Category Archives: शनि – Saturn

कन्या और तुला राशि के जातकों के लिए शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के सिंह राशि के जातकों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा की थी, आज कन्या और तुला राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है…

कन्या राशि : आपके लिए पंचमेश तथा षष्ठेश होकर शनि का गोचर आपके पञ्चम भाव में ही हो रहा है जहाँ से आपके सप्तम भाव, एकादश भाव तथा द्वितीय भाव पर इसकी दृष्टियाँ हैं | इस गोचर के साथ ही पिछले ढाई वर्षों से चली आ रही ढैया भी समाप्त होने जा रही है – जिसने सम्भव है आपको हिला कर रख दिया होगा | लेकिन अब धीरे धीरे परिस्थितियों के सामान्य होने की सम्भावना की जा सकती है | यदि आपने कोई कोर्स बीच में छोड़ दिया है तो दोबारा से आप उसे आरम्भ कर सकते हैं और आपको उसमें सफलता भी प्राप्त होगी | आपकी गम्भीरता में वृद्धि होगी और आप कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय इस अवधि में ले सकते हैं | किन्तु यदि वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए मई 2020 से सितम्बर 2020 तक का समय अनुकूल नहीं रहेगा |

पञ्चम भाव से सन्तान का विचार किया जाता है | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल रहने की सम्भावना है |कन्या आपकी सन्तान का हर क्षेत्र में प्रदर्शन उत्तम रहने की सम्भावना है | सन्तान की ओर से सन्तोष और सुख दोनों ही प्राप्त होने की सम्भावना है | सन्तान का विवाह भी इस अवधि में सम्भव है | किन्तु आपके लिए ससुराल अथवा ननसाल पक्ष के साथ सम्बन्धों में कुछ दरार उत्पन्न हो सकती है | विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र छात्राओं के लिए शनि का यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | विद्यार्थियों को उनके मनपसन्द विद्यालयों में एडमीशन भी मिल सकता है |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो मिश्रित फलों की सम्भावना की जा सकती है | एक ओर किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति प्राप्त हो सकती है, तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई नवीन समस्या भी उत्पन्न हो सकती है | नियमित चेकअप तथा खान पान में नियन्त्रण के साथ ही योग व्यायाम और ध्यान प्राणायाम का अभ्यास आपके लिए आवश्यक है |

अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह सम्बन्ध कहीं निश्चित हो सकता है अथवा प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो सकता है, किन्तु विवाह में शीघ्रता उचित नहीं रहेगी | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ ईमानदार तथा सहृदय रहने की आवश्यकता है, अन्यथा सम्बन्धों में दरार पड़ते देर नहीं लगेगी |

तुला राशि : आपके लिए चतुर्थेश और पंचमेश होकर शनि योगकारक बन जाता है तथा आपके चतुर्थ भाव में ही गोचर कर रहा है जहाँ से आपके छठे भाव, दशम भाव तथा आपकी लग्न पर इसकी दृष्टि रहेगी | एक ओर तो आपके लिए यह शुभ संकेत है, किन्तु दूसरी ओर आपकी शनि की ढाई साल की ढैया भी आरम्भ हो रही है – जो चिन्ता का विषय हो सकती है – विशेष रूप से मई 2020 से सितम्बर 2020 के मध्य – जब शनि वक्री होगा | उस समय आपको अपने स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता होगी | साथ ही आपका अहम आपके बनाते बनाते कार्यों में आड़े आ सकता है, अतः इस ओर से भी सावधान रहकर अपने व्यवहार को सन्तुलित रखने की आवश्यकता होगी | शनि के वक्री होने पर माता जी के साथ भी विवाद सम्भव है | यदि ऐसा लगे तो अच्छा यही रहेगा कि आप इतने समय के लिए दूरी बना लें ताकि विवाद अधिक बढ़ने न पाए |

इस अवधि में आपके समक्ष व्यापार के अनेक नवीन अवसर उपस्थित हो सकते हैं | किन्तु यदि किसी प्रोजेक्ट में तुलापैसा Invest करना हो सोच समझकर तथा सम्बन्धित कार्यों के जानकारों से अच्छी तरह सलाह मशविरा करके है आगे बढें | किसी के कहने मात्र से पैसा कहीं Invest न करें | कार्य से सम्बन्धित छोटी छोटी विदेश यात्राओं के भी अवसर उपलब्ध हो सकते हैं | आप नया घर अथवा वाहन अथवा दोनों ही खरीद सकते हैं और ये आपके लिए शुभ भी रह सकते हैं | कोर्ट कचहरी के मामलों से बचने की आवश्यकता है |

स्वास्थ्य का जहाँ प्रश्न है तो यों सामान्य रूप से स्वास्थ्य ठीक ही रहने की सम्भावना है | किन्तु इसके लिए आपको आलस्य का त्याग करके व्यायाम और योग का अभ्यास करते रहना होगा | साथ ही किसी भी प्रकार की ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करें जिनके कारण आपको मानसिक तनाव हो सकता है | अपनी माता जी तथा सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता होगी |

अनुकूल जीवन साथी की खोज में हैं तो वह खोज इस अवधि में पूर्ण हो सकती है | सम्भव है किसी सहकर्मी अथवा किसी निकट के सम्बन्ध में ही आपका विवाह सम्पन्न हो जाए | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ व्यर्थ के विवाद बचने का प्रयास करें | साथ ही जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे वृश्चिक राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/15/saturn-transit-in-capricorn-7/

कर्क राशि के लिए शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभाव

शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के मिथुन राशि के जातकों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा की थी, आज कर्क राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | अस्तु, आज कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए उनका सप्तमेश और अष्टमेश होकर शनि का गोचर उनके सप्तम भाव में हो रहा है, जहाँ से उनके नवम भाव, लग्न और चतुर्थ भाव पर शनि की दृष्टियाँ रहेंगी | यदि आपने अपने आलस्य का त्याग कर दिया तो आपको अपने कार्यों में सफलता की सम्भावना की जा सकती है | आप इसी वर्ष यानी 2020 में ही अपने व्यापार से सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं जो आपके लिए लाभदायक भी सिद्ध हो सकते हैं | यदि आपका कार्य किसी प्रकार भी विदेश से सम्बन्ध रखता है तो उसमें भी आपके लिए लाभ की सम्भावना की जा सकती है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको कोई महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्राप्त हो सकता है जिसके कारण आप दीर्घ समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थ लाभ कर सकते हैं | किसी नई नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकती है | आपके स्वभाव में भी इस अवधि में गम्भीरता आने की सम्भावना है जिसके कारण आप स्वयं ही समस्त निर्णय और कार्य सोच समझ कर ही करेंगे तथा लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहेंगे |

आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं | ऐसा भी सम्भव है आप जिस घर में अभी रहते हैं उसे ही Renovate करा लें | इस कार्य में आपके परिवार का सहयोग भी आपको उपलब्ध रह सकता है | कार्यस्थल पर सहयोग का वातावरण बना रहने की सम्भावना है | परिवार में बच्चे के जन्म की भी सम्भावना है | ड्राइविंग के समय सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी के साथ भी व्यर्थ के विवाद में न उलझें अन्यथा धनहानि की सम्भावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता |

अपने तथा अपनी माता जी के स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | कोई पुरानी बीमारी फिर से उभर सकती है अतः नियमित चेकअप आपके लिए आवश्यक है | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके लिए तो निश्चित रूप से नियमित चेकअप तथा डॉ के दिशा निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है |

शनि का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है और सप्तम भाव विवाह तथा जीवन साथी के लिए देखा जाता है | यदि आप अविवाहित हैं और जीवन साथी की तलाश में हैं तो आपको अनुकूल जीवन साथी मिलने की सम्भावना है – किन्तु माता पिता तथा परिवार की सहमति से ही यह कार्य करेंगे तो आपके हित में रहेगा | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में माधुर्य तथा हर्षोल्लास बना रहने की सम्भावना है | जीवन साथी के साथ देश विदेश घूमने का भी आनन्द ले सकते हैं |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे सिंह राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/11/saturn-transit-in-capricorn-5/

मिथुन राशि के लिए शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के वृषभ राशि के जातकों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा की थी, आज मिथुन राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | अस्तु, आज मिथुन राशि

आपके लिए आपका अष्टमेश और नवमेश होकर शनि का गोचर आपके अष्टम भाव में ही हो रहा है जहाँ से आपके कर्म स्थान यानी दशम भाव, वाणी और धन भाव यानी दूसरे भाव तथा सन्तान भाव यानी पञ्चम भाव पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके लिए यह गोचर अनुकूल नहीं प्रतीत होता | अष्टम भाव आयु और मृत्यु का भाव भी कहा जाता है | साथ ही मिथुन राशि वालों के लिए अष्टम की मिथुन राशि वालों के लिए ढाई वर्ष की अष्टम भाव की ढैया भी आरम्भ हो जाएगी | यदि आपने अपनी वाणी पर नियन्त्रण नहीं रखा तो आपके बनते बनते कार्य भी रुक सकते हैं | कार्य में सफलता प्राप्त उच्च अधिकारियों के साथ व्यर्थ का विवाद भी जन्म ले सकता है जिसका विपरीत प्रभाव आपके कार्य पर पड़ सकता है | अचानक ही कार्य में व्यवधान का अनुभव भी हो सकता है | इसलिए आप जो भी कार्य करें सोच समझकर ही करें |

आर्थिक मामलों से सम्बन्धित कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय यदि लेना हो तो सम्बन्धित व्यक्तियों से अच्छी तरह सलाह करके ही लें | हाँ, जिन लोगों के कार्य विदेश से सम्बन्ध रखते हैं उनके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई केस चल रहा है तो उसमें भी आपके पक्ष में निर्णय आ सकता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि तथा धार्मिक स्थलों की तीर्थ यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपके लिए शनि के मन्त्र का जाप अनुकूल रहेगा | सन्तान के साथ व्यर्थ की बहस सम्बन्धों में दरार उत्पन्न कर सकती है, अतः सावधान रहे |

स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है अन्यथा अचानक ही किसी गम्भीर बीमारी के कारण आपके कार्य में मिथुनव्यवधान भी उपस्थित हो सकता है | खान पान पर नियन्त्रण रखने की बहुत आवश्यकता है | तनाव से बचने का प्रयास करें अन्यथा ब्लड प्रेशर सम्बन्धी समस्या हो सकती है | यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपको विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है |

अविवाहित हैं तो प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो सकता है, किन्तु आपके अपने स्वभाव के कारण उसमें दरार भी उत्पन्न हो सकती है | विवाहित हैं तो भी अपने स्वभाव और वाणी पर ध्यान देने की आवश्यकता है | जीवन साथी के साथ ईमानदार रहने की भी आवश्यकता है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे कर्क राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/10/saturn-transit-in-capricorn-4/

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के मेष राशि के जातकों पर सम्भावित प्रभावों के विषय में चर्चा की थी, आज वृषभ राशि के जातकों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर संक्षेप में दृष्टिपात…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | अस्तु, आज वृषभ राशि

आपकी अष्टम भाव की ढैया समाप्त हो रही है जो आपके लिए राहत की बात हो सकती है | बहुत सी समस्याओं के समाप्त होने की सम्भावना की जा सकती है | आपके लिए नवम और दशम भाव का स्वामी होकर शनि योगकारक बन जाता है और इस समय आपके नवम भाव यानी भाग्य स्थान में ही गोचर करेगा जहाँ से आपके एकादश भाव, तृतीय स्थान तथा छठे भावों पर शनि की दृष्टियाँ रहेंगी | नवम भाव पिता का स्थान भी माना जाता है | सम्भव है आरम्भ में पिता के साथ किसी प्रकार का मतभेद हो किसी बात पर, किन्तु धीरे धीरे अनुकूलता की सम्भावना भी की जा सकती है, क्योंकि शनि आपके लिए योगकारक है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक माना जा सकता है | यदि किसी नई नौकरी की तलाश में हैं तो वह भी आपको प्राप्त हो सकती है, लेकिन उसके लिए भाग दौड़ अधिक करनी पड़ेगी | कार्य में पदोन्नति तथा आय में वृद्धि की भी सम्भावना है | आलस्य को त्याग कर कार्य करते रहे तो भाग्योदय का समय है, अन्यथा हाथ में आया कार्य भी आपसे दूर जा सकता है |

यदि आप अनुकूल दिशा में प्रयास करते रहे तो आपके रुके हुए कार्य भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | सहकर्मियों का सहयोग आपको उपलब्ध रहेगा | कार्यस्थल पर सौहार्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है जिसके कारण आप अपने कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम होंगे | किन्तु इस अवधि में भाई बहनों के साथ किसी वृषभप्रकार का विवाद भी सम्भव है | विवाद से बचने का एक ही उपाय है – अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखें | साथ ही, ध्यान रखें कि जो भी वादा आपने किया है उसे पूर्ण करने का प्रयास करें, अन्यथा आपके सम्मान को ही ठेस पहुँचेगी | बॉस का सहयोग प्राप्त रहेगा, किन्तु उसके साथ किसी प्रकार का पंगा आपके हित में नहीं रहेगा | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | आप सपरिवार किसी धार्मिक स्थल पर तीर्थ यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो एक ओर तो किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति की सम्भावना की जा सकती है, किन्तु वहीं दूसरी ओर यदि अपना Temperament सही नहीं रखा तो तनाव के कारण नींद में कमी तथा उससे जुड़ी अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं | आलस्य का त्याग कर योग और प्राणायाम पर ध्यान दें |

अविवाहित हैं तो किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध बन सकता है, किन्तु विवाह में अभी समय लग सकता है | विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन में मधुरता बने रहने की सम्भावना की जा सकती है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे मिथुन राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/09/saturn-transit-in-capricorn-3/

शनि का मकर में गोचर

कल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के समय आदि के विषय में चर्चा की थी, आज सभी राशियों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर चर्चा…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | क्योंकि शनि का जहाँ तक प्रश्न है तो “शं करोति शनैश्चरतीति च शनि:” अर्थात, जो शान्ति और कल्याण प्रदान करे और धीरे चले वह शनि… अतः शनिदेव का गोचर कहीं भी हो, घबराने की या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है… अपने कर्म की दिशा सुनिश्चित करके आगे बढ़ेंगे तो कल्याण ही होगा… अस्तु, आज मेष राशि

आपके लिए शनि आपके कर्म स्थान तथा लाभ स्थान का स्वामी है और आपके कर्म स्थान में अपनी ही राशि में गोचर करने जा रहा है, जहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके द्वादश भाव, चतुर्थ भाव तथा सप्तम भावों पर हैं | शनि को कर्म का मेषस्वामी भी कहा जाता है | किन्तु इसकी गति बहुत धीमी है | आपके कार्यों में प्रगति तथा उनके कारण आपके लिए अर्थ लाभ की सम्भावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता, किन्तु इन सबकी गति धीमी रह सकती है तथा अपने कार्य को समय पर पूर्ण करके उसका पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए आपको अधिक श्रम भी करना पड़ सकता है | किन्तु इस समय आप जितना अधिक श्रम कर लेंगे उतना ही आपके भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त होता जाएगा | साथ ही, आपके पराक्रम में वृद्धि की सम्भावना इस गोचर से की जा सकती है जो आपके लिए कार्य की दृष्टि से उत्तम रहेगा |

यदि आप किसी नौकरी में हैं तो आपके लिए प्रमोशन की सम्भावना की जा सकती है | जो लोग नवीन नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं उन्हें इस समय कोई मनोनुकूल नौकरी भी प्राप्त हो सकती है | यदि अपना स्वयं का कार्य है तो उसमें प्रगति की सम्भावना है | नए क्लायिन्ट्स बन सकते हैं जिनके साथ लम्बे समय तक कार्य करते हुए अर्थलाभ कर सकते हैं | किन्तु जो भी महत्त्वपूर्ण निर्णय कार्य के सम्बन्ध में लेने हों ग्यारह मई से पूर्व ही ले लें तो अच्छा रहेगा, क्योंकि उसके बाद 29 सितम्बर 2020 तक शनि वक्री रहेगा जो अशुभ तो नहीं रहेगा किन्तु कार्य में देरी हो सकती है | आप अपने लिए नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं |

स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है, तो आपको त्वचा सम्बन्धी किसी रोग की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता होगी | खान पान पर ध्यान देना आपके लिए आवश्यक है | किसी पारिवारिक क्लेश के कारण कुछ तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है | मन को शान्त रखने तथा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग ध्यान आदि के सहारा लें | जीवन साथी और अपनी माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अविवाहित हैं और जीवन साथी की तलाश में हैं तो आपका कोई प्रेम सम्बन्ध विवाह में परिणत हो सकता है | साथ ही विवाहित और अविवाहित दोनों ही परिस्थितियों में सम्बन्धों में माधुर्य बनाए रखने के लिए तथा अकारण ही तनाव से बचने के लिए अपने टेम्परामेंट पर नियन्त्रण रखना आवश्यक है |

अन्त में बस इतना ही कि यदि कर्म करते हुए भी सफलता नहीं प्राप्त हो रही हो तो किसी अच्छे ज्योतिषी के पास दिशानिर्देश के लिए अवश्य जाइए, किन्तु अपने कर्म और प्रयासों के प्रति निष्ठावान रहिये – क्योंकि ग्रहों के गोचर तो अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं, केवल आपके कर्म और उचित प्रयास ही आपको जीवन में सफल बना सकते हैं…

आगे वृषभ राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/08/saturn-transit-in-capricorn-2/

शनि का मकर में गोचर

माघ मास की अमावस्या को यानी शुक्रवार 24 जनवरी 2020 को दिन में नौ बजकर अट्ठावन मिनट के लगभग अनुशासन और न्याय का कारक माना जाने वाला ग्रह शनि तीन वर्षों से भी कुछ अधिक समय गुरु की धनु राशि में व्यतीत करके चतुष्पद करण और वज्र योग में उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर रहते हुए ही अपनी स्वयं की राशि मकर में प्रविष्ट हो जाएगा | यहाँ विचरण करते हुए शनि 22 जनवरी 2021 को श्रवण नक्षत्र तथा 18 फरवरी 2022 को धनिष्ठा नक्षत्रों पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 जनवरी 2023 को सायं छह बजकर चार मिनट के लगभग अपनी स्वयं की दूसरी राशि कुम्भ – जो शनि की मूल त्रिकोण राशि भी है – में प्रस्थान कर जाएगा | उत्तराषाढ़ नक्षत्र के स्वामी सूर्य, श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्र तथा धनिष्ठा के अधिपति मंगल इन तीनों के साथ शनि की शत्रुता है | इस बीच ग्यारह मई 2020 से 29 सितम्बर 2020 तक शनि वक्री भी रहेगा | सामान्यतः शनि के वक्री होने पर व्यापार में मन्दी, राजनीतिक दलों में मतभेद, जन साधारण में अशान्ति तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और आँधी तूफ़ान आदि की सम्भावनाएँ अधिक रहती हैं | 7 जनवरी 2021 से दस फरवरी 2021 तक शनि अस्त भी रहेगा |

शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव शुरू हो जाता है तो कुछ को इन सब चीजों से राहत मिल जाती है | मकर राशि में भ्रमण करते हुए तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चलेगी – धनु राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती का अन्तिम चरण होगा, मकर राशि के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण होगा तथा कुम्भ राशि के जातकों के लिए सात वर्ष की साढ़ेसाती का आरम्भ होगा | साथ ही मिथुन और तुला राशियों के लिए शनि की ढैया भी आरम्भ हो जाएगी |

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि को कर्म और सेवा का कारक माना जाता है | यही कारण है कि शनि के वक्री अथवा मार्गी होने का प्रभाव व्यक्ति के कर्मक्षेत्र पर भी पड़ता है | शनि को अनुशासनकर्ता भी माना जाता है और मकर राशि राशिचक्र की दशम राशि है | दशम भाव कर्म का भाव माना जाता है | इस प्रकार शनि का मकर राशि में गोचर इस सत्य का भी संकेत कहा जा सकता है कि आशावादी होना अच्छा है, किन्तु आवश्यकता से अधिक आशावादी होकर निष्कर्मण्य हो बैठ रहना मूर्खता ही कहा जाएगा | मकर राशि में शनि का गोचर इस बात का संकेत है कि यदि हमने अच्छी तरह नींव मज़बूत करके भविष्य के लिए योजनाएँ तैयार करके उन पर कार्य आरम्भ कर दिया और लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त रहे तो हमें लक्ष्य प्राप्ति से कोई रोक नहीं सकता |

मकर राशि पर भ्रमण करते हुए शनि की तीसरी दृष्टि मीन पर, सप्तम दृष्टि कर्क पर तथा दशम दृष्टि तुला पर रहेगी | इनमें से मीन राशि के लिए शनि एकादशेश और द्वादशेश होता है तथा मकर राशि से मीन राशि तीसरे भाव में आती है | इसी प्रकार कर्क के लिए शनि सप्तमेश और अष्टमेश होता है तथा कर्क राशि मकर राशि के लिए सप्तम भाव बन जाती है | तुला राशि के लिए शनि चतुर्थेश और पंचमेश होकर योगकारक हो जाता हैं तथा मकर राशि के लिए तुला राशि दशम भाव बन जाती है |

इन्हीं सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अगले लेख में जानने का प्रयास करेंगे शनि के मकर राशि में गोचर के समस्त बारह राशियों के जातकों पर क्या प्रभाव सम्भव हैं…

आगे मेष राशि पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर बात करेंगे… किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है | क्योंकि शनि का जहाँ तक प्रश्न है तो “शं करोति शनैश्चरतीति च शनि:” अर्थात, जो शान्ति और कल्याण प्रदान करे और धीरे चले वह शनि… अतः शनिदेव का गोचर कहीं भी हो, घबराने की या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है… अपने कर्म की दिशा सुनिश्चित करके आगे बढ़ेंगे तो कल्याण ही होगा…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/01/06/saturn-transit-in-capricorn/

शनि का धनु में गोचर और वक्री शनि

वक्री और मार्गी शनि

26 अक्टूबर 2017 से 24 जनवरी 2020 तक शनि का गोचर धनु राशि में रहेगा | इसी मध्य 18 अप्रेल 2018 से 6 सितम्बर तक शनिदेव वक्री भी रहे | लगभग साढ़े चार माह वक्री चाल चलने के बाद 6 सितम्बर को 17:24 के लगभग शनिदेव मार्गी हुए हैं | धनु राशि में संचार करते हुए वर्तमान में वृश्चिक, धनु और मकर राशियों पर साढ़ेसाती का प्रभाव भी चल रहा है | साथ ही वृषभ और कन्या राशियों पर शनि की ढैया भी चल रही है | सामान्यतः शनि के वक्री होने पर व्यापार में मन्दी, राजनीतिक दलों में मतभेद, जन साधारण में अशान्ति तथा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और आँधी तूफ़ान आदि की सम्भावनाएँ अधिक रहती हैं | किन्तु अब पुनः मार्गी हो जाने पर इस प्रकार की घटनाओं में कमी की सम्भावना की जा सकती है | वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि को कर्म और सेवा का कारक माना जाता है | यही कारण है कि शनि के वक्री अथवा मार्गी होने का प्रभाव व्यक्ति के कर्मक्षेत्र पर भी पड़ता है | शनि को अनुशासनकर्ता भी माना जाता है और धनु राशिचक्र की नवम राशि है | नवम भाव भाग्य, धर्म, आध्यात्म, पिता, गुरु और शिक्षक का माना जाता है | धनु का राश्यधिपति गुरु भी इन्हीं समस्त बातों का प्रतिनिधित्व करता है | सम्भवतः इसीलिए धनु राशि में शनि का होना इस सत्य का भी संकेत होता है कि हमारे स्वयं के अनुभव ही हमारे सबसे बड़े गुरु होते हैं जिनसे शिक्षा प्राप्त करके हम अपनी नकारात्मकताओं को त्याग कर सकारात्मकता के साथ पुनः खड़े होकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं | साथ ही यह भी कि आशावादी होना अच्छा है, किन्तु आवश्यकता से अधिक आशावादी होकर निष्कर्मण्य हो बैठ रहना मूर्खता ही कहा जाएगा | तो आइये जानने का प्रयास करते हैं कि धनु राशि में गोचर करते हुए वक्री और पुनः मार्गी होने के जनसाधारण पर क्या प्रभाव हो सकते हैं…

मेष : शनि आपके लिए कर्म स्थान और लाभ स्थानों का स्वामी होकर आपके नवम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत सम्बन्धों की दृष्टि से यह गोचर आपके लिए भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | शनि के वक्री होने की स्थिति में अभी तक आपके व्यक्तिगत जीवन में अनेक प्रकार की उथल पुथल की स्थिति चल रही थी | किन्तु अब पुनः मार्गी होने से उस स्थिति में धीरे धीरे सुधार की आशा की जा सकती है | समाज में मान सम्मान तथा कार्य में प्रगति की सम्भावना भी की जा सकती है | व्यक्तिगत सम्बन्धों की दृष्टि से भी यह समय आपके लिए भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है |

वृषभ : आपके लिए आपका योगकारक होकर शनि का गोचर आपके अष्टम भाव में हो रहा है | आपकी राशि के लिए शनि की ढैया भी चल रही है | बहुत अधिक अनुकूल यह गोचर नहीं कहा जा सकता | वक्री रहते हुए इसके कारण आपके आत्म विशवास में भी कमी आई होगी | कार्य में भी रुकावटों का सामना करना पड़ा होगा | अब मार्गी होने पर सम्भव है परिस्थितियों में कुछ सुधार का अनुभव हो, किन्तु कुछ अधिक सुधार की आशा नहीं की जा सकती | आपको विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य तथा पारिवारिक विवादों के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है | इन बातों का विपरीत प्रभाव आपके कार्य पर भी पड़ सकता है | कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं को पहचान कर उनकी ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपके अष्टमेश और भाग्येश का गोचर आपके सप्तम भाव में चल रहा है | मिश्रित फल देने वाला गोचर है | आरम्भ में आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक रहा होगा, किन्तु शनि के वक्री होने की स्थिति में आपके परिश्रम का जितना परिणाम आपको प्राप्त होना चाहिए थे सम्भव है उतना अच्छा परिणाम आपको न प्राप्त हुआ हो | अब शनि के मार्गी होने से परिस्थितियों में सुधार की आशा की जा सकती है | व्यक्तिगत सम्बन्धों में यदि आप स्पष्ट नहीं रहेंगे या किसी प्रकार का दुराव छिपाव करेंगे तो आपके लिए घातक हो सकता है | साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : सप्तमेश और अष्टमेश होकर शनि का छठे भाव में गोचर जीवन में बहुत सी उथल पुथल का कारक होता है | आरम्भ से ही इस गोचर के कारण आपको व्यक्तिगत सम्बन्धों में बहुत कठिनाइयों और छल कपट का सामना करना पड़ा है | किन्तु शनि की वक्री चाल के रहते हुए कुछ संघर्षों के बाद परिस्थितियों में सुधार भी हुआ होगा | किसी कोर्ट केस में भी आपको अनुकूल परिणाम प्राप्त हुआ होगा | अब शनि पुनः मार्गी हो गया है | यदि आपने अपने समय और योग्यताओं का उचित रूप से उपयोग नहीं किया तो ऐसा करना आपकी प्रगति में बाधक हो सकता है | प्राणायाम और ध्यान की प्रक्रियाओं के द्वारा अपने आत्मविश्वास को पुनः एकत्र करके उचित दिशा में प्रयास करने का समय है यह | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की भी आवश्यकता है |

सिंह : आपके षष्ठेश और सप्तमेश का गोचर आपके पञ्चम भाव में हुआ है | यह गोचर आपके लिए अनुकूल फल देने वाला नहीं कहा जा सकता | आरम्भ में ही आपने जो ग़लत निर्णय लिए हैं उनका परिणाम आप भोग चुके हैं | इसी बीच वक्री शनि के कारण आपके मनोबल में भी गिरावट आई है और आप स्वयं को एक असमंजस की स्थिति में भी अनुभव कर रहे हैं | यद्यपि शनि अब मार्गी हो चुका है किन्तु फिर भी आपको अधिक मानसिक श्रम करने की आवश्यकता है | Romantically यदि Involve हैं तो वहाँ आपको सोच समझकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है | किन्तु व्यावसायिक क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़कर आपके कार्य में प्रगति का समय प्रतीत होता है |

कन्या : एक ओर आपके लिए पंचमेश और षष्ठेश होकर शनि का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है वहीं दूसरी ओर शनि की ढैया भी चल रही है | गोचर का आरम्भ ही बहुत सी पारिवारिक समस्याओं के साथ हुआ है जिसका विपरीत प्रभाव आपके कार्यक्षेत्र पर भी पड़ा होगा | वक्री होने की स्थिति में आपके लिए बहुत सी समस्याओं में वृद्धि भी हो सकती है | इस अवधि में आपने अपने बहुत से मित्रों के लिए नकारात्मक सोच बना ली है | किसी भी नकारात्मक सोच का प्रभाव आपके अपने स्वास्थ्य और कार्य पर ही विपरीत प्रभाव डालता है | शनि के पुनः मार्गी हो जाने की स्थिति में परिस्थितियों में सुधार की सम्भावना तो है, किन्तु इस समय आपका अधिक ध्यान अपने कार्य की अपेक्षा पारिवारिक समस्याओं के समाधान तथा घर के Renovation की ओर अधिक जाएगा | साथ ही आप इस समय स्वाध्याय में प्रवृत्त हो सकते हैं | सन्तान से सम्बन्धित कोई समस्या भी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकती है |

तुला : आपके लिए योगकारक का गोचर आपके तृतीय भाव में चल रहा है | आरम्भ अनुकूल रहा, किन्तु वक्री होने के बाद सम्भव है पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने में आपका अधिक समय व्यतीत हुआ होगा | किन्तु अब शनि मार्गी हो चुका है अतः आपको चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है | आप इस अवधि में अपना लक्ष्य निर्धारित करके उसके अनुसार आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे और उसमें आपको सफलता भी प्राप्त हो सकती है | सम्भव है अभी तक व्यावसायिक स्तर पर आपको कुछ निराशा का अनुभव हुआ हो, किन्तु अब उत्साहपूर्वक आप कुछ नया कार्य भी आरम्भ कर सकते हैं | यह समय छोटे मोटे लाभ पर ध्यान देने की अपेक्षा कोई बड़ा दूरगामी लक्ष्य निर्धारित करने का है |

वृश्चिक : आपके लिए साढ़ेसाती का अन्तिम पड़ाव चल रहा है जो आपके लिए उतना अधिक अशुभ नहीं है | यद्यपि शनि के धनु राशि में गोचर के बाद से और उसके बाद वक्री होने की स्थिति में परिस्थितियाँ अधिकाँश में विपरीत ही रही होंगी | मानसिक तनाव के कारण आपके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव रहा होगा | किन्तु अब जब शनिदेव मार्गी हो चुके हैं और साढ़ेसाती भी अपने अन्तिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है तो परिस्थितियों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | कार्य में उन्नति और धनप्राप्ति के योग प्रतीत होते हैं | किन्तु परिश्रम अधिक करना पड़ेगा | साथ ही, जिन लोगों के विषय में विगत समय में आपने नकारात्मक सोच बनाई है उसमें भी सुधार होगा और आप पुनः उन लोगों के साथ सम्बन्धों को सुधारने का प्रयास कर सकते हैं | व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों ही स्तरों पर मित्रों तथा सम्बन्धियों के साथ सम्बन्धों में सुधार करना आपके हित में रहेगा | सम्बन्धों में किसी प्रकार की अपेक्षा से हम अपना स्वयं का अनर्थ करते हैं |

धनु : आपकी राशि पर साढ़ेसाती अपने मध्यकाल में चल रही है | शनि आपका द्वितीयेश भी है और तृतीयेश भी | इस गोचर के आरम्भ से ही आपके लिए मानसिक तनाव की स्थितियाँ रही होंगी | किन्तु चुनौतियों के बाद भी अर्थलाभ निरन्तर होता रहा होगा | शनि के वक्री होने की स्थिति में आय से अधिक व्यय की समस्या भी रही होगी | साथ ही आपके स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत प्रभाव ही पड़ा है | अब शनि यद्यपि मार्गी हो चुका है किन्तु अभी जब तक साढ़ेसाती का यह मध्यभाग पूर्ण नहीं हो जाता तब तक आपको सावधानीपूर्वक चलने की आवश्यकता है | आर्थिक दृष्टि से यद्यपि समय उतना प्रतिकूल नहीं प्रतीत होता | समाज में मान सम्मान में वृद्धि की भी सम्भावना है किन्तु भावनात्मक और स्वास्थ्य की दृष्टि से आपको सावधान रहने की आवश्यकता है | किसी भी समस्या के प्रति चिन्तित होकर आप अपने स्वास्थ्य की ही हानि करेंगे | अच्छा यही रहेगा कि अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करें ताकि आपकी सोच सकारात्मक बन सके और आप निष्ठापूर्वक अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रह सकें |

मकर : आपके लिए साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है | साथ ही लग्नेश और द्वितीयेश का बारहवें भाव में गोचर भी उतना अधिक शुभ नहीं कहा जा सकता | आपने इस गोचर के आरम्भ से ही अनावश्यक खर्चों में अधिकता तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का अनुभव किया होगा, जो शनि के वक्री होने से और भी बढ़ गई होंगी | सम्भव है किसी कोर्ट केस का सामना भी इस अवधि में हुआ हो | ननिहाल पक्ष के साथ भी सम्बन्धों में दरार की सम्भावना हो सकती है | अब शनि के मार्गी हो जाने से कुछ सुधार की सम्भावना की जा सकती है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए धनलाभ की सम्भावना की जा सकती है | मानसिक तनाव तो रहेगा किन्तु आप अपनी जीवन शैली में सुधार कर लेंगे तो बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचे रह सकते हैं | आध्यात्मिक तथा धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की भी सम्भावना है | विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपके लिए लग्नेश और द्वादशेश का लाभ स्थान में गोचर अत्यन्त शुभ प्रतीत होता है | वक्री शनि भी आपके लिए अशुभ नहीं प्रतीत होता | आपके लिए कार्य में प्रगति के साथ ही आर्थिक स्थिति में दृढ़ता की सम्भावना भी की जा सकती है | यदि नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही स्थानान्तरण भी सम्भव है | आप किसी व्यावसायिक कार्य से भी विदेश यात्राएँ कर सकते हैं और यों ही सपरिवार भी कहीं घूमने जाने की योजना बना सकते हैं | किन्तु अपने अधिकारियों के साथ तथा पिता अथवा बड़े भाई के साथ किसी प्रकार का विवाद आपके हित में नहीं रहेगा | यदि आपने अपना Temperament सही रखा तो अधिकारियों का, सहकर्मियों का तथा परिवार के लोगों का भी सहयोग आपको प्राप्त होता रह सकता है | आप नया घर अथवा वाहन भी खरीद सकते हैं अथवा प्रॉपर्टी में पैसा Invest भी कर सकते हैं, जिसका भविष्य में आपको लाभ होगा | परिवार में किसी बुज़ुर्ग महिला के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही समय तथा कार्य का उचित रूप से प्रबन्धन करने की आवश्यकता है |

मीन : आपका व्यवसाय अथवा Job यदि विदेश से सम्बन्ध रखती है तो आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु बीच में कुछ समय शनि के वक्री रहने की स्थिति में सम्भव है जीवन में कुछ ऐसा घटित हुआ हो जिसके कारण आप अपने कार्य से भी तथा जीवन से भी निराशा का अनुभव कर रहे हैं | इस अवधि में आपने अपने कार्य के सम्बन्ध में कुछ ग़लत निर्णय ले लिए हैं जिनसे बहुत शीघ्र मुक्ति सम्भव है न हो सके | शनि के मार्गी हो जाने से आपकी सोच में धीरे धीरे सकारात्मकता आणि आरम्भ होगी और आप अधिक एकाग्र होकर अपने जीवन की घटनाओं का अनुशीलन कर सकेंगे | नौकरी में हैं तो आपको अपने अधिकारियों के साथ समझदारी से व्यवहार करने की आवश्यकता है | आपका अपना व्यवसाय है तो उसमें भी बहुत अधिक उत्साह के प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है | कुछ समय शान्त बैठकर परिस्थितियों की निरीक्षण करते हुए अपनी योजनाओं और प्राथमिकताओं का निर्धारण कीजिए |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – ग्रहों की वक्री-मार्गी चाल भी नियत समय पर आती जाती रहती है – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | किन्तु इस सबसे भी प्रमुख बात यह है कि व्यक्ति का अपना कर्म प्रधान होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/09/09/retrograde-direct-saturn/