैंकिंग तथा कॉमर्स के क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वालों के लिए, वैद्यों के लिए, कम्प्यूटर, आई टी, मैनेजमेंट इत्यादि के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में अपने किसी मित्र अथवा किसी सहकर्मी के साथ आप Romantically Involve हो सकते हैं, जो समय आने पर विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किसी पुराने मित्र से फिर से सम्पर्क हो सकता है, जो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल सिद्ध हो सकता है | किन्तु साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है | अचानक ही किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

धनु : आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपको अपने कार्य में अपने माता पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | परिवार तथा कार्यस्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने के कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण कर सकने में समर्थ होंगे | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपकी जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | किसी सहकर्मी के साथ Romantically involve भी हो सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | सम्भव है आपको अपने कार्य में किसी प्रकार के व्यवधान का अनुभव हो, किन्तु यह अस्थाई है | आपके उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है, इसका लाभ उठाना आप पर निर्भर करता है | यदि आप दस्तकार हैं अथवा लेखक हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी कला की तथा आपके लेखन की प्रशंसा होगी और इसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है, किन्तु पोंगा पण्डितों तथा व्यर्थ के अन्धविश्वासों के चक्कर में पड़कर आप अपना नुकसान भी कर सकते हैं, अतः इस ओर से सावधना रहने की आवश्यकता है | छोटे भाई बहनों से व्यर्थ का विवाद आपके हित में नहीं रहेगा |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | आपकी निर्णायक तथा प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | आपके कार्यों की सराहना होगी और आपकी योजनाओं को क्रियान्वित भी किया जा सकता है | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु वाणी जहाँ प्रभावशाली बनी हुई है वहीं उस पर नियन्त्रण रखने की भी आवश्यकता है |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक बन जाता है तथा आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | एक ओर पारिवारिक स्तर पर आपके लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर आपके कार्य की दृष्टि से भी उन्नति की सम्भावना प्रतीत होती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आप अपने लिए नया घर भी इस अवधि में खरीद सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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बुद्ध का कुम्भ में गोचर

कल यानी गुरूवार सात फरवरी को प्रातः दस बजकर ग्यारह मिनट के लगभग माघ शुक्ल द्वितीया को तैतिल करण और परिघ योग में बुध का गोचर कुम्भ राशि में होने जा रहा है | बुध इस समय धनिष्ठा नक्षत्र पर है तथा अस्त है | कुम्भ राशि में निवास करते हुए बुध 11 फरवरी को शतभिषज नक्षत्र पर और 18 फरवरी को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ 25 फरवरी को प्रातः 8:53 के लगभग मीन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच 18 फरवरी को बुह मार्गी भी हो जाएगा | कुम्भ राशि में स्थित बुध पर शनि की दृष्टि भी है तथा कुम्भ राशि बुध की अपनी उच्च राशि कन्या से छठा भाव है तथा मिथुन राशि से नवम भाव है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के कुम्भ राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | कुछ ऐसे नवीन कार्य भी आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही छोटे भाई बहनों अथवा किसी मित्र के कारण कार्य में व्यवधान की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | जो लोग आपसे ईर्ष्या रखते हैं उनसे एक निश्चित दूरी बनाकर चलने में ही भलाई होती है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | परिवार के लोगों का तथा कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | आपका अपना कार्य है तो उसमें उन्नति के साथ ही आप कोई अन्य कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं | मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की सम्भावना भी है | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | आपकी निर्णायक क्षमता में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना भी है | आप इस अवधि में तीर्थयात्रा आदि का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | आप अपने लिए कोई नया घर भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अध्ययन अध्यापन तथा बेंकिंग अथवा मेडिकल के क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वालों के लिए गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | जिन लोगों का कार्य किसी भी प्रकार से विदेशों से सम्बन्ध रखता है उनके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | उनके लिए में प्रगति तथा उसके माध्यम से अर्थलाभ की सम्भावना प्रतीत होती है | यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | तुकी हुई पेमेण्ट भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | नौकरी में पदोन्नति के साथ ही ट्रांसफर की सम्भावना भी है | किन्तु साथ ही छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रका का तनाव भी सम्भव है जिसके कारण स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य की अधिकता होने के साथ ही आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन कार्य प्राप्त हो सकते हैं जो आपके लिए हित में रहेंगे | साथ ही यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में अपने किसी मित्र अथवा किसी सहकर्मी के साथ आप Romantically Involve हो सकते हैं, जो समय आने पर विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | किन्तु आपको अपने स्वभाव और वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप का आपका स्वभाव आपके सम्बन्धों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किसी पुराने मित्र से फिर से सम्पर्क हो सकता है, जो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल सिद्ध हो सकता है | किन्तु साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की समभावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपको अपने कार्य में अपने माता पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्द्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | सम्भव है आपके कार्य में किसी प्रकार के व्यवधान का अनुभव आपको हो, किन्तु यह अस्थाई है | बुध के मार्गी होने पर कार्य क्षेत्र में भी सफलता की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु यदि आप दस्तकार हैं अथवा लेखक हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी कला की तथा आपके लेखन की प्रशंसा होगी और इसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | साथ ही आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप अपने जीवन साथी के साथ कहीं भ्रमण के लिए भी जा सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपकी निर्णायक तथा प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | आपके कार्यों की सराहना होगी और आपकी योजनाओं को क्रियान्वित भी किया जा सकता है | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | लोग आपके कार्यों की प्रशंसा करेंगे और अपने कार्य के लिए आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | किन्तु साथ ही विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य के सिलसिले में अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है | अचानक ही किसी ऐसे स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है जहाँ आप बहुत पहले जाना चाहते थे किन्तु जा नहीं पा रहे थे | पारिवारिक कलह की ओर से साबधान रहने की आवश्यकता है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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