Category Archives: मकर

शुक्र का मकर राशि में गोचर

कल फाल्गुन कृष्ण षष्ठी को वणिज करण और ध्रुव योग में रात्रि 22:46 के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र धनु राशि से निकल कर अपने परम मित्र ग्रह शनि की मकर राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस प्रस्थान के समय शुक्र उत्तराषाढ़ नक्षत्र में होगा | यहाँ निवास करते हुए पाँच मार्च को श्रवण नक्षत्र पर तथा सोलह मार्च को धनिष्ठा नक्षत्र पर विचरण करते हुए 22 मार्च को कुम्भ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | शुक्र की अपनी दोनों राशियों वृषभ और तुला के लिए सामान्य तौर पर यह गोचर शुभ होने की सम्भावना है – क्योंकि वृषभ से कर्म स्थान और तुला से चतुर्थ भाव में शुक्र का गोचर होगा | साथ ही मकर राशि के जातकों के लिए शुक्र योग कारक ग्रह है |  इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर जानने का प्रयास करते हैं कि शुक्र के मकर राशि में गोचर के समस्त राशियों पर सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप कलाकार हैं, कवि हैं, डेंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं, ब्यूटीशियन हैं अथवा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं, टूर और ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय में, वक्ता हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में उन्नति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अपने सौन्दर्य को निखारने में आपकी रूचि इस अवधि में बढ़ेगी | आपकी वाणी से लोग प्रभावित होंगे तथा अपने कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके पराक्रम में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कुछ नया कार्य आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | किसी कोर्ट केस में अनुकूल दिशा में प्रगति भी सम्भव है | जो लोग किसी प्रकार की प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहेगा | परिवार में किसी के विवाह आदि माँगलिक कार्य के कारण सम्बन्धियों तथा मित्रों के साथ आमोद प्रमोद का समय भी है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | Opposite Sex की ओर इस अवधि में आपका झुकाव बढ़ सकता है | आगे बढ़ने से पूर्व पार्टनर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होने जा रहा है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रहने के साथ ही आपका व्यक्तित्व भी इस अवधि में प्रभावशाली बना रहेगा | आपके और आपके जीवन साथी के लिए की दृष्टि से तथा अर्थलाभ की दृष्टि से भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अनेकों अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | Cosmetic और Medicine के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी यह समय अत्यन्त लाभप्रद प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | आपका कोई घनिष्ठ मित्र आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध सकते हैं |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | एक ओर आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं तो वहीं दूसरी ओर आपके लिए यह गोचर चुनौतियों से भरा हुआ भी हो सकता है | उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | यदि नौकरी में हैं तो विशेष रूप से महिला अधिकारी से पंगा आपके हित में नहीं होगा | यदि आप कलाकार अथवा वक्ता हैं तो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है | साथ ही विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | परिवार में किसी प्रकार के तनाव की आशंका भी की जा सकती है | इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से पंचम भाव में होने जा रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | सन्तान के लिए भी यह गोचर समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन होने की सम्भावना है | आपके कार्यों के कारण आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुझान में वृद्धि की भी सम्भावना की जा सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | सम्भव है आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीद लें अथवा खरीदने की योजना बना लें | किन्तु ड्राइविंग के समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है | किसी वसीयत के माध्यम से प्रॉपर्टी के लाभ के भी संकेत हैं | किन्तु सम्बन्धित Documents का भली भाँती निरीक्षण अवश्य कर लीजिये – कहीं ऐसा न हो ये प्रॉपर्टी किसी प्रकार के विवाद में फँसी हुई हो | यों परिवार में आनन्द का वातावरण रहेगा | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | साथ ही यदि राजनीति से आपका सम्बन्ध है तो आपको विरोधियों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र आपके तीसरे भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर जहाँ भाई बहनों के साथ किसी कारण से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है वहीं यात्राओं आदि के दौरान भी आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है | आपके दाम्पत्य जीवन में भी आपके भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का तनाव सम्भव है | जिन लोगों पर आप बहुत अधिक विश्वास रखते हैं उन्हीं की ओर से आपको किसी प्रकार का विश्वासघात भी सम्भव है | अतः अच्छा यही रहेगा कि अपनी योजनाओं के विषय में किसी से इस अवधि में बात न करें | तनाव के कारण आपके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | पराक्रम तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली है, उसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में अवश्य प्राप्त होगा, किन्तु ऐसा कुछ मत बोलिए जिसके कारण किसी विवाद में फँसने की सम्भावना हो |

मकर : आपका योगकारक आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आप इस अवधि में अपने शारीरिक सौन्दर्य के साथ ही अपनी Intellect को निखारने का भी प्रयास करेंगे, जो आपके हित में ही रहेगा | आपके आकर्षक व्यक्तित्व से लोग प्रभावित होंगे और उसका लाभ आपको अपने कार्य तथा पारस्परिक सम्बन्धों में अवश्य प्राप्त होगा | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | आपका प्रेम सम्बन्ध विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | Opposite Sex के प्रति आपका रुझान इस अवधि में बढ़ सकता है | राजनीति से यदि आप सम्बद्ध हैं तो आपके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उच्च शिक्षा, कला के प्रदर्शन अथवा अन्य किसी कार्य के निमित्त विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं से आपके कार्य तथा मान सम्मान में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता आने की सम्भावना है | इन यात्राओं के कारण आपके कुछ नए मित्र भी बन सकते हैं | साथ ही इन यात्राओं के दौरान अपने स्वास्थ्य तथा Important Documents का भी ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | परिवार में किसी प्रकार के माँगलिक आयोजन की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | परिवार में आनन्द का वातावरण बना रह सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | उत्साह तथा कार्य में वृद्धि के साथ ही धनलाभ के भी संकेत हैं | कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है अथवा कोई नया प्रेम सम्बन्ध भी स्थापित हो सकता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु परिवार की महिला सदस्यों के साथ भी अनायास ही किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है |

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/02/23/venus-transit-in-capricorn/

 

Advertisements

बुध का मकर में गोचर

रविवार 20 जनवरी को रात्रि नौ बजकर सात मिनट के लगभग पौष शुक्ल पूर्णिमा को विष्टि करण और विषकुम्भ योग में बुध का गोचर मकर राशि में हो चुका है | बुध इस समय उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर है तथा अस्त है | यहाँ से 26 जनवरी को बुध श्रवण नक्षत्र और तीन फरवरी को धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ सात फरवरी को प्रातः दस बजकर ग्यारह मिनट पर कुम्भ राशि में प्रस्थान कर जाएगा | इस पूरी अवधि में बुध अस्त ही रहेगा | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मकर राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपके कर्म स्थान में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | उत्साह में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है | किन्तु परिवार के लोगों विशेषकर छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी सम्भव है | अच्छा रहेगा यदि अपने पिता अथवा परिवार के अन्य किसी बुज़ुर्ग की मध्यस्थता से इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | माँसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है अतः योग का अभ्यास नियमित रूप से करने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | आपकी निर्णायक क्षमता में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति की तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना भी है | आप इस अवधि में तीर्थयात्रा आदि का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | परिवार के लोगों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | उच्च शिक्षा के लिए भी प्रयास कर सकते हैं | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | सन्तान यदि नौकरी की तलाश में है तो उसके मन के अनुकूल कोई नौकरी भी उसे प्राप्त हो सकती है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके लिए एक और उत्साह में वृद्धि के योग हैं, आपकी निर्णायक और प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं, वहीं पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना भी इस अवधि में करना पड़ सकता है – विशेष रूप से सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है, अन्यथा इसका विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में प्रेम और सौहार्द का तथा आनन्द का वातावरण विद्यमान रहने की सम्भावना है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवद्धि में कहीं आपका विवाह सम्बन्ध भी निश्चित हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में माधुर्य बना रह सकता है | आप अपने लिए नया घर खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन के कारण परिवार में उत्साह तथा मंगलकार्यों का वातावरण बना रह सकता है जिसके कारण बहुत से सम्बन्धियों और मित्रों के साथ मिलना हो सकता है | आपके लिए भी यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | किन्तु साथ ही आपकी पेमेण्ट कहीं रुक सकती है, जिसके लिए आपको अधिकारी वर्ग के साथ कुछ विवाद भी करना पड़ सकता है | किन्तु कुछ देर से ही सही, आपकी पेमेण्ट आपको प्राप्त अवश्य हो जाएगी | साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपको अपने कार्य में अपने पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्द्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं के कारण सम्भव है आप परिवार पर अधिक ध्यान न दे पाएँ | किन्तु आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में भी वृद्धि की सम्भावना है | परिवार में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | साथ ही आप अपने छोटे भाई बहनों की भी किसी प्रकार की सहायता कर सकते हैं | आपका कार्य यदि किसी प्रकार विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी योग हैं | किसी ऐसे स्थान से भी कार्य और अर्थ का लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने Important Documents को सम्भाल कर रखने की आवश्यकता होगी | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं, प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | आपके कार्यों की सराहना होगी और आपकी योजनाओं को क्रियान्वित भी किया जा सकता है | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें उन्नति के संकेत हैं | कोई नया कार्य भी इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | पार्टनरशिप में कार्य आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | लोग आपके कार्यों की प्रशंसा करेंगे और अपने कार्य के लिए आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार और सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य के सिलसिले में अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है | अचानक ही किसी ऐसे स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है जहाँ आप बहुत पहले जाना चाहते थे किन्तु जा नहीं पा रहे थे |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपके एकादश भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना रहने की सम्भावना है | वंश वृद्धि का विचार भी आप इस अवधि में कर सकते हैं |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/24/mercury-transit-in-capricorn/

सूर्य का मकर राशि में संक्रमण

पौष शुक्ल अष्टमी, सोमवार 14 जनवरी 2019 को सायं सात बजकर बावन मिनट के लगभग उत्तराषाढ़ नक्षत्र में रहते हुए राहू केतु के मध्य बव करण और सिद्ध योग में भगवान भास्कर मित्र ग्रह गुरु की धनु राशि से निकलकर शत्रु गृह शनि की मकर राशि में संचार करेंगे | जिसे “मकर संक्रान्ति” के नाम से जाना जाता है | पुण्यकाल मंगलवार 15 जनवरी को सूर्योदय के समय सवा सात बजे से होगा | इसी दिन सूर्य का उत्तरायण गमन आरम्भ हो जाता है | सभी को सूर्यदेव के उत्तरायण प्रस्थान की हार्दिक शुभकामनाएँ | भगवान सूर्य बुधवार 13 फरवरी 2019 तक मकर राशि में निवास करके आगे कुम्भ राशि में प्रस्थान करेंगे | जैसा कि हम सभी जानते हैं, सूर्य समस्त चराचर में प्रकाश, ऊर्जा तथा प्राणों का संचार करने वाला आत्मतत्व है – प्राण तत्व है – शक्ति है | साथ ही, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य पिता तथा पूर्वजों का भी प्रतिनिधित्व करता है | मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्यदेव क्रमशः उत्तराषाढ़, श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्रों पर विचरण करेंगे | उत्तराषाढ़ राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी ध्रुव अर्थात स्थिर नक्षत्र है तथा इसकी नाड़ी कफ है | श्रवण की नाड़ी भी कफ है और यह भी राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी किन्तु चर नक्षत्र है | धनिष्ठा ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है किन्तु इसकी नाड़ी पित्त है तथा यह तामसी प्रवृत्ति का और चर नक्षत्र है |

यों देखा जाए तो सूर्य की अपनी राशि सिंह है और मेष राशि में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है | अब इस दृष्टि से यदि देखें तो मकर राशिगत सूर्य अपनी उच्च राशि से दशम भाव  में तथा अपनी राशि सिंह से छठे भाव  में गोचर करता है | माना मकर राशि का अधिपति ग्रह शनि सूर्य का शत्रु ग्रह है, किन्तु सूर्य भी दुर्बल ग्रह तो है नहीं | साथ ही मकर और कुम्भ राशियाँ सूर्य के अपने पुत्र शनि की राशियाँ हैं | अतः सूर्य का यह गोचर जातक को किसी भी विपरीत परिस्थिति से लड़कर आगे बढ़ने में सहायता ही करेगा | जातक के जीवन में इस समय समस्याएँ आ सकती हैं किन्तु अपने बुद्धिबल से तथा अपने पिता की सहायता से वह इन समस्याओं से मुक्ति भी प्राप्त करने में सक्षम हो सकता है | तो, इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्य के विभिन्न राशियों के जातकों के लिए क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं :-

मेष : मेष राशि के लिए सूर्य पंचमेश होकर दशम भाव में गोचर कर रहा है | दशम भाव व्यवसाय का / नौकरी का भाव होता है | पंचमेश का दशम भाव में गोचर निश्चित रूप से इस भाव को बली बना रहा है | आपके कार्य में प्रगति के साथ साथ सामाजिक स्तर पर भी आपके सम्मान में वृद्धि की सम्भावना है | क्योंकि दशम भाव पंचम से छठा भाव हो जाता है इसलिए सम्भव है कार्यक्षेत्र में आपको किसी प्रकार के विरोध अथवा नकारात्मकता का भी सामना करना पड़ जाए | 24 जनवरी के बाद से स्थितियों में सुधार की सम्भावना है | आपकी बुद्धि और दृढ़ इच्छाशक्ति आपको विरोधियों को परास्त करने में सहायक होंगे और आप स्वयं अपने लिए आगे बढ़ने का मार्ग निकाल सकेंगे | प्रातः सूर्य को अर्घ्य समर्पित करना आपके हित में रहेगा |

वृषभ : आपका चतुर्थेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपना लक्ष्य अधिक निकट प्रतीत होगा और आपमें उस तक पहुँचने का उत्साह भी बढ़ेगा | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किसी भी महत्त्वपूर्ण विषय में निर्णय लेने से पूर्व उसके हर पक्ष पर भली भाँति निर्णय करेंगे तो सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं | यदि कहीं आपका पैसा अटका हुआ है और आप उसे भूल गए हैं तो अचानक ही आपको उस धन की प्राप्ति हो सकती है | आप कोई नई प्रॉपर्टी भी ख़रीद सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए सूर्य का मकर राशि में संचार बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | पित्त सम्बन्धी अथवा जोड़ों में दर्द या ज्वर आदि की समस्याएँ हो सकती हैं | जो कुछ भी करें भली भाँति सोच विचार कर करें | कुछ छिपे हुए विरोधी इस अवधि में मुखर हो सकते हैं जिनके कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | छोटे भाई बहनों के साथ किसी विवाद में भी फँस सकते हैं | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस हो सकती है | किन्तु सन्तान की शिक्षा के विषय में कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

कर्क : आपके लिए सूर्य द्वितीयेश होकर सप्तम भाव में गोचर कर रहा है जो दूसरे भाव से छठा भाव हो जाता है | अर्थात अपने से छठे भाव में गोचर कर रहा है | आपके स्वभाव में चिडचिडापन आ सकता है | आपके तथा आपके जीवन साथी के सम्बन्धों में किसी प्रकार का अहम् आड़े आ सकता है | पार्टनरशिप में कार्य कर रहे हैं तो वहाँ भी आपके अपने चिडचिडेपन के कारण किसी प्रकार की बहस हो सकती है | आपके जीवन साथी अथवा परिवार में किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है | किन्तु इसके साथ साथ आपके व्यवसाय में प्रगति की भी सम्भावनाएँ हैं | सम्भव है कोई नया प्रोजेक्ट भी आपको प्राप्त हो जाए | राजनीति में हैं तो आपको कोई पदभार भी सौंपा जा सकता है |

सिंह : आपकी लग्न का स्वामी होकर सूर्य छठे भाव में गोचर कर रहा है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं | अतः यदि हल्का सा भी बुख़ार अथवा सरदर्द आदि हो तो तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लें | आपके स्वभाव में कुछ अधिक तेज़ी आ सकती है | साथ ही व्यावसायिक रूप से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप पहले से कहीं अधिक प्रयत्नशील हो सकते हैं जिस कारण से अपना कार्य समय पूर्ण कर पाने में भी सफल हो सकते हैं | कोई कोर्ट केस भी चिन्ता का विषय हो सकता है | स्पोर्ट्स में हैं तो सावधानीपूर्वक खेलें अन्यथा किसी दुर्घटना के भी शिकार होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा शिक्षा की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | उच्च शिक्षा के लिए अथवा किसी अन्य कार्य के लिए आप कहीं विदेश के लिए भी प्रस्थान कर सकते हैं अथवा उसके लिए तैयारी कर सकते हैं | ऐसा करना आपके हित में रहेगा तथा नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो अपने अधिकारियों के साथ आपके सम्बन्धों में घनिष्ठता आ सकती है | सन्तान की शिक्षा में समस्या आ सकती है | यदि सन्तान विदेश में कहीं है तो घर भी वापस आ सकती है जो उसके हित में होगा |

तुला : एकादशेश होकर सूर्य आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर आपके अनुकूल प्रतीत होता है | हाँ आपके स्वभाव में चिडचिडापन बढ़ सकता है जिसके कारण पारिवारिक और व्यावसायिक स्तरों पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अतः अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए प्राणायाम तथा ध्यान आदि का सहारा लें तो अच्छा रहेगा | अपने किसी अधिकारी के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | घर को रेनोवेट करा सकते हैं |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके तृतीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके आत्मविश्वास में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य स्थल में साथियों के साथ अथवा छोटे भाई बहनों के साथ व्यर्थ की बहस भी हो सकती है जो मानसिक तनाव का कारण बन सकती है | आपके किसी कार्य के पूर्ण होने की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आप कोई नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं जो आपके लिए आर्थिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है |

धनु : नवमेश होकर सूर्य आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | यद्यपि यह नवम भाव से छठा भाव बनता है, किन्तु फिर भी धनु राशि के लिए सूर्य का ये गोचर आर्थिक रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किसी सरकारी तन्त्र से भी आर्थिक लाभ की सम्भावना है | यदि सरकारी नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना को जा सकती है | अपना व्यवहार दूसरों के साथ उचित रखेंगे तो सम्बन्धों में कड़वाहट से बच सकते हैं | आँखों में किसी प्रकार की समस्या हो सकती है | डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें |

मकर : अष्टमेश होकर सूर्य आपकी लग्न में गोचर कर रहा है | आपको हल्के ज्वर, पित्त अथवा सरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | यदि आपने अपने व्यवहार को सही नहीं रखा तो सम्बन्धों में कटुता का भी सामना करना पड़ सकता है | आपके अपने अहम् के कारण जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में कड़वाहट आ सकती है | आपका कोई पुराना रहस्य भी इस अवधि में सामने आ सकता है जो आपके हित में नहीं होगा |

कुम्भ : सप्तमेश का द्वादश भाव में गोचर हो रहा है | सम्भव है आपको इस पूरी अवधि में लम्बी यात्राएँ करनी पड़ जाएँ | सम्भव है जीवन साथी के साथ विदेश यात्रा की योजना आप बना लें जो न केवल आपके लिए आमोद प्रमोद का साधन होगी बल्कि वापस लौटने पर आप स्वयं में एक नवीन स्फूर्ति का भी अनुभव करेंगे | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उस पार्टनरशिप के टूटने की सम्भावना है | यदि कोई प्रेमप्रसंग चल रहा है तो उसमें भी अलगाव हो सकता है | जीवन साथी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मीन : सूर्य का मकर राशि में गोचर आपके उत्साह में तथा कार्यक्षमता में वृद्धि का सूचक है जिसके कारण आपके कार्य में प्रगति तथा आपके यश में वृद्धि की सम्भावना है और अर्थलाभ की भी सम्भावना है | यह गोचर आपको अन्तर्मुखी भी बना सकता है तथा स्वार्थी भी | आपकी भेंट किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जो बहुत अधिक प्रभावशाली होगा और भविष्य में उसके द्वारा आपको लाभ भी हो सकता है | आपके विरोधी शान्त होंगे और यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी अनुकूल परिणाम की आशा की जा सकती है | ज्वर अथवा सरदर्द सम्बन्धी समस्याओं से आप परेशान हो सकते हैं |

जैसा कि ऊपर लिखा, मकर राशि में भ्रमण करते हुए भगवान भास्कर निरन्तर ऊर्ध्वमुखी नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे, और लगभग 25 दिन कफ प्रकृति के नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे | इसका सामान्य अर्थ यह होता है कि जन साधारण में कफ की प्रधानता रह सकती है तथा अधिकाँश लोग प्रगति के पथ पर अग्रसर रह सकते हैं | वैसे भी सूर्य का उत्तरायण प्रस्थान वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से बहुत उत्तम माना जाता है | अतः सूर्य या किसी भी अन्य ग्रह के किसी विशिष्ट राशि में संचार के क्या फल हो सकते हैं इसका विस्तृत अध्ययन तो एक Astrologer व्यक्ति विशेष की कुण्डली समग्र अध्ययन करने के बाद ही बता सकता है | यहाँ तो केवल सामान्य परिणामों के विषय में ही लिखा जा सकता है |

अन्त में, सभी आदित्यगण हम सबके हृदयों से अज्ञान का अन्धकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रसारित करें, हम सबके विचारों में सकारात्मकता का संचार करें और हमारी रचनाधर्मिता में वृद्धि करते हुए हम सबको सुखी, स्वस्थ तथा ऊर्ध्वमुखी अर्थात प्रगतिशील बनाए रखें…

ॐ घृणिः सूर्य आदित्य नमः ॐ

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/14/sun-transit-in-capricorn/

 

मकर संक्रान्ति

ॐ घृणि: सूर्य आदित्य नम: ॐ

आज रात्रि सात बजकर पावन मिनट के लगभग भगवान भास्कर गुरुदेव की धनु राशि से निकल कर महाराज शनि की मकर राशि में गमन करेंगे और इसके साथ उत्तर दिशा की ओर उनका प्रस्थान आरम्भ हो जाएगा | और कल यानी 15 जनवरी – मकर संक्रान्ति को सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का पर्व मनाया जाएगा | पुण्यकाल कल प्रातः सूर्योदय के समय यानी सात बजकर पन्द्रह मिनट से आरम्भ होकर सूर्यास्त यानी सायं पाँच बजकर पैतालीस मिनट तक रहेगा | साथ ही इस वर्ष मकर संक्रान्ति से ही प्रयागराज में अर्द्धकुम्भ का मेला भी आरम्भ होने जा रहा है | संक्रान्ति शब्द का अर्थ है संक्रमण करना – प्रस्थान करना | इस प्रकार किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि पर गोचर अथवा संक्रमण संक्रान्ति ही होता है | किन्तु सूर्य का संक्रमण सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है | नवग्रहों में सूर्य को राजा माना जाता है तथा सप्ताह के दिन रविवार का स्वामी रवि अर्थात सूर्य को ही माना जाता है | सूर्य का शाब्दिक अर्थ है सबका प्रेरक, सबको प्रकाश देने वाला, सबका प्रवर्तक होने के कारण सबका कल्याण करने वाला | यजुर्वेद में सूर्य को “चक्षो सूर्योSजायत” कहकर सूर्य को ईश्वर का नेत्र माना गया है | सूर्य केवल स्थूल प्रकाश का ही संचार नहीं करता, अपितु सूक्ष्म अदृश्य चेतना का भी संचार करता है | यही कारण है कि सूर्योदय के साथ ही समस्त जड़ चेतन जगत में चेतनात्मक हलचल बढ़ जाती है | इसीलिए ऋग्वेद में आदित्यमण्डल के मध्य में स्थित सूर्य को सबका प्रेरक, अन्तर्यामी तथा परमात्मस्वरूप माना गया है – सूर्यो आत्मा जगतस्य…”

वेद उपनिषद आदि में सूर्य के महत्त्व के सम्बन्ध में अनेकों उक्तियाँ उपलब्ध होती हैं | जैसे सूर्योपनिषद का एक मन्त्र है “आदित्यात् ज्योतिर्जायते | आदित्याद्देवा जायन्ते | आदित्याद्वेदा जायन्ते | असावादित्यो ब्रह्म |” अर्थात आदित्य से प्रकाश उत्पन्न होता है, आदित्य से ही समस्त देवता उत्पन्न हुए हैं, आदित्य ही वेदों का भी कारक है और इस प्रकार आदित्य ही ब्रह्म है | अथर्ववेद के अनुसार “संध्यानो देवः सविता साविशदमृतानि |” अर्थात् सविता देव में अमृत तत्वों का भण्डार निहित है | तथा “तेजोमयोSमृतमयः पुरुषः |” अर्थात् यह परम पुरुष सविता तेज का भण्डार और अमृतमय है | इत्यादि इत्यादि

छान्दोग्योपनिषद् में सूर्य को प्रणव माना गया है | ब्रह्मवैवर्तपुराण में सूर्य को परमात्मा कहा गया है | गायत्री मन्त्र में तो है ही भगवान् सविता की महिमा का वर्णन – सूर्य का एक नाम सविता भी है – सविता सर्वस्य प्रसविता – सबकी सृष्टि करने वाला – यही त्रिदेव के रूप में जगत की रचना, पालन तथा संहार का कारण है | आत्मा का कारक, प्राणों का कारक, जीवनी शक्ति का – ऊर्जा का कारक सूर्य ही माना जाता है | यही कारण है कि सूर्य की संक्रान्ति का सबसे अधिक महत्त्व माना जाता है | सूर्योपासना से न केवल ऊर्जा, प्रकाश, आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य आदि की उपलब्धि होती है बल्कि एक साधक के लिए साधना का मार्ग भी प्रशस्त होता है |

सूर्य को एक राशि से दूसरी राशि पर जाने में पूरा एक वर्ष का समय लगता है – और यही अवधि सौर मास कहलाती है | वर्ष भर में कुल बारह संक्रान्तियाँ होती हैं | आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, उडीसा, पंजाब और गुजरात में संक्रान्ति के दिन ही मास का आरम्भ होता है | जबकि बंगाल और असम में संक्रान्ति के दिन महीने का अन्त माना जाता है | यों तो सूर्य की प्रत्येक संक्रान्ति महत्त्वपूर्ण होती है, किन्तु मेष, कर्क, धनु और मकर की संक्रान्तियाँ विशेष महत्त्व की मानी जाती हैं | इनमें भी मकर और कर्क की संक्रान्तियाँ विशिष्ट महत्त्व रखती हैं – क्योंकि इन दोनों ही संक्रान्तियों में ऋतु परिवर्तन होता है | कर्क की संक्रान्ति से सूर्य का दक्षिण की ओर गमन आरम्भ माना जाता है जिसे दक्षिणायन कहा जाता है और मकर संक्रान्ति से सूर्य का उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान आरम्भ हो जाता है – जिसे उत्तरायण कहा जाता है | मकर संक्रान्ति से शीत का प्रकोप धीरे धीरे कम होना आरम्भ हो जाता है और जन साधारण तथा समूची प्रकृति सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उल्लसित हो नृत्य करना आरम्भ कर देती है | पृथिवी को सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में मिलना आरम्भ हो जाता है जिसके कारण दिन की अवधि भी बढ़ जाती है और शीत के कारण आलस्य को प्राप्त हुई समूची प्रकृति पुनः कर्मरत हो जाती है | इसलिए इस पर्व को अन्धकार से प्रकाश की ओर गमन करने का पर्व तथा प्रगति का पर्व भी कहा जाता है |

अस्तु, सभी को मकर संक्रान्ति, पोंगल, लोहड़ी तथा माघ बिहू की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है वर्ष 2019 के लिए बारह संक्रान्तियों की सूची…सूर्य संक्रान्ति

मंगलवार, 15 जनवरी       मकर संक्रान्ति       सूर्य का मकर राशि में गोचर

बुधवार, 13 फरवरी         कुम्भ संक्रान्ति      सूर्य का कुम्भ राशि में गोचर

शुक्रवार, 15 मार्च          मीन संक्रान्ति       सूर्य का मीन राशि में गोचर

रविवार, 14 अप्रेल          मेष संक्रान्ति        सूर्य का मेष राशि में गोचर

बुधवार, 15 मई           वृषभ संक्रान्ति       सूर्य का वृषभ राशि में गोचर

शनिवार, 15 जून          मिथुन संक्रान्ति      सूर्य का मिथुन राशि में गोचर

मंगलवार, 16 जुलाई        कर्क संक्रान्ति       सूर्य का कर्क राशि में गोचर

शनिवार, 17 अगस्त        सिंह संक्रान्ति       सूर्य का सिंह राशि में गोचर

मंगलवार, 17 सितम्बर     कन्या संक्रान्ति      सूर्य का कन्या राशि में गोचर

शुक्रवार, 18 अक्टूबर       तुला संक्रान्ति       सूर्य का तुला राशि में गोचर

रविवार, 17 नवम्बर        वृश्चिक संक्रान्ति     सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर

सोमवार, 16 दिसम्बर       धनु संक्रान्ति        सूर्य का धनु राशि में गोचर

भगवान भास्कर का प्रत्येक राशि में संक्रमण समस्त चराचर प्रकृति को ऊर्जा प्रदान करते हुए जन साधारण के जीवन को ज्ञान, सुख-समृद्धि, उल्लास तथा स्नेह की ऊर्जा से परिपूर्ण करे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/01/14/sankranti-2019-and-makar-sankranti/

 

गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मकर राशि पर सम्भावित प्रभाव

आप सभी जानते हैं कि 11 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

आपकी राशि के लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर गुरु का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है जहाँ से उनकी दृष्टियाँ आपके तीसरे भाव, पंचम भाव और सप्तम भाव पर आ रही हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी मनचाहे स्थान पर ट्रांसफर होने की भी सम्भावना है | यह स्थानान्तरण आपके लिए भाग्यवर्द्धक सिद्ध हो सकता है | भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही आपको अपने भाई बहनों का तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग भी प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने परिश्रम का लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है और कोई मनोनुकूल नौकरी आपको प्राप्त हो सकती है | विदेश से यदि आपका कार्य सम्बद्ध है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना है | आय के नवीन स्रोत आपके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक सुदृढ़ हो सकती है | किन्तु साथ ही खर्चों में भी वृद्धि की सम्भावना है | आप मित्रों के साथ सैर सपाटे और मनोरंजन में अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं |

आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है और उसकी ओर से कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | साथ ही यदि सन्तान प्राप्ति का प्रयास कर रहे हैं तो उसमें भी सफलता इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि उच्च शिक्षा के लिए कहीं एडमीशन के प्रयास में हैं उसमें भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है |

अविवाहित हैं और कहीं प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो इस अवधि में वह सम्बन्ध भी विवाह बन्धन में परिणत हो सकता है | प्रेम सम्बन्धों और विवाह आदि के लिए गोचर भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य तथा अन्तरंगता बनी रहने की भी सम्भावना है |

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए नियमित डॉक्टर से चेकअप तथा सन्तुलित आहार और व्यायाम आदि की आवश्यकता भी होती है इतना अवश्य स्मरण रखिये |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/17/jupiter-transit-in-scorpio-for-capricorn/