मदर्स डे

आज “मात्तृ दिवस” है… सभी माताओं और उनकी सन्तानों को हार्दिक शुभकामनाएँ… मेरी अपनी माँ के साथ साथ संसार की हर माँ को कोटि कोटि नमन के साथ समर्पित कुछ पंक्तियाँ… केवल “मदर्स डे” के औपचारिक अवसर पर ही नहीं, हर दिन… हर पल…

सताती है तुम्हारी याद हर पल – प्रतिपल

काश एक बार फिर तुम्हारी गोदी में सर रखकर सो पाती

बालों में फिराती तुम अपनी खुरदुरी अँगुलियों में प्यार की स्निग्धता भर…

न जाने कितने आँसू छिपाए अपने दामन में

पर बना लेती उन्हीं आँसू की बूँदों को अमृत रस धारा…

मेरी हर आवश्यकता पूर्ण होती थी तुम्हीं से

क्योंकि तुम ही थीं मेरे जीवन का सत्य,

मैं तो मात्र तुम्हारी छाया हूँ

बिना तुम्हारे होता क्या अस्तित्व मेरा…

घोर निराशा जो मन को उद्विग्न बनाती

तुम आशा दीप जलाए सदा सम्मुख होतीं…

मेरी हर धड़कन की लय में तुम गीत बनीं घुल मिल जातीं…

मेरे दुःख में, मेरे सुख में, तुम सदा साथ मेरे रहतीं…

स्नेह त्याग और एकनिष्ठता की साक्षात प्रतिमूर्ति तुम

राह भटक जाने पर स्नेहिल बाँहों में थाम

प्रयासरत रहतीं मुझे सही मार्ग दिखाने को

बन जातीं खुद दीपक / करने को प्रकाशित करतीं मेरी राहें…

मैं कभी अगर बैठ जाती थक कर

तब साथ चलतीं तुम साहस बनी

भर लेतीं मेरे मग के हर कंटक को आँचल में अपने…

तुमने ही तो सौन्दर्य दिया मिट्टी की इस काया को

सींच कर अपनी ममता से…

नहीं चुका सकती क़र्ज़ तुम्हारा / क्योंकि जानती हूँ

अभी भी नहलाती हो तुम अपने आशीषों से

दूर गगन में बैठी / झाँकती हुई तारों के मध्य से…

साथ न होते हुए भी कराती हो अहसास

स्नेहमयी उपस्थिति का अपनी

क्योंकि समाई हुई हो तुम मुझमें ही…

जीवन के मधुर पलों की पुनरावृत्ति तुम

अपरिमित नेह सुगन्ध लिए निज आँचल में

प्रवाहित करती रहती हर पल अपनी ममता की अमृत धरा

लुटाती रहती हो शक्ति और करुणा हर पल

बिना किसी प्रतिदान की अपेक्षा के / बिना माप तौल किये

बस बरसाती जाती हो स्नेह जल

कोटि कोटि नमन है माँ तुम्हें… सदा सर्वदा नमन तुम्हें है…

 

 

 

 

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मदर्स डे

कल मातृ दिवस यानी “मदर्स डे” है | इसलिए आज का हमारा ब्लॉग समर्पित है मातृ शक्ति  | यों भारत जैसे परम्पराओं का निर्वाह करने वाले देश में ऐसे बहुत सारे पर्व आते हैं जो केवल और केवल मातृ शक्ति को ही समर्पित होते हैं, जिनमें सर्वप्रथम तो जितने भी देवता हैं उन सबकी पूजा उनकी देवियों के साथ ही होती है – जो प्रतीक है इस बात का कि मातृ शक्ति जब तक साथ न हो तब तक कुछ भी पूर्ण नहीं | इसके अतिरिक्त वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्र सबसे अधिक प्रमुख हैं | माँ भगवती की पूजा उपासना वास्तव में मात्तृ शक्ति का ही सम्मान है, साथ ही इस बात का संकेत भी है कि परिवर-समाज-देश की हर नारी को माँ भगवती के तीनों रूपों – सरस्वती-लक्ष्मी-दुर्गा जैसी ही बुद्धिमती, आर्थिक रूप से स्वावलम्बी तथा सशक्त होना आवश्यक है | इस प्रकार माताओं का सम्मान तो इस देश के कण कण में घुला मिला है | लेकिन फिर भी, इस तरह के “मदर्स डे” आदि के आयोजनों द्वारा वैश्विक स्तर पर एक दिन केवल माँ के लिए समर्पित करके माँ के उपकारों का स्मरण वास्तव में एक आनन्द और प्रेरणादायक प्रयास है, इसलिए स्वागत है “मदर्स डे” का, सभी माताओं को हृदय से नमन करते हुए मेरी अपनी माँ के साथ संसार की सभी माताओं को समर्पित हैं ये पंक्तियाँ… क्योंकि हम मातृशक्ति का सम्मान करेंगे तो समस्त ब्रह्माण्ड –  समस्त ग्रह नक्षत्र हमारे अनुकूल रहेंगे, ऐसी मेरी मान्यता है… पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें…

 

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/05/12/mothers-day/