मंगल का मिथुन में गोचर

मंगल का मिथुन राशि में गोचर

मंगलवार सात मई यानी वैशाख शुक्ल तृतीया है – यानी अक्षय तृतीया | जिसे भगवान् विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | सर्वप्रथम सभी को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

कल प्रातः 6:53 के लगभग तैतिल करण और अतिगण्ड योग में मंगल वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में राहु के साथ प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय मंगल मृगशिर नक्षत्र पर होगा | अपने इस गोचर के दौरान 17 मई को आर्द्रा नक्षत्र पर और सात जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में बाईस जून को रात्रि ग्यारह बजकर बाईस मिनट के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मिथुन राशि पर भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ कन्या राशि पर, धनु राशि पर तथा मकर राशि पर रहेंगी | मिथुन राशि से कन्या और धनु क्रमशः चतुर्थ व सप्तम भाव हैं और मकर राशि अष्टम भाव है | जबकि मंगल की अपनी राशि मेष से मिथुन तृतीय भाव और वृश्चिक से अष्टम भाव है | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है तथा आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की समभावना है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए अभी समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर आपकी कुण्डली के बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | आपकी सन्तान या तो किसी नए घर में निवास के लिए जा सकती है अथवा किसी अन्य शहर में बसने का मन बना सकती है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ तथा माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | हालाँकि कार्यस्थल पर किसी प्रकार का विरोध भी सम्भव है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का तनाव भी सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा लाभ स्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | पारिवारिक स्तर पर वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा किन्तु किसी घनिष्ठ मित्र के साथ किसी प्रकार का मनमुटाव इस अवधि में सम्भव है | साथ ही, यदि नौकरी में हैं अथवा पार्टनरशिप में कोई व्यवसाय है तो अधिकारीवर्ग से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों उन पर किसी प्रकार का दबाव डालने का प्रयास न करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना से सभी को एक बार पुनः अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/05/06/mars-transit-in-gemini/

 

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मंगल का वृषभ राशि में गोचर

मंगल का वृषभ राशि में गोचर

आज यानी चैत्र कृष्ण द्वितीया को दोपहर तीन बजकर पाँच मिनट के लगभग गर करण, ध्रुव योग और चित्रा नक्षत्र में मंगल अपनी स्वयं की राशि मेष से निकल कर वृषभ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय मंगल कृत्तिका नक्षत्र पर होगा | अपने इस गोचर के दौरान छह अप्रेल को रोहिणी नक्षत्र पर और सत्ताईस अप्रेल को मृगशिर नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ अन्त में सात मई को प्रातः छह बजकर चौवन मिनट के लगभग मिथुन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | वृषभ राशि पर भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ सिंह राशि पर, अपनी स्वयं की वृश्चिक राशि पर तथा धनु राशि पर रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मेष राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है तथा आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की समभावना है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आप अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपके लिए लाभ की सम्भावना की जा सकती है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर आपके योगकारक का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल आपके दशम भाव यानी कर्म स्थान में भ्रमण कर रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यदि ऐसा नहीं है तो पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ तथा माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से वह आपके तीसरे भाव के साथ ही आपके धन और लाभ स्थानों को भी देख रहा है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | कार्यस्थल पर किसी प्रकार का विरोध भी सम्भव है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | उच्च शिक्षा अथवा कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है | आपकी सन्तान केलिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्द्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कार्य में प्रगति की सम्भावना तथा आय में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना भी की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा किन्तु परिवार में किसी प्रकार का तनाव सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, नवम तथा कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | पारिवारिक स्तर पर वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा किन्तु किसी घनिष्ठ मित्र के साथ किसी प्रकार का मनमुटाव इस अवधि में सम्भव है | साथ ही, यदि नौकरी में हैं अथवा पार्टनरशिप में कोई व्यवसाय है तो अधिकारीवर्ग से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों उन पर किसी प्रकार का दबाव डालने का प्रयास न करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहिन्निश्चित हो सकता है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर मुखर हो सकते हैं | किन्तु आप स्वयं अपने बुद्धिबल से उस विरोध को शान्त करने में समर्थ हो सकेंगे | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अधिकारीगणों तथा घनिष्ठ मित्रों का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/03/22/mars-transit-in-taurus/

 

मंगल का मीन राशि में गोचर

आज 22 दिसम्बर को अर्द्धरात्र्योत्तर 12:57 के लगभग मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा को आर्द्रा नक्षत्र, कौलव करण और ब्रह्म योग तथा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में विचरते हुए भूमिसुत मंगल का गोचर अपने मित्र ग्रह गुरु की मीन राशि में होगा | जहाँ 5 फरवरी 2019 को 23:48 तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण राशि मेष में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 28 दिसम्बर को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र तथा 17 जनवरी को रेवती नक्षत्र पर मंगल भ्रमण करेगा | मीन राशि से मंगल की दृष्टियाँ मिथुन, कन्या तथा तुला राशियों पर रहेंगी | अर्थात मिथुन, कन्या तथा तुला राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मीन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है अन्यथा स्वास्थ्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | इस अवधि में आप कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके लाभ स्थान में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी हो सकता है अथवा आपकी सन्तान का विवाह सम्बन्ध कहीं हो सकता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | आपके छोटे भाई बहनों के कारण आपके जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है | किन्तु कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | किन्तु अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्द्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | परिवार के साथ कहीं देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष आदि में हो सकती है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पद्दोंनती के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अधिकारीगणों तथा घनिष्ठ मित्रों का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में लाभ की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी राशि से द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए तो आपका द्वितीयेश और भाग्येश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विशेष रूप से यदि आप लेखक हैं, बुद्धिजीवी हैं अथवा किसी आधिकारिक पद पर आसीन हैं तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लेखन की प्रशंसा होगी तथा उसके लिए आपको पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | नौकरी की तलाश में हैं तो आशानुकूल नौकरी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | किसी नवीन सदस्य का आगमन भी परिवार में हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/12/15/mars-transit-in-pisces/

 

मंगल का कुम्भ में गोचर

सर्वप्रथम सभी को दीपमालिका के प्रकाश पर्व की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… सभी का जीवन सुख-समृद्धि-सौभाग्य-स्नेह तथा ज्ञान के आलोक से आलोकित रहे यही कामना है…

कल मंगलवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रातः आठ बजकर बाईस मिनट के लगभग धनिष्ठा नक्षत्र, विष्टि करण और प्रीति योग में भूमिसुत मंगल का गोचर शनि की कुम्भ राशि पर होगा | जहाँ 23 दिसम्बर तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपने मित्र गुरु की मीन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 17 नवम्बर को शतभिषज नक्षत्र तथा 8 दिसम्बर को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर मंगल का गोचर होगा | कुम्भ राशि से मंगल की दृष्टियाँ वृषभ, सिंह तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अर्थात कुम्भ, वृषभ, सिंह तथा कन्या राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के कुम्भ राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है, किन्तु पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी तथा छोटे भिया बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से सम्बद्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

 

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी कार्य में आप व्यवधान का भी अनुभव कर सकते हैं | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकती है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पद पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की आपकी खोज भी पूर्ण हो सकती है | सम्भव है आपके किसी सहकर्मी अथवा किसी रिश्तेदार की ओर से आपको विवाह का प्रस्ताव प्राप्त हो जाए |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | किन्तु यदि आप नौकरी में हैं तो अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कोर्ट केस से आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए तो आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्व का प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी कार्य का प्रस्ताव आपको प्राप्त हो सकता है जहाँ की आशा ही आप छोड़ चुके हैं | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी तथा छोटे भाई बहनों के साथ के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें | साथ ही धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की समभावना है – किन्तु धूर्त पोंगा पण्डितों के जाल में न फँसें इसके लिए सावधान रहने की आवश्यकता है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/05/mars-transit-in-aquarius/

 

मंगल का मकर राशि में गोचर

कल यानी दो मई को 16:15 पर मंगल का गोचर उच्च राशि मकर तथा उत्तराषाढ़ नक्षत्र में होगा और छह नवम्बर तक मकर में ही विश्राम करेगा | अपने इस गोचर के दौरान यह 28 मई को श्रवण नक्षत्र में, 28 जून से वक्री होता हुआ 28 जुलाई को पुनः उत्तराषाढ़ में, 28 अगस्त से मार्गी होता हुआ पुनः 27 सितम्बर को श्रवण में और अन्त में 26 अक्टूबर को धनिष्ठा में प्रविष्ट हो जाएगा | जिनमें उत्तराषाढ़ ऊर्ध्वमुखी, कफ प्रकृति का स्थिर स्त्री नक्षत्र है, सन्तुलन रखना इसका कर्म है और सूर्य इसका देवता है | श्रवण भी ऊर्ध्वगामी, कफ प्रकृति का पुरुष नक्षत्र है, तथा सहनशीलता के प्रतीक इस नक्षत्र का देवता है चन्द्र | धनिष्ठा भी ऊर्ध्वगामी पित्त प्रकृति का स्त्री नक्षत्र है, क्रियाशीलता इसका कर्म है और इसका देवता है स्वयं मंगल | अपनी उच्च राशि में प्रविष्ट होकर मंगल की दृष्टि स्वयं अपनी मेष राशि पर तथा कर्क और सिंह राशियों पर रहेगी | अर्थात मेष, कर्क, सिंह तथा मकर राशियाँ इस गोचर के दौरान मंगल से सीधे रूप में प्रभावित रहेंगी |

ज्योतिष शास्त्र तथा भारतीय पौराणिक ग्रन्थों में मंगल को भूमि पुत्र कहा जाता है इसलिए मंगल को भौम के नाम से भी जाना जाता है तथा यह ऊर्जा और जुझारूपन का प्रतीक माना जाता है | मेष तथा वृश्चिक राशियों का अधिपति मंगल मकर में उच्च का हो जाता है और कर्क इसकी नीच राशि है | सूर्य, चन्द्र व गुरु के साथ इसकी मित्रता है, बुध और केतु के साथ शत्रुता है तथा शुक्र और शनि की राशियों में यह तटस्थ भाव में रहता है | इसका वर्ण रक्त के समान लाल है तथा इसे पित्त का कारक माना जाता है | स्वाभाविक क्रूर ग्रह मंगल यदि शुभ स्थिति में है तो निश्चित रूप से जातक के लिए शुभफलदायी होता है | वास्तव में यस व्यक्ति को ऊर्जा प्रदान करके जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी साहस के साथ सामना करने योग्य बनाता है | तो जानने का का प्रयास करते हैं कि मंगल के मकर में प्रवेश के प्रत्येक राशि पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके कार्य की दृष्टि से तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक  प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान से भी कार्य तथा धन का लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा | कार्य में प्रगति की सम्भावना है | यदि कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण कार्य में बाधा भी पड़ सकती है, अतः स्वास्थ्य का ध्यान रखें और प्राणायाम, ध्यान तथा योग आदि को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करें |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से मब्द्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी पैतृक सम्पत्ति का लाभ भी हो सकता है किन्तु सारे Documents को अच्छी तरह जाँच परख लें | हो सकता है वह सम्पत्ति विवादों में फँसी हुई हो | किसी कोर्ट के माध्यम से आपको लाभ भी हो सकता है | वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | डॉक्टर से नियमित चेकअप कराते रहें तथा अपने खान पान का ध्यान रखें |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पड़ पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध हैं तो उनमें अन्तरंगता आने की सम्भावना है, किन्तु यदि विवाहित हैं तो आपस में मनमुटाव की स्थिति न आने दें |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्यों के समय पर पूर्ण होने की सम्भावना है, वहीं इस अवधि में आपके लिए विदेश यात्राओं के योग भी बन रहे हैं | पारिवारिक दृष्टि से सम्भव है यह समय अधिक अनुकूल न रहे, किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | ये यात्राएँ आपके कार्य के लिए लाभदायाक सिद्ध हो सकती हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं प्रेम प्रसंग चल रहा है तो उसमें सावधान रहने की आवश्यकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहें | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के योग हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए भी पदलाभ के अवसर प्रतीत होते हैं | किन्तु परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम आवश्यक है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | कार्यस्थल में भी सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आप हर प्रकार के विरोध को समाप्त करने में सक्षम रहेंगे | साथ ही यदि कोई कोर्ट केस चल रहा होगा तो उसका परिणाम भी आपके पक्ष में आ सकता है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए मंगल पंचमेश तथा द्वादशेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आर्थिक रूप से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर सन्तान के कारण या स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी समस्या के कारण धन भी अधिक खर्च होने की सम्भावना है | यदि आपने अपनी वाणी पर संयम नहीं रखा तो परिवार के मुखिया अथवा सन्तान के साथ बहस भी हो सकती है जिसके कारण आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है | आपकी सन्तान किसी कार्यवश अथवा उच्च शिक्षा के लिए कहीं विदेश भी जा सकती है | आप भी सपरिवार विदेश यात्रा की योजना बना सकते हैं |

मकर : आपके लिए तो आपकी राशि में ही आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर हो रहा है | मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में हैं तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आप अपने लिए भी नया घर खरीद सकते हैं | पार्टनरशिप में जिन लोगों का व्यवसाय है उनके लिए भी लाभ की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु वाहन चलाते समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपका तृतीयेश और दशमेश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का मन मुटाव भी सम्भव है | यदि आपक कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए Vedic Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/05/01/mars-transit-in-capricorn/

 

मंगलकवचम्

मंगल की बात करें तो स्वाभाविक उग्रता तथा दृढ़ता लिए हुए मंगल ग्रह को साहस, वीरता, पराक्रम और शक्ति का कारक होने के साथ ही देवताओं का सेनापति भी माना जाता है | निश्चित रूप से पराक्रम, साहस, वीरता आदि के लिए स्वभाव में कुछ उग्रता और दृढ़ता तो आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में यह शुभ स्थिति या प्रभाव में है तो मनुष्य के पराक्रम में वृद्धि के साथ ही उसे नेतृत्त्व क्षमता भी प्रदान करता है और उसे दृढ़संकल्प भी बनाता है | किन्तु यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में यह अशुभ स्थिति में अथवा अशुभ प्रभाव में है तो अनेक प्रकार के कष्ट, विरोध में वृद्धि, हानि, अनेक प्रकार के रक्त सम्बन्धी विकार, उच्च रक्तचाप, पित्तदोष आदि का कारण भी बन सकता है तथा चोट आदि लगने पर अधिक रक्तस्राव आदि का कारण भी बन सकता है | जातक को क्रोधी भी बनाता है | अस्त्र शस्त्र का कारक भी मंगल को माना जाता है |

मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करने तथा इसे प्रसन्न करने के लिए Vedic Astrologer अनेक मन्त्रों और स्तुतियों के जाप का विधान बताते हैं | प्रस्तुत है उन्हीं में से एक “मंगलकवचम्…” यह कवच काश्यप ऋषि द्वारा रचित है तथा इसे श्रीमार्कण्डेय पुराण का विषय माना जाता है…

मंगल कवचम् 

अस्य श्री मंगलकवचस्तोत्रमन्त्रस्य काश्यप ऋषि:, अनुष्टुप् छन्दः, अङ्गारको देवता, भौम पीडापरिहारार्थं जपे विनियोगः |

ध्यानम्

रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी चतुर्भुजो मेषगमो गदाभृत् |

धरासुतः शक्तिधरश्च शूली सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्त: ||

अथ मंगलकवचम्

अंगारकः शिरो रक्षेन्मुखं वै धरणीसुतः |

श्रवौ रक्ताम्बर: पातु नेत्रे मे रक्तलोचनः ||

नासां शक्तिधरः पातु मुखं मे रक्तलोचनः |

भुजौ मे रक्तमाली च हस्तौ शक्तिधरस्तथा ||

वक्षः पातु वरांगश्च हृदयं पातु लोहितः |

कटिं मे ग्रहराजश्च मुखं चैव धरासुतः ||

जानुजंघे कुजः पातु पादौ भक्तप्रियः सदा |

सर्वण्यन्यानि चांगानि रक्षेन्मे मेषवाहनः ||

फलश्रुतिः
य इदं कवचं दिव्यं सर्वशत्रु निवारणम् |

भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं सर्व सिद्धिदम् ||

सर्वरोगहरं चैव सर्वसम्पत्प्रदं शुभम् |

भुक्तिमुक्तिप्रदं नृणां सर्वसौभाग्यवर्धनम् ||

रोगबन्धविमोक्षं च सत्यमेतन्न संशयः ||

|| इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे मंगलकवचं सम्पूर्णम् ||

मंगलकर्ता मंगल सभी का मंगल करें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/04/26/mangala-kavacham/

 

मंगल

भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल को प्रथम श्रेणी का क्रूर ग्रह माना जाता है | यह इतना शक्तिशाली ग्रह है कि वैज्ञानिकों तक को अपनी ओर निरन्तर आकर्षित करता रहता है | इसकी स्वाभाविक उग्रता के ही कारण जन साधारण के मन में मंगल को लेकर भय की भावना अधिक होती है | यहाँ तक कि वर वधू के कुण्डली मिलान के समय यदि एक पक्ष माँगलिक हो और दूस्ता पक्ष माँगलिक नहीं हो तो Vedic Astrologer विवाह की अनुमति नहीं देते हैं | किन्तु यह भय व्यर्थ है, क्योंकि जिसका नाम ही मंगल हो वह भला अमंगल कैसे कर सकता है ? मंगल उग्र ग्रह अवश्य है किन्तु अशुभ ग्रह नहीं है | जिस प्रकार अन्य ग्रह अपनी स्थिति, युति, गोचर आदि के अनुसार शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं उसी प्रकार मंगल भी करता है | किसी भी अन्य ग्रह की ही भाँति मंगल के शुभ अथवा अशुभ होने का विचार कुण्डली के समग्र अध्ययन के बाद ही किया जा सकता है | और यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल का फल अशुभ प्रतीत हो भी रहा है तो अन्य ग्रहों की ही भाँति मंगल का भी अशुभत्व कम करने तथा मंगल को प्रसन्न करने के उपाय हैं | अतः व्यर्थ ही भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है |

इस ग्रह का वर्ण अग्नि के समान लाल होने के कारण इसे अंगारक अथवा अग्निपुत्र भी कहा जाता है | इसका अन्य नाम है भौम अर्थात भूमि का पुत्र, यद्यपि इसके लिए अनेक पौराणिक उपाख्यान उपलब्ध हैं, किन्तु हमारे विचार से ऐसा सम्भवतः इसलिए है कि वैज्ञानिकों ने पृथिवी और मंगल के मध्य कई समानताएँ खोज निकाली हैं और वैदिक काल के ऋषि मुनियों को अपनी अन्तर्दृष्टि से इन समानताओं का निश्चित रूप से भान रहा होगा | इसे युद्ध का देवता भी कहा जाता है तथा इसकी कुमार अवस्था मानी जाती है | बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अनुसार – ‘‘क्रूरो रक्तेक्षणो भौमश्चपलोदारमूर्तिकः पित्तप्रकृतिकः क्रोधी कृशमध्यतनुर्द्विज’’ अर्थात स्वभाव से क्रूर, रक्त नेत्र, चंचल, उदारहृदय, पित्तप्रकृति, क्रोधी, कृश तथा मध्यम कद काठी का ग्रह है मंगल | नारदीय पुराण, जातक तत्वम् इत्यादि अन्य अनेक ग्रन्थों की भी यही मान्यता है |

मेष तथा वृश्चिक राशियों का इस ग्रह को अधिपतित्व प्राप्त है और दोनों राशियाँ एक दूसरे से षडाष्टक में हैं, जो ऊर्जा और साहस तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए वास्तव में अनुकूल स्थिति है | यह मकर राशि में उच्च का तथा कर्क में नीच का होता है | दशम भाव में इसे दिग्बल प्राप्त होता है | सूर्य, चन्द्र और गुरु इसके मित्र ग्रह हैं तथा बुध शत्रु ग्रह है | शुक्र तथा शनि इसके लिए सामान्य ग्रह हैं – अर्थात इनकी राशियों में मंगल अप्रभावित रहता है | इसकी दशा सात वर्ष की होती है तथा एक राशि से दूसरी राशि में जाने में इसे लगभग 45-50 दिन का समय लगता है, किन्तु अत्तिचारी अथवा वक्री होने की स्थिति में कभी कभी कुछ अधिक दिन तक भी एक राशि में भ्रमण करता रह सकता है | जैसे इस वर्ष दो मई से लेकर छह नवम्बर तक छह माह के लगभग मकर राशि में भ्रमण करेगा |

शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास, अहंकार, शक्ति, क्रोध, वीरता जैसी साहसिक और दुस्साहसिक प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाला मंगल रक्त, माँसपेशियों तथा अस्थि मज्जा का स्वामी माना जाता है | वास्तव में देखा जाए तो मंगल जातक को जो ऊर्जा प्रदान करता है और इसी ऊर्जा के सहारे व्यक्ति सांसारिक यात्रा को भली भाँति संचालित कर पाता है | मृगशिरा, चित्रा तथा धनिष्ठा नक्षत्रों का यह स्वामी ग्रह है | इसका तत्व अग्नि है तथा यह दक्षिण दिशा और ग्रीष्म ऋतु से सम्बन्ध रखता है | यह ग्रह इतना शक्तिशाली माना जाता है कि यदि यह जातक की कुण्डली में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति पराक्रमी तथा शुभ कार्यों में प्रवृत्त होता है, किन्तु यदि अशुभ स्थिति में हो तो अपनी शक्ति तथा पराक्रम का अनुचित उपयोग भी कर सकता है | साथ ही मंगल यदि दुर्बल हो तो पराक्रम का ह्रास भी कर सकता है | प्रत्येक स्थिति में मंगल को प्रसन्न करने अथवा बली बनाने के लिए कुछ मन्त्रों का जाप करने का सुझाव दिया जाता है | प्रस्तुत हैं उन्हीं में से कुछ मन्त्र:

वैदिक मन्त्र : ॐ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्य अयम् | अपा रेता सिजिन्नवति |

पौराणिक मन्त्र : ॐ धरणीगर्भसम्भूतं विद्युतकान्तिसमप्रभं, कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम् |

तन्त्रोक्त मन्त्र : ॐ ह्रां हंस: खं ख: अथवा ॐ हूँ श्रीं मंगलाय नमः अथवा ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः

बीज मन्त्र : ॐ अं अंगारकाय नमः अथवा ॐ भौं भौमाय नमः

गायत्री मन्त्र : ॐ क्षिति पुत्राय विद्महे लोहितांगाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात

अपने नाम के अनुरूप ही मंगल सभी के लिए मंगलकारक हो…

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