सूर्य का मेष राशि में संक्रमण

सूर्य के मेष राशि में संचार के विषय में चर्चा आरम्भ करने से पूर्व – कल बैसाखी का उल्लासमय पर्व है, जिसके लिए सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ…

कल, शनिवार 14 अप्रेल 2018 को प्रातः आठ बजकर बारह मिनट पर भगवान् भास्कर अपने एक मित्र गुरु की राशि मीन से निकल कर दूसरे मित्र मंगल की राशि मेष में भ्रमण करने के लिए प्रस्थान करेंगे, जो उनकी उच्च राशि भी है तथा सूर्य की अपनी सिंह राशि से नवम भाव है, और जहाँ वे मंगलवार 15 मई को प्रातः लगभग पाँच बजे तक विश्राम करेंगे | मेष राशिचक्र की प्रथम राशि भी है और सूर्य का मेष में गोचर सौर वर्ष का प्रथम दिवस भी होता है | सूर्य आत्मा का कारक ग्रह है |

कल ही बैसाखी का उल्लासमय पर्व भी है जो फसल काटने के बाद नए साल के आरम्भ के रूप में मनाया जाता है और समस्त भारत में अलग अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे: केरल में इसे “विशू” के रूप में जाना जाता है, बंगाल में “पोइला बैसाख”, असम में “रोंगाली बिहू” तथा तमिलनाडु में “पुथांडू” के रूप में इसे मनाया जाता है | कहने का तात्पर्य यही है कि सूर्य का मेष राशि में संक्रमण इतना अधिक महत्त्वपूर्ण है कि इस अवसर को लगभग पूरे देश में उत्साह के साथ एक विशेष पर्व के रूप में अलग अलग नामों से मनाया जाता है | यहाँ मेष राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर होने वाले सम्भावित परिणामों पर दृष्टिपात करने का प्रयास किया गया है | किन्तु ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

भगवान् भास्कर का अपनी उच्च राशि में गोचर सभी के लिए मंगलमय हो

और सभी को सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाए…

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http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/04/13/suns-transit-in-aries/

 

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