Category Archives: मंगल

मंगल का कुम्भ में गोचर

सर्वप्रथम सभी को दीपमालिका के प्रकाश पर्व की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ… सभी का जीवन सुख-समृद्धि-सौभाग्य-स्नेह तथा ज्ञान के आलोक से आलोकित रहे यही कामना है…

कल मंगलवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रातः आठ बजकर बाईस मिनट के लगभग धनिष्ठा नक्षत्र, विष्टि करण और प्रीति योग में भूमिसुत मंगल का गोचर शनि की कुम्भ राशि पर होगा | जहाँ 23 दिसम्बर तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपने मित्र गुरु की मीन राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 17 नवम्बर को शतभिषज नक्षत्र तथा 8 दिसम्बर को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर मंगल का गोचर होगा | कुम्भ राशि से मंगल की दृष्टियाँ वृषभ, सिंह तथा कन्या राशियों पर रहेंगी | अर्थात कुम्भ, वृषभ, सिंह तथा कन्या राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के कुम्भ राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है, किन्तु पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी तथा छोटे भिया बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से सम्बद्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

 

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी कार्य में आप व्यवधान का भी अनुभव कर सकते हैं | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकती है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | अनुकूल फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पद पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की आपकी खोज भी पूर्ण हो सकती है | सम्भव है आपके किसी सहकर्मी अथवा किसी रिश्तेदार की ओर से आपको विवाह का प्रस्ताव प्राप्त हो जाए |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | किन्तु यदि आप नौकरी में हैं तो अधिकारियों से पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कोर्ट केस से आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए तो आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त महत्त्व का प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी कार्य का प्रस्ताव आपको प्राप्त हो सकता है जहाँ की आशा ही आप छोड़ चुके हैं | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी तथा छोटे भाई बहनों के साथ के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें | साथ ही धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की समभावना है – किन्तु धूर्त पोंगा पण्डितों के जाल में न फँसें इसके लिए सावधान रहने की आवश्यकता है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/11/05/mars-transit-in-aquarius/

 

मंगल का मकर राशि में गोचर

कल यानी दो मई को 16:15 पर मंगल का गोचर उच्च राशि मकर तथा उत्तराषाढ़ नक्षत्र में होगा और छह नवम्बर तक मकर में ही विश्राम करेगा | अपने इस गोचर के दौरान यह 28 मई को श्रवण नक्षत्र में, 28 जून से वक्री होता हुआ 28 जुलाई को पुनः उत्तराषाढ़ में, 28 अगस्त से मार्गी होता हुआ पुनः 27 सितम्बर को श्रवण में और अन्त में 26 अक्टूबर को धनिष्ठा में प्रविष्ट हो जाएगा | जिनमें उत्तराषाढ़ ऊर्ध्वमुखी, कफ प्रकृति का स्थिर स्त्री नक्षत्र है, सन्तुलन रखना इसका कर्म है और सूर्य इसका देवता है | श्रवण भी ऊर्ध्वगामी, कफ प्रकृति का पुरुष नक्षत्र है, तथा सहनशीलता के प्रतीक इस नक्षत्र का देवता है चन्द्र | धनिष्ठा भी ऊर्ध्वगामी पित्त प्रकृति का स्त्री नक्षत्र है, क्रियाशीलता इसका कर्म है और इसका देवता है स्वयं मंगल | अपनी उच्च राशि में प्रविष्ट होकर मंगल की दृष्टि स्वयं अपनी मेष राशि पर तथा कर्क और सिंह राशियों पर रहेगी | अर्थात मेष, कर्क, सिंह तथा मकर राशियाँ इस गोचर के दौरान मंगल से सीधे रूप में प्रभावित रहेंगी |

ज्योतिष शास्त्र तथा भारतीय पौराणिक ग्रन्थों में मंगल को भूमि पुत्र कहा जाता है इसलिए मंगल को भौम के नाम से भी जाना जाता है तथा यह ऊर्जा और जुझारूपन का प्रतीक माना जाता है | मेष तथा वृश्चिक राशियों का अधिपति मंगल मकर में उच्च का हो जाता है और कर्क इसकी नीच राशि है | सूर्य, चन्द्र व गुरु के साथ इसकी मित्रता है, बुध और केतु के साथ शत्रुता है तथा शुक्र और शनि की राशियों में यह तटस्थ भाव में रहता है | इसका वर्ण रक्त के समान लाल है तथा इसे पित्त का कारक माना जाता है | स्वाभाविक क्रूर ग्रह मंगल यदि शुभ स्थिति में है तो निश्चित रूप से जातक के लिए शुभफलदायी होता है | वास्तव में यस व्यक्ति को ऊर्जा प्रदान करके जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी साहस के साथ सामना करने योग्य बनाता है | तो जानने का का प्रयास करते हैं कि मंगल के मकर में प्रवेश के प्रत्येक राशि पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश आपके दशम भाव में गोचर करेगा | आपके कार्य की दृष्टि से तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक  प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान से भी कार्य तथा धन का लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा | कार्य में प्रगति की सम्भावना है | यदि कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण कार्य में बाधा भी पड़ सकती है, अतः स्वास्थ्य का ध्यान रखें और प्राणायाम, ध्यान तथा योग आदि को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करें |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से मब्द्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है | किसी पैतृक सम्पत्ति का लाभ भी हो सकता है किन्तु सारे Documents को अच्छी तरह जाँच परख लें | हो सकता है वह सम्पत्ति विवादों में फँसी हुई हो | किसी कोर्ट के माध्यम से आपको लाभ भी हो सकता है | वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | डॉक्टर से नियमित चेकअप कराते रहें तथा अपने खान पान का ध्यान रखें |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | मिश्रित फल देने वाला गोचर प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पड़ पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध हैं तो उनमें अन्तरंगता आने की सम्भावना है, किन्तु यदि विवाहित हैं तो आपस में मनमुटाव की स्थिति न आने दें |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्यों के समय पर पूर्ण होने की सम्भावना है, वहीं इस अवधि में आपके लिए विदेश यात्राओं के योग भी बन रहे हैं | पारिवारिक दृष्टि से सम्भव है यह समय अधिक अनुकूल न रहे, किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | ये यात्राएँ आपके कार्य के लिए लाभदायाक सिद्ध हो सकती हैं | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं प्रेम प्रसंग चल रहा है तो उसमें सावधान रहने की आवश्यकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहें | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के योग हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए भी पदलाभ के अवसर प्रतीत होते हैं | किन्तु परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम आवश्यक है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | कार्यस्थल में भी सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आप हर प्रकार के विरोध को समाप्त करने में सक्षम रहेंगे | साथ ही यदि कोई कोर्ट केस चल रहा होगा तो उसका परिणाम भी आपके पक्ष में आ सकता है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए मंगल पंचमेश तथा द्वादशेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आर्थिक रूप से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर सन्तान के कारण या स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी समस्या के कारण धन भी अधिक खर्च होने की सम्भावना है | यदि आपने अपनी वाणी पर संयम नहीं रखा तो परिवार के मुखिया अथवा सन्तान के साथ बहस भी हो सकती है जिसके कारण आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है | आपकी सन्तान किसी कार्यवश अथवा उच्च शिक्षा के लिए कहीं विदेश भी जा सकती है | आप भी सपरिवार विदेश यात्रा की योजना बना सकते हैं |

मकर : आपके लिए तो आपकी राशि में ही आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर हो रहा है | मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में हैं तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आप अपने लिए भी नया घर खरीद सकते हैं | पार्टनरशिप में जिन लोगों का व्यवसाय है उनके लिए भी लाभ की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु वाहन चलाते समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपका तृतीयेश और दशमेश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का मन मुटाव भी सम्भव है | यदि आपक कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए Vedic Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/05/01/mars-transit-in-capricorn/

 

मंगलकवचम्

मंगल की बात करें तो स्वाभाविक उग्रता तथा दृढ़ता लिए हुए मंगल ग्रह को साहस, वीरता, पराक्रम और शक्ति का कारक होने के साथ ही देवताओं का सेनापति भी माना जाता है | निश्चित रूप से पराक्रम, साहस, वीरता आदि के लिए स्वभाव में कुछ उग्रता और दृढ़ता तो आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में यह शुभ स्थिति या प्रभाव में है तो मनुष्य के पराक्रम में वृद्धि के साथ ही उसे नेतृत्त्व क्षमता भी प्रदान करता है और उसे दृढ़संकल्प भी बनाता है | किन्तु यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में यह अशुभ स्थिति में अथवा अशुभ प्रभाव में है तो अनेक प्रकार के कष्ट, विरोध में वृद्धि, हानि, अनेक प्रकार के रक्त सम्बन्धी विकार, उच्च रक्तचाप, पित्तदोष आदि का कारण भी बन सकता है तथा चोट आदि लगने पर अधिक रक्तस्राव आदि का कारण भी बन सकता है | जातक को क्रोधी भी बनाता है | अस्त्र शस्त्र का कारक भी मंगल को माना जाता है |

मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करने तथा इसे प्रसन्न करने के लिए Vedic Astrologer अनेक मन्त्रों और स्तुतियों के जाप का विधान बताते हैं | प्रस्तुत है उन्हीं में से एक “मंगलकवचम्…” यह कवच काश्यप ऋषि द्वारा रचित है तथा इसे श्रीमार्कण्डेय पुराण का विषय माना जाता है…

मंगल कवचम् 

अस्य श्री मंगलकवचस्तोत्रमन्त्रस्य काश्यप ऋषि:, अनुष्टुप् छन्दः, अङ्गारको देवता, भौम पीडापरिहारार्थं जपे विनियोगः |

ध्यानम्

रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी चतुर्भुजो मेषगमो गदाभृत् |

धरासुतः शक्तिधरश्च शूली सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्त: ||

अथ मंगलकवचम्

अंगारकः शिरो रक्षेन्मुखं वै धरणीसुतः |

श्रवौ रक्ताम्बर: पातु नेत्रे मे रक्तलोचनः ||

नासां शक्तिधरः पातु मुखं मे रक्तलोचनः |

भुजौ मे रक्तमाली च हस्तौ शक्तिधरस्तथा ||

वक्षः पातु वरांगश्च हृदयं पातु लोहितः |

कटिं मे ग्रहराजश्च मुखं चैव धरासुतः ||

जानुजंघे कुजः पातु पादौ भक्तप्रियः सदा |

सर्वण्यन्यानि चांगानि रक्षेन्मे मेषवाहनः ||

फलश्रुतिः
य इदं कवचं दिव्यं सर्वशत्रु निवारणम् |

भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं सर्व सिद्धिदम् ||

सर्वरोगहरं चैव सर्वसम्पत्प्रदं शुभम् |

भुक्तिमुक्तिप्रदं नृणां सर्वसौभाग्यवर्धनम् ||

रोगबन्धविमोक्षं च सत्यमेतन्न संशयः ||

|| इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे मंगलकवचं सम्पूर्णम् ||

मंगलकर्ता मंगल सभी का मंगल करें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/04/26/mangala-kavacham/

 

मंगल

भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल को प्रथम श्रेणी का क्रूर ग्रह माना जाता है | यह इतना शक्तिशाली ग्रह है कि वैज्ञानिकों तक को अपनी ओर निरन्तर आकर्षित करता रहता है | इसकी स्वाभाविक उग्रता के ही कारण जन साधारण के मन में मंगल को लेकर भय की भावना अधिक होती है | यहाँ तक कि वर वधू के कुण्डली मिलान के समय यदि एक पक्ष माँगलिक हो और दूस्ता पक्ष माँगलिक नहीं हो तो Vedic Astrologer विवाह की अनुमति नहीं देते हैं | किन्तु यह भय व्यर्थ है, क्योंकि जिसका नाम ही मंगल हो वह भला अमंगल कैसे कर सकता है ? मंगल उग्र ग्रह अवश्य है किन्तु अशुभ ग्रह नहीं है | जिस प्रकार अन्य ग्रह अपनी स्थिति, युति, गोचर आदि के अनुसार शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं उसी प्रकार मंगल भी करता है | किसी भी अन्य ग्रह की ही भाँति मंगल के शुभ अथवा अशुभ होने का विचार कुण्डली के समग्र अध्ययन के बाद ही किया जा सकता है | और यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल का फल अशुभ प्रतीत हो भी रहा है तो अन्य ग्रहों की ही भाँति मंगल का भी अशुभत्व कम करने तथा मंगल को प्रसन्न करने के उपाय हैं | अतः व्यर्थ ही भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है |

इस ग्रह का वर्ण अग्नि के समान लाल होने के कारण इसे अंगारक अथवा अग्निपुत्र भी कहा जाता है | इसका अन्य नाम है भौम अर्थात भूमि का पुत्र, यद्यपि इसके लिए अनेक पौराणिक उपाख्यान उपलब्ध हैं, किन्तु हमारे विचार से ऐसा सम्भवतः इसलिए है कि वैज्ञानिकों ने पृथिवी और मंगल के मध्य कई समानताएँ खोज निकाली हैं और वैदिक काल के ऋषि मुनियों को अपनी अन्तर्दृष्टि से इन समानताओं का निश्चित रूप से भान रहा होगा | इसे युद्ध का देवता भी कहा जाता है तथा इसकी कुमार अवस्था मानी जाती है | बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अनुसार – ‘‘क्रूरो रक्तेक्षणो भौमश्चपलोदारमूर्तिकः पित्तप्रकृतिकः क्रोधी कृशमध्यतनुर्द्विज’’ अर्थात स्वभाव से क्रूर, रक्त नेत्र, चंचल, उदारहृदय, पित्तप्रकृति, क्रोधी, कृश तथा मध्यम कद काठी का ग्रह है मंगल | नारदीय पुराण, जातक तत्वम् इत्यादि अन्य अनेक ग्रन्थों की भी यही मान्यता है |

मेष तथा वृश्चिक राशियों का इस ग्रह को अधिपतित्व प्राप्त है और दोनों राशियाँ एक दूसरे से षडाष्टक में हैं, जो ऊर्जा और साहस तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए वास्तव में अनुकूल स्थिति है | यह मकर राशि में उच्च का तथा कर्क में नीच का होता है | दशम भाव में इसे दिग्बल प्राप्त होता है | सूर्य, चन्द्र और गुरु इसके मित्र ग्रह हैं तथा बुध शत्रु ग्रह है | शुक्र तथा शनि इसके लिए सामान्य ग्रह हैं – अर्थात इनकी राशियों में मंगल अप्रभावित रहता है | इसकी दशा सात वर्ष की होती है तथा एक राशि से दूसरी राशि में जाने में इसे लगभग 45-50 दिन का समय लगता है, किन्तु अत्तिचारी अथवा वक्री होने की स्थिति में कभी कभी कुछ अधिक दिन तक भी एक राशि में भ्रमण करता रह सकता है | जैसे इस वर्ष दो मई से लेकर छह नवम्बर तक छह माह के लगभग मकर राशि में भ्रमण करेगा |

शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास, अहंकार, शक्ति, क्रोध, वीरता जैसी साहसिक और दुस्साहसिक प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाला मंगल रक्त, माँसपेशियों तथा अस्थि मज्जा का स्वामी माना जाता है | वास्तव में देखा जाए तो मंगल जातक को जो ऊर्जा प्रदान करता है और इसी ऊर्जा के सहारे व्यक्ति सांसारिक यात्रा को भली भाँति संचालित कर पाता है | मृगशिरा, चित्रा तथा धनिष्ठा नक्षत्रों का यह स्वामी ग्रह है | इसका तत्व अग्नि है तथा यह दक्षिण दिशा और ग्रीष्म ऋतु से सम्बन्ध रखता है | यह ग्रह इतना शक्तिशाली माना जाता है कि यदि यह जातक की कुण्डली में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति पराक्रमी तथा शुभ कार्यों में प्रवृत्त होता है, किन्तु यदि अशुभ स्थिति में हो तो अपनी शक्ति तथा पराक्रम का अनुचित उपयोग भी कर सकता है | साथ ही मंगल यदि दुर्बल हो तो पराक्रम का ह्रास भी कर सकता है | प्रत्येक स्थिति में मंगल को प्रसन्न करने अथवा बली बनाने के लिए कुछ मन्त्रों का जाप करने का सुझाव दिया जाता है | प्रस्तुत हैं उन्हीं में से कुछ मन्त्र:

वैदिक मन्त्र : ॐ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्य अयम् | अपा रेता सिजिन्नवति |

पौराणिक मन्त्र : ॐ धरणीगर्भसम्भूतं विद्युतकान्तिसमप्रभं, कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम् |

तन्त्रोक्त मन्त्र : ॐ ह्रां हंस: खं ख: अथवा ॐ हूँ श्रीं मंगलाय नमः अथवा ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः

बीज मन्त्र : ॐ अं अंगारकाय नमः अथवा ॐ भौं भौमाय नमः

गायत्री मन्त्र : ॐ क्षिति पुत्राय विद्महे लोहितांगाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात

अपने नाम के अनुरूप ही मंगल सभी के लिए मंगलकारक हो…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/04/25/mars-mangal/