शुक्र का मीन में गोचर

शुक्र का मीन राशि में गोचर

आज चैत्र शुक्ल एकादशी को अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर चार मिनट के लगभग विष्टि करण और गण्ड योग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपने परम मित्र शनि की राशि कुम्भ से निकल कर अपनी उच्च राशि मीन में प्रस्थान कर जाएगा | इस प्रस्थान के समय शुक्र पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर होगा | अपने इस प्रस्थान के समय शुक्र धनिष्ठा नक्षत्र पर होगा | मीन राशि में भ्रमण करते हुए 18 अप्रेल को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर तथा 29 अप्रेल को रेवती नक्षत्र पर विचरण करते हुए अन्त में दस मई को मेष राशि और अश्विन नक्षत्र पर प्रस्थान कर जाएगा | शुक्र की अपनी राशि वृषभ से मीन राशि एकादश भाव तथा तुला से छठा भाव बनती है | अतः सामान्य तौर पर वृषभ राशि के लिए यह गोचर शुभ होने की सम्भावना है तथा तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल सम्भव है न रहे | तो जानने का प्रयास करते हैं कि शुक्र के मीन राशि में गोचर के समस्त राशियों पर सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | एक ओर तो सम्भव है आपको अपने कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि हो जाए और इन यात्राओं के माध्यम से आपको धन लाभ की सम्भावना की जा सकती है | वहीं दूसरी और इन यात्राओं में पैसा भी अधिक खर्च हो सकता है तथा यात्राओं के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है | यदि कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो उसमें देर लग सकती है और उसके लिए प्रयास भी अधिक करना पड़ेगा | स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण भी धन के व्यय होने की सम्भावना है | अपनी वाणी पर संयम रखने की भी आवश्यकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में गोचर हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है | कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | जो लोग अभी तक आपकी बात नहीं समझ पा रहे थे वे अब आपके सुझावों का अनुमोदन कर सकते हैं, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में निश्चित रूप से प्राप्त हो सकता है | मित्रों तथा सहकर्मियों का सहयोग उपलब्ध रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस के माध्यम से भी लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से कर्म स्थान में हो रहा है | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके लिए उत्साह में वृद्धि के संकेत हैं जिसके कारण आप अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम रहेंगे | आप कलाकार हैं, कवि हैं, डेंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं, ब्यूटीशियन हैं अथवा किसी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से सम्बन्ध रखते हैं, टूर और ट्रेवल से सम्बन्धित व्यवसाय में, वक्ता हैं तो आपके लिए विशेष रूप से कार्य में उन्नति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा खरीदने की योजना बना सकते हैं | अपने सौन्दर्य को निखारने में आपकी रूचि इस अवधि में बढ़ेगी और इस कार्य में आप बहुत अधिक पैसा भी खर्च कर सकते हैं जिसके कारण आपका बजट गड़बड़ा एकता है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके पराक्रम में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | कुछ नया कार्य आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | कार्य तथा आय में वृद्धि के भी संकेत प्रतीत होते हैं | आप कोई नया घर अथवा वाहन भी इस अवधि में खरीद सकते हैं अथवा अपने वर्तमान आवास को ही Renovate करा सकते हैं | परिवार में किसी के विवाह आदि माँगलिक कार्य के कारण सम्बन्धियों तथा मित्रों के साथ आमोद प्रमोद का समय भी प्रतीत होता है | सपरिवार कहीं तीर्थ यात्रा अथवा देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रूचि में भी वृद्धि हो सकती है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है | इस अवधि में एक ओर जहाँ आपके लिए कार्य में प्रगति तथा उसके माध्यम से अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना की जा सकती है, किसी ऐसे स्थान से प्रॉपर्टी के लाभ की सम्भावना की जा सकती है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी, वहीं दूसरी ओर किसी प्रकार से भी गुप्त विरोधियों की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है | आप स्वयं भी इस दौरान ऐसा कोई कार्य न करें जिसके कारण आपकी मान प्रतिष्ठा को किसी प्रकार की हानि होने की सम्भावना हो | कार्य में अकस्मात् ही किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी सहकर्मी की ओर से आपका विरोध भी सम्भव है, अतः आँख और कान खुले रखने की आवश्यकता है | यदि आप महिला हैं तो आपको विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होने जा रहा है | आपके और आपके जीवन साथी के लिए कार्य तथा अर्थलाभ की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अनेकों अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | Cosmetic और Medicine के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी यह समय अत्यन्त लाभप्रद प्रतीत होता है | आय के नवीन स्रोत आपके तथा आपके जीवन साथी के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं | अविवाहित हैं तो आपका कोई घनिष्ठ मित्र अथवा आपका कोई सहकर्मी आपकी ओर आकर्षित हो सकता है और आप उसके साथ विवाह बन्धन में बंध सकते हैं | दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता के संकेत प्रतीत होते हैं |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ होंगे | आप इस समय कार्य से सम्बन्धित नवीन चुनौतियाँ भी स्वीकार करने का साहस रखते हैं, जो आपके कार्य की दृष्टि से हित में ही रहेगा | किन्तु साथ ही उन मित्रों को पहचानकर उनसे दूर होने की आवश्यकता है जो आपसे प्रेम दिखाते हैं लेकिन मन में ईर्ष्या का भाव रखते हैं | कोई कोर्ट केस अथवा कोई बीमारी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकती है | विशेष रूप से यदि आप महिला हैं तो आपको स्वास्थ्य की और से विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं | इन यात्राओं के दौरान भी अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है | दाम्पत्य जीवन में कोई विवाद उत्पन्न हो सकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके पंचम भाव में होने जा रहा है | सन्तान के साथ यदि कुछ समय से किसी प्रकार की अनबन चल रही है तो उसके दूर होने की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | मान सम्मान तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं | नौकरी के लिए इन्टरव्यू दिया है तो उसमें भी सफलता की सम्भावना है | सन्तान प्राप्ति के भी योग प्रतीत होते हैं | किन्तु आपकी सन्तान के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | किसी गम्भीर समस्या के कारण आपकी सन्तान को Hospitalize भी होना पड़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य बना अरहने की सम्भावना है |

धनु : आपके लिए आपका षष्ठेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | आपके लिए यह गोचर मिश्रित फल देने वाला प्रतीत होता है | सम्भव है आप इस अवधि में नया घर अथवा वाहन खरीद लें अथवा खरीदने की योजना बना लें | किन्तु ड्राइविंग के समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है | मान सम्मान और पुरूस्कार आदि का लाभ भी हो सकता है | सुख सुविधाओं के साधनों में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु साथ ही बड़े भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद कोर्ट तक भी पहुँच सकता है, अतः परिवार की किसी बुज़ुर्ग महिला की मध्यस्थता से उस विवाद को समय रहते सुलझाने का प्रयास आवश्यक है | परिवार में किसी महिला का स्वास्थ्य आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | समय रहते डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है | पोलिटिक्स से जिन लोगों का सम्बन्ध है उनके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है |

मकर : आपके लिए आपका पंचमेश और दशमेश होकर शुक्र आपके लिए योगकारक बनता है और आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | साथ ही, कार्य स्थल पर विरोधियों के स्वर भी मुखर हो सकते हैं, किन्तु आप स्वयं अपने ही बुद्धिबल से समस्त विरोधों को शान्त करने में समर्थ हो सकते हैं | हाँ भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद कोर्ट तक पहुँच सकता है अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से आपकी भेंट किसी प्रभावशाली व्यक्ति से हो सकती है और उसके कारण आपको अपने कार्य में भी लाभ प्राप्त हो सकता है तथा आपके मान सम्मान में भी वृद्धि के संकेत हैं | रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | कहीं पेमेण्ट रुकी हुई है तो वह भी वापस प्राप्त हो सकती है | किसी कोर्ट केस का निर्णय भी आपके पक्ष में आ सकता है |

कुम्भ : आपके लिए भी आपकी राशि से चतुर्थेश और नवमेश होकर शुक्र आपका योगकारक बनता है और आपके दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | पराक्रम तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स इस अवधि में प्राप्त होते रह सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहकर अर्थ लाभ भी कर सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरों पर पड़ेगा और जिसके कारण आपकी प्रशंसा भी होगी तथा आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली है, उसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में अवश्य प्राप्त होगा, किन्तु ऐसा कुछ मत बोलिए जिसके कारण किसी विवाद में फँसने की सम्भावना हो |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर कुछ विशेष अनुकूल नहीं प्रतीत होता | एक ओर आपके आकर्षक व्यक्तित्व से लोग प्रभावित होंगे और उसका लाभ आपको अपने कार्य तथा पारस्परिक सम्बन्धों में प्राप्त हो सकता है, वहीं दूसरी ओर किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है जिसके विषय में आपने ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी | अच्छा यही रहेगा इस समय ध्यान और प्राणायाम का सहारा लें ताकि आपके मन की शान्ति बनी रहे | Romantically यदि कहीं Involve हैं तो उस सम्बन्ध में अन्तरंगता के संकेत प्रतीत होते हैं | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में भी माधुर्य तथा अन्तरंगता बने रहने के संकेत हैं | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है अतः अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप अवश्य कराती रहें |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/04/15/venus-transit-in-pisces/

 

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सूर्य का मीन में गोचर 2019

कल यानी शुक्रवार 15 मार्च 2019 को सूर्योदय से पूर्व पाँच बजकर चालीस मिनट के लगभग पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए ही भगवान् भास्कर अपने शत्रु ग्रह शनि की राशि मीन से निकल कर मित्र ग्रह गुरु की राशि में भ्रमण करने के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ एक माह तक विचरण करने के पश्चात रविवार 14 अप्रेल को दोपहर दो बजकर नौ मिनट के लगभग मेष राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | सूर्य के मीन राशि में प्रस्थान के समय फाल्गुन शुक्ल नवमी तिथि, कुम्भ लग्न, बालव करण और आयुष्मान योग रहेगा | सूर्य की अपनी राशि सिंह से मीन राशि अष्टम भाव में आती है तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से द्वादश भाव में आती है | मीन राशि में विचरण करते हुए सूर्यदेव 18 मार्च से उत्तर भाद्रपद तथा पहली अप्रेल से रेवती नक्षत्र पर भ्रमण करेंगे |

पूर्वा भाद्रपद अधोगामी, उग्र और वात प्रकृति का, सहनशीलता तथा धैर्य आदि गुणों से युक्त सात्विक नक्षत्र है | कर्म उसका स्वभाव है | इसका देवता अजैकपाद और अधिपति ग्रह गुरु है | उत्तरभाद्रपद ऊर्ध्वगामी, स्थिर और पित्त प्रकृति तामसी नक्षत्र है तथा सन्तुलन रखना इसका गुण है | इसका देवता अहिर्बुन्ध्य तथा अधिपति ग्रह शनि है | रेवती नक्षत्र की चाल समानान्तर, मधुर और कफ प्रकृति का सात्विक नक्षत्र है | इसका गुण भी सन्तुलन स्थापित करना है | इसका देवता पूषा तथा अधिपति ग्रह बुध को माना जाता है |

सूर्य क्योंकि आत्मा का कारक माना जाता है, वक्री बुध वहाँ पहले से ही है, अतः कह सकते हैं कि इस अवधि में जन साधारण में वात-पित्त-कफ का सन्तुलन कुछ गड़बड़ा सकता है – जो कि मौसम बदलने पर प्रायः होता भी है | अतः मौसम से सम्बन्धित रोगों से बचने के लिए अपने खान पान पर नियन्त्रण तथा जीवन शैली में परिवर्तन की आवश्यकता तो होगी ही | अधिकाँश लोग कर्मशील तथा सन्तुलित भाव से अपना कर्म करते हुए आगे बढ़ते रहेंगे |

इन्हीं समस्त तथ्यों को आधार बनाकर मीन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर होने वाले सम्भावित परिणामों पर दृष्टिपात करने का प्रयास किया गया है…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य यानी Common हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपके लिए पंचमेश होकर सूर्य का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा प्रतियोगी क्षमता में व्रीही के योग प्रतीत होते हैं | कार्य में उन्नति की दृष्टि से यह समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही जो लोग उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहते हैं उनके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही इस यात्रा के दौरान उन्हें विदेश भ्रमण का अवसर भी प्राप्त हो सकता है | कार्य के क्षेत्र में आपके लिए परिवर्तन का समय प्रतीत होता है | सम्भव है आपका कहीं ट्रांसफर हो जाए या आप वर्तमान नौकरी को छोड़कर किसी नई नौकरी में नए स्थान पर चले जाएँ | आँखों के इन्फेक्शन की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | छोटे भाई बहनों के साथ मन मुटाव सम्भव है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए काफी हलचल भरा समय प्रतीत होता है |

वृषभ : सूर्य आपके लिए चतुर्थेश है और लाभ स्थान में गोचर करने जा रहा है | किसी प्रकार की सम्पत्ति का लाभ हो सकता है | आप अपने वर्तमान निवास को बेचकर कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | यदि आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय में हैं तो उसमें भी आपको लाभ हो सकता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित आवश्यक कार्यों का निबटारा भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | मित्रगणों तथा अधिकारीगणों का साथ और सहयोग दोनों इस अवधि में प्राप्त रहने की सम्भावना है | हाँ आपके बड़े भाई अथवा पिता के कारण किसी प्रकार की चिन्ता हो सकती है | राजनीति से सम्बद्द्ध लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका तृतीयेश होकर सूर्य आपके दशम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | यदि आप हाथ के कारीगर हैं, सर्जन हैं, डॉक्टर हैं या मीडिया अथवा आई टी से सम्बन्धित किसी कार्य में संलग्न हैं तो आपके लिए तो समय विशेष रूप से लाभदायक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो आपका प्रदर्शन इस अवधि में बहुत अच्छा रहने की सम्भावना है, जिसके कारण आपके अधिकारी आपसे प्रसन्न रहेंगे आपको अपने पिता तथा प्रभावशाली लोगों की ओर से प्रशंसा तथा सहयोग प्राप्त होता रहेगा, किन्तु छोटे भाई बहनों तथा अधीनस्थ कर्मचारियों के कारण परिवार में अथवा कार्यस्थल पर वातावरण तनावपूर्ण हो सकता है |

कर्क : आपके लिए आपका द्वितीयेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | जो वास्तव में भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना के साथ साथ आपके लिए यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं | ऐसा भी हो सकता है कि आप आध्यात्मिक और धार्मिक कारणों से किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए चले जाएँ अथवा अपने कार्य के सिलसिले में किसी लम्बी यात्रा पर निकल जाएँ | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | किन्तु इस अवधि में आपकी वाणी में कुछ तीखापन आ सकता है जिसके कारण आपके पिता के साथ सम्बन्धों में तनाव की स्थिति आ सकती है | अतः अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही आँखों में इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर अथवा मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है |

सिंह : आपका लग्नेश होकर सूर्य आपके अष्टम भाव में संचार करने जा रहा है | यह समय स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता | सरदर्द या माइग्रेन यदि रहता है तो उसमें वृद्धि भी हो सकती है | साथ ही शरीर में आलस्य की वृद्धि भी हो सकती है जिसके कारण आपका कार्य में मन नहीं लगेगा | साथ ही आपके कुछ गुप्त विरोधी भी इस समय मुखर हो सकते हैं अतः हर किसी के सामने अपनी योजना के विषय में न बताएँ | पहले सम्बन्धित व्यक्ति के में जाँच पड़ताल कर लें उसके बाद ही अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करें | आप कहीं भ्रमण के लिए भी जाने का मन इस अवधि में बना सकते हैं जो आपके जीवन की एकरसता को दूर करने के लिए उचित रहेगा |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके सप्तम भाव में गोचर करने जा रहा है | आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आ सकता है अतः उनके साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें | आप किसी विदेशी कम्पनी अथवा बाहर बसे हुए किसी मित्र के साथ कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं अथवा उसके निमन्त्रण पर वहाँ जाकर स्वयं कोई कार्य तलाश सकते हैं | आप अपने परिश्रम तथा ज्ञान के बल पर उपलब्ध कार्य को समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही अपने स्वयं के व्यवसाय में किसी भी नई डील को अभी कुछ समय के लिए स्थगित कर देंगे तो अच्छा रहेगा | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो वहाँ संयम से काम लेने की आवश्यकता है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपका एकादशेश होकर सूर्य आपके छठे भाव में गोचर करने वाला है | आर्थिक दृष्टि से यह समय कुछ समस्याओं से युक्त हो सकता है | धन की हानि की सम्भावना है | घर तथा ऑफिस में काम कर रहे लोगों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही नई नियुक्तियाँ करने से पूर्व सारे सम्बन्धित Documents को अच्छी तरह जाँच लें | आपको अपने बड़े भाई अथवा पिता से किसी प्रकार धनलाभ की सम्भावना है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है और उसके द्वारा भी आपको धनलाभ हो सकता है | अपने तथा अपने बड़े भाई और पिता के भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके पंचम भाव में गोचर करने जा रहा है | जीवन में कुछ बड़े परिवर्तन इस अवधि में हो सकते हैं | सम्भव है आप जिस नौकरी में हैं उसे छोड़कर कोई दूसरी नौकरी कर लें, या व्यवसाय में हैं तो वर्तमान व्यवसाय को छोड़कर अथवा उसके साथ ही कोई नया व्यवसाय भी आरम्भ कर लें | आपके जीवन साथी के लिए भी किसी नवीन व्यवसाय के आरम्भ होने की सम्भावना है | अचानक ही आपको अपनी पदोन्नति का समाचार भी प्राप्त हो सकता है अथवा परिवार में नवशिशु का आगमन हो सकता है अथवा किसी मंगलकार्य का आयोजन हो सकता है | आपकी रूचि अध्ययन में बढ़ सकती है | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही अपने व्यवहार पर नियन्त्रण नहीं रखा तो जीवन साथी के साथ भी सम्बन्धों में कड़वाहट भी आ सकती है |

धनु : सूर्य आपकी राशि के लिए भाग्येश है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर करने जा रहा है | आर्थिक दृष्टि से भी और पारिवारिक स्तर भी समय लाभदायक प्रतीत होता है | यद्यपि परिवार समाज में आपका सम्मान और प्रतिष्ठा इस अवधि में बढ़ सकती है, किन्तु आपके स्वभाव की उग्रता परिवार की शान्ति भंग कर सकती है | ध्यान प्राणायाम आदि के द्वारा आप अपने व्यवहार को नियन्त्रित कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगल कार्य की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | आप यदि कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी के व्यवसाय में भी लाभ की सम्भावना है | आपको अपने पिता की ओर से वाहन अथवा घर भी उपहारस्वरूप प्राप्त हो सकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | माता पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मकर : आपका अष्टमेश होकर सूर्य तृतीय भाव में गोचर करने वाला है | लक्ष्य के प्रति आपकी एकाग्रता में इस अवधि में और अधिक दृढ़ता आने की और उत्साह तथा मनोबल में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है जिसके कारण आपके कार्य समय पूर्ण होते रहने की सम्भावना है | आप अपनी वर्तमान नौकरी को छोड़कर कोई नई नौकरी करने का विचार भी बना सकते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं | यदि ऐसा है तो आपको उसमें सफलता प्राप्त होने की भी सम्भावना है | किन्तु छोटे भाई बहन अथवा पिता के स्वास्थ्य के विषय में चिन्ता हो सकती है | साथ ही छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार विवाद भी बड़ा रूप ले सकता है | कार्यक्षेत्र में अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ व्यर्थ की बहस की सम्भावना है | इससे बचने का एक ही उपाय है – अतः अपनी वाणी और व्यवहार पर नियन्त्रण रखना |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपके द्वितीय भाव में गोचर करने वाला है | आपके जीवन साथी के माध्यम से आपको अर्थलाभ की सम्भावना है | किन्तु आपके स्वभाव में इस समय उग्रता अधिक बढ़ी हुई है जिसके कारण परिवार की शान्ति भंग होने की सम्भावना है | अतः अपनी उग्रता पर नियन्त्रण रखें और इसके लिए ध्यान, योग तथा प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास अवश्य करें | पारिवारिक तनावों का दुष्प्रभाव आपके तथा आपके जीवन साथी के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है और आपके पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का स्वास्थ्य भी इसी कारण प्रभावित हो सकता है | अतः यथासम्भव इस प्रकार के विवादों से बचने का प्रयास करें |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करने वाला है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्व रखता है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं, कोर्ट कचहरी से सम्बन्धित किसी कार्य में हैं, स्पोर्ट्स में हैं अथवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में हैं तो आपके लिए समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना भी है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय इस अवधि में आपके पक्ष में आ सकता है | आपका जीवन साथी आपके लिए पूर्ण रूप से समर्पित है, आवश्यकता है आप अपने Temperament पर नियन्त्रण रखें | साथ ही सर में दर्द, ज्वर आदि की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/03/14/sun-transit-in-pisces-2019/

 

 

वक्री बुध मीन राशि में

पाँच मार्च को 23:49 पर बुध वक्री हो चुका है | वक्री होता हुआ बुध 15 मार्च को प्रातः नौ बजे के लगभग कुम्भ में वापस लौट जाएगा | 28 मार्च से 19:30 के लगभग मार्गी होना आरम्भ होगा और 12 अप्रेल को प्रातः चार बजकर चौबीस मिनट के लगभग मीन में पहुँच जाएगा | जहाँ 3 मई को 17:03 तक विचरण करने के बाद अन्त में मेष राशि में प्रस्थान कर जाएगा | कल यानी आठ मार्च से इक्कीस मार्च तक बुध अस्त भी रहेगा | बुध के मीन राशि में गोचर के फल पूर्व में लिख चुके हैं | बुध ज्ञान विज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान, गणित, सांख्यिकी, व्यापार, आज की स्थिति में कम्प्यूटर विज्ञान इत्यादि का कारक माना जाता है | Astrologers की मान्यता है कि बुध यदि वक्री हो तो जीवन में नकारात्मक प्रभाव होते हैं | किन्तु हमारे विचार से गोचर में किसी भी ग्रह के वक्री होने से केवल नकारात्मक प्रभाव ही नहीं होने चाहियें | अपितु ग्रह के वक्री होने पर जो उसके प्रभाव हैं उनमें और अधिक वृद्धि हो जानी चाहिए – फिर चाहे वह नकारात्मक हों या सकारात्मक – क्योंकि वक्री होने पर गह के चेष्टाबल में वृद्धि हो जाती है |

बुध सूर्य के सबसे अधिक निकट है अतः बहुत शीघ्र ही वक्री हो जाता है, बहुत शीघ्र मार्गी हो जाता है, बहुत शीघ्र अतिगामी भी हो जाता है | वक्री होने पर बुध के दोनों ही प्रभाव हो सकते हैं – शुभ भी और अशुभ भी | शुभ ग्रहों के प्रभाव में आएगा या किसी शुभ भाव में जाएगा तो जातक की बुद्धि, वाणी, संचार क्षमता – Communication skills, निर्णायक क्षमता, लेखन, व्यापार इत्यादि में कौशल तथा प्रगति परिलक्षित होगा | अशुभ ग्रह के प्रभाव अथवा भाव में आएगा तो इसके विपरीत फल हो सकते हैं |

हाँ, यहाँ हम कह सकते हैं कि बुध क्योंकि अपनी नीच राशि में भ्रमण कर रहा है तो इस स्थिति में सम्भव है उतने अच्छे प्रभाव बुध के न परिलक्षित हों | तो आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि में बुध के वक्री होने पर जन साधारण के लिए क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं |

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश होकर बुध आपकी राशि से बारहवें भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा निर्णायक क्षमता में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | जिसके कारण आप स्वयं ही अपने विरोधियों को परास्त करने में समर्थ हो सकेंगे तथा आपके कार्य समय पर और सुचारू रूप से सम्पन्न हो सकेंगे | साथ ही आपके जीवन में कोई ऐसा महत्त्वपूर्ण परिवर्तन भी हो सकता है जो आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है | कार्य में प्रगति तथा अर्थ लाभ की सम्भावना की जा सकती है |

वृषभ : आपके लिए द्वितीयेश और पंचमेश होकर आपके लाभ स्थान में बुध वक्री हो रहा है | एक ओर आपके लिए आय में प्रगति के संयोग प्रतीत होते हैं वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत सम्बन्धों में किसी प्रकार की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है | अपने स्वभाव और वाणी को नियन्त्रण में रखेंगे तो इन समस्याओं से बच सकते हैं |

मिथुन : आपके लिए आपका योगकारक होकर बुध आपके दशम भाव में वक्री हो रहा है | आपको पैतृक संपत्ति के लाभ होने की सम्भावना है | कार्य में प्रगति के साथ ही कार्यस्थल पर तथा परिवार में सहयोग और सौहार्द का वातावरण भी बना रह सकता है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

कर्क : आपका तृतीयेश और द्वादशेश होकर बुध आपके आपके नवम भाव में वक्री हो रहा है | जो लोग हाथ के कारीगर हैं अथवा डॉक्टर वैद्य इत्यादि हैं या वैज्ञानिक हैं तो आपके लिए आपके कार्य में उन्नति तथा सफलता की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु साथ ही भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का मन मुटाव भी सम्भव है | इस अवधि में यात्राएँ आपके लिए सम्भव है अनुकूल न सिद्ध हों |

सिंह : आपके लिए आपका द्वितीयेश और लाभेश होकर बुध आपके अष्टम भाव में वक्री हो रहा है | यदि कहीं पैसा Invest किया हुआ है तो उसके माध्यम से आपको लाभ होना आरम्भ हो सकता है | किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति से सम्पर्क हूँ सकता है जो धीरे धीरे प्रगाढ़ मित्रता में परिवर्तित हो सकता है जिसके कारण आपको अपने कार्य में लाभ भी प्राप्त हो सकता है | सम्भव है आपको कुछ विरोध का आभास हो, किन्तु इसके कारण चिन्ता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप स्वयं ही अपने बुद्धिबल से इस विरोध को शान्त करने में सक्षम हो सकते हैं |

कन्या : आपके लिए आपका योगकारक होकर आपके सप्तम भाव में बुध वक्री हो रहा है | आपके व्यवसाय में प्रगति की सम्भावना की जा सकती है | किसी मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आपको अर्थलाभ के साथ ही आपकी व्यस्तताएँ भी बढ़ सकती हैं | साथ ही आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कुछ कार्यों का निबटारा भी इस अवधि में कर सकते हैं | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

तुला : आपका नवमेश और द्वादशेश होकर बुध आपकी राशि से छठे भाव में वक्री हो रहा है | एक ओजहान आपके लिए मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं, धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत हैं, यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं, वहीं दूसरी ओर आपके मन में किसी प्रकार की निराशा और असुरक्षा की भावना भी बलवती हो सकती है | आवश्यकता है ध्यान का नियमित अभ्यास करने की | साथ यात्राओं के दौरान अपने Important Documents और सामान की सुरक्षा की भी आवश्यकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की सम्भावना की जा सकती है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका अष्टमेश और एकादशेश होकर बुध आपके पंचम भाव में वक्री हो रहा है | यद्यपि कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक लाभ की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है | शरीर में थकान, नींद में अभाव आदि का अनुभव इस अवधि में हो सकता है | अकस्मात् ही कहीं से अच्छा या बुरा कोई ऐसा समाचार भी प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आपके जीवन की दिशा ही बदल सकती है |

धनु : आपके लिए योगकारक होकर बुध आपके चतुर्थ भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह समय अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | सहकर्मियों तथा जीवन साथी का सहयोग और समर्थन निरन्तर आपको प्राप्त होता रहेगा जिसके कारण आपके कार्य भी भली भाँती सम्पन्न होते रहेंगे | मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु परिवार के मध्य से किसी प्रकार के विरोध अथवा तनाव की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता | ऐसी स्थिति में आवश्यकता है आप अपना स्वभाव में सकारात्मकता और शान्ति बनाए रखें |

मकर : आपका षष्ठेश और नवमेश होकर बुध आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | धार्मिक कार्यों में आपकी रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | इस अवधि में आप तीर्थयात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण आपकी दिनचर्या में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है | डॉक्टर के दिशानिर्देशों का पालन अवश्य करें | भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें |

कुम्भ : आपके लिए आपका पंचमेश और अष्टमेश होकर बुध आपकी राशि से दूसरे भाव में वक्री हो रहा है | आप अपने बौद्धिक कौशल से कार्य में सफलता था धनार्जन करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं | हाँ, अपनी वाणी और Temperament पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | आपका झुकाव धार्मिक, आध्यात्मिक तथा दार्शनिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ सकता है | किन्तु यदि कहीं पैसा Invest करना चाहते हैं तो या तो बही कुछ समय के लिए इस विचार को स्थगित कर दें, अथवा बहुत सोच समझकर आगे बढ़ें | आँख में किसी प्रकार का इन्फेक्शन भी सम्भव है | विरोधियों की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी बुज़ुर्ग का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मीन : आपका योगकारक आपकी लग्न में ही वक्री हो रहा है | एक ओर कार्य की दृष्टि से आपके लिए यह समय अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में नया घर भुई खरीद सकते हैं | प्रॉपर्टी विषयक समस्याओं का निदान इस अवधि में सम्भव है | किन्तु साथ ही यह भी सम्भव है कि आप जल्दबाज़ी में कोई निर्णय ले सकते हैं जो आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है | अतः जो भी कार्य करें भली भाँति सोच समझकर करें | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर तथा उनके मार्गी, वक्री अथवा अतिगामी होने का क्रम तो अपने नियत समय पर चलता ही रहेगा | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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बुध का मीन में गोचर

आज सोमवार 25 फरवरी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को प्रातः आठ बजकर 53 मिनट के लगभग विष्टि करण और ध्रुव योग में बुध ने मीन राशि में प्रवेश किया है | बुध इस समय पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर है | 28 फरवरी को यह उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर चला जाएगा | उसके बाद 15 मार्च को वक्री होकर पुनः पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और कुम्भ राशि में आ जाएगा | यहाँ 12 अप्रेल तक भ्रमण करने के बाद फिर से मार्गी होकर मीन राशि में गोचर करेगा | मीन राशि में भ्रमण करते हुए 15 अप्रेल को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और 25 अप्रेल को रेवती नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तीन मई को सायं पाँच बजकर तीन मिनट एक लगभग मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएगा | इस बीच आठ मार्च से 21 मार्च तक बुध अस्त भी रहेगा | मीन राशि के लिए बुध सप्तमेश और दशमेश होकर योगकारक भी बन जाता है | बुध की अपनी उच्च राशि कन्या से मीन राशि सप्तम भाव है तथा मिथुन से दशम भाव है | साथ ही वर्तमान में वृश्चिक राशि से बुध की राशियों के लिए और मीन राशि के लिए योगकारक गुरु की पञ्चम दृष्टि भी बुध को प्राप्त हो रही है | निश्चित रूप से मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियों के लिए बुध का यह गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है | तो जानने का प्रयास करते हैं कि बुध के मीन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | कार्य के सिलसिले में अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा सकते हैं | किन्तु सम्भव है ये यात्राएँ आपके लिए मनोनुकूल न रहे | नौकरी में हैं तो किसी अधिकारी के रिटायर होने के कारण आपकी उसके स्थान पर पदोन्नति के साथ ही किसी दूर के शहर में आपका ट्रांसफर भी हो सकता है | लेखकों के लिए, बैंकिंग अथवा कॉमर्स के क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वाले लोगों के लिए तथा दस्तकारों के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | किसी मित्र को पैसा उधार देना इस अवधि में उचित नहीं रहेगा | साथ ही आपके स्वयं के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं पर पैसा भी खर्च हो सकता है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है | उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | कुछ ऐसे नवीन कार्य भी आपको प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली तथा प्रखर बनी रहेगी, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में भी प्राप्त होगा | अधिकारी वर्ग तथा पिता और बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | पॉलिटिक्स में यदि आप हैं तो आपके लिए भी यह गोचर अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश होकर बुध आपके लिए योगकारक है और दूसरे योगकारक गुरु की मीन राशि में आपकी राशि से कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | आपका अपना कार्य है तो उसमें भी प्रगति की समभावना है | परिवार के लोगों का तथा कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं अथवा अपने स्टाफ में नवीन नियुक्तियाँ करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | परिवार में किसी सदस्य का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | कार्य के सिलसिले में अथवा दस्तकार हैं तो किसी प्रदर्शनी आदि के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | इन यात्राओं से आपके कार्य में आपको लाभ होगा किन्तु यात्राओं की अधिकता के कारण आप कुछ शारीरिक थकान का भी अनुभव कर सकते हैं – विशेष रूप से जोड़ों और माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | बीच बीच में कुछ योग के अभ्यास करते रहेंगे तो इस समस्या से बचे रह सकते हैं | तीर्थयात्रा आदि का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | परिवार में भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद से बचने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर आपके लिए कार्य में वृद्धि, पदोन्नति तथा प्रचुर अर्थलाभ की सम्भावना है तो वहीं दूसरी ओर गुप्त शत्रुओं की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है | आपके घनिष्ठ मित्रों की ओर से ही अकारण ही आपके लिए कुछ अनिष्ट हो सकता है, अतः अपने कान और आँख खुले रखने की आवश्यकता है | अपने पिता की सलाह पर चलेंगे तो आपके हित में रहेगा | आपकी वाणी अत्यन्त प्रभावशाली बनी रहेगी, जिसका लाभ आपको अपने कार्य में प्राप्त होगा | रुकी हुई पेमेण्ट भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक बन जाता है और आपके दूसरे योगकारक ग्रह गुरु की राशि मीन में आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य की अधिकता होने के साथ ही आर्थिक स्थिति में भी दृढ़ता की सम्भावना की जा सकती है | पार्टनरशिप में कोई कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | बैंकिंग तथा कॉमर्स के क्षेत्र से सम्बन्ध रखने वालों के लिए, वैद्यों के लिए, कम्प्यूटर, आई टी, मैनेजमेंट इत्यादि के क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में अपने किसी मित्र अथवा किसी सहकर्मी के साथ आप Romantically Involve हो सकते हैं, जो समय आने पर विवाह सम्बन्ध में भी परिणत हो सकता है |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी जिसका लाभ आपको अपने कार्यक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | किसी पुराने मित्र से फिर से सम्पर्क हो सकता है, जो आपके कार्य की दृष्टि से अनुकूल सिद्ध हो सकता है | किन्तु साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है | सरदर्द, जोड़ों तथा माँसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है | डॉक्टर के बताए विटामिन्स आदि समय पर लेते रहेंगे और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | यात्राओं में वृद्धि की सम्भावना है |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश आपकी राशि से आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में अपने कार्य से सम्बन्धित किसी प्रकार का Short Term Advance Course भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त अपनी सन्तान को भी किसी कोर्स के लिए भेज सकते हैं | साथ ही यदि आप लेखक अथवा वक्ता हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | आपके रुके हुए कार्य इस अवधि में पूर्ण होकर आपको उनका अनुकूल पारिश्रमिक भी इस अवधि में प्राप्त होने की सम्भावना है | अचानक ही किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जहाँ के विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी |

धनु : आपके लिए सप्तमेश और दशमेश होकर बुध आपका योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | आपको अपने कार्य में अपने माता पिता का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | आपके कार्य में तथा आर्थिक स्थिति में लाभ और वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | आपके लिए इस समय अपने कार्य पर एकाग्रचित्त रहने का समय है जिसका भविष्य में भी आपको लाभ हो सकता है | आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व का लाभ आपको अपने कार्य में मिलने की सम्भावना है | परिवार तथा कार्यस्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने के कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण कर सकने में समर्थ होंगे | अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपकी जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | किसी सहकर्मी के साथ Romantically involve भी हो सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | सम्भव है आपको अपने कार्य में किसी प्रकार के व्यवधान का अनुभव हो, किन्तु यह अस्थाई है | आपके उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है, इसका लाभ उठाना आप पर निर्भर करता है | यदि आप दस्तकार हैं अथवा लेखक हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी कला की तथा आपके लेखन की प्रशंसा होगी और इसका लाभ भी आपको प्राप्त होगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है, किन्तु पोंगा पण्डितों तथा व्यर्थ के अन्धविश्वासों के चक्कर में पड़कर आप अपना नुकसान भी कर सकते हैं, अतः इस ओर से सावधना रहने की आवश्यकता है | छोटे भाई बहनों से व्यर्थ का विवाद आपके हित में नहीं रहेगा |

कुम्भ : आपकी राशि से पंचमेश और अष्टमेश का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | आपकी निर्णायक तथा प्रतियोगी क्षमताओं में वृद्धि के साथ ही आपके कार्य की दृष्टि से भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं अथवा लेखन के क्षेत्र में हैं या वक्ता हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि प्राप्त होने के संकेत हैं | आपके कार्यों की सराहना होगी और आपकी योजनाओं को क्रियान्वित भी किया जा सकता है | नौकरी में पदोन्नति के भी संकेत हैं | राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु वाणी जहाँ प्रभावशाली बनी हुई है वहीं उस पर नियन्त्रण रखने की भी आवश्यकता है |

मीन : आपकी राशि से चतुर्थेश और सप्तमेश होकर बुध आपके लिए योगकारक बन जाता है तथा आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | एक ओर पारिवारिक स्तर पर आपके लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहने के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर आपके कार्य की दृष्टि से भी उन्नति की सम्भावना प्रतीत होती है | नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | आप अपने लिए नया घर भी इस अवधि में खरीद सकते हैं | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही मान सम्मान में भी वृद्धि की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | पॉलिटिक्स से यदि आपका सम्बन्ध है तो आपके लिए विशेष रूप से यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है |

किन्तु अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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मंगल का मीन राशि में गोचर

आज 22 दिसम्बर को अर्द्धरात्र्योत्तर 12:57 के लगभग मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा को आर्द्रा नक्षत्र, कौलव करण और ब्रह्म योग तथा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में विचरते हुए भूमिसुत मंगल का गोचर अपने मित्र ग्रह गुरु की मीन राशि में होगा | जहाँ 5 फरवरी 2019 को 23:48 तक भ्रमण करने के पश्चात यह अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण राशि मेष में प्रस्थान कर जाएगा | अपने इस भ्रमण के दौरान 28 दिसम्बर को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र तथा 17 जनवरी को रेवती नक्षत्र पर मंगल भ्रमण करेगा | मीन राशि से मंगल की दृष्टियाँ मिथुन, कन्या तथा तुला राशियों पर रहेंगी | अर्थात मिथुन, कन्या तथा तुला राशि मंगल के इस गोचर से प्रभावित रहेंगी | जानने का प्रयास करते हैं मंगल के मीन राशि में गोचर के विभिन्न राशियों के जातकों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की विशेष रूप से आवश्यकता है अन्यथा स्वास्थ्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना की जा सकती है | इस अवधि में आप कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | छोटे भाई बहनों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है, किन्तु उनके साथ आपके सम्बन्धों में कुछ तनाव भी उत्पन्न हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल आपके लाभ स्थान में गोचर करेगा | आपके लिए कार्य सम्बन्धी यात्राओं में वृद्द्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से यह गोचर आपके, आपके जीवन साथी तथा आपकी सन्तान के लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपके पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवाश्यकता इस अवधि में रहेगी | कार्य स्थल पर सहकर्मियों का सहयोग आपको प्राप्त रह सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के दशम भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि के साथ ही कार्य में उन्नति के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही आय में वृद्धि के भी संकेत हैं | किसी पुरूस्कार आदि की प्राप्ति की सम्भावना भी की जा सकती है | अधिकारियों तथा सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें भी आप वृद्धि कर सकते हैं अथवा कोई नई ब्रांच खोल सकते हैं |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश का गोचर आपके भाग्य स्थान में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके कार्य में प्रगति तथा आय में वृद्धि के संकेत हैं वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन भी हो सकता है अथवा आपकी सन्तान का विवाह सम्बन्ध कहीं हो सकता है | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं के भी योग प्रतीत होते हैं |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | अचानक ही किसी ऐसे स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना है जहाँ की आपने कल्पना भी नहीं की होगी | किसी वसीयत के माध्यम से आपको प्रॉपर्टी का लाभ भी हो सकता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित व्यवसाय में लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | सम्भव है आपको किसी कार्य में आरम्भ में व्यवधान का भी अनुभव हो | किन्तु वह व्यवधान अधिक समय नहीं रहेगा और आपका कार्य पुनः आगे बढ़ सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश होकर मंगल का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | आपके छोटे भाई बहनों के कारण आपके जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में किसी प्रकार के तनाव की सम्भावना है | किन्तु कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | अचानक ही आपको किसी घनिष्ठ मित्र के माध्यम से नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | किन्तु अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके छठे भाव में गोचर कर रहा है | विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं किन्तु इन यात्राओं में आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है | भाई बहनों के साथ व्यर्थ का विवाद भी इस अवधि में सम्भव है जिसका प्रतिकूल प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी हो सकता है | किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्द्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | कार्य की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर आपके लिए अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए भी ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | अपने तथा अपनी सन्तान के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपकी राशि के लिए पंचमेश तथा द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है | परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है | अच्छा यही रहेगा कि जहाँ आपका वश न चले वहाँ आप अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम रखें | यों कार्य में प्रगति तथा आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत भी हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही किसी ऐसे स्थान पर आपका ट्रांसफर भी हो सकता है जहाँ आप पहले से जाना चाहते थे | परिवार के साथ कहीं देशाटन का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष आदि में हो सकती है |

मकर : आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों तथा सन्तान का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | स्वयं का व्यवसाय तो उसमें लाभ की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पद्दोंनती के साथ अर्थलाभ की भी सम्भावना है | अधिकारीगणों तथा घनिष्ठ मित्रों का सहयोग निरन्तर प्राप्त रहेगा | प्रॉपर्टी के व्यवसाय में लाभ की सम्भावना है | धार्मिक गतिविधियों में रूचि में वृद्धि हो सकती है | पॉलिटिक्स में जो लोग हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपके लिए आपका तृतीयेश और दशमेश आपकी राशि से द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है – विशेष रूप से यदि आप हाथ के कारीगर है, लेखक या कलाकार हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो वहाँ भी किसी उच्च पद के प्राप्ति की सम्भावना है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें उन्नति तथा आर्थिक लाभ की सम्भावना भी की जा सकती है | आपकी रूचि धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ सकती है | स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मीन : आपके लिए तो आपका द्वितीयेश और भाग्येश आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आर्थिक तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | विशेष रूप से यदि आप लेखक हैं, बुद्धिजीवी हैं अथवा किसी आधिकारिक पद पर आसीन हैं तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लेखन की प्रशंसा होगी तथा उसके लिए आपको पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है | नौकरी की तलाश में हैं तो आशानुकूल नौकरी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रह सकता है | किसी नवीन सदस्य का आगमन भी परिवार में हो सकता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की तलाश भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

अन्त में, किसी एक ही ग्रह के गोचर के आधार पर स्पष्ट फलादेश नहीं किया जा सकता | उसके लिए योग्य Astrologer द्वारा व्यक्ति की कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन आवश्यक है |

तथापि, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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गुरु का वृश्चिक में गोचर

वृश्चिक में गुरु के गोचर का मीन राशि पर सम्भावित प्रभाव

सर्वप्रथम सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाह तथा सन्तान सुख की प्राप्ति, यश और धन आदि के कारक देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह शुक्र की राशि तुला से निकल कर मित्र ग्रह मंगल की वृश्चिक राशि में प्रस्थान कर चुके हैं | वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए गुरु वृश्चिक राशि को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही गुरु की दृष्टियाँ वृश्चिक राशि से पञ्चम भाव यानी स्वयं अपनी राशि मीन पर, वृश्चिक से सप्तम भाव यानी वृषभ राशि और वृश्चिक राशि से भाग्य स्थान यानी कर्क राशि पर रहेंगी | इस प्रकार गुरु अपने इस गोचर में वृश्चिक, मीन, वृषभ तथा कर्क राशियों को सीधे रूप से प्रभावित करेगा | निश्चित रूप से इन राशियों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहने की सम्भावना की जा सकती है | जानने का प्रयास करते हैं कि मीन राशि के जातकों पर गुरु के वृश्चिक राशि में गोचर के क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

गुरु आपका राश्यधिपति भी है और आपके दशम भाव का अधिपति भी है और आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | जहाँ से गुरु की दृष्टियाँ आपकी लग्न को, तृतीय भाव को तथा पंचम भाव को प्रभावित कर रही हैं | आपके लियेः गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके लिए उत्साह और आत्म विश्वास में वृद्धि के संकेत प्रतीत होते हैं | यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपकी पदोन्नति के साथ ही आपकी आय में भी वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही आप अपने भाई बहनों के लिए भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं | आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण अवसर इस अवधि में उपलब्ध हो सकता है और इसके लिए आपको दूसरों से सहयोग भी प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आपकी आरती स्थिति में दृढ़ता के कारण आप भविष्य के लिए भी योजनाएँ बनाने में सफल हो सकते हैं | मान सम्मान में वृद्धि तथा उपहार आदि की प्राप्ति के योग भी बन रहे हैं |

आप मित्रों के साथ भ्रमण का कार्यक्रम भी बना सकते हैं | किन्तु अपने खर्चों पर रोक लगाने की आवश्यकता है | बजट बनाकर नहीं चलेंगे तो किसी प्रकार की समस्या भी हो सकती है – विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | सन्तान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | नौकरी की तलाश में हैं तो मनोनुकूल नौकरी भी इस अवधि में प्राप्त हो सकती है | दाम्पत्य जीवन में भी मध्र्ता और प्रगाढ़ता बनी रह सकती है | आप वंश वृद्धि के लिए भी इस अवधि में सफल प्रयास कर सकते हैं |

स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किन्तु 28 अक्टूबर से 27 दिसम्बर के मध्य स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | योगाभ्यास और प्राणायाम तथा ध्यान को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेंगे तथा खान पान पर ध्यान देंगे तो बहुत सी समस्याओं से बचे रह सकते हैं |

अन्त में, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी – Astrologer – के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराना आवश्यक है | साथ ही, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें तथा माँ भगवती की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहे, यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/10/19/jupiter-transit-in-scorpio-for-pisces/