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शुक्र का मिथुन में गोचर

शुक्र का मिथुन में गोचर 

आज यानी 28 जून को 25:34 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर चौंतीस मिनट) के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपनी स्वयं की राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह बुध की मिथुन राशि में प्रस्थान करेगा | इस प्रस्थान के समय आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि, बालव करण और धृति योग होगा तथा शुक्र इस समय मृगशिरा नक्षत्र में होगा और सूर्य, शनि तथा राहू-केतु के प्रभाव में रहेगा | इनमें शनि और शुक्र एक दूसरे के लिए योगकारक ग्रह हैं तथा सूर्य के साथ इसकी शत्रुता है | मिथुन राशि में संचार करते हुए चार जुलाई को आर्द्रा नक्षत्र तथा पन्द्रह जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तेईस जुलाई को मध्यरात्रि बारह बजकर पचास मिनट के लगभग अपने शत्रु ग्रह चन्द्रमा की कर्क राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | मिथुन राशि में संचार की इस अवधि में शुक्र नौ जुलाई को अस्त भी हो जाएगा | मिथुन राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से दूसरा भाव तथा तुला से नवम भाव बनता है | अतः इन दोनों राशियों के लिए तो यह गोचर अनुकूल ही प्रतीत होता है | इन्हीं सब आधारों पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के मिथुन में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है जहाँ आपका पंचमेश पहले से विराजमान है | आपकी बुद्धि इस अवधि में तीव्र रहेगी तथा आपकी लेखन क्षमता में इस अवधि में निखार आने की सम्भावना है | आपकी वाणी इस समय प्रभावशाली रहेगी और आपके लेखन तथा आपकी वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | अविवाहित हैं तो आप Romantically किसी के साथ Involve हो सकते हैं जो आपके लिए अनुकूल हो सकता है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है | धार्मिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आपकी वाणी का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा अतः इस समय का लाभ उठाएँ | किन्तु साथ ही जो भी बोलेन सोच समझ कर ही बोलें | किसी की निन्दा अथवा बिना माँगे किसी को सलाह देना आपके लिए घातक भी सिद्ध हो सकता है | परिवार में किसी माँगलिक कार्य के संपन्न होने की सम्भावना के साथ ही पारिवारिक क्लेश की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही खान पान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है | विशेष रूप से महिलाओं को अपनी Gynaecologist से Regular Check-up कराते रहना चाहिए |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके तृतीयेश के साथ आपकी राशि में ही हो रहा है | आप स्वयं अथवा आपकी सन्तान कहीं बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जा सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है तथा उनका सहयोग भी आपको उपलब्ध रहेगा, किन्तु उनके साथ किसी भी विवाद से बचने की आवश्यकता है | सन्तान के साथ सम्बन्धों में मधुरता बनी रहने की सम्भावना है | आप अपने बनाव श्रृंगार की ओर पहले से अधिक ध्यान देना आरम्भ कर सकते हैं | सन्तान तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | आपको किसी प्रकार के तनाव के कारण माइग्रेन अथवा गर्मी या पित्त से सम्बन्धित कोई समस्या हो सकती है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | यदि आपका कार्य कहीं विदेश से सम्बन्धित है तो किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आप अपना वर्तमान निवास बेचकर नया घर खरीदने की योजना भी बना सकते हैं | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे जहाँ आपकी कला की प्रशंसा के साथ ही आपको आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | अपनी माता जी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में आपके राश्यधिपति के साथ ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, गीत-संगीत-नृत्य के कलाकार हैं अथवा किसी प्रकार की Alternative healing therapy से आपका सम्बन्ध है या आप मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे तथा आपके कार्य की प्रशंसा होगी | सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं अथवा ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय है या Cosmetic Dentist हैं तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अपने कार्य में आपको सहकर्मियों तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र दशम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | आवश्यकता है अपनी अन्तर्मुखी प्रवृत्ति तथा आलस्य का त्याग करके Active हो जाने की | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते है | किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | इसके अतिरिक्त विरोधियों को भी पहचान कर उनसे दूरी बनाकर चलने की आवश्यकता है | आपकी रूचि धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ सकती है, किन्तु पोंगा पण्डितों को पहचान कर उनसे बचने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | गर्भवती महिलओं को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अन्य ग्रहों की युति और दृष्टियाँ भी इस प्रकार की हैं कि आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | विशेष रूप से आपको अपने तथा अपने जीवां साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर अप्रत्याशित व्यय की भी सम्भावना है | अतः नियमित रूप से चेकअप कराने तथा खान पान के प्रति सजग रहने की स्स्वश्यकता है | इसके अतिरिक्त यात्राओं के योग हैं, किन्तु यदि इन यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकते हैं तो आपके लिए उचित रहेगा | यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | Drive करते समय सावधान रहें |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपके सप्तम भाव में अपनी ही राशि में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है तथा उसके माध्यम से भी आपको अर्थलाभ भी हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | आपके जीवन साथी के लिए भी कार्य में लाभ की सम्भावना है | मित्रों, जीवन साथी तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | किन्तु जीवन साथी का Temperament किसी कारणवश अनियन्त्रित हो सकता है | अतः किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना से बचने के लिए आपके लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखना आवश्यक है |

मकर : आपका योगकारक आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं | एक ओर जहाँ आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर अत्यधिक अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप यदि वर्तमान कार्य छोड़कर कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने स्टाफ में नई नियुक्तियाँ भी कर सकते हैं | किन्तु सम्बन्धित व्यक्तियों के Documents की अच्छी तरह जाँच पड़ताल अवश्य कर लें | सहकर्मियों के साथ कुछ उपहार आदि का आदान प्रदान भी इस अवधि में सम्भव है |

कुम्भ : आपका भी योगकारक शुक्र आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान के लिए अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किन्तु सन्तान के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता होगी | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन – जैसे बच्चे का जन्म आदि – भी हो सकता है | आप नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा वर्तमान निवास को ही Renovate करा सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके लिए पारिवारिक दृष्टि से यह गोचर बहुत अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | किन्तु अपनी माता जी अथवा परिवार किसी बड़ी महिला सदस्य की मध्यस्थता से आप वह विवाद सुलझा सकते हैं | यदि नया घर अथवा वाहन खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | साथ ही परिवार के लोगों का – विशेष रूप से अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/28/venus-transit-in-gemini/

 

सूर्य का मिथुन में गोचर

सूर्य का मिथुन में गोचर

आज सायं पाँच बजकर उन्तालीस मिनट के लगभग भगवान भास्कर अपने शत्रु गृह शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर बुध की मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे, जहाँ उनके लिए विचित्र परिस्थिति बनी हुई है | एक ओर उनका मित्र ग्रह मंगल वहाँ गोचर कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर एक शत्रु ग्रह राहु का गोचर भी वहाँ चल रहा है | साथ ही शनि और केतु इन दो शत्रु ग्रहों की दृष्टियाँ भी मिथुन राशि पर हैं | मिथुन राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से एकादश और सूर्य की उच्च राशि मेष से तीसरे भाव में आती है | आत्मा का कारक सूर्य इस समय मृगशिर नक्षत्र पर हैं, तथा यहाँ से 22 जून को आर्द्रा, 6 जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्रों पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 जुलाई को सूर्योदय से कुछ पूर्व 4:34 के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के समय गर करण और सिद्ध नक्षत्र होगा | पृथिवी तत्त्व युक्त मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है तथा यह समानान्तर चलने वाला पित्त प्रकृति का धैर्यवान नक्षत्र है | आर्द्रा ऊर्ध्वमुखी तीक्ष्ण और वात प्रकृति का जल तत्त्व युक्त स्त्री नक्षत्र है तथा राहु इसका देवता है | पुनर्वसु सहनशील तथा रचनाधर्मिता युक्त समानान्तर चलने वाला वात प्रकृति का सात्विक चर पुरुष नक्षत्र है और इसका देवता है गुरु | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि मिथुन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके तथा आपके भाई बहनों के लिए कार्य में उन्नति के योग हैं | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | किसी घनिष्ठ मित्र अथवा भाई बहनों के सहयोग से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | किन्तु आलस्य का त्याग करके अधिक श्रम तथा प्रयास करने की आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद की सम्भावना को भी नकारा नहीं जा सकता | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है | प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में लाभ की आशा की जा सकती है | यदि आप अपने लिए नई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपका वह सपना भी पूर्ण हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित Documents का भली भाँती निरीक्षण आवश्यक है | साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि के भी संकेत हैं | किन्तु माइग्रेन, ज्वर, पित्त आदि से सम्बन्धित समस्याएँ हो सकती हैं अतः गर्मी से बचने का प्रयास करें और अधिक मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करें |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपकी लग्न में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | साथ ही यदि आपने अपने Temperament को नियन्त्रण में नहीं रखा तो वैवाहिक जीवन में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है |

कर्क : आपके द्वितीयेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपको कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है – विशेष रूप से आँखों के इन्फेक्शन के प्रति सावधान रहें | खर्च में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः बजट बनाकर चलेंगे तो आपके लिए हित में रहेगा | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है, वास्तव में आपके कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छे संकेत प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | कोई नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | विदेश में निवास कर रहे आपके मित्रों की ओर से आपको सहयोग प्राप्त हो सकता है | किन्तु अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता होगी |

तुला : आपका एकादशेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से भाग्योन्नति का समय प्रतीत होता है | सुख समृद्धि में वृद्धि के संकेत हैं | जिन जातकों का कार्य विदेश से किसी प्रकार सम्बद्ध है उनके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी संकेत हैं | अतः अवसर का लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या चल रही है तो उससे भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक दृष्टि से तो समय अनुकूल है किन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से समय उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | गुप्त शत्रुओं के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य समस्याओं तथा विरोधियों के कारण आप अपने मनोबल में भी कमी का अनुभव कर सकते हैं |

धनु : आपका भाग्येश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | जो लोग पॉलिटिक्स से जुड़े हैं उनके लिए भी समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों के लिए समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के उग्र स्वभाव के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अपने व्यवहार को सन्तुलित रखने के लिए प्राणायाम और ध्यान का सहारा लीजिये |

मकर : आपका अष्टमेश छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर विदेश यात्राओं के योग हैं तो वहीं दूसरी ओर कार्य की दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप इस समय अपने प्रतियोगियों को परास्त करने में सक्षम हैं इसलिए अवसर का लाभ उठाकर अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर होना ही उचित रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी इस अवधि में ठीक हो जाने की सम्भावना है |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए सूर्य का यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | व्यावसायिक रूप से आपके कार्य में तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश भी जा सकती है और यदि नौकरी की तलाश में है तो वह भी पूर्ण हो सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

मीन : षष्ठेश का चतुर्थ भाव में गोचर है | आप अथवा आपका जीवन साथी यदि नया वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो अभी उस विचार को स्थगित करना ही उचित रहेगा | साथ ही परिवार में किसी प्रकार का मनमुटाव भी हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद भी प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/15/sun-transit-in-gemini/

 

 

बुध का मिथुन में गोचर

बुध का मिथुन में गोचर

कल शनिवार रविवार यानी ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी अर्थात 1 जून को 24:17 (मध्यरात्रि में 12:17) के लगभग विष्टि करण और अतिगण्ड योग में बुध अपने मित्र शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर अपनी स्वयं की राशि मिथुन में प्रविष्ट होगा | मिथुन राशि में प्रवेश के समय बुध मृगशिरा नक्षत्र में होगा तथा कुछ समय के लिए अस्त भी होगा, किन्तु दो जून को रात्रि नौ बजकर एक मिनट के लगभग बुधोदय हो जाएगा | यहाँ भ्रमण करते हुए पाँच जून को आर्द्रा नक्षत्र और तेरह जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में इक्कीस जून को 26:27 (अर्धरात्र्योत्तर 2:27) के लगभग बुध कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | जैसा कि ऊपर लिखा, मिथुन बुध की स्वराशि है तथा बुध की उच्च राशि और मूल त्रिकोण राशि कन्या से मिथुन राशि दशम भाव यानी कर्म स्थान बनता है | ध्यान देने योग्य बात यह है कि मंगल और राहु यहाँ पहले से गोचर कर रहे हैं | बुध की अपनी राशि मिथुन से मंगल षष्ठेश और एकादशेश है तथा बुध की उच्च राशि कन्या से मंगल तृतीयेश और अष्टमेश है | इन समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष – आपके लिए तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध का गोचर आपके तृतीय भाव में अपनी ही राशि में हो रहा है | आपके लिए पहले से कहीं अधिक Competitive हो सकते हैं तथा आपकी निर्णायक क्षमता और उत्साह में वृद्धि की भी सम्भावना है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही ऐसे मित्रों को पहचान कर उनसे दूरी बनाने की भी आवश्यकता है जो आपसे ईर्ष्या रखते हैं | सम्भावना कुछ ऐसी भी प्रतीत होती है कि आवश्यकता होने पर भाई बहनों का सहयोग प्राप्त हो सकता है | यद्यपि कुछ विवाद भी सम्भव है, किन्तु अन्त में परिणाम आपके पक्ष में ही होगा | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ – आपका द्वितीयेश और पंचमेश होकर बुध का गोचर आपके दूसरे भाव में ही हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से अनुकूलता होने के साथ ही आपकी वक्तव्यता तथा आपके लेखन में निखार इस अवधि में आ सकता है जिसके कारण आपसे लोग प्रभावित भी होंगे | आपके व्यवहार में उदारता, कोमलता एवं सौम्यता दिखाई देगी जिसका प्रभाव आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर निश्चित ही पड़ेगा | आपकी सन्तान के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन – आपके लिए बुध योगकारक होकर अपनी ही राशि में लग्न में गोचर कर रहा है | परिवार में मंगलकार्यों का आयोजन हो सकता है | परिवार में परस्पर सौहार्द का वातावरण रहेगा और समय आमोद प्रमोद में व्यतीत होगा | सामाजिक गतिविधियों में भी वृद्धि की भी सम्भावना है | परिवारजनों का सहयोग आपको अपने कार्य में उपलब्ध होता रहेगा | साथ ही आप अपने लिए कोई नई प्रॉपर्टी भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क – कर्क राशि के लिए तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध का गोचर आपके बारहवें भाव में ही हो रहा है | भाई बहनों का सहयोग भी अपने कार्य में आपको प्राप्त रहने की सम्भावना है | कार्य के सिलसिले में आपको तथा आपके भाई बहनों को दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने तथा अपने भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा | साथ ही आप अपने कार्य में पैसा भी Invest कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको भविष्य में अपने कार्य में प्राप्त हो सकता है |

सिंह – आपके लिए बुध द्वितीयेश और एकादशेश होकर आपके एकादश में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए विशेष रूप से भाग्योदय का समय प्रतीत होता है | व्यवसाय में प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा अर्थ और यश प्राप्ति के संकेत हैं | साथ ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है | बड़े भाई तथा पिता का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आप परिवार के साथ कहीं यात्रा आदि के लिए भी जा सकते हैं |

कन्या – आपके लिए आपका लग्नेश तथा दशमेश होकर बुध योगकारक ग्रह है तथा दशम स्थान में गोचर कर रहा है | आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग हैं | समाज में आपका मान-सम्मान तथा प्रभाव में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त होते रह सकते हैं और आप लम्बे समय तक उनमें व्यस्त रह सकते हैं तथा उनके माध्यम से धनलाभ कर सकते हैं | किन्तु यदि आपने अपने कण और आँख खुले नहीं रखे तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा भाई ही आपके कार्य में विघ्न का कारण बन सकता है |

तुला – आपके लिए बुध भाग्येश तथा द्वादशेश भाग्य स्थान में ही गोचर कर रहा है | लम्बी विदेश यात्राओं के संकेत प्रतीत होते हैं | साथ ही यदि आपका कार्य किसी रूप में विदेशों से सम्बन्धित है तो उसमें उन्नति की भी सम्भावनाएँ हैं | इसके अतिरिक्त धर्म तथा आध्यात्मिकता की ओर आपकी रूचि बढ़ सकती है | आप किसी धार्मिक संस्था अथवा अस्पताल आदि के लिए धन दान भी करने की योजना बना सकते हैं | किन्तु पोंगा पण्डितों को पहचान कर उनसे बचने की आवश्यकता है अन्यथा बहुत सा धन अनावश्यक ही खर्च हो सकता है |

वृश्चिक – आपके लिए बुध अष्टमेश और एकादशेश है तथा आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कहीं से आकस्मिक लाभ की सम्भावना है | व्यावसायिक रूप से भी अप्रत्याशित सफलता की सम्भावना है | किसी सीनियर के रिटायर होने के कारण आपको उस स्थान पर पदोन्नत भी किया जा सकता है | किन्तु बॉस के साथ पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वभाव में नकारात्मकता आपके व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

धनु – आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध योगकारक हो जाता है तथा आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आप तथा आपके जीवन साथी के लिए व्यावसायिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें भी उन्नति की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | लेखकों तथा बुद्धिजीवियों और मीडियाकर्मियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार भी आपको प्राप्त हो सकता है |

मकर – बुध आपका षष्ठेश और भाग्येश है तथा आपकी राशि से छठे भाव में गोचर कर रहा है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें अनुकूल परिणाम की सम्भावना की जा सकती है | साथ ही बहुत समय से चली आ रही जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द के इलाज़ का भी पता इस अवधि में लग सकता है | प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए समय अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है किन्तु उन्हें परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा, किन्तु पारिवारिक क्लेश के कारण मानसिक तनाव सम्भव है |

कुम्भ –  आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | किसी प्रकार की अप्रत्याशित घटना की सम्भावना की जा सकती है | कार्यस्थल पर वातावरण अनुकूल बना रह सकता है | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु इसके साथ ही सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस से बचने का भी प्रयास आवश्यक है |

मीन – आपके लिए चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप कोई नया घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | आपको अपने परिवारजनों का तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता रहेगा तथा परिवार में सौहार्द का वातावरण रहने की सम्भावना है, किन्तु आपको अपनी वाणी और Temperament को संयम में रखने की आवश्यकता है | परिवार में माँगलिक कार्यों की भी सम्भावना प्रतीत होती है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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मंगल का मिथुन में गोचर

मंगल का मिथुन राशि में गोचर

मंगलवार सात मई यानी वैशाख शुक्ल तृतीया है – यानी अक्षय तृतीया | जिसे भगवान् विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | सर्वप्रथम सभी को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

कल प्रातः 6:53 के लगभग तैतिल करण और अतिगण्ड योग में मंगल वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में राहु के साथ प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय मंगल मृगशिर नक्षत्र पर होगा | अपने इस गोचर के दौरान 17 मई को आर्द्रा नक्षत्र पर और सात जून को पुनर्वसु नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में बाईस जून को रात्रि ग्यारह बजकर बाईस मिनट के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मिथुन राशि पर भ्रमण करते हुए मंगल की दृष्टियाँ कन्या राशि पर, धनु राशि पर तथा मकर राशि पर रहेंगी | मिथुन राशि से कन्या और धनु क्रमशः चतुर्थ व सप्तम भाव हैं और मकर राशि अष्टम भाव है | जबकि मंगल की अपनी राशि मेष से मिथुन तृतीय भाव और वृश्चिक से अष्टम भाव है | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मिथुन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके छठे भाव, नवम भाव और कर्मस्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपका स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो अचानक ही पदोन्नति के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपके छोटे भाई बहनों के साथ अथवा कार्यस्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप सपरिवार किसी तीर्थस्थान की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर द्वितीय भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके पञ्चम, अष्टम और नवम भावों पर मंगल की दृष्टियाँ रहेंगी | आपके लिए अचानक ही नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | किन्तु साथ ही गुप्त विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर ध्यान रखने की आवश्यकता है | हाँ आपकी प्रभावशाली वाणी का लाभ आपको अपने कार्य में अवश्य प्राप्त हो सकता है | किसी वसीयत के माध्यम से आपको लाभ की सम्भावना है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी लग्न में ही हो रहा है तथा आपके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भावों को देख रहा है | परिवार में किसी नवीन सदस्य के आगमन की समभावना है | किसी बच्चे का जन्म भी इस अवधि में हो सकता है | आप कोई नया घर बेचकर उसमें शिफ्ट कर सकते हैं | प्रॉपर्टी के व्यवसाय से सम्बद्ध लोगों के लिए, डॉक्टर्स तथा मिडिया से सम्बद्ध लोगों के लिए और पॉलिटिक्स के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | विवाह के लिए अभी समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं | आप सपत्नीक कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर आपकी कुण्डली के बारहवें भाव में हो रहा है जहाँ से आपके तीसरे, छठे तथा सातवें भावों पर मंगल की दृष्टि है | आपके लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | इस अवधि में आप सपरिवार कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | यात्राओं के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा चोरी आदि के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | जीवन साथी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | आपकी सन्तान या तो किसी नए घर में निवास के लिए जा सकती है अथवा किसी अन्य शहर में बसने का मन बना सकती है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर आपका योगकारक बनता हुआ मंगल का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से दूसरे, पाँचवें और छठे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | यह गोचर आपके स्वयं के लिए तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है तथा वहाँ से आपकी लग्न को और चतुर्थ तथा पञ्चम भावों को देख रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं | आपकी सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है | आप स्वयं भी उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर सकते हैं | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | जहाँ से आपके बारहवें, तीसरे और चौथे भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला कहा जा सकता है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही कार्य में प्रगति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | किन्तु यात्राओं में तथा पारिवारिक समस्याओं पर धन व्यय होने के साथ ही परिवार में तनावपूर्ण स्थिति के भी संकेत प्रतीत होते हैं | विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ तथा माता जी के साथ सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न हो सकता है | ऐसी स्थिति में अपने व्यवहार की शान्ति बनाए रखना ही सर्वोत्तम उपाय है | माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है | घर को Renovate कराने में पैसा खर्च हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी सम्भव है | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | जहाँ से आपके लाभ स्थान, द्वितीय भाव तथा तीसरे भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए भी लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | आपकी वाणी इस अवधि में अत्यन्त प्रभावपूर्ण रहेगी और आपके कार्य में आपको उसका लाभ भी प्राप्त होगा | हाँ, सम्बन्धों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर तथा स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए खान पान पर संयम रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके कार्य स्थान, लग्न तथा धन भाव पर मंगल की दृष्टियाँ हैं | आपके लिए तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | हालाँकि कार्यस्थल पर किसी प्रकार का विरोध भी सम्भव है | पार्टनरशिप में यदि कोई कार्य है तो उसमें किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु आप अपने व्यवहार से सभी अवरोधों को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं | आपको अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | यदि अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | किन्तु साथ ही यदि अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके नवम भाव पर, बारहवें भाव पर तथा आपकी लग्न पर उसकी दृष्टियाँ हैं | किसी आवश्यक कार्य के लिए आपको विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | साथ ही इन यात्राओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | किन्तु आपके उत्साह में तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के कारण आपके कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कोई नवीन कार्य आपको प्राप्त हो सकता है, किन्तु सोच समझ कर ही आगे बढें | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

कुम्भ : आपके लिए आपके तृतीयेश और दशमेश का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है जहाँ से आपके अष्टम, एकादश और द्वादश भावों पर उसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना की जा सकती है | किसी अप्रत्याशित स्थान से प्रॉपर्टी अथवा अर्थलाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का तनाव भी सम्भव है | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | उच्च शिक्षा अथवा किसी सेमीनार आदि में भाग लेने के लिए यात्रा करनी पड़ सकती है |

मीन : आपके लिए आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | सप्तम, दशम तथा लाभ स्थान पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | पारिवारिक स्तर पर वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा किन्तु किसी घनिष्ठ मित्र के साथ किसी प्रकार का मनमुटाव इस अवधि में सम्भव है | साथ ही, यदि नौकरी में हैं अथवा पार्टनरशिप में कोई व्यवसाय है तो अधिकारीवर्ग से तथा पार्टनर के साथ किसी प्रकार की बहस आपके हित में नहीं रहेगी | अच्छा यही रहेगा कि जो लोग आपसे सहमत न हों उन पर किसी प्रकार का दबाव डालने का प्रयास न करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध भी कहीं निश्चित हो सकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें इसी कामना से सभी को एक बार पुनः अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ…

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राहु केतु का मिथुन और धनु में गोचर

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है | यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में ये दोनों ग्रह उत्तम स्थिति में हैं तो उसके लिए मान सम्मान में वृद्धि तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता लाने वाले माने जाते हैं | किन्तु यदि ये दोनों ग्रह प्रतिकूल स्थिति में हैं तो अनेक प्रकार की शारीरिक समस्याओं के साथ ही मानसिक अशान्ति, कार्य सिद्धि में बाधा तथा दुर्घटना आदि के कारक भी माने जाते हैं | ये दोनों ग्रह सदा एक दूसरे के सामने रहते हैं और लगभग 18 माह तक एक ही राशि में रहते हैं | इनकी चाल सदा वक्री होती है | कल फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा, यानी बृहस्पतिवार 7 मार्च को किन्स्तुघ्न करण और साध्य योग में प्रातः 9:39 के लगभग राहु मिथुन राशि तथा केतु धनु राशि में संचार करेंगे | दण्डाधिकारी शनिदेव पहले से ही वहाँ पहुँचे हुए हैं | जहाँ डेढ़ वर्ष तक भ्रमण के उपरान्त अन्त में 23 सितम्बर 2020 को दिन में 12:53 के लगभग क्रमशः वृषभ और वृश्चिक राशियों में प्रस्थान कर जाएँगे | मिथुन और धनु राशियों में अपने इस भ्रमण के दौरान 12 सितम्बर 2019 को आर्द्रा और पूर्वाषाढ़ नक्षत्रों पर राहु और केतु रहेंगे | 16 जनवरी 2020 को केतु मूल नक्षत्र पर आ जाएगा और राहु 20 मई 2020 को मृगशिर नक्षत्र पर जाएगा | राहु-केतु के इस राशि परिवर्तन से जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन भी हो सकते हैं – क्योंकि एक ओर राहु को सांसारिक सुख तथा भोग विलास में रूचि प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता है वहीं दूसरी ओर केतु आध्यात्मिकता में रूचि बढ़ाने वाला तथा मोक्ष कारक ग्रह माना जाता है | मिथुन राहु के लिए मूल त्रिकोण तथा उच्च राशि है और धनु केतु के लिए | साथ ही, पूर्व जन्म के कर्मों का सम्बन्ध भी इन दोनों ग्रहों से माना जाता है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं राहु-केतु के राशि परिवर्तन के जन साधारण पर क्या प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : राहु-केतु का गोचर आपके तीसरे और नवं भाव में होने जा रहा है | तृतीय भाव पराक्रम का भाव है और नवं भाव भाग्य स्थान या आध्यात्मिक गतिविधियों का कारक | आपके लिए यह गोचर आपके पराक्रम में वृद्धि करने के साथ ही आपके लिए सन्तोषजनक फल देने वाला तथा साहस और मनोबल में वृद्धि प्रदान करने वाला सिद्ध हो सकता है | यदि अप किसी नौकरी में हैं और उसे बदलना चाहते हैं तो यह भी इस अवधि में सम्भव है | नौकरी में उन्नति तथा अपने स्वयं के कार्य में प्रगति भी इस अवधि में सम्भव है | कोई नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | आर्थिक लाभ की भी सम्भावना है | दूर पास की यात्राएँ भी इस अवधि में सम्भव हैं | अपने सहकर्मियों का तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | नवीन मित्र बनने की भी सम्भावना है | आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप सपरिवार किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

वृषभ : आपके लिए ये गोचर आपके द्वितीय तथा अष्टम भावों में हो रहे हैं | इस दौरान अधिक बोलना आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है | जो भी बात करें पहले उसके विषय में भली भाँती सोच विचार कर लें उसके बाद ही आगे बढें, अन्यथा आपके लिए कष्टकारी वातावरण बन सकता है | क्रोध पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य अथवा किसी अन्य समस्या के कारण धनहानि के संकेत भी प्रतीत होते हैं | साथ ही इस अवधि में नया घर खरीदने की योजना यदि है तो उसे अभी स्थगित करना ही उचित रहेगा | किसी को पैसा उधार देना अथवा स्वयं कहीं से लोन लेना भी आपके हित में नहीं होगा | इसके अतिरिक्त बजट बनाकर चलेंगे तो धन सम्बन्धी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | किन्तु साथ ही कार्यस्थल पर आपके मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | दार्शनिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप तीर्थ स्थानों की यात्राओं पर भी जा सकते हैं | किन्तु पोंगा पण्डितों से बचने की आवश्यकता है | अपने खान पान पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही डॉक्टर से पूछे बिना अपने मन से अथवा किसी केमिस्ट के कहने पर कोई औषधि ग्रहण न करें |

मिथुन : आपकी तो लग्न और सप्तम भावों में ही गोचर हो रहे हैं | यद्यपि मिथुन राहु की उच्च राशि है, फिर भी आपके राहु का मिथुन में गोचरलिए इस गोचर को बहुत अधिक अनुकूल नहीं कहा जा सकता | यों आपके लिए ज्ञान में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | किन्तु साथ ही इस बात की सम्भावना है कि आप शीघ्रता में कोई निर्णय लेकर अपनी हानि कर सकते हैं | इसलिए कोई भी महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व उस बात पट भली भाँती सोच विचार अवश्य कर लें | दूसरों की बातों में तब तक किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें जब तक कि आपसे इसके लिए आग्रह न किया जाए, अन्यथा अपना सम्मान खो देंगे | आप सुख सुविधाओं की सामग्री पर बहुत पैसा इस अवधि में खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आपका बजट गड़बड़ा सकता है | इसलिए इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ अथवा प्रेमी/प्रेमिका के साथ किसी प्रकार की अनबन भी सम्भव है | किन्तु जो लोग अविवाहित हैं उनकी जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | पार्टनरशिप में यदि आपका कार्य है तो उसमें किसी प्रकार की ग़लतफ़हमी के कारण बाधा उत्पन्न हो सकती है | अपने तथा अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | Depression के शिकार न हों इसके लिए योग, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यास जो अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो आपके हित में रहेगा |

कर्क : आपके लिए क्रमशः बारहवें तथा छठे भाव में यह गोचर होने जा रहा है | खर्चों में अकारण ही वृद्धि की सम्भावना है | विदेश यात्राओं में भी वृद्धि की सम्भावना है | ये यात्राएँ आपके लिए मनोरंजक हो सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी | साथ ही अपने Important Documents को भी संभालकर रखने की आवश्यकता है | कोई ऐसा कार्य न करें जिसके कारण आप किसी कानूनी कार्यवाही में फँस जाएँ | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान भी उत्पन्न हो सकता है | इन गोचरों के कारण आपके जीवन में अनेक प्रकार के उतार चढ़ाव उत्पन्न हो सकते हैं | किन्तु इनसे घबराने की अपेक्षा यदि आप अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मकता बनाए रखेंगे तो आपके लिए हित में रहेगा | आप मनोरंजन तथा सौन्दर्य प्रसाधनों पर बहुत अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं | किसी कोर्ट केस अथवा स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर भी अधिक धन व्यय हो सकता है | तनाव के कारण नींद में कमी का अनुभव भी कर सकते हैं | प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास आपको इस स्थिति से मुक्ति प्रदान कर सकता है | वास्तव में यह गोचर इस प्रकार का है कि आप शान्ति के साथ बैठकर भविष्य की योजनाओं पर विचार करें और उन्हें मूर्त रूप देने का प्रयास करें | ननसाल पक्ष के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है |

सिंह : आपके लिए क्रमशः आपके लाभ स्थान और पंचम भाव में ये दोनों ग्रह गोचर कर रहे हैं | कार्य में उन्नति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आपके लिए लाभ तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना की जा सकती है | कुछ ऐसे नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | अधिकारी वर्ग, मित्रों तथा पिता और सन्तान के सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | इस अवधि में आपको कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि भी हो सकती है जिसके कारण न केवल आपके मन सम्मान में वृद्धि होगी अपितु आपको कोई बड़ा पुरूस्कार भी इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | नौकरी में हैं तो किसी महत्त्वपूर्ण पद पर पदोन्नति की सम्भावना भी है | अविवाहित हैं जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सम्भव है किसी सहकर्मी की ओर से अथवा किसी मित्र की ओर से आपको प्रणय निवेदन प्राप्त हो और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध जाएँ | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास आपके लिए आवश्यक है |

कन्या : आपके लिए क्रमशः आपके कर्म स्थान और चतुर्थ भाव में ये गोचर हो रहे हैं | आर्थिक दृष्टि से आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपने यदि कहीं पैसा Invest किया हुआ तो वहाँ से तथा अन्य भी विविध स्रोतों से अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती जिसके कारण आपकी आर्थिक स्थिति दृढ़ बनी रहगी | किन्तु इसके साथ ही कार्यस्थल पर तथा परिवार में विशेष रूप से माता पिता की ओर से किसी प्रकार का विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है | कार्य की अधिकता के कारण व्यस्तताओं में वृद्धि की भी सम्भावना है और सम्भव है इस कारण आप परिवार की ओर अधिक ध्यान न दे पाएँ | नवीन उपलब्धियों तथा कार्य में उन्नति के साथ ही सामाजिक स्तर पर मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है | रुके हुए कार्य भी फिर से आरम्भ हो सकते हैं | आप नवीन चुनौतियों को स्वीकार करने की मनःस्थिति में होंगे जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त होगा | आप इस अवधि में नया घर खरीद सकते हैं अथवा बना सकते हैं अत्ढ़वा जिस घर में अभी आपका निवास है उसे Renovate भी करा सकते हैं | बहुत सी महत्त्वपूर्ण सामाजिक गतिविधियों में आपको सम्मान प्राप्त होने की सम्भावना है | किन्तु इतना सब होते हुए भी आपके मन में उत्साह का अभाव रह सकता है | नया वाहन खरीदने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं प्रतीत होता | अपने माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपके लिए क्रमशः आपके भाग्य स्थान और तृतीय भावों में ये गोचर हो रहे हैं | सम्भव है आपको अपने कार्यों में व्यवधान का अनुभव इस अवधि में हो | कार्य जिस रूप में होना चाहिए सम्भव है उस रूप में न हो | छोटे भाई बहनों तथा पिता के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु कहीं से कोई ऐसा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है जिसके कारण पिता के साथ आपके सम्बन्धों में सुधार की सम्भावना भी की जा सकती है | पैसे के लेन देन में सावधानी रखने की आवश्यकता है | साथ ही आपके उत्साह और ऊर्जा में वृद्धि का समय भी प्रतीत होता है जिसके कारण आप समस्याओं का सामना करके उनका समाधान करने में भी समर्थ हो सकते हैं | आप किसी लम्बी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं | यह यात्रा आपके लिए कार्य की दृष्टि से अनुकूल सिद्ध हो सकती है | आप धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | आपके भाई बहनों का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपकी राशि से क्रमशः अष्टम और द्वितीय भावों में राहु और केतु के गोचर हो रहे हैं | आपके लिए ये गोचर बहुत अनुकूल प्रतीत नहीं होते | इस गोचर के दौरान आपके लिए खर्चों में वृद्धि की तथा आय में कमी की सम्भावना की जा सकती है | सोच समझ कर खर्च करेंगे और बजट बनाकर चलेंगे तो आर्थिक समस्याओं से बचे रह सकते हैं | साथ ही यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय अभी अनुकूल नहीं प्रतीत होता | परिवार में कुछ व्यक्तियों की ओर से आपकी उपेक्षा भी हो सकती है | किन्तु इसके कारण चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है अन्यथा तनाव के कारण आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है | परिवार में किसी प्रकार का क्लेश भी सम्भव है | आवश्यकता है आप अपने Temperament और वाणी पर संयम बनाए रखें | अपनी सूझ बूझ तथा सहृदयता से आप पारिवारिक विवाद को समाप्त भी कर सकते हैं | आपको ड्राइविंग के समय सावधानी रखने की आवश्यकता है | किसी अन्य भी प्रकार की दुर्घटना आदि की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही स्वास्थ्य उत्तम बना रहे इसके लिए खान पान पर नियन्त्रण रखने की और प्राणायाम, ध्यान तथा योग को अपने जीवन का आवश्यक अंग बनाने की भी आवश्यकता है | पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि से क्रमशः सप्तम भाव और लग्न में राहु-केतु का गोचर हो रहा है | पार्टनरशिप में कोई कार्य करकेतु का धनु में गोचर रहे हैं तो उसमें भी किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | किन्तु यदि आपका अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें उन्नति की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी में हैं तो आपकी पओंनती भी हो सकती है | नई नौकरी की खोज में हैं तो वह खोज भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | नया व्यवसाय आरम्भ करने के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य से सम्बन्धित व्यस्तताओं में वृद्धि के कारण सम्भव है आप परिवार की ओर अहिक ध्यान नहीं दे पाएँ | विविध क्षेत्रों से सम्बन्धित व्यक्तियों से आपकी भेंट इस अवधि में होती रहेगी जिसके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य में भी सहायता प्राप्त होने की सम्भावना है | आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों और रूचि में वृद्धि की सम्भावना प्रतीत होती है | आपके लिए आत्म निरीक्षण का समय भी है | साथ ही आपके व्यवहार में एक प्रकार का सन्तुलन और सन्तुष्टि का भाव भी बना रहेगा | दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार का तनाव न उत्पन्न होने पाए इसके लिए समझदारी से काम लेने की आवश्यकता है | आपका जीवन साथी आपके लिए समर्पित है अतः उस पर किसी प्रकार का सन्देह करना उचित नहीं होगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से यों गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है, किन्तु माईग्रेन आदि की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता | अतः स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

मकर : आपके लिए आपकी राशि से छठे और बारहवें भाव में इन छाया ग्रहों का गोचर हो रहा है | एक ओर आपके लिए कार्य में प्रगति तथा नौकरी में पदोन्नति की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | दूसरी ओर कार्य स्थल पर विरोध के स्वर भी मुखर हो सकते हैं | किन्तु आप स्वयं अपनी बुद्धि तथा उत्साह के बल पर उस विरोध को समाप्त करने में भी समर्थ हो सकते हैं | आप इस अवधि में अपना निवास भी बदल सकते हैं अथवा आपका कहीं ट्रांसफर भी हो सकता है | ये ट्रांसफर सम्भव है आपके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल न रहे | विद्यार्थियों के लिए तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए ये गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत हो सकते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी आपके लिए अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना है | किसी पुराने रोग से मुक्ति की सम्भावना भी है | किसी प्रकार का कोर्ट केस चल रहा है तो आपके लिए अनुकूल दिशा में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु उसमें कुछ समय तथा धन व्यय हो सकता है | कोई ऐसा कार्य न करें जिसके कारण आप किसी लीगल केस में फँस जाएँ | आध्यात्मिक यात्रा की ओर प्रवृत्त होने का समय प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपकी राशि से क्रमशः पञ्चम भाव तथा लाभ स्थान में ये गोचर हो रहे हैं | यदि आप प्रोफेशनल हैं तो नवीन योजनाएँ आपके मन में आ सकती हैं और आप उन्हें क्रियान्वित भी कर सकते हैं | आप लेखन के क्षेत्र से सम्बन्ध रखते हैं अथवा अध्ययन अध्यापन के क्षेत्र से आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए ये गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होते हैं | किन्तु विद्यार्थियों के लिए कठिन परिश्रम का समय प्रतीत होता है | विद्यार्थियों को पढ़ाई में मन लगाने में व्यवधान का अनुभव हो सकता है | उनके लिए तो इस अवधि में ध्यान का अभ्यास अत्यन्त आवश्यक है | आपकी सन्तान का व्यवहार भी अनियन्त्रित हो सकता है | अच्छा यही रहेगा कि सन्तान को जो भी सलाह देनी हो सोच विचार कर तथा संयमित मन के साथ दें ताकि आपकी बात का प्रभाव उस पर पड़े | आपको कार्य के लिए अनेक नवीन अवसर उपलब्ध होंगे जो आपको बहुत समय तक व्यस्त रख सकते हैं | कार्य की अधिकता के कारण मानसिक तनाव भी सम्भव है | आय में वृद्धि तथा मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है | सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है |

मीन : राहु और केतु का गोचर क्रमशः आपके चतुर्थ भाव और दशम भाव में हो रहा है | आपको कार्य की दृष्टि से कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | सम्भव है आपको कोई ऐसा कार्य सौंप दिया जाए जो आपके लिए उचित न हो तथा आपके लिए कष्टकारी भी हो | आपकी निर्णयात्मक क्षमता भी इस अवधि में प्रभावित हो सकती है | आप Confuse हो सकते हैं | जिसके कारण आपकी प्रगति पर भी विपरीत प्रभाव हो सकता है | अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपको कठोर श्रम करना पड़ सकता है | पारिवारिक स्तर पर तथा कार्य स्थल पर भी तनाव की सम्भावना प्रतीत होती है | यह भी सम्भव है कि परिवार के व्यक्तियों का आचरण कुछ इस प्रकार का हो जाए जिससे आप सहमत न हों | किन्तु आपके स्वभाव तथा व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तनों की सम्भावना की जा सकती है | जिन लोगों से आप सहमत न हों या जो आपसे सहमत न हों उनके साथ व्यर्थ के विवाद की आवश्यकता नहीं | परिवार में किसी नवीन सदस्त का आगमन हो सकता है अथवा किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है | आपका झुकाव आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविद्धियों की ओर बढ़ सकता है जिसके कारण सम्भव है आप अपने कार्य पर पर्याप्त ध्यान न दे पाएँ | अपने माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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