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शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्र का सिंह में गोचर

शुक्रवार सोलह अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को तैतिल करण और अतिगण्ड योग में रात्रि आठ बजकर चालीस मिनट के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र प्रस्थान होगा | यद्यपि इस दिन सूर्योदय काल में प्रतिपदा तिथि है किन्तु शुक्र के गोचर के समय द्वितीया तिथि रहेगी | शुक्र इस समय अस्त चल रहा है | शिंह राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र 28 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा आठ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ अन्त में नौ सितम्बर को 25:42 (अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर बयालीस मिनट) के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | अपनी इस पूरी यात्रा के दौरान शुक्र अस्त ही रहेगा |

इस बीच पन्द्रह अगस्त को स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के साथ ही परस्पर भाईचारे और सद्भावना के प्रतीक रक्षा बंधन का उल्लासमय पर्व भी है | 18 अगस्त को कजरी तीज, 21 अगस्त को बलराम जयंती, 24 अगस्त को श्री कृष्ण जयंती का पर्व जन्माष्टमी, एक सितम्बर को हरतालिका तीज, दो को गणेश चतुर्थी और तीन सितम्बर को ऋषि पञ्चमी जैसे कुछ विशेष पर्व भी हैं | सभी को इन समस्त पर्वों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ…

मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | सिंह राशि शुक्र की अपनी राशि वृषभ से चतुर्थ भाव और तुला से एकादश भाव बनता है, तथा सिंह राशि के लिए शुक्र तृतीयेश और दशमेश है | इन्हीं समस्त तथ्यों एक आद्धार पर जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | परिवार की महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | हाथ के कारीगरों और सर्जन आदि के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किसी रोग से इस अवधि में मुक्ति प्राप्त हो सकती है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है | महिलाओं को अधिक रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/13/venus-transit-in-leo-2/

शुक्र का सिंह में गोचर

आज आषाढ़ कृष्ण सप्तमी को विष्टि करण और सौभाग्य योग में 26:25 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर पच्चीस मिनट) के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि में प्रस्थान होगा | इस प्रस्थान के समय शुक्र मघा नक्षत्र में होगा | यहाँ पाँच जुलाई को सिंह राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस बीच 17 जुलाई  को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में तथा 29 जुलाई को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में भ्रमण करता हुआ अन्त में एक अगस्त को 12:27 के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है |

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/07/04/venus-transit-in-leo/